Sunday, August 29, 2021

पाठ 6 दंडक वन में दस वर्ष

                                                  पाठ 6  दंडक वन में दस वर्ष

प्रश्न) चित्रकूट अयोध्या से कितनी दूरी पर था?

उत्तर) चार दिन  की दूरी पर था|

प्रश्न) राम जी ने चित्रकूट से दूर चले जाने का निर्णय क्यों लिया?

उत्तर ) अयोध्यावासी राय माँगने के लिए चित्रकूट आते - जाते रहते है | यह राजकाज में हस्तक्षेप की तरह होता | राम-लक्ष्मण उस वन से राक्षसों का सफाया कर चुके थे| अब तपस्या में कोई बाधा नहीं थी | इसलिए राम जी ने चित्रकूट से दूर चले जाने का निर्णय बना  लिया|

प्रश्न) दंडकारण्य का वर्णन अपने शब्दों में करो?

उत्तर ) दंडकारण्य घना था | पशु-पक्षियों और वनस्पतियों से परिपूर्ण | इस वन में अनेक तपस्वियों के आश्रम थे| लेकिन राक्षस भी कम नहीं थे| वे ऋषि मुनियों को कष्ट देते थे| और अनुष्ठानों में विघ्न डालते थे |

प्रश्न ) सीता की राक्षसों के राम द्वारा संहार के संबंध में क्या राय थी?

उत्तर ) वे चाहती थी कि राम अकारण राक्षसों का वध न करें | उन्हें न मारें , जिन्होंने उनका कोई अहित नहीं किया है|

प्रश्न) राम-लक्ष्मण और सीता दंडकरण्य में कितने वर्ष रहे?

उत्तर ) दस वर्ष तक रहे |

प्रश्न ) विंध्याचल पर्वत पार करने वाले सबसे पहले ऋषि का नाम बताए ?

उत्तर ) अगस्त्य ऋषि |

प्रश्न) पंचवटी के मार्ग में राम को क्या मिला ?

उत्तर ) विशालकाय गिद्ध मिला |

प्रश्न) जटायु कौन था ?

उत्तर ) जटायु  विशालकाय गिद्ध था | वह महाराज दशरथ का मित्र था | पहली बार सीता उनके स्वरूप को देखकर डर गई थी | वह राम-लक्ष्मण के बाहर जाने पर माता सीता की रक्षा करता था |वह रावण से माता सीता को बचाने के लिए लड़ा और अंत में मर गया |

प्रश्न) शूर्पणखा कौन थी?

उत्तर ) वह राक्षस राज रावण की बहन थी| वह बूढ़ी थी पर राम के रूप सौंदर्य पर मोहित हो गई | उसने  अपना रूप सुंदर स्त्री का बनाया  और राम जी के पास उनसे विवाह करने का प्रस्ताव लेकर गई |

प्रश्न) शूर्पणखा से विवाह न करने का कारण राम और लक्ष्मण ने क्या कारण  बताया ?

उत्तर ) राम जी ने सीता की ओर संकेत करते हुए कहा कि ये मेरी पत्नी है | मेरा विवाह हो चुका है|

      लक्ष्मण ने स्वयं को राम जी का दास बताया और कहा मुझसे विवाह करके तुम दासी बन जाओगी |

प्रश्न) अंत में दुखी होकर शूर्पणखा ने क्या करने की सोची और लक्ष्मण ने फिर क्या किया ?

उत्तर ) क्रोध में आकर सीता पर झपट्टा मारा | लक्ष्मण तत्काल उठे और तलवार से उसके नाक-कान  काट लिए | खून से लथपथ शूर्पणखा अपने सौतले भाई खर-दूषण के पास गई|

प्रश्न) खर-दूषण और राम युद्ध का वर्णन करो?

उत्तर ) खर ने देखा कि आसमान काला पड़ गया |घोड़े स्वयं धरती पर गिरकर मर गए |आकाश में गिद्ध मँडराने लगे है| ये अमंगल के संकेत थे| पर वह रुका नहीं | आगे बढ़ता गया| दोनों में घमासान युद्ध हुआ| खर –दूषण सहित उनकी सेना धराशायी हो गई| अंत में विजय राम की हुई|

प्रश्न) अकंपन ने राम के बारे में रावण को क्या सूचना दी?

