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Friday, April 29, 2022

आश्रित वाक्य के भेद

 

 

आश्रित वाक्य के भेद

आश्रित वाक्य के भेद – आश्रित वाक्य के तीन भेद होते है –

संज्ञा उपवाक्य – यदि उपवाक्य प्रधान वाक्य के उद्देश्य, कर्म  या पूरक के रूप में संज्ञा के समान आए तो संज्ञा उपवाक्य होता है : जैसे –

मेरे जीवन के लक्ष्य है कि मैंने समाज सेवा करूँ |

इस वाक्य में कि समाज सेवा करूँ प्रधान उपवाक्य कि क्रिया है का उद्देश्य है | अत: यह संज्ञा उपवाक्य है |

सीता ने कहा कि आज मुझे घर जाना है|

संज्ञा उपवाक्य के आरंभ में कि योजक का प्रयोग होता है |

विशेषण उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की किसी संज्ञा, सर्वनाम या संज्ञा पदबंध की विशेषता प्रकट करने वाले उपवाक्य को विशेषण उपवाक्य कहते हैं |  इस प्रकार के उपवाक्यों से पूर्व जो, जिसने, जैसे, जितना आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है | जैसे –

क ) मैंने एक बिलाव देखा जो कुत्ते जितना बड़ा था |       

ख ) जो विद्यार्थी योग्य होते हैं, उन्हें सभी शिक्षक चाहते हैं|

क्रियाविशेषण उपवाक्य- जब आश्रित या गौण उपवाक्य का प्रयोग क्रियाविशेषण की भाँति हो तो वह क्रियाविशेषण उपवाक्य कहलाता है | ऐसे वाक्यों का आरंभ जब भी अथवा जहाँ-जहाँ जैसे शब्दों से होता है ; जैसे –

क ) जब-जब धर्म को खतरा होता है, ईश्वर अवतार लेते हैं | 

ख ) जहाँ –जहाँ प्रधानमंत्री गए, लोगों ने उनका स्वागत किया |

इन  वाक्यों में जब-तब तथा जहाँ- तहाँ से आरंभ होने वाले उपवाक्य  प्रधान उपवाक्य की क्रिया के समय या स्थान की जानकारी दे रहे हैं| अत: ये क्रिया विशेषण उपवाक्य हैं |

क्रिया विशेषण उपवाक्य  पाँच प्रकार के होते हैं |

कालवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य-

ज्यों ही मैं स्टेशन पहुंचा, त्योहीं गाड़ी ने सीटी बजाई |

जब पानी बरस रहा था, तब मैं सो रहा था |

जब- जब मैंने बाहर जाने की तैयारी की, तब-तब घर में कोई न कोई बीमार पढ गया |

रीतिवाचक क्रियाविशेषण –

क)    मैंने वैसे ही किया जैसा आपने बताया था |

ख)   वह उसी प्रकार खेलता है, जैसे उसके कोच सिखाते हैं |

  परिमाणवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य –

क)    जैसे –जैसे आमदनी बढ़ती जाती है, वैसे वैसे महँगाई बढ़ती जाती है |

ख)   तुम जितना पढ़ोगे, उतना ही तुम्हारा लाभ होगा |

  परिणामवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य –

 क)  वह आएगा अवश्य क्योंकि उसको पैसे लेने हैं |

 ख) यदि तुमने परिश्रम किया होता तो सफल हो जाते |

 ) यद्यपि तुम मोटे ताज़े हो तो भी उससे जीत नहीं पाओगे |

 घ ) वह तुम्हारे पास आ रहा है ताकि कल का कार्यक्रम बना सके |

स्थानवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य-

 क) जहाँ तुम पढ़ते थे वहीं मैं भी पढ़ता था |

 ख)जिधर तुम जा रहे हो आगे रास्ता बंद है |

 ग)जहाँ तुम्हारे भाई गए हैं, वहीं तुम भी जाओ|

मिश्र वाक्य और संयुक्त वाक्य में अंतर

संयुक्त वाक्य में मिश्र वाक्य हो सकता है परंतु मिश्र वाक्य में संयुक्त वाक्य नहीं हो सकता |

मिश्र वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य होता है तथा शेष उपवाक्य उसके उपर आश्रित होता हैं, जबकि संयुक्त वाक्य के अंतर्गत जितने भी उपवाक्य होते हैं, वे स्वतंत्र और निराश्रित होते हैं |

