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Wednesday, January 5, 2022

भीष्म शर-शैय्या पर

 पाठ 31 भीष्म शर-शैय्या पर

प्रश्न ) भीष्म शिखंडी के बाणों का प्रत्युत्तर  क्यों नहीं दे रहे थे ?

उत्तर ) शिखंडी वास्तव में पूर्ण पुरुष नहीं था | वह अंबा नाम की  स्त्री ही थी,जिसे स्वयंवर से विचित्रवीर्य के लिए जबरदस्ती उठाकर लाया था | पर वह शाल्व नरेश से विवाह करना चाहती थी | उसने ये बात भीष्म को बताई | तब भीष्म ने उसे शाल्व नरेश के पास जाने की आज्ञा दे दी | शाल्व नरेश ने  विवाह करने से इंकार कर दिया | इस प्रकार दोनों तरफ से निराश हुई अंबा ने स्त्री रूप छोड़कर अपना नाम शिखंडी रख लिया | शिखंडी के स्त्री होने की बात भीष्म जानते थे| अतः वह उसके बाणों का प्रत्युत्तर नहीं दे रहे थे |

प्रश्न) भीष्म ने ऐसा क्यों कहा कि अभी उनके मरने का समय नहीं हुआ है ?

उत्तर ) भीष्म ने अपने पिता के आजीवन ब्रह्मचारी रहकर विवाह न करने का संकल्प लिया और आजीवन ब्रह्मचारी बने रहे | उनके इस त्याग पर उनके पिता ने उनको इच्छित मृत्यु का वरदान दिया था | इस कारण भीष्म की मृत्यु तभी होती जब वे चाहते |

प्रश्न ) युधिष्ठिर को जीवित पकड़ने की बात सुनकर द्रोण ने संतोष क्यों मान लिया ?

उत्तर ) द्रोण ने जब युधिष्ठिर को जीवित पकड़ने के लिए दुर्योधन का उद्देश्य सुना तो उनका मन घृणा से भर गया , पर उनके मन संतोष इसलिए हुआ कि अब मौका मिलने पर युधिष्ठिर को जान से नहीं मारना है |

सातवाँ ,आठवाँ और नवाँ दिन

 

पाठ 30 सातवाँ ,आठवाँ और नवाँ दिन

प्रश्न ) सातवें दिन का युद्ध अन्य दिनों से किस तरह भिन्न था ?

उत्तर ) सातवें दिन का युद्ध किसी एक स्थान पर केन्द्रित नहीं था | युद्ध-क्षेत्र में अनेक वीरों के साथ विपक्षी सेना के वीर युद्ध कर रहे थे | अर्जुन के विरुद्ध भीष्म, द्रोणाचार्य से विराटराज, शिखंडी से अश्वत्थामा आदि वीर इसी प्रकार युद्ध कर रहे थे |

प्रश्न ) इरावान के मारे जाने का घटोत्कच पर क्या असर हुआ ?

उत्तर ) अर्जुन पुत्र इरावन के युद्ध में मारे जाने पर भीम-घटोत्कच ने तेज़ गर्जना की और कौरव सेना पर टूट पड़ा | उसकी गर्जना सुनकर युधिष्ठिर ने उसकी मदद के लिए भीमसेन को भेज दिया | इस प्रकार दोनों ने भीषण युद्ध कर कौरव सेना को क्षति पहुंचाई |

प्रश्न ) नवें दिन अभिमन्यु किसके साथ युद्ध कर रहा था ? उसका क्या परिणाम हुआ ?

उत्तर ) नवें दिन अर्जुन पुत्र अभिमन्यु और अलम्वुश में घोर संग्राम छिदा हुआ था | दोनों ही वीर युद्धकला में पारंगत थे | अभिमन्यु ने अपने पिता की भाँति अत्यंत कुशलता से युद्ध करते हुए विपक्षी को परेशान कर दिया |

Sunday, January 2, 2022

चौथा,पाँचवाँ और छठा दिन

पाठ 29 चौथा,पाँचवाँ और छठा दिन

प्रश्न ) चौथे दिन के युद्ध में किस पक्ष की ज्यादा हानि हुई थी ?

उत्तर ) चौथे दिन के युद्ध में  दुर्योधन के आठ भाई मारे गए | पांडवों की ओर से घटोत्कच ने ऐसा भीषण युद्ध किया कि कौरव सेना का उसके सामने ठहरना मुश्किल हो गया | भीष्म को युद्ध बंद कर देना पड़ा | इस प्रकार चौथे दिन के युद्ध में कौरव पक्ष की ज्यादा हानि हुई थी |

प्रश्न ) धृतराष्ट्र अपना दुख हल्का करने के लिए क्या करते थे ?