उत्तर ) राम कुशल योद्धा  है| उनके पास विलक्षण शक्तियाँ हैं| उन्हें कोई नहीं मार सकता | इसका एक ही उपाय है सीता का अपहरण | इससे उनके प्राण आप ही निकल जाएँगे |

प्रश्न)ताड़का पुत्र  मारीच ने सीता अपहरण के संबंध में रावण को क्या सलाह दी?

उत्तर ) उसने रावण को समझाया कि ऐसा करना विनाश को आमंत्रण देना है |रावण ने मारीच कि बात मान ली और वह चुपचाप लंका  चला गया |

प्रश्न) शूर्पणखा ने रावण को नाक-कान काटने का क्या कारण बताया ?

उत्तर ) सीता अतीव सुंदरी थी | उसे मैं तुम्हारे लिए लाना चाहती थी| मैंने उन्हें बताया कि मैं रावण कि बहन हूँ | क्रोध में आकर लक्ष्मण ने मेरे नाक-कान काट दिए|

प्रश्न) सीता का अपहरण करने के लिए रावण ने क्या किया ?

उत्तर ) उसने मारीच को सोने के हिरण का रूप बदल कर पंचवटी के पास घूमने के लिए कहा | जब राम लक्ष्मण उसे पकड़ने के लिए पंचवटी से दूर आ जाये | तब पीछे से ब्राह्मण के वेश में आकर सीता का अपहरण करने का निर्णय लिया |

Saturday, August 28, 2021

चित्रकूट में भरत

 

 चित्रकूट में भरत

प्रश्न) राम के राज्याभिषेक के समय भरत कहाँ थे?

उत्तर ) वे केकय राज्य में थे|  अपने ननिहाल में थे | वे अयोध्या की घटनाओं से सर्वथा अनभिज्ञ थे|

प्रश्न) भरत ने  सपने  में क्या  देखा?

उत्तर ) भरत ने देखा की समुद्र सूख गया है| चंद्रमा धरती पर गिर पड़े है| वृक्ष सूख गए है| एक राक्षसी उसके पिता को खींचकर ले  जा रही है| वे रथ पर बैठे हैं| रथ गधे खींच रहे हैं|

प्रश्न) भरत के ननिहाल से लौटने पर उसे अयोध्या नगरी कैसी लगी?

उत्तर )नगरी उसे सामान्य नहीं लगी | सब कुछ बदला बदला सा था| सड़कें सूनी थी|बाग-बगीचे उदास थे| वहाँ कोई तुमलनाद नहीं था | पक्षी भी कलरव नहीं कर रहे थे| किसी ने भी भारत के प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया |

प्रश्न) पिता के देहांत की बात  माता कैकयी से  सुनकर भरत की क्या दशा हुई?

उत्तर ) वे यह सुनते ही शोक सागर में डूब गए| पछाड़ खाकर गिर पड़े | विलाप करने लगे| माता कैकयी ने उनकी हिम्मत  बँधाई  |

प्रश्न )  दो वरदान की बात माता कैकयी से सुनकर  भरत ने माँ से क्या कहा?

उत्तर ) भरत ने माँ को अपराधिनी कहा| उन्होंने माँ को वन जाने को कहा| भरत के लिए यह राज अर्थहीन है| पिता व भाई को खोकर  ऐसा राज्य भरत को नहीं चाहिए |

प्रश्न) भरत ने बचकर भागती मंथरा को क्या सीख दी?

उत्तर ) लक्ष्मण ने बचकर भागती हुई मंथरा को पकड़ लिया |वे उसके बाल खींचते हुए भरत के पास लाए |भरत ने उसे दासी की भूमिका बताई | शत्रुघ्न उसे जान से मारने के लिए उद्यत थे| भरत ने बीच-बचाव किया |

प्रश्न) भरत की विशाल सेना को देखकर लक्ष्मण ने क्या अनुमान लगाया ?

