Sunday, July 18, 2021

पाठ -5 अट नहीं रही है सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

 

पाठ -5 अट नहीं रही है

                    सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

प्रश्न) कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नही हट रही है?

उत्तर) फागुन मास का प्राकृतिक सौंदर्य अत्यंत आकर्षक है | चारों ओर हरियाली छा गई है | वृक्ष हरे- भरे पत्तों और रंग-बिरंगे फूलो से लद गए है | पूरा वातावरण  मधुर एवं सुगंधित बन गया है | फागुन का यह सौन्दर्य प्रकृति में समा नहीं रहा है अथार्त पूरा वातावरण सौंदर्य से परिपूर्ण है |

प्रश्न) प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?

उत्तर ) प्रस्तुत कविता में अट नहीं रही है में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने फागुन के सौन्दर्य और मादक रूप के प्रभाव को दर्शाया है| फागुन का सौन्दर्य असीम है कवि ने उसे हर जगह छलकते हुए दिखाया है, जो घर-घर फैला हुआ है| यहाँ “घर-घर भर देते हो” में फूलों की शोभा की ओर संकेत है और मन की खुशी की ओर भी | उड़ने को पर- पर करना भी ऐसा ही सांकेतिक प्रयोग है,जो पक्षियों की उड़ान पर लागू होता है |

प्रश्न) फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?

उत्तर ) फागुन में सर्वत्र मादकता सुंदरता छाई रहती है| प्राकृतिक  शोभा अपने यौवन पर होती है| पेड़-पौधे नए पत्तों, फल-फूलों से लद जाते हैं, हवा सुगंधित हो उठती है| आकाश साफ-स्वच्छ होता है| पक्षियों के समूह आकाश में विहार करते दिखाई देते हैं| बाग-बगीचों और पक्षियों में उल्लास भर जाता है| इस तरह फागुन का सौन्दर्य बाकी ऋतुओं से भिन्न है|

प्रश्न) इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ बताएँ|

उत्तर ) महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी छायावाद के प्रमुख कवि माने जाते है| उत्साह और अट नहीं रही  है  दोनों ही कविताओं में प्राकृतिक उपदानों का चित्रण और मानवीकरण हुआ है|काव्य के दोनों पक्ष अनुभूति और अभिव्यक्ति पक्ष है| इस दृष्टि से दोनों कविताएं सराहनीय है| निराला जी की भाषा एक ओर जहां संस्कृतनिष्ठ, सामसिक और आलंकारिक है| ग्रामीण शब्दों का प्रयोग भी दर्शनीय है| भाषा सरल,सुबोध और प्रवाहमयी है|

प्रश्न) होली के आस-पास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते है,उन्हें लिखिए|

उत्तर) होली का त्यौहर फाल्गुन मास में आता है| इस समय चारों ओर मादकता छा जाती है | चारों ओर रंग ही रंग बिखरे रहते है| प्रकृति के हरे –भरे वृक्ष  रंग -बिरंगे फूल होली के महत्व को ओर अधिक बढ़ा देते है| फूलों से युक्त वृक्ष चारों ओर मंद सुगंध बिखेर देते है| लोगों एक मन उमंग और आनंद से भर जाते है|

 

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