उत्तर ) संजय से युद्ध का हाल सुनकर धृतराष्ट्र बहुत दुखी थे | उनके अनेक पुत्र मारे जा चुके थे | दुख जब उनकी सहनशक्ति से भारी हो जाता तब वे कुछ कह सुनकर अपना दुख हल्का करने की कोशिश करते |

प्रश्न ) छठे दिन यदि घायल को कृपाचार्य न बचाते तो क्या होता ?अपनी कल्पना से लिखिए |

उत्तर ) छठे दिन यदि घायल दुर्योधन को कृपाचार्य न बचाते तो दुर्योधन की मृत्यु हो जाती | अठारह दिनों तक युद्ध न चलता और हजारों वीर असमय मारे जाने से बच जाते | इस प्रकार अपार जन-धन की हानि न होती |

पहला,दूसरा और तीसरा दिन

 

पाठ 28 पहला,दूसरा और तीसरा दिन

प्रश्न ) कौरवों –पांडवों के बीच हुए इस युद्ध में रिश्तों का कोई महत्व नहीं रह गया था |तर्क सहित उत्तर दीजिए|

उत्तर ) यह सच है कि इस युद्ध में रिश्तों का कोई महत्व नहीं रह गया था | उसका कारण यह था कि भाई-भाई, पिता-पुत्र, मामा-भांजा, चाचा-भतीजे, गुरु-शिष्य तथा सगे-संबंधी अपनों की जान लेने को उतारू थे | इस युद्ध में  कोई किसी की परवाह किए बिना एक दूसरे के प्राणों के प्यासे बने बैठे थे |

प्रश्न ) दूसरे दिन की समाप्ति से पहले कौरव सेना के सेनानी पश्चिम की ओर क्यों देखे जा रहे थे ?

उत्तर ) दूसरे दिन की समाप्ति से पहले कौरव-सेना के सेनानी आसमान की ओर इसलिए देखे जा रहे थे कि कब सूर्यास्त हो और उन्हें युद्ध से छुटकारा मिले | उस समय धर्मयुद्ध का यह नियम था कि सूर्यास्त होते ही दोनों पक्षों के युद्ध बंद कर देंगे |

प्रश्न ) दुर्योधन के सारथी ने जो सोचा था, हुआ उससे उल्टा कैसे ?

दुर्योधन जब भीमसेन के बाण से चोट खाकर रथ पर गिरकर मूर्छित हो गया तो उसके सारथी ने सोचा कि दुर्योधन को रण-क्षेत्र से बाहर ले जाए जिससे उसके मूर्छित होने का किसी को पता न चले | जैसे ही वह रथ बाहर की ओर ले चला था कि सेना का अनुशासन टूट गया और सैनिक में  भगदड़ मच गई |

पांडवों व कौरवों के सेनापति

                                        पाठ 27 पांडवों व कौरवों के सेनापति

प्रश्न ) पांडवों के सेना का नायक किसे बनाया गया और क्यों ?

उत्तर ) युधिष्ठिर ने सेना को सात भागों में बाँटकर प्रत्येक भाग का नायक नियुक्त कर दिया,सेनापति के लिए सेना के वीरों ने अनेक नाम सुझाए, पर अर्जुन की राय युधिष्ठिर को सब प्रकार से ठीक लगी |

प्रश्न ) अर्जुन रथ से कूदकर युधिष्ठिर के पीछे इसलिए भागे होंगे, क्योंकि –

उत्तर ) i) युधिष्ठिर को अकेला ,निहत्था देखकर दुर्योधन कोई कुचाल न चल दे |

     ii)युधिष्ठिर को अचानक क्या हो गया जो इस तरह विपक्षी सेना की ओर भागे जा रहे हैं |

iii)        युधिष्ठिर के इस कृत्य का अनुमान अर्जुन न कर सके होंगे |

प्रश्न ) भीष्म और द्रोण जैसे वीरों ने विपक्ष में रहकर भी युधिष्ठिर को विजय होने का आशीर्वाद

       क्यों दिया होगा ?

उत्तर ) भीष्म और द्रोण जैसे महाबली योद्धा दुर्योधन के पक्ष में विवशता से लड़ रहे थे स्वेच्छा से नहीं | उन्हें पता था कि पांडव सत्य और न्याय के लिए लड़ रहे हैं जबकि दुर्योधन अपने अहंकार तथा स्वार्थ पूर्ति के लिए | यही कारण रहा होगा कि उन्होंने पांडवों को विजय होने का आशीर्वाद दिया |

Saturday, January 1, 2022

शांतिदूत श्रीकृष्ण

 

पाठ 26 शांतिदूत श्रीकृष्ण

प्रश्न ) ऐसा उपाय करें जिससे आप भाग्यशाली बनें से कृष्ण का क्या आशय था ?

उत्तर ) ऐसा कहकर श्रीकृष्ण, धृतराष्ट्र को यह कहना चाहते थे कि पांडव तो संधि के लिए तैयार हैं| युद्ध रोकना या युद्ध आरंभ करवाना आपके हाथ में हैं | आप अपने पुत्रों को समझाकर युद्ध में कुल के विनाश को रोक सकते है | युद्ध ने होने पर आपके सभी पुत्र और परिवार जीवित रहेंगे |

प्रश्न ) धृतराष्ट्र ने सभा में गांधारी को क्यों बुलाया ?

