Friday, July 23, 2021

संवाद लेखन

संवाद लेखन

प्रश्न ) मान लो आप अपने मित्र रोहन से उसकी तबीयत पूछने जाते हो | तुम अपने और रोहन के बीच की बातचीत को संवाद के रूप में लिखो |

उत्तर ) रोहन के घर पहुँचने पर :-

       मैं –  रोहन ! क्या बात है ? तुम लेटे क्यों हुए हो ?

       रोहन – मेरे पेट में कुछ ऐसे-ऐसे हो रहा है |

       मैं -    ये ऐसे-ऐसे क्या होता है ?

       रोहन – (थोड़ा कराहकर) मेरे पेट में दर्द हो रहा है |

       मैं-     ये दर्द कब से हो रहा है ?

       रोहन - आज दोपहर से अचानक होने लगा है |

       मैं -    क्या तुमने किसी डॉक्टर या वैध को दिखाया और कोई दवाई ली ?

       रोहन – हाँ, वैध जी आए थे | उन्होनें मुझे कब्ज की दवाई दी थी | माँ ने हींग, फिटकरी और काला नमक लेकिन मुझे कोई आराम नहीं हुआ है |

       मैं –   घबराओ मत | थोड़ी देर में ठीक  हो जाएगा | मैं रात को फोन करके तुम्हारी तबीयत के बारे पूछुंगा | अब मैं घर जाता हूँ | क्योंकि कल विद्यालय जाना है और स्कूल का गृहकार्य भी पूरा करना है |  

अच्छा रोहन नमस्ते | अपना ख्याल रखना |

       रोहन – नमस्कार |

 

प्रश्न ) संकट के समय कौन-कौन से फोन नंबर याद रखने चाहिए ? ऐसे वक्त में पुलिस से तुम कैसे  बात करोगे ? तुम अपने और पुलिस अधिकारी के बीच की बातचीत को संवाद के रूप में लिखो |

उत्तर ) संकट के समय हमें अपने सगे संबंधियों, पुलिस, फायर ब्रिग्रेड और डॉक्टर (ऐम्बुलेंस) आदि के फोन नंबर याद रखने चाहिए |

       पुलिस से बातचीत-

       मैं    – हैलो |

       पुलिस – हैलो |

       मैं    - हैलो सर मैं _______ बोल रहा हूँ | क्या आप पुलिस स्टेशन से बोल रहे है ?

       पुलिस– हैलो, हाँ, मैं मैं इंस्पेक्टर_________ बोल रहा हूँ | कहिए, आपने किसलिए फोन किया है ?

      मैं    - नमस्ते सर | मै .... बोल रहा हूँ| मेरे पड़ोसी के मकान में चोरी हो गई है |यहाँ का          

              पता... है | कृपया शीघ्र पहुँचने की कृपया करे |

       इंस्पेक्टर मै जल्द ही आपके बताए पते पर पहुँच रहा हूँ |आप परेशान ना हो |

     मैं     - धन्यवाद |

प्रश्न) आसपास की निर्जीव चीजों को ध्यान मे  रखकर कुछ संवाद लिखिए, जैसे –

क)    चॉक का ब्लैकबोर्ड से संवाद

ख)    कलम का कॉपी  से संवाद

  उत्तर ) चॉक का ब्लैकबोर्ड से संवाद –

       ब्लैकबोर्ड  - (चाक से ) ओह ! तुम फिर मुझे गंदा करने आ गए | जरा दूर ही रहो | देखो आज ही मैने नया सुंदर-सा  काला रंग वाला नया कपड़ा पहना है |(नया रंग किया गया है )

       चॉक आज मै तुम्हें गंदा करने नहीं बल्कि छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक बातें लिखने आयी हूँ |

      ब्लैकबोर्ड  - सबसे उपर लिखना नए सत्र में सभी छात्रों का स्वागत है | फिर चित्र बनाना |

       चॉक   - ठीक है | जैसा तुम चाहो |

उत्तर ) कलम का कॉपी से संवाद –

      कॉपी (कलम देखकर ) आज तुम मुझे फिर क्यों परेशान करने क्यों आ गई ?

      कलम – मै तुम्हें परेशान करने नहीं बल्कि आज के पाठ के प्रश्नोंत्तर  लिखने आई हूँ |

      कॉपी   कल तुम अनेक जगह मेरे सीने में चुभ गई  थी | मुझे अब तक उसका  दर्द है |

      कलम – कल मेरा प्वाइंट  खराब हो रहा था | पर आज ऐसा नहीं है |

      कॉपी – ठीक है | सावधानी से काम करना है और पूरा काम करना जिससे मानस को आज       

            शिक्षक से डांट न खानी पड़े |

      कलम – अरे वो तो कल मुझे सहेलियों के साथ खेलने जाना था | पर आज बिना पूरा काम किए

             उठूँगी ही नहीं |

Monday, July 19, 2021

पाठ -10 पांडवों की रक्षा

 

पाठ -10

पांडवों की रक्षा

प्रश्न 1 विदुर ने वारणावत के लिए निकलने से पहले युधिष्ठिर को क्या समझाया ?

