Friday, April 22, 2022

माता का अंचल (शिव पूजन सहाय ) कक्षा 10वीं हिन्दी कृतिका

 

माता का अंचल

शिव पूजन सहाय

कक्षा 10वीं हिन्दी कृतिका भाग 2 

प्रश्न 1) प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है | आपकी समझ में इसकी क्या वजह हो सकती है ?

उत्तर ) पाठ के अनुसार बच्चे का पिता  से अधिक जुड़ाव था | पिता केवल लालन पालन में सहयोग ही नहीं करता बल्कि वो उसका अच्छा दोस्त भी है | उसके अधिकतर खेलों में भाग भी लेता है | बच्चे को विपदा के समय अत्यधिक ममता व स्नेह की आवश्यकता होती है  और वो भोलोनाथ को केवल अपनी माँ की गोद में ही जाकर मिलती है | उसे असली शांति व प्रेम की छाया माँ की गोद में ही मिलती है |

प्रश्न 2) आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है ?

उत्तर ) बच्चे को अपने साथियों के साथ खेलने में गहरा आनंद आता है | उसे अपने मित्रों  के साथ तरह तरह के खेल खेलना अच्छा लगता है | वे उसके हर खेल व हुड़दंग के साथी होते है | अपने मित्रों को शोर मचाते, शरारतें करते और खेलते देखकर सब कुछ भूल जाता है | इसलिए रोना भूल कर वह दोबारा मित्र मंडली में खेल का मज़ा उठाने लगता है | उसी मग्नावस्था में वह सिसकना भी भूल जाता है |

प्रश्न 3) भोलानाथ और उसके साथियों के खेलने की सामाग्री आपके खेल और खेलने की सामाग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है ?

उत्तर ) भोलानाथ व उसके साथी खेल के लिए आँगन व खेतों पर पड़ी चीजों को ही खेल का आधार बनाते है | भोलानाथ के समय के बच्चों के खेलों की सामाग्री और साधन भी अलग थे ; उनके लिए मिट्टी के बर्तन, पत्थर, पेड़ों की पत्तियाँ, गीली मिट्टी, घर के सामान आदि वस्तुएँ होती थीं जिनसे खेलते हुए वे बहुत खुश होते थे | लेकिन आज जमाना बदल चुका है | आजकल माता पिता अपने बच्चों का बहुत ध्यान रखते हैं | वे बच्चों को ऐसे- वैसे घूमने की इजाजत नहीं देते है | भोलानाथ व उसके साथियों के खेल की सामाग्री आसानी से व बिना मूल्य के मिल जाती थी | परंतु आज खेल सामग्री बाज़ार से खरीदनी पड़ती है | आज के बच्चे क्रिकेट, साइकिल चलाने, दौड़ने कार्टून बनाने, तैरने, लूडो आदि खेल खेलने में आनंद लेते हैं |

प्रश्न 4) पाठ में आए प्रसंगों वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?

उत्तर ) पाठ में ऐसे कई प्रसंग आए हैं जिन्होंने मेरे दिल को छू लिया-

     1 ) रामायण पाठ कर रहे अपने पिता के पास बैठे हुए भोलानाथ का आईने में निहारकर खुश होना और जब उसके पिता जी उसे देखते हैं तो शर्माकर उसका आईना रख देने की अदा बड़ी प्यारी लगती है |

     2 ) बच्चे का अपने पिता के साथ कुश्ती लड़ना, कमजोर होकर बच्चे के बल को बढ़ावा देना फिर पछाड़ खाकर गिर जाना | बच्चे का अपने पिता की मूंछ खींचना आदि बड़े ही सुंदर प्रसंग है |

     3 ) बच्चों द्वारा बारात  का स्वांग रचते हुए समधि का बकरे पर सवार होना, दुल्हन को लिवा लाना व दुल्हन का पिता द्वारा घूँघट उठाने पर बच्चे का भाग जाना |

    4 ) कहानी के अंत में भोलानाथ का साँप को देखकर माँ के आंचल में छिप जाना, माँ की चिंता, हल्दी लगाना और बाबू जी के बुलाने पर भी माँ की गोद न छोड़ना – बड़े ही मन को छूने वाले दृश्य है |

प्रश्न 5) इस उपन्यास के अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है | आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं ?

उत्तर ) तीस दशक की ग्राम्य संस्कृति और आज की ग्राम्य संस्कृति में पर्याप्त अंतर दिखाई देता है | आज कुओं से पानी भरना व कुओं से खेतों की सिंचाई का प्रचलन समाप्त हो गया |  गाँवों में पीने के लिए पानी की वाटर सप्लाई हो गई है | पहले वृक्षों के झुरमट से घिरे कच्चे मिट्टी के घर हुआ करते थे | आज ज्यादातर गाँवों में पक्की मिट्टी के मकान है |  पहले गाँवों में भरे पूरे परिवार होते थे लेकिन आज एकल संस्कृति ने जन्म ले लिया है | विज्ञान के प्रभाव के बढने से लालटेन के स्थान पर बिजली, बैल के स्थान पर ट्रैक्टर का प्रयोग, घरेलू  खाद के स्थान पर कृत्रिम खाद का प्रयोग तथा विदेशी दवाइयों का प्रयोग हो रहा है | आज मनोरंजन के साधन भी बदल चुके है | आपसी भाईचारा व मेल-मिलाप भी कम होने लगा है | ग्रामीण अंचल की मौज मस्ती भरे जीवन के स्थान पर व्यस्त एवं तेज़ रफ्तार वाला जीवन देखा जाता है |

