Friday, April 29, 2022

आश्रित वाक्य के भेद

 

 

आश्रित वाक्य के भेद

आश्रित वाक्य के भेद – आश्रित वाक्य के तीन भेद होते है –

संज्ञा उपवाक्य – यदि उपवाक्य प्रधान वाक्य के उद्देश्य, कर्म  या पूरक के रूप में संज्ञा के समान आए तो संज्ञा उपवाक्य होता है : जैसे –

मेरे जीवन के लक्ष्य है कि मैंने समाज सेवा करूँ |

इस वाक्य में कि समाज सेवा करूँ प्रधान उपवाक्य कि क्रिया है का उद्देश्य है | अत: यह संज्ञा उपवाक्य है |

सीता ने कहा कि आज मुझे घर जाना है|

संज्ञा उपवाक्य के आरंभ में कि योजक का प्रयोग होता है |

विशेषण उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की किसी संज्ञा, सर्वनाम या संज्ञा पदबंध की विशेषता प्रकट करने वाले उपवाक्य को विशेषण उपवाक्य कहते हैं |  इस प्रकार के उपवाक्यों से पूर्व जो, जिसने, जैसे, जितना आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है | जैसे –

क ) मैंने एक बिलाव देखा जो कुत्ते जितना बड़ा था |       

ख ) जो विद्यार्थी योग्य होते हैं, उन्हें सभी शिक्षक चाहते हैं|

क्रियाविशेषण उपवाक्य- जब आश्रित या गौण उपवाक्य का प्रयोग क्रियाविशेषण की भाँति हो तो वह क्रियाविशेषण उपवाक्य कहलाता है | ऐसे वाक्यों का आरंभ जब भी अथवा जहाँ-जहाँ जैसे शब्दों से होता है ; जैसे –

क ) जब-जब धर्म को खतरा होता है, ईश्वर अवतार लेते हैं | 

ख ) जहाँ –जहाँ प्रधानमंत्री गए, लोगों ने उनका स्वागत किया |

इन  वाक्यों में जब-तब तथा जहाँ- तहाँ से आरंभ होने वाले उपवाक्य  प्रधान उपवाक्य की क्रिया के समय या स्थान की जानकारी दे रहे हैं| अत: ये क्रिया विशेषण उपवाक्य हैं |

क्रिया विशेषण उपवाक्य  पाँच प्रकार के होते हैं |

कालवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य-

ज्यों ही मैं स्टेशन पहुंचा, त्योहीं गाड़ी ने सीटी बजाई |

जब पानी बरस रहा था, तब मैं सो रहा था |

जब- जब मैंने बाहर जाने की तैयारी की, तब-तब घर में कोई न कोई बीमार पढ गया |

रीतिवाचक क्रियाविशेषण –

क)    मैंने वैसे ही किया जैसा आपने बताया था |

ख)   वह उसी प्रकार खेलता है, जैसे उसके कोच सिखाते हैं |

  परिमाणवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य –

क)    जैसे –जैसे आमदनी बढ़ती जाती है, वैसे वैसे महँगाई बढ़ती जाती है |

ख)   तुम जितना पढ़ोगे, उतना ही तुम्हारा लाभ होगा |

  परिणामवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य –

 क)  वह आएगा अवश्य क्योंकि उसको पैसे लेने हैं |

 ख) यदि तुमने परिश्रम किया होता तो सफल हो जाते |

 ) यद्यपि तुम मोटे ताज़े हो तो भी उससे जीत नहीं पाओगे |

 घ ) वह तुम्हारे पास आ रहा है ताकि कल का कार्यक्रम बना सके |

स्थानवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य-

 क) जहाँ तुम पढ़ते थे वहीं मैं भी पढ़ता था |

 ख)जिधर तुम जा रहे हो आगे रास्ता बंद है |

 ग)जहाँ तुम्हारे भाई गए हैं, वहीं तुम भी जाओ|

मिश्र वाक्य और संयुक्त वाक्य में अंतर

संयुक्त वाक्य में मिश्र वाक्य हो सकता है परंतु मिश्र वाक्य में संयुक्त वाक्य नहीं हो सकता |

मिश्र वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य होता है तथा शेष उपवाक्य उसके उपर आश्रित होता हैं, जबकि संयुक्त वाक्य के अंतर्गत जितने भी उपवाक्य होते हैं, वे स्वतंत्र और निराश्रित होते हैं |