उत्तर – दुर्योधन के षड्यंत्र और उससे बचने का उपाय विदुर ने युधिष्ठिर को इस तरह गूढ भाषा में सीखा दिया कि कोई समझ न पाए |

प्रश्न 2 युधिष्ठिर ने ध्यान से देखने पर घर के बारे में क्या भेद समझा ?

उत्तर – उसे पता लगा कि यह घर जल्दी आग पकड़ने वाली चीजों से बना है पर साथ ही इस भेद को किसी को पत्ता न लगने के लिए कहा |ताकि मौका देखकर वह अपने भाइयों के साथ चुपचाप यहाँ से निकल सके |

प्रश्न 3 विदुर द्वारा भेजे गए दूत ने पांडवो से क्या कहा ?

उत्तर – उसने कहा की आप लोगों की भलाई के लिए हस्तिनापुर से रवाना होते समय विदुर ने युद्धिष्ठिर से सांकेतिक भाषा में जो कुछ कहा था , वह बात मै जनता हूँ |यही मेरे सच्चे मित्र होने की पहचान है |

प्रश्न 4 भीम पांडव लाख के घर से कैसे बचकर भाग निकले ?

उत्तर – माता  कुंती ने एक दिन बड़े भोज़न का प्रबध किया जिसमे नगर के सभी लोग भोजन करने आए |जब खूब खा –पीकर भवन के सभी कर्मचारी गहरी नींद में सो गए तब आधी रात के समय भीमसेन ने घर में आग लगा दी |पुरोचन भी उस आग में जलकर मर गया |भीम आदि पांडव बचकर भाग निकले |

प्रश्न 5 भीम ने घने जंगल में किस तरह अपनी माता व भाइयो को रास्ता पार कराया ?

उत्तर - उसने माता को अपने कंधे पर बैठा लिया | नकुल व सहदेव को अपनी कमर पर ले लिया| युधिष्ठिर व अर्जुन को दोनों हाथों से पकड़ लिया और घना जंगल का रास्ता पार किया |

प्रश्न 6 एकचक्रा नगरी में पांडव किस तरह अपने भोजन की व्यवस्था करते थे ?

उत्तर - वह वहाँ भिक्षा माँगकर लाते तथा एक हिस्सा भीम को देकर बाकी हिस्सा कुंती चारों भाइयो में व स्वयं खाकर गुजारा करती थी |

प्रश्न 7 एकचक्रा नगरी में ब्राह्मण के घर में क्या संकट आया ? 

उत्तर – एकचक्रा नगरी के पास रहने वाले राक्षस बकासुर के अनुसार आज ब्राह्मण के घर के किसी सदस्य को उसका भोजन बनने का नंबर था | इसलिए ब्राह्मण के घर यह विवाद हो रहा था कि कौन उसका भोजन बनने के लिय राक्षस के पास जाएगा |

प्रश्न 8 माता कुंती ने ब्राह्मण की किस प्रकार सहायता की |

 उत्तर – उसने भीमसेन को राक्षस का भोजन बनने के लिए तैयार किया | भीमसेन को जब बकासुर ने भोजन करते हुए देखा तो उसका चेहरा गुस्से से एकदम लाल हो गया |उसने भीमसेन पर बड़ा पेड़ उखाड़कर मारा जिसे भीमसेन ने बाएँ हाथ से रोक लिया |तब दोनों में भयानक मुठभेड़ हुई| आखिर में भीमसेन ने उसे मुंह के बल गिरा दिया और उसकी पीठ पर घुटनों की मार देकर उसकी रीढ़ तोड़ डाली |उसके प्राण पखेरू उड़ गए |     

 

पाठ 7 पापा खो गए विजय तेंदुलकर

 

पाठ 7  पापा खो गए

                विजय तेंदुलकर

नाटक में विचित्र पात्र -  नाटक की घटनाएँ एक सड़क पर घटती है | रात बिजली का खंबा और पेड़ अपने जीवन के बारे में बाते करते है|  खभें  को रात- दिन खड़े रहने की परेशानी है | पेड़ को भी   सर्दी , गरमी  , बरसात में सदा खड़ा ही रहता है |उन्हें आँधी तूफान झेलना पड़ता है| तभी लेटर बॉक्स (लाल ताऊ ) भी उनकी बातचीत में शामिल हो जाता है | वह कुछ पत्र निकालकर पढ़ने लगता है |खंभा और पेड़ समझते हैं कि किसी का पत्र पदना अच्छा नहीं। जिसे लिखा गया हो उसे ही पढ़ना  एक चाहिए | तभी एक गुंडा बदमाश आदमी आता है |यह एक छोटी सी लड़की को उठाकर लाया है | अगले दिन किसी किसी को बेच देगा |लड़की को उसने थोड़ी सी  बेहोशी की दवाई दी है |यह पेड़ की आड़ में लड़की को लिटा कर भोजन की तलाश में जाता है |