उत्तर ) धृतराष्ट्र ने सभा में गांधारी को इसलिए बुलाया क्योंकि  माँ को सभा में आया जानकर दुर्योधन सभा में आ जाएगा | माँ की ममता पुत्र पर पिता की अपेक्षा अधिक रहती है और पुत्र भी माँ को  ज्यादा प्यार करता है| एक पुत्र के कारण ही दुर्योधन शायद अपनी माँ का कहना मान ले | गांधारी की समझ बहुत स्पष्ट है तथा वह दूर की सोच सकती है |

प्रश्न ) तुम्हारे विचार से कुंती ने कर्ण से क्या अनुरोध किया और क्यों ?

उत्तर ) कुंती ने कर्ण से दुर्योधन और कौरवों का साथ छोडकर पांडवों की ओर से लड़ने का अनुरोध किया | मेरे विचार से उसने ऐसा इसलिए किया होगा कि कुंती सबसे पहले एक माँ थी| उसकी ममता अपने पुत्रों पर बराबर थी चाहे वह कर्ण हो या अर्जुन या अन्य | कुंती अपने पुत्रों को जीवित देखना चाहती थी और तभी संभव है जब कर्ण पांडव पक्ष से युद्ध करे| अपने सभी पुत्रों की जीवित  रहने की कामना के कारण ही वह कर्ण के पास गई |

 

राजदूत संजय

 पाठ 25 राजदूत संजय

प्रश्न ) पांडव हमारी ग्यारह अक्षौहिणी सेना देखकर डर गए है – दुर्योधन के इस कथन से आप सहमत हैं या असहमत और क्यों ?

उत्तर ) दुर्योधन के  इस कथन से मैं बिल्कुल असहमत हूँ | दुर्योधन बड़बोला था | उसे अपनी शक्ति पर घमंड था | वह सोचता था कि पांडवों को युद्ध में हराकर सारे राज्य का स्वामी बन जाएगा | वह तो हर स्थिति मैं युद्ध चाहता था |

प्रश्न) वे कौन-से दो अवसर थे जब भीष्म तथा अन्य कौरव अर्जुन का पराक्रम देख चुके थे ?

उत्तर ) पहला अवसर था जब दुर्योधन ने अर्जुन को बंदी बना लिया था, तब अर्जुन ने दुर्योधन को गन्धर्वों से मुक्त कराया था |

दूसरी बार तब जब विराट राज्य के उत्तरी छोर पर दुर्योधन ने सेना सहित आक्रमण कर दिया था| तब अर्जुन ने अकेले ही सारी सेना को हराते हुए विजय प्राप्त की थी |

प्रश्न ) दुर्योधन का स्वभाव जानते हुए भी श्री कृष्ण हस्तिनापुर क्यों जाना चाहते थे ?

उत्तर ) श्रीकृष्ण कौरवों और पांडवों दोनों के समान रूप से हितकारी थे | वे जानते थे कि युद्ध हुआ तो दोनों ओर के अनेक वीर तथा बंधु- बांधव ही मारे जाएंगे | वे युद्ध की संभावना टालकर सारे संसार का कल्याण चाहते थे, इसलिए श्रीकृष्ण हस्तिनापुर जाना चाहते थे |

 

मंत्रणा

पाठ 24 मंत्रणा

प्रश्न) सात्यकी ने ऐसा क्यों कहा होगा कि दुर्योधन बगैर युद्ध के मानेगा नहीं?

उत्तर) सात्यकि ने ऐसा इसलिए कहा होगा, क्योंकि –

i)        सात्यकि दुर्योधन के स्वभाव से भली- भांति परिचित रहे होंगे |

ii)       पांडवों ने प्राण निभाकर खेल कि शर्तों का पालन किया,फिर भी दुर्योधन ने उन्हें मरने का प्रयास किया |

प्रश्न) दुर्योधन युद्ध के बिना राज्य वापस नहीं करेगा , यह जानकार भी उसके पास दूत क्यों भेजे जा रहे थे ?

उत्तर) पांडव पक्ष के अधिकांश लोग शांतिपूर्वक समस्या क्यों हल करना चाहते थे कि युद्ध से किसी का भला नहीं हो सकता | इसके अलावा वे दुर्योधन और पांडवों से संधि करना चाहते थे |

प्रश्न) अर्जुन ने मौका दिये जाने पर भी श्री कृष्ण को ही क्यों चुना ?

उत्तर ) अर्जुन ये जानते थे कि वे सत्य के लिए लड़ रहे हैं | श्री कृष्ण सत्य का नाश अवश्य कर देंगे | भले ही श्रीकृष्ण निहत्थे रहेंगे पर श्रीकृष्ण इतने शक्तिशाली थे कि सेना उनकी शक्ति के सामने कहीं न ठहरती | इसके अलावा श्रीकृष्ण और अर्जुन में अत्यधिक प्रेम और अपनत्व था |

प्रश्न) मद्रराज शल्य को धोखे से दुर्योधन ने किस तरह अपनी तरफ कर लिया ?

