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Saturday, May 29, 2021

प्रात:कालीन सैर

 

प्रात:कालीन सैर

भूमिका:विद्वानों ने कहा है –जल्दी सो जाना और जल्दी उठना मनुष्य को स्वस्थ्य ,संपन्न और बुद्धिमान बनाता है |’प्रात: काल शीघ्र उठने वाले व्यक्ति कभी आलसी नहीं हो सकते |भारतीय संस्कृति में प्रात: काल को ब्रह्ममुहूर्त कहा जाता हैं |यह बेला अत्यंत पवित्र मानी जाती है |

प्रात:काल का सुहावना मौसम : प्रात:काल का मौसम अत्यंत सुहावना होता है |चारों ओर शीतलमंद – सुगंधित पवन चलती हैं |प्रात:काल का समय सबसे शांत ,पवित्र तथा सौंदर्यमय होता है | घास पर पड़ी ओस की बूँदें मोतियों का-सा भ्रम उत्पन्न करती हैं | सूर्योदय से पूर्व आकाश का रंग लाल होता है ,पक्षियों की चहचहाहट बहुत अच्छी लगती है |खिली हुई कलियाँ सबको अपनी ओर आकर्षित करती हैं |ऐसा मौसम सैर  के लिए सर्वोत्तम होता है |

प्रात:कालीन सैर के लाभ : प्रात:काल का समय सैर के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है | इस समय सैर करने वाला सदा निरोगी रहता है क्योंकि उस समय वायु मे ऑक्सीजन की मात्र सबसे अधिक होती है |शुद्ध वायु में श्वास लेने से अनेक प्रकार के रोग नष्ट हो जाते हैं |प्रात:काल की स्वच्थ वायु तथा स्वच्छ वातावरण ईश्वर द्वारा मनुष्य को दिया गया नि:शुल्क उपहार है | प्रात:कालीन की सैर से व्यक्ति दिन भर चुस्त और फुर्तीला रहता है | आलस उससे कोसो दूर भागता है |इससे सांस, मधुमेह, रक्तचाप, बदहज़मी, अनिद्रा,  मोटापा जैसे अनेक रोग बिना औषधि के दूर हो जाते हैं |इसलिए अनेक चिकित्सक स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रात:कालीन सैर की सलाह देते हैं | यह हर आयुवर्ग के व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयोगी है | आजकल जिस प्रकार प्रदूषण के कारण रोग बढ़ते जा रहे है, उनसे बचने के लिए प्रात : कालीन सैर एक रामबाण औषधि है | विद्यार्थियों के लिए तो प्रात:कालीन सैर ओर भी आवश्यक है | इससे से विद्यार्थियों का मस्तिषक ताज़ा हो जाता है , नेत्रों की ज्योति ठीक रहती है तथा स्मरण शक्ति बढ़ जाती है |

निष्कर्ष : गांधी जी ने कहा है –“ मैं प्रात:भ्रमण के कारण सदा स्वस्थ रहा और अपने दैनिक कार्यों को स्फूर्ति के साथ करता रहा |”अत: प्रत्येक विद्यार्थी को चाहिए कि नियमित रूप से प्रात:काल में सैर करे तथा खुली वायु में थोड़ा व्यायाम भी करे |

Friday, May 21, 2021

कोरोना महामारी -निबंध

कोरोना महामारी

प्रस्तावना : हमारे पर्यावरण में अनेक प्रकार के जीव-जन्तु रहते हैं | इनमें से कुछ जीव एक कोशीय होते है | इन्हें नंगी आँखों से देख पाना असंभव है | इनमें कुछ एक कोशीय जीव मानव के लिए लाभदायक तो कुछ हानिकारक होते हैं | कोरोना नामक विषाणु (वायरस ) भी एक ऐसा ही हानिकारक एक कोशीय जीव है |

1.       कोरोना का मानव शरीर में प्रवेश :वर्ष 2019 के मध्य तक यही माना जाता था कि कोरोना वायरस केवल चमगादड़ के शरीर में पाया जाता है |परंतु चीन के वूहान शहर में एक अज्ञात बीमारी से जब लोग बीमार पड़ने लगे और उनकी जांच की गई ,तब उन लोगो शरीर में कोरोना वायरूस पाया गया | मानुषे के शरीर में कोरोन कैसे पहुंचा –इस संबंध में चीन की सरकार कहना है कि वह सी – फूड मार्किट ( ऐसा बाज़ार जहां समुंद्री जीवों को भोजन के रूप में खरीद – बेचा जाता है ) से आया है जबकि अमेरिका जैसे देशों का कहना है कि चीन की सरकार ने वूहान की एक प्रयोगशाला में इस वायरस को चमगादड़ से प्राप्त किया , उसमें बदलाव किया और पूरे विश्व में जैविक हथियार की तरह फैला दिया |

