Monday, May 16, 2022

संगतकार (मंगलेश डबराल) क्षितिज भाग 2 कक्षा दसवीं

 संगतकार

मंगलेश डबराल


प्रश्न 1) संगतकार के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत करना चाह रहा है ?

उत्तर) कवि ऐसे लोगों की ओर संकेत करना चाहता है जो ज्ञान व संगीत के इच्छुक है | इनका किसी कार्य को करने में पूरा सहयोग होता है किन्तु इनका नाम कोई नहीं जानता |कवि यह स्पष्ट करना चाहता है कि समाज में हर व्यक्ति का अपना- अपना महत्व  होता है | जिस प्रकार कोई टीम केवल कैप्टन के प्रयास से नहीं जीतती, अपितु हर खिलाड़ी के प्रयास से जीतती है | अत: जीत का श्रेय हर खिलाड़ी को जाता है |

प्रश्न 2) संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा और किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं ?

उत्तर ) संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई देते हैं | साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकल, कार आदि ठीक करने वाले कारीगरों के पास काम करने वाले लड़के संगतकार की तरह ही काम सीखते हैं | लुहार, मूर्तिकार, रंग-रोगन करने वाले, चर्मकार, नल ठीक करने वाले पत्थर का काम  करने वाले इसी श्रेणी से संबन्धित होते हैं जो अपने गुरु या शिष्य से अभ्यास के द्वारा काम सीखते हैं |

प्रश्न 3) संगतकार किन-किन रूपों में मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं ?

उत्तर ) संगतकार अनेक प्रकार से मुख्य गायक-गायिकाओं की मदद करते हैं, वे अपनी आवाज़ व गूंज को मुख्य गायक की आवाज़ व गूंज से मिलाकर बल प्रदान करते हैं | मुख्य गायक के गहरे में चले जाने पर उनकी स्थायी पंक्ति को पकड़े रहते हैं और गीत को बेसुरा नहीं होने देते | वे मुख्य गायक को मूल स्वर में लौटा लेने का कार्य भी करते हैं |

प्रश्न 4) भाव स्पष्ट कीजिए –

और उसकी आवाज़ में  जो एक हिचक साफ सुनाई देती है

या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है

उसे विफलता नहीं

उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए |

उत्तर ) तारसप्तक को गाते हुए जब उतार –चढ़ाव के कारण मुख्य गायक का गला बैठने लगता है, तब उसकी आवाज़ भी उसका साथ छोड़ देती है | गीत गाते-गाते उसकी आवाज़ उखड़ने लगती है | उस समय संगतकार ही अपनी आवाज़ का सहारा देकर उसके उत्साह को उभारता है | वह कहता है कि तुम अकेले नहीं हो अपितु में भी तुम्हारे साथ हूँ |

प्रश्न 5) किसी भी क्षेत्र  में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को तरह – तरह से अपना योगदान देते हैं | कोई एक उदाहरण देकर इस कथन पर अपने विचार लिखिए |

उत्तर ) हर क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने के लिए लोगों को अनेक लोगों की सहायता लेनी पड़ती हैं | कल्पना चावला के नाम को आज हमारे देश में ही नहीं बल्कि सारे संसार में यश प्राप्त हो चुका है | इस प्रसिद्धि का आधार तो वह स्वयं ही थी पर उसके जीवन में अनेक लोगों ने योगदान दिया | सबसे पहले उसके अभिभावक, उसके स्कूल के व दयाल सिंह कॉलेज के शिक्षक जहां से उसने पढ़ाई पूरी की | पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ ने उसकी शिक्षा में योगदान दिया | फिर नासा ने उसे सफलता प्राप्ति में पूरा सहयोग दिया | योगदान तो सभी को मिलता है पर लग्न व मेहनत ही किसी भी इंसान को उसकी मंजिल तक पहुंचता है |

प्रश्न 6) कभी – कभी टार सप्तक की ऊंचाई पर पहुँच कर मुख्य गायक का स्वर बिखरता नज़र आता है उस समय संगतकार उसे बिखरने से बचा लेता है | इस कथन के आलोक में संगतकार की विशेष भूमिका को स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) संगतकार की मुख्य भूमिका यहीं है कि वह मुख्य गायक का पूरा सहयोग करता है | जब भी उसका स्वर टूटने लगता है तो संगतकार उसकी आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाकर उन्हें बल प्रदान करता है | श्रोताओं को इसका पता नहीं लगता है | इस प्रकार वह उसके स्वर को बिखरने से बचा लेता है | यही संगतकार की विशिष्ट भूमिका है |

प्रश्न 7) सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान  यदि व्यक्ति लड़खड़ाता है तो उसके सहयोगी उसकी किस तरह संभालते हैं ?