जैसे – वह बाज़ार गई और उसने फल खरीदे | (संयुक्त वाक्य )

     उसने कहा कि वह बाज़ार से फल लाएगी | ( मिश्र वाक्य )

मिश्र वाक्य में केवल एक प्रधान उपवाक्य होता है, किन्तु संयुक्त वाक्य में एक से अधिक प्रधान उपवाक्य होते हैं जैसे –

हम मद्रास गए और वहाँ दो सप्ताह रुके |

ऋषि कहते है कि सदा सत्य कि विजय होती है |

 

 

 

 

 

 

 

 

Tuesday, September 14, 2021

क्रिया

 

क्रिया

अर्थ के आधार पर क्रियाएँ दो प्रकार की होती है|

1 अकर्मक क्रिया – जिस क्रिया का फल कर्म पर न पड़कर कर्ता पर पढ़ता है, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं| इसमें किसी कर्म  की आवश्यकता नहीं होती ; जैसे-

लड़की हँस रही है|

चिड़ियाँ उड़ रही हैं|

तोता बोलता है |

इन वाक्यों में  हँस रही है,’ उड़ रही है, बोलता है क्रिया का कर्म नहीं है तथा इनके व्यापार और फल दोनों ही कर्ता में  हैं | अत: ये अकर्मक क्रियाएँ हैं|

2 सकर्मक क्रिया – जिन क्रिया शब्दों के व्यापार का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता हैं, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं: जैसे –

लोकेश चित्र बना रहा है|

नौकर गाड़ी साफ कर रहा है|

दर्ज़ी कपड़े सिल रहा है|

सकर्मक क्रिया की पहचान कर्ता और क्रिया के बीच क्या और किसे प्रश्न करने से हो जाती है | यदि इन प्रश्नों का उत्तर मिले तो क्रिया सकर्मक अन्यथा अकर्मक होती हैं;

जैसे -  लोकेश क्या बना रहा है?

 उत्तर )  चित्र |

अत: इस वाक्य में क्रिया सकर्मक हैं|


 

संधि

 

संधि

वर्णों  के पारस्परिक मेल को संधि कहते है| जैसे

 देव+ आलय = देवालय   (अ + आ = आ )

विद्या + आलय = विद्यालय ( आ + आ = आ)

महा + ईश     = महेश     ( आ + ई = ए )

सदा + एव     = सदैव     ( आ + ए = ऐ)

यदि + अपि    = यद्यपि   ( इ  + अ = य )

उत्  + ज्वल   = उज्ज्वल   ( त्+ ज = ज्ज )

सु   + आगत  = स्वागत    ( उ + अ = व )

निः  + धन      = निर्धन    ( :  + ध =र्ध)

 

संधि के भेद

हिन्दी में संधि तीन प्रकार की होती है |

1 स्वर संधि            2 व्यंजन संधि            3 विसर्ग संधि

1 स्वर संधि – दो स्वरों के मेल से जो परिवर्तन होता है, उसे स्वर संधि कहते हैं| इसके पाँच भेद हैं-

i)        दीर्घ संधि

ह्रस्व या दीर्घ अ,, उ के आगे क्रमश: ह्रस्व या दीर्घ अ,, उ – आ जाए तो दोनों मिलकर

क्रमश: आ,, ऊ बन जाते हैं, जैसे –

अ+ अ= आ

 

मत + अनुसार = मतानुसार                पर + अस्त = परास्त

पुष्प + अंजलि = पुष्पांजलि               हिम + अंशु = हिमांशु

पर  + अधीन = पराधीन                   हिम + अद्रि = हिमाद्रि

न्याय + अधीश = न्या                   मूल्य +अंकन =मूल्यांकन


अ + आ = आ

   

भोजन + आलय = भोजनालय             मरण + आसन्न  =  मरणासन्न

सत्य  + आग्रह  = सत्याग्रह             धर्म  + आत्मा   =  धर्मात्मा

रत्न   + कार   = रत्नाकर               गज  +  आनन  =  गजानन  

न्याय  + धीश   = न्यायधीश             छात्र  + आवास  =  छात्रावास


आ + अ = आ

विद्या + अर्थी = विद्यार्थी                     यथा + अर्थ   = यथार्थ

परीक्षा + अर्थी = परीक्षार्थी                      रेखा  + अंकन = रेखांकन 

विद्या + अभ्यास = विद्याभ्यास                 सेवा  + अर्थ   = सेवार्थ

सीमा  + अंकन  = सीमांकन                   परीक्षा + अभ्यास = परीक्षाभ्यास


आ + आ = आ

 

