Thursday, September 9, 2021

पद – परिचय (कक्षा दसवीं)

 पद – परिचय

वाक्य मे प्रयुक्त शब्द पद कहलाते है | इन पदो का परिचय देना , अर्थात उनकी स्थिति बताना , उनका लिंग , वचन , कारक , भेद तथा अन्य पदो से संबंध बताना पद-परिचय कहलाता है | अर्थात वाक्य के अतिरिक्त किसी शब्द की सभी भूमिकाओ का परिचय देना पद- परिचय कहलाता है |

पद-परिचय देने के लिए शब्दो के भेद , उपभेद , लिंग , वचन तथा कारक आदि का भी परिचय देना होता है| वाक्य मे प्रयुक्त पदो का परिचय निम्नलिखित बातो को ध्यान मे रखकर दिया जाता है |

1.    संज्ञा संज्ञा के तीनों भेद (जातिवाचक , व्यक्तिवाचक , भाववाचक) लिंग, वचन , कारक , तथा क्रिया के साथ उसका संबंध (यदि हो तो) |

2.   सर्वनाम – सर्वनाम के भेद (पुरूषवाचक , निश्चयवाचक , अनिश्चयवाचक , संबंधवाचक , प्रश्नवाचक) , पुरुष , लिंग , वचन , कारक तथा क्रिया के साथ उसका संबंध |

3.   विशेषण – विशेषण के भेद (गुणवाचक , परिमानवाचक ,संख्यावाचक , सार्वनामिक), लिंग , वचन ,विशेष्य|

4.   क्रिया – भेद (अकमर्क , सकर्मक , प्रेरणार्थक , समस्त , नामिक , पूर्वकालिक , मिश्र आदि ),लिंग , वच,पुरुष ,धातु,काल,वाच्य ,प्रयोग करता व कर्म का संकेत|

5.   क्रियाविशेषण – भेद (रीतिवाचक ,स्थानवाचक,कालवाचक,परिमानवाचक ) तथा उस क्रिया का उल्लेख जिसकी विशेषता बता रहा है |

6.   समुच्चयबोधक –भेद (समानाधिकरण ,व्याधिकरण), जिन शब्दों वाक्यों को मिला रहा है उनका उल्लेख |

7.   संबंधबोधक – भेद ,जिससे संबंध है उन संज्ञा /सर्वनामों का निर्देश |

8.   विस्मयाधिबोधक –भेद तथा कौनसा भाव प्रकट कर रहा है|

उदारहण-

1 रेखा पत्र लिखती है |

रेखा – व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग , एकवचन ,कर्ता , लिखती है क्रिया की कर्ता |

पत्र – जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग ,एकवचन , कर्म कारक , लिखती है क्रिया का कर्म |

लिखती है – सकर्मक क्रिया, स्त्रीलिंग , सामान्य वर्तमानकाल ,कर्तृवाच्य, अन्य पुरुष एकवचन रेखा कर्ता के अनुसार कर्तरि प्रयोग निश्चयार्थ |

2. वह क्या पढ़ रही है ?

वह – अन्य पुरूषवाचक सर्वनाम , स्त्रीलिंग , एकवचन , कर्तृकारक पढ़ रही है क्रिया का कर्ता |

क्या – प्रश्नवाचक सर्वनाम , अन्य पुरुष , पुल्लिंग , एकवचन , कर्मकारक , ‘पढ़ रही है क्रिया का कर्म |

पढ़ रही है – अकर्मक क्रिया , स्त्रीलिंग , एकवचन , अपूर्ण वर्तमानकाल , कर्तृवाच्य, वह के अनुसार कर्तरि प्रयोग , निश्चयार्थ |

3. भारत अनेक स्रोतो से हथियार प्राप्त करेगा |

भारत –  व्यक्तिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , एकवचन , कर्ताकारक , प्राप्त करेगा क्रिया का कर्ता है|

स्रोतो से – जातिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , बहुवचन , अपादान कारक |

हथियार -  जातिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , एकवचन , कर्म कारक , प्राप्त करेगा क्रिया का कर्म |

4. जो अपनी बात को नहीं रखता , वह विश्वास के योग्य नहीं है |

 जो – संबंधवाचक सर्वनाम , अन्य पुरुष ,पुल्लिंग , एकवचन , कर्ताकारक , रखता है क्रिया का कर्ता |

अपनी – सार्वनामिक विशेषण , बात संज्ञा कि विशेषता बताता है , स्त्रीलिंग , एकवचन |

बात को – भाववाचक संज्ञा , स्त्रीलिंग , एकवचन , कर्मकारक , रखता क्रिया का कर्म |

नहीं – निषेधात्मक क्रिया विशेषण , रखता क्रिया की विशेषता बताता है |

रखता – सकर्मक क्रिया , कर्तृवाच्य , पुल्लिंग , एकवचन , वर्तमानकाल , निश्चयार्थ प्रकार , जो कर्ता और बात इसका कर्म है , कर्तरि प्रयोग |

