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Friday, July 16, 2021

पाठ 2 जॉर्ज पंचम की नाक कमलेश्वर

 

जॉर्ज पंचम की नाक

        कमलेश्वर

प्रश्न) सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है वह उनकी किस मानसिकता को दर्शाती है?

उत्तर) सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है, वह उनकी गुलाम मानसिकता को दर्शाती है| उनकी इस मानसिकता से पता चलता है कि वे स्वतंत्र होकर भी अंग्रेज़ो के प्रभाव से प्रभावित है | उन्हें अपने उस मेहमान की नाक बहुमूल्य लगती है जिसने भारतवर्ष को गुलाम बनाया और अपमानित किया | उनके पास जॉर्ज पंचम जैसे लोगों के बुरे कार्यो को उजागर कर विरोध करने का साहस नहीं है| वे उन्हें सम्मान देकर अपनी दासता की भावना को प्रमाणित करना चाहते हैं|

प्रश्न) रानी एलिज़ाबेथ के दर्जी की परेशानी का क्या कारण था | उसकी परेशानी को आप किस तरह तर्कसंगत ठहराएँगे?

उत्तर) रानी एलिज़ाबेथ  के दर्जी की परेशानी का कारण रानी के द्वारा भारत, नेपाल और पाकिस्तान के दौरे के समह पहनी जाने वाली पोशाकों की विविधता सुंदरता और आकर्षण था इन पोशाकों में रानी कैसी लगेगी दर्ज़ी की परेशानी उसकी अपनी दृष्टि से तर्कसंगत थी|  हर व्यक्ति अपने द्वारा किए गए कार्य को सर्वश्रेष्ठ रूप में प्रस्तुत करना चाहता है ताकि वे दूसरे के द्वारा की गई प्रशंसा को सहज रूप में बटोर सके |

प्रश्न) ओर देखते ही देखते नयी दिल्ली का काया पलट होने लगा’- नयी दिल्ली के काया पलट के लिए क्या क्या प्रयत्न किए गए होंगे?

उत्तर) जब इंग्लैंड की रानी एलिज़ाबेथ ने भारत की यात्रा करने का निश्चय किया तो भारत सरकार की प्रसन्नता का कोई ठिकाना न रहा| नयी दिल्ली की सड़के टूटी- फूटी और धूल से भरी हुई थी| उन्हे साफ करके उनकी मुरम्मत की गई होगी |पुराने भवनों को भी  सजाया गया होगा| हर चौराहे को रानी के स्वागत हेतु बंधनवार और फूलों से सजाया गया होगा| रानी के स्वागत के लिए रंग बिरंगे बोर्ड तैयार किए गए होंगे |

प्रश्न) आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान पान संबंधी आदतों आदि वर्णन का दौर चल पड़ा है

क)    इस तरह की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार है?

ख)     इस तरह की पत्रकारिता आम जनता विशेष कर युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव डालती है?

उत्तर) क) आज की पत्रकारी का चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान पान संबंधी आदतों के बारे  कुछ न कुछ लिखने में गर्व अनुभव करती है | एसी पत्रकारिता से सामान्य लोगों को निजी जीवन के संबंध में शाब्दिक जानकारी तो अवश्य मिलती है, जिनके बारे में वे न जाने क्या क्या सोचते रहते है | किन्तु ऐसी खबर को अखबार की प्रमुख खबर के रूप में नही छापना चाहिए | |

ग)     इस तरह की पत्रकारिता आम जनता के  रहन- सहन के तौर तरीके और फैशन के प्रति जागरूक करती है किन्तु इसका कभी- कभी इतना अधिक प्रभाव पड़ता है की युवक- युवतियाँ पढ़ाई लिखाई की अपेक्षा फैशन की और अधिक ध्यान देने लगते है|

प्रश्न) जॉर्ज पंचम की लाठ की नाक को पुन: लगाना  के लिए क्या क्या यत्न किए ?

