Friday, April 15, 2022

नेताजी का चश्मा स्वयं प्रकाश क्षितिज भाग 2 कक्षा 10वीं हिन्दी

 

 नेताजी का चश्मा

स्वयं प्रकाश

क्षितिज भाग 2

प्रश्न 1 ) सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे ?

उत्तर ) निश्चय ही चश्मे वाला कभी सेनानी नहीं रहा| वह गरीब एवं अपाहिज था, लेकिन उसके मन में देशभक्ति की असीम भावना थी| वह सुभाष की बिना चश्मे की मूर्ति देखकर दुखी हो गया| इसलिए उसने सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति पर अपने पास से चश्मा लगा दिया था| लोग उस पर व्यंग्य कसते हुए उसे सुभाषचंद्र बोस का साथी होने का तथा उनकी सेना का कैप्टन होने का सम्मान दिया करते थे | किन्तु वास्तविकता यह थी कि वह इस सम्मान के योग्य भी था|

प्रश्न 2 ) हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा-

क)   हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे?

ख)   मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?

ग)    हालदार  साहब इतनी सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?

उत्तर- क )क्योंकि वे चौराहे पर लगी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति बिना चश्मे के देख नहीं सकते थे | जब से कैप्टन की मृत्यु हुई थी, तब से किसी ने भी नेताजी की मूर्ति पर चश्मा नहीं लगाया था| इसीलिए जब हालदार साहब कस्बे से गुजरने लगे तो उन्होंने ड्राइवर से गाड़ी रोकने के लिए मना कर दिया था|

उत्तर- ख ) हालदार साहब जब चौराहे से गुज़रे तो नेताजी की मूर्ति देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ क्योंकि  मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा लगा हुआ था| सरकंडे का चश्मा देखकर हालदार साहब के मन में यह आशा जागृत हुई कि आज के बच्चे ही कल  देश के निर्माण में सहायक होंगे, वे देश का भविष्य बनेगे और अब उन्हें कभी भी चौराहे पर नेताजी की बिना चश्मे की मूर्ति नहीं देखनी पड़ेगी|

उत्तर- ग ) कैप्टन की मृत्यु के बाद उन्हें ऐसा लगा था कि अब नेताजी की आँखों पर चश्मा लगाने वाला कोई नहीं बचा | किन्तु जब उन्होंने नेताजी की मूर्ति की आँखों पर सरकंडे का बना हुआ चश्मा देखा तो भावुक हो उठे कि देश में अभी भी देशभक्ति जीवित है, मरी नहीं | सुभाषचंद्र बोस जैसे नेताओं का आदर करने वाले लोग देश में अभी भी है|

प्रश्न 3) आशय स्पष्ट कीजिए |

“ बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो देश की खातिर घर-गृहस्थी जवानी जिंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढती है |”

उत्तर ) उपर्युक्त पंक्तियों के माध्यम से लेखक ने देश के भविष्य के प्रति चिंता को व्यक्त किया है| लेखक ने स्पष्ट किया है कि जिस  देश के लोग अपने महान देशभक्तों के त्याग का आदर करने की अपेक्षा उसकी हंसी उड़ाते हों तथा अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए अवसर की ताक में रहते हों, उस देश का क्या होगा| ऐसे देश की स्वतन्त्रता ही खतरे में पड़ जाएगी |

प्रश्न 4) पानवाले का रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए|

उत्तर ) पानवाला सदा पान चबाता रहता था | वह स्वयं भी चलती-फिरती दुकान सा प्रतीत होता था क्योंकि उसके मुँह में सदा ही पान ठूँसा रहता था| यदि कोई उससे बात करता तो बोलने से पहले उसे दो बार तो थूकना पड़ता था| उसकी बढ़ी हुई तोंद घड़े के समान लगती थी| जब वह हँसता तो उसकी तोंद बराबर हिलती रहती थी| वह रसिक स्वभाव वाला व्यक्ति था| वह दूसरों का अकसर मज़ाक उड़ाता था| वह सदा अपने स्वार्थ  पर निगाह रखता था|  वह बातों का धनी था|

प्रश्न 5) “ वो लँगड़ा क्या जाएगा फौज़ में| पागल है पागल ! कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए|

उत्तर )  कैप्टन के प्रति पानवाले की यह टिप्पणी उसकी संकीर्ण मानसिकता को व्यक्त करती है| इससे पता चलता है कि उसके मन में देशभक्तों व उनका आदर करने वालों के प्रति जरा भी सम्मान की भावना नहीं है | उसे कैप्टन पर व्यंग्य करने की अपेक्षा उसके प्रति आदर भाव व्यक्त करना चाहिए था| जो व्यक्ति नेता जी जैसे देशभक्तों की  प्रतिमा में कमी नहीं देख सकता ऐसे व्यक्ति की शारीरिक कमियों की तरफ ध्यान न देकर उसकी भावनाओं की कद्र करनी चाहिए |

प्रश्न 6 )  निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन –सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं-

क)   हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते |

ख)   पानवाला उदास हो गया| उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखों को पोंछता हुआ बोला- साहब ! कैप्टन मर गया |

ग)    कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था|

उत्तर- क) यह वाक्य देशभक्ति की भावना को व्यक्त करता है| हालदार साहब जब चौराहे से गुजरते है तो वहाँ कुछ क्षणों के लिए रुककर सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति की ओर आदर भाव से देखते थे | उनके मन में नेताजी के प्रति आदर भाव था | वे बार-बार मूर्ति को  चश्मा पहनाने के बारे में पूछते थे | इस बात से पता चलता है कि हालदार साहब एक देशभक्त थे |

ख) इस वाक्य से पता चलता है कि पान वाला एक संवेदनशील व्यक्ति था | कभी- कभार जरूर कैप्टन पर व्यंग्य भरी टिप्पणी करता हो किन्तु उसकी मृत्यु का उसे बेहद दुख था | उसे कप्तान की मृत्यु के बाद ही उसके जीवन के महत्व का पता चला था | उसे ऐसा अनुभव हुआ कि वह महान देश-प्रेमी था | इसलिए अब उसके जीवन पर कोई व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी नहीं करता था |

ग) कैप्टन को नेताजी की बिना चश्मे वाली प्रतिमा बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती थी| इसलिए वह उसे बार-बार चश्मा पहनाता था| इससे उसकी देशभक्ति की भावना उजागर होती है |

प्रश्न 7) जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए |

उत्तर ) उनके मन में सी कैप्टन की छवि एक प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले इंसान की है | उनके मन में गठीले बदन के पुरुष की छवि अंकित थी, जिसकी बड़ी-बड़ी मुंछें थीं | उसकी चाल में फौजियों जैसी मजबूती और ठहराव था| चेहरा पर एक तेज़ और पूरा व्यक्तित्व ऐसा था जिसे देखकर दूसरा व्यक्ति प्रभावित हुए बिना नहीं रहता था| इस तरह हालदार साहब के दिल और दिमाग पर एक फौजी की तस्वीर अंकित थी|

प्रश्न 8)   कस्बों शहरों और महानगरों के चौरहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन- सा हो गया है-

क)   इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं ?

ख)   आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों ?

ग)    उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिएँ?

उत्तर ) क) इस  तरह की मूर्ति लगाने से लोगों के मन में देशभक्ति की भावना पैदा होती है| उनके त्याग व समर्पण को लोग याद रखते है उनके जीवन से देश- भक्ति की प्रेरणा मिलती है तथा साथ ही आने वाली पीढ़ियों को भी महान देशभक्तों का परिचय मिलता है |

      ख) हम इलाके के चौराहे पर उस देशभक्त की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे जिन्होंने अपना जीवन देश के प्रति अर्पित कर दिया है|

      ग ) देशभक्तों की मूर्ति के प्रति हमारा पावन कर्तव्य है कि हम उसके रख-रखाव का पूरा ध्यान रखें | उसके आस-पास सफाई रखें | उसकी सुरक्षा करें तथा उसके प्रति सम्मान का भाव भी रखें |

अन्य प्रश्न

प्रश्न 1 ) नेताजी का चश्मा नामक पाठ में लेखक ने क्या संदेश दिया है ?

उत्तर ) “नेताजी का चश्मा” श्री स्वयं प्रकाश जी कि प्रमुख कहानी है |इसमें उन्होंने देश-भक्ति कि भावना पर प्रकाश डाला है | उनका मानना है कि देश-भक्ति व्यक्त करने के लिए फौजी होना अनिवार्य नहीं है | इसी प्रकार यह भी जरूरी नहीं है कि देश-भक्त शारीरिक व आर्थिक दृष्टि से मजबूत हो | कैप्टन विकलांग व गरीब व्यक्ति है वह नेता जी की अधूरी मूर्ति देखकर बेचैन हो जाता है और गरीब होते हुए भी उसका चश्मा लगा देता है | इस प्रकार प्रस्तुत कहानी हमें यहीं संदेश देती है कि हमें  अपने देशभक्तों के प्रति सम्मान की भावना रखनी चाहिए |

प्रश्न 2) नेता जी के मूर्ति के चश्मे बदलने का क्या कारण था ?

उत्तर ) वास्तव में नेता जी कि मूर्ति पर चश्मा नहीं बनाया गया था |  वह नेता जी की अधूरी मूर्ति देखकर बेचैन हो जाता है और गरीब होते हुए भी उसको चश्मा लगा देता है |किन्तु यदि किसी ग्राहक को यदि वह चश्मा पसंद आ जाता तो चश्मा लगाने वाला कैप्टन उस चश्मे को ग्राहक को दे देता था और मूर्ति पर दूसरा चश्मा लगा देता था | इस प्रकार नेता जी की मूर्ति पर चश्मे बदले जाते थे |

 

 

 

 

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