Showing posts with label 9वीं (हिन्दी ) क्षितिज भाग 1 गद्य खंड. Show all posts
Showing posts with label 9वीं (हिन्दी ) क्षितिज भाग 1 गद्य खंड. Show all posts

Saturday, April 22, 2023

सवैये रसखान

 

सवैये

रसखान

क्षितिज भाग-1 खंड

 

प्रश्न 1) ब्रजभूमि के प्रति कवि का प्रेम किन –किन रूपों में अभिव्यक्त हुआ है ?

उत्तर ) ब्रजभूमि से कवि का बहुत लगाव था | वह अपने हर जन्म में इसका हिस्सा बनना चाहता है | यदि उसे मानव रूप मिलें तो ब्रज गाँव में ग्वालों के बीच में रहना चाहेगा | पशु की योनि प्राप्त होने पर नन्द बाबा की गौवों के साथ चरने वाली गाय बनना चाहेगा | यदि पत्थर का रूप मिले तो उसी गोवर्धन पहाड़ का भाग बनना चाहेगा जिसे इन्द्र के गुस्से से बचने के लिए श्री कृष्ण ने अपनी उंगली पर उठा लिया था | पक्षी रूप में जन्म मिलने पर यमुना किनारे बसे कदंब की डालियों पर ही रहना चाहेगा |

प्रश्न 2) कवि का ब्रज के वन, बाग और तालाब को निहारने के पीछे क्या कारण है ?

उत्तर ) कवि का श्री कृष्ण की प्रिय भूमि  और लीला स्थली ब्रज से अत्यधिक लगाव था | वे इसी कारण ब्रज क्षेत्र के पत्ते-पत्ते, धूल के प्रत्येक कण में उनके दर्शन कर अपने आपको सौभाग्यशाली समझते थे | भक्त को अपने आरध्य देव की हर वस्तु अच्छी लगती है | यह उसकी भक्ति की पराकाष्ठा है | कवि रसखान जी ब्रज के वन, बाग और तालाब को निहारते थे |

प्रश्न 3) एक लकुटिया और कामरिया पर कवि सब कुछ न्योछावर करने को क्यों तैयार है ?

उत्तर ) कवि रसखान जी का श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम था | वे उनकी हर वस्तु से प्रेम करते थे | जब श्री कृष्ण जी गाय चराने के लिए जाते थे तो उस समय केवल एक लाठी और काला कंबल रखते थे | इसलिए कवि उस लाठी व कंबल पर तीनों लोकों का सारा राज, धन और सभी प्रकार की निधियाँ लौटाने के लिए तैयार हो जाता  है |

प्रश्न 4) सखी ने गोपी से श्री कृष्ण का कैसा रूप धारण करने का आग्रह किया है ? अपने शब्दों में वर्णन करो |

उत्तर ) सखी ने गोपी से श्री कृष्ण के समान वेशभूषा पहनने और उनके जैसा रूप धारण करने के लिए कहा है | सिर पर मोर पंख, गले में गूंज की माला ,शरीर पर पीले वस्त्र पहनने और फिर उनकी तरह लाठी लेकर ग्वाल बालों के साथ घूमने के लिए आग्रह किया है | ऐसा करके वो श्री कृष्ण की यादों को ताज़ा करना चाहती है |

प्रश्न 5) आपके विचार  से कवि पशु, पक्षी और पहाड़ के रूप में भी कृष्ण का सान्निध्य क्यों प्राप्त करना चाहता है ?

उत्तर ) भक्त की यही हार्दिक इच्छा होती है कि वह अपने इष्ट देव के पास रहे | उसे हर समय उसकी अनुभूति होती रहे | वह उससे व उसकी हर वस्तु से  अपार स्नेह करता है | वह मोक्ष की इच्छा नहीं करता बल्कि उसकी भक्ति चाहता है यह भक्ति का उच्चतम स्तर होता है | अत : हमारे विचार  से कवि पशु, पक्षी और पहाड़ के रूप में भी कृष्ण के निकट  रहना चाहता है |

प्रश्न 6) चौथे सवैये के अनुसार गोपियाँ अपने आप को क्यों विवश पाती हैं ?