उत्तर ) लक्ष्मण ने पेड़ से चीखकर कहा ,’भैया भरत सेना के साथ इधर  आ रहे हैं| लगता है वे हमें मार डालना चाहते हैं | ताकि एकछत्र राज्य कर सके|

प्रश्न) राम-लक्ष्मण से चित्रकूट में मिलने के लिए अयोध्या से कौन- कौन आए ?

उत्तर ) भरत, तीनों माताएँ,  गुरु वशिष्ठ  व कुछ अयोध्यावासी चित्रकूट में राम-लक्ष्मण से मिलने आए |

प्रश्न) भरत ने राम को पिता की मृत्यु का समाचार किस प्रकार दिया ?

उत्तर ) उन्होंने कहा कि एक दुखद समाचार है भ्राता ! पिता दशरथ नहीं रहे | आपके आने के छठे दिन उन्होंने प्राण त्याग दिए|यह सुनकर राम सन्न रहे गए | शोक में डूब गए|

प्रश्न) महर्षि वशिष्ठ ने राम को अयोध्या वापस आकर राज भर संभालने के लिए क्या तर्क दिया?

उत्तर ) महर्षि वशिष्ठ ने कहा, राम! रघुकुल कि परंपरा में राजा ज्येष्ठ पुत्र ही होता है | तुम्हें अयोध्या लौटकर अपना दायित्व निभाना चाहिए| इसी में कुल का मान है|”

प्रश्न ) भरत ने राम के वापस अयोध्या न लौटने पर उनसे क्या चीज़ मांगी ?

उत्तर ) उन्होंने उनसे उनकी खड़ाऊँ मांगी  और राम भैया को कहा कि वह अब से चौदह वर्ष तक राजकाज इनकी ही आज्ञा से ही चलाएँगे|

प्रश्न) राम जी से चरण पादुकाएँ लेकर राम जी ने क्या किया ?

उत्तर ) भरत ने चरण पादुकाओं को एक सुसज्जित हाथी पर रखा | प्रतिहारी उस पर चँवर दुला रहे थे |अयोध्या पहुँचकर भरत ने पादुका पूजन किया| कहा, ये पादुकाएँ राम कि धरोहर है | मैं इनकी रक्षा करूँगा| इनकी गरिमा को आंच नहीं आने दूँगा|

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


Friday, August 27, 2021

साना साना हाथ जोड़ि

 

पाठ 3 

साना साना हाथ जोड़ि

  मधु कांकरिया

प्र1. झिलमिलाते सितारों की रोशनी मे नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था ?

उत्तर. झिलमिलाते सितारों की रोशनी मे नहाया गंतोक लेखिका के मन मे सम्मोहित उत्पन्न कर रहा था | वहाँ की सुंदरता ने लेखिका पर एक जादू सा कर दिया था , कि वह एकटक उसे देखती ही रह गई | उसे उस समय सब कुछ ठहरा हुआ सा लग रहा था | उसके आस पास व उसके अन्तर्मन मे एक शून्य सा समा गया था |

प्र2. गंतोक को मेहनतकश बादशाहो का शहर क्यो कहा गया ?

उत्तर. मेहनतकश से यहाँ अभिप्राय है , कडा परिश्रम करने वाले लोग | बादशाह से तात्पर्य है अपनी इच्छानुसार कम करने वाले | गंतोक पहाड़ी स्थल है | पहाड़ी क्षेत्र का जीवन कठिन होता है | अपनी आवश्यकताओ को पूरा करने के लिए यहाँ के लोग कड़ी मेहनत करने से घबराते नहीं , अपितु मेहनत करते हुए भी मस्त रहते है | उन्हें किसी की परवाह नहीं होती और न ही वे दूसरों की सहायता के लिए किसी के आगे हाथ फैलते है | इसलिए लेखिका ने गंतोक को मेहनतकश बादशाहो का शहर कहा है |

प्र3. कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओ का फहराना किन अलग-अलग अवसरो की ओर संकेत करता है ?