वह – निश्चयवाचक सर्वनाम , अन्य पुरुष , एकवचन , कर्ता कारक , है क्रिया का कर्ता |

विश्वास के – भाववाचक संज्ञा , पुल्लिंग , एकवचक , संबंध कारक |

योग्य – गुणवाचक विशेषण , वह विशेष्य |

नहीं – निषेधवाचक क्रिया विशेषण , है क्रिया से संबद्ध है |

है – अपूर्ण क्रिया , पुल्लिंग , एकवचक , वर्तमानकाल , कर्तृवाच्य , वह कर्ता का क्रिया |

5. मैं पिछले साल उसे लखनऊ मे मिला था |

मैं – पुरुषवाचक सर्वनाम (उत्तम पुरुष) , पुल्लिंग , एकवचन , कर्ताकारक |  

पिछले – विशेषण ( साल विशेष्य ) , पुल्लिंग , एकवचन |

साल – जातिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , एकवचन , अधिकरण कारक |

उसे – पुरूषवाचक सर्वनाम , एकवचन , कर्मकारक |

लखनऊ मे – व्यक्तिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , एकवचन , अधिकरण कराक |

मिला था – सकर्मक क्रिया , पूर्ण भूतकाल , पुल्लिंग , एकवचन |

6. शायद शाम तक वर्षा हो जाए |

शायद – अनिश्चयबोधक क्रिया-विशेषता , हो जाए क्रिया से संबद्ध |

शाम तक –कालवाचक क्रिया-विशेषण , हो जाए क्रिया से संबद्ध |

वर्षा – जातिवाचक संज्ञा , स्त्रीलिंग , एकवचन , अन्यपुरुष , कर्मकारक , हो जाए क्रिया का कर्म |

हो जाए – सकर्मक क्रिया , स्त्रीलिंग , एकवचन , कर्मकारक , संभाव्य भविष्य काल , संभावनार्थ |

7. लड़कियो ने बाग मे आकर फूल चुने |

लड़कियो ने – जातिवाचक संज्ञा , स्त्रीलिंग , बहुवचन , अन्य पुरुष , कर्ता कारक , चुने क्रिया का कर्ता |

बाग मे - जातिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , एकवचन , अधिकरण कारक , चुने क्रिया का कर्म |

आकर – असमापिका क्रिया , स्त्रीलिंग , बहुवचन , पूर्णकालिका कृदंत कर्मवाचक , कर्म के अनुसार कर्मणि प्रयोग , निश्चयार्थ |

फूल – जातिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , बहुवचन , कर्मकारक , अन्यपुरुष , चुने क्रिया का कर्म |

चुने – द्विकर्मक क्रिया , पुल्लिंग , बहुवचन , पूर्ण भूतकाल , कर्मवाच्य , कर्म के अनुसार कर्मणि प्रयोग , निश्चयार्थ |

8.हम बाग में गए परन्तु वहाँ कोई आम न मिला |

हम – पुरूषवाचक सर्वनाम , उत्तम पुरुष ,पुल्लिंग , बहुवचन , कर्ता कारक , गए क्रिया का कर्ता |

बाग में – जातिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , एकवचन , अधिकरण कारक |

गए – अकर्मक क्रिया , जा धातु , उत्तम पुरुष , पुल्लिंग , बहुवचन , भूतकाल , कर्तृवाच्य , हम सर्वनाम इसका कर्ता है |

परन्तु – व्यधिकरण समुच्चयबोधक , दो वाक्यो को जोड़ता है |

वहाँ – स्थानवाचक क्रियाविशेषण |

कोई – संख्यावाचक विशेषण , पुल्लिंग , एकवचन , आम विशेष्य का विशेषण |

न – रीतिवाचक क्रिया विशेषण |

मिला – सकर्मक क्रिया , मिल धातु , अन्य पुरुष , पुल्लिंग , एकवचन , भूतकाल , निश्चयार्थ , कर्तृवाच्य |

9.   आनंद यहाँ दसवी कक्षा मे पढ़ता था |

आनंद - व्यक्तिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , एकवचन , कर्ता कारक , पढ़ता था क्रिया का कर्ता |

यहाँ – स्थानवाचक क्रिया – विशेषण , “पढ़ता था” क्रिया का स्थान बताता है |

दसवीं – संख्यावाचक विशेषण , क्रमसूचक, स्त्रीलिंग , एकवचन , कक्षा विशेष्य |

कक्षा में - जातिवाचक संज्ञा , स्त्रीलिंग , एकवचन , अधिकरण कारक |

पढ़ता था – अकर्मक क्रिया , अन्य पुरुष , पुल्लिंग , एकवचन , भूतकाल , निश्चयार्थ , कर्तृवाच्य, आनंद कर्ता , कर्तरि प्रयोग |

10. उन्होंने महान विद्वानों का आदर किया |

उन्होंने – अन्य पुरूषवाचक सर्वनाम ,पुल्लिंग , बहुवचन , कर्ता कारक क्रिया का कर्ता |

महान – गुणवाचक विशेषण , पुल्लिंग , बहुवचन , विद्वानों विशेष्य का विशेषण |

विद्वानों - जातिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , बहुवचन , अन्यपुरुष , संबंधकारक |