2.       कोरोना –महामारी : मार्च 2020 तक कोरोना वायरस विश्व के अधिकतर देशों के लोगों को संक्रमित कर चुका था | और हज़ार लोगों की जान ले चुका था | अतः विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे महामारी के रूप में घोषित कर दिया और इस कोरोना महामारी का नाम कोवायड-19 ( covid-19 ) रखा | इस नाम में को co शब्द कोरोना ले लिए , वाय शब्द विषाणु के लिए डी शब्द बीमारी (डीजिज ) तथा 19  अंक वर्ष 2019 के लिए है |

3.       लक्षण : कोरोना से पीड़ित व्यक्ति में 14 दिनों में इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं | इससे संक्रमित व्यक्ति को सबसे पहले बुखार होता है| उसके बाद सुखी खांसी , जुकाम जैसा प्रतीत होता है |तथा बाद में सांस लेने में कठिनाई होती है |

4.       फैलाव : यह बीमारी बड़ी तेज़ी से फैल रही है | संक्रमित व्यक्ति के छिंकने व खांसने से उसके साँस के साथ जल के छोटे कणों में उपस्थित यह वायरस किसी भी ठोस वस्तु, व्यक्ति तक पहुँच सकता है | संक्रमित व्यक्ति को छूने से यह दूसरे व्यक्ति के हाथ तक और संक्रमित व्यक्ति द्वारा उसी हाथ से नाक, मुँह आदि को छूने पर उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है |

5.       बचने के उपाय : अनेक देशों ने इस महामारी से बचने व इसकी रोकथाम के लिए लॉकडाउन जैसी व्यवस्था सबसे पहले अपनाई परंतु यह व्यवस्था अधिक प्रभावशाली नहीं रही | जब तक कि इस बीमारी की प्रभावी दावा / वैक्सीन नहीं बन जाती है , तब तक इसे फैलने से रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संघठन व भारत सरकार ने निम्नलिखित उपाय अपनाने पर बल दिया है –

·            घर से बाहर तभी निकले , जब बहुत आवश्यक हो |

·          घर से बाहर निकलते समय मुँह व नाक पर मास्क , रुमाल या  गमछे से ढके हुए हों |

·          दो गज की सामाजिक दूरी बनाए रखें | भीड़-भाड़ वाली जगह से बचें |

·         थोड़ी थोड़ी देर में साबुन से 30 सैकिन्ड तक हाथ धोएँ | या फिर विषाणु नाशक सैनेटाइज़र  का प्रयोग करें | रोग प्रतिरोधक क्षमता तक बढाने के लिए फल आदि का प्रयोग करें |

·         संक्रमित होने की संभावना होने पर तुरंत अपनी जाँच करवाएँ तथा संक्रमित व्यक्ति से पर्याप्त सावधानी बरतें |

6.       उपसंहार : हालांकि अभी तक इस बीमारी की कोई दवाई नहीं  बनाई जा सकी  है पर अब  वैक्सीन बन  गई  है | सरकार द्वारा स्थापित किए गए टीकाकरण केंद्र पर जाकर हम कोरोना बीमारी से बचने का  टीका लगवा सकते है | इस महामारी के कारण अब तक लगभग लाखों लोगो की मृत्यु हो चुकी है | मार्च 2020 से भी विद्यालय , महाविद्यालय , होटल, दुकानें  आदि बंद पड़े है | इस महामारी ने विश्व की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया है और लोगों के जीवन में उथल-पुथल मचा दी है | अतः हम सभी का यह प्रयास होना चाहिए कि हम सरकार द्वारा जारी दिशा – निर्देशों का हर समय पालन करें | तभी हम अपने आपको और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं |

 

  


Thursday, May 20, 2021

प्रदूषण एक समस्या - निबंध

 

 

प्रदूषण एक समस्या

भूमिका : आज के युग को विज्ञान का युग कहा जाता है | विज्ञान ने आज मनुष्य को अनेक प्रकार के उपहारों और शक्तियों से उपकृत किया है |इनके बल पर मानव जल,थल, नभ का स्वामी बन बैठा है | विज्ञान ने जहां मनुष्य को अनेक प्रकार की सुविधाएं प्रदान की हैं, दूसरी ओर वहीं अनेक समस्याओं को भी जन्म दिया है | प्रदूषण की समस्या भी ऐसी ही समस्या है |

अर्थ : वायु, जल , मिट्टी, पेड़-पौधे आदि पर्यावरण की रचना करते हैं | इन सब पदार्थों का निश्चित संतुलन होता है | जब यह संतुलन बिगड़ जाता है, तो प्रदूषण का जन्म होता है | प्रदूषण दो शब्दों के योग से बना है – प्र + दूषण | जिसका अर्थ है – वातावरण का दूषित हो जाना |

प्रकार : प्रदूषण मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है – वायु प्रदूषण ,जल प्रदूषण ,ध्वनि प्रदूषण और भूमि प्रदूषण |उद्योग –धंधों तथा सड़क पर चलने वाले वाहनों से निकलने वाले धुएँ के कारण वायु प्रदूषण का जन्म होता है |जब कारखानों से निकालने वाले अपशिष्ट पदार्थ जल में बहा दिया जाता है तो जल प्रदूषित हो जाता है | मशीनों ,वाहनों आदि के शोर के कारण ध्वनि प्रदूषण होता है | भूमि प्रदूषण का अन्य कारण है-रासायनिक पदार्थों तथा कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग |

कारण : आजकल वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण भी प्रदूषण बढ़ता जा रहा है |जनसंख्या की अधिकता के लिए भूमि की कमी को पूरा करने के लिए तथा उद्योग –धंधो के लिए भूमि उपलब्ध  करने के लिए ,वनों को काटना  अनिवार्य हो गया है  जिससे  वातावरण में प्रदूषण बढ़ गया है  क्योंकि वृक्ष हमें शुद्ध वायु प्रदान करते हैं |

परिणाम : प्रदूषण के भयंकर दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं |अनेक प्रकार के रोग बढ़ते जा रहे हैं ,साँस ,गले ,कान फेफडों ,त्वचा संबंधी रोगों में निंरतर वृद्धि होती जा रही है |जल प्रदूषण के कारण पेट के अनेक रोग बढ़ गए हैं तथा ध्वनि प्रदूषण से उच्च रक्तचाप ,मानसिक तनाव आदि बढ़ रहे हैं |आज वायु इतनी प्रदूषित हो गई है कि  साँस लेने के लिए शुद्ध वायु का भी अभाव हो गया है |    

प्रदूषण दूर करने के उपाय : :यद्यपि प्रदूषण की समस्या विश्वव्यापी है तथा इसे रोकना  मनुष्य के हाथ में नहीं है तथापि वृक्षों की कटाई पर नियंत्रण करके ,औद्योगिक प्रतिष्ठानों को नगरों से दूर स्थापित करके ,अधिक वृक्ष लगाकर इस समस्या पर कुछ नियंत्रण लगाया जा सकता है |  

 

समाचार –पत्रों के लाभ- निबंध

 

 

समाचार –पत्रों के  लाभ

मानव एक सामाजिक प्राणी है |सामाजिक प्रवृत्ति के कारण ही वह चाहता है कि अपने विचार लोगों तक पहुंचाए तथा दूसरों के विचारों को जाने | वह लोगों के  सुख –दुख में भी बँटाना चाहता है |व्यक्तिगत संतुष्टि के बाद वह समाज से संबंध बनाकर रखना चाहता है |उसकी इस इच्छा की पूर्ति समाचार –पत्र आज करता है समाचार –पत्रों के माध्यम से वह अपना संबंध पूरे विश्व के साथ जोड़ लेता है यही कारण है कि समाचार –पत्र आज मानव के जीवन का एक महत्त्वपूर्ण अंग बन गए हैं |

समाचार –पत्रों के माध्यम से हमें विश्व में घटित होने वाली घटनाओं की जानकारी मिलती है |विदेशो में अर्धरात्रि को घटित होने वाली घटना की सूचना हमें प्रात:काल के समाचार पत्रों में पढ़ने को मिल जाती है |समाज में पलने वाली कुरीतियों का भांडा भी समाचार –पत्रों के माध्यम से फूटता है| दहेज प्रथा ,बाल –विवाह आदि कई कुप्रथाओं को समाज से हटाने का श्रेय कुछ –कुछ समाचार पत्रों को प्राप्त है |

समाचार-पत्रों के माध्यम से हमारे ज्ञान में  वृद्धि होती है| इनमे प्रकाशित विद्वानों के तथा राजनीतिज्ञों के लेख हमारे ज्ञान को बढाने का कार्य करते हैं |साहित्यिक लेख व कहानियां  हमारा ज्ञान बढ़ाने के साथ साथ मनोरंजन  भी करती है |समय समय पर प्रकाशित होने वाले परीक्षोपयोगी लेख छात्रों को परीक्षा उत्तीर्ण कराने में  सहायता प्रदान करते हैं | देश पर जब जब सकंट के बादल छाते हैं ,चाहे वह प्राकृतिक आपदा हो  जैसे  –भूकंप ,बाढ़ या फिर विदेशों द्वारा किया गया हमला ,समाचार –पत्रों ने जनसमुदाय को जाग्रत करने तथा धन संग्रह में  अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है |

 समाचार-पत्र व्यापार का साधन भी रहा है बेचने वाले तथा खरीदने वाले दोनों ही इससे लाभ उठाते हैं |अपने उत्पादनों का विज्ञापन देकर व्यापारी लोग अपना व्यापार बढ़ाते हैं और लोग उन विज्ञापनों को देखकर अपने लिए सामान खरीदते है | समाचार-पत्र हमें मौसम की भी जानकारी देते हैं|ये एक सच्चे आलोचक की भाँति राजनीति में चलने वाली  धांधलियों का पर्दाफ़ाश करते हैं |

विद्यार्थी को बचपन से ही समाचार-पत्र पढ़ने की आदत डालनी चाहिए |इससे न केवल नई –नई जानकारियाँ हासिल होंगी बल्कि उनका बौद्धिक विकास भी होगा |                                                                                                                                        

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...