क्रिया
अर्थ के आधार पर क्रियाएँ दो
प्रकार की होती है|
1 अकर्मक क्रिया – जिस क्रिया
का फल कर्म पर न पड़कर कर्ता पर पढ़ता है, उसे अकर्मक क्रिया
कहते हैं| इसमें किसी कर्म की आवश्यकता नहीं होती ; जैसे-
लड़की हँस रही है|
चिड़ियाँ उड़ रही हैं|
तोता बोलता है |
इन वाक्यों में ‘हँस रही है,’ उड़ रही है, ‘बोलता है’ क्रिया का कर्म नहीं है तथा इनके व्यापार और फल दोनों ही कर्ता में हैं | अत: ये अकर्मक क्रियाएँ
हैं|
2 सकर्मक क्रिया – जिन क्रिया
शब्दों के व्यापार का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता हैं, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं: जैसे –
लोकेश चित्र बना रहा है|
नौकर गाड़ी साफ कर रहा है|
दर्ज़ी कपड़े सिल रहा है|
सकर्मक क्रिया की पहचान कर्ता
और क्रिया के बीच क्या और किसे प्रश्न करने से हो जाती है | यदि इन प्रश्नों का उत्तर मिले तो क्रिया सकर्मक अन्यथा अकर्मक होती हैं;
जैसे - लोकेश क्या बना रहा है?
उत्तर )
चित्र |
अत: इस वाक्य में क्रिया सकर्मक
हैं|
No comments:
Post a Comment