जैसे – वह बाज़ार गई और उसने फल खरीदे | (संयुक्त वाक्य )

     उसने कहा कि वह बाज़ार से फल लाएगी | ( मिश्र वाक्य )

मिश्र वाक्य में केवल एक प्रधान उपवाक्य होता है, किन्तु संयुक्त वाक्य में एक से अधिक प्रधान उपवाक्य होते हैं जैसे –

हम मद्रास गए और वहाँ दो सप्ताह रुके |

ऋषि कहते है कि सदा सत्य कि विजय होती है |

 

 

 

 

 

 

 

 

Friday, April 22, 2022

माता का अंचल (शिव पूजन सहाय ) कक्षा 10वीं हिन्दी कृतिका

 

माता का अंचल

शिव पूजन सहाय

कक्षा 10वीं हिन्दी कृतिका भाग 2 

प्रश्न 1) प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है | आपकी समझ में इसकी क्या वजह हो सकती है ?

उत्तर ) पाठ के अनुसार बच्चे का पिता  से अधिक जुड़ाव था | पिता केवल लालन पालन में सहयोग ही नहीं करता बल्कि वो उसका अच्छा दोस्त भी है | उसके अधिकतर खेलों में भाग भी लेता है | बच्चे को विपदा के समय अत्यधिक ममता व स्नेह की आवश्यकता होती है  और वो भोलोनाथ को केवल अपनी माँ की गोद में ही जाकर मिलती है | उसे असली शांति व प्रेम की छाया माँ की गोद में ही मिलती है |

प्रश्न 2) आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है ?

उत्तर ) बच्चे को अपने साथियों के साथ खेलने में गहरा आनंद आता है | उसे अपने मित्रों  के साथ तरह तरह के खेल खेलना अच्छा लगता है | वे उसके हर खेल व हुड़दंग के साथी होते है | अपने मित्रों को शोर मचाते, शरारतें करते और खेलते देखकर सब कुछ भूल जाता है | इसलिए रोना भूल कर वह दोबारा मित्र मंडली में खेल का मज़ा उठाने लगता है | उसी मग्नावस्था में वह सिसकना भी भूल जाता है |

प्रश्न 3) भोलानाथ और उसके साथियों के खेलने की सामाग्री आपके खेल और खेलने की सामाग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है ?

उत्तर ) भोलानाथ व उसके साथी खेल के लिए आँगन व खेतों पर पड़ी चीजों को ही खेल का आधार बनाते है | भोलानाथ के समय के बच्चों के खेलों की सामाग्री और साधन भी अलग थे ; उनके लिए मिट्टी के बर्तन, पत्थर, पेड़ों की पत्तियाँ, गीली मिट्टी, घर के सामान आदि वस्तुएँ होती थीं जिनसे खेलते हुए वे बहुत खुश होते थे | लेकिन आज जमाना बदल चुका है | आजकल माता पिता अपने बच्चों का बहुत ध्यान रखते हैं | वे बच्चों को ऐसे- वैसे घूमने की इजाजत नहीं देते है | भोलानाथ व उसके साथियों के खेल की सामाग्री आसानी से व बिना मूल्य के मिल जाती थी | परंतु आज खेल सामग्री बाज़ार से खरीदनी पड़ती है | आज के बच्चे क्रिकेट, साइकिल चलाने, दौड़ने कार्टून बनाने, तैरने, लूडो आदि खेल खेलने में आनंद लेते हैं |

प्रश्न 4) पाठ में आए प्रसंगों वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?

उत्तर ) पाठ में ऐसे कई प्रसंग आए हैं जिन्होंने मेरे दिल को छू लिया-

     1 ) रामायण पाठ कर रहे अपने पिता के पास बैठे हुए भोलानाथ का आईने में निहारकर खुश होना और जब उसके पिता जी उसे देखते हैं तो शर्माकर उसका आईना रख देने की अदा बड़ी प्यारी लगती है |

     2 ) बच्चे का अपने पिता के साथ कुश्ती लड़ना, कमजोर होकर बच्चे के बल को बढ़ावा देना फिर पछाड़ खाकर गिर जाना | बच्चे का अपने पिता की मूंछ खींचना आदि बड़े ही सुंदर प्रसंग है |

     3 ) बच्चों द्वारा बारात  का स्वांग रचते हुए समधि का बकरे पर सवार होना, दुल्हन को लिवा लाना व दुल्हन का पिता द्वारा घूँघट उठाने पर बच्चे का भाग जाना |

    4 ) कहानी के अंत में भोलानाथ का साँप को देखकर माँ के आंचल में छिप जाना, माँ की चिंता, हल्दी लगाना और बाबू जी के बुलाने पर भी माँ की गोद न छोड़ना – बड़े ही मन को छूने वाले दृश्य है |

प्रश्न 5) इस उपन्यास के अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है | आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं ?