उत्तर )   जब श्री कृष्ण जी मुरली बजाते है तो उसकी तान सुनकर गोपियाँ अपने बच्चे को दूध पिलाना छोड़ देती हैं | मुरली की  धुन सुनकर गोपियाँ अपने कानों को अपनी उँगलियों से बंद कर लेती हैं तो कभी छत पर चढ़ जाती है | इसकी मधुर स्वर के सामने वे अपने आप को विवश पाती है | लेकिन उनकी मादक मुस्कान के आगे तो वो नतमस्तक हो जाती है और श्री कृष्ण की ही होकर रह जाती है |

प्रश्न 7 (क) “कोटिक ए कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं”  पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए-|

 उत्तर ) रसखान जी  ब्रज क्षेत्र के काँटों भरी झड़ियों के कुंजों को सुंदर सोने महलों से उत्तम मानता है | और उनको पाने के लिए करोड़ों सुंदर सोने के महलों को न्यौछावर करने के लिए तैयार है |

प्रश्न 7 (ख) “माइ री वा सुख की मुसकानि सम्हारी न जैहै, न जैहै, न जैहै |”  पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए-|

उत्तर ) गोपियाँ श्री कृष्ण की मंद-मंद प्यारी सी मुस्कान पर मोहित हो जाती है और उनका स्वयं पर कोई नियंत्रण नहीं होता | अर्थात श्री कृष्ण पर मुग्ध हो जाती है |

प्रश्न 8) कालिंदी कूल कदंब की डारन में कौन सा अलंकार है ?

उत्तर ) अनुप्रास अलंकार

प्रश्न 9) “या मुरली मुरलीधर की अधरान धरी अधरा न धरौंगी |”  पंक्ति का काव्य सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) गोपियाँ का मुरली के प्रति सौत का भाव है | इसलिए श्री कृष्ण की प्रिय वस्तु होते हुए भी वह उसे अपने होठों पर नहीं लगाना चाहती है | काव्यांश रचना सवैया छंद में है | ब्रज भाषा की मधुरता निहित है | ’,   तथा वर्णों की आवृति  के कारण अनुप्रास अलंकार है | काव्यांश में माधुर्य गुण व्याप्त है | गोपियाँ का हठ भाव दिखाया गया है |

अन्य प्रश्न

प्रश्न ) कवि मनुष्य के रूप में कहाँ कहाँ जन्म लेना चाहता है और क्यों ?

उत्तर ) कवि श्री कृष्ण के परम भक्त है | यदि उनका पुनर्जन्म हो तो वे मनुष्य के रूप में जीवन पाकर ब्रज क्षेत्र के गोकुल में घूमना चाहता है | और ग्वाल-बालों के संग गाय वन-वन जाकर चराना चाहता है |

प्रश्न ) गोपी कैसा शृंगार करना चाहती है ?

उत्तर ) गोपी श्री कृष्ण के प्रति आसक्त है | वह उनकी तरह रूप धारण कर शृंगार  करना चाहती है | वह उनके मोरपंख का मुकुट धारण करना चाहती है | गले में कुंजों की माला पहनना चाहती है | पीताम्बर वस्त्र धारण करना चाहती है | उनकी तरह हाथों में लाठी लेकर वन-वन फिरने  को तैयार  है |

प्रश्न ) गोपी अपने होठों पर मुरली क्यों नहीं रखना चाहती ?

उत्तर ) गोपी से यह कदापि सहन नहीं होता कि श्री कृष्ण मुरली को अपने होठों से सदा लगाए रखे | वह मुरली से उनकी सौत के समान ईर्ष्या करती है | और अपना शत्रु मानती है | अत : मुरली को होठों से नहीं लगाती है |

प्रश्न ) “ कोटिक ए कलधौत के धाम करील के कुंजन ऊपर वारौं |”  पंक्ति का काव्य सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) कवि रसखान ने श्री कृष्ण और ब्रज क्षेत्र के प्रति अपने मन के प्रेम भाव को व्यक्त किया | वह ब्रज की काँटेदार झड़ियों के कुंजों के ऊपर करोड़ों महल न्यौछावर करने के लिए तैयार है | उन्हें केवल ब्रज क्षेत्र में किसी भी रूप में स्थान चाहिए | शांत रस का उत्तम प्रयोग किया गया है | प्रसाद व अभिधा शब्द शक्ति है | सवैया छंद का प्रयोग किया गया है |

Wednesday, August 10, 2022

साँवले सपनों की यादें (जाबिर हुसैन) क्षितिज भाग 1 कक्षा 9वीं

 

साँवले सपनों की यादें

जाबिर हुसैन

प्रश्न 1) किस घटना ने सालिम अली के जीवन को बदल दिया और उन्हें पक्षी प्रेमी बना दिया ?