 

 

 

 

लेटर बॉक्स की चिंता – गुंडे के जाते ही खंबा ,पेड़ और लेटर बॉक्स बच्ची के बारे में चिंतित हो जाते है| वे कौवे को भी जगाते है |  तभी लड़की को बचाने के बारे में बातें करने लगते है |तभी लड़की को कुछ होश आता है वह समझ नहीं पाती की बातें कौन कर रहा था | उसे अंधेरे में डर लगने लगा | लेटर बॉक्स बोलता है तो वह बहुत खुश होती    है |ये दोनों बातें हैं |लेटर बॉक्स लड़की का पता – ठिखाना जानना चाहता है | पर लड़की को कुछ ठीक  से मालूम नहीं हैं धीरे धीरे पेड़ ;खंभा और कोवा भी बातचीत में शामिल हो जाते हैं | अब लडकी को डर नहीं लगता | वह सबके साथ खेलने लगती है |पोस्टर की लड़की भी उसके साथ नाचने लगती है |  

बदमाश से मुक्ति –तभी वह दुष्ट आदमी आ जाता है | सब चुप हो जाते हैं |वह लडकी को दूँदता है |लड़की बचने का प्रयत्न करती हैं |पेड़ ,लेटर बॉक्स  ,खंभा , और पोस्टर सभी लपक झपक कर बीच मे आते है| और लड़की को गुंडे के हाथ नहीं आने देते |तभी कौवा चिल्लता है-भूत !फिर सभी भूत -भूत चिल्लाने लगते हैं | गुंडा घबराकर भाग जाता है |सभी खूब हँसते हैं | कुछ देर लड़की नहीं मिलती तो सब मिलकर उसे दूँदते और थपकी देकर उसे सुला देते हैं |

पापा को यहाँ लाइए -  खंभा,पेड़ ,आदि के सामने समस्या है कि लड़की को उसके घर कैसे पहुँचाएँ | उसे  तो अपने पापा का नाम भी नहीं मामूल |वे एक योजना बनाते हैं |सुबह होती है |सड़क पर सोई लड़की पर पेड़ झुक कर छाया किए हुए है | खंभा टेदा खड़ा है |देखने में लगता है जेसे कोई दुर्घटना हुई हो |  कौवा शोर मचाकर लोगो का ध्यान आकर्षित करता है |पोस्टर पर लिखा है -मेरे पापा खो गए है | लेटर बॉक्स सरकता हुआ लोगों से कहता है - इस प्यारी बच्ची  के पापा मिल जाएँ तो यहाँ ले आइए |

कठिन शब्दार्थ

भंगिमा : शारीरिक मुद्रा ;  हड़बड़ी : जल्दबाज़ी ; आफत : आपदा ; तकलीफ : परेशानी ;कायम : स्थिर ; चरण: कविता की एक पंक्ति ; कर्कश: अच्छी न लगना ; फोकट : मुफ्त ; गुप्त :छिपा हुआ ; ओट में :आड़ में; गश्त लगाना :घूमना ; चकमा देना : धोखा देना ; संरक्षण : हिफाजत;  प्रेषक : दर्शक |

       प्रश्न) नाटक में आपको सबसे बुद्धिमान पात्र कौन लगा और क्यों ?

उत्तर ) नाटक में आपको सबसे बुद्धिमान पात्र  कौआ लगा ,क्योंकि लड़की को बचाने में वह सबसे ज्यादा बुद्धिमानी दिखाता है |पहले बार तब ,जब वह लड़की उठाने भिखारी को आता देख कर भूत चिल्लाता है और सबके भूत भूत चिल्लाने पर उसे भगना पड़ता है|  और दूसरी बार कौआ ही सबको लड़की को उसके पापा के पास पहुँचाने की योजना बनाता है |

प्रश्न) पेड़  और खंबे में दोस्ती कैसे हुई ?

उत्तर ) पेड़  और खंबे दोनों पास- पास स्थित थे | एक बार आँधी में खंभा जब गिरने लगा तो पेड़ ने उसे सहारा देकर बचा लिया था |इस क्रिया में पेड़ जख्मी हो गया था | तब से दोनों में दोस्ती हो गई |

प्रश्न ) लेटरबॉक्स को सभी लाल ताऊ कहकर क्यों पुकारते थे ?