उत्तर ) मद्रराज शल्य ने भी एक विशाल सेना एकत्रित की और पांडवों की सहायता के लिए चल पड़े | उनके सेना सहित आने की खबर सुनकर दुर्योधन ने शल्य का इतना आदर किया कि वे पांडवों को सहायता देने की बात भूलकर दुर्योधन को सहायता देने का वचन दे बैठे |

 

 


Friday, December 31, 2021

विराट का भ्रम

 

विराट का भ्रम

प्रश्न) यदि पांडव अपना अज्ञातवास विराटराज के यहाँ न बिता रहे होते तो युद्ध में विराटराज की क्या स्थिति होती ? अपनी कल्पना से लिखिए |

उत्तर ) तब उन्हें  युद्ध के दूसरे मोर्चे अर्थात् दुर्योधन और उसके साथियों द्वारा उत्तर की ओर से किए गए हमले में पराजय का सामना करना पड़ता | क्योंकि दुर्योधन की सेना भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य जैसे वीर योद्धाओं से सज्जित थी |

प्रश्न) विराटराज ने कंक के मुँह पर चौपड़ का पासा दे मारा | क्यों ?

उत्तर ) विराटराज  के यहाँ पांडव विभिन्न रूपों में अपना अज्ञातवास बिता रहे थे | युधिष्ठिर भी कंक नामक दरबारी बनकर राजा के साथ चौपड़ खेला करते थे | विराटराज इस बात से अनभिज्ञ थे | कंक के मुँह से अपने पुत्र की प्रशंसा के स्थान पर सारथी की प्रशंसा सुनकर उन्होंने कंक के मुँह पर चौपड़ का पासा दे मारा |

प्रश्न) अर्जुन ने उत्तरा से विवाह करना क्यों उचित नहीं समझा ?

उत्तर ) अर्जुन ने विराटराज की पुत्री उत्तरा को नृत्य और गायन सिखाया था | वे उसे बेटी के समान मानते थे, इसलिए उन्होंने उत्तरा के साथ विवाह करना उचित न समझा |

Wednesday, November 24, 2021

प्रतिज्ञा-पूर्त्ति

                                                              पाठ 22 प्रतिज्ञा-पूर्ति

प्रश्न) अर्जुन के यूँ अचानक प्रकट होने पर भी कर्ण क्यों नहीं घबराया?

उत्तर) अर्जुन के यूँ अचानक प्रकट होने पर भी कर्ण इसलिए  नहीं घबराया क्योंकि वनवास और अज्ञातवास की अवधि पूरी होने से पहले पांडव पहचान में आ जाते हैं तो उन्हें पुनः बारह वर्ष का वनवास तथा एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना होगा|

प्रश्न) पांडवों की वनवास अवधि के बारे में भीष्म ने दुर्योधन को क्या बताया?

उत्तर) भीष्म ने दुर्योधन को बताया कि पांडवों के वनवास की अवधि कल ही पूरी हो चुकी है सूर्य,चंद्र,ग्रह की गति, वर्ष,महीने और पक्ष विभाग के पारस्परिक संबंध का ज्ञान रखने वाले इसकी पुष्टि करेंगे| तुम्हारी गणना में जरूर गलती हो गई है, क्योंकि सभी महीनों में दिनों की संख्या एक समान नहीं होती है|

प्रश्न) अर्जुन ने विजय उपरांत किस रूप में नगर में प्रवेश किया और क्यों?

उत्तर) अर्जुन ने राजकुमार उत्तर से कहा कि इस विजय का श्रेय तुम्हीं को मिलना चाहिए| तुम विजय योद्धा की भाँति चन्दन लगाकर तथा फूलों का हार पहनकर नगर में प्रवेश करना| ऐसा कहकर अर्जुन ने वृहन्नला का रूप बनाकर रथ पर सारथी के रूप में नगर में प्रवेश किया| अर्जुन ने राजा विराट को आश्चर्यचकित करने तथा राजकुमार उत्तर का मान-सम्मान बढ़ाने के उद्देश्य से ऐसा किया| 

अज्ञातवास

 

अज्ञातवास

प्रश्न) पांडव विराट के यहाँ चाकरी करने क्यों गए?

उत्तर ) बारह वर्षों की अवधि का वनवास बिताने के बाद पांडवों को अगला एक वर्ष इस प्रकार छिपकर बिताना था कि उन्हें कोई पहचान न सके| यदि वे पहचाने जाते तो उन्हें दुबारा वनवास बिताना पड़ता| अपनी पहचान छिपाते हुए दिन बिताने के लिए वे राजा विराट के यहाँ चाकरी करने गए|

प्रश्न) त्रिगर्त सुशर्मा विराट-राज्य पर आक्रमण करने के लिए इतना उत्सुक क्यों था?

