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Sunday, August 22, 2021

पाठ 8 शाम एक किसान - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

पाठ 8      शाम एक किसान

                            - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

 

आकाश  का साफा बाँधकर

सूरज की चिलम खींचता

बैठा है पहाड़ ,

घुटनों पर पड़ी है नदी चादर –सी,

पास ही दहक रही है

पलाश के जंगल की अँगीठी

अँधकार  दूर पूर्व में

सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले –सा|

शब्दार्थ आकाश : आसमान ; साफा: पगड़ी ; चिलम : मिट्टी की एक छोटी सुराखयुक्त रचना जिसकी मदद से ग्रामीण लोग धूम्रपान करते  हैं; दहकना : गरम लाल लपटों के साथ जलना ; पलाश : टेसू ; पूर्व : पूरब ; सिमटना : इकट्ठा होना |

प्रसंग- बसंत भाग-2 पाठ्यपुस्तक में संकलित शाम एक किसान नामक इस कविता के रचयिता श्री सर्वेश्वरदयाल सक्सेना हैं| इन काव्य पंक्तियों में जाड़े की शाम का बड़ा ही अद्भुत वर्णन किया गया है|

सरलार्थ : कवि जाड़े की शाम के प्राकृतिक दृश्य का बड़ा ही सुंदर चित्रण करते हुए कहता है कि शाम के इस दृश्य में पहाड़ ऐसा दिख रहा है जैसे बैठा हुआ कोई किसान हो और उसके सिर पर साफा बाँधा हुआ हो| अर्थात पहाड़ के सिर आकाश साफे के समान बंधा दिखाई दे रहा है| पहाड़ के नीचे बहती नदी उस पहाड़ के घुटनों पर रखी चादर  के समान लग रही है| पलाश के पेड़ों पर खिले लाल-लाल फूल जलती हुई अँगीठी जैसे लग रहे है| पूरब दिशा में क्षितिज पर अँधकार बढ़ता जा रहा है| वह इस प्रकार लग रहा है जैसे भेड़ों का झुंड हो| पश्चिम दिशा में अस्त होता सूरज ,चिलम पर रखी आग जैसा लग रहा है| चारों ओर वातवरण में शांति छाई हुई है|

विशेष – शाम के प्राकृतिक दृश्य का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया है|

       पहाड़ का मानवीकरण किया  गया है |

अचानक –बोला मोर |

जैसे किसी ने आवाज़ दी-

सुनते हो’|

चिलम औंधी

धुआँ उठा-

सूरज डूबा

अँधेरा छा गया|

शब्दार्थ –अचानक : एकाएक ; आवाज़ देना: बुलाना ; औंधी : उलट गई

प्रसंग – पूर्ववत्

कवि कहता है कि झाडे कि शाम में प्रकृति में चारों ओर शांति व्याप्त है | तभी मोर बोल उठता है,मानो किसी ने आवाज़ लगाई हो – सुन रहे हो | इसके बाद प्राकृतिक दृश्य में तेज़ी से बदलाव आता है| यह दृश्य घटना में बदलने लगता है|- चिलम एक ओर उल्टी हो जाती है| चिलम उलटते ही जलती आग बुझने  लगती है , धुआँ भी उठने लगता है| अब डूबने को तैयार सूरज डूब चुका है| शाम ढाल गई है और रात का अँधेरा गहराता जा रहा है|

विशेष – प्राकृतिक दृश्यों का घटनाओं में बदलने का स्वाभाविक वर्णन है|

 

प्रश्न अभ्यास

प्रश्न) इस कविता में शाम के दृश्य को किसान के रूप में दिखाया गया है- यह एक रूपक है| इसे बनाने के लिए पाँच एकरूपताओं की जोड़ी बनाई गई है| उन्हें उपमा कहते हैं| पहली एकरूपता आकाश और साफे में दिखाते हुए कविता में आकाश का साफा वाक्यांश आया है| इसी तरह तीसरी एकरूपता नदी और चादर में दिखाई गई है, मानो नदी चादर-सी हो | अब आप दूसरी, चौथी और पाँचवीं एकरूपताओं को खोजकर लिखिए |

उत्तर ) i) आकाश का साफा ii) पलाश के जंगल की अंगीठी iii) नदी चादर सी iv) सूरज की चिलम v) भेड़ों के गल्ले सा अंधकार

प्रश्न) शाम का दृश्य अपने घर की छत या खिड़की से देखकर बताइए –

क)   शाम कब से शुरू हुई?

ख)   तब से लेकर सूरज डूबने में कितना समय लगा ?

ग)    इस बीच आसमान में क्या- क्या परिवर्तन हुए?