उत्तर ) लेटरबॉक्स पढ़ा लिखा है और दूसरों की चिट्ठियाँ अपने पेट से निकालकर पढ़ता है |वह परीक्षित के स्कूल

 

 

 

 

 

छोड़कर बंटे खेलने से दुखी है | वह कहता है कि यदि वह परीक्षित का हैडमास्टर होता तो उसके होश ठिकाने पर ला देता |

प्रश्न ) लाल ताऊ किस प्रकार बाकी पात्रों से भिन्न है ?

उत्तर ) लेटरबॉक्स पढ़ा लिखा है और दूसरों की चिट्ठियाँ अपने पेट से निकालकर पढ़ता है | वह मधुर आवाज़ में बातें करता है | उसका रंग लाल है | उसे लाल ताऊ कहा जाता है | नाटक के अंत में वह कहता है कि इस लड़की के पापा मिल जाए तो उन्हें जल्दी यहाँ ले आए |

    प्रश्न )नाटक में बच्ची को बचाने वाले पात्रों में एक ही सजीव पात्र है | उसकी कौन कौन सी बातें आपको मजेदार

    लगी लिखिए |                                    

    उत्तर )  नाटक के पात्रों में एक ही सजीव पात्र है वह है कौआ | वह लड़की  को उठाने वाले  को आता देख सबसे        पहले  भूत कहकर चिल्लाता है और एक साथ  सबके भूत- भूत चिल्लाने पर भिखारी जैसा दिखने वाला भागता है | लोगों का ध्यान आकृष्ट करने के लिए कौवा कांव - कांव चिल्लाता है जिससे लोगो का ध्यान लड़की कि ओर आ जाए और वह    अपने पापा से मिल सके |

   प्रश्न ) क्या वजह थी कि सभी पत्र मिलकर भी लड़की को उसके घर नहीं पहुंचा सके |

उत्तर ) क्योंकि छोटी लड़की को अपने घर का पता, गली का नाम और पापा का नाम भी बता नहीं पा  रही थी| इसलिए चाह कर भी  सभी पात्र मिलकर भी लड़की को उसके घर नहीं पहुंचा सके|     

Sunday, July 18, 2021

पाठ -13 मानवीय करुणा की दिव्य चमक सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

 

पाठ -13   मानवीय करुणा की दिव्य चमक

              सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

प्रश्न) फादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी?

उत्तर ) फादर परिमल गोष्ठियों में सबसे बड़े माने जाते थे|  वे सबके साथ पारिवारिक संबंध अथवा मेलजोल बनाकर रखते थे| इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात कि वे सबके घरों में होने वाले विभिन्न उत्सवों में जाया करते थे | हर व्यक्ति के हृदय में स्नेह था| इसलिए सबको अपनी उपस्थिति देवदार के वृक्ष के समान अनुभव होती थी|

प्रश्न) फादर बुल्के भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं,किस आधार पर ऐसा कहा गया है?

उत्तर ) लेखक ने फादर बुल्के भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग स्वीकार किया है | वे बेल्जियम के रहने वाले थे| भारत आकर उन्होने भारतीय संस्कृति को गहराई से समझा व हिन्दी भाषा को पढ़ना व लिखना सीखा | रामायण विषय को लेकर शोध प्रबंध किया | इससे उनका भारतीय संस्कृति से अधिक लगाव का पता चलता है|

प्रश्न) पाठ में आए उन प्रसंगों  का  उल्लेख कीजिए जिनसे फादर बुल्के का हिन्दी प्रेम प्रकट होता है?

उत्तर) फादर ने मातरलिंक द्वारा रचित सुप्रसिद्ध नाटक ब्लू बर्ड का नीलपंछी के नाम से हिन्दी अनुवाद किया | उन्होंने अंग्रेजी हिन्दी कोश का निर्माण किया व धार्मिक ग्रंथ बाइबल का हिन्दी अनुवाद किया | वे सदा हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलवाने की चिंता में रहते थे| इसके लिए उन्होंने अनेक प्रयास किए व अकाट्य तर्क भी प्रस्तुत किए | उन्हें उन हिन्दी भाषी लोगों पर झुंझलाहट होती थी जो हिन्दी जानते हुए भी हिन्दी का प्रयोग नहीं करते थे|

प्रश्न) लेखक ने फादर को मानवीय करुणा की दिव्य चमक क्यों कहा?

उत्तर ) लेखक कामिल बुलके अपने हृदय में दीन-दुखियों के प्रति करुणा भाव रखते थे | वे एक बार जिससे रिश्ता बना लेते थे उसे जीवनभर निभाते थे | उनके संपर्क जो भी आता था उसे असीम शांति की अनुभूति होती थी| इसी कारण लेखक ने उन्हें मानवीय करुणा की दिव्य चमक कहा है जो उचित प्रतीत होती थी|

प्रश्न) फादर बुल्के ने सन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नई छवि प्रस्तुत की है,कैसे?