उत्तर ) तीस दशक की ग्राम्य संस्कृति और आज की ग्राम्य संस्कृति में पर्याप्त अंतर दिखाई देता है | आज कुओं से पानी भरना व कुओं से खेतों की सिंचाई का प्रचलन समाप्त हो गया |  गाँवों में पीने के लिए पानी की वाटर सप्लाई हो गई है | पहले वृक्षों के झुरमट से घिरे कच्चे मिट्टी के घर हुआ करते थे | आज ज्यादातर गाँवों में पक्की मिट्टी के मकान है |  पहले गाँवों में भरे पूरे परिवार होते थे लेकिन आज एकल संस्कृति ने जन्म ले लिया है | विज्ञान के प्रभाव के बढने से लालटेन के स्थान पर बिजली, बैल के स्थान पर ट्रैक्टर का प्रयोग, घरेलू  खाद के स्थान पर कृत्रिम खाद का प्रयोग तथा विदेशी दवाइयों का प्रयोग हो रहा है | आज मनोरंजन के साधन भी बदल चुके है | आपसी भाईचारा व मेल-मिलाप भी कम होने लगा है | ग्रामीण अंचल की मौज मस्ती भरे जीवन के स्थान पर व्यस्त एवं तेज़ रफ्तार वाला जीवन देखा जाता है |

प्रश्न 6) यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखो |

उत्तर) प्रस्तुत पाठ में आदि से अंत तक मटा- पिता का बच्चों के प्रति वात्सल्य भाव का ही उद्घाटन हुआ है | यह व्यक्त करना ही पाठ का प्रमुख लक्ष्य है | इसमें लेखक ने अपने शैशव काल का वर्णन है | भोलानाथ के पिता का दिन का आरंभ ही भोलानाथ के साथ शुरू होता है | उसे नहलाकर पूजा पाठ करना, उसको अपने साथ घूमाने ले जाना, उसके साथ खेलना  व बालसुलभ क्रीडा से प्रसन्न होना आदि उनके स्नेह व प्रेम को व्यक्त करता है | पिता जी के द्वारा कंधे पर बिठाकर गंगा के किनारे ले जाना | उसके साथ कुश्ती करना बच्चों को खुश रखने के लिए खेल में हार जाना | साँप को देखने से डर जाने पर माँ द्वारा अंचल में छुपा लेना आदि में वात्सल्य भाव का वर्णन हुआ है |

प्रश्न 7) माता  का अंचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए |

उत्तर ) इस पाठ में पिता और पुत्र के सम्बन्धों का उल्लेख किया गया है | पाठ के अंत में केवल एक घटना में बच्चे सर्प को देखकर डर जाते है | तथा लेखक माँ से अलग होने का नाम नहीं लेता है |वह माँ के अंचल में छिप जाता है | यह बात पूरी कल्पना सी लगती है | क्योंकि  बच्चा दिन-रात पिता  के साथ घुला मिला रहता है | उसका अधिकांश समय पिता के साथ बीतता है |  इस पाठ का यह शीर्षक उपयुक्त नहीं है |क्योंकि यह पाठ के अंतिम भाग में लागू होता है |इस पाठ का शीर्षक मेरा बचपन अथवा शैशवकाल हो सकता है |

प्रश्न 8) बच्चे अपने माता –पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते है ?

उत्तर ) बच्चे अपने माता-पिता के साथ रहते हुए, माता पिता की बताई अच्छी बातों पर अमल करके, उनके साथ खेलकर, उनकी आज्ञा का पालन करके, उनकी गोद में बैठकर आदि बातों से अपने प्रेम को उनके प्रति व्यक्त करते है | माता पिता से किसी वस्तु के लिए जिद करके कुछ मांगते है और मिल जाने पर उनको विभिन्न तरह से प्यार करते है |

प्रश्न 9) प्रस्तुत पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है | वह आपके बचपन की दुनिया से किस प्रकार भिन्न है ?

