Friday, December 31, 2021

विराट का भ्रम

 

विराट का भ्रम

प्रश्न) यदि पांडव अपना अज्ञातवास विराटराज के यहाँ न बिता रहे होते तो युद्ध में विराटराज की क्या स्थिति होती ? अपनी कल्पना से लिखिए |

उत्तर ) तब उन्हें  युद्ध के दूसरे मोर्चे अर्थात् दुर्योधन और उसके साथियों द्वारा उत्तर की ओर से किए गए हमले में पराजय का सामना करना पड़ता | क्योंकि दुर्योधन की सेना भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य जैसे वीर योद्धाओं से सज्जित थी |

प्रश्न) विराटराज ने कंक के मुँह पर चौपड़ का पासा दे मारा | क्यों ?

उत्तर ) विराटराज  के यहाँ पांडव विभिन्न रूपों में अपना अज्ञातवास बिता रहे थे | युधिष्ठिर भी कंक नामक दरबारी बनकर राजा के साथ चौपड़ खेला करते थे | विराटराज इस बात से अनभिज्ञ थे | कंक के मुँह से अपने पुत्र की प्रशंसा के स्थान पर सारथी की प्रशंसा सुनकर उन्होंने कंक के मुँह पर चौपड़ का पासा दे मारा |

प्रश्न) अर्जुन ने उत्तरा से विवाह करना क्यों उचित नहीं समझा ?

उत्तर ) अर्जुन ने विराटराज की पुत्री उत्तरा को नृत्य और गायन सिखाया था | वे उसे बेटी के समान मानते थे, इसलिए उन्होंने उत्तरा के साथ विवाह करना उचित न समझा |

Wednesday, November 24, 2021

प्रतिज्ञा-पूर्त्ति

                                                              पाठ 22 प्रतिज्ञा-पूर्ति

प्रश्न) अर्जुन के यूँ अचानक प्रकट होने पर भी कर्ण क्यों नहीं घबराया?

उत्तर) अर्जुन के यूँ अचानक प्रकट होने पर भी कर्ण इसलिए  नहीं घबराया क्योंकि वनवास और अज्ञातवास की अवधि पूरी होने से पहले पांडव पहचान में आ जाते हैं तो उन्हें पुनः बारह वर्ष का वनवास तथा एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना होगा|

प्रश्न) पांडवों की वनवास अवधि के बारे में भीष्म ने दुर्योधन को क्या बताया?

उत्तर) भीष्म ने दुर्योधन को बताया कि पांडवों के वनवास की अवधि कल ही पूरी हो चुकी है सूर्य,चंद्र,ग्रह की गति, वर्ष,महीने और पक्ष विभाग के पारस्परिक संबंध का ज्ञान रखने वाले इसकी पुष्टि करेंगे| तुम्हारी गणना में जरूर गलती हो गई है, क्योंकि सभी महीनों में दिनों की संख्या एक समान नहीं होती है|

प्रश्न) अर्जुन ने विजय उपरांत किस रूप में नगर में प्रवेश किया और क्यों?

उत्तर) अर्जुन ने राजकुमार उत्तर से कहा कि इस विजय का श्रेय तुम्हीं को मिलना चाहिए| तुम विजय योद्धा की भाँति चन्दन लगाकर तथा फूलों का हार पहनकर नगर में प्रवेश करना| ऐसा कहकर अर्जुन ने वृहन्नला का रूप बनाकर रथ पर सारथी के रूप में नगर में प्रवेश किया| अर्जुन ने राजा विराट को आश्चर्यचकित करने तथा राजकुमार उत्तर का मान-सम्मान बढ़ाने के उद्देश्य से ऐसा किया| 

अज्ञातवास

 

अज्ञातवास

प्रश्न) पांडव विराट के यहाँ चाकरी करने क्यों गए?

उत्तर ) बारह वर्षों की अवधि का वनवास बिताने के बाद पांडवों को अगला एक वर्ष इस प्रकार छिपकर बिताना था कि उन्हें कोई पहचान न सके| यदि वे पहचाने जाते तो उन्हें दुबारा वनवास बिताना पड़ता| अपनी पहचान छिपाते हुए दिन बिताने के लिए वे राजा विराट के यहाँ चाकरी करने गए|

प्रश्न) त्रिगर्त सुशर्मा विराट-राज्य पर आक्रमण करने के लिए इतना उत्सुक क्यों था?

उत्तर) मत्स्य देश के राजा विराट सुशर्मा के शत्रु थे| कीचक ने भी सुशर्मा को खूब तंग किया था| इस अवसर का लाभ उठाते हुए वह भी अपना पुराना बैर बराबर कर लेना चाहता था इसलिए विराट- राज्य पर आक्रमण करने के लिए इतना उत्सुक  था|

प्रश्न) विराट राज को छुड़ाकर लाने के लिए भेजते समय युधिष्ठिर ने भीम को क्या समझाया?

उत्तर ) विराट राज के बंदी हो जाने पर युधिष्ठिर ने भीम से उन्हें छुड़ाकर लाने के लिए कहा और समझाते हुए कहा, “भीम, यदि हमेशा की तरह तुम गर्जना करोगे तो शत्रुओं द्वारा पहचान लिए जाओगे| तुम्हें साधारण योद्धा की तरह रथासीन होकर धनुष-बाण से युद्ध करना होगा|”

प्रश्न) कौरव सेना को सामने देखकर अर्जुन ने क्या किया?

उत्तर ) अर्जुन ने गांडीव-धनुष सँभाल लिया और टंकार की| अर्जुन द्वारा की गई शंख ध्वनि सुनकर कौरव सेना में खलबली मच गई कि पांडव आ गए|

 

Saturday, November 13, 2021

यक्ष प्रश्न

 

पाठ 20  यक्ष प्रश्न

 

प्रश्न ) मनुष्य का कौन साथ देता है?

उत्तर ) धैर्य ही मनुष्य का साथी होता है|

प्रश्न) कौन-सा  शास्त्र है, जिसका अध्ययन करके मनुष्य बुद्धिमान बनता है?

उत्तर) कोई भी शास्त्र ऐसा नहीं है | महान लोगों की संगति से ही मनुष्य बुद्धिमान बनता है|

प्रश्न) आकाश से भी ऊंचा कौन है?

उत्तर ) पिता|

प्रश्न ) हवा से भी तेज चलने वाला कौन है ?

उत्तर ) मन |

प्रश्न ) घास से भी तुच्छ कौन सी चीज होती है ?

उत्तर ) चिंता

प्रश्न ) विदेश जाने वाले का कौन साथी होता है ?

उत्तर ) विद्या

प्रश्न ) घर मेन ही रहने वाला कौन साथी होता है ?

उत्तर ) पत्नी

प्रश्न ) मरणासन्न वृद्ध का साथी कौन होता है ?

उत्तर ) दान, क्योंकि वही मृत्यु के बाद अकेले चलने वाले जीव के साथ –साथ चलता है |

प्रश्न ) बरतनों में सबसे बड़ा कौन-सा है ?

उत्तर ) भूमि ही सबसे बड़ा बरतन है जिसमें सब कुछ समा सकता है |

प्रश्न ) सुख क्या है ?

उत्तर ) सुख वह चीज है जो शील और सच्चरित्रता पर स्थित है |

प्रश्न ) किसके छूट जाने पर मनुष्य सर्व प्रिय बनता है ?

उत्तर ) अहंभाव के छूट जाने पर |

प्रश्न ) किस चीज के खो जाने पर दुख नहीं होता ?

उत्तर ) क्रोध के खो जाने पर |

प्रश्न ) किस चीज को गँवाकर मनुष्य धनी बन जाता है ?

उत्तर ) लालच को गँवाकर |

प्रश्न )युधिष्ठर  ! निश्चित रूप से बताओ कि किसी ब्राह्मण होना किस बात पर निर्भर करता है? उसके जन्म पर, विद्या पर या  

        शील-स्वभाव पर?                                  

उत्तर )कुल या विद्या के कारण ब्रह्मानत्व प्राप्त नहीं हो जाता | ब्रह्मानत्व तो शील स्वभाव पर निर्भर होता है|
जिसमें शील न हो वह ब्राह्मण नहीं हो सकता
| जिसमें बुरे व्यसन हो वह चाहे कितना ही पढ़ा लिखा क्यों न हो, ब्राह्मण नहीं कहला सकता | चारों वेदों को जान करके भी चरित्र –भ्रष्ट हो तो उसे नीच ही समझना चाहिए |

प्रश्न) संसार में सबसे बड़े आश्चर्य की बात क्या है?

उत्तर ) हर रोज आँखों के सामने कितने ही प्राणियों को मृत्यु के मुँह में जाते देखकर बचे हुए प्राणी जो यह चाहते हैं कि हम अमर रहें ,यहीं महान आश्चर्य की बात है|

प्रश्न) तालाब के किनारे अपने भाइयों को मरा देखकर युधिष्ठर ने अपने मन में क्या-क्या सोचा?

उत्तर ) तालाब के किनारे अपने भाइयों को मरा देखकर युधिष्ठर ने अपने मन में निम्नलिखित बातें सोची|

        उनके शरीर पर कोई निशान न देखकर सब कुछ मायाजाल जैसा लगा|

        हो सकता है यह दुर्योधन का षड्यंत्र हो|

        संभव है पानी में विष मिला हो|

प्रश्न) यक्ष के रूप में कौन प्रश्न पूछ रहा था? उसने युधिष्ठर को क्या आशीष दिया?

उत्तर ) बारह वर्ष के बाद बारह माह का अज्ञातवास सफलतापूर्वक पूरा हो जाएगा | तुम्हें और तुम्हारे भाइयों को कोई पहचान नहीं सकेगा | तुम अपनी प्रतिज्ञा सफलता पूर्वक पूरा करोगे |

प्रश्न ) अज्ञातवास मत्स्य देश में बिताना ठीक रहेगा  इसके लिए अर्जुन ने क्या-क्या तर्क दिए?

उत्तर ) मतस्य देश के राजा विराट हैं और उनका नगर बहुत ही सुन्दर और समृद्ध है|

          मतस्य नरेश शक्ति सम्पन्न हैं | वे दुर्योधन की बातों में आने वाले नहीं हैं | उनके यहन छिपकर रहना ठीक होगा |

मायावी सरोवर

 

पाठ 19 मायावी सरोवर

प्रश्न) ब्राह्मण की झोपड़ी के बाहर कौन – सी लकड़ी टंगी थी? उसका क्या उपयोग था?

त्तर) ब्राह्मण की झोपड़ी के बाहर अरणी की लकड़ी टंगी थी| यह काठ की चौकोर लकड़ी थी जिस पर मथनी जैसी दूसरी लकड़ी से   रगड़कर उन दिनों आग उत्पन्न की जाती थी |

प्रश्न) नकुल ने कैसे अनुमान लगाया कि उस स्थान पर जलाशय हो सकता है?

उत्तर ) नकुल ने पेड़ पर चढ़कर देखा कि कुछ दूर पर ऐसे पौधे उगे है, जो केवल पानी के ही नजदीक उगते है|आस- पास बगुले भी उड़ रहे थे | यहीं सोचकर नकुल ने वहाँ जलाशय होने का अनुमान लगाया होगा |

प्रश्न) नकुल को  जलाशय  मिलने पर उसने क्या किया ?

उत्तर ) उसने सोचा कि पहले तो मैं अपनी प्यास बुझा लूँ और फिर तरकश में पानी भरकर भाइयों के लिए ले जाऊँगा |

प्रश्न)  नकुल के द्वारा  जलाशय  का  पानी पीने पर क्या हुआ?

उत्तर )  वे जलाशय का पानी पीते ही  बेहोश होकर भूमि पर गिर पड़े |

प्रश्न) जलाशय किसके अधीन था?

उत्तर ) एक यक्ष के अधीन था|

प्रश्न) जलाशय से आती हुई आवाज़ सुनकर अर्जुन ने क्या किया?

उत्तर ) जलाशय  में जल पीने के लिए उतरते समय वहीं आवाज़ सुनने पर अर्जुन को खूब गुस्सा आया | अर्जुन ने जिस दिशा से आती हुई आवाज़ को सुना था उसी दिशा में निशाना लगाकर बाण चलाने लगे |  बाणों को यूँ बेअसर होता देख अर्जुन गुस्से से भर उठे |

Saturday, October 2, 2021

कक्षा परीक्षा आठवीं

कक्षा परीक्षा देने के लिए नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें व सभी प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़ें व उत्तर दें।



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622CRXyq2QQ8kAW2sCbVCPF8gJ3e_Dk8xmziH6z2Q/viewform?usp=sf_link 

कक्षा सातवीं कक्षा परीक्षा 2


कक्षा परीक्षा 2 देने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।



https://forms.gle/T1TP1kEgGu324SD79 

हिंदी पखवाड़ा 2021 -22

हिंदी पखवाड़ा 2021-22


हिंदी पखवाड़ा 2021-22ऊपर दिए गए लिंक पर क्लिक करें और  

Monday, September 20, 2021

हिन्दी पखवाड़ा




नीचे दिए गए लिंक को हिन्दी पखवाड़ा की क्विज़ करने के लिए  ओपन करें|

https://forms.gle/EzU1SgdsSFRCpAAKA  




Sunday, September 19, 2021

हिन्दी पखवाड़ा कक्षा आठवीं

हिन्दी पखवाड़ा कक्षा आठवीं के लिए नीचे के लिंक पर क्लिक करें | 

https://forms.gle/UJnCfCNegwfZdVpj8

हिन्दी पखवाड़ा कक्षा सातवीं

हिन्दी पखवाड़ा कक्षा सातवीं के लिए नीचे  के लिंक पर क्लिक करें  |

 https://forms.gle/7myFhbGhEpZjnSJS8

हिन्दी पखवाड़ा कक्षा छठी

हिन्दी पखवाड़ा कक्षा छठी के लिए नीचे दिये लिंक पर क्लिक करें |

https://forms.gle/VMkeMiL143nS2gC6A



Tuesday, September 14, 2021

क्रिया

 

क्रिया

अर्थ के आधार पर क्रियाएँ दो प्रकार की होती है|

1 अकर्मक क्रिया – जिस क्रिया का फल कर्म पर न पड़कर कर्ता पर पढ़ता है, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं| इसमें किसी कर्म  की आवश्यकता नहीं होती ; जैसे-

लड़की हँस रही है|

चिड़ियाँ उड़ रही हैं|

तोता बोलता है |

इन वाक्यों में  हँस रही है,’ उड़ रही है, बोलता है क्रिया का कर्म नहीं है तथा इनके व्यापार और फल दोनों ही कर्ता में  हैं | अत: ये अकर्मक क्रियाएँ हैं|

2 सकर्मक क्रिया – जिन क्रिया शब्दों के व्यापार का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता हैं, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं: जैसे –

लोकेश चित्र बना रहा है|

नौकर गाड़ी साफ कर रहा है|

दर्ज़ी कपड़े सिल रहा है|

सकर्मक क्रिया की पहचान कर्ता और क्रिया के बीच क्या और किसे प्रश्न करने से हो जाती है | यदि इन प्रश्नों का उत्तर मिले तो क्रिया सकर्मक अन्यथा अकर्मक होती हैं;

जैसे -  लोकेश क्या बना रहा है?

 उत्तर )  चित्र |

अत: इस वाक्य में क्रिया सकर्मक हैं|


 

संधि

 

संधि

वर्णों  के पारस्परिक मेल को संधि कहते है| जैसे

 देव+ आलय = देवालय   (अ + आ = आ )

विद्या + आलय = विद्यालय ( आ + आ = आ)

महा + ईश     = महेश     ( आ + ई = ए )

सदा + एव     = सदैव     ( आ + ए = ऐ)

यदि + अपि    = यद्यपि   ( इ  + अ = य )

उत्  + ज्वल   = उज्ज्वल   ( त्+ ज = ज्ज )

सु   + आगत  = स्वागत    ( उ + अ = व )

निः  + धन      = निर्धन    ( :  + ध =र्ध)

 

संधि के भेद

हिन्दी में संधि तीन प्रकार की होती है |

1 स्वर संधि            2 व्यंजन संधि            3 विसर्ग संधि

1 स्वर संधि – दो स्वरों के मेल से जो परिवर्तन होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं| इसके पाँच भेद हैं-

i)        दीर्घ संधि

ह्रस्व या दीर्घ अ,, उ के आगे क्रमश: ह्रस्व या दीर्घ अ,, उ – आ जाए तो दोनों मिलकर

क्रमश: आ,, ऊ बन जाते हैं, जैसे –

अ+ अ= आ

 

मत + अनुसार = मतानुसार                पर + अस्त = परास्त

पुष्प + अंजलि = पुष्पांजलि               हिम + अंशु = हिमांशु

पर  + अधीन = पराधीन                   हिम + अद्रि = हिमाद्रि

न्याय + अधीश = न्या                   मूल्य +अंकन =मूल्यांकन


अ + आ = आ

   

भोजन + आलय = भोजनालय             मरण + आसन्न  =  मरणासन्न

सत्य  + आग्रह  = सत्याग्रह             धर्म  + आत्मा   =  धर्मात्मा

रत्न   + कार   = रत्नाकर               गज  +  आनन  =  गजानन  

न्याय  + धीश   = न्यायधीश             छात्र  + आवास  =  छात्रावास


आ + अ = आ

विद्या + अर्थी = विद्यार्थी                     यथा + अर्थ   = यथार्थ

परीक्षा + अर्थी = परीक्षार्थी                      रेखा  + अंकन = रेखांकन 

विद्या + अभ्यास = विद्याभ्यास                 सेवा  + अर्थ   = सेवार्थ

सीमा  + अंकन  = सीमांकन                   परीक्षा + अभ्यास = परीक्षाभ्यास


आ + आ = आ

 