महा + आत्मा = महात्मा                       विद्या  +  आलय = विद्यालय

महा + आशय = महाशय                       शिवा   +  आलय = शिवालय

वार्ता + लाप  = वार्तालाप                      चिकित्सा + आलय  = चिकित्सालय

इ + इ = ई

 

अभि  + इष्ट = अभीष्ट                       कवि + इन्द्र  = कवीन्द्र

अति + इव  = अतीव                          मुनि + इन्द्र  = मुनीन्द्र

हरी + इच्छा = हरीच्छा                         अति + इव  = अतीव

इ + ई = ई

          

 


कपि + ईश  = कपीश                          गिरि +ईश = गिरीश

मुनि + ईश्वर  =मुनीशवर                       परि +ईक्षा = परीक्षा

हरी +ईश  =हरीश                              कवि +ईश्वर  =कवीश्वर

ई + इ= ई


 

शची +इंद्र = शचीन्द्र                           लक्ष्मी + इच्छा =लक्ष्मीच्छा

पत्नी + इच्छा  =पत्नीच्छा                      नारी + इच्छा  = नारीच्छा

नारी+ इंदर =नरिंधर                             नदी +इंद्र = नदीन्द्र  

  + ई = ई


 

रजनी +ईश = रजनीश                            मही +ईश =महीश

नदी + ईश =नदीश                               नारी +ईश्वर =नारीश्वर

जानकी + ईश = जानकीश                    मही + ईश्वर =महीश्वर

 

उ + उ = ऊ 

 


भानु  + उदय  = भानूदय                 साधु + उपदेश =  साधूपदेश

वधू +उत्सव =   वधूत्सव                  सू + उक्ति   =  सूक्ति

गुरु + उपदेश =  गुरूपदेश                 लघु + उत्तर =  लघुत्तर

 

उ + ऊ = ऊ

 

       

प्रभु + ऊर्मि  = प्रभूर्मी               लघु + ऊर्मि = लघूर्मि

अंबु + ऊर्मि =  अंबूर्मि                सिंधु + ऊर्मि =सिंधूर्मि

 

ऊ +ऊ = ऊ

 


भू + ऊर्जा = भूर्जा                                    

 

अ + इ = ए 

 


राज + इंद्र  = राजेंद्र                        स्व + इच्छा  =  स्वेच्छा     

धीर + इंद्र  =  धीरेंद्र                       शुभ + इच्छा  =  शुभेच्छा  

ज्ञान + इंद्र = ज्ञानेंद्र                        धरम + इंद्र = धर्मेंद्र

नर +  इंद्र =  नरेंद्र                         वीर + इंद्र  = वीरेंद्र

 

अ + ई  = ए 

 


गण + ईश = गणेश                         सुर + ईश = सुरेश 

सोम + ईश = सोमेश                         नर + ईश = नरेश

योग + ईश = योगेश                         परम +ईश्वर = परमेश्वर  

दिन  + ईश = दिनेश                         राम + ईश्वर =रामेश्वर

 

आ+ इ = ए 


 

यथा + इष्ट = यथेष्ट                      राजा + इंद्र = राजेन्द्र

महा  + इंद्र = महेंद्र                        रमा + इंद्र =  रमेंद्र


आ+ ई = ए


 

लंका + ईश  = लकेंश                             महा + ईश = महेश 

महा +ईश्वर = महेश्वर                             राजा + ईश  = राजेश

रमा + ईश = रमेश                                उमा + ईश  = उमेश

 

अ + उ = ओ  

 


धर्म +उदय  = धर्मोदय                          सूर्य + उदय  = सूर्योदय

विवाह + उत्सव = विवाहोत्सव                     लोक + उक्ति = लोकोक्ति

चंद्र   + उदय  = चंद्रोदय                        हित + उपदेश = हितोपदेश

                                                  

आ + उ = ओ 

 


महा + उदय = महोदय                          गंगा + उदक = गंगोदक

महा + उसत्व  = महोत्सव                       महा + उदधि = महोदधि

 

अ + ऊ = ओ 

 


जल +उर्मि = जलोर्मि                            समूद्र + उर्मि  = समुद्रोर्मी

नव + ऊढा = नवोढा                             नव + उर्मि  =  नवोर्मि

 

