Thursday, May 27, 2021

श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द

 

श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द

ऐसे शब्द जो ध्वनि तथा वर्तनी की दृष्टि से लगभग समान होते हैं लेकिन अर्थ की दृष्टि से भिन्न होते है ,भिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं ; जैसे –

अनल     -    अग्नि

अनिल     -    वायु

अणु       -    कण

अनु       -    पश्चात

अपेक्षा     -    इच्छा

उपेक्षा     -    तिरस्कार

अवलंब     -    सहारा

अविलंब    -    तुरंत

अवधि     -    समय 

अवधी      -     एक भाषा

अविराम    -    लगातार

अभिराम   -    सुंदर

अंक       -    गोद

अंग       -    शरीर

अंश       -    भाग

अंस       -    कंधा

आलसी    -    सुस्त

असली     -    वास्तविक

इतर      -    भिन्न

इत्र        -    खुशबूदार द्रव

उपयुक्त    -    ठीक

उपर्युक्त    -    ऊपर लिखा गया

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तरंग      -    लहर

तुरंग      -    घोड़ा

दिशा      -    तरफ

दशा       -    हालत

प्रसाद      -    भगवान का भोग

प्रासाद     -    महल

बहन      -    माँ की पुत्री

वहन      -    ढोना

लक्ष्य      -    मंजिल

लक्ष       -    लाख

शोक      -    दुख

शौक      -    चाव

आदि      -    प्रारम्भ

आदी      -    अभ्यस्त

आँधी      -    तेज़ हवा

आधी      -    आधा भाग

उद्धत     -    लिया गया

ओर       -    तरफ

और       -    तथा

काट       -    काटना

काठ      -    लकड़ी

जलज     -    कमाल

जलद      -    बादल

दिन       -    दिवस

दीन       -    गरीब

पानी      -    जल

पाणि     -    हाथ

प्रणाम     -    नमस्कार

प्रमाण     -    सबूत

योग      -    जोड़

योग्य     -    लायक

शाम      -    संध्या

श्याम     -    काला

स्वेद      -    पसीना

श्वेत      -    सफेद

 

 

पाठ -4 विदुर बाल महाभारत

 

पाठ -4

विदुर

प्रश्न 1 विदुर कौन थे ?

उत्तर – विदुर विचित्रवीर्य की रानी अंबालिका की दासी की कोख से धर्म देव के रुप में जन्मे थे | वहीं आगे चलकर विदुर के नाम से प्राख्यात हुए थे |वे धृतराष्ट के प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए थे |

प्रश्न 2 धृतराष्ट को विदुर ने जुए के खेल के विषय में क्या सलाह  दी  ?

उत्तर - विदुर ने कहा ,”राजन मुझे आपका यह काम ठीक नहीं जँचता |इस खेल के कारण आपके बेटों में आपस में वैरभाव बढ़ेगा | इसको रोक दीजिए |’” 

प्रश्न 3 विदुर जी युधिष्ठिर के पास किसलिए गए थे  ?

उत्तर वे युधिष्ठर  को जुआ खेलने को जाने से  रोकने के लिए गए थे  |

प्रश्न 4) युधिष्ठिर ने चाचा विदुर से क्या कहा ?

उत्तर - “चाचा जी ! मै यह सब मानता हूँ पर जब  काका धृतराष्ट ने बुलाया , तो मै कैसे इंकार करूँ ? युद्ध या खेल के लिए बुलाए जाने पर न जाना क्षत्रिय का धर्म तो नहीं है” |

प्रश्न 5 ) विदुर को किस चीज का अथाह ज्ञान था ?

उत्तर ) धर्मशास्त्र व राजनीति का |

 


पाठ – 3 अंबा और भीष्म


 

पाठ – 3

अंबा और भीष्म

प्रश्न 1 ) चित्रांगद को किसने मारा ?

उत्तर चित्रांगद को किसी गंधर्व ने मारा |

प्रश्न 2) चित्रांगद की मृत्यु के बाद हस्तिनापुर की गद्दी पर किसे बैठाया गया ?