महा + आत्मा = महात्मा                       विद्या  +  आलय = विद्यालय

महा + आशय = महाशय                       शिवा   +  आलय = शिवालय

वार्ता + लाप  = वार्तालाप                      चिकित्सा + आलय  = चिकित्सालय

इ + इ = ई

 

अभि  + इष्ट = अभीष्ट                       कवि + इन्द्र  = कवीन्द्र

अति + इव  = अतीव                          मुनि + इन्द्र  = मुनीन्द्र

हरी + इच्छा = हरीच्छा                         अति + इव  = अतीव

इ + ई = ई

          

 


कपि + ईश  = कपीश                          गिरि +ईश = गिरीश

मुनि + ईश्वर  =मुनीशवर                       परि +ईक्षा = परीक्षा

हरी +ईश  =हरीश                              कवि +ईश्वर  =कवीश्वर

ई + इ= ई


 

शची +इंद्र = शचीन्द्र                           लक्ष्मी + इच्छा =लक्ष्मीच्छा

पत्नी + इच्छा  =पत्नीच्छा                      नारी + इच्छा  = नारीच्छा

नारी+ इंदर =नरिंधर                             नदी +इंद्र = नदीन्द्र  

  + ई = ई


 

रजनी +ईश = रजनीश                            मही +ईश =महीश

नदी + ईश =नदीश                               नारी +ईश्वर =नारीश्वर

जानकी + ईश = जानकीश                    मही + ईश्वर =महीश्वर

 

उ + उ = ऊ 

 


भानु  + उदय  = भानूदय                 साधु + उपदेश =  साधूपदेश

वधू +उत्सव =   वधूत्सव                  सू + उक्ति   =  सूक्ति

गुरु + उपदेश =  गुरूपदेश                 लघु + उत्तर =  लघुत्तर

 

उ + ऊ = ऊ

 

       

प्रभु + ऊर्मि  = प्रभूर्मी               लघु + ऊर्मि = लघूर्मि

अंबु + ऊर्मि =  अंबूर्मि                सिंधु + ऊर्मि =सिंधूर्मि

 

ऊ +ऊ = ऊ

 


भू + ऊर्जा = भूर्जा                                    

 

अ + इ = ए 

 


राज + इंद्र  = राजेंद्र                        स्व + इच्छा  =  स्वेच्छा     

धीर + इंद्र  =  धीरेंद्र                       शुभ + इच्छा  =  शुभेच्छा  

ज्ञान + इंद्र = ज्ञानेंद्र                        धरम + इंद्र = धर्मेंद्र

नर +  इंद्र =  नरेंद्र                         वीर + इंद्र  = वीरेंद्र

 

अ + ई  = ए 

 


गण + ईश = गणेश                         सुर + ईश = सुरेश 

सोम + ईश = सोमेश                         नर + ईश = नरेश

योग + ईश = योगेश                         परम +ईश्वर = परमेश्वर  

दिन  + ईश = दिनेश                         राम + ईश्वर =रामेश्वर

 

आ+ इ = ए 


 

यथा + इष्ट = यथेष्ट                      राजा + इंद्र = राजेन्द्र

महा  + इंद्र = महेंद्र                        रमा + इंद्र =  रमेंद्र


आ+ ई = ए


 

लंका + ईश  = लकेंश                             महा + ईश = महेश 

महा +ईश्वर = महेश्वर                             राजा + ईश  = राजेश

रमा + ईश = रमेश                                उमा + ईश  = उमेश

 

अ + उ = ओ  

 


धर्म +उदय  = धर्मोदय                          सूर्य + उदय  = सूर्योदय

विवाह + उत्सव = विवाहोत्सव                     लोक + उक्ति = लोकोक्ति

चंद्र   + उदय  = चंद्रोदय                        हित + उपदेश = हितोपदेश

                                                  

आ + उ = ओ 

 


महा + उदय = महोदय                          गंगा + उदक = गंगोदक

महा + उसत्व  = महोत्सव                       महा + उदधि = महोदधि

 

अ + ऊ = ओ 

 


