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Sunday, May 15, 2022

मैं क्यों लिखता हूँ ? अज्ञेय (कक्षा दसवीं )

 

मैं क्यों लिखता हूँ ?

                                     अज्ञेय

प्रश्न 1) लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति उनके लेखन में कहीं अधिक मदद करती है, क्यों ?

उत्तर ) लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव वह होता है जो हम अपने सामने घटित होते हुए देखते है | परंतु अनुभूति संवेदना व कल्पना के सहारे  उस सत्य को आत्मसात कर लेती है, यह वास्तव में रचनाकर के साथ घटित नहीं होती है | अनुभव की तुलना में अनुभूति हृदय के भावों को बाहर निकालने में मदद करती है | लेखन के लिए अनुभूति का होना अति आवश्यक है | ये संवेदना को जागृत करती है  | लेखक अपनी आंतरिक विवशता के कारण ही लिखने के लिए प्रेरित होता है |

प्रश्न 2) लेखक ने अपने आपको हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता कब और किस तरह महसूस किया है ?

उत्तर ) लेखक हिरोशिमा के बम – विस्फोट के परिणामों को अखबारों में सुन चुका था | लेखक ने अपनी जापान यात्रा के दौरान हिरोशिमा का दौरा किया | उसने अस्पताल में जाकर भयानक विस्फोट से पीड़ित लोगों का इलाज होते हुए देखा | इस अनुभव द्वारा लेखक को उसका भोक्ता बनना स्वीकार न था | कुछ दिन बाद जब उसने किसी स्थान पर एक बड़े से पत्थर पर एक व्यक्ति की उजली छाया देखी | वास्तविकता यह है कि विस्फोट के समय कोई मनुष्य उस पत्थर के पास खड़ा होगा | रेडियो धर्मी किरणों ने उस मनुष्य को भाप की तरह उड़ाकर उसकी छाया पत्थर पर डाल दी | उसे देखकर लेखक के मन में एक अनुभूति थी | उसके मन में विस्फोट का प्रत्यक्ष दृश्य साकार हो उठा | उस समय वह विस्फोट का भोक्ता बन गया था |

प्रश्न 3) मैं क्यों लिखता हूँ के आधार पर बताइए कि –

क)   लेखक को कौन सी बातें लिखने के लिए प्रेरित करती है ?

उत्तर ) लेखक के अनुसार वह स्वयं जानना चाहता है कि वह क्यों लिखना चाहता है ? यहीं उसे जानने की इच्छा उसे लिखने के लिए प्रेरित करती है | वह अपने भीतर उत्पन्न होने वाली विवशता से मुक्ति पाने के लिए भी लिखता है | प्रसिद्धि पाने की इच्छा, आंतरिक विवशता और आर्थिक विवशता उसे लिखने के लिए प्रेरित करती है |

ख)   किसी रचनाकार के प्रेरणा स्रोत किसी दूसरे को कुछ भी रचने के लिए किस तरह उत्साहित कर सकते है ?

उत्तर ) जापान के हिरोशिमा नगर पर बम गिराने वालों ने भी अपना दुष्कर्म करके लेखक को लिखने के प्रेरित किया | कभी-कभी व्यक्ति संपादकों, प्रकाशकों व आर्थिक लाभ से उत्साहित होकर व्यक्ति लेखन कार्य करता है | किन्तु यह कारण कोई जरूरी नहीं है | किन्तु वास्तविक व सच्चा कारण तो लेखक के अंदर उत्पन्न विवशता ही होती है |

प्रश्न 4) कुछ रचनाकारों के लिए आतमनुभूति /स्वयम के अनुभव के साथ – साथ बाह्य दबाव भी महत्वपूर्ण होता है | ये बाह्य दबाव कौन कौन से हो सकते हैं ?

उत्तर ) ये दबाव निम्नलिखित हो सकते हैं –

1)  संपादकों का आग्रह

2)  प्रकाशकों का तक़ाज़ा

3)  आर्थिक लाभ

4)  किसी विषय- विशेष पर प्रचार- प्रसार करने का दबाव

5)  व्यक्तिगत विशेषताएँ

प्रश्न 5) क्या बाह्य दबाव केवल लेखन स जुड़े रचनाकारों को ही प्रभावित करते हैं या अन्य क्षेत्रों से जुड़े कलाकारों को ही प्रभावित करते हैं, कैसे ?