उत्तर) मत्स्य देश के राजा विराट सुशर्मा के शत्रु थे| कीचक ने भी सुशर्मा को खूब तंग किया था| इस अवसर का लाभ उठाते हुए वह भी अपना पुराना बैर बराबर कर लेना चाहता था इसलिए विराट- राज्य पर आक्रमण करने के लिए इतना उत्सुक  था|

प्रश्न) विराट राज को छुड़ाकर लाने के लिए भेजते समय युधिष्ठिर ने भीम को क्या समझाया?

उत्तर ) विराट राज के बंदी हो जाने पर युधिष्ठिर ने भीम से उन्हें छुड़ाकर लाने के लिए कहा और समझाते हुए कहा, “भीम, यदि हमेशा की तरह तुम गर्जना करोगे तो शत्रुओं द्वारा पहचान लिए जाओगे| तुम्हें साधारण योद्धा की तरह रथासीन होकर धनुष-बाण से युद्ध करना होगा|”

प्रश्न) कौरव सेना को सामने देखकर अर्जुन ने क्या किया?

उत्तर ) अर्जुन ने गांडीव-धनुष सँभाल लिया और टंकार की| अर्जुन द्वारा की गई शंख ध्वनि सुनकर कौरव सेना में खलबली मच गई कि पांडव आ गए|

 

Saturday, November 13, 2021

यक्ष प्रश्न

 

पाठ 20  यक्ष प्रश्न

 

प्रश्न ) मनुष्य का कौन साथ देता है?

उत्तर ) धैर्य ही मनुष्य का साथी होता है|

प्रश्न) कौन-सा  शास्त्र है, जिसका अध्ययन करके मनुष्य बुद्धिमान बनता है?

उत्तर) कोई भी शास्त्र ऐसा नहीं है | महान लोगों की संगति से ही मनुष्य बुद्धिमान बनता है|

प्रश्न) आकाश से भी ऊंचा कौन है?

उत्तर ) पिता|

प्रश्न ) हवा से भी तेज चलने वाला कौन है ?

उत्तर ) मन |

प्रश्न ) घास से भी तुच्छ कौन सी चीज होती है ?

उत्तर ) चिंता

प्रश्न ) विदेश जाने वाले का कौन साथी होता है ?

उत्तर ) विद्या

प्रश्न ) घर मेन ही रहने वाला कौन साथी होता है ?

उत्तर ) पत्नी

प्रश्न ) मरणासन्न वृद्ध का साथी कौन होता है ?

उत्तर ) दान, क्योंकि वही मृत्यु के बाद अकेले चलने वाले जीव के साथ –साथ चलता है |

प्रश्न ) बरतनों में सबसे बड़ा कौन-सा है ?

उत्तर ) भूमि ही सबसे बड़ा बरतन है जिसमें सब कुछ समा सकता है |

प्रश्न ) सुख क्या है ?

उत्तर ) सुख वह चीज है जो शील और सच्चरित्रता पर स्थित है |

प्रश्न ) किसके छूट जाने पर मनुष्य सर्व प्रिय बनता है ?

उत्तर ) अहंभाव के छूट जाने पर |

प्रश्न ) किस चीज के खो जाने पर दुख नहीं होता ?

उत्तर ) क्रोध के खो जाने पर |

प्रश्न ) किस चीज को गँवाकर मनुष्य धनी बन जाता है ?

उत्तर ) लालच को गँवाकर |

प्रश्न )युधिष्ठर  ! निश्चित रूप से बताओ कि किसी ब्राह्मण होना किस बात पर निर्भर करता है? उसके जन्म पर, विद्या पर या  

        शील-स्वभाव पर?                                  

उत्तर )कुल या विद्या के कारण ब्रह्मानत्व प्राप्त नहीं हो जाता | ब्रह्मानत्व तो शील स्वभाव पर निर्भर होता है|
जिसमें शील न हो वह ब्राह्मण नहीं हो सकता
| जिसमें बुरे व्यसन हो वह चाहे कितना ही पढ़ा लिखा क्यों न हो, ब्राह्मण नहीं कहला सकता | चारों वेदों को जान करके भी चरित्र –भ्रष्ट हो तो उसे नीच ही समझना चाहिए |

प्रश्न) संसार में सबसे बड़े आश्चर्य की बात क्या है?

उत्तर ) हर रोज आँखों के सामने कितने ही प्राणियों को मृत्यु के मुँह में जाते देखकर बचे हुए प्राणी जो यह चाहते हैं कि हम अमर रहें ,यहीं महान आश्चर्य की बात है|

प्रश्न) तालाब के किनारे अपने भाइयों को मरा देखकर युधिष्ठर ने अपने मन में क्या-क्या सोचा?