उत्तर. श्वेत पताकाएँ किसी बौध्द धर्म के अनुयायी की मृत्यु पर फहराई जाती है | किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु हो जाने पर नगर से बाहर वीरान स्थान पर मंत्र-लिखित एक सौ आठ पताकाएँ फहराई जाती है | उन्हे उतारा नहीं जाता | वे धीरे-धीरे स्वयं नष्ट हो जाती है | रंगीन पताकाएँ काम के शुभारंभ के समय फहराई जाती है |

प्र4. जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति के बारे मे , वहाँ की भौगोलिक स्थिति एंव जनजीवन के बारे मे क्या महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी | लिखिए |

उत्तर. जितेन नार्गे सिक्किम का नागरिक था | वह ड्राईवर और गाइड दोनों का कार्य अकेले ही करता था | लेखिका ने जितेन नार्गे के साथ ही सिक्किम की यात्रा की थी | वह लेखिका को यात्रा के दौरान वहाँ की प्राकृतिक, भौगोलिक व जनजीवन की महत्वपूर्ण जानकारियाँ देता रहता था | उसने बताया कि सिक्किम मे प्राकृतिक नजारे अत्यंत सुंदर है | गंतोक से युमथांग 149 किलोमीटर दूर है | यह मार्ग खूबसूरत प्राकृतिक  दृश्यो से भरा पड़ा है | कही घाटियाँ फूलो से भरी हुई है | अनेक झरने कल-कल की ध्वनि करते हुए बहते है | कही घाटियों को फूलो की वादियाँ भी कहते है | यहा की नारियाँ रंगीन कपड़े पहनना पसंद करती है | उनका परंपरागत परिधान बोकु है |

प्र5. लोंग स्टॉक मे घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक सी क्यो दिखाई दी ?

उत्तर. लोंग स्टॉक मे घूमते हुए चक्र के विषय मे जितेन नार्गे ने बताया कि इसे घूमने से सारे पाप धूल जाते है | लेखिका उस घूमते हुए चक्र को देखकर सोचने लगती है कि पूरे भारत मे ऐसे विश्वास पाए जाते है | इसलिए भारत के लोगो कि आत्मा एक-जैसी है , विज्ञान ने चाहे कितनी ही तरक्की क्यो न कर ली हो फिर भी लोगो कि पाप-पुण्य संबंधी मान्यताएँ एक-जैसी ही है | वह चाहे पहाड़ी क्षेत्र हो अथवा मैदानी क्षेत्र | इन मान्यताओं मे कही कोई अंतर नहीं है |

प्र6. जितेन नार्गे कि गाइड कि भूमिका के बारे मे विचार करते हुए लिखिए कि कुशल गाइड मिस्टर क्या गुण होते है ?

उत्तर. जितेन नार्गे केवल गाइड ही नहीं , अपितु कुशल ड्राईवर भी था | एक कुशल गाइड की सबसे बड़ी विशेषता वह होती है कि उसे उस क्षेत्र का पूरा ज्ञान होना चाहिए जिसमे वह गाइड का काम कर रहा है | जितेन एक कुशल गाइड है क्योकि उसे सिक्किम के सारे पहाड़ी क्षेत्र का पूरा ज्ञान था | वह सैलानियो को उस क्षेत्र की पूरी जानकारी देता है | वह यात्रियों के साथ मित्र जैसा व्यवहार करता है | वह संगीत का ज्ञान भी रखता है | यात्रियों की थकान को दूर करने के लिए उनकी पसंद का संगीत सुनाता है | मार्ग मे काम करने वाली सिक्किम नारियों के जीवन के बारे मे वह पूर्ण जानकारी देता है | वहाँ के लोगो के धार्मिक स्थलों और लोगों के विश्वास व आस्थाओं की भी जानकारी देता है | अतः स्पष्ट है कि जितेन एक कुशल गाइड है |

प्र7. इस यात्रा- वृत्तांत मे लेखिका ने हिमालया के जिन-जिन रूपों का चित्र खिचा है , उन्हे अपने शब्दो मे लिखिए |