आदर - भाववाचक संज्ञा , पुल्लिंग , एकवचन ,अन्यपुरुष , कर्मकारक  |

क्रिया -  सकर्मक क्रिया , अन्य पुरुष , पुल्लिंग , एकवचन , अन्यपुरुष , पूर्ण भूतकाल ,कर्मवाच्य , निश्चयार्थ |

11.  मैं सुबह-शाम धीरे धीरे टहलता हूँ |

मैं - उत्तम पुरूषवाचक सर्वनाम ,पुल्लिंग , एकवचन , कर्ता कारक , टहलता हूँ क्रिया का कर्ता |

   सुबह- शाम – काललवाचक क्रिया विशेषण |

धीरे धीरे – रीतिवाचक क्रिया – विशेषण , टहलता हूँ क्रिया से संबद्ध |

   टहलता हूँ - अकर्मक क्रिया , पुल्लिंग , एकवचन , निश्चयार्थ , सामान्य वर्तमान काल कर्तृवाच्य |

12. लड़के और लड़कियाँ पंक्तिबद्ध  खड़े थे |

लड़के - जातिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , बहुवचन , अन्यपुरुष ,कर्ता कारक , खड़े थे क्रिया के कर्ता |

लड़कियाँ - जातिवाचक संज्ञा , स्त्रीलिंग , बहुवचन , अन्यपुरुष ,कर्ता कारक , खड़े थे क्रिया के कर्ता |

पंक्तिबद्ध - रीतिवाचक क्रिया – विशेषण , खड़े थे क्रिया से संबद्ध |

खड़े थे - सकर्मक क्रिया , अन्य पुरुष , पुल्लिंग , बहुवचन , अन्यपुरुष , पूर्ण भूतकाल ,कर्तृवाच्य , निश्चयार्थ |

13.अरे वाह ! तुम भी पुस्तक पढ़ सकते हो |

अरे वाह !हर्षबोधक अव्यय |

तुम – मध्यम पुरूषवाचक सर्वनाम ,पुल्लिंग , एकवचन , कर्ता कारक , पढ़ सकते हो क्रिया का कर्ता |

भी – तुम पर बल देने वाला निपात |

पुस्तक - जातिवाचक संज्ञा , स्त्रीलिंग , एकवचन , अन्यपुरुष , कर्मकारक , पढ़ सकते हो क्रिया के कर्म |

पढ़ सकते हो - सकर्मक क्रिया , अन्य पुरुष , पुल्लिंग , एकवचन , अन्यपुरुष ,कर्तृवाच्य , कर्तरि प्रयोग , निश्चयार्थ |

14.उससे किताब नहीं पढ़ी गई |

उससे – अन्य पुरूषवाचक , सर्वनाम , पुल्लिंग , एकवचन , करणकारक पढ़ी गई क्रिया का कर्ता |

किताब - जातिवाचक संज्ञा , स्त्रीलिंग , एकवचन , अन्यपुरुष , कर्मकारक , पढ़ी गई क्रिया के कर्म|

नहीं पढ़ी गई – सकर्मक क्रिया , स्त्रीलिंग , एकवचन , अन्य पुरुष , कर्मवाच्य , असमर्थता का बोध कराने वाला भावे प्रयोग |

15. हम सब वहाँ पहुँचे , परंतु गाड़ी चली गई थी |

हम – उत्तम पुरूषवाचक सर्वनाम ,पुल्लिंग , बहुवचन , कर्ताकारक , पहुँचे क्रिया का कर्ता |

सब – अनिश्चयवाचक संख्यावाचक विशेषण , पुल्लिंग , बहुवचन , अन्य पुरुष  हम विशेष्य का विशेषण |

वहाँ – स्थानवाचक क्रिया – विशेषण , पहुँचे क्रिया से संबद्ध |

पहुँचे - अकर्मक क्रिया , पुल्लिंग , बहुवचन , पूर्ण भूतकाल , निश्चयार्थ , कर्तृवाच्य , कर्तरि प्रयोग |

परन्तु – समानाधिकरण समुच्चयबोधिक अव्यय हम सब वहाँ पहुँचे गाड़ी चली गई थी वाक्य को मिलाता है |

गाड़ी – जातिवाचक संज्ञा , स्त्रीलिंग , एकवचन , कर्मकारक , चली गई थी क्रिया का कर्म |

चली गई थी - सकर्मक क्रिया , स्त्रीलिंग , एकवचन , अन्य पुरुष , कर्मवाच्य , पूर्ण भूतकाल , निश्चयार्थ |

16. मैं कल बीमार था इसलिए गाँव नहीं गया |

मैं - पुरूषवाचक सर्वनाम ,पुल्लिंग ,उत्तम पुरुष , एकवचन , कर्ताकारक |

इसलिए – समुच्चयबोधक अव्यय , व्याधिकरण ( दो वाक्यो को जोड़ता है) |

17. जब वे घर पहुँचे तो कुसुम पढ़ रही थी |

वे - पुरूषवाचक सर्वनाम , अन्य पुरुष , पुल्लिंग , बहुवचन , कर्ताकारक , पहुँचे क्रिया का कर्ता |

घर - जातिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , एकवचन , कर्मकारक |

पढ़ रही थी – सकर्मक क्रिया भूतकाल , स्त्रीलिंग , एकवचन , सातत्यबोधिक पक्ष , कर्तृवाच्य , अन्य पुरुष , कुसुम कर्ता की क्रिया |