उत्तर ) एक बार बचपन में सालिम अली की एयरगन से गोरैया जख्मी हो गई | जिससे उन्हें बहुत पीड़ा  हुई | उनका मन द्रवित हो उठा | इसी घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी | उन्होंने पक्षियों की देखभाल को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया और वे पक्षी प्रेमी बन गए |

प्रश्न 2) सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री के सामने पर्यावरण से संबन्धित किन संभावित खतरों का चित्र खींचा होगा कि जिससे उनकी आँखें नम हो गई थीं ?

उत्तर ) सालिम अली केरल की साइलेंट वैली को रेगिस्तानी गर्म हवा के झोकों से बचाना चाहते थे | इसी प्रार्थना को लेकर वे प्रधानमंत्री के पास गए | साइलेंट वैली एक ऐसा स्थान है जहां देश - विदेश से पक्षी आकर शरण लेते थे | वहाँ इन रेगिस्तानी गरम हवाओं का  प्रभाव इन पक्षियों पर पड़ता था | जिससे कई जानें गई होंगी | इन पर्यावरण से होने वाले खतरों का चित्र सालिम अली ने पूर्व प्रधानमंत्री के सामने रखा होगा कि जिससे उसकी आँखें नम हो गई |

प्रश्न 3) लॉरेंस कि पत्नी फ्रीड़ा ने ऐसा क्यों कहा होगा कि “ मेरी छत पर बैठने वाली गोरैया लॉरेंस के बारे में ढेर सारी बातें जानती है ?”

उत्तर ) सालिम अली पक्षी प्रेमी व प्रकृति प्रेमी थे | वे अपना अत्यधिक समय पर्यावरण में होने वाली गतिविधियों व पक्षियों के साथ बिताते थे | वे पक्षियों को पक्षियों की नज़र से देखते थे | और छत पर बैठने वाली गोरैया के साथ अपना बहुत सा समय बिताते थे | इसलिए लॉरेंस कि पत्नी फ्रीड़ा ने ऐसा कहा होगा  कि “ मेरी छत पर बैठने वाली गोरैया लॉरेंस के बारे में ढेर सारी बातें जानती है ?”

प्रश्न 4) आशय स्पष्ट कीजिए –

क)    वो लॉरेंस की तरह, नैसर्गिक जिंदगी के प्रतिरूप बन गए थे |

उत्तर ) यहाँ सालिम अली के व्यक्तित्व की तुलना डी एच लॉरेंस से की है | वे प्रकृति प्रेमी थे  और मानते थे कि   मानव जाति एक उखड़े हुए महान वृक्ष  की भांति है जिसकी जड़ें हवा में फैली हुई हैं |’ इसलिए हमारा प्रकृति की ओर लौटना जरूरी है |’ सालिम अली भी प्रकृति के बहुत निकट थे | वे प्रकृति की दुनिया में अथाह सागर बनकर उभरे थे |

ख)   कोई अपने जिस्म की हरारत और दिल की धड़कन देकर भी उसे लौटना चाहे तो वह पक्षी अपने सपनों के गीत दोबारा कैसे गा सकेगा ?

उत्तर ) किसी व्यक्ति के मरने के बाद यदि कोई अपने शरीर की गर्मी और अपने दिल की धड़कनें देकर भी जीवित करना चाहे तो वह जीवित नहीं होता | इसी प्रकार  पक्षी सालिम अली  को कोई अपनी साँसे देकर भी जीवित नहीं  कर सकता | क्योंकि मृत्यु एक ऐसी यात्रा है जिसमें जाया तो जा सकता पर वापस नहीं आ सकते  |

ग) सालिम अली प्रकृति की दुनिया में एक टापू बनने की बजाए अथाह सागर बनकर उभरे थे |

उत्तर ) सालिम अली  एक महान व्यक्तित्व वाले व खुले विचार रखने वाले थे | उन्होने प्रकृति को बहुत गहराई से जाना था | वे दूरबीन लेकर हमेशा इसको निहारने में लगे रहते थे | वे टापू की तरह सीमित व उथले नहीं थे बल्कि सागर की तरह असीमित गहराई के व्यक्ति थे | यह उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी |

प्रश्न 5) इस पाठ के आधार पर लेखक की भाषा शैली की चार विशेषताएँ बताइए |

उत्तर )  लेखक की भाषा शैली की  विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

i)        इस पाठ में लेखक ने बोलचाल की सरल भाषा का प्रयोग किया है |

ii)       उर्दू हिन्दी अंग्रेजी की त्रिवेणी ने भाषा शैली में अनोखा प्रवाह ला दिया हैं |

उर्दू –सफ़र , खामोश, माहौल परिंदा आदि |

          तत्सम – वन पक्षी प्रकृति आदि |

          अंग्रेजी – एअरगन बर्ड वाचर साइलेंट वैली आदि |

iii)       लेखक ने मुहावरों का प्रयोग कर भाषा में रोचकता ला दी है जैसे – शब्दों का जामा पहनना, आँखें नाम होना, कदम थमना, कायल होना आदि |

iv)       इस पाठ में लेखक की भाषा शैली का काव्यात्मक  भी हो गई है, जैसे – एहसास की ऐसी ही एक ऊबड़-खाबड़ जमीन पर जन्मे मिथक का नाम है, सालिम अलि |’

प्रश्न 6) इस पाठ में लेखक सालिम अली के व्यक्तित्व का जो चित्र खींचा है उसे अपने शब्दों में लिखिए |

उत्तर )  सालिम अली प्रकृति प्रेमी थे | वे प्रकृति को प्रकृति  की नजर से देखने के पक्षधर थे | वे बर्ड  वाचर थे | उनकी आँखों पर हमेशा दूरबीन छड़ी रहती थी जिसे उन्होंने मृत्यु के बाद ही उतारा था | इसी प्रकृति के कारण उन्होंने पर्यावरण संबंधी अनेक खोजों को अंजाम दिया | वे संवेदनशील तथा संकल्पशील थे | प्रकृति और मनुष्य के बीच बढ़ रहे खतरे को महसूस करते थे | इसी कारण एक बार वो तत्कालीन प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पास केरल की साइलेंट वेली को रेगिस्तानी गरम हवाओं से  बचाने  का अनुरोध किया था |

प्रश्न 7) साँवले सपनों की याद शीर्षक की सार्थकता पर टिप्पणी कीजिए |

उत्तर ) लेखक के  लिए सालिम अली की मृत्यु गहरे दुख व अवसाद की बात रही है |  साँवले सपनों की याद शीर्षक में उसी दुख व अवसाद की झलक मिलती है | इनकी मृत्यु किसी भयानक सपने से कम नहीं है | इनको ले जाने वाले अपने दिल की धड़कन व जिस्म की हरारत देकर भी लौटा नहीं सकते | इनको जानने वाले लोगों को तो यहीं लगता है कि गले में दूरबीन लटकाए अपने खोज पूर्ण नतीजों को लेकर लौट आएंगे | इस प्रकर इस पाठ का शीर्षक सांवले सपनों की याद सार्थक है |

रचना व अभिव्यक्ति

प्रश्न 8) प्रस्तुत पाठ सालिम अली की पर्यावरण के प्रति चिंता को  अभिव्यक्त करता है | पर्यावरण को बचाने के लिए आप कैसे योगदान दे सकते हैं ?

उत्तर ) अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए | सभी लोगों को समय-समय पर पेड़ बचाओं, पर्यावरण बचाओं जैसे विषयों पर नाटक, लेख, व नारे आदि का आयोजन कर लोगों में जागरूकता लानी चाहिए | प्लास्टिक की थैलियों का प्रयोग नहीं करना चाहिए | तालाबों झीलों तथा नदियों में गंदगी नहीं डालनी चाहिए | फक्ट्रियों से निकालने वाले गंदे पानी की एक स्थान पर जमीन में ही इकट्ठा करने की व्यवस्था होनी चाहिए | जल, वायु व ध्वनि तीनों प्रकार के प्रदूषण से बचने की व्यवस्था होनी चाहिए |

अन्य प्रश्न

प्रश्न ) लेखक ने सांवले सपनों की याद संस्मरण क्यों लिखा ?

उत्तर ) लेखक ने सांवले सपनों की याद संस्मरण पक्षी विज्ञानी सालिम अली की मृत्यु पर लिखा | उनकी मृत्यु से उन्हें गहरा दुख हुआ | उन्होंने उनके व्यक्तित्व के कई अनछुए पहलुओं को उजागर किया | इस दुख ने लेखक को कई संस्मरण लिखने के लिए प्रेरित किया |

प्रश्न ) सालिम अली की मृत्यु किन कारणों से हुई ? लेखक ने उनके अंतिम समय का वर्णन किस प्रकार किया है ?

