Tuesday, May 3, 2022

आत्मकथ्य (जयशंकर प्रसाद ) क्षितिज भाग 2 कक्षा 10वीं हिन्दी

 

पाठ 4 आत्मकथ्य

          जयशंकर प्रसाद

प्रश्न 1) कवि आत्मकथ्य लिखने से बचना क्यों चाहता है?

उत्तर )  कवि के जीवन में दु:ख और अभाव अत्यधिक है जिन्हें कवि दूसरों के साथ सांझा नहीं करना चाहता | और  न ही उसके मन में किसी के प्रति अनुरुक्ति का भाव है | उसका जीवन बहुत साधारण सा है | उसमें कुछ भी ऐसा महत्वपूर्ण नहीं है जिसे पढ़कर लोगों को आनंद की अनुभूति हो | इसलिए कवि आत्मकथा लिखने से बचना चाहता है |

प्रश्न 2 ) आत्मकथा सुनने के संदर्भ में, अभी समय भी नहीं कवि ऐसा क्यों कहता है ?

उत्तर ) कवि द्वारा यह कहना कि अभी समय भी नहीं है के दो प्रमुख कारण रहे होंगे – प्रथम, उसने अभी तक कोई महान कार्य नहीं किया कि जिसे  अपनी  आत्मकथा में  लिखकर संसार भर को बताया जाए | कवि दूसरा शांत स्वभाव का है | उसके जीवन में अनेक दु:ख है | उन्हें वह  अन्य को फिर से सुनाकर दु:खी नहीं होना चाहता है |

प्रश्न 3 ) स्मृति को पाथेय बनाने से कवि का क्या आशय है ?

उत्तर ) पाथेय का अर्थ है रास्ते का  भोजन या सहारा | पाथेय यात्रा में यात्री को सहारा देता है | सुखद स्मृति को पाथेय बनाने से कवि का आशय स्मृति के सहारे जीवन जीने से है | कवि की  प्रेयसी उससे दूर हो गई है | कवि के मन-मस्तिष्क में केवल उसकी मधुर यादें ही बची है | इन्हीं स्मृतियों को कवि अपने जीवन का सहारा बनाना चाहता है|

प्रश्न 4 ) भाव स्पष्ट कीजिए|

क)   मिला कहाँ वह सुख जिसका में स्वप्न देखकर जाग गया |

आलिंगन में आते-आते मुस्कया कर जो भाग गया |

  उत्तर) कवि ने इन पंक्तियों में स्पष्ट किया है कि उसने जिस सुख का स्वप्न देखा था वह सुख उसे कभी नहीं मिला | उसकी प्रेमिका भी उसके आलिंगन में आते - आते रह गई | वह मुसकराकर उसकी ओर बढ़ी, किन्तु कवि के आलिंगन में न आ सकी | वह उसकी पहुँच से सदा दूर होती चली गई | कहने का भाव है कि उसे कभी दाम्पत्य जीवन का सुख नहीं मिला |

ख)   जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में |

अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में |

उत्तर ) कवि की प्रेमिका का मुख प्रात: कालीन लालिमा से भी बढ़ाकर है | कवि की प्रिय के गाल लाल और मस्ती भरे है | ऐसा लगता है कि प्रेममयी भोर की बेला भी अपनी लालिमा उसके गालों से लिया करती थी |

प्रश्न 5) उज्ज्वल गाथा कैसे गाउँ, मधुर चाँदनी रातों की – कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है ?

उत्तर ) कवि कहता है कि अपनी प्रेयसी के साथ चाँदनी रात में बिताए  सुखदायक क्षण किसी उज्ज्वल गाथा की तरह पवित्र है जो कवि के लिए अपने अंधकारमय जीवन में आगे बढ़ने  का एकमात्र सहारा  थे | ऐसी मीठी यादों को वह सभी के सामने प्रस्तुत नहीं करना चाहता है | क्योंकि ये किसी की निज़ी संपत्ति होती है| अत: आत्मकथा में लिखना आवश्यक नहीं है |

प्रश्न 6) आत्मकथ्य कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए |

उत्तर ) आत्मकथ्य एक छायावादी कविता है | इसमें कवि ने संस्कृतनिष्ठ भाषा का प्रयोग किया है | अर्थात संस्कृत की तत्सम शब्दावली का प्रयोग किया है ; जैसे –

उज्ज्वल गाथा कैसे गाउँ, मधुर चाँदनी रातों की|”