उत्तर ) प्रस्तुत पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है | वह पूर्णतया ग्रामीण पर आधारित है | प्रस्तुत कहानी तीस के दशक की है | उस समय बच्चों के पास खेले कूदने के लिए अधिक समय हुआ करता था | उन पर पढ़ाई करने का दबाव इतना नहीं होता था जितना आज है | उनके पास खेलने के साधन भी नहीं होते थे | आज तीन वर्ष उम्र होते ही बच्चों को नर्सरी में करा दिया जाता है | आज के बच्चे विडियो गेम, टी0 वी0 , कंप्यूटर, शतरंज आदि खेलने में लगे रहते है | या फिर क्रिकेट, हॉकी बेडमिंटन आदि में ही अपना समय बिता देते है |

प्रश्न 1) मरदुए क्या जाने कि बच्चों को कैसे खिलना चाहिए इस पंक्ति में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए|

उत्तर ) प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से  पुरुष वर्ग पर करारा व्यंग्य किया है | यह वाक्य लेखक की माता ने उनके पिता से कहा था | यह पूर्ण सत्य है की नारी में पुरुष की अपेक्षा ममता का भाव अधिक होता है | एक बच्चे को जो प्यार दुलार नारी से माता के रूप में मिलता है वह पिता के रूप में पुरुष से नहीं मिलता है |  माँ बच्चे के मनोभावों को शीघ्र समझ जाती है | माँ बच्चे से भावनात्मक रूप से जुड़ी होती है |

प्रश्न 2) बचपन में बच्चे सरल निर्दोष और मस्त होते हैं – पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए|

उत्तर ) बच्चे बचपन में अपने सरल सहज स्वभाव के कारण मन के भावों को आसानी सरल वाणी में कह दे देते  है | वे नहीं चाहते कि उनके खेलों में बड़े भी सम्मिलित हों | इसलिए जब भी लेखक के पिता ने उन्हें खेलते हुए देखा और उनके करीब चले गए, तो बच्चे अपना खेल अधूरा छोडकर भाग गए |

प्रश्न 3) माता का अंचल पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) लेखक की बाल्यावस्था का बड़ा ही आकर्षण रूप में चित्रण किया है | लेखक ने बताया है कि बचपन में उसे अपने माता-पिता का भरपूर सहयोग मिलता है | बचपन में बहुत ही भोलापन होता है इसका साक्षात रूप पाठ में देखने को मिलता है | बच्चे अपने खेल में तल्लीन होकर खेलते है | वहाँ किसी प्रकार का भेदभाव जलन व घृणा नहीं होता | बच्चों की दुनिया का सजीव चित्रण अंकित करना लेखक का प्रमुख लक्ष्य होता है |

प्रश्न 4) बूढ़े दूल्हे पर की गई टिप्पणी के माध्यम से लेखक ने क्या संदेश दिया है ?

उत्तर) प्रस्तुत पाठ में लेखक ने बूढ़े दूल्हे  के माध्यम से व्यंग्यात्मक टिपण्णी की है | लेखक ने यहाँ सलाह दी है कि बुढ़ापा में विवाह नहीं करना चाहिए | हर कार्य समय पर ही अच्छा लगता है | बुढ़ापे में दूल्हा बनना सामाजिक व नैतिक दृष्टि से उचित नहीं है |लेखक का यहाँ संदेश है कि वृद्ध विवाह नहीं होना चाहिए |

 

Monday, April 18, 2022

राम लक्ष्मण परशुराम संवाद तुलसी दास कक्षा 10वीं क्षितिज भाग 2

 

राम लक्ष्मण परशुराम संवाद

तुलसी दास 

कक्षा 10वीं क्षितिज भाग 2

प्रश्न 1 )  परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए ?

उत्तर) लक्ष्मण ने तर्क देते हुए कहा कि हमने बचपन में ऐसे अनेक धनुष तोड़े हैं | इसी धनुष को तोड़ने पर आपको क्रोध क्यों आया | इस धनुष पर आपकी इतनी ममता क्यों है ? हमारी दृष्टि में तो सभी धनुष समान हैं फिर इस धनुष के टूटने पर आपने इतना क्रोध क्यों व्यक्त किया ? यह धनुष तो अत्यधिक पुराना था जोकि श्री राम के छू जाने पर ही टूट गया |  इसमें श्री राम का कोई  दोष नहीं है |

