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Friday, August 27, 2021

साना साना हाथ जोड़ि

 

पाठ 3 

साना साना हाथ जोड़ि

  मधु कांकरिया

प्र1. झिलमिलाते सितारों की रोशनी मे नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था ?

उत्तर. झिलमिलाते सितारों की रोशनी मे नहाया गंतोक लेखिका के मन मे सम्मोहित उत्पन्न कर रहा था | वहाँ की सुंदरता ने लेखिका पर एक जादू सा कर दिया था , कि वह एकटक उसे देखती ही रह गई | उसे उस समय सब कुछ ठहरा हुआ सा लग रहा था | उसके आस पास व उसके अन्तर्मन मे एक शून्य सा समा गया था |

प्र2. गंतोक को मेहनतकश बादशाहो का शहर क्यो कहा गया ?

उत्तर. मेहनतकश से यहाँ अभिप्राय है , कडा परिश्रम करने वाले लोग | बादशाह से तात्पर्य है अपनी इच्छानुसार कम करने वाले | गंतोक पहाड़ी स्थल है | पहाड़ी क्षेत्र का जीवन कठिन होता है | अपनी आवश्यकताओ को पूरा करने के लिए यहाँ के लोग कड़ी मेहनत करने से घबराते नहीं , अपितु मेहनत करते हुए भी मस्त रहते है | उन्हें किसी की परवाह नहीं होती और न ही वे दूसरों की सहायता के लिए किसी के आगे हाथ फैलते है | इसलिए लेखिका ने गंतोक को मेहनतकश बादशाहो का शहर कहा है |

प्र3. कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओ का फहराना किन अलग-अलग अवसरो की ओर संकेत करता है ?

उत्तर. श्वेत पताकाएँ किसी बौध्द धर्म के अनुयायी की मृत्यु पर फहराई जाती है | किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु हो जाने पर नगर से बाहर वीरान स्थान पर मंत्र-लिखित एक सौ आठ पताकाएँ फहराई जाती है | उन्हे उतारा नहीं जाता | वे धीरे-धीरे स्वयं नष्ट हो जाती है | रंगीन पताकाएँ काम के शुभारंभ के समय फहराई जाती है |

प्र4. जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति के बारे मे , वहाँ की भौगोलिक स्थिति एंव जनजीवन के बारे मे क्या महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी | लिखिए |

उत्तर. जितेन नार्गे सिक्किम का नागरिक था | वह ड्राईवर और गाइड दोनों का कार्य अकेले ही करता था | लेखिका ने जितेन नार्गे के साथ ही सिक्किम की यात्रा की थी | वह लेखिका को यात्रा के दौरान वहाँ की प्राकृतिक, भौगोलिक व जनजीवन की महत्वपूर्ण जानकारियाँ देता रहता था | उसने बताया कि सिक्किम मे प्राकृतिक नजारे अत्यंत सुंदर है | गंतोक से युमथांग 149 किलोमीटर दूर है | यह मार्ग खूबसूरत प्राकृतिक  दृश्यो से भरा पड़ा है | कही घाटियाँ फूलो से भरी हुई है | अनेक झरने कल-कल की ध्वनि करते हुए बहते है | कही घाटियों को फूलो की वादियाँ भी कहते है | यहा की नारियाँ रंगीन कपड़े पहनना पसंद करती है | उनका परंपरागत परिधान बोकु है |

प्र5. लोंग स्टॉक मे घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक सी क्यो दिखाई दी ?

उत्तर. लोंग स्टॉक मे घूमते हुए चक्र के विषय मे जितेन नार्गे ने बताया कि इसे घूमने से सारे पाप धूल जाते है | लेखिका उस घूमते हुए चक्र को देखकर सोचने लगती है कि पूरे भारत मे ऐसे विश्वास पाए जाते है | इसलिए भारत के लोगो कि आत्मा एक-जैसी है , विज्ञान ने चाहे कितनी ही तरक्की क्यो न कर ली हो फिर भी लोगो कि पाप-पुण्य संबंधी मान्यताएँ एक-जैसी ही है | वह चाहे पहाड़ी क्षेत्र हो अथवा मैदानी क्षेत्र | इन मान्यताओं मे कही कोई अंतर नहीं है |

प्र6. जितेन नार्गे कि गाइड कि भूमिका के बारे मे विचार करते हुए लिखिए कि कुशल गाइड मिस्टर क्या गुण होते है ?