कवि ने इस कविता की भाषा में प्रकृति के विभिन्न उपमानों का प्रयोग किया है |मधुप, पत्तियाँ, नीलिमा, चाँदनी रात आदि इसके उदाहरण हैं |

अलंकारों के प्रयोग से काव्य सौन्दर्य बढ़ गया है –

खिल-खिलाकर ,आते –आते में पुनरुक्ति अलंकार का प्रयोग किया गया है |

अरुण कपोलों में रूपक अलंकार है |स्वर मैत्री के कारण भी भाषा संगीतात्मक बन पड़ी है | चित्रात्मक भाषा की अन्य विशेषता है | मेरी मौन, अनुरागी उषा में अनुप्रास अलंकार है | प्रस्तुत कविता में कवि ने खड़ी बोली हिन्दी भाषा का प्रयोग भी किया है “ यह लो, करते ही रहते है अपना व्यंग्य- मलिन उपहास |”

प्रश्न 7 ) कवि ने जो स्वप्न देखा था उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है ?

उत्तर ) कवि ने जो स्वप्न देखा था उसे वह अपनी प्रेयसी के माध्यम से व्यक्त किया है | कवि कहता है कि नायिका स्वप्न में उसके पास आते-आते मुस्कुरा कर भाग गई | कवि कहना चाहता है कि जिस प्रेम के वे सपने देख रहे थे वो उन्हें कभी प्राप्त नहीं हुआ | कवि ने जिस सुख की कल्पना की थी वह उसे कभी प्राप्त न हुआ और उसका जीवन हमेशा सुख से वंचित ही रहा | इस दुनिया में सुख छलावा मात्र है | हम जिसे सुख समझते हैं वह अधिक समय तक नहीं रहता है, स्वप्न की तरह जल्दी ही समाप्त हो जाता है |

अन्य प्रश्न

प्रश्न 1) इस कविता के माध्यम से प्रसाद जी के व्यक्तित्व की जो झलक मिलती है, उसे अपने शब्दों में लिखिए |

उत्तर ) इस कविता को पढ़कर प्रसाद जी के व्यक्तित्व की ये विशेषताएँ हमारे सामने आती हैं-

 वे स्वभाव से सीधे- सादे इंसान थे | उनके जीवन में दिखावा नहीं था | उनके मित्रों ने उनके साथ छल किया फिर भी वे भोलेपन में  जीते रहें | वे गंभीर और मर्यादित थे | अपनी कमजोरियों को समाज में प्रस्तुत कर वे स्वयं हँसी के पात्र नहीं  बनना चाहते थे |

प्रश्न 2) कविवर जयशंकर प्रसाद की कविता आत्मकथ्य के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए|

उत्तर ) इस कविता में कवि ने संकेत रूप में  वह सब कुछ कह दिया है जो बहुत - लंबी चौड़ी आत्मकथ्य में भी नहीं कहा जा सकता | इस कविता के माध्यम से कवि ने उन लोगों को उत्तर दिया है जो लोग उन्हें आत्मकथा लिखने के लिए प्रेरित करते है | उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनके  जीवन में आत्मकथा लिखने योग्य महान उपलब्धियाँ नहीं हैं | उनका जीवन दु:खों व अभावों से भरा पड़ा है | इसके अलावा उनके जीवन में कुछ मधुर एवं प्रसन्नता के पल भी रहे हैं जो उनके जीवन की निजी निधि हैं | उन्हें वे सबके सामने व्यक्त नहीं करना चाहते| उन्होंने अपने विषय में कुछ न कहकर भी बहुत कुछ कह दिया यहीं उनके जीवन का लक्ष्य है |

प्रश्न ) आत्मकथा कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए|

उत्तर ) आत्मकथा कविता में कवि के जीवन के रहस्यों का आभास मिलता है | कवि स्वयं को सामान्य व्यक्ति बताता है | कवि का  जीवन दुर्बलताओं, अभावों व दु:खों से भरा हुआ है | उसके जीवन में मधुर क्षण बहुत कम आए है|  कवि ने मधुर सपने देखे लेकिन वे पूरा होने से पहले ही मिट गए थे | उसका जीवन बहुत सरल व साधारण रहा है | कवि ने स्पष्ट किया है कि उसके जीवन में कुछ महान नहीं है जिसे वे आत्मकथा में लिखकर लोगों के सामने प्रकट करें | कवि अपनी बातें बताने की अपेक्षा दूसरों की कहानी सुनना अच्छा समझता है |

प्रश्न) कवि अपनी आत्मकथा लिखने के प्रस्ताव को क्यों ठुकरा देता है ?