उत्तर. लेखिका की पहाड़ी यात्रा गंतोक से यूमथांग जाने के लिए आरंभ होती है | वे अपने पूरे दल के साथ जीप मे बैठकर यात्रा शुरू करती है | जैसे-जैसे वे आगे बढ़ते है वैसे-वैसे ऊँचाई भी बढ़ती जाती है | उन्होने देखा की हिमालय का प्राकृतिक दृश्य पल-पल मे बदलता है | हिमालय का विराट रूप सामने आता है | अब हिमालय अपने विशाल रूप मे दिखाई देने लगता है | आसमान मे घटाएँ फ़ैली हुई है | घाटियों मे दूर-दूर तक खिले हुए फूल फैले हुए है |हिमालय कही हरे रंग का कालीन ओढ़े हुए नजर आता है तो कही सफ़ेद बर्फ की चादर ओढ़े हुए और कही-कही बादल मे लुका-छिपी का खेल खेलता सा लगता है |

प्र8. प्रकृति के उस अनंत और विरत स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है ?

हिमालय की प्राकृतिक छटा पल-पल बदलती है | लेखिका हिमालय पर प्रकृति के अनंत और विराट रूप को देखकर अवाक रह जाती है |प्रकृति के उस विरत रूप को देखकर उसे अनेक अनुभूतियाँ होती है |उसे अनुभव होता है कि  जीवन की सार्थकता झरनो और फूलो की भाँति स्वंय को दे देने मे है | झरनो के भाति निरंतर गतिशील रहना और फूलो की भांति सदा मुस्कुराते रहने मे ही जीवन की जीवंतता है | जीवन मे दूसरों के लिए कुछ कर गुजरना ही जीवन को सार्थक बनाता है |

प्र9. प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद मे डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृश्य झकझोर गए ?

उत्तर. लेखिका ने देखा कि उस प्राकृतिक सौंदर्य के दृश्यो से बेपरवाह कुछ अत्यंत सुंदर और कोमलांगों वाली पहाड़ी औरते पत्थर तोड़ने मे लीन थी | उनके हाथों मे कुदाल व हथौड़े थे | कईयो कि पीठ पर तो डोको (बड़ी टोकरी)मे उनके बच्चे भी बंधे हुए थे | यह विचार लेखिका को बार- बार झकझोरता था कि नदियो , फूलों , झरनो , वादियों के प्राकृतिक नजारो के बीच भूख ,प्यास , मौत और मानव के जीने कि इच्छा के बीच कडा संघर्ष चल रहा था |   

प्र10. सैलानियों को प्रकृति कि अलौकिक छटा का अनुभव करवाने मे किन-किन लोगो का योगदान होता है , उल्लेख करे |

उत्तर. सब से पहले सैलानियों को पर्यटन-स्थलो पर ठहराने का प्रबंध करने वाले लोगो का योगदान रहता है | इसके पश्चात उनके लिए वाहनों का प्रबंध करने वाले लोगो का योगदान रहता है | वाहनों के चालको व गाइडो का योगदान भी सराहनीय होता है | मार्गदर्शक (गाइड) की भूमिका तो और भी महत्त्वपूर्ण रहती है , क्योकि वह सैलानियों को वहाँ के स्थानों की जानकारी के साथ-साथ वहाँ के इतिहास व सांस्कृतिक परंपराओ मे विश्वास , जन-जीवन व परंपराओ की जानकारी देकर उनकी यात्रा को रोचक बनाता है |

प्र11. “कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती है |” इस कथन के आधार पर स्पष्ट करे कि आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति मे क्या भूमिका है ?

उत्तर. देश की महत्त्वपूर्ण योजनाओ को सफल बनाने मे आम जनता सहयोग देती है | सड़कों का निर्माण करने हेतु पत्थर तोड़ने व पत्थर जोड़ने से लेकर बहुमंजली अट्टालिकाएँ खड़ी करने मे आम-जनता का परिश्रम ही काम करता  है | किंतु आम जनता के इस कार्य के बदले मे उन्हे बहुत कम पैसे मिलते है | बड़ी-बड़ी फ़ैक्टरियो के द्वारा वस्तुओ का निर्माण किया जाता है | बाँधो से बिजली का उत्पादन होता है | फसलों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है |

प्र12. आज की पीढ़ी द्वारा प्रकृति के साथ किस तरह खिलवाड किया जा रहा है ? इसे रोकने मे आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए ?