उत्तर ) सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाता है तो उसके सहयोगी उसको सांत्वना देकर उसका हौंसला बढ़ाते हैं | असफलता को भूलने की सलाह देते हैं | यदि आवश्यकता हो तो आर्थिक सहायता भी देते हैं |

रचना व अभिव्यक्ति

प्रश्न 8) कल्पना कीजिए कि आपको किसी संगीत या नृत्य समारोह का कार्यक्रम प्रस्तुत करना है लेकिन आपके सहयोगी कलाकार किसी कारणवश नहीं पहुँच पाए –

क)    ऐसी स्थिति में अपनी स्थिति का वर्णन कीजिए |

उत्तर ) मन में घबराहट पैदा होगी | संगीत या नृत्य समारोह सहयोगी कलाकारों के बिना लगभग असंभव सा है | वाद्य यंत्रों के बिना संगीत या नृत्य अधूरा सा होता है |

ख)   ऐसी  परिस्थिति का आप कैसे सामना करेंगे ?

उत्तर ) ऐसी परिस्थिति में  सहयोगी कलाकारों को शीघ्र बुलाने का यत्न करूंगा |  उनके न पहुंच पाने की  स्थिति में किसी अन्य सहयोगी कलाकारों को बुलाऊंगा | यदि समय होगा तो उनके साथ अभ्यास करूंगा | लेकिन पूर्व अभ्यास न होने की वजह से संगीत व संगीत में ताल-मेल बैठना बहुत कठिन होता है | यह संभव है कि कार्यक्रम को स्थगित करना पड़े |

प्रश्न 9) आपके विद्यालय में मनाए जाने वाले सांस्कृतिक समारोह में मंच के पीछे काम करने वाले सहयोगियों की भूमिका पर एक अनुच्छेद लिखिए |

उत्तर ) किसी भी विद्यालय में मनाए जाने वाले सांस्कृतिक समारोह में जितना महत्व मंच पर कार्यक्रम प्रस्तुत करने वालों का है उतना ही महत्व मंच के पीछे काम करने वाले सहयोगियों का भी हैं | प्रकाश की उचित व्यवस्था मंच के पीछे काम करने वाले ही करते हैं | इसका नाटक की प्रस्तुति में बहुत महत्व है | इसी प्रकार मंच की साज - सज्जा करने वाले सहायकों का भी उल्लेखनीय योगदान रहता हैं | ध्वनि व्यवस्था का भी महत्वपूर्ण योगदान है | नृत्य की प्रस्तुति पर ध्वनि व मंच के पीछे गायन का भी अनोखा योगदान रहता है | इस प्रकार विद्यालय में मनाए जाने वाले सांस्कृतिक समारोह में मंच के पीछे काम करने वाले सहयोगियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैं |

प्रश्न 10 ) किसी भी क्षेत्र में संगतकार की पंक्ति वाले लोग प्रतिभावान होते हुए भी मुख्य या शीर्ष स्थान पर नहीं पहुंच पाते होंगे ?

उत्तर ) किसी भी क्षेत्र में संगतकार की पंक्ति वाले लोग मुख्य  कलाकार नहीं बन पाते |  इसका मुख्य कारण है कि ये मुख्य गायक के सहायक के रूप में ये आते हैं | यदि ये जीवनभर  तबला, हारमोनियम आदि वाद्ययंत्र बजाते रहे तो मुख्य गायक या कलाकार नहीं बन पाते |  यदि स्वतंत्र रूप से अपनी प्रतिभा दिखाए तो वे मुख्य कलाकार बन सकते हैं | भले ही वे तबला, हारमोनियम बजाने की कला का प्रदर्शन करें | लेकिन अकसर देखा गया है कि संगतकार हमेशा मंच के पीछे से कार्य करते हैं , इसलिए वे प्रतिभासंपन्न होकर भी श्रेष्ठ स्थान प्राप्त नहीं कर पाते |

प्रश्न ) मुख्य गायक व संगतकार के सम्बन्धों पर सार रूप में प्रकाश डालिए |

इनका चोली दामन का संबंध है मुख्य गायक को संगतकारों के सहयोग के बिना प्रसिद्धि नहीं मिल सकती तथा मुख्य गायक के बिना संगतकारों  की कला का कोई महत्व नहीं होता है | मुख्य गायक की आवाज़ को बल प्रदान करने के लिए वह अपनी आवाज़ उसकी आवाज़ में मिला देता है |

प्रश्न ) गायन के क्षेत्र में प्रयोग होने वाले स्थायी एवं अंतरा शब्दों के अर्थ समझाइए |

उत्तर ) स्थायी – गायन के क्षेत्र में स्थायी का अर्थ गीत की मुख्य लाइन या टेक  है जिसे बार-बार दोहराया जाता है |

      अंतरा – गीत की टेक की पंक्ति के अलावा दूसरी पंक्तियों को अंतरा कहते है | गीत में एक से अधिक चरण या अंतरे होते हैं | हर अंतरे के बाद स्थायी अर्थात टेक की पंक्तियाँ होती हैं |

प्रश्न ) सरगम किसे कहते है ?

उत्तर ) संगीत के क्षेत्र में सात स्वरों के समूह को सरगम कहते हैं | संगीत के ये सात स्वर हैं – षडज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत और निषाद  इन्हीं नामों के पहले अक्षर लेकर इन्हें सा, रे, गा, मा, पा,, नि, कहा गया है |

प्रश्न ) सप्तक किसे कहते हैं ? और इसके कितने भेद होते हैं ?