उत्तर ) चित्रांगद के छोटे भाई विचित्रवीर्य को |

प्रश्न 3) भीष्म को किसके विवाह की चिंता हुई ?

उत्तर ) भीष्म को विचित्रवीर्य के  विवाह की चिंता हुई |

प्रश्न 4 ) भीष्म को क्या खबर मिली ?

उत्तर ) भीष्म को काशिराज की कन्याओं के स्वयंवर  की  खबर मिली |

प्रश्न 5 )भीष्म के स्वयंवर में भाग लेने पर क्या हुआ ?

उत्तर ) देश-विदेश से आए राजकुमारों ने भीष्म पर फब्तियाँ कसनी शुरू की |

प्रश्न 6)  स्वयंवर से काशिराज की कन्याओं को जीत कर ले जाते हुए भीष्म को किसने रोकने की कोशिश की थी |

उत्तर सौभदेश का राजा शाल्व  ने भीष्म के रथ  का पीछा किया व उसे रोकने का प्रयास किया |भीष्म ने उसे हरा दिया |

प्रश्न 7) अंबा ने परशुराम से क्या प्रार्थना की ?

उत्तर अंबा ने परशुराम से भीष्म के साथ युद्ध करने व उन्हें मारने की प्रार्थना  की |

प्रश्न  8) अंबा ने भीष्म से अपना बदला किस प्रकार लिया |

उत्तर अंबा अपने तपोबल से स्त्री का रूप त्याग कर पुरुष बन गई |कौरवो व पांडवो के बीच हुए कुरुक्षेत्र के  मैदान मे अर्जुन के रथ  की सारथी बन गई |भीष्म ने शिखंडी का रूप धारण की हुई अंबा पर बाण नहीं चलाया |शिखंडी को आगे करके अर्जुन ने भीष्म पर बाण चलाए और अंत मे अर्जुन की  विजय   हुई | तब जाकर अंबा का क्रोध शांत हुआ |

 


संज्ञा

 संज्ञा

संज्ञा की परिभाषा

किसी व्यक्ति ,वस्तु ,स्थान या भाव का बोध कराने वाले पदों को संज्ञा कहते हैजैसे राम  ,दिल्लीपर्वतपुस्तक,  सेना , कक्षा , चौड़ाई आदि|

संज्ञा के भेद

संज्ञा के तीन भेद है – 

1)      जातिवाचक संज्ञा   

2)      व्यक्तिवाचक संज्ञा  

3)      भाववाचक  संज्ञा

जातिवाचक संज्ञा

जिन शब्दों से किसी वर्ग के सभी प्राणियों ,वस्तुओं  या स्थानों को बोध हो , उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहते है | जैसे वृक्षफूलपशु ,मनुष्यनगरशेर आदि |

जातिवाचक संज्ञा के दो उपभेद भी है |

        I.            समुदायवाचक संज्ञा –:

 जिस संज्ञा शब्द से किसी समूह का बोध होता हैउसे समुदायवाचक संज्ञा कहते है | जैसे सभा , सेना ,कक्षा ,परिषद , दल  आदि |

     II.            द्रव्यवाचक संज्ञा - :

जिस शब्द से द्रव्य या धातु का बोध होउसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते है | जैसे घीतेलसोना ,कोयला , पीतल आदि |

  व्यक्तिवाचक संज्ञा

             जिन संज्ञा शब्दों से किसी विशेष व्यक्ति ,स्थान या वस्तु के नाम का बोध होउन्हें व्यक्तिवाचक संज्ञा  कहते है | जैसे – कविताआगराकश्मीरकन्या कुमारीरामचरितमानसहिमालय आदि |

भाववाचक  संज्ञा 

              जिन संज्ञा  शब्दों से किसी पदार्थवस्तु ,व्यक्ति के गुणदोषधर्म-व्यापार ,दशा आदि के भाव का पता चले  उन्हें भाववाचक संज्ञा कहते है ;जैसे लंबाई ,सरलता ,बुराईसुंदरता ,क्रोध आदि |

           भाववाