पाठ -5 अट
नहीं रही है
सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
प्रश्न) कवि की आँख फागुन
की सुंदरता से क्यों नही हट रही है?
उत्तर) फागुन मास का प्राकृतिक
सौंदर्य अत्यंत आकर्षक है | चारों ओर हरियाली छा गई है |
वृक्ष हरे- भरे पत्तों और रंग-बिरंगे फूलो से लद गए है |
पूरा वातावरण मधुर एवं सुगंधित बन गया है |
फागुन का यह सौन्दर्य प्रकृति में समा नहीं रहा है अथार्त पूरा वातावरण सौंदर्य से
परिपूर्ण है |
प्रश्न) प्रस्तुत कविता
में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?
उत्तर ) प्रस्तुत कविता
में अट नहीं रही है में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने फागुन के सौन्दर्य और
मादक रूप के प्रभाव को दर्शाया है| फागुन का सौन्दर्य असीम है कवि ने उसे हर जगह
छलकते हुए दिखाया है, जो घर-घर फैला हुआ है|
यहाँ “घर-घर भर देते हो” में फूलों की शोभा की ओर संकेत है और मन की खुशी की ओर भी
| उड़ने को पर- पर करना भी ऐसा ही सांकेतिक प्रयोग है,जो
पक्षियों की उड़ान पर लागू होता है |
प्रश्न) फागुन में ऐसा
क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?
उत्तर ) फागुन में सर्वत्र
मादकता सुंदरता छाई रहती है| प्राकृतिक शोभा अपने यौवन पर होती है|
पेड़-पौधे नए पत्तों, फल-फूलों से लद जाते हैं,
हवा सुगंधित हो उठती है| आकाश साफ-स्वच्छ होता है|
पक्षियों के समूह आकाश में विहार करते दिखाई देते हैं|
बाग-बगीचों और पक्षियों में उल्लास भर जाता है| इस तरह फागुन का सौन्दर्य
बाकी ऋतुओं से भिन्न है|
प्रश्न) इन कविताओं के
आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ बताएँ|
उत्तर ) महाकवि सूर्यकांत
त्रिपाठी निराला जी छायावाद के प्रमुख कवि माने जाते है|
उत्साह और अट नहीं रही है दोनों
ही कविताओं में प्राकृतिक उपदानों का चित्रण और मानवीकरण हुआ है|काव्य
के दोनों पक्ष अनुभूति और अभिव्यक्ति पक्ष है| इस दृष्टि से दोनों
कविताएं सराहनीय है| निराला जी की भाषा एक ओर जहां संस्कृतनिष्ठ,
सामसिक और आलंकारिक है| ग्रामीण शब्दों का प्रयोग भी दर्शनीय है|
भाषा सरल,सुबोध और प्रवाहमयी है|
प्रश्न) होली के आस-पास
प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते है,उन्हें लिखिए|
उत्तर) होली का त्यौहर
फाल्गुन मास में आता है| इस समय चारों ओर मादकता छा जाती है |
चारों ओर रंग ही रंग बिखरे रहते है| प्रकृति के हरे –भरे वृक्ष रंग -बिरंगे फूल होली के महत्व को ओर अधिक बढ़ा
देते है| फूलों से युक्त वृक्ष चारों ओर मंद सुगंध बिखेर देते है|
लोगों एक मन उमंग और आनंद से भर जाते है|