प्रश्न 6) यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखो |

उत्तर) प्रस्तुत पाठ में आदि से अंत तक मटा- पिता का बच्चों के प्रति वात्सल्य भाव का ही उद्घाटन हुआ है | यह व्यक्त करना ही पाठ का प्रमुख लक्ष्य है | इसमें लेखक ने अपने शैशव काल का वर्णन है | भोलानाथ के पिता का दिन का आरंभ ही भोलानाथ के साथ शुरू होता है | उसे नहलाकर पूजा पाठ करना, उसको अपने साथ घूमाने ले जाना, उसके साथ खेलना  व बालसुलभ क्रीडा से प्रसन्न होना आदि उनके स्नेह व प्रेम को व्यक्त करता है | पिता जी के द्वारा कंधे पर बिठाकर गंगा के किनारे ले जाना | उसके साथ कुश्ती करना बच्चों को खुश रखने के लिए खेल में हार जाना | साँप को देखने से डर जाने पर माँ द्वारा अंचल में छुपा लेना आदि में वात्सल्य भाव का वर्णन हुआ है |

प्रश्न 7) माता  का अंचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए |

उत्तर ) इस पाठ में पिता और पुत्र के सम्बन्धों का उल्लेख किया गया है | पाठ के अंत में केवल एक घटना में बच्चे सर्प को देखकर डर जाते है | तथा लेखक माँ से अलग होने का नाम नहीं लेता है |वह माँ के अंचल में छिप जाता है | यह बात पूरी कल्पना सी लगती है | क्योंकि  बच्चा दिन-रात पिता  के साथ घुला मिला रहता है | उसका अधिकांश समय पिता के साथ बीतता है |  इस पाठ का यह शीर्षक उपयुक्त नहीं है |क्योंकि यह पाठ के अंतिम भाग में लागू होता है |इस पाठ का शीर्षक मेरा बचपन अथवा शैशवकाल हो सकता है |

प्रश्न 8) बच्चे अपने माता –पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते है ?

उत्तर ) बच्चे अपने माता-पिता के साथ रहते हुए, माता पिता की बताई अच्छी बातों पर अमल करके, उनके साथ खेलकर, उनकी आज्ञा का पालन करके, उनकी गोद में बैठकर आदि बातों से अपने प्रेम को उनके प्रति व्यक्त करते है | माता पिता से किसी वस्तु के लिए जिद करके कुछ मांगते है और मिल जाने पर उनको विभिन्न तरह से प्यार करते है |

प्रश्न 9) प्रस्तुत पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है | वह आपके बचपन की दुनिया से किस प्रकार भिन्न है ?

उत्तर ) प्रस्तुत पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है | वह पूर्णतया ग्रामीण पर आधारित है | प्रस्तुत कहानी तीस के दशक की है | उस समय बच्चों के पास खेले कूदने के लिए अधिक समय हुआ करता था | उन पर पढ़ाई करने का दबाव इतना नहीं होता था जितना आज है | उनके पास खेलने के साधन भी नहीं होते थे | आज तीन वर्ष उम्र होते ही बच्चों को नर्सरी में करा दिया जाता है | आज के बच्चे विडियो गेम, टी0 वी0 , कंप्यूटर, शतरंज आदि खेलने में लगे रहते है | या फिर क्रिकेट, हॉकी बेडमिंटन आदि में ही अपना समय बिता देते है |

प्रश्न 1) मरदुए क्या जाने कि बच्चों को कैसे खिलना चाहिए इस पंक्ति में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए|

उत्तर ) प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से  पुरुष वर्ग पर करारा व्यंग्य किया है | यह वाक्य लेखक की माता ने उनके पिता से कहा था | यह पूर्ण सत्य है की नारी में पुरुष की अपेक्षा ममता का भाव अधिक होता है | एक बच्चे को जो प्यार दुलार नारी से माता के रूप में मिलता है वह पिता के रूप में पुरुष से नहीं मिलता है |  माँ बच्चे के मनोभावों को शीघ्र समझ जाती है | माँ बच्चे से भावनात्मक रूप से जुड़ी होती है |

प्रश्न 2) बचपन में बच्चे सरल निर्दोष और मस्त होते हैं – पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए|

उत्तर ) बच्चे बचपन में अपने सरल सहज स्वभाव के कारण मन के भावों को आसानी सरल वाणी में कह दे देते  है | वे नहीं चाहते कि उनके खेलों में बड़े भी सम्मिलित हों | इसलिए जब भी लेखक के पिता ने उन्हें खेलते हुए देखा और उनके करीब चले गए, तो बच्चे अपना खेल अधूरा छोडकर भाग गए |

प्रश्न 3) माता का अंचल पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) लेखक की बाल्यावस्था का बड़ा ही आकर्षण रूप में चित्रण किया है | लेखक ने बताया है कि बचपन में उसे अपने माता-पिता का भरपूर सहयोग मिलता है | बचपन में बहुत ही भोलापन होता है इसका साक्षात रूप पाठ में देखने को मिलता है | बच्चे अपने खेल में तल्लीन होकर खेलते है | वहाँ किसी प्रकार का भेदभाव जलन व घृणा नहीं होता | बच्चों की दुनिया का सजीव चित्रण अंकित करना लेखक का प्रमुख लक्ष्य होता है |

प्रश्न 4) बूढ़े दूल्हे पर की गई टिप्पणी के माध्यम से लेखक ने क्या संदेश दिया है ?

उत्तर) प्रस्तुत पाठ में लेखक ने बूढ़े दूल्हे  के माध्यम से व्यंग्यात्मक टिपण्णी की है | लेखक ने यहाँ सलाह दी है कि बुढ़ापा में विवाह नहीं करना चाहिए | हर कार्य समय पर ही अच्छा लगता है | बुढ़ापे में दूल्हा बनना सामाजिक व नैतिक दृष्टि से उचित नहीं है |लेखक का यहाँ संदेश है कि वृद्ध विवाह नहीं होना चाहिए |

 

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