उत्तर ) उनकी मृत्यु कँसर जैसे जान लेवा बीमारी से हुई | वे प्रकृति से पक्षियों को  होने वाले संभावित खतरों से परिचित थे | अत: अंतिम समय तक मौत  सालिम अली की आँखों से वह रोशनी छिनने में सफल नहीं हुई जो पक्षियों की तलाश व उनकी हिफ़ाजत में समर्पित थे  | उनकी आँखों पर चढ़ी दूरबीन उनकी मृत्यु के बाद ही उतरी थी |

प्रश्न ) वृन्दावन की आज दशा का वर्णन कीजिए |

उत्तर ) आज भी अगर जाए तो यमुना नदी का सांवला पानी श्री कृष्ण की वृन्दावन में की गई अनेक लीलाओं की याद करा देता है | सुबह होते ही वृन्दावन की गलियों से निकलकर लोग यमुना की तरफ जाते  हैं | तब ऐसा ही लगता है कि श्री कृष्ण बांसुरी लेकर बजाने लगेंगे | उसकी तान पर सभी मंत्र मुग्ध हो जाएंगे | आज भी वातावरण श्री कृष्ण के बांसुरी के प्रभाव से भरा पड़ा है |

प्रश्न ) बर्ड वाचर से क्या अभिप्राय है ? इस पाठ में लेखक ने किसे बर्ड वाचर कहा है ?

उत्तर ) जिसे पक्षियों से प्रेम होता है उसे ही बर्ड वाचर कहते है | वह पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों का बड़ी ही गहराई से अध्ययन करता है | उनके  लिए जानकारी उपलब्ध कराता है | वह पक्षियों की रक्षा के लिए ठोस कदम तैयार करता है | इस पाठ में सालिम अली को बर्ड वाचर कहा है | उन्होंने सारी उम्र पक्षियों की तलाश व हिफ़ाजत में बिता दी |

प्रश्न ) लॉरेंस कौन था ? उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी से लोगों ने क्या कहा ?

उत्तर ) बीसवीं सदी के अंग्रेजी के प्रसिद्ध साहित्यकार थे | उनका प्रकृति से गहरा लगाव था उन्होंने कई कविताएं लिखी | वे मानते थे कि मानव जाति उखड़े हुए महान वृक्ष की तरह है जिसकी जड़े हवा में फैली हुई है | इसलिए मनुष्य का प्रकृति की ओर लौटना जरूरी है | लॉरेंस की पत्नी को उनके विषय में कुछ लिखने के लिए कहा तो उन्होंने इसी कठिन कार्य बताया क्योंकि वो अपना अधिकतर समय छत  पर बैठी गोरैया से बातें करने में बिताते थे |

Sunday, May 29, 2022

उपभोक्तावाद की संस्कृति श्यामाचरण दुबे (कक्षा नौवीं)

उपभोक्तावाद की  संस्कृति

         श्यामाचरण दुबे

 

प्रश्न 1) लेखक के अनुसार जीवन में सुख से क्या अभिप्राय है ?

उत्तर ) लेखक के अनुसार जीवन में सुख आजकल महंगी – महंगी वस्तुओं, आभूषणों का होना, उपभोग के लिए अधिक से अधिक साधनों का अपने पास होने को माना जाने लगा है | पर वास्तविकता यह है कि किसी व्यक्ति का शारीरिक और मानसिक रूप से  स्वस्थ होना ही सच्चा सुख है |

प्रश्न 2) आज की उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को किस प्रकार बदल रही है ?

उत्तर ) आज की उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को विभिन्न प्रकार से प्रभावित कर रही है जो कि इस प्रकार है |

i)        उसने हमारी सोच को बदल दिया है हम पश्चिमी सभ्यता का अनुकरण कर रहे हैं |

ii)       नैतिक मूल्य और मर्यादाएँ कमजोर पड़ रही है |

iii)      स्वार्थ की प्रवृति को बढ़ावा मिल रहा है |

iv)      समाज में विभिन्न वर्गों के बीच दूरियाँ बढ़ रही है |

v)       सामाजिक सरोकारों में कमी आने से व्यक्ति आत्म – केन्द्रित होते जा रहे है |

प्रश्न 3) गांधी जी ने उपभोक्तावादी संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कहा है ?