उत्तर. जितेन नार्गे केवल गाइड ही नहीं , अपितु कुशल ड्राईवर भी था | एक कुशल गाइड की सबसे बड़ी विशेषता वह होती है कि उसे उस क्षेत्र का पूरा ज्ञान होना चाहिए जिसमे वह गाइड का काम कर रहा है | जितेन एक कुशल गाइड है क्योकि उसे सिक्किम के सारे पहाड़ी क्षेत्र का पूरा ज्ञान था | वह सैलानियो को उस क्षेत्र की पूरी जानकारी देता है | वह यात्रियों के साथ मित्र जैसा व्यवहार करता है | वह संगीत का ज्ञान भी रखता है | यात्रियों की थकान को दूर करने के लिए उनकी पसंद का संगीत सुनाता है | मार्ग मे काम करने वाली सिक्किम नारियों के जीवन के बारे मे वह पूर्ण जानकारी देता है | वहाँ के लोगो के धार्मिक स्थलों और लोगों के विश्वास व आस्थाओं की भी जानकारी देता है | अतः स्पष्ट है कि जितेन एक कुशल गाइड है |

प्र7. इस यात्रा- वृत्तांत मे लेखिका ने हिमालया के जिन-जिन रूपों का चित्र खिचा है , उन्हे अपने शब्दो मे लिखिए |

उत्तर. लेखिका की पहाड़ी यात्रा गंतोक से यूमथांग जाने के लिए आरंभ होती है | वे अपने पूरे दल के साथ जीप मे बैठकर यात्रा शुरू करती है | जैसे-जैसे वे आगे बढ़ते है वैसे-वैसे ऊँचाई भी बढ़ती जाती है | उन्होने देखा की हिमालय का प्राकृतिक दृश्य पल-पल मे बदलता है | हिमालय का विराट रूप सामने आता है | अब हिमालय अपने विशाल रूप मे दिखाई देने लगता है | आसमान मे घटाएँ फ़ैली हुई है | घाटियों मे दूर-दूर तक खिले हुए फूल फैले हुए है |हिमालय कही हरे रंग का कालीन ओढ़े हुए नजर आता है तो कही सफ़ेद बर्फ की चादर ओढ़े हुए और कही-कही बादल मे लुका-छिपी का खेल खेलता सा लगता है |

प्र8. प्रकृति के उस अनंत और विरत स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है ?

हिमालय की प्राकृतिक छटा पल-पल बदलती है | लेखिका हिमालय पर प्रकृति के अनंत और विराट रूप को देखकर अवाक रह जाती है |प्रकृति के उस विरत रूप को देखकर उसे अनेक अनुभूतियाँ होती है |उसे अनुभव होता है कि  जीवन की सार्थकता झरनो और फूलो की भाँति स्वंय को दे देने मे है | झरनो के भाति निरंतर गतिशील रहना और फूलो की भांति सदा मुस्कुराते रहने मे ही जीवन की जीवंतता है | जीवन मे दूसरों के लिए कुछ कर गुजरना ही जीवन को सार्थक बनाता है |

प्र9. प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद मे डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृश्य झकझोर गए ?

उत्तर. लेखिका ने देखा कि उस प्राकृतिक सौंदर्य के दृश्यो से बेपरवाह कुछ अत्यंत सुंदर और कोमलांगों वाली पहाड़ी औरते पत्थर तोड़ने मे लीन थी | उनके हाथों मे कुदाल व हथौड़े थे | कईयो कि पीठ पर तो डोको (बड़ी टोकरी)मे उनके बच्चे भी बंधे हुए थे | यह विचार लेखिका को बार- बार झकझोरता था कि नदियो , फूलों , झरनो , वादियों के प्राकृतिक नजारो के बीच भूख ,प्यास , मौत और मानव के जीने कि इच्छा के बीच कडा संघर्ष चल रहा था |   

प्र10. सैलानियों को प्रकृति कि अलौकिक छटा का अनुभव करवाने मे किन-किन लोगो का योगदान होता है , उल्लेख करे |

उत्तर. सब से पहले सैलानियों को पर्यटन-स्थलो पर ठहराने का प्रबंध करने वाले लोगो का योगदान रहता है | इसके पश्चात उनके लिए वाहनों का प्रबंध करने वाले लोगो का योगदान रहता है | वाहनों के चालको व गाइडो का योगदान भी सराहनीय होता है | मार्गदर्शक (गाइड) की भूमिका तो और भी महत्त्वपूर्ण रहती है , क्योकि वह सैलानियों को वहाँ के स्थानों की जानकारी के साथ-साथ वहाँ के इतिहास व सांस्कृतिक परंपराओ मे विश्वास , जन-जीवन व परंपराओ की जानकारी देकर उनकी यात्रा को रोचक बनाता है |

प्र11. “कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती है |” इस कथन के आधार पर स्पष्ट करे कि आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति मे क्या भूमिका है ?