उत्तर. वृक्षो की लगातार कटाई , नदियों के जल का दुरुपयोग तथा कृषि योग्य भूमिका बड़े-बड़े नगर बसाने व औद्योगिक संस्थान खड़े करने से प्राकृतिक संतुलन समाप्त हो जाएगा | हम विद्यार्थी भी अपने आँगन या घर के आस-पास की खाली पड़ी धरती पर छायादार वृक्षो के पौधे लगाकर प्रकृति को बचाने मे योगदान दे सकते है | हमें जल के उचित प्रयोग के प्रति समाज मे जागरूकता उत्पन्न करनी होगी , ताकि जल का सही प्रयोग हो |  हमें नदियो मे गंदगी नहीं फ़ैकनी चाहिए | कारखानों  से निकले गंदे पानी को नदियों के पानी मे नहीं बहाना चाहिए |

प्र13. प्रदूषण के कारण स्नोफोल मे कमी का जिक्र किया गया है | प्रदूषण के और कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आए है , लिखे |

उत्तर. प्रदूषण से मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा है | प्रदूषण से सारे देश व समाज का आर्थिक और सामाजिक वातावरण बिगड़ रहा है | खेती के उगाने के कृत्रिम उपायों , खादों आदि के प्रयोग से जहाँ धरती की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो रही है , वही खराब फासले उत्पन्न हो रही है , जिसके खाने से मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है | ध्वनि-प्रदूषण से मन की शांति नष्ट हो रही है और तनाव बढ़ता जा रहा है | ध्वनि-प्रदूषण से बहरेपन की बीमारी बढ़ रही है |

प्र14. कटाओ पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है | इस कथन के पक्ष मे अपनी राय व्यक्त किजिए ?

उत्तर. कटाओ को भारत का स्विट्ज़रलैंड कहा जाता है | वह स्विट्ज़रलैंड से भी अधिक सुंदर स्थान है , जिसे देखकर लोग अपने आपको ईश्वर के निकित समझते है | वहाँ उन्हे अद्भुद शांति मिलती है | यदि वहाँ पर दुकान खुल जाती , तो लोगो की भीड़ बढ़ जाती | गंदगी फैल जाती | वहाँ का प्राकृतिक वातावरण नष्ट हो जाता | उसे भारत का स्विट्ज़रलैंड नहीं कहा जा सकता था | इसलिए कटाओ पर किसी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है |

प्र15. प्रकृति ने जल संचय की व्यवस्था किस प्रकार की है ?

उत्तर. प्रकृति के नियम अनोखे है | वह हर कार्य की व्यवस्था अपने ही ढंग से करती है | उसकी जल संचय व्यवस्था भी अत्यंत रोचक है | सर्दियों मे बर्फ के रूप मे जल एकत्रित होता है | गर्मियों मे जल लोग प्यास से व्याकुल होते है तो प्रकृति के द्वारा एकत्रित बर्फ रूपी जल पिघलकर जलधारा बनकर बहने लगता है | जिसे प्राप्त करके लोग अपनी प्यास को बुझाते है |

प्र16. देश की सीमा पर बैठे फौजी किस तरह की कठिनाइयों से जूझते है ? उनके प्रति हमारा क्या उत्तरदायित्व होना चाहिए ?

उत्तर. वहाँ वे बर्फीली हवाओं और तूफानों का सामना करते है | पौष और माघ की ठंड मे तो पेट्रोल के अतिरिक्त सब कुछ जम जाता है | फौजी बड़ी मुश्किल से अपने शरीर का तापमान सामान्य रखते हुए देश की सीमाओ की रक्षा करते है | देश की सीमाओं की सुकक्षा करने वाले फौजियों के प्रति हमारा उत्तरदायित्व बनता है , कि हम उनका हौंसला बढ़ाएँ और उनके परिवार की खुशहाली के लिए प्रयत्नशील रहे ताकि फौजी अपने परिवार की चिंता से मुक्त होकर सीमाओ की रक्षा कर सकें |     

   

Tuesday, August 24, 2021

पाठ 6 प्रेमचंद के फटे जूते - हरिशंकर परसाई ( कक्षा नौवीं)

पाठ 6 प्रेमचंद के फटे जूते

-    हरिशंकर परसाई

प्र1. हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्दचित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ उभरकर आती है ?