जल +उर्मि = जलोर्मि                            समूद्र + उर्मि  = समुद्रोर्मी

नव + ऊढा = नवोढा                             नव + उर्मि  =  नवोर्मि

 

आ + ऊ = ओ  


 

गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि                     महा +ऊर्मि = महोर्मि

महा + ऊर्जा = मर्होजा                      दया + ऊर्मि = दयोर्मि

 

  +  ऋ = अर्

 

 


देव + ऋषि = देवर्षि                       सप्त + ऋषि = सप्तर्षि

राज + ऋषि = राजर्षि                      ब्रह्म + ऋषि =ब्रह्मर्षि

 

  +  ऋ = अर्

 


 

महा + ऋषि = महर्षि                          राजा + ऋषि = राजर्षि


 ग ) वृद्धि संधि

यदि या के बाद या हो तो दोनों मिलकर हो जाते हैं, जैसे

अ + ए = ऐ

 

एक + एक  = एकैक                         लोक + एषणा = लोकैषणा

धन + एषणा = धनैषणा                       वित  + एषणा = वितैषणा


आ + ए = ऐ

 

सदा + एव  = सदैव                          यथा + एव  = यथैव

तथा + एव = तथैव

 

अ + ऐ = ऐ

 


मत + ऐक्य = मतैक्य                         देव + ऐश्वर्य = देवैश्वर्य

लोक + ऐक्य = लोकैक्य


आ + ऐ = ऐ

 


महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य


II) यदि या के बाद या हो तो मिलकर हो जाते हैं ,जैसे

अ + ओ = औ

 

  

दंत + औष्ठ = दंतौष्ठ                     परम + ओज = परमौज

अधर + ओष्ठ = अधरौष्ठ                   वन  + औषधि = वनौषधि

अ + औ = औ   

 

परम + औषध = परमौषध                      वन + औषध = वनौषध

परम + औदार्य = परमौदार्य

आ + ओ = औ

 


महा +औदार्य = महौदार्य                       महा + औषध =महौषध


घ) यण संधि

यदि इ या ई के बाद कोई भिन्न स्वर आ जाए तो  या का य बन जाता है, जैसे –

इ + अ = य

 

 

अति + अधिक = अत्यधिक                    यदि + अपि = यद्यपि


इ +  आ = या

 

अभि + आगत = अभ्यागत                    परि + आवरण = पर्यावरण

वि   + आयाम = व्यायाम                    अति + आचार = अत्याचार


ई + अ = य

 

 

नदी + अर्पण = नद्यर्पण                       देवी + आगमन = देव्यागमन


इ + उ = यु

 

उरि + उक्त = उपर्युक्त                        प्रति + उपकार = प्रत्युपकार

इ + ऊ = यू

 

 

वि + ऊह = व्यूह                             नि + ऊन = न्यून

इ + ए = ये

 


प्रति + एक = प्रत्येक

ई + ऐ= यै


 

देवी + ऐश्वर्य = देव्यैश्वर्य


Iv) यदि उ या ऊ के बाद कोई उ, ऊ से भिन्न स्वर आए तो उ या ऊ का व हो जाता है, जैसे-

उ + अ = व


 

सु +आगत = स्वागत               मनु + अंतर = मन्वंतर

अनु + अय = अन्वय               सु + अल्प   = स्वल्प


उ + आ = वा

 


सु + आगत =  स्वागत                             

उ + इ = वि

 


अनु + इति = अन्विति

उ + ए  = वे

 


अनु + एषण = अन्वेषण

ऋ + अ   =र


 

पित्र + अनुमति = पित्रनुमती

ऋ + आ   =रा


 

मात्र + आज्ञा = मात्राज्ञा                       पित्र + आज्ञा = पित्राज्ञा

ऋ + इ    =रि


 

मातृ + इच्छा = मात्रिच्छा

अयादि संधि

यदि या ’, के बाद कोई इनसे भिन्न स्वर आ जाए तो का अय’, का आय’,

का आय’, का अवतथा का आव बन जाता है, जैसे-

ए + अ = अय

 


ने + अन = नयन                        शे  + अन = शयन


  + अ =आय

 


गै + अक = गायक                     गै + अन  = गायन


  + अ =अव 

 


भो + अन = भवन                     पो + अन = पावन

   + अ =आव 

 



पौ  + अन = पावन                    पौ + अक = पावक


   + इ =आवि 

 



नौ   + इक = नाविक

औ + उ = आवु  

 


भौ  + उक = भावुक 

 

 

 




 

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...