उत्तर ) सप्तक का अर्थ है- सात का समूह | सात शुद्ध स्वर है इसलिए यह नाम पड़ा है इनका संगीत के क्षेत्र में अत्यधिक महत्व है | लेकिन ध्वनि की ऊंचाई व निचाई के आधार पर संगीत में तीन तरह के सप्तक माने गए हैं | निम्न मध्य तथा तार सप्तक यानि की सबसे ऊंचे स्वर में गाना | जब मुख्य गायक गाते तार-सप्तक में गाने लगता है तो उसकी आवाज़ उसको साथ छोड़ने लग जाती है | एक निपुण गायक ही तार सप्तक में गा सकता हैं |

प्रश्न ) संगतकार कविता का मूलभाव /उद्देश्य स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) संगतकार कविता का संदेश संगतकारों के महत्व को प्रतिपादित करना है | इनके योगदान को न तो मुख्य कलाकार अनदेखा करे और न ही समाज इन्हें निम्न दृष्टि से देखे | मुख्य कलाकार को सर्वप्रथम इनका सम्मान करना चाहिए | इनको समय - समय पर आगे आने का मौका देना चाहिए | इनके हुनर की सब जगह कद्र होनी चाहिए |

प्रश्न ) संगतकार यहाँ प्रतीक रूप में  प्रयुक्त हुआ है | इस शब्द के माध्यम से लेखक ने क्या स्पष्ट किया है ?

उत्तर ) संगतकार  मुख्य कलाकार के सहायक को कहा जाता हैं |वह अपनी शक्ति का प्रयोग मुख्य कलाकार को आगे बढ़ाने में करता है | वह स्वयं पीछे रहकर उसे आगे बढ़ता है | इस प्रतीक के माध्यम से कवि ने सहायकों के महत्व को उजागर किया हैं | उनका समाज में उतना ही योगदान है जितना मुख्य कलाकार का हैं | अत : उनके बिना किसी लालच के किए गए त्याग को दिखाना ही कविता का परम लक्ष्य हैं |

 

 

 

 

Sunday, May 15, 2022

मैं क्यों लिखता हूँ ? अज्ञेय (कक्षा दसवीं )

 

मैं क्यों लिखता हूँ ?

                                     अज्ञेय

प्रश्न 1) लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव की अपेक्षा अनुभूति उनके लेखन में कहीं अधिक मदद करती है, क्यों ?

उत्तर ) लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष अनुभव वह होता है जो हम अपने सामने घटित होते हुए देखते है | परंतु अनुभूति संवेदना व कल्पना के सहारे  उस सत्य को आत्मसात कर लेती है, यह वास्तव में रचनाकर के साथ घटित नहीं होती है | अनुभव की तुलना में अनुभूति हृदय के भावों को बाहर निकालने में मदद करती है | लेखन के लिए अनुभूति का होना अति आवश्यक है | ये संवेदना को जागृत करती है  | लेखक अपनी आंतरिक विवशता के कारण ही लिखने के लिए प्रेरित होता है |

प्रश्न 2) लेखक ने अपने आपको हिरोशिमा के विस्फोट का भोक्ता कब और किस तरह महसूस किया है ?

उत्तर ) लेखक हिरोशिमा के बम – विस्फोट के परिणामों को अखबारों में सुन चुका था | लेखक ने अपनी जापान यात्रा के दौरान हिरोशिमा का दौरा किया | उसने अस्पताल में जाकर भयानक विस्फोट से पीड़ित लोगों का इलाज होते हुए देखा | इस अनुभव द्वारा लेखक को उसका भोक्ता बनना स्वीकार न था | कुछ दिन बाद जब उसने किसी स्थान पर एक बड़े से पत्थर पर एक व्यक्ति की उजली छाया देखी | वास्तविकता यह है कि विस्फोट के समय कोई मनुष्य उस पत्थर के पास खड़ा होगा | रेडियो धर्मी किरणों ने उस मनुष्य को भाप की तरह उड़ाकर उसकी छाया पत्थर पर डाल दी | उसे देखकर लेखक के मन में एक अनुभूति थी | उसके मन में विस्फोट का प्रत्यक्ष दृश्य साकार हो उठा | उस समय वह विस्फोट का भोक्ता बन गया था |

प्रश्न 3) मैं क्यों लिखता हूँ के आधार पर बताइए कि –

क)   लेखक को कौन सी बातें लिखने के लिए प्रेरित करती है ?

उत्तर ) लेखक के अनुसार वह स्वयं जानना चाहता है कि वह क्यों लिखना चाहता है ? यहीं उसे जानने की इच्छा उसे लिखने के लिए प्रेरित करती है | वह अपने भीतर उत्पन्न होने वाली विवशता से मुक्ति पाने के लिए भी लिखता है | प्रसिद्धि पाने की इच्छा, आंतरिक विवशता और आर्थिक विवशता उसे लिखने के लिए प्रेरित करती है |

ख)   किसी रचनाकार के प्रेरणा स्रोत किसी दूसरे को कुछ भी रचने के लिए किस तरह उत्साहित कर सकते है ?