उत्तर ) कवि ने स्पष्ट किया है कि उसके जीवन में कुछ महान नहीं है जिसे वे आत्मकथा में लिखकर लोगों के सामने प्रकट करें | कवि अपनी बातें बताने की अपेक्षा दूसरों की कहानी सुनना अच्छा समझता है | इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा है कि उनके मन में दु:ख की स्मृतियाँ थककर सो गई हैं | उन्हें जगाने का अभी उचित समय नहीं है | उन्हें जगाने से मन को पीड़ा ही पहुँचेगी | इसलिए कवि आत्मकथा लिखने के प्रस्ताव को ठुकरा देता है |

 

 

Friday, April 29, 2022

आश्रित वाक्य के भेद

 

 

आश्रित वाक्य के भेद

आश्रित वाक्य के भेद – आश्रित वाक्य के तीन भेद होते है –

संज्ञा उपवाक्य – यदि उपवाक्य प्रधान वाक्य के उद्देश्य, कर्म  या पूरक के रूप में संज्ञा के समान आए तो संज्ञा उपवाक्य होता है : जैसे –

मेरे जीवन के लक्ष्य है कि मैंने समाज सेवा करूँ |

इस वाक्य में कि समाज सेवा करूँ प्रधान उपवाक्य कि क्रिया है का उद्देश्य है | अत: यह संज्ञा उपवाक्य है |

सीता ने कहा कि आज मुझे घर जाना है|

संज्ञा उपवाक्य के आरंभ में कि योजक का प्रयोग होता है |

विशेषण उपवाक्य प्रधान उपवाक्य की किसी संज्ञा, सर्वनाम या संज्ञा पदबंध की विशेषता प्रकट करने वाले उपवाक्य को विशेषण उपवाक्य कहते हैं |  इस प्रकार के उपवाक्यों से पूर्व जो, जिसने, जैसे, जितना आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है | जैसे –

क ) मैंने एक बिलाव देखा जो कुत्ते जितना बड़ा था |       

ख ) जो विद्यार्थी योग्य होते हैं, उन्हें सभी शिक्षक चाहते हैं|

क्रियाविशेषण उपवाक्य- जब आश्रित या गौण उपवाक्य का प्रयोग क्रियाविशेषण की भाँति हो तो वह क्रियाविशेषण उपवाक्य कहलाता है | ऐसे वाक्यों का आरंभ जब भी अथवा जहाँ-जहाँ जैसे शब्दों से होता है ; जैसे –

क ) जब-जब धर्म को खतरा होता है, ईश्वर अवतार लेते हैं | 

ख ) जहाँ –जहाँ प्रधानमंत्री गए, लोगों ने उनका स्वागत किया |

इन  वाक्यों में जब-तब तथा जहाँ- तहाँ से आरंभ होने वाले उपवाक्य  प्रधान उपवाक्य की क्रिया के समय या स्थान की जानकारी दे रहे हैं| अत: ये क्रिया विशेषण उपवाक्य हैं |