18. यह छात्र बहुत चतुर है |

यह – सार्वनामिक विशेषण , पुल्लिंग , एकवचन |

छात्र - जातिवाचक संज्ञा , बहुवचन , एकवचन , कर्ताकारक , है क्रिया के कर्ता |

बहुत – परिमाणवाचक विशेषण , चतुर विशेषण का प्रविशेषण |

चतुर – गुणवाचक विशेषण , पुल्लिंग , एकवचन , लड़का विशेष्य |

है – अपूर्ण अकर्मक , अस्तित्वबोधक , कर्तृवाच्य , लड़का कर्ता की क्रिया |

19. जल्दी चलो , गाड़ी जाने ही वाली है |

जल्दी – क्रियाविशेषण अव्यय , कालवाचक , इसकी क्रिया चलो है |

गाड़ी – जातिवाचक संज्ञा , स्त्रीलिंग , एकवचन , कर्ता कारक |

20. एवरेस्ट संसार का सबसे ऊँचा शिकार है |

एवरेस्ट – व्यक्तिवाचक संज्ञा , पुल्लिंग , एकवचन , कर्ता कारक , है क्रिया का कर्ता |


Sunday, August 29, 2021

पाठ 6 दंडक वन में दस वर्ष

                                                  पाठ 6  दंडक वन में दस वर्ष

प्रश्न) चित्रकूट अयोध्या से कितनी दूरी पर था?

उत्तर) चार दिन  की दूरी पर था|

प्रश्न) राम जी ने चित्रकूट से दूर चले जाने का निर्णय क्यों लिया?

उत्तर ) अयोध्यावासी राय माँगने के लिए चित्रकूट आते - जाते रहते है | यह राजकाज में हस्तक्षेप की तरह होता | राम-लक्ष्मण उस वन से राक्षसों का सफाया कर चुके थे| अब तपस्या में कोई बाधा नहीं थी | इसलिए राम जी ने चित्रकूट से दूर चले जाने का निर्णय बना  लिया|

प्रश्न) दंडकारण्य का वर्णन अपने शब्दों में करो?

उत्तर ) दंडकारण्य घना था | पशु-पक्षियों और वनस्पतियों से परिपूर्ण | इस वन में अनेक तपस्वियों के आश्रम थे| लेकिन राक्षस भी कम नहीं थे| वे ऋषि मुनियों को कष्ट देते थे| और अनुष्ठानों में विघ्न डालते थे |

प्रश्न ) सीता की राक्षसों के राम द्वारा संहार के संबंध में क्या राय थी?

उत्तर ) वे चाहती थी कि राम अकारण राक्षसों का वध न करें | उन्हें न मारें , जिन्होंने उनका कोई अहित नहीं किया है|

प्रश्न) राम-लक्ष्मण और सीता दंडकरण्य में कितने वर्ष रहे?

उत्तर ) दस वर्ष तक रहे |

प्रश्न ) विंध्याचल पर्वत पार करने वाले सबसे पहले ऋषि का नाम बताए ?

उत्तर ) अगस्त्य ऋषि |

प्रश्न) पंचवटी के मार्ग में राम को क्या मिला ?

उत्तर ) विशालकाय गिद्ध मिला |

प्रश्न) जटायु कौन था ?

उत्तर ) जटायु  विशालकाय गिद्ध था | वह महाराज दशरथ का मित्र था | पहली बार सीता उनके स्वरूप को देखकर डर गई थी | वह राम-लक्ष्मण के बाहर जाने पर माता सीता की रक्षा करता था |वह रावण से माता सीता को बचाने के लिए लड़ा और अंत में मर गया |

प्रश्न) शूर्पणखा कौन थी?

उत्तर ) वह राक्षस राज रावण की बहन थी| वह बूढ़ी थी पर राम के रूप सौंदर्य पर मोहित हो गई | उसने  अपना रूप सुंदर स्त्री का बनाया  और राम जी के पास उनसे विवाह करने का प्रस्ताव लेकर गई |

प्रश्न) शूर्पणखा से विवाह न करने का कारण राम और लक्ष्मण ने क्या कारण  बताया ?

उत्तर ) राम जी ने सीता की ओर संकेत करते हुए कहा कि ये मेरी पत्नी है | मेरा विवाह हो चुका है|

      लक्ष्मण ने स्वयं को राम जी का दास बताया और कहा मुझसे विवाह करके तुम दासी बन जाओगी |

प्रश्न) अंत में दुखी होकर शूर्पणखा ने क्या करने की सोची और लक्ष्मण ने फिर क्या किया ?

उत्तर ) क्रोध में आकर सीता पर झपट्टा मारा | लक्ष्मण तत्काल उठे और तलवार से उसके नाक-कान  काट लिए | खून से लथपथ शूर्पणखा अपने सौतले भाई खर-दूषण के पास गई|

प्रश्न) खर-दूषण और राम युद्ध का वर्णन करो?

उत्तर ) खर ने देखा कि आसमान काला पड़ गया |घोड़े स्वयं धरती पर गिरकर मर गए |आकाश में गिद्ध मँडराने लगे है| ये अमंगल के संकेत थे| पर वह रुका नहीं | आगे बढ़ता गया| दोनों में घमासान युद्ध हुआ| खर –दूषण सहित उनकी सेना धराशायी हो गई| अंत में विजय राम की हुई|

प्रश्न) अकंपन ने राम के बारे में रावण को क्या सूचना दी?

उत्तर ) राम कुशल योद्धा  है| उनके पास विलक्षण शक्तियाँ हैं| उन्हें कोई नहीं मार सकता | इसका एक ही उपाय है सीता का अपहरण | इससे उनके प्राण आप ही निकल जाएँगे |

प्रश्न)ताड़का पुत्र  मारीच ने सीता अपहरण के संबंध में रावण को क्या सलाह दी?

उत्तर ) उसने रावण को समझाया कि ऐसा करना विनाश को आमंत्रण देना है |रावण ने मारीच कि बात मान ली और वह चुपचाप लंका  चला गया |

प्रश्न) शूर्पणखा ने रावण को नाक-कान काटने का क्या कारण बताया ?

उत्तर ) सीता अतीव सुंदरी थी | उसे मैं तुम्हारे लिए लाना चाहती थी| मैंने उन्हें बताया कि मैं रावण कि बहन हूँ | क्रोध में आकर लक्ष्मण ने मेरे नाक-कान काट दिए|

प्रश्न) सीता का अपहरण करने के लिए रावण ने क्या किया ?

उत्तर ) उसने मारीच को सोने के हिरण का रूप बदल कर पंचवटी के पास घूमने के लिए कहा | जब राम लक्ष्मण उसे पकड़ने के लिए पंचवटी से दूर आ जाये | तब पीछे से ब्राह्मण के वेश में आकर सीता का अपहरण करने का निर्णय लिया |

Saturday, August 28, 2021

चित्रकूट में भरत

 

 चित्रकूट में भरत

प्रश्न) राम के राज्याभिषेक के समय भरत कहाँ थे?

उत्तर ) वे केकय राज्य में थे|  अपने ननिहाल में थे | वे अयोध्या की घटनाओं से सर्वथा अनभिज्ञ थे|

प्रश्न) भरत ने  सपने  में क्या  देखा?

उत्तर ) भरत ने देखा की समुद्र सूख गया है| चंद्रमा धरती पर गिर पड़े है| वृक्ष सूख गए है| एक राक्षसी उसके पिता को खींचकर ले  जा रही है| वे रथ पर बैठे हैं| रथ गधे खींच रहे हैं|

प्रश्न) भरत के ननिहाल से लौटने पर उसे अयोध्या नगरी कैसी लगी?

उत्तर )नगरी उसे सामान्य नहीं लगी | सब कुछ बदला बदला सा था| सड़कें सूनी थी|बाग-बगीचे उदास थे| वहाँ कोई तुमलनाद नहीं था | पक्षी भी कलरव नहीं कर रहे थे| किसी ने भी भारत के प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया |

प्रश्न) पिता के देहांत की बात  माता कैकयी से  सुनकर भरत की क्या दशा हुई?

उत्तर ) वे यह सुनते ही शोक सागर में डूब गए| पछाड़ खाकर गिर पड़े | विलाप करने लगे| माता कैकयी ने उनकी हिम्मत  बँधाई  |

प्रश्न )  दो वरदान की बात माता कैकयी से सुनकर  भरत ने माँ से क्या कहा?

उत्तर ) भरत ने माँ को अपराधिनी कहा| उन्होंने माँ को वन जाने को कहा| भरत के लिए यह राज अर्थहीन है| पिता व भाई को खोकर  ऐसा राज्य भरत को नहीं चाहिए |

प्रश्न) भरत ने बचकर भागती मंथरा को क्या सीख दी?

उत्तर ) लक्ष्मण ने बचकर भागती हुई मंथरा को पकड़ लिया |वे उसके बाल खींचते हुए भरत के पास लाए |भरत ने उसे दासी की भूमिका बताई | शत्रुघ्न उसे जान से मारने के लिए उद्यत थे| भरत ने बीच-बचाव किया |

प्रश्न) भरत की विशाल सेना को देखकर लक्ष्मण ने क्या अनुमान लगाया ?

उत्तर ) लक्ष्मण ने पेड़ से चीखकर कहा ,’भैया भरत सेना के साथ इधर  आ रहे हैं| लगता है वे हमें मार डालना चाहते हैं | ताकि एकछत्र राज्य कर सके|

प्रश्न) राम-लक्ष्मण से चित्रकूट में मिलने के लिए अयोध्या से कौन- कौन आए ?

उत्तर ) भरत, तीनों माताएँ,  गुरु वशिष्ठ  व कुछ अयोध्यावासी चित्रकूट में राम-लक्ष्मण से मिलने आए |

प्रश्न) भरत ने राम को पिता की मृत्यु का समाचार किस प्रकार दिया ?

उत्तर ) उन्होंने कहा कि एक दुखद समाचार है भ्राता ! पिता दशरथ नहीं रहे | आपके आने के छठे दिन उन्होंने प्राण त्याग दिए|यह सुनकर राम सन्न रहे गए | शोक में डूब गए|

प्रश्न) महर्षि वशिष्ठ ने राम को अयोध्या वापस आकर राज भर संभालने के लिए क्या तर्क दिया?