उत्तर ) परंपरागत सन्यासी समाज से अपना नाता तोड़ लेते थे | वे किसी के सुख-दु:ख में सम्मिलित नहीं होते है| वे  हमेशा अपनी भक्ति में लीन रहते है| किन्तु फादर बुल्के की छवि अलग थी वे समाज में रहते थे | उन्हें भारत में रहते  हुए भी अपने परिवार वालों की चिंता रहती थी| वे उन्हें हमेशा  पत्र लिखते थे | वे जब भी दिल्ली आते तो लेखक से जरूर मिलते थे |इस प्रकार  फादर बुल्के ने सन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नई छवि प्रस्तुत की है

प्रश्न) 7 आशय स्पष्ट कीजिए|

क)    नाम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है|

ख)   फादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा  है|

उत्तर) क) फादर कामिल बुल्के की मृत्यु पर उनके परिचित, मित्र  और साहित्यिक मित्र इतनी अधिक संख्या में थे कि उनको गिनना कठिन था अर्थात बहुत लोग थे| इसलिए रोने वालों के लिए लिखना स्याही खर्च  करने के समान है|

क)    उत्तर) ख) जिस प्रकार उदास शांत संगीत को सुनकर व्यक्ति तन्हाइयों में डूब जाता है,उसी प्रकार फादर को याद करके, उनके साथ बिताए गए सुखद क्षण और उनके वात्सल्य भाव को याद करके मन में एक शांति पैदा होती है कहना उचित है कि फादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा  है|

प्रश्न) आपके विचार से बुल्के ने भारत आने का मन क्यों बनाया होगा?

उत्तर) फादर कामिल बुल्के के मन में हिन्दी साहित्य, हिन्दी भाषा की जानकारी प्राप्त करने की इच्छा थी| फादर के मन में शायद भारत के संतों, ऋषियों तथा आध्यात्मिक पुरुषों  का आकर्षण भी रहा होगा साथ ही वे भारत तथा भारतीय संस्कृति के प्रति भी आकर्षित थे इसलिए वे भारत आना चाहते थे|

प्रश्न) बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि – रेम्सचैंपल| इस पंक्ति में फादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएं अभिव्यक्त होती है?आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं?

उत्तर) फादर कामिल बुल्के की जन्मभूमि रेम्सचैंपल थी| फादर बुल्के के इस कथन से यह स्पष्ट है कि उन्हें अपनी जन्मभूमि से बहुत प्रेम था, वहाँ उनकी माँ तथा परिवार के अन्य लोग रहते थे| मनुष्य कहीं भी रहे परंतु अपनी जन्मभूमि कि स्मृतियाँ हमेशा उसके साथ रहती है, हमारे लिए भी हमारी जन्मभूमि अनमोल है | हमें अपनी जन्मभूमि की  सभी वस्तुओं से प्रेम है| | यहीं हमारा पालन-पोषण हुआ | अत: हमें अपनी मातृभूमि पर गर्व है | हम चाहें जहां भी रहे परंतु ऐसा कोई भी कार्य नही करेंगे जिससे हमारी जन्मभूमि को अपमानित होना पड़े |

प्रश्न) निम्नलिखित वाक्यों में समुच्चयबोधक छांटकर अलग लिखिए |

क)    तब भी जब वह इलाहाबाद में थे और तब भी जब वह दिल्ली आते थे|

ख)   माँ ने बचपन में ही घोषित कर दिया था कि लड़का हाथ से गया |

ग)     वे रिश्ता बनाते थे तो तोड़ते नहीं थे|

घ)     उनके मुख से सांत्वना के जादू भरे शब्द सुनना एक ऐसी रोशनी से भर भर देता था कि लड़का हाथ से गया |

ङ)     पिता और भाइयों के लिए बहुत लगाव मन में नहीं था लेकिन वो स्मृति में अक्सर डूब जाते|

उत्तर) क) और ख) कि ग) तो घ) जो ड़) लेकिन

 

 

पाठ -5 अट नहीं रही है सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

 

पाठ -5 अट नहीं रही है

                    सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

प्रश्न) कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नही हट रही है?

उत्तर) फागुन मास का प्राकृतिक सौंदर्य अत्यंत आकर्षक है | चारों ओर हरियाली छा गई है | वृक्ष हरे- भरे पत्तों और रंग-बिरंगे फूलो से लद गए है | पूरा वातावरण  मधुर एवं सुगंधित बन गया है | फागुन का यह सौन्दर्य प्रकृति में समा नहीं रहा है अथार्त पूरा वातावरण सौंदर्य से परिपूर्ण है |

प्रश्न) प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?