आ + ऊ = ओ  


 

गंगा + ऊर्मि = गंगोर्मि                     महा +ऊर्मि = महोर्मि

महा + ऊर्जा = मर्होजा                      दया + ऊर्मि = दयोर्मि

 

  +  ऋ = अर्

 

 


देव + ऋषि = देवर्षि                       सप्त + ऋषि = सप्तर्षि

राज + ऋषि = राजर्षि                      ब्रह्म + ऋषि =ब्रह्मर्षि

 

  +  ऋ = अर्

 


 

महा + ऋषि = महर्षि                          राजा + ऋषि = राजर्षि


 ग ) वृद्धि संधि

यदि या के बाद या हो तो दोनों मिलकर हो जाते हैं, जैसे

अ + ए = ऐ

 

एक + एक  = एकैक                         लोक + एषणा = लोकैषणा

धन + एषणा = धनैषणा                       वित  + एषणा = वितैषणा


आ + ए = ऐ

 

सदा + एव  = सदैव                          यथा + एव  = यथैव

तथा + एव = तथैव

 

अ + ऐ = ऐ

 


मत + ऐक्य = मतैक्य                         देव + ऐश्वर्य = देवैश्वर्य

लोक + ऐक्य = लोकैक्य


आ + ऐ = ऐ

 


महा + ऐश्वर्य = महैश्वर्य


II) यदि या के बाद या हो तो मिलकर हो जाते हैं ,जैसे

अ + ओ = औ

 

  

दंत + औष्ठ = दंतौष्ठ                     परम + ओज = परमौज

अधर + ओष्ठ = अधरौष्ठ                   वन  + औषधि = वनौषधि

अ + औ = औ   

 

परम + औषध = परमौषध                      वन + औषध = वनौषध

परम + औदार्य = परमौदार्य

आ + ओ = औ

 


महा +औदार्य = महौदार्य                       महा + औषध =महौषध


घ) यण संधि

यदि इ या ई के बाद कोई भिन्न स्वर आ जाए तो  या का य बन जाता है, जैसे –

इ + अ = य

 

 

अति + अधिक = अत्यधिक                    यदि + अपि = यद्यपि


इ +  आ = या

 

अभि + आगत = अभ्यागत                    परि + आवरण = पर्यावरण

वि   + आयाम = व्यायाम                    अति + आचार = अत्याचार


ई + अ = य

 

 

नदी + अर्पण = नद्यर्पण                       देवी + आगमन = देव्यागमन


इ + उ = यु

 

उरि + उक्त = उपर्युक्त                        प्रति + उपकार = प्रत्युपकार

इ + ऊ = यू

 

 

वि + ऊह = व्यूह                             नि + ऊन = न्यून

इ + ए = ये

 


प्रति + एक = प्रत्येक

ई + ऐ= यै


 

देवी + ऐश्वर्य = देव्यैश्वर्य


Iv) यदि उ या ऊ के बाद कोई उ, ऊ से भिन्न स्वर आए तो उ या ऊ का व हो जाता है, जैसे-

उ + अ = व


 

सु +आगत = स्वागत               मनु + अंतर = मन्वंतर

अनु + अय = अन्वय               सु + अल्प   = स्वल्प


उ + आ = वा

 


सु + आगत =  स्वागत                             

उ + इ = वि

 


अनु + इति = अन्विति

उ + ए  = वे

 


अनु + एषण = अन्वेषण

ऋ + अ   =र


 

पित्र + अनुमति = पित्रनुमती

ऋ + आ   =रा


 

मात्र + आज्ञा = मात्राज्ञा                       पित्र + आज्ञा = पित्राज्ञा

ऋ + इ    =रि


 

मातृ + इच्छा = मात्रिच्छा

अयादि संधि

यदि या ’, के बाद कोई इनसे भिन्न स्वर आ जाए तो का अय’, का आय’,

का आय’, का अवतथा का आव बन जाता है, जैसे-

ए + अ = अय

 


ने + अन = नयन                        शे  + अन = शयन


  + अ =आय

 


गै + अक = गायक                     गै + अन  = गायन


  + अ =अव 

 


भो + अन = भवन                     पो + अन = पावन

   + अ =आव 

 



पौ  + अन = पावन                    पौ + अक = पावक


   + इ =आवि 

 



नौ   + इक = नाविक

औ + उ = आवु  

 


भौ  + उक = भावुक 

 

 

 




 

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