उत्तर ) महर्षि वशिष्ठ ने कहा, राम! रघुकुल कि परंपरा में राजा ज्येष्ठ पुत्र ही होता है | तुम्हें अयोध्या लौटकर अपना दायित्व निभाना चाहिए| इसी में कुल का मान है|”

प्रश्न ) भरत ने राम के वापस अयोध्या न लौटने पर उनसे क्या चीज़ मांगी ?

उत्तर ) उन्होंने उनसे उनकी खड़ाऊँ मांगी  और राम भैया को कहा कि वह अब से चौदह वर्ष तक राजकाज इनकी ही आज्ञा से ही चलाएँगे|

प्रश्न) राम जी से चरण पादुकाएँ लेकर राम जी ने क्या किया ?

उत्तर ) भरत ने चरण पादुकाओं को एक सुसज्जित हाथी पर रखा | प्रतिहारी उस पर चँवर दुला रहे थे |अयोध्या पहुँचकर भरत ने पादुका पूजन किया| कहा, ये पादुकाएँ राम कि धरोहर है | मैं इनकी रक्षा करूँगा| इनकी गरिमा को आंच नहीं आने दूँगा|

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


Friday, August 27, 2021

साना साना हाथ जोड़ि

 

पाठ 3 

साना साना हाथ जोड़ि

  मधु कांकरिया

प्र1. झिलमिलाते सितारों की रोशनी मे नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था ?

उत्तर. झिलमिलाते सितारों की रोशनी मे नहाया गंतोक लेखिका के मन मे सम्मोहित उत्पन्न कर रहा था | वहाँ की सुंदरता ने लेखिका पर एक जादू सा कर दिया था , कि वह एकटक उसे देखती ही रह गई | उसे उस समय सब कुछ ठहरा हुआ सा लग रहा था | उसके आस पास व उसके अन्तर्मन मे एक शून्य सा समा गया था |

प्र2. गंतोक को मेहनतकश बादशाहो का शहर क्यो कहा गया ?

उत्तर. मेहनतकश से यहाँ अभिप्राय है , कडा परिश्रम करने वाले लोग | बादशाह से तात्पर्य है अपनी इच्छानुसार कम करने वाले | गंतोक पहाड़ी स्थल है | पहाड़ी क्षेत्र का जीवन कठिन होता है | अपनी आवश्यकताओ को पूरा करने के लिए यहाँ के लोग कड़ी मेहनत करने से घबराते नहीं , अपितु मेहनत करते हुए भी मस्त रहते है | उन्हें किसी की परवाह नहीं होती और न ही वे दूसरों की सहायता के लिए किसी के आगे हाथ फैलते है | इसलिए लेखिका ने गंतोक को मेहनतकश बादशाहो का शहर कहा है |

प्र3. कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओ का फहराना किन अलग-अलग अवसरो की ओर संकेत करता है ?

उत्तर. श्वेत पताकाएँ किसी बौध्द धर्म के अनुयायी की मृत्यु पर फहराई जाती है | किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु हो जाने पर नगर से बाहर वीरान स्थान पर मंत्र-लिखित एक सौ आठ पताकाएँ फहराई जाती है | उन्हे उतारा नहीं जाता | वे धीरे-धीरे स्वयं नष्ट हो जाती है | रंगीन पताकाएँ काम के शुभारंभ के समय फहराई जाती है |

प्र4. जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति के बारे मे , वहाँ की भौगोलिक स्थिति एंव जनजीवन के बारे मे क्या महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी | लिखिए |

उत्तर. जितेन नार्गे सिक्किम का नागरिक था | वह ड्राईवर और गाइड दोनों का कार्य अकेले ही करता था | लेखिका ने जितेन नार्गे के साथ ही सिक्किम की यात्रा की थी | वह लेखिका को यात्रा के दौरान वहाँ की प्राकृतिक, भौगोलिक व जनजीवन की महत्वपूर्ण जानकारियाँ देता रहता था | उसने बताया कि सिक्किम मे प्राकृतिक नजारे अत्यंत सुंदर है | गंतोक से युमथांग 149 किलोमीटर दूर है | यह मार्ग खूबसूरत प्राकृतिक  दृश्यो से भरा पड़ा है | कही घाटियाँ फूलो से भरी हुई है | अनेक झरने कल-कल की ध्वनि करते हुए बहते है | कही घाटियों को फूलो की वादियाँ भी कहते है | यहा की नारियाँ रंगीन कपड़े पहनना पसंद करती है | उनका परंपरागत परिधान बोकु है |

प्र5. लोंग स्टॉक मे घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक सी क्यो दिखाई दी ?