उत्तर ) तालाब के किनारे अपने भाइयों को मरा देखकर युधिष्ठर ने अपने मन में निम्नलिखित बातें सोची|

        उनके शरीर पर कोई निशान न देखकर सब कुछ मायाजाल जैसा लगा|

        हो सकता है यह दुर्योधन का षड्यंत्र हो|

        संभव है पानी में विष मिला हो|

प्रश्न) यक्ष के रूप में कौन प्रश्न पूछ रहा था? उसने युधिष्ठर को क्या आशीष दिया?

उत्तर ) बारह वर्ष के बाद बारह माह का अज्ञातवास सफलतापूर्वक पूरा हो जाएगा | तुम्हें और तुम्हारे भाइयों को कोई पहचान नहीं सकेगा | तुम अपनी प्रतिज्ञा सफलता पूर्वक पूरा करोगे |

प्रश्न ) अज्ञातवास मत्स्य देश में बिताना ठीक रहेगा  इसके लिए अर्जुन ने क्या-क्या तर्क दिए?

उत्तर ) मतस्य देश के राजा विराट हैं और उनका नगर बहुत ही सुन्दर और समृद्ध है|

          मतस्य नरेश शक्ति सम्पन्न हैं | वे दुर्योधन की बातों में आने वाले नहीं हैं | उनके यहन छिपकर रहना ठीक होगा |

मायावी सरोवर

 

पाठ 19 मायावी सरोवर

प्रश्न) ब्राह्मण की झोपड़ी के बाहर कौन – सी लकड़ी टंगी थी? उसका क्या उपयोग था?

त्तर) ब्राह्मण की झोपड़ी के बाहर अरणी की लकड़ी टंगी थी| यह काठ की चौकोर लकड़ी थी जिस पर मथनी जैसी दूसरी लकड़ी से   रगड़कर उन दिनों आग उत्पन्न की जाती थी |

प्रश्न) नकुल ने कैसे अनुमान लगाया कि उस स्थान पर जलाशय हो सकता है?

उत्तर ) नकुल ने पेड़ पर चढ़कर देखा कि कुछ दूर पर ऐसे पौधे उगे है, जो केवल पानी के ही नजदीक उगते है|आस- पास बगुले भी उड़ रहे थे | यहीं सोचकर नकुल ने वहाँ जलाशय होने का अनुमान लगाया होगा |

प्रश्न) नकुल को  जलाशय  मिलने पर उसने क्या किया ?

उत्तर ) उसने सोचा कि पहले तो मैं अपनी प्यास बुझा लूँ और फिर तरकश में पानी भरकर भाइयों के लिए ले जाऊँगा |

प्रश्न)  नकुल के द्वारा  जलाशय  का  पानी पीने पर क्या हुआ?

उत्तर )  वे जलाशय का पानी पीते ही  बेहोश होकर भूमि पर गिर पड़े |

प्रश्न) जलाशय किसके अधीन था?

उत्तर ) एक यक्ष के अधीन था|

प्रश्न) जलाशय से आती हुई आवाज़ सुनकर अर्जुन ने क्या किया?

उत्तर ) जलाशय  में जल पीने के लिए उतरते समय वहीं आवाज़ सुनने पर अर्जुन को खूब गुस्सा आया | अर्जुन ने जिस दिशा से आती हुई आवाज़ को सुना था उसी दिशा में निशाना लगाकर बाण चलाने लगे |  बाणों को यूँ बेअसर होता देख अर्जुन गुस्से से भर उठे |

Saturday, September 11, 2021

चौसर का खेल व द्रौपदी की व्यथा

 

पाठ 15 चौसर का खेल व द्रौपदी की व्यथा

प्रश्न) चौसर का खेल सारे अनर्थ की जड़ होता है “यह जानकर भी युधिष्ठिर ने चौसर खेलने का निर्णय क्यों लिया ?

उत्तर ) अनर्थ हो जाने की जानकारी होते हुए भी युधिष्ठर ने चौसर खेलने का निर्णय लिया क्योंकि –

i)                     राजवंशों की रीति के अनुसार बुलावा मिलने पर उसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है|

ii)                   युधिष्ठिर  को डर था कि खेल में शामिल न होने को ही धृतराष्ट्र अपना अपमान न समझ बैठें और यहीं लड़ाई का कारण न बन जाए |

iii)                  युधिष्ठिर  चौसर  के खेल के शौकीन थे, भले ही उन्हें अच्छी तरह खेलना न आता था |

प्रश्न) प्रातिकामी कौन था ? वह द्रौपदी के पास रनवास में क्यों गया ?

उत्तर ) प्रातिकामी दुर्योधन का  सारथी था | युधिष्ठिर  जुए में द्रौपदी को दुर्योधन के हाथों हार चुका थे| प्रातिकामी दुर्योधन के आदेशानुसार द्रौपदी को सभा मंडप में ले जाने के लिए आया |उसने द्रौपदी से कहा “आप दुर्योधन के अधीन हो गई है| राजाज्ञा के अनुसार अब आपको दृतराष्ट्र के महल में दासी का काम करना है| मैं आपको ले जाने के लिए आया हूँ |”

प्रश्न) युधिष्ठिर  के पुनः चौपड़ खेलने का क्या परिणाम रहा ?