उत्तर ) बिल्कुल ! ये दबाव किसी भी क्षेत्र के कलाकार हो, सबको समान रूप से प्रभावित करते हैं | कलाकार अपनी अनुभूति व खुशी के लिए अवश्य अपनी कला का प्रदर्शन करता है | यदि व कला के किसी क्षेत्र में प्रसिद्धि प्राप्त कर लेता है तो लोगों की उनसे अपेक्षाएँ और बढ़ जाती  हैं | इसके साथ आर्थिक लाभ की भी इच्छा भी हर व्यक्ति पर दबाव डालती है | वह लोगों के दबाव व धन के लालच में आकार कार्य करता है | आज के समय में धन के बिना कोई कार्य संभव नहीं होता है | इस कारण धन की आवश्यकता संबंधी बाह्य दबाव तो हर क्षेत्र के व्यक्ति से जुड़ा रहता है | अत: स्पष्ट है कि केवल रचनाकारों को ही नहीं, अपितु हर क्षेत्र से जुड़े कलाकारों को बाह्य दबाव प्रभावित करते हैं |

प्रश्न 6) हिरोशिमा पर लिखी  कविता लेखक के अंत : व बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है | यह आप कैसे कह सकते हैं ?

उत्तर ) हिरोशिमा पर लिखी कविता को हम उनके आंतरिक विवशता का परिणाम कह सकते हैं| उनके लिए उसे किसी संपादक या प्रकाशक ने तकाजा नहीं किया था और न ही उनके सामने आर्थिक दबाव था | इस कविता को उन्होंने अपनी आंतरिक अनुभूति के प्रकाश से प्रभावित होकर लिखा था | अत: यह कविता कवि की आंतरिक अनुभूति का परिणाम है |

प्रश्न 7 ) हिरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानकतम दुरूपयोग है | आपकी दृष्टि में विज्ञान का दुरुपयोग कहाँ - कहाँ और किस तरह से हो रहा है ?

उत्तर )  हिरोशिमा तो विज्ञान के दुरूपयोग का ज्वलंत उदारहण है ही पर हम मनुष्यों द्वारा विज्ञान का और भी दुरुपयोग किया जा रहा है | जैसे –

विज्ञान ने यात्रा को सुगम बनाने के लिए हवाई जहाज़, गाड़ियों आदि का निर्माण किया परंतु हमने इनसे अपने वातावरण को ही प्रदूषित किया है| इस विज्ञान की देन के कारण आज हम अंग प्रत्यारोपण कर सकते हैं | परंतु आज इस देन का प्रयोग कर हम मानव अंगों का व्यापार करने लगे है | विज्ञान के प्रयोग से भ्रूण हत्या बढ़ रही है | आज हर देश परमाणु बम बनाने लगा है जो मानव जाति के लिए घातक है | विज्ञान ने कम्प्यूटर व इंटरनेट का आविष्कार मानव के कार्यों के बोझ को कम करने के लिए किया | परंतु हम मनुष्यों ने वायरस व साइबर क्राइम को जन्म दिया है |

प्रश्न 8) एक संवेदनशील युवा नागरिक की हैसियत से विज्ञान का दुरुपयोग रोकने में आपकी क्या भूमिका है ?

उत्तर ) वर्तमान युग में विज्ञान का दुरुपयोग करके पॉलिथीन का निर्माण हो रहा है | यह पॉलिथीन पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है | इससे वातावरण प्रदूषित होने के साथ साथ जीवों का जीवन भी मुसीबत में आ चुका है | कई पशु पक्षी मर रहे है | हमें पॉलिथीन के प्रयोग पर पाबंदी लगानी चाहिए | अनेक प्रकार के रासयानिक पदार्थ खरपतवारनाशक और पैदावार बढ़ाने के रूप में प्रयोग हो रहे हैं | इससे बहुत अधिक जहर हमारे शरीर में जा है | इसके स्थान पर पुरानी गोबर खाद का प्रयोग करना चाहिए |

 

अन्य प्रश्न

 

प्रश्न ) लेखक ने अपने लिखने  का कारण क्या बताया है ?

अथवा

प्रश्न ) मैं क्यों लिखता हूँ, पाठ का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) लेखक कहता है कि कोई भी लेखक अपने भीतर की विवशता से निजात पाने के लिए लिखता है | वह अपने भीतर की विवशता से मुक्ति पाने के लिए तथा तटस्थ होकर उसे देखने व पहचानने के लिए लिखता है | वह बाहरी दबावों से प्रभावित होकर बहुत कम लिखता है | उसके लिखने का मुख्य कारण तो उसके भीतर की विवशता है | और वह लिखकर ही स्वयम् को उससे मुक्त कर पाता है |

प्रश्न ) लेखक ने बाहरी दबाव की तुलना प्रश्न किससे की है ?

उत्तर ) लेखक का मानना है कि कुछ रचनाकार बाहरी दबाव के बिना नहीं लिख पाते हैं | उनकी स्थिति वैसे ही होती है जैसे कोई रचनाकार सवेरे नींद खुल जाने पर भी अलार्म बजने तक बिस्तर पर पड़ा रहे |  जब अलार्म बजता है तभी वह उठता है |  इसी प्रकार कुछ रचनाकर भी ऐसे ही होते है जब तक बाहरी दबाव उन पर न पड़े तब तक वे लिखना आरंभ नहीं करते |

प्रश्न ) लेखक ने अणु बम  द्वारा होने वाले व्यर्थ जीव – नाश का अनुभव कैसे किया ? 

अथवा

प्रश्न ) अज्ञेय के अनुसार सैनिक ब्रह्मपुत्र नदी में  बम किस उद्देश्य से फेंकते थे ?

उत्तर ) लेखक ने  युद्ध के समय देखा कि भारत की पूर्वी सीमा पर सैनिक ब्रह्मपुत्र नदी में  बम फेंक हजारों मछलियाँ को मार रहे थे | हालांकि उन्हें खाने के लिए कुछ ही मछलियों की जरूरत थी | इस प्रकार वे बम फेंककर हजारों जलीय जीवों को मार रहे थे | इसे देखकर ही लेखक ने अनुभव किया कि अणु बम के द्वारा भी ऐसे ही असंख्य लोगों को बेकार में ही मारा जा रहा है | हिरोशिमा पर गिराया गया अणु बम इसका स्पष्ट उदाहरण है |

प्रश्न) अज्ञेय ने हिरोशिमा  कविता की रचना कहाँ पर की ?

उत्तर ) लेखक ने हिरोशिमा कविता की रचना जापान से भारत लौटते समय  गाड़ी में बैठे- बैठे  लिखी | यह कविता सन् 1959 में प्रकाशित हुई तथा उनके अरी ओ प्रभामय  काव्य – संग्रह में संकलित है |

प्रश्न ) विज्ञान जैसे विषय के लिए लेखक को इतना गहन ज्ञान कैसे हुआ ?

उत्तर )  लेखक विज्ञान का विद्यार्थी था | उसने विज्ञान विषय पर शिक्षा प्राप्त की है | अणु शक्ति व रेडियो धर्मी पदार्थों का उसे ज्ञान था | उनके प्रभाव के बारे में उसे सम्पूर्ण जानकारी थी |

प्रश्न ) हिरोशिमा पर जब बम फेंका गया तब उस भयावहता को देखकर भी लेखक ने इस विषय पर क्यों नहीं  लिखा ?

उत्तर ) लेखक ने जब हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए जाने की घटना को पढ़ा और सुना तो उसने तत्काल इस विषय पर कुछ नहीं लिखा | वह व्याकुल, बैचन, दुखी तो हुआ, परंतु बौद्धिक रूप से | किसी भी विषय को कोई तभी लिख सकता है जब उसे वह विषय आंतरिक रूप से प्रभावित करे, उसकी संवेदनाओं को उजागर करे |

प्रश्न ) प्रत्यक्ष अनुभव व अनुभूति में क्या अंतर है ?

उत्तर ) जो घटना हमारी आँखों के सामने घटित होती है उसे प्रत्यक्ष अनुभव कहते हैं | यह कोई जरूरी नहीं कि उस घटना से हमारे भावों पर कोई प्रतिकूल या अनुकूल भाव उत्पन्न ही हो | आंतरिक अनुभूति वह होती है जो हमारे हृदय उत्पन्न होने वाले भावों को गहराई से प्रभावित करे, जिससे हमारे मन छटपटा उठे और कुछ कहने के लिए विवश हो जाए | प्रत्यक्ष अनुभव लिखने के लिए प्रेरित नहीं करते, लेकिन अनुभूति लिखने के लिए प्रेरित करती है |

प्रश्न ) लेखक को हिरोशिमा कविता लिखने के लिए किसने प्रेरित किया था ?

उत्तर ) पत्थर पर पड़ी छाया ने इतना पीड़ित व व्यथित कर दिया था कि उन्होंने अपनी पीड़ा कि अभिव्यक्ति के लिए हिरोशिमा नामक कविता लिखा डाली | वे इस प्रकार हिरोशिमा नगर के भोक्ता बन उन्हें उस झुलसे हुए पत्थर ने युद्ध की विभाषिका को व्यक्त करने हेतु प्रेरित किया था |

प्रश्न ) लेखक और कृतिकार में क्या अंतर होता है ?

उत्तर ) लेखक के अनुसार जो साहित्य भीतरी दबाव के कारण लिखा जाए और जिसमें मन की सच्ची छटपटाहट हो उसे कृति कहते है | धन, यश व विवशता आदि की प्रेरणा से लिखा जाने वाला साहित्य लेखन कहलाता है और इस स्थिति में लिखने वाला लेखक कहलाता है |

प्रश्न ) कविता प्रश्न का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य क्या है ?

उत्तर ) अज्ञेय जी की दृष्टि में मानव मन में विशिष्ट अनुभूति का उपजना कविता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है | मन की गहराई से निकली हुई कविता ही वास्तविक होती है |

प्रश्न ) एक जले हुए पत्थर पर प्रत्यक्ष एक लंबी उजली छाया का वर्णन कीजिए |

उत्तर ) जापान के नगर हिरोशिमा पर दूसरे महायुद्ध के दौरान परमाणु बम गिराया गया था| तब अपार विनाश के साथ - साथ एक बुरी तरह से झुलसे हुए पत्थर पर एक व्यक्ति की लंबी उजली छाया उस पत्थर पर ही रह गई होगी | वह व्यक्ति परमाणु बम से भाप बन कर उड़ गया होगा और उसकी छाया उस पत्थर पर ही रह गई होगी | वह झुलसा हुआ पत्थर अभी भी सहज रूप से इंसान के हृदय में उस समय प्रकट हुए विनाश को प्रकट कर देता है |

 

 

 

 

 

 

 

 

Friday, April 22, 2022

माता का अंचल (शिव पूजन सहाय ) कक्षा 10वीं हिन्दी कृतिका

 

माता का अंचल

शिव पूजन सहाय

कक्षा 10वीं हिन्दी कृतिका भाग 2 

प्रश्न 1) प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है | आपकी समझ में इसकी क्या वजह हो सकती है ?

उत्तर ) पाठ के अनुसार बच्चे का पिता  से अधिक जुड़ाव था | पिता केवल लालन पालन में सहयोग ही नहीं करता बल्कि वो उसका अच्छा दोस्त भी है | उसके अधिकतर खेलों में भाग भी लेता है | बच्चे को विपदा के समय अत्यधिक ममता व स्नेह की आवश्यकता होती है  और वो भोलोनाथ को केवल अपनी माँ की गोद में ही जाकर मिलती है | उसे असली शांति व प्रेम की छाया माँ की गोद में ही मिलती है |

प्रश्न 2) आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है ?

उत्तर ) बच्चे को अपने साथियों के साथ खेलने में गहरा आनंद आता है | उसे अपने मित्रों  के साथ तरह तरह के खेल खेलना अच्छा लगता है | वे उसके हर खेल व हुड़दंग के साथी होते है | अपने मित्रों को शोर मचाते, शरारतें करते और खेलते देखकर सब कुछ भूल जाता है | इसलिए रोना भूल कर वह दोबारा मित्र मंडली में खेल का मज़ा उठाने लगता है | उसी मग्नावस्था में वह सिसकना भी भूल जाता है |

प्रश्न 3) भोलानाथ और उसके साथियों के खेलने की सामाग्री आपके खेल और खेलने की सामाग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है ?

उत्तर ) भोलानाथ व उसके साथी खेल के लिए आँगन व खेतों पर पड़ी चीजों को ही खेल का आधार बनाते है | भोलानाथ के समय के बच्चों के खेलों की सामाग्री और साधन भी अलग थे ; उनके लिए मिट्टी के बर्तन, पत्थर, पेड़ों की पत्तियाँ, गीली मिट्टी, घर के सामान आदि वस्तुएँ होती थीं जिनसे खेलते हुए वे बहुत खुश होते थे | लेकिन आज जमाना बदल चुका है | आजकल माता पिता अपने बच्चों का बहुत ध्यान रखते हैं | वे बच्चों को ऐसे- वैसे घूमने की इजाजत नहीं देते है | भोलानाथ व उसके साथियों के खेल की सामाग्री आसानी से व बिना मूल्य के मिल जाती थी | परंतु आज खेल सामग्री बाज़ार से खरीदनी पड़ती है | आज के बच्चे क्रिकेट, साइकिल चलाने, दौड़ने कार्टून बनाने, तैरने, लूडो आदि खेल खेलने में आनंद लेते हैं |

प्रश्न 4) पाठ में आए प्रसंगों वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?