क्रिया विशेषण उपवाक्य  पाँच प्रकार के होते हैं |

कालवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य-

ज्यों ही मैं स्टेशन पहुंचा, त्योहीं गाड़ी ने सीटी बजाई |

जब पानी बरस रहा था, तब मैं सो रहा था |

जब- जब मैंने बाहर जाने की तैयारी की, तब-तब घर में कोई न कोई बीमार पढ गया |

रीतिवाचक क्रियाविशेषण –

क)    मैंने वैसे ही किया जैसा आपने बताया था |

ख)   वह उसी प्रकार खेलता है, जैसे उसके कोच सिखाते हैं |

  परिमाणवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य –

क)    जैसे –जैसे आमदनी बढ़ती जाती है, वैसे वैसे महँगाई बढ़ती जाती है |

ख)   तुम जितना पढ़ोगे, उतना ही तुम्हारा लाभ होगा |

  परिणामवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य –

 क)  वह आएगा अवश्य क्योंकि उसको पैसे लेने हैं |

 ख) यदि तुमने परिश्रम किया होता तो सफल हो जाते |

 ) यद्यपि तुम मोटे ताज़े हो तो भी उससे जीत नहीं पाओगे |

 घ ) वह तुम्हारे पास आ रहा है ताकि कल का कार्यक्रम बना सके |

स्थानवाची क्रियाविशेषण उपवाक्य-

 क) जहाँ तुम पढ़ते थे वहीं मैं भी पढ़ता था |

 ख)जिधर तुम जा रहे हो आगे रास्ता बंद है |

 ग)जहाँ तुम्हारे भाई गए हैं, वहीं तुम भी जाओ|

मिश्र वाक्य और संयुक्त वाक्य में अंतर

संयुक्त वाक्य में मिश्र वाक्य हो सकता है परंतु मिश्र वाक्य में संयुक्त वाक्य नहीं हो सकता |

मिश्र वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य होता है तथा शेष उपवाक्य उसके उपर आश्रित होता हैं, जबकि संयुक्त वाक्य के अंतर्गत जितने भी उपवाक्य होते हैं, वे स्वतंत्र और निराश्रित होते हैं |

जैसे – वह बाज़ार गई और उसने फल खरीदे | (संयुक्त वाक्य )

     उसने कहा कि वह बाज़ार से फल लाएगी | ( मिश्र वाक्य )

मिश्र वाक्य में केवल एक प्रधान उपवाक्य होता है, किन्तु संयुक्त वाक्य में एक से अधिक प्रधान उपवाक्य होते हैं जैसे –

हम मद्रास गए और वहाँ दो सप्ताह रुके |

ऋषि कहते है कि सदा सत्य कि विजय होती है |

 

 

 

 

 

 

 

 

Friday, April 22, 2022

माता का अंचल (शिव पूजन सहाय ) कक्षा 10वीं हिन्दी कृतिका

 

माता का अंचल

शिव पूजन सहाय

कक्षा 10वीं हिन्दी कृतिका भाग 2 

प्रश्न 1) प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है | आपकी समझ में इसकी क्या वजह हो सकती है ?

उत्तर ) पाठ के अनुसार बच्चे का पिता  से अधिक जुड़ाव था | पिता केवल लालन पालन में सहयोग ही नहीं करता बल्कि वो उसका अच्छा दोस्त भी है | उसके अधिकतर खेलों में भाग भी लेता है | बच्चे को विपदा के समय अत्यधिक ममता व स्नेह की आवश्यकता होती है  और वो भोलोनाथ को केवल अपनी माँ की गोद में ही जाकर मिलती है | उसे असली शांति व प्रेम की छाया माँ की गोद में ही मिलती है |

प्रश्न 2) आपके विचार से भोलानाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है ?

उत्तर ) बच्चे को अपने साथियों के साथ खेलने में गहरा आनंद आता है | उसे अपने मित्रों  के साथ तरह तरह के खेल खेलना अच्छा लगता है | वे उसके हर खेल व हुड़दंग के साथी होते है | अपने मित्रों को शोर मचाते, शरारतें करते और खेलते देखकर सब कुछ भूल जाता है | इसलिए रोना भूल कर वह दोबारा मित्र मंडली में खेल का मज़ा उठाने लगता है | उसी मग्नावस्था में वह सिसकना भी भूल जाता है |

प्रश्न 3) भोलानाथ और उसके साथियों के खेलने की सामाग्री आपके खेल और खेलने की सामाग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है ?

उत्तर ) भोलानाथ व उसके साथी खेल के लिए आँगन व खेतों पर पड़ी चीजों को ही खेल का आधार बनाते है | भोलानाथ के समय के बच्चों के खेलों की सामाग्री और साधन भी अलग थे ; उनके लिए मिट्टी के बर्तन, पत्थर, पेड़ों की पत्तियाँ, गीली मिट्टी, घर के सामान आदि वस्तुएँ होती थीं जिनसे खेलते हुए वे बहुत खुश होते थे | लेकिन आज जमाना बदल चुका है | आजकल माता पिता अपने बच्चों का बहुत ध्यान रखते हैं | वे बच्चों को ऐसे- वैसे घूमने की इजाजत नहीं देते है | भोलानाथ व उसके साथियों के खेल की सामाग्री आसानी से व बिना मूल्य के मिल जाती थी | परंतु आज खेल सामग्री बाज़ार से खरीदनी पड़ती है | आज के बच्चे क्रिकेट, साइकिल चलाने, दौड़ने कार्टून बनाने, तैरने, लूडो आदि खेल खेलने में आनंद लेते हैं |

प्रश्न 4) पाठ में आए प्रसंगों वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?