उत्तर. देश की महत्त्वपूर्ण योजनाओ को सफल बनाने मे आम जनता सहयोग देती है | सड़कों का निर्माण करने हेतु पत्थर तोड़ने व पत्थर जोड़ने से लेकर बहुमंजली अट्टालिकाएँ खड़ी करने मे आम-जनता का परिश्रम ही काम करता  है | किंतु आम जनता के इस कार्य के बदले मे उन्हे बहुत कम पैसे मिलते है | बड़ी-बड़ी फ़ैक्टरियो के द्वारा वस्तुओ का निर्माण किया जाता है | बाँधो से बिजली का उत्पादन होता है | फसलों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है |

प्र12. आज की पीढ़ी द्वारा प्रकृति के साथ किस तरह खिलवाड किया जा रहा है ? इसे रोकने मे आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए ?

उत्तर. वृक्षो की लगातार कटाई , नदियों के जल का दुरुपयोग तथा कृषि योग्य भूमिका बड़े-बड़े नगर बसाने व औद्योगिक संस्थान खड़े करने से प्राकृतिक संतुलन समाप्त हो जाएगा | हम विद्यार्थी भी अपने आँगन या घर के आस-पास की खाली पड़ी धरती पर छायादार वृक्षो के पौधे लगाकर प्रकृति को बचाने मे योगदान दे सकते है | हमें जल के उचित प्रयोग के प्रति समाज मे जागरूकता उत्पन्न करनी होगी , ताकि जल का सही प्रयोग हो |  हमें नदियो मे गंदगी नहीं फ़ैकनी चाहिए | कारखानों  से निकले गंदे पानी को नदियों के पानी मे नहीं बहाना चाहिए |

प्र13. प्रदूषण के कारण स्नोफोल मे कमी का जिक्र किया गया है | प्रदूषण के और कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आए है , लिखे |

उत्तर. प्रदूषण से मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा है | प्रदूषण से सारे देश व समाज का आर्थिक और सामाजिक वातावरण बिगड़ रहा है | खेती के उगाने के कृत्रिम उपायों , खादों आदि के प्रयोग से जहाँ धरती की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो रही है , वही खराब फासले उत्पन्न हो रही है , जिसके खाने से मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है | ध्वनि-प्रदूषण से मन की शांति नष्ट हो रही है और तनाव बढ़ता जा रहा है | ध्वनि-प्रदूषण से बहरेपन की बीमारी बढ़ रही है |

प्र14. कटाओ पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है | इस कथन के पक्ष मे अपनी राय व्यक्त किजिए ?

उत्तर. कटाओ को भारत का स्विट्ज़रलैंड कहा जाता है | वह स्विट्ज़रलैंड से भी अधिक सुंदर स्थान है , जिसे देखकर लोग अपने आपको ईश्वर के निकित समझते है | वहाँ उन्हे अद्भुद शांति मिलती है | यदि वहाँ पर दुकान खुल जाती , तो लोगो की भीड़ बढ़ जाती | गंदगी फैल जाती | वहाँ का प्राकृतिक वातावरण नष्ट हो जाता | उसे भारत का स्विट्ज़रलैंड नहीं कहा जा सकता था | इसलिए कटाओ पर किसी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है |

प्र15. प्रकृति ने जल संचय की व्यवस्था किस प्रकार की है ?

उत्तर. प्रकृति के नियम अनोखे है | वह हर कार्य की व्यवस्था अपने ही ढंग से करती है | उसकी जल संचय व्यवस्था भी अत्यंत रोचक है | सर्दियों मे बर्फ के रूप मे जल एकत्रित होता है | गर्मियों मे जल लोग प्यास से व्याकुल होते है तो प्रकृति के द्वारा एकत्रित बर्फ रूपी जल पिघलकर जलधारा बनकर बहने लगता है | जिसे प्राप्त करके लोग अपनी प्यास को बुझाते है |

प्र16. देश की सीमा पर बैठे फौजी किस तरह की कठिनाइयों से जूझते है ? उनके प्रति हमारा क्या उत्तरदायित्व होना चाहिए ?

उत्तर. वहाँ वे बर्फीली हवाओं और तूफानों का सामना करते है | पौष और माघ की ठंड मे तो पेट्रोल के अतिरिक्त सब कुछ जम जाता है | फौजी बड़ी मुश्किल से अपने शरीर का तापमान सामान्य रखते हुए देश की सीमाओ की रक्षा करते है | देश की सीमाओं की सुकक्षा करने वाले फौजियों के प्रति हमारा उत्तरदायित्व बनता है , कि हम उनका हौंसला बढ़ाएँ और उनके परिवार की खुशहाली के लिए प्रयत्नशील रहे ताकि फौजी अपने परिवार की चिंता से मुक्त होकर सीमाओ की रक्षा कर सकें |     

   

समास

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