उत्तर ) अपने घर की छत या खिड़की से शाम का दृश्य देखने पर पता चलता है कि-

क)   जाड़े में दिन छोटे वायुमंडल में कोहरा तथा सूर्य का प्रकाश ऊष्माहीन होने के कारण शाम जल्दी अर्थात चार, सवा चार बजे हो गई |

ख)   तब से लेकर सूरज डूबने में एक या सवा घंटा समय लगा|

ग)    इस आसमान में निम्नलिखित परिवर्तन हुए-

i)        आसमान में सूर्य का प्रकाश कमजोर पड़ता गया अर्थात धुंधलापन बढ़ता गया|

ii)       आसमान में उड़ते पक्षी अपने घोंसलों कि ओर लौटने लगे |

iii)      पूरब की दिशा में प्रकाश समाप्त हो गया और क्षितिज से अंधेरे का आगमन होने लगा |

 

प्रश्न)  इस कविता को चित्रित करने के लिए किन-किन रंगों का प्रयोग किया है?

उत्तर ) इस कविता को चित्रित करने के लिए नीला, पीला, लाल, भूरा, काला, हरा,कत्थई रंगों का प्रयोग करना होगा|

प्रश्न)   शाम के समय ये क्या करते हैं।पता लगाइए और लिखिए –

उत्तर ) पक्षी पक्षी कलरव करते हुए उड़कर अपने-अपने घोंसलें या कोटर की ओर जाते है|

      पेड़-पौधे- उन पर खिले फूल मुरझा जाते हैं| उन पर पड़ी ओस के कारण ऐसा लगता है कि वे दिन भर कि थकान उतारने के लिए अभी-अभी नहाए हैं|

    खिलाड़ी- खिलाड़ी अपने खेल का अभ्यास करते हैं|

    फल वाले- फलवाले ऊँची आवाज़ में बोलकर फल बेचने की कोशिश करते है|

    माँ – किसान अपने बैलों के साथ वापस आते हैं, और बैलों और गायों को चारा-पानी देते हैं|

    बच्चे-  खेलते – कूदते हैं| शोर करते हैं| टेलीविज़न देखते हैं|

भाषा की बात

   प्रश्न) नीचे लिखी पंक्तियों में रेखांकित शब्दों को ध्यान से देखिए|

क)   घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी

ख)   सिमट बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा

ग)    पानी का परदा –सा मेरे आसपास हिल रहा

घ)    मँडराता रहता था एक मरियल-सा कुत्ता आसपास

ङ)     दिल है छोटा- सा छोटी - सी आशा

च)    घास पर फुदकती नन्ही सी चिड़िया

इन पंक्तियों में सा/सी का प्रयोग व्याकरण की दृष्टि से कैसे शब्दों के साथ हो रहा है ?

उत्तर ) सा / सी का प्रयोग व्याकरण की दृष्टि से दो प्रकार के शब्दों के साथ हो रहा है –

i)        संज्ञा शब्दों के साथ जैसे – चादर-सी ,गल्ले-सा तथा पर्दा सा |

ii)       विशेषण शब्दों के साथ –मरियल –सा , छोटा-सा तथा नन्ही सी |

 

iii)      हाँ ,सा/सी का प्रयोग तुलना करने या समानता बताने के लिए किया जा रहा है| जैसे – चादर-सी, गल्ले-सा, पर्दा-सा, मरियल-सा|

अलग अर्थ में सा/सी का प्रयोग मात्रा या आकार बताने के लिए किया जा रहा है| जैसे –छोटा सा ,नन्हीं –सी|

प्रश्न) निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग आप किन संदर्भों में करेंगे?

प्रत्येक शब्द के लिए दो-दो संदर्भ (वाक्य) रचिए |

आँधी          दहक                 सिमटा

उत्तर ) आँधी- i) धूल भरी तेज़ गति से चलने वाली हवा के संदर्भ में |

      वाक्य – आँधी से बचने के लिए किसान हवा की ओट में छिप गया |

            Ii) हलचल मचाने के संदर्भ में|

      वाक्य- ज्वार-भाटा आने से पहले समुद्र में तेज़ गति से आँधी उठने लगी|

    दहक -  i) अग्नि,लपट,ज्वाला के संदर्भ में|

    वाक्य- हवा का झोंका पाते ही आग दाहक उठी |

         Ii) जलन,दाह के संदर्भ में|

     वाक्य- अपने माँ की मौत का बदला पाने के लिए उसका मन अभी भी दहक रहा है|

  सिमटा -   i) संकुचित होने के संदर्भ में|

   वाक्य – सर्दी के कारण गरीब सड़क पर सिमर कर बैठा है|

 Ii) समाप्त होने के संदर्भ में |

  वाक्य- राधा के घर विवाह का सारा कार्य सिमट गया |

 


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