उत्तर ) जापान के हिरोशिमा नगर पर बम गिराने वालों ने भी अपना दुष्कर्म करके लेखक को लिखने के प्रेरित किया | कभी-कभी व्यक्ति संपादकों, प्रकाशकों व आर्थिक लाभ से उत्साहित होकर व्यक्ति लेखन कार्य करता है | किन्तु यह कारण कोई जरूरी नहीं है | किन्तु वास्तविक व सच्चा कारण तो लेखक के अंदर उत्पन्न विवशता ही होती है |

प्रश्न 4) कुछ रचनाकारों के लिए आतमनुभूति /स्वयम के अनुभव के साथ – साथ बाह्य दबाव भी महत्वपूर्ण होता है | ये बाह्य दबाव कौन कौन से हो सकते हैं ?

उत्तर ) ये दबाव निम्नलिखित हो सकते हैं –

1)  संपादकों का आग्रह

2)  प्रकाशकों का तक़ाज़ा

3)  आर्थिक लाभ

4)  किसी विषय- विशेष पर प्रचार- प्रसार करने का दबाव

5)  व्यक्तिगत विशेषताएँ

प्रश्न 5) क्या बाह्य दबाव केवल लेखन स जुड़े रचनाकारों को ही प्रभावित करते हैं या अन्य क्षेत्रों से जुड़े कलाकारों को ही प्रभावित करते हैं, कैसे ?

उत्तर ) बिल्कुल ! ये दबाव किसी भी क्षेत्र के कलाकार हो, सबको समान रूप से प्रभावित करते हैं | कलाकार अपनी अनुभूति व खुशी के लिए अवश्य अपनी कला का प्रदर्शन करता है | यदि व कला के किसी क्षेत्र में प्रसिद्धि प्राप्त कर लेता है तो लोगों की उनसे अपेक्षाएँ और बढ़ जाती  हैं | इसके साथ आर्थिक लाभ की भी इच्छा भी हर व्यक्ति पर दबाव डालती है | वह लोगों के दबाव व धन के लालच में आकार कार्य करता है | आज के समय में धन के बिना कोई कार्य संभव नहीं होता है | इस कारण धन की आवश्यकता संबंधी बाह्य दबाव तो हर क्षेत्र के व्यक्ति से जुड़ा रहता है | अत: स्पष्ट है कि केवल रचनाकारों को ही नहीं, अपितु हर क्षेत्र से जुड़े कलाकारों को बाह्य दबाव प्रभावित करते हैं |

प्रश्न 6) हिरोशिमा पर लिखी  कविता लेखक के अंत : व बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है | यह आप कैसे कह सकते हैं ?

उत्तर ) हिरोशिमा पर लिखी कविता को हम उनके आंतरिक विवशता का परिणाम कह सकते हैं| उनके लिए उसे किसी संपादक या प्रकाशक ने तकाजा नहीं किया था और न ही उनके सामने आर्थिक दबाव था | इस कविता को उन्होंने अपनी आंतरिक अनुभूति के प्रकाश से प्रभावित होकर लिखा था | अत: यह कविता कवि की आंतरिक अनुभूति का परिणाम है |

प्रश्न 7 ) हिरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानकतम दुरूपयोग है | आपकी दृष्टि में विज्ञान का दुरुपयोग कहाँ - कहाँ और किस तरह से हो रहा है ?

उत्तर )  हिरोशिमा तो विज्ञान के दुरूपयोग का ज्वलंत उदारहण है ही पर हम मनुष्यों द्वारा विज्ञान का और भी दुरुपयोग किया जा रहा है | जैसे –

विज्ञान ने यात्रा को सुगम बनाने के लिए हवाई जहाज़, गाड़ियों आदि का निर्माण किया परंतु हमने इनसे अपने वातावरण को ही प्रदूषित किया है| इस विज्ञान की देन के कारण आज हम अंग प्रत्यारोपण कर सकते हैं | परंतु आज इस देन का प्रयोग कर हम मानव अंगों का व्यापार करने लगे है | विज्ञान के प्रयोग से भ्रूण हत्या बढ़ रही है | आज हर देश परमाणु बम बनाने लगा है जो मानव जाति के लिए घातक है | विज्ञान ने कम्प्यूटर व इंटरनेट का आविष्कार मानव के कार्यों के बोझ को कम करने के लिए किया | परंतु हम मनुष्यों ने वायरस व साइबर क्राइम को जन्म दिया है |

प्रश्न 8) एक संवेदनशील युवा नागरिक की हैसियत से विज्ञान का दुरुपयोग रोकने में आपकी क्या भूमिका है ?

उत्तर ) वर्तमान युग में विज्ञान का दुरुपयोग करके पॉलिथीन का निर्माण हो रहा है | यह पॉलिथीन पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है | इससे वातावरण प्रदूषित होने के साथ साथ जीवों का जीवन भी मुसीबत में आ चुका है | कई पशु पक्षी मर रहे है | हमें पॉलिथीन के प्रयोग पर पाबंदी लगानी चाहिए | अनेक प्रकार के रासयानिक पदार्थ खरपतवारनाशक और पैदावार बढ़ाने के रूप में प्रयोग हो रहे हैं | इससे बहुत अधिक जहर हमारे शरीर में जा है | इसके स्थान पर पुरानी गोबर खाद का प्रयोग करना चाहिए |

 

अन्य प्रश्न

 

प्रश्न ) लेखक ने अपने लिखने  का कारण क्या बताया है ?