उत्तर ) पाठ में ऐसे कई प्रसंग आए हैं जिन्होंने मेरे दिल को छू लिया-

     1 ) रामायण पाठ कर रहे अपने पिता के पास बैठे हुए भोलानाथ का आईने में निहारकर खुश होना और जब उसके पिता जी उसे देखते हैं तो शर्माकर उसका आईना रख देने की अदा बड़ी प्यारी लगती है |

     2 ) बच्चे का अपने पिता के साथ कुश्ती लड़ना, कमजोर होकर बच्चे के बल को बढ़ावा देना फिर पछाड़ खाकर गिर जाना | बच्चे का अपने पिता की मूंछ खींचना आदि बड़े ही सुंदर प्रसंग है |

     3 ) बच्चों द्वारा बारात  का स्वांग रचते हुए समधि का बकरे पर सवार होना, दुल्हन को लिवा लाना व दुल्हन का पिता द्वारा घूँघट उठाने पर बच्चे का भाग जाना |

    4 ) कहानी के अंत में भोलानाथ का साँप को देखकर माँ के आंचल में छिप जाना, माँ की चिंता, हल्दी लगाना और बाबू जी के बुलाने पर भी माँ की गोद न छोड़ना – बड़े ही मन को छूने वाले दृश्य है |

प्रश्न 5) इस उपन्यास के अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है | आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं ?

उत्तर ) तीस दशक की ग्राम्य संस्कृति और आज की ग्राम्य संस्कृति में पर्याप्त अंतर दिखाई देता है | आज कुओं से पानी भरना व कुओं से खेतों की सिंचाई का प्रचलन समाप्त हो गया |  गाँवों में पीने के लिए पानी की वाटर सप्लाई हो गई है | पहले वृक्षों के झुरमट से घिरे कच्चे मिट्टी के घर हुआ करते थे | आज ज्यादातर गाँवों में पक्की मिट्टी के मकान है |  पहले गाँवों में भरे पूरे परिवार होते थे लेकिन आज एकल संस्कृति ने जन्म ले लिया है | विज्ञान के प्रभाव के बढने से लालटेन के स्थान पर बिजली, बैल के स्थान पर ट्रैक्टर का प्रयोग, घरेलू  खाद के स्थान पर कृत्रिम खाद का प्रयोग तथा विदेशी दवाइयों का प्रयोग हो रहा है | आज मनोरंजन के साधन भी बदल चुके है | आपसी भाईचारा व मेल-मिलाप भी कम होने लगा है | ग्रामीण अंचल की मौज मस्ती भरे जीवन के स्थान पर व्यस्त एवं तेज़ रफ्तार वाला जीवन देखा जाता है |

प्रश्न 6) यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखो |

उत्तर) प्रस्तुत पाठ में आदि से अंत तक मटा- पिता का बच्चों के प्रति वात्सल्य भाव का ही उद्घाटन हुआ है | यह व्यक्त करना ही पाठ का प्रमुख लक्ष्य है | इसमें लेखक ने अपने शैशव काल का वर्णन है | भोलानाथ के पिता का दिन का आरंभ ही भोलानाथ के साथ शुरू होता है | उसे नहलाकर पूजा पाठ करना, उसको अपने साथ घूमाने ले जाना, उसके साथ खेलना  व बालसुलभ क्रीडा से प्रसन्न होना आदि उनके स्नेह व प्रेम को व्यक्त करता है | पिता जी के द्वारा कंधे पर बिठाकर गंगा के किनारे ले जाना | उसके साथ कुश्ती करना बच्चों को खुश रखने के लिए खेल में हार जाना | साँप को देखने से डर जाने पर माँ द्वारा अंचल में छुपा लेना आदि में वात्सल्य भाव का वर्णन हुआ है |

प्रश्न 7) माता  का अंचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए |

उत्तर ) इस पाठ में पिता और पुत्र के सम्बन्धों का उल्लेख किया गया है | पाठ के अंत में केवल एक घटना में बच्चे सर्प को देखकर डर जाते है | तथा लेखक माँ से अलग होने का नाम नहीं लेता है |वह माँ के अंचल में छिप जाता है | यह बात पूरी कल्पना सी लगती है | क्योंकि  बच्चा दिन-रात पिता  के साथ घुला मिला रहता है | उसका अधिकांश समय पिता के साथ बीतता है |  इस पाठ का यह शीर्षक उपयुक्त नहीं है |क्योंकि यह पाठ के अंतिम भाग में लागू होता है |इस पाठ का शीर्षक मेरा बचपन अथवा शैशवकाल हो सकता है |

प्रश्न 8) बच्चे अपने माता –पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते है ?