प्रश्न 2 ) परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए |

उत्तर ) श्री राम स्वभाव से अत्यंत शांत एवं गंभीर हैं | धनुष के टूट जाने पर उन्होंने कहा कि धनुष को तोड़ने वाले कोई आप का ही दास  होगा | इतना ही नहीं, श्री राम ने मधुर वाणी में लक्ष्मण को चुप रहने को भी कहा और परशुराम जी का क्रोध शांत किया | दूसरी ओर लक्ष्मण उग्र स्वभाव के थे | उन्होंने कटु वचनो के द्वारों परशुराम जी का क्रोध ओर बड़ा दिया |परशुराम जी की धमकियों और डींगे हाँकने पर करारा व्यंग्य किया | लक्ष्मण ने कटु वचन बोलकर अपने उग्र रूप का और श्री राम ने मधुर वाणी बोलकर उदार व शांत स्वभाव का परिचय दिया |

प्रश्न 3 ) लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको अच्छा लगे उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखो ?

उत्तर ) लक्ष्मण ने मुस्कराते हुए कहा, मुनियों में श्रेष्ठ परशुराम जी ! क्या आप अपने आपको बहुत बहादुर समझते हों ? आप बार- बार कुल्हाड़ा दिखाकर मुझे डरा देना चाहते हों | आप अपनी फूँक से पहाड़ को उड़ा देना चाहते हों | परशुराम गुस्से में भरकर कहते हैं , हे मूर्ख बालक, मैं तुम्हें बच्चा समझकर छोड़ रहा हूँ अन्यथा अब तक का .......|

प्रश्न 4 ) परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पदयांश के आधार पर लिखिए|

बाल ब्रह्मचारी अति कोही | बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही  ||

भुजबल भूमी भूप बिनु कीन्ही | बिपुल बार महीदेवन्ह दिन्ही ||

सहसबाहुभुज छेदनिहारा | परसु बिलोकु महीपकुमारा ||

मातु पितही जनि सोचबस करसि महिसकिसोर

गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर ||

उत्तर ) परशुराम ने अपने विषय में कहा, “ मैं बाल ब्रह्मचारी हूँ | स्वभाव से बहुर क्रोधी हूँ | सारा संसार जानता है कि मैं क्षत्रियों के कुल का शत्रु हूँ | अपनी भुजाओं के बल के द्वारा मैंने पृथ्वी को कई बार राजा विहीन कर दिया और उसे ब्राह्मणों को दान में दे दिया |मेरा यह फरसा बहुत भयानक है | इसने सहस्रभाहु जैसे राजाओं को भी नष्ट कर दिया | हे राजकुमार ! इस फरसे को देखकर गर्भवती स्त्रियों के गर्भ गिर जाते हैं |

प्रश्न 5 ) लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताई ?

उत्तर ) लक्ष्मण ने वीर योद्धा की विशेषताएँ बताते हुए कहा कि वीर योद्धा रणभूमि में  ही वीरता दिखाता है, अपना गुणगाण नहीं करता फिरता है | कायर ही अपनी शक्ति की डींगे हाँकते हैं |

प्रश्न 6 ) साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है |  इस कथन पर अपने विचार लिखिए |

उत्तर ) विनम्रता हमेशा वीर लोगों को ही शोभा देती हैं | कमजोर और कायर व्यक्ति का विनम्र होना उसका गुण नहीं हैं अपितु मजबूरी है | शक्ति को प्राप्त करके भी जो लोग अहंकारी न बनकर धैर्यवान बने रहते हैं और दूसरों को मार्ग से विचलित नहीं होने देते हैं संसार में ऐसे लोग ही आदर पाते है | विनम्र व्यक्ति दूसरों के दुख को अनुभव कर सकता है और उनकी सहायता के लिए आगे आता है | भगवान विष्णु को जब भृगुऋषि ने लात मारी थी तब शक्ति के बावजूद उदारता का परिचय देते हुए उन्हें क्षमा कर दिया था |

प्रश्न 7 ) भाव स्पष्ट कीजिए |

क)   बिहसि लखनु बोले मृदु बानी | अहो मुनिस महाभट मानी ||

पुनि –पुनि मोहि देखाव कुठारू| चहत उड़ावन फूँकि पहारू||

ख)   इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं | जे तरजनी देखि मरि जाहीं||