उत्तर ) पाठ में ऐसे कई प्रसंग आए हैं जिन्होंने मेरे दिल को छू लिया-

     1 ) रामायण पाठ कर रहे अपने पिता के पास बैठे हुए भोलानाथ का आईने में निहारकर खुश होना और जब उसके पिता जी उसे देखते हैं तो शर्माकर उसका आईना रख देने की अदा बड़ी प्यारी लगती है |

     2 ) बच्चे का अपने पिता के साथ कुश्ती लड़ना, कमजोर होकर बच्चे के बल को बढ़ावा देना फिर पछाड़ खाकर गिर जाना | बच्चे का अपने पिता की मूंछ खींचना आदि बड़े ही सुंदर प्रसंग है |

     3 ) बच्चों द्वारा बारात  का स्वांग रचते हुए समधि का बकरे पर सवार होना, दुल्हन को लिवा लाना व दुल्हन का पिता द्वारा घूँघट उठाने पर बच्चे का भाग जाना |

    4 ) कहानी के अंत में भोलानाथ का साँप को देखकर माँ के आंचल में छिप जाना, माँ की चिंता, हल्दी लगाना और बाबू जी के बुलाने पर भी माँ की गोद न छोड़ना – बड़े ही मन को छूने वाले दृश्य है |

प्रश्न 5) इस उपन्यास के अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है | आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं ?

उत्तर ) तीस दशक की ग्राम्य संस्कृति और आज की ग्राम्य संस्कृति में पर्याप्त अंतर दिखाई देता है | आज कुओं से पानी भरना व कुओं से खेतों की सिंचाई का प्रचलन समाप्त हो गया |  गाँवों में पीने के लिए पानी की वाटर सप्लाई हो गई है | पहले वृक्षों के झुरमट से घिरे कच्चे मिट्टी के घर हुआ करते थे | आज ज्यादातर गाँवों में पक्की मिट्टी के मकान है |  पहले गाँवों में भरे पूरे परिवार होते थे लेकिन आज एकल संस्कृति ने जन्म ले लिया है | विज्ञान के प्रभाव के बढने से लालटेन के स्थान पर बिजली, बैल के स्थान पर ट्रैक्टर का प्रयोग, घरेलू  खाद के स्थान पर कृत्रिम खाद का प्रयोग तथा विदेशी दवाइयों का प्रयोग हो रहा है | आज मनोरंजन के साधन भी बदल चुके है | आपसी भाईचारा व मेल-मिलाप भी कम होने लगा है | ग्रामीण अंचल की मौज मस्ती भरे जीवन के स्थान पर व्यस्त एवं तेज़ रफ्तार वाला जीवन देखा जाता है |

प्रश्न 6) यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखो |

उत्तर) प्रस्तुत पाठ में आदि से अंत तक मटा- पिता का बच्चों के प्रति वात्सल्य भाव का ही उद्घाटन हुआ है | यह व्यक्त करना ही पाठ का प्रमुख लक्ष्य है | इसमें लेखक ने अपने शैशव काल का वर्णन है | भोलानाथ के पिता का दिन का आरंभ ही भोलानाथ के साथ शुरू होता है | उसे नहलाकर पूजा पाठ करना, उसको अपने साथ घूमाने ले जाना, उसके साथ खेलना  व बालसुलभ क्रीडा से प्रसन्न होना आदि उनके स्नेह व प्रेम को व्यक्त करता है | पिता जी के द्वारा कंधे पर बिठाकर गंगा के किनारे ले जाना | उसके साथ कुश्ती करना बच्चों को खुश रखने के लिए खेल में हार जाना | साँप को देखने से डर जाने पर माँ द्वारा अंचल में छुपा लेना आदि में वात्सल्य भाव का वर्णन हुआ है |

प्रश्न 7) माता  का अंचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए |

उत्तर ) इस पाठ में पिता और पुत्र के सम्बन्धों का उल्लेख किया गया है | पाठ के अंत में केवल एक घटना में बच्चे सर्प को देखकर डर जाते है | तथा लेखक माँ से अलग होने का नाम नहीं लेता है |वह माँ के अंचल में छिप जाता है | यह बात पूरी कल्पना सी लगती है | क्योंकि  बच्चा दिन-रात पिता  के साथ घुला मिला रहता है | उसका अधिकांश समय पिता के साथ बीतता है |  इस पाठ का यह शीर्षक उपयुक्त नहीं है |क्योंकि यह पाठ के अंतिम भाग में लागू होता है |इस पाठ का शीर्षक मेरा बचपन अथवा शैशवकाल हो सकता है |

प्रश्न 8) बच्चे अपने माता –पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते है ?

