प्रात:कालीन सैर
भूमिका:विद्वानों ने कहा है
–‘जल्दी सो जाना और जल्दी उठना मनुष्य को स्वस्थ्य ,संपन्न
और बुद्धिमान बनाता है |’प्रात: काल शीघ्र उठने वाले व्यक्ति कभी आलसी नहीं हो
सकते |भारतीय संस्कृति में प्रात: काल को ब्रह्ममुहूर्त कहा जाता हैं |यह
बेला अत्यंत पवित्र मानी जाती है |
प्रात:काल का सुहावना मौसम
: प्रात:काल का मौसम अत्यंत सुहावना होता है |चारों ओर शीतलमंद – सुगंधित
पवन चलती हैं |प्रात:काल का समय सबसे शांत ,पवित्र
तथा सौंदर्यमय होता है | घास पर पड़ी ओस की बूँदें मोतियों का-सा भ्रम उत्पन्न
करती हैं | सूर्योदय से पूर्व आकाश का रंग लाल होता है ,पक्षियों
की चहचहाहट बहुत अच्छी लगती है |खिली हुई कलियाँ सबको अपनी ओर आकर्षित करती हैं |ऐसा
मौसम सैर के लिए सर्वोत्तम होता है |
प्रात:कालीन सैर के लाभ : प्रात:काल
का समय सैर के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है | इस समय सैर करने वाला सदा निरोगी रहता है क्योंकि उस
समय वायु मे ऑक्सीजन की मात्र सबसे अधिक होती है |शुद्ध वायु में श्वास लेने
से अनेक प्रकार के रोग नष्ट हो जाते हैं |प्रात:काल की स्वच्थ वायु तथा स्वच्छ वातावरण ईश्वर
द्वारा मनुष्य को दिया गया नि:शुल्क उपहार है | प्रात:कालीन की सैर से व्यक्ति
दिन भर चुस्त और फुर्तीला रहता है | आलस उससे कोसो दूर भागता है |इससे
सांस, मधुमेह, रक्तचाप, बदहज़मी, अनिद्रा, मोटापा जैसे
अनेक रोग बिना औषधि के दूर हो जाते हैं |इसलिए अनेक चिकित्सक स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रात:कालीन
सैर की सलाह देते हैं | यह हर आयुवर्ग के व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयोगी
है | आजकल जिस प्रकार प्रदूषण के कारण रोग बढ़ते जा रहे है,
उनसे बचने के लिए प्रात : कालीन सैर एक रामबाण औषधि है |
विद्यार्थियों के लिए तो प्रात:कालीन सैर ओर भी आवश्यक है |
इससे से विद्यार्थियों का मस्तिषक ताज़ा हो जाता है , नेत्रों की ज्योति ठीक रहती
है तथा स्मरण शक्ति बढ़ जाती है |
निष्कर्ष : गांधी जी ने कहा
है –“ मैं प्रात:भ्रमण के कारण सदा स्वस्थ रहा और अपने दैनिक कार्यों
को स्फूर्ति के साथ करता रहा |”अत: प्रत्येक विद्यार्थी को चाहिए कि नियमित रूप से
प्रात:काल में सैर करे तथा खुली वायु में थोड़ा व्यायाम भी करे |