अथवा

प्रश्न ) मैं क्यों लिखता हूँ, पाठ का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) लेखक कहता है कि कोई भी लेखक अपने भीतर की विवशता से निजात पाने के लिए लिखता है | वह अपने भीतर की विवशता से मुक्ति पाने के लिए तथा तटस्थ होकर उसे देखने व पहचानने के लिए लिखता है | वह बाहरी दबावों से प्रभावित होकर बहुत कम लिखता है | उसके लिखने का मुख्य कारण तो उसके भीतर की विवशता है | और वह लिखकर ही स्वयम् को उससे मुक्त कर पाता है |

प्रश्न ) लेखक ने बाहरी दबाव की तुलना प्रश्न किससे की है ?

उत्तर ) लेखक का मानना है कि कुछ रचनाकार बाहरी दबाव के बिना नहीं लिख पाते हैं | उनकी स्थिति वैसे ही होती है जैसे कोई रचनाकार सवेरे नींद खुल जाने पर भी अलार्म बजने तक बिस्तर पर पड़ा रहे |  जब अलार्म बजता है तभी वह उठता है |  इसी प्रकार कुछ रचनाकर भी ऐसे ही होते है जब तक बाहरी दबाव उन पर न पड़े तब तक वे लिखना आरंभ नहीं करते |

प्रश्न ) लेखक ने अणु बम  द्वारा होने वाले व्यर्थ जीव – नाश का अनुभव कैसे किया ? 

अथवा

प्रश्न ) अज्ञेय के अनुसार सैनिक ब्रह्मपुत्र नदी में  बम किस उद्देश्य से फेंकते थे ?

उत्तर ) लेखक ने  युद्ध के समय देखा कि भारत की पूर्वी सीमा पर सैनिक ब्रह्मपुत्र नदी में  बम फेंक हजारों मछलियाँ को मार रहे थे | हालांकि उन्हें खाने के लिए कुछ ही मछलियों की जरूरत थी | इस प्रकार वे बम फेंककर हजारों जलीय जीवों को मार रहे थे | इसे देखकर ही लेखक ने अनुभव किया कि अणु बम के द्वारा भी ऐसे ही असंख्य लोगों को बेकार में ही मारा जा रहा है | हिरोशिमा पर गिराया गया अणु बम इसका स्पष्ट उदाहरण है |

प्रश्न) अज्ञेय ने हिरोशिमा  कविता की रचना कहाँ पर की ?

उत्तर ) लेखक ने हिरोशिमा कविता की रचना जापान से भारत लौटते समय  गाड़ी में बैठे- बैठे  लिखी | यह कविता सन् 1959 में प्रकाशित हुई तथा उनके अरी ओ प्रभामय  काव्य – संग्रह में संकलित है |

प्रश्न ) विज्ञान जैसे विषय के लिए लेखक को इतना गहन ज्ञान कैसे हुआ ?

उत्तर )  लेखक विज्ञान का विद्यार्थी था | उसने विज्ञान विषय पर शिक्षा प्राप्त की है | अणु शक्ति व रेडियो धर्मी पदार्थों का उसे ज्ञान था | उनके प्रभाव के बारे में उसे सम्पूर्ण जानकारी थी |

प्रश्न ) हिरोशिमा पर जब बम फेंका गया तब उस भयावहता को देखकर भी लेखक ने इस विषय पर क्यों नहीं  लिखा ?

उत्तर ) लेखक ने जब हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए जाने की घटना को पढ़ा और सुना तो उसने तत्काल इस विषय पर कुछ नहीं लिखा | वह व्याकुल, बैचन, दुखी तो हुआ, परंतु बौद्धिक रूप से | किसी भी विषय को कोई तभी लिख सकता है जब उसे वह विषय आंतरिक रूप से प्रभावित करे, उसकी संवेदनाओं को उजागर करे |

प्रश्न ) प्रत्यक्ष अनुभव व अनुभूति में क्या अंतर है ?

उत्तर ) जो घटना हमारी आँखों के सामने घटित होती है उसे प्रत्यक्ष अनुभव कहते हैं | यह कोई जरूरी नहीं कि उस घटना से हमारे भावों पर कोई प्रतिकूल या अनुकूल भाव उत्पन्न ही हो | आंतरिक अनुभूति वह होती है जो हमारे हृदय उत्पन्न होने वाले भावों को गहराई से प्रभावित करे, जिससे हमारे मन छटपटा उठे और कुछ कहने के लिए विवश हो जाए | प्रत्यक्ष अनुभव लिखने के लिए प्रेरित नहीं करते, लेकिन अनुभूति लिखने के लिए प्रेरित करती है |

प्रश्न ) लेखक को हिरोशिमा कविता लिखने के लिए किसने प्रेरित किया था ?

उत्तर ) पत्थर पर पड़ी छाया ने इतना पीड़ित व व्यथित कर दिया था कि उन्होंने अपनी पीड़ा कि अभिव्यक्ति के लिए हिरोशिमा नामक कविता लिखा डाली | वे इस प्रकार हिरोशिमा नगर के भोक्ता बन उन्हें उस झुलसे हुए पत्थर ने युद्ध की विभाषिका को व्यक्त करने हेतु प्रेरित किया था |

प्रश्न ) लेखक और कृतिकार में क्या अंतर होता है ?

