Tuesday, September 14, 2021

क्रिया

 

क्रिया

अर्थ के आधार पर क्रियाएँ दो प्रकार की होती है|

1 अकर्मक क्रिया – जिस क्रिया का फल कर्म पर न पड़कर कर्ता पर पढ़ता है, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं| इसमें किसी कर्म  की आवश्यकता नहीं होती ; जैसे-

लड़की हँस रही है|

चिड़ियाँ उड़ रही हैं|

तोता बोलता है |

इन वाक्यों में  हँस रही है,’ उड़ रही है, बोलता है क्रिया का कर्म नहीं है तथा इनके व्यापार और फल दोनों ही कर्ता में  हैं | अत: ये अकर्मक क्रियाएँ हैं|

2 सकर्मक क्रिया – जिन क्रिया शब्दों के व्यापार का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता हैं, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं: जैसे –

लोकेश चित्र बना रहा है|

नौकर गाड़ी साफ कर रहा है|

दर्ज़ी कपड़े सिल रहा है|

सकर्मक क्रिया की पहचान कर्ता और क्रिया के बीच क्या और किसे प्रश्न करने से हो जाती है | यदि इन प्रश्नों का उत्तर मिले तो क्रिया सकर्मक अन्यथा अकर्मक होती हैं;

जैसे -  लोकेश क्या बना रहा है?

 उत्तर )  चित्र |

अत: इस वाक्य में क्रिया सकर्मक हैं|


 

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