उतर.लेखक ने प्रेमचंद का शब्द चित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे उनके व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ सामने आती है –

1.  सादा जीवन – प्रेमचंद आडम्बर तथा दिखावेपूर्ण जीवन से दूर रहते थे | वे गाँधी जी की तरह सादा जीवन जीते थे |

  2. उच्च विचार – प्रेमचंद के विचार बहुत ही उच्च थे | वे सामाजिक बुराइयों से ढूर रहे | वे इन बुराइयों से समझौता न कर सके |

3. स्वाभिमानी – प्रेमचंद ने दूसरों से कुछ  माँगना उचित नहीं समझा | वे अपनी दीन – हीन दशा मे संतुष्ट थे |

4.   सामाजिक कुरीतियो के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने वाले – प्रेमचंद ने समाज मे व्याप्त कुरीतियों के प्रति सावधान किया | वे एक स्वस्थ समाज चाहते थे तथा स्वंय भी बुराइयों से कोसो दूर रहने वाले थे |

प्रश्न 3. नीचे दी गई पंक्तियो मे निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिये –

     क) जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है | अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक  

         जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हे |

  उत्तर. व्यंग्य  – जूते का स्थान पाँवों मे अर्थात नीचे है यह ताकत का प्रतीक माना जाता है | टोपी का स्थान सिर पर अर्थात सम्मान जनक है स्थिति इसके विपरीत है | आज लोग अपने शक्ति के बल पर अनेक टोपियों को अपने जूते पर झुकने को विवश कर देते है और लोग अपना स्वाभिमान भूलकर अपना सिर उनके सामने झुकाते है |

ख)     तुम परदे का महत्व ही नहीं जानते , हम परदे पर कुर्बान हो रहे है |

 उत्तर. व्यंग्य – लोगों का स्वभाव होता है बुराइयों को छिपाने की या उन पर पर्दा डालने की | लोग अपनी बुराइयों को दूसरे के सामने नहीं आने देना चाहता है, पर प्रेमचंद ने अपनी बुराइयों को कभी छिपाने का प्रयास नहीं किया | वे भीतर-बाहर एक समान थे | दूसरे लोग पर्दे की आड़ मे कुछ भी करते रहे है |

ग)    जिसे तुम घृणित समझते हो , उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अँगुली से इशारा करते हो ?

उत्तर. व्यंग्य – प्रेमचंद ने सामाजिक बुराइयों को अपनाना तो दूर उनकी तरफ देखा भी नहीं | उन्होंने इनकी तरफ हाथ से भी इशारा नहीं किया | इन्हें इतना घृणित समझा कि पैर की उँगली से उसकी ओर इशारा करते हुए दूसरों को भी उससे सावधान किया |

प्र4. पाठ मे एक जगह पर लेखक सोचता है कि फोटो खीचाने की अगर यह पोशाक है तो पहनने की कैसी होगी?’ लेकिन अगले ही पल वह विचार बदलता है कि नहीं , इस आदमी कि अलग-अलग पोशाके नहीं होगी |’ आपके अनुसार इस संदर्भ मे प्रेमचंद के बारे मे लेखक के विचार बदलने कि क्या वजहें हो सकती है ?

उत्तर. प्रेमचंद के बारे मे लेखक के विचार बदलने के निम्नलिखित कारण है –

1.  लोग प्राय: ऐस सोचते और करते हैं की दैनिक जीवन मे साधारण कपड़ो का प्रयोग करते है और विशेष अवसरो के लिए वे अच्छे कपड़े रखते है | प्रेमचंद के पास शायद दूसरी पोशाक नहीं थी |

2.  लेखक सोचता है कि सादा जीवन  जीने वाला यह आदमी भीतर-बाहर सब एक-सा है| इसका दोहरा व्यक्तितव नहीं है , इन्होंने कभी दिखावटी जीवन नहीं जिया |

प्र5. अपने यह व्यंग्य पढ़ा | इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन-सी बाते आकर्षित करती है ?