उत्तर ) युधिष्ठिर के द्वारा पुनः चौपड़ खेलने का परिणाम यह रहा कि वह पुनः हार गए | इसके परिणामस्वरूप पांडवों को बारह वर्ष का वनवास तथा एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना था | यदि इस अवधि में उनका पता चल जाए तो यह अवधि उन्हें पुनः वनवास तथा अज्ञातवास के रूप में बितानी थी|

शकुनि का प्रवेश

 

पाठ 14 शकुनि का प्रवेश

प्रश्न) युधिष्ठिर ने क्या शपथ ली थी?

उत्तर ) युधिष्ठिर ने शपथ ली थी कि आज से तेरह वर्ष तक अपने भाइयों तथा अन्य बंधु-बाँधवों से किसी तरह का वैर नहीं रखेंगे | वह उनकी इच्छानुसार ही चलेंगे जिससे कि मनमुटाव का कोई डर न रहे | वे अपने मन से क्रोध को निकाल देंगे तथा कौरवों कि इच्छानुसार ही काम करेंगे |

प्रश्न ) शकुनि ने दुर्योधन को पांडवों से राज्य प्राप्त करने का क्या सहज उपाय बताया ?

उत्तर ) शकुनि ने बताया  युद्ध खतरनाक काम है | पांडवों से राज्य प्राप्त करने का सहज उपाय है कि उन्हें चौसर का खेल खेलने के लिए आमंत्रित किया जाए| इस खेल के शौकीन युधिष्ठिर को खेलना भी नहीं आता है| इससे  उन्हें हराकर आसानी से उनका राज्य प्राप्त किया जा सकता है|

  प्रश्न) चौसर के खेल के बारे में विदुर ने दृतराष्ट्र को क्या बताया ?

उत्तर ) चौसर के खेल दुष्परिणामों के बारे में विदुर ने दृतराष्ट्र को क्या बताया ?

उत्तर ) चौसर के खेल के दुष्परिणामों के बारे में दृतराष्ट्र को बताते हुए विदुर ने आगाह किया कि इस खेल के कारण हमारे कुल के लोगों में आपसी मनमुटाव और झगड़े फसाद बढेंगे | इससे हम सभी पर विपदा आएगी जो कौरव –कुल के नाश का कारण बन जाएगी |

जरासंध

 

पाठ 13 जरासंध

प्रश्न) पांडवों द्वारा किए जाने यज्ञ में जरासंध बाधक था, कैसे ?

उत्तर ) वह अत्यंत शक्तिशाली राजा था , जिसने सभी राजाओं को जीतकर अपने वश में कर रखा था |सभी उससे पराजित हो चुके थे और उससे डरते थे | शिशुपाल जैसे शक्ति सम्पन्न राजा भी उसकी अधीनता स्वीकार कर चुके थे | श्री कृष्ण और उनके बंधु भी हार चुके थे | इस प्रकार राजसूय यज्ञ में बाधक बन रहा था |

प्रश्न) जरासंध की कैद में बंदी राजा कैसे मुक्त हुए ?

उत्तर ) जरासंध से युद्ध का निश्चय हो जाने पर भीम,अर्जुनऔर श्री कृष्ण ब्राह्मण वेष में जरासंध के पास गए | उनका आदर सत्कार किया| आधी रात के बाद जब वह अतिथियों से बातचीत करने आए तो अतिथियों ने अपना सही परिचय देकर द्वंद्व युद्ध के लिए ललकारा | भीम के साथ द्वंद्व युद्ध में जरासंध मारा गया|

प्रश्न) शिशुपाल को श्री कृष्ण की अग्र पूजा क्यों अच्छी न लगी ?

उत्तर ) शिशुपाल एक शक्तिसम्पन्न राजा था| पांडवों द्वारा जरासंध को मारने में श्रीकृष्ण ही योजनाकार थे | इसे वे श्री कृष्ण की कुचाल समझता था इसके  अलावा वह श्री कृष्ण को मामूली सा व्यक्ति समझता था  इसलिए उसे श्री कृष्ण की अग्र –पूजा अच्छी न लगी|

इंद्रप्रस्थ

 

पाठ 12  इंद्रप्रस्थ

प्रश्न) पांडवों के जीवित बचने तथा स्वयंवर में द्रौपदी को जीतने पर दुर्योधन की क्या प्रतिक्रिया हुई ?

उत्तर ) उनकी पांडवों के प्रति ईर्ष्या की आग ओर बलवती हो  गई | उसके मन में दबा वैर फिर से जाग गया क्योंकि एक तो पांडव अभी पहले से अधिक शक्तिशाली हो गए थे और दूसरे दृष्टधुम्न और शिखंडी भी अब उनके साथी बन चुके थे |

प्रश्न) कर्ण ने दुर्योधन को स्वयंवर से आने के बाद क्या सलाह दी?