उत्तर. लोंग स्टॉक मे घूमते हुए चक्र के विषय मे जितेन नार्गे ने बताया कि इसे घूमने से सारे पाप धूल जाते है | लेखिका उस घूमते हुए चक्र को देखकर सोचने लगती है कि पूरे भारत मे ऐसे विश्वास पाए जाते है | इसलिए भारत के लोगो कि आत्मा एक-जैसी है , विज्ञान ने चाहे कितनी ही तरक्की क्यो न कर ली हो फिर भी लोगो कि पाप-पुण्य संबंधी मान्यताएँ एक-जैसी ही है | वह चाहे पहाड़ी क्षेत्र हो अथवा मैदानी क्षेत्र | इन मान्यताओं मे कही कोई अंतर नहीं है |

प्र6. जितेन नार्गे कि गाइड कि भूमिका के बारे मे विचार करते हुए लिखिए कि कुशल गाइड मिस्टर क्या गुण होते है ?

उत्तर. जितेन नार्गे केवल गाइड ही नहीं , अपितु कुशल ड्राईवर भी था | एक कुशल गाइड की सबसे बड़ी विशेषता वह होती है कि उसे उस क्षेत्र का पूरा ज्ञान होना चाहिए जिसमे वह गाइड का काम कर रहा है | जितेन एक कुशल गाइड है क्योकि उसे सिक्किम के सारे पहाड़ी क्षेत्र का पूरा ज्ञान था | वह सैलानियो को उस क्षेत्र की पूरी जानकारी देता है | वह यात्रियों के साथ मित्र जैसा व्यवहार करता है | वह संगीत का ज्ञान भी रखता है | यात्रियों की थकान को दूर करने के लिए उनकी पसंद का संगीत सुनाता है | मार्ग मे काम करने वाली सिक्किम नारियों के जीवन के बारे मे वह पूर्ण जानकारी देता है | वहाँ के लोगो के धार्मिक स्थलों और लोगों के विश्वास व आस्थाओं की भी जानकारी देता है | अतः स्पष्ट है कि जितेन एक कुशल गाइड है |

प्र7. इस यात्रा- वृत्तांत मे लेखिका ने हिमालया के जिन-जिन रूपों का चित्र खिचा है , उन्हे अपने शब्दो मे लिखिए |

उत्तर. लेखिका की पहाड़ी यात्रा गंतोक से यूमथांग जाने के लिए आरंभ होती है | वे अपने पूरे दल के साथ जीप मे बैठकर यात्रा शुरू करती है | जैसे-जैसे वे आगे बढ़ते है वैसे-वैसे ऊँचाई भी बढ़ती जाती है | उन्होने देखा की हिमालय का प्राकृतिक दृश्य पल-पल मे बदलता है | हिमालय का विराट रूप सामने आता है | अब हिमालय अपने विशाल रूप मे दिखाई देने लगता है | आसमान मे घटाएँ फ़ैली हुई है | घाटियों मे दूर-दूर तक खिले हुए फूल फैले हुए है |हिमालय कही हरे रंग का कालीन ओढ़े हुए नजर आता है तो कही सफ़ेद बर्फ की चादर ओढ़े हुए और कही-कही बादल मे लुका-छिपी का खेल खेलता सा लगता है |

प्र8. प्रकृति के उस अनंत और विरत स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है ?

हिमालय की प्राकृतिक छटा पल-पल बदलती है | लेखिका हिमालय पर प्रकृति के अनंत और विराट रूप को देखकर अवाक रह जाती है |प्रकृति के उस विरत रूप को देखकर उसे अनेक अनुभूतियाँ होती है |उसे अनुभव होता है कि  जीवन की सार्थकता झरनो और फूलो की भाँति स्वंय को दे देने मे है | झरनो के भाति निरंतर गतिशील रहना और फूलो की भांति सदा मुस्कुराते रहने मे ही जीवन की जीवंतता है | जीवन मे दूसरों के लिए कुछ कर गुजरना ही जीवन को सार्थक बनाता है |

प्र9. प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद मे डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृश्य झकझोर गए ?

उत्तर. लेखिका ने देखा कि उस प्राकृतिक सौंदर्य के दृश्यो से बेपरवाह कुछ अत्यंत सुंदर और कोमलांगों वाली पहाड़ी औरते पत्थर तोड़ने मे लीन थी | उनके हाथों मे कुदाल व हथौड़े थे | कईयो कि पीठ पर तो डोको (बड़ी टोकरी)मे उनके बच्चे भी बंधे हुए थे | यह विचार लेखिका को बार- बार झकझोरता था कि नदियो , फूलों , झरनो , वादियों के प्राकृतिक नजारो के बीच भूख ,प्यास , मौत और मानव के जीने कि इच्छा के बीच कडा संघर्ष चल रहा था |   

प्र10. सैलानियों को प्रकृति कि अलौकिक छटा का अनुभव करवाने मे किन-किन लोगो का योगदान होता है , उल्लेख करे |

उत्तर. सब से पहले सैलानियों को पर्यटन-स्थलो पर ठहराने का प्रबंध करने वाले लोगो का योगदान रहता है | इसके पश्चात उनके लिए वाहनों का प्रबंध करने वाले लोगो का योगदान रहता है | वाहनों के चालको व गाइडो का योगदान भी सराहनीय होता है | मार्गदर्शक (गाइड) की भूमिका तो और भी महत्त्वपूर्ण रहती है , क्योकि वह सैलानियों को वहाँ के स्थानों की जानकारी के साथ-साथ वहाँ के इतिहास व सांस्कृतिक परंपराओ मे विश्वास , जन-जीवन व परंपराओ की जानकारी देकर उनकी यात्रा को रोचक बनाता है |

प्र11. “कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती है |” इस कथन के आधार पर स्पष्ट करे कि आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति मे क्या भूमिका है ?