उत्तर. सब से पहले लेखक ने व्यंग्यात्मक शैली मे महान साहित्यकार प्रेमचंद का चित्र प्रस्तुत किया है | उनकी विशेषताओं से हमे परिचित कराया है | दूसरे लेखक ने प्रेमचंद पर व्यंग्य तो किया है , पर उसने स्वयं को कभी भी व्यंग्य से अलग नहीं रखा | तीसरे लेखक को मानव जीवन की अत्यंत गहरी समझ है | उसने जीवन के दुख –सुख  को अत्यंत निकटता से देखा है | चौथे लेखक सामाजिक बुराइयों तथा कुरीतियो के प्रति भी सजग है | उसने व्यंग्य के माध्यम से इन पर भी प्रहार किया है |

प्र6. पाठ मे टीले शब्द का प्रयोग किन संदर्भों को इंगित करने के लिए किया गया होगा ?

उत्तर. यहाँ व्यंग्य मे टीला शब्द का प्रयोग प्रेमचंद के जीवन मे आने वाली सामाजिक कठिनाइयो के लिए किया गया है , जिसे पंडित , पुरोहित , मौलवी , जमींदार आदि समाज के कथित ठेकेदारों ने खड़ी की है | इनके कारण ही ऊँच-नीच की भावना , जाति-पाँति , छुआछूत , बाल – विवाह , शोषण , बेमेल विवाह , अमीर-गरीब की भावना आदि टीले के रूप मे खड़ी हो मार्ग को अवरुद्ध करती है |

प्र7. आपकी दृष्टि मे वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में आज क्या परिवर्तन आया है ?

उत्तर. आज के समय मे लोगों की सोच और दृष्टिकोण मे काफी बदलाव आ गया है | लोग अपनी हैसियत जताने के लिए अच्छे कपड़े पहनते है | आज सादा-जीवन जीने वालो को पिछड़ा समझा जाने लगा है | अब तो ऐसे भी छात्र-छात्राएँ मिल जाएंगे जिन्हे पढ़ाई की चिंता कम अपने आधुनिक फैशन वाले कपड़ो की अधिक सोच  रहती है | संपन्न वर्ग को ऐसा करते देख मध्यम और निम्न वर्ग भी वैसा ही करने को लालायित हो उठा है |

प्र8. पाठ मे आए मुहावरे छाटिएँ और उनका वाक्य मे प्रयोग कीजिए |

उत्तर. मुहावरे                   अर्थ                      वाक्य मे प्रयोग

(1) अटक जाना             स्थिर हो जाना              इस सुंदर तस्वीर पर मेरी दृष्टि अटक गई है |

(2) कुएँ के तल मे होना      बहुत गहराई मे होना         तुम रुपये खोजने मे इतनी देर लगा रहे हो ,        

                                                मानो रुपये कुएं के तल मे है |

(3) न्योछावर होना            कुर्बान होना               चंद्रशेखर आजाद की जीवनी पढ़कर देश के लिए

                                                अपना सब कुछ अर्पण करने के साथ खुद भी

                                                न्योछावर होने का मन करता है |                                                                                      

(4) लहूलुहान होना           घायल होना                 कार दुर्घटना में आगे की सीट पर बैठा व्यक्ति

                                              लहूलुहान हो गया |

(5)हौसले पस्त करना         हतोत्साहित करना     सहवाग की बल्लेबाज़ी ने विपक्षी टीम के

                                                        हौसले पस्त कर दिए|

(6)बरकाकर निकलना         बचकर निकलना              आज तुम उस दुकांनदार से फिर बरकाकर    

                                                    निकल आए |

    (7) जूता आजमाना           अपमानित करना    इस व्यक्ति को बहुत समझा लिया, अब    

                                                          इस पर जूता आजमाना ही बाकी है|

 

 

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...