उत्तर ) उपभोक्तावादी संस्कृति हमारी एकता व अखंडता की नींव को हिला रही है | व्यक्ति आत्म- केन्द्रित होता जा रहा है | वह सामाजिक सरोकारों से दूर होकर केवल अपने विषय में ही सोचता है | यह संस्कृति हमारी सामाजिक व सांस्कृतिक नींव को हिला रही है | गांधी जी के अनुसार हमें स्वस्थ सांस्कृतिक प्रभावों के लिए अपने खिड़की दरवाजे खुले रखने चाहिए, पर अपने बुनियादों पर भी कायम रहना चाहिए |

प्रश्न 4) आशय स्पष्ट कीजिए

क)   जाने – माने आज के माहौल में आपका चरित्र भी बदल रहा है और आप उत्पाद को समर्पित होते जा रहे हैं |

उत्तर ) उपभोक्तावादी संस्कृति ने उत्पादन पर जोर दिया है |  जिससे अधिक से अधिक सामान लोगों तक उनके उपयोग के लिए पहुँच सके | व्यक्ति की इन उत्पादों पर निर्भरता बढ़ गई है वह चाहकर पर भी इन वस्तुएँ के प्रयोग को नहीं छोड़ सकता | आजकल परिवार के सभी सदस्यों के लिए अलग-अलग मोबाइल होना इसका जीवंत उदाहरण है | इससे हमारी जीवन शैली बदल रही है | हमारा चरित्र और सोच में भी बदलाव आया है |

ख)   प्रतिष्ठा के अनेक रूप होते हैं, चाहे वे हास्यपाद ही क्यों न हों |

उत्तर ) उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रभाव में आकर कुछ लोग इस प्रकार के कार्य कर देते है जो उन्हें हंसी का पात्र बना देते है |जैसे कुछ विशिष्ट लोग अमेरिका व यूरोप में  प्रतिष्ठा पाने हेतु अपने मृत्यु से पहले ही अच्छी कब्र  के लिए बहुत पैसे खर्च कर देते हैं | हरी घास और फव्वारे लगाने का प्रबंध कर देना इत्यादी |

रचना व अभिव्यक्ति :

प्रश्न 5) कोई वस्तु हमारी लिए उपयोगी हो या न हो, लेकिन टी. वी. पर विज्ञापन देखकर हम उसे खरीदने के लिए लालयित होते हैं ? क्यों ?

उत्तर ) क्योंकि टी. वी.  पर  दिखाए गए विज्ञापनों में  वस्तुओं का बहुत प्रभाव व उपयोग देखने को मिलता है व सबके मन मस्तिष्क पर छा जाता है | हमारे पसंदीदा कलाकारों द्वारा बढ़ा-चढ़ाकर‌ वस्तुओं की खूबियाँ बताना | छोटे बच्चे के दबाव में आकर भी हम वस्तुएँ खरीद लेते हैं |

प्रश्न 6) आपके अनुसार वस्तुओं को खरीदने का आधार वस्तु की गुणवत्ता होनी चाहिए या उसका विज्ञापन ? तर्क देकर स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) किसी भी विज्ञापन में वस्तुओं के गुणों की बढ़ा- चढ़ाकर कलाकारों द्वारा तारीफ की जाती हैं | उनकी कमियों को छिपा लिया जाता हैं | उनकी शैली भ्रामक व आकर्षित करने वाली होती हैं | जिससे हम प्रभावित होते चले जाते हैं | मेरे अनुसार वस्तुओं को खरीदने का आधार उनका विज्ञापन नहीं उनकी गुणवत्ता होना चाहिए |

प्रश्न 7) पाठ के आधार पर आज के उपभोक्तावादी युग में  पनप रही दिखावे की संस्कृति पर विचार व्यक्त कीजिए |

उत्तर ) आज के उपभोक्तावादी युग में  पनप रही दिखावे की संस्कृति समाज में यश पाने  का माध्यम बन गई है | जितनी महंगी वस्तुओं का हम प्रयोग करते है उतना ही हमारा समाज में यश  व प्रसिद्धि फैलती हैं | हम विशिष्ट लोगों में गिने जाने लगते हैं | झूठी शान व मान को पाने के लिए आय से अधिक खर्च करते हैं तथा कई बार तो बड़े कर्ज भी बैंक व अन्य लोगों से ले लेते हैं |