उत्तर ) अब एक साल बाहर रहने व दुनिया देख लेने के बाद उन्हें काफी अनुभव हो गया है| आपस फूट डालकर भी उनको हराना संभव नहीं है| राजा द्रुपद धन के लोभ में आने वाले नहीं है| हमारे पास एक ही रास्ता है की पांडवों की ताकत बढने  से पहले ही उन पर हमला कर दिया जाए|  

प्रश्न) कर्ण की बात सुनकर द्रोणाचार्य क्रोधित क्यों हो गए ?

उत्तर ) आचार्य द्रोण द्वारा धृतराष्ट्र को कौरवों की भलाई के लिए दी जाने वाली शिक्षा भी बुरी सलाह लग रही थी | कर्ण को द्रोणाचार्य की नियत पर संदेह हो रहा था | वह दृतराष्ट्र को उनकी सलाह न मानने के लिए प्रेरित कर रहा था |,इसलिए कर्ण की बातें सुनकर द्रोणाचार्य क्रोधित हो गए |

प्रश्न) पितामह भीष्म ने पांडवों के जीवित रहने की खबर सुनकर दुर्योधन को क्या सलाह दी?

उत्तर ) उसने कहा पांडवों के साथ संधि करके उन्हें आधा राज्य दे दो |

प्रश्न) खांडवप्रस्थ के विषय में तुम क्या समझते हो? उसका नाम इंद्रप्रस्थ कैसे पड़ गया ?

उत्तर ) उस नगरी का नाम है ,जहां से पांडवों के पूर्वज पुरू नहुष,ययाति जैसे प्रतापी राजाओं ने अपने राज्य पर शासन किया था| बीतते समय के साथ-साथ खांडवप्रस्थ के भग्नावशेष ही रह गए और वह निर्जन वन में बदल गया | दृतराष्ट्र की सलाह पर जब पांडवों ने खांडवप्रस्थ में पुनः सुंदर भवनों तथा अभेध दुर्गों से नए नगर का निर्माण कराया तो उसका नाम इंद्रप्रस्थ रखा|

द्रौपदी स्वयंवर

पाठ 11 द्रौपदी स्वयंवर

प्रश्न) द्रौपदी स्वयंवर के संबंध में राजा द्रुपद ने क्या प्रतिज्ञा ली थी?

उत्तर ) जो राजकुमार पानी में  प्रतिबिंब देखकर उस भारी धनुष से तीर को चलाकर ऊपर टँगे हुए निशाने (मछ्ली) को गिरा देगा,उसी  को द्रौपदी वरमाला पहनाएगी |

प्रश्न) द्रौपदी स्वयंवर की शर्त किसने पूरी की और कैसे?

उत्तर ) अर्जुन ने ब्राह्मण वेष में आकर धनुष हाथ में लिया और उस पर डोरी चढ़ा दी| उसने धनुष पर तीर चढ़ाया और एक के बाद एक पाँच बाण उस घूमते हुए चक्र में मारे और हजारों लोगों के देखते-देखते निशाना टूटकर नीचे गिर पड़ा |

प्रश्न )द्रुपद के पुत्र धृष्टदुमन ने ब्राह्मण वेशधारियों के विषय में क्या सूचना दी?

उत्तर ) उसने कहा जब द्रौपदी उस युवक की मृगछाला पकड़े जाने लगी , तो मैं भी उनके पीछे हो गया | वह एक कुम्हार की कुटिया में पहुंचे | वहाँ उन्होंने माता कुंती को देखा तो निश्चय ही ये पांडव है|

प्रश्न)” द्रौपदी ने अर्जुन को पति रूप में चुना है “  यह जानकार द्रुपद ने संतोष की सांस क्यों ली?

उत्तर ) द्रुपद ने संतोष की सांस ली क्योंकि-

i)                     ब्राह्मण वेशधारी अर्जुन पांडु और कुंती के पुत्र हैं|

ii)                   महाबली कुशल योद्धा है|

iii)                  अब द्रुपद को आचार्य द्रोण की शत्रुता से चिंतित होने की जरूरत नहीं है,क्योंकि अब द्रुपद की हर संभव मदद करेंगे|

प्रश्न) द्रौपदी ने अर्जुन का  वरण कर लिया यह खबर माता कुंती को सुनाने के लिए अन्य पांडवों के साथ भीम क्यों नहीं गए?

उत्तर ) द्रौपदी स्वयंवर में हिस्सा लेने अनेक राजा ने स्वयंवर की  शर्त पूरी न की और वे हार गए| ब्राह्मण वेषधारी  अर्जुन ने स्वयंवर की शर्त पूरी की और द्रौपदी के गले में माला डाल दी | भीम को डर था कि वे क्रोधित राजा कहीं अर्जुन को कुछ कर न बैठे| अतः अर्जुन की सहायता के लिए भीम उनके साथ स्वयंवर  में रुके रहे |

 


समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...