उत्तर ) लेखक के अनुसार जो साहित्य भीतरी दबाव के कारण लिखा जाए और जिसमें मन की सच्ची छटपटाहट हो उसे कृति कहते है | धन, यश व विवशता आदि की प्रेरणा से लिखा जाने वाला साहित्य लेखन कहलाता है और इस स्थिति में लिखने वाला लेखक कहलाता है |

प्रश्न ) कविता प्रश्न का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य क्या है ?

उत्तर ) अज्ञेय जी की दृष्टि में मानव मन में विशिष्ट अनुभूति का उपजना कविता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है | मन की गहराई से निकली हुई कविता ही वास्तविक होती है |

प्रश्न ) एक जले हुए पत्थर पर प्रत्यक्ष एक लंबी उजली छाया का वर्णन कीजिए |

उत्तर ) जापान के नगर हिरोशिमा पर दूसरे महायुद्ध के दौरान परमाणु बम गिराया गया था| तब अपार विनाश के साथ - साथ एक बुरी तरह से झुलसे हुए पत्थर पर एक व्यक्ति की लंबी उजली छाया उस पत्थर पर ही रह गई होगी | वह व्यक्ति परमाणु बम से भाप बन कर उड़ गया होगा और उसकी छाया उस पत्थर पर ही रह गई होगी | वह झुलसा हुआ पत्थर अभी भी सहज रूप से इंसान के हृदय में उस समय प्रकट हुए विनाश को प्रकट कर देता है |

 

 

 

 

 

 

 

 

Friday, May 13, 2022

फसल (नागार्जुन) कक्षा दसवीं

 

फसल

नागार्जुन

प्रश्न 1) कवि के अनुसार फसल क्या है ?

उत्तर ) कवि के अनुसार फसल मानव और प्रकृति के मिले झुले प्रयासों का परिणाम है | फसल अनेक नदियों के जल का जादू, करोड़ों लोगों के हाथों के स्पर्श अथवा परिश्रम की गरिमा तथा भूरी, काली व संदली मिट्टी का गुण धर्म है | यह सूर्य की किरणों का बदला हुआ रूप है, जिसे हवा नचाती व लहराती है |

प्रश्न 2) कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है वे आवश्यक तत्व कौन – कौन से है ?

उत्तर ) कवि के अनुसार फसल के लिए आवश्यक तत्व हैं – पानी, मिट्टी, खाद, हवा व सूर्य की      किरणें |

प्रश्न 3) फसल को हाथों के स्पर्श की गरिमा और महिमा कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है ?

उत्तर ) कवि बताना चाहता है कि फसल को पैदा करने के लिए घर के सभी व्यक्तियों को  मेहनत करना पड़ता है | किसान का पूरा परिवार फसल को पैदा करने में लगा रहता है |  अनेक लोगों को पेट भरता है | यह एक नहीं अनेक हाथों का कमाल व प्रयास है | अत : स्पष्ट है कि कवि ने किसान के महत्व को प्रतिपादित करने के लिए सफल प्रयास किया है |

प्रश्न 4) भाव स्पष्ट कीजिए |

क)    रूपान्तरण है सूरज की किरणों का

सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का !

उत्तर ) कवि ने स्पष्ट किया है कि ये फसलें और कुछ नहीं सूरज की किरणों का बदला हुआ रूप हैं | सूरज की किरणों के प्रभाव से फसलों पर हरियाली आती है | सूर्य की गर्मी से ही फसल पकती है | फसलों को बढ़ाने में हवा की थिरकन का भी पूरा सहयोग है| मानों हवा सिमट – सिकुड़कर फसलों पर समा जाती है |

रचना व अभिव्यक्ति

प्रश्न) कवि के फसल को हज़ार – हजार खेतों की मिट्टी का गुण –धर्म कहा है-

क)    मिट्टी के गुणधर्म को आप किस तरह परिभाषित करेंगे |

उत्तर ) मिट्टी के गुण धर्म से अभिप्राय: उसकी उर्वरा शक्ति से है जो उसमें मिले विभिन्न तत्वों के कारण होती है | उन तत्वों के कारण ही मिट्टी  विभिन्न रंगों को प्राप्त करती है | मिट्टी के तत्व ही फसल उगाने व विकसित करने में सहायक होती है |

ख ) वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को किस-किस तरह प्रभावित करती है ?

उत्तर ) वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को धीरे धीरे नष्ट कर रही है |आज रसायनिक खादों के अधिक प्रयोग से, प्लास्टिक के जमीन में रहने से, प्रदूषण से  मिट्टी के स्वाभाविक गुणों में परिवर्तन आ रहा है | तरह - तरह के कीटनाशक व खरपतवार नाशक मिट्टी को हानि पहुँचाते है | इनके प्रयोग से भले ही हमें फसल अधिक मिलती है किन्तु इनके दूरगामी परिणाम बहुत ही हानिकारक है |

ग ) मिट्टी द्वारा अपना गुण-धर्म छोड़ने की स्थिति में क्या किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना की जा सकती है ?