प्रश्न 8) आज की उपभोकतवादी संस्कृति हमारे रीति-रिवाजों और त्योहारों को किस प्रकार प्रभावित कर रही है ? अपने अनुभव के आधार पर एक अनुच्छेद लिखिए |

उत्तर ) भारत त्योहारों का देश है | यहाँ विभिन्न धर्मों के लोग समय – समय पर त्योहरों को अपने धर्म के अनुसार मनाते है |त्योहारों के आने से कुछ समय पूर्व ही अपना उत्पाद बेचने के लिए लेन-देन संबंधी विज्ञापन दिखाना शुरू कर देते हैं | इस प्रकार से विज्ञापन बनाकर दिखाया जाता है कि कैसे अमुक वस्तु हमारे रिश्तों को आपस में लेन – देन  से मजबूत कर देती है ? हम उस वस्तु की खरीददारी शुरू कर देते हैं |

भाषा अध्ययन:

प्रश्न 9) धीरे-धीरे सब कुछ बदल रहा है |

इस वाक्य में बदल रहा है क्रिया है | यह क्रिया कैसे हो रही है –धीरे धीरे | अत : यहाँ धीरे धीरे क्रियाविशेषण है | जो शब्द किसी क्रिया की विशेषता बताते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं | जहां वाक्य से हमें पता चलता है क्रिया कैसे, कब कितनी और कहाँ हो रही है , वहाँ वह शब्द क्रिया विशेषण कहलाता है |

क)    ऊपर दिये गए उदाहरण को ध्यान में रखते हुए क्रिया-विशेषण से युक्त पाँच वाक्य पाठ में से छाँटकर लिखिए |

1)  धीरे धीरे सब कुछ बदल रहा है | ( रीतिवाचक क्रिया-विशेषण )

2)  आपको लुभाने की कोशिश में निरंतर लगी रहती है | (रीतिवाचक क्रिया-विशेषण )

3)  सामंती संस्कृति के तत्व भारत में पहले भी रहे हैं | ( कालवाचक क्रिया-विशेषण )

4)  हमारे सामाजिक सरोकारों में कमी आ रही  है |   ( परिणामवाचक क्रिया-विशेषण )

5)  अमेरिका में जो आज हो रहा है , कल वह भारत में भी आ सकता है |

( आज , कल परिणामवाचक क्रिया-विशेषण )

धीरे-धीरे, ज़ोर से, लगातार, हमेशा, आजकल, कम , ज्यादा, यहाँ , उधर, बाहर – इन क्रिया – विशेषण शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए |

ख)   धीरे – धीरे, ज़ोर से, लगातार, हमेशा, आजकल, कम, ज्यादा, यहाँ, उधर, बाहर – इन क्रिया – विशेषण शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए |

धीरे – धीरे : धीरे – धीरे सवेरा हो गया  |

      ज़ोर से   : वह ज़ोर से बजने लगा |

      लगातार  : पुलिस  लगातार पीटती  रही|

      हमेशा  : हमेशा सच बोलो |

      आजकल : आजकल महंगाई बढ़ती जा रही है |

      कम   : वह कम बोलता है |

      ज्यादा  : वह ज्यादा देर सोता है |

      यहाँ    : यहाँ वो मज़ा नहीं जो वहाँ है |

      उधर     : उधर मत भागो |

      बाहर     : बाहर रुककर देखो |

ग)     नीचे दिये गए वाक्यों में से क्रिया – विशेषण और विशेषण शब्द छाँटकर अलग लिखिए -

        

1.   कल रात से निरंतर बारिश हो रही है  |

क्रिया-विशेषण – निरंतर              विशेषण – कल

2.   पेड़ पर लगे पके आम देखकर बच्चों के मुंह से पानी आने लगा |

 

क्रिया विशेषण – लगे                  विशेषण – पके

3.   रसोईघर से आती पुलाव की हल्की सी खुशबू से मुझे ज़ोरों की भूख लग आई |

क्रिया-विशेषण – ज़ोरों की                       विशेषण -हल्की

4.   उतना ही खाओ जितनी भूख हो |

क्रिया-विशेषण   - उतना           विशेषण- जितनी

5.   विलासिता की वस्तुओं से आजकल बाजार भरा पड़ा है |

              क्रिया-विशेषण- आजकल       विशेषण- विलासिता

 

 

 

 

 

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...