देखि कुठारू सरासन बाना | मैं कछु कहा सहित अभिमाना ||

   ग ) गाधिसुनू कह हृदय हसि मुनिही हरियरे सूझ |

   अयमय खांड न उखमय अजहूं न बुझ अबूझ ||

उत्तर  क) इस पद में लेखक ने बताया है कि लक्ष्मण परशुराम के  वचनों को सुनकर व्यंग्य कर रहा है जिससे परशुराम का क्रोध  बढ़ रहा है | लक्ष्मण ने परशुराम को बड़ा योद्धा कहकर और फूँक मारकर पहाड़ उड़ा देने की बात कहकर उन पर तीखा व्यंग्य किया है |लक्ष्मण जी का कहना है कि गरज गरजकर अपनी वीरता का बखान करना व्यर्थ है | इससे कोई व्यक्ति वीर नहीं बन जाता | वीरता का बखान न करने की बजाए उन्हें कुछ करके दिखाना चाहिए |

उत्तर ख ) इस पद में लक्ष्मण ने परशुराम की वेश –भूषा पर व्यंग्य किया है | वे ब्राह्मण होते हुए भी ब्राह्मण के वेश में नहीं थे | लक्ष्मण ने  ऐसा इसलिए कहा कि हे मुनि जी यदि आप योद्धा है तो हम भी कोई छुई- मुई नहीं है जो तर्जनी देखते ही मुरझा जाएँगे | कहने का भाव है कि लक्ष्मण भी योद्धा है | धनुष बान और कंधे पर कुल्हाड़ा देखकर ही आपको योद्धा समझकर मैंने अभिमान भरी बातें कह दीं | यदि मुझे पता होता कि आप मुनि – ज्ञानी हैं तो में ऐसा कदापि न करता |

उत्तर ग ) इन पंक्तियों में विश्वामित्र ने परशुराम की अभिमानपूर्वक प्रकट की जाने वाली बातों को सुनकर उन  पर व्यंग्य करते हुए ये शब्द कहे है कि मुनि जी को सब  जगह हरा ही हरा लग रहा है | वे सदा साधारण मनुष्यों से युद्ध करके विजय प्राप्त करते रहे है | इसलिए उन्हें लगता था कि वे श्री राम और लक्ष्मण को भी अन्य क्षत्रियों कि भांति आसानी से हरा देंगे किन्तु ये साधारण क्षत्रिय नहीं हैं | ये गन्ने की खांड के समान नहीं थे, अपितु लोहे की  बनी तलवार के समान थे | इस समय परशुराम की स्थिति सावन के अंधे की भांति हों गई है | मुनि बेसमझ बनकर इनके प्रभाव को नहीं  समझ पा रहे है |

प्रश्न 8 )पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौन्दर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए |

उत्तर ) तुलसीदास रस सिद्ध कवि है | तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस अवधि भाषा में है | यह काव्यांश रामचरितमानस के बालकांड से ली गई  है | इसमें दोहा, चौपाई व छंदों का सुंदर प्रयोग हुआ है | जिसके कारण काव्य के सौन्दर्य और आनंद में वृद्धि हुई है | भाषा में लयबद्धता बनी हुई है | भाषा को कोमल बनाने के लिए कठोर भाषा के स्थान पर कोमल ध्वनियों का प्रयोग हुआ है | इनकी भाषा में अनुप्रास अलंकार, रूपक अलंकार, उत्प्रेक्षा अलंकार व पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार का प्रयोग हुआ है | इस काव्यांश की भाषा व्यंग्यात्मक का सुंदर संयोजन हुआ है |

प्रश्न 9 ) इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा संयोजन हुआ है | उदारहण के साथ स्पष्ट कीजिए|

उत्तर ) तुलसीदास द्वारा रचित परशुराम-संवाद मूल रूप से व्यंग्य काव्य है | उदारहण के लिए –

1)  बहु धनुही तोरी लरिकाई |

कबहूँ न असि रिस किन्ही गोसाईं||

     लक्ष्मण जी परशुराम जी से धनुष के टूटने पर व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि हमने बालपन में ऐसे अनेक धनुष तोड़े हैं तब हम पर किसी ने क्रोध नहीं किया |

2 )मातु पितहि जनि सोचबस करसी महिसकिसोर |

    गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर ||

उत्तर ) लक्ष्मण से कहते है कि हे राजा के बालक ! तू अपने माता -पिता को सोचने  के लिए विवश मत कर | मेरा फरसा बड़ा भयानक है , यह गर्भ के बच्चों का भी नाश कर देता है |