उत्तर ) यदि मिट्टी अपना मूल धर्म व स्वभाव छोड़ देगी तो जीवन का स्वरूप बिगड़  जाएगा | मिट्टी में फसल नहीं उग पाएगी | तब मनुष्य क्या खाकर जीवित रहेगा | अत: मिट्टी का उपजाऊ होना मानव जीवन के लिए बहुत जरूरी है |

प्रश्न घ ) कवि ने  फसल को हज़ार – हज़ार  खेतों की मिट्टी का गुण –धर्म कहा है- मिट्टी के गुणधर्म को पोषित करने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है ?

उत्तर ) मनुष्य का कर्तव्य है कि वह मिट्टी के गुण - धर्म को नष्ट होने से बचाए | हम स्वयं जाकर दूसरों में भी जागरुकता लाए | मिट्टी के गुण धर्म को बचाए रखने के लिए  हमें मिट्टी को प्रदूषित होने से बचाना चाहिए , प्लास्टिक की थैलियों का कम से कम प्रयोग करना चाहिए तथा पानी का भी सही प्रयोग करना चाहिए |

अन्य प्रश्न

प्रश्न ) कवि ने फसल के द्वारा किन-किन में आपसी सहयोग का भाव व्यक्त किया है ?

उत्तर ) कवि ने मनुष्य के शारीरिक बल व परिश्रम तथा प्रकृति में निहित अथाह  ऊर्जा के सहयोग के भाव को व्यक्त किया है | कवि के अनुसार जब मनुष्य के  परिश्रम की शक्ति  व प्रकृति की शक्ति आपस में मिल जाती है तो फसलें उत्पन्न होती है | अकेली मानवीय शक्ति व प्रकृति की शक्ति कुछ भी नहीं कर सकती है | इनके आपसी सहयोग में ही महान शक्ति छिपी होती है | इसी सहयोग की शक्ति को प्रस्तुत करने के लिए कवि ने प्रयास किया है |

प्रश्न)  फसल शीर्षक कविता के प्रतिपाद्य पर प्रकाश डालिए |

उत्तर ) प्रस्तुत कविता का प्रमुख प्रतिपाद्य किसानों के परिश्रम के साथ-साथ प्राकृतिक तत्वों के प्रभाव का वर्णन करना है | कवि ने स्पष्ट प्रयास किया है जिन तत्वों  से उत्पन्न अन्न को हम खाते है उसके लिए किसी एक व्यक्ति, नदी या प्राकृतिक तत्वों को श्रेय नहीं दिया जा सकता, अपितु सभी नदियों के जल, सब खेतों की विविध प्रकार की मिट्टियों के गुणों, सूर्य की गर्मी, वायु और किसानों के श्रम के सामूहिक सहयोग से ही फसल उगाई जाती है | अत: इन सब पर सबका सहज अधिकार होना चाहिए |

 

 

 



Thursday, May 12, 2022

यह दंतुरित मुस्कान नागार्जुन (कक्षा दसवीं)

 

 यह दंतुरित मुस्कान

          नागार्जुन

प्रश्न 1) बच्चे की दंतुरित मुस्कान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

उत्तर ) कवि का मन खुशी से खिल उठता है | उसके निराश मन में नई आशा की किरण जाग जाती है | उसे ऐसा लगता है कि मानों उसकी झोंपड़ी में कमल के फूल खिल उठे हों | उसके मन में प्रेम की धारा बहने लगी हो | फिर से बबूल व बांस के वृक्ष से मानों शेफालिका के फूल झड़ने लगे हों | कहने का भाव है कि कवि का मन बच्चे कि दंतुरित मुस्कान से अत्यधिक प्रभावित हुआ है |

प्रश्न 2) बच्चे कि मुस्कान और एक दंतुरित व्यक्ति की मुस्कान में क्या अंतर है ?

उत्तर ) बच्चे की मुस्कान स्वाभाविक होती है | उसके मन में किसी प्रकार का छल-कपट नहीं होता, किन्तु बड़े व्यक्ति की मुस्कान में छल-कपट व दिखावा होता है | उसे कई बार लोक व्यवहार के लिए न चाहते हुए भी मुस्कराना पड़ता है | बड़ों की मुस्कान में स्वाभाविक गति नहीं होती है |

प्रश्न 3) कवि ने बच्चों की मुस्कान के लिए किन-किन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है ?

उत्तर ) कवि नागार्जुन ने बच्चों की मुस्कान के सौन्दर्य को  जिन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है, वे निम्नलिखित है :

1)  बच्चों की मुस्कान से मृतक में भी जान आ जाती है |

“मृतक में भी डाल देगी जान |”

2)  कवि ने बालक की मुस्कान की तुलना कमल के पुष्पों से की है | जो तालाब में न खिलकर कवि की झोंपड़ी में खिल गया है |

“छोडकर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात|”

3)  बच्चे की मुस्कान से प्रभावित होकर पाषाण (पत्थर) भी पिघलकर जल बन गया है |

“ पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण |”

4)  कवि बच्चे की मुस्कान की तुलना शेफालिका के फूल से करता है |

“ झरने लग पड़े शेफालिका के फूल|”

5)  बच्चा जब तिरछी नज़रों से देख कर मुस्कराता है कवि को लगता है कि वह उनके प्रति स्नेह प्रकट कर रहा है |

“देखते तुम इधर कनखी मार

और होती जबकि आँखें चार

तब तुम्हारी दंतुरित मुस्कान|”

प्रश्न 4) भाव स्पष्ट कीजिए –

क)    छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में  खिल रहे जलजात |

उत्तर ) कवि को छोटे बच्चे की मुस्कान तो ईश्वर के वरदान के समान लग रही थी | वह धूल से सना हुआ बच्चा ऐसा लग रहा था मानो तालाब में कमल का फूल खिल गया हो | वह मोहक और मनोरम बच्चा उसकी झोंपड़ी में आकर बस गया हो |

ख ) छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल ?