उत्तर ) प्रस्तुत कविता में अट नहीं रही है में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने फागुन के सौन्दर्य और मादक रूप के प्रभाव को दर्शाया है| फागुन का सौन्दर्य असीम है कवि ने उसे हर जगह छलकते हुए दिखाया है, जो घर-घर फैला हुआ है| यहाँ “घर-घर भर देते हो” में फूलों की शोभा की ओर संकेत है और मन की खुशी की ओर भी | उड़ने को पर- पर करना भी ऐसा ही सांकेतिक प्रयोग है,जो पक्षियों की उड़ान पर लागू होता है |

प्रश्न) फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?

उत्तर ) फागुन में सर्वत्र मादकता सुंदरता छाई रहती है| प्राकृतिक  शोभा अपने यौवन पर होती है| पेड़-पौधे नए पत्तों, फल-फूलों से लद जाते हैं, हवा सुगंधित हो उठती है| आकाश साफ-स्वच्छ होता है| पक्षियों के समूह आकाश में विहार करते दिखाई देते हैं| बाग-बगीचों और पक्षियों में उल्लास भर जाता है| इस तरह फागुन का सौन्दर्य बाकी ऋतुओं से भिन्न है|

प्रश्न) इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ बताएँ|

उत्तर ) महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी छायावाद के प्रमुख कवि माने जाते है| उत्साह और अट नहीं रही  है  दोनों ही कविताओं में प्राकृतिक उपदानों का चित्रण और मानवीकरण हुआ है|काव्य के दोनों पक्ष अनुभूति और अभिव्यक्ति पक्ष है| इस दृष्टि से दोनों कविताएं सराहनीय है| निराला जी की भाषा एक ओर जहां संस्कृतनिष्ठ, सामसिक और आलंकारिक है| ग्रामीण शब्दों का प्रयोग भी दर्शनीय है| भाषा सरल,सुबोध और प्रवाहमयी है|

प्रश्न) होली के आस-पास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते है,उन्हें लिखिए|

उत्तर) होली का त्यौहर फाल्गुन मास में आता है| इस समय चारों ओर मादकता छा जाती है | चारों ओर रंग ही रंग बिखरे रहते है| प्रकृति के हरे –भरे वृक्ष  रंग -बिरंगे फूल होली के महत्व को ओर अधिक बढ़ा देते है| फूलों से युक्त वृक्ष चारों ओर मंद सुगंध बिखेर देते है| लोगों एक मन उमंग और आनंद से भर जाते है|

 

पाठ -5 उत्साह सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

 

पाठ -5  उत्साह

   सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

प्रश्न) कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर गरजने के लिए कहता है, क्यों?

उत्तर) बादल अपने जल से निश्चय ही पृथ्वी के प्राणो की प्यास बुझाता है और उन्हे प्रसन्न करता है|यही बादल विध्वंस भी मचा सकता है| कवि बादल को गरजने के लिए इसलिए कहता है ताकि सोई सोई आत्माएँ जाग जाएँ तथा उनके मन में क्रांति का संचार हो सके | क्रांति व परिवर्तन से ही युग का निर्माण हो सकता है | इसलिए कवि बादल को बरसने की अपेक्षा गरजने के लिए कहता है |

प्रश्न) कविता का शीर्षक उत्साह क्यों रखा गया है?

उत्तर) कवि बादल से गरजने के लिए कहता है| गर्जन बादल की शक्ति को व्यक्त करता है | इसलिए कवि बादल का गरज – गरजकर नई प्रेरणा देने की लिए आह्वान करता है | अत: कवि ने बादल के इस विशेष गुण के आधार पर इस कविता का शीर्षक उत्साह रखा है जो अत्यंत उचित एवं सार्थक है |

प्रश्न) कविता में बादल किन-किन अर्थो की और संकेत करता है ?

उत्तर) कविता में बादल कवि की कल्पना शक्ति और क्रांति की भावना की ओर संकेत करता है | बादल एक ओर तो पीड़ित लोगों की आशाओं और कामनाओं को पूरा करने वाला है तो दूसरी और जन- जन के मन में उत्साह और संघर्ष के भाव भरने वाला भी है |

प्रश्न) शब्दों का प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो,नाद-सौन्दर्य कहलाता है| उत्साह कविता में ऐसे कौन से शब्द है जिनमें नाद-सौन्दर्य मौजूद  है,छाँटकर लिखें|

 

उत्तर ) 1 “घेर घेर गगन, धराधार ओ !