उत्तर ) बच्चे अपने माता-पिता के साथ रहते हुए, माता पिता की बताई अच्छी बातों पर अमल करके, उनके साथ खेलकर, उनकी आज्ञा का पालन करके, उनकी गोद में बैठकर आदि बातों से अपने प्रेम को उनके प्रति व्यक्त करते है | माता पिता से किसी वस्तु के लिए जिद करके कुछ मांगते है और मिल जाने पर उनको विभिन्न तरह से प्यार करते है |

प्रश्न 9) प्रस्तुत पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है | वह आपके बचपन की दुनिया से किस प्रकार भिन्न है ?

उत्तर ) प्रस्तुत पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है | वह पूर्णतया ग्रामीण पर आधारित है | प्रस्तुत कहानी तीस के दशक की है | उस समय बच्चों के पास खेले कूदने के लिए अधिक समय हुआ करता था | उन पर पढ़ाई करने का दबाव इतना नहीं होता था जितना आज है | उनके पास खेलने के साधन भी नहीं होते थे | आज तीन वर्ष उम्र होते ही बच्चों को नर्सरी में करा दिया जाता है | आज के बच्चे विडियो गेम, टी0 वी0 , कंप्यूटर, शतरंज आदि खेलने में लगे रहते है | या फिर क्रिकेट, हॉकी बेडमिंटन आदि में ही अपना समय बिता देते है |

प्रश्न 1) मरदुए क्या जाने कि बच्चों को कैसे खिलना चाहिए इस पंक्ति में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए|

उत्तर ) प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से  पुरुष वर्ग पर करारा व्यंग्य किया है | यह वाक्य लेखक की माता ने उनके पिता से कहा था | यह पूर्ण सत्य है की नारी में पुरुष की अपेक्षा ममता का भाव अधिक होता है | एक बच्चे को जो प्यार दुलार नारी से माता के रूप में मिलता है वह पिता के रूप में पुरुष से नहीं मिलता है |  माँ बच्चे के मनोभावों को शीघ्र समझ जाती है | माँ बच्चे से भावनात्मक रूप से जुड़ी होती है |

प्रश्न 2) बचपन में बच्चे सरल निर्दोष और मस्त होते हैं – पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए|

उत्तर ) बच्चे बचपन में अपने सरल सहज स्वभाव के कारण मन के भावों को आसानी सरल वाणी में कह दे देते  है | वे नहीं चाहते कि उनके खेलों में बड़े भी सम्मिलित हों | इसलिए जब भी लेखक के पिता ने उन्हें खेलते हुए देखा और उनके करीब चले गए, तो बच्चे अपना खेल अधूरा छोडकर भाग गए |

प्रश्न 3) माता का अंचल पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) लेखक की बाल्यावस्था का बड़ा ही आकर्षण रूप में चित्रण किया है | लेखक ने बताया है कि बचपन में उसे अपने माता-पिता का भरपूर सहयोग मिलता है | बचपन में बहुत ही भोलापन होता है इसका साक्षात रूप पाठ में देखने को मिलता है | बच्चे अपने खेल में तल्लीन होकर खेलते है | वहाँ किसी प्रकार का भेदभाव जलन व घृणा नहीं होता | बच्चों की दुनिया का सजीव चित्रण अंकित करना लेखक का प्रमुख लक्ष्य होता है |

प्रश्न 4) बूढ़े दूल्हे पर की गई टिप्पणी के माध्यम से लेखक ने क्या संदेश दिया है ?

उत्तर) प्रस्तुत पाठ में लेखक ने बूढ़े दूल्हे  के माध्यम से व्यंग्यात्मक टिपण्णी की है | लेखक ने यहाँ सलाह दी है कि बुढ़ापा में विवाह नहीं करना चाहिए | हर कार्य समय पर ही अच्छा लगता है | बुढ़ापे में दूल्हा बनना सामाजिक व नैतिक दृष्टि से उचित नहीं है |लेखक का यहाँ संदेश है कि वृद्ध विवाह नहीं होना चाहिए |

 

समास

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