3 )  एक स्थान पर लक्ष्मण जी परशुराम की वेषभूषा पर व्यंग्य करते हुए कहते है कि आपने तो धनुष-बाण व्यर्थ ही धारण कर रखे है क्योंकि आपका तो एक-एक शब्द करोड़ों वज्रों के समान है | लक्ष्मण  जी व्यंग्य करते हुए कहते है कि आपके यश का वर्णन आपके रहते कौन कर सकता है ?शूरवीर तो युद्ध क्षेत्र में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते है तथा  कायर ही  अपनी शक्ति का बखान  करते है |

प्रश्न 10 ) निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए |

क)   बालकु बोलि बधौं नहि तोहि |

उत्तर ) इस पंक्ति में ब वर्ण की आवर्ति के कारण अनुप्रास अलंकार है |

ख)   कोटी कुलिस सम बचनु तुम्हारा |

उत्तर ) इस पंक्ति में परशुराम के वचनों की तुलना कठोर वज्र से की गई है | अत: इसमें उपमा अलंकार है |

ग ) तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा |

    बार-बार मोहि लागि बोलावा ||

उत्तर ) इस पंक्ति में उत्प्रेक्षा एवं पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है |

  घ ) लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु |

      बढ़त देखि जल समवचन बोले रघुकुलभानु ||

  उत्तर ) “लखन उतर ...... कृसानु” में रूपक अलंकार है तथा बढ़त देखि ..... रघुकुलभानु में उपमा अलंकार है |

अन्य प्रश्न

प्रश्न ) इस कवितांश के आधार पर लक्ष्मण द्वारा परशुराम के प्रति किए गए व्यवहार पर प्रकाश डालिए |

उत्तर ) लक्ष्मण उग्र और तेज़ स्वभाव के व्यक्ति है | वे भरी सभा में परशुराम द्वारा की गई चुनौती व धमकी से दुखी हो जाते है इसी कारण परशुराम का उत्तर उसी लहजे में देते है | वे परशुराम के आत्मप्रशंसा पर करारा व्यंग्य करते है जिससे परशुराम का क्रोध बढ़ जाता है | लेकिन जब स्थिति अतिक्रमण कर जाती है तो सभा में उपस्थित लोग लक्ष्मण के व्यवहार को अनुचित ठहराते है | परशुराम उनके पिता के समान थे | इसलिए परशुराम के लिए नृपद्रोही जैसे  शब्दों का  प्रयोग करना उचित नहीं था |

प्रश्न ) परशुराम ने लक्ष्मण  को वध करने योग्य क्यों कहा था ?

उत्तर ) लक्ष्मण ने  परशुराम जी का मज़ाक उड़ाया था |  लक्ष्मण क्षत्रिय राजकुमार होने के कारण भी वध योग्य थे | क्योंकि परशुराम क्षत्रियों के द्रोही थे |  परशुराम अत्यंत क्रोधी स्वभाव के थे | लक्ष्मण को उन्होंने मंद बुद्धि बालक कहा जिसे अपने माता-पिता की चिंता का भी भय नहीं हैं |

प्रश्न) कहेऊ लखन मुनि सीलु तुम्हारा को नहीं जान विदित संसारा इस पंक्ति में  निहित व्यंग्य पर प्रकाश डालिए |

उत्तर ) इस पंक्ति में परशुराम के शील व स्वभाव पर व्यंग्य किया गया है | इसमें  व्यंग्य किया गया है कि परशुराम अपने क्रोधी स्वभाव के  लिए सारे संसार पर में  प्रसिद्ध हैं जिसे लक्ष्मण ने सहज और स्वाभाविक बताकर व्यंग्य किया है | इस पंक्ति का वास्तविक अर्थ है कि परशुराम महान क्रोधी स्वभाव वाले व्यक्ति है | इस बात को सारा संसार जानता है |

प्रश्न) श्री राम के द्वारा परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए क्या कार्य किया गया ?

उत्तर ) श्री राम अच्छी तरह जानते थे कि परशुराम क्रोधी होने के साथ अहंकारी भी थे | इसलिए क्रोधी परशुराम के सामने अत्यंत विनम्र स्वर में कहा कि शिव धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई दास ही होगा | यदि आप आज्ञा देना चाहते हो तो उन्हें आदेश करें | श्री राम जी ने अत्यंत मीठी वाणी का प्रयोग कर उनके क्रोध को  शांत करने का प्रयास किया |

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...