उत्तर) उसने सबसे पहले वैसा ही पत्थर खोजने के लिए देश भर के पर्वत छान डाले जिसे उसकी मूर्ति बनी हुई थी| सरकारी फाइलें भी ढूँढी ताकि वहाँ से कोई अता पता चल सके| देश भर के महान पुरुषों की बनी प्रतिमाओं की नाकों का नाप भी लिया गया  पर वह उससे बड़ी थी पर अंत में किसी की जीवित नाक काटकर जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर लगा दी गई|

प्रश्न) प्रस्तुत कहानी में जगह-जगह कुछ ऐसे कथन आए है जो मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट करते हैं| उदाहरण के लिए फाइलें सब कुछ हज़म कर चुकी हैं| सब हुक्कामों ने एक-दूसरे की तरफ ताका|’पाठ में आए ऐसे अन्य कथन छाँटकर लिखिए |

उत्तर ) प्रस्तुत कहानी में मौजूदा व्यवस्थता पर चोट करने वाले निम्नलिखित कथन आए हैं-

क)    शंख इंग्लैंड में बज रहा था,गूँज हिंदुस्तान में आ रही थी|

ख)   गश्त लगती रही और लाट की नाक चली गई|

ग)     सभी सहमत थे कि यदि लाट की नाक नहीं तो हमारी भी नाक नहीं रह जाएगी|

घ)     हर हालत में इस नाक का होना जरूरी था|

ङ)     लेकिन बड़ी होशियारी से|

प्रश्न) नाक मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का द्योतक है| यह बात पूरी व्यंग्य रचना में किस तरह उभरकर आई है? लिखिए|

उत्तर ) लेखक का प्रमुख लक्ष्य ही नाक को मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का द्योतक सिद्ध करना रहा है| जॉर्ज पंचम भारत पर विदेशी शासन का प्रतीक है|उनकी लाट से नाक चली जाना उनका अपमान है| रानी एलीज़ाबेथ के आने पर सभी सरकारी अधिकारी अङ्ग्रेज़ी शासन के विरुद्ध अपनी नाराजगी जाहिर करने की अपेक्षा उसकी आराधना में जुट गए| यह कार्य भारत की नाक काटने के समान था जॉर्ज पंचम की नीतियाँ भारत विरोधी थीं| इसलिए उसकी नाक किसी भारतीय सेनानी से छोटी थी| उसकी नाक लगाने के लिए हजारों-लाखों रुपये खर्च कर दिए| अंत में कोई जीवित नाक उस पर लगा दी गई|   

प्रश्न)8  जॉर्ज पंचम की लाट  पर किसी भारतीय नेता, यहाँ तक कि भारतीय बच्चे की नाक फिट न होने की बात से लेखक किस ओर संकेत करना चाहता है?

उत्तर ) जॉर्ज पंचम की नाक सभी भारतीय नेताओं और भारतीय बच्चों की नाक से छोटी थी| लेखक ने बताया है कि भारतीय नेताओं और बलिदान देने वाले बच्चों का मान-सम्मान जॉर्ज पंचम की नाक से अधिक था|गांधी ,लाला लाजपतराय,सुभाषचंद्र बोस,नेहरू आदि नेता तो जॉर्ज पंचम से कहीं अधिक सम्माननीय थे| यह संकेत करना ही  लेखक का लक्ष्य रहा है|

प्रश्न) अखबारों ने जिंदा नाक लगाने कि खबर को किस तरह प्रस्तुत किया ?

उत्तर ) अखबारों ने जिंदा नाक लगाने कि खबर को केवल इतना ही  प्रस्तुत किया कि नाक का मसला हल हो गया है| राजपथ पर इंडियागेट के पास वाली जॉर्ज पंचम की लाट के नाक लग गई है|

प्रश्न) नयी दिल्ली में सब था ...... सिर्फ नाक नहीं थी|” इस कथन के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

उत्तर ) इस कथन के माध्यम से लेखक ने बताया  है कि देश में स्वतन्त्रता के बाद दिल्ली में हर प्रकार की सुख-सुविधा थी| केवल जॉर्ज पंचम का अभिमान और मान-सम्मान वाली ऊंची नाक नहीं थी | अङ्ग्रेज़ी राज्य में उनकी यहाँ तूती बोलती थी | उन्हीं का आदेश चलता था,किन्तु अब इंडिया गेट के पास वाली उनकी नाक भी शेष नहीं बची थी |

प्रश्न) जॉर्ज पंचम की नाक लगने वाली खबर के दिन अखबार चुप क्यों थे?

उत्तर )मूर्तिकार ने  जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर जिंदा नाक लगा दी गई |अखबारों में खबर छप गई कि नाक लगा दी गई है| उस दिन भारतियों को लगा कि उन सबकी नाक कट गई है| सारी भारतीय जनता का बहुत बड़ा अपमान हुआ | आज देश में उस व्यक्ति कि मूर्ति पर जिंदा नाक लगा दी है ,जिसने सारे भारत को गुलामी की जंजीरों में बाँधे रखा था | अपमान की पीड़ा से व्याकुल होने कारण उनके पास कहने के लिए कुछ न था | इसलिए अखबार  उस दिन चुप थे|

 

 

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