उत्तर ) बच्चे अपने माता-पिता के साथ रहते हुए, माता पिता की बताई अच्छी बातों पर अमल करके, उनके साथ खेलकर, उनकी आज्ञा का पालन करके, उनकी गोद में बैठकर आदि बातों से अपने प्रेम को उनके प्रति व्यक्त करते है | माता पिता से किसी वस्तु के लिए जिद करके कुछ मांगते है और मिल जाने पर उनको विभिन्न तरह से प्यार करते है |

प्रश्न 9) प्रस्तुत पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है | वह आपके बचपन की दुनिया से किस प्रकार भिन्न है ?

उत्तर ) प्रस्तुत पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है | वह पूर्णतया ग्रामीण पर आधारित है | प्रस्तुत कहानी तीस के दशक की है | उस समय बच्चों के पास खेले कूदने के लिए अधिक समय हुआ करता था | उन पर पढ़ाई करने का दबाव इतना नहीं होता था जितना आज है | उनके पास खेलने के साधन भी नहीं होते थे | आज तीन वर्ष उम्र होते ही बच्चों को नर्सरी में करा दिया जाता है | आज के बच्चे विडियो गेम, टी0 वी0 , कंप्यूटर, शतरंज आदि खेलने में लगे रहते है | या फिर क्रिकेट, हॉकी बेडमिंटन आदि में ही अपना समय बिता देते है |

प्रश्न 1) मरदुए क्या जाने कि बच्चों को कैसे खिलना चाहिए इस पंक्ति में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए|

उत्तर ) प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से  पुरुष वर्ग पर करारा व्यंग्य किया है | यह वाक्य लेखक की माता ने उनके पिता से कहा था | यह पूर्ण सत्य है की नारी में पुरुष की अपेक्षा ममता का भाव अधिक होता है | एक बच्चे को जो प्यार दुलार नारी से माता के रूप में मिलता है वह पिता के रूप में पुरुष से नहीं मिलता है |  माँ बच्चे के मनोभावों को शीघ्र समझ जाती है | माँ बच्चे से भावनात्मक रूप से जुड़ी होती है |

प्रश्न 2) बचपन में बच्चे सरल निर्दोष और मस्त होते हैं – पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए|

उत्तर ) बच्चे बचपन में अपने सरल सहज स्वभाव के कारण मन के भावों को आसानी सरल वाणी में कह दे देते  है | वे नहीं चाहते कि उनके खेलों में बड़े भी सम्मिलित हों | इसलिए जब भी लेखक के पिता ने उन्हें खेलते हुए देखा और उनके करीब चले गए, तो बच्चे अपना खेल अधूरा छोडकर भाग गए |

प्रश्न 3) माता का अंचल पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) लेखक की बाल्यावस्था का बड़ा ही आकर्षण रूप में चित्रण किया है | लेखक ने बताया है कि बचपन में उसे अपने माता-पिता का भरपूर सहयोग मिलता है | बचपन में बहुत ही भोलापन होता है इसका साक्षात रूप पाठ में देखने को मिलता है | बच्चे अपने खेल में तल्लीन होकर खेलते है | वहाँ किसी प्रकार का भेदभाव जलन व घृणा नहीं होता | बच्चों की दुनिया का सजीव चित्रण अंकित करना लेखक का प्रमुख लक्ष्य होता है |

प्रश्न 4) बूढ़े दूल्हे पर की गई टिप्पणी के माध्यम से लेखक ने क्या संदेश दिया है ?

उत्तर) प्रस्तुत पाठ में लेखक ने बूढ़े दूल्हे  के माध्यम से व्यंग्यात्मक टिपण्णी की है | लेखक ने यहाँ सलाह दी है कि बुढ़ापा में विवाह नहीं करना चाहिए | हर कार्य समय पर ही अच्छा लगता है | बुढ़ापे में दूल्हा बनना सामाजिक व नैतिक दृष्टि से उचित नहीं है |लेखक का यहाँ संदेश है कि वृद्ध विवाह नहीं होना चाहिए |

 

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...