उत्तर ) नन्हें बालक के मनोरम रूप को देखकर निर्दयी व्यक्ति का भी दिल खुशी से भर उठता है | चाहे कोई बाँस के समान हो या बबूल के समान हो उसकी सुंदरता को देखकर मुस्कराने के लिए विवश हो जाता है |

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 5)  मुस्कान और क्रोध दो भिन्न –भिन्न भाव हैं | इनकी उपस्थिति से बने वातावरण की भिन्नता का चित्रण कीजिए |

उत्तर ) मुस्कान और क्रोध  मानव मन में उत्पन्न होने वाले दो भाव हैं | मुस्कान एक सुखद भाव है,जबकि क्रोध एक मनोविकार है जिसका उत्पन्न होना अधिकतर हानिकारक होता है | मुस्कान सुखद भाव है इससे हँसी-खुशी का वातावरण बनता है | आपस में प्रेम भाव का संचार होता है | समाज में मेल - जोल बढ़ता है | इसके विपरीत क्रोध उन सबको कष्ट पहुंचता है जो क्रोध करने वाले के समीप होते है | क्रोध में लिए गए निर्णय का परिणाम  लाभदायक नहीं होता है |  मुस्कान से हर एक व्यक्ति के हृदय को जीता जा सकता है, किन्तु क्रोध से शत्रुता बढ़ती है |

प्रश्न 6) बच्चे से कवि की मुलाकात का जो शब्दचित्र उपस्थित हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए |

उत्तर ) कवि महीनों बाद घर लौटने पर बच्चे से मिला | बच्चा उन्हें देखकर मुस्कराने लगता है | बच्चे के नए –नए  दांतों वाली मुसकान को देखकर कवि का मन खुशी से खिल उठता है | नन्हें बच्चे की मुस्कान देखकर उसके निराश जीवन में मानो प्राण आ गए हो | उसे लगा कमल का सुंदर फूल उसकी झोंपड़ी में आ गया हो | आरंभ में बालक कवि को अजनबी की भांति देखता रहा और तिरछी नज़रों से देखकर मुँह फेरने लगा |  किन्तु बच्चे की माँ ने दोनों का आपस में परिचय कराया | बच्चा मुस्करा पड़ा और उसके नए-नए उगे हुए दाँत दिखाई देने लगे |

अन्य प्रश्न

प्रश्न) यह दंतुरित मुस्कान कविता में  बाँस और बबूल किसे और क्यों कहा गया है ?

उत्तर ) नन्हें बालक की हंसी के प्रभाव का वर्णन करते हुए कहा है कि उसकी हंसी का प्रभाव ऐसा है कि जिसे देखकर बाँस और बबूल के वृक्षों से भी शेफालिका के फूल झड़ने लगते हैं | यहाँ बाँस और बबूल का प्रयोग बुरे व्यक्तियों के लिए किया गया है | कहने का तात्पर्य है समाज के बुरे से बुरे लोग भी नन्हें बच्चे की हँसी को देखकर हँसने लगते हैं | उनके मन में भी बच्चे के प्रति अच्छी भावना जाग जाती है |

प्रश्न ) यह दंतुरित मुस्कान क्या –क्या कर सकती है ?

उत्तर ) कवि के अनुसार दंतुरित मुस्कान में बहुत कुछ करने की क्षमता होती है | कठोर से कठोर व्यक्ति के मन में कोमलता का संचार कर सकती है | जो व्यक्ति इस संसार से विमुखा हो गया है वह भी नन्हें शिशु की हँसी को देखकर हँसे बिना नहीं रहेगा | इसका प्रभाव इतना मृतक व्यक्ति में  भी प्राण फूँक सकती है |

प्रश्न )  यह दंतुरित मुस्कान कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) प्रस्तुत पाठ में कवि का उद्देश्य बच्चे की मनोहारी मुस्कान के प्रभाव का चित्रण करना है | छोटे बच्चे के मुख में उगे हुए नन्हें- नन्हें दाँतों को देखकर कवि के मन में अनेक भाव उमड़ते है जिन्हें कवि ने विभिन्न बिंबों की योजना के द्वारा व्यक्त किया है | बच्चे की निश्चल हँसी में जीवन का संदेश छिपा हुआ है इसे देखकर कठोर से कठोर व्यक्ति का हृदय भी पिघल उठता है | बच्चे का तिरछी नज़रों से देखना तो ओर भी मनमोहक होता है | प्रस्तुत कविता का लक्ष्य  बच्चे की हँसी के प्रभाव का उल्लेख करना है |

 

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