उत्तर. देश की महत्त्वपूर्ण योजनाओ को सफल बनाने मे आम जनता सहयोग देती है | सड़कों का निर्माण करने हेतु पत्थर तोड़ने व पत्थर जोड़ने से लेकर बहुमंजली अट्टालिकाएँ खड़ी करने मे आम-जनता का परिश्रम ही काम करता  है | किंतु आम जनता के इस कार्य के बदले मे उन्हे बहुत कम पैसे मिलते है | बड़ी-बड़ी फ़ैक्टरियो के द्वारा वस्तुओ का निर्माण किया जाता है | बाँधो से बिजली का उत्पादन होता है | फसलों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होता है |

प्र12. आज की पीढ़ी द्वारा प्रकृति के साथ किस तरह खिलवाड किया जा रहा है ? इसे रोकने मे आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए ?

उत्तर. वृक्षो की लगातार कटाई , नदियों के जल का दुरुपयोग तथा कृषि योग्य भूमिका बड़े-बड़े नगर बसाने व औद्योगिक संस्थान खड़े करने से प्राकृतिक संतुलन समाप्त हो जाएगा | हम विद्यार्थी भी अपने आँगन या घर के आस-पास की खाली पड़ी धरती पर छायादार वृक्षो के पौधे लगाकर प्रकृति को बचाने मे योगदान दे सकते है | हमें जल के उचित प्रयोग के प्रति समाज मे जागरूकता उत्पन्न करनी होगी , ताकि जल का सही प्रयोग हो |  हमें नदियो मे गंदगी नहीं फ़ैकनी चाहिए | कारखानों  से निकले गंदे पानी को नदियों के पानी मे नहीं बहाना चाहिए |

प्र13. प्रदूषण के कारण स्नोफोल मे कमी का जिक्र किया गया है | प्रदूषण के और कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आए है , लिखे |

उत्तर. प्रदूषण से मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा है | प्रदूषण से सारे देश व समाज का आर्थिक और सामाजिक वातावरण बिगड़ रहा है | खेती के उगाने के कृत्रिम उपायों , खादों आदि के प्रयोग से जहाँ धरती की उपजाऊ शक्ति नष्ट हो रही है , वही खराब फासले उत्पन्न हो रही है , जिसके खाने से मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है | ध्वनि-प्रदूषण से मन की शांति नष्ट हो रही है और तनाव बढ़ता जा रहा है | ध्वनि-प्रदूषण से बहरेपन की बीमारी बढ़ रही है |

प्र14. कटाओ पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है | इस कथन के पक्ष मे अपनी राय व्यक्त किजिए ?

उत्तर. कटाओ को भारत का स्विट्ज़रलैंड कहा जाता है | वह स्विट्ज़रलैंड से भी अधिक सुंदर स्थान है , जिसे देखकर लोग अपने आपको ईश्वर के निकित समझते है | वहाँ उन्हे अद्भुद शांति मिलती है | यदि वहाँ पर दुकान खुल जाती , तो लोगो की भीड़ बढ़ जाती | गंदगी फैल जाती | वहाँ का प्राकृतिक वातावरण नष्ट हो जाता | उसे भारत का स्विट्ज़रलैंड नहीं कहा जा सकता था | इसलिए कटाओ पर किसी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है |

प्र15. प्रकृति ने जल संचय की व्यवस्था किस प्रकार की है ?

उत्तर. प्रकृति के नियम अनोखे है | वह हर कार्य की व्यवस्था अपने ही ढंग से करती है | उसकी जल संचय व्यवस्था भी अत्यंत रोचक है | सर्दियों मे बर्फ के रूप मे जल एकत्रित होता है | गर्मियों मे जल लोग प्यास से व्याकुल होते है तो प्रकृति के द्वारा एकत्रित बर्फ रूपी जल पिघलकर जलधारा बनकर बहने लगता है | जिसे प्राप्त करके लोग अपनी प्यास को बुझाते है |

प्र16. देश की सीमा पर बैठे फौजी किस तरह की कठिनाइयों से जूझते है ? उनके प्रति हमारा क्या उत्तरदायित्व होना चाहिए ?

उत्तर. वहाँ वे बर्फीली हवाओं और तूफानों का सामना करते है | पौष और माघ की ठंड मे तो पेट्रोल के अतिरिक्त सब कुछ जम जाता है | फौजी बड़ी मुश्किल से अपने शरीर का तापमान सामान्य रखते हुए देश की सीमाओ की रक्षा करते है | देश की सीमाओं की सुकक्षा करने वाले फौजियों के प्रति हमारा उत्तरदायित्व बनता है , कि हम उनका हौंसला बढ़ाएँ और उनके परिवार की खुशहाली के लिए प्रयत्नशील रहे ताकि फौजी अपने परिवार की चिंता से मुक्त होकर सीमाओ की रक्षा कर सकें |     

   

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...