      2 ललित ललित, काले घुँघराले,

        बाल कल्पना के-से पाले

      3 “विद्युत-छवि उर में”कविता की इन पंक्तियों में नाद-सौन्दर्य मौजूद है|

प्रश्न) उत्साह कविता का केन्द्रीय भाव का उल्लेख कीजिए|  अथवा

प्रश्न)  उत्साह कविता  के मूल उद्देश्य का वर्णन कीजिए|

उत्तर ) इस कविता में निराला ने बादल को उत्साह के प्रतीक के रूप में चित्रित किया है| कवि ने बादल से अनुरोध किया है कि वह सारे आकाश में छा जाए और खूब वर्षा करे ताकि तप्ति हुई धरती को शीतलता मिल सके | अपनी गर्जन से सोई हुई मानवता को जगा दे| वह संघर्षशील कवि के समान सबके जीवन में उत्साह भर दे|

 

 

 

Friday, July 16, 2021

पाठ 2 जॉर्ज पंचम की नाक कमलेश्वर

 

जॉर्ज पंचम की नाक

        कमलेश्वर

प्रश्न) सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है वह उनकी किस मानसिकता को दर्शाती है?

उत्तर) सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है, वह उनकी गुलाम मानसिकता को दर्शाती है| उनकी इस मानसिकता से पता चलता है कि वे स्वतंत्र होकर भी अंग्रेज़ो के प्रभाव से प्रभावित है | उन्हें अपने उस मेहमान की नाक बहुमूल्य लगती है जिसने भारतवर्ष को गुलाम बनाया और अपमानित किया | उनके पास जॉर्ज पंचम जैसे लोगों के बुरे कार्यो को उजागर कर विरोध करने का साहस नहीं है| वे उन्हें सम्मान देकर अपनी दासता की भावना को प्रमाणित करना चाहते हैं|

प्रश्न) रानी एलिज़ाबेथ के दर्जी की परेशानी का क्या कारण था | उसकी परेशानी को आप किस तरह तर्कसंगत ठहराएँगे?

उत्तर) रानी एलिज़ाबेथ  के दर्जी की परेशानी का कारण रानी के द्वारा भारत, नेपाल और पाकिस्तान के दौरे के समह पहनी जाने वाली पोशाकों की विविधता सुंदरता और आकर्षण था इन पोशाकों में रानी कैसी लगेगी दर्ज़ी की परेशानी उसकी अपनी दृष्टि से तर्कसंगत थी|  हर व्यक्ति अपने द्वारा किए गए कार्य को सर्वश्रेष्ठ रूप में प्रस्तुत करना चाहता है ताकि वे दूसरे के द्वारा की गई प्रशंसा को सहज रूप में बटोर सके |

प्रश्न) ओर देखते ही देखते नयी दिल्ली का काया पलट होने लगा’- नयी दिल्ली के काया पलट के लिए क्या क्या प्रयत्न किए गए होंगे?

उत्तर) जब इंग्लैंड की रानी एलिज़ाबेथ ने भारत की यात्रा करने का निश्चय किया तो भारत सरकार की प्रसन्नता का कोई ठिकाना न रहा| नयी दिल्ली की सड़के टूटी- फूटी और धूल से भरी हुई थी| उन्हे साफ करके उनकी मुरम्मत की गई होगी |पुराने भवनों को भी  सजाया गया होगा| हर चौराहे को रानी के स्वागत हेतु बंधनवार और फूलों से सजाया गया होगा| रानी के स्वागत के लिए रंग बिरंगे बोर्ड तैयार किए गए होंगे |

प्रश्न) आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान पान संबंधी आदतों आदि वर्णन का दौर चल पड़ा है

क)    इस तरह की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार है?

ख)     इस तरह की पत्रकारिता आम जनता विशेष कर युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव डालती है?

उत्तर) क) आज की पत्रकारी का चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान पान संबंधी आदतों के बारे  कुछ न कुछ लिखने में गर्व अनुभव करती है | एसी पत्रकारिता से सामान्य लोगों को निजी जीवन के संबंध में शाब्दिक जानकारी तो अवश्य मिलती है, जिनके बारे में वे न जाने क्या क्या सोचते रहते है | किन्तु ऐसी खबर को अखबार की प्रमुख खबर के रूप में नही छापना चाहिए | |

ग)     इस तरह की पत्रकारिता आम जनता के  रहन- सहन के तौर तरीके और फैशन के प्रति जागरूक करती है किन्तु इसका कभी- कभी इतना अधिक प्रभाव पड़ता है की युवक- युवतियाँ पढ़ाई लिखाई की अपेक्षा फैशन की और अधिक ध्यान देने लगते है|

प्रश्न) जॉर्ज पंचम की लाठ की नाक को पुन: लगाना  के लिए क्या क्या यत्न किए ?

उत्तर) उसने सबसे पहले वैसा ही पत्थर खोजने के लिए देश भर के पर्वत छान डाले जिसे उसकी मूर्ति बनी हुई थी| सरकारी फाइलें भी ढूँढी ताकि वहाँ से कोई अता पता चल सके| देश भर के महान पुरुषों की बनी प्रतिमाओं की नाकों का नाप भी लिया गया  पर वह उससे बड़ी थी पर अंत में किसी की जीवित नाक काटकर जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर लगा दी गई|

प्रश्न) प्रस्तुत कहानी में जगह-जगह कुछ ऐसे कथन आए है जो मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट करते हैं| उदाहरण के लिए फाइलें सब कुछ हज़म कर चुकी हैं| सब हुक्कामों ने एक-दूसरे की तरफ ताका|’पाठ में आए ऐसे अन्य कथन छाँटकर लिखिए |

उत्तर ) प्रस्तुत कहानी में मौजूदा व्यवस्थता पर चोट करने वाले निम्नलिखित कथन आए हैं-

क)    शंख इंग्लैंड में बज रहा था,गूँज हिंदुस्तान में आ रही थी|

ख)   गश्त लगती रही और लाट की नाक चली गई|

ग)     सभी सहमत थे कि यदि लाट की नाक नहीं तो हमारी भी नाक नहीं रह जाएगी|

घ)     हर हालत में इस नाक का होना जरूरी था|

ङ)     लेकिन बड़ी होशियारी से|

प्रश्न) नाक मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का द्योतक है| यह बात पूरी व्यंग्य रचना में किस तरह उभरकर आई है? लिखिए|

उत्तर ) लेखक का प्रमुख लक्ष्य ही नाक को मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का द्योतक सिद्ध करना रहा है| जॉर्ज पंचम भारत पर विदेशी शासन का प्रतीक है|उनकी लाट से नाक चली जाना उनका अपमान है| रानी एलीज़ाबेथ के आने पर सभी सरकारी अधिकारी अङ्ग्रेज़ी शासन के विरुद्ध अपनी नाराजगी जाहिर करने की अपेक्षा उसकी आराधना में जुट गए| यह कार्य भारत की नाक काटने के समान था जॉर्ज पंचम की नीतियाँ भारत विरोधी थीं| इसलिए उसकी नाक किसी भारतीय सेनानी से छोटी थी| उसकी नाक लगाने के लिए हजारों-लाखों रुपये खर्च कर दिए| अंत में कोई जीवित नाक उस पर लगा दी गई|   

प्रश्न)8  जॉर्ज पंचम की लाट  पर किसी भारतीय नेता, यहाँ तक कि भारतीय बच्चे की नाक फिट न होने की बात से लेखक किस ओर संकेत करना चाहता है?

उत्तर ) जॉर्ज पंचम की नाक सभी भारतीय नेताओं और भारतीय बच्चों की नाक से छोटी थी| लेखक ने बताया है कि भारतीय नेताओं और बलिदान देने वाले बच्चों का मान-सम्मान जॉर्ज पंचम की नाक से अधिक था|गांधी ,लाला लाजपतराय,सुभाषचंद्र बोस,नेहरू आदि नेता तो जॉर्ज पंचम से कहीं अधिक सम्माननीय थे| यह संकेत करना ही  लेखक का लक्ष्य रहा है|

प्रश्न) अखबारों ने जिंदा नाक लगाने कि खबर को किस तरह प्रस्तुत किया ?

उत्तर ) अखबारों ने जिंदा नाक लगाने कि खबर को केवल इतना ही  प्रस्तुत किया कि नाक का मसला हल हो गया है| राजपथ पर इंडियागेट के पास वाली जॉर्ज पंचम की लाट के नाक लग गई है|

प्रश्न) नयी दिल्ली में सब था ...... सिर्फ नाक नहीं थी|” इस कथन के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

उत्तर ) इस कथन के माध्यम से लेखक ने बताया  है कि देश में स्वतन्त्रता के बाद दिल्ली में हर प्रकार की सुख-सुविधा थी| केवल जॉर्ज पंचम का अभिमान और मान-सम्मान वाली ऊंची नाक नहीं थी | अङ्ग्रेज़ी राज्य में उनकी यहाँ तूती बोलती थी | उन्हीं का आदेश चलता था,किन्तु अब इंडिया गेट के पास वाली उनकी नाक भी शेष नहीं बची थी |

प्रश्न) जॉर्ज पंचम की नाक लगने वाली खबर के दिन अखबार चुप क्यों थे?

उत्तर )मूर्तिकार ने  जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर जिंदा नाक लगा दी गई |अखबारों में खबर छप गई कि नाक लगा दी गई है| उस दिन भारतियों को लगा कि उन सबकी नाक कट गई है| सारी भारतीय जनता का बहुत बड़ा अपमान हुआ | आज देश में उस व्यक्ति कि मूर्ति पर जिंदा नाक लगा दी है ,जिसने सारे भारत को गुलामी की जंजीरों में बाँधे रखा था | अपमान की पीड़ा से व्याकुल होने कारण उनके पास कहने के लिए कुछ न था | इसलिए अखबार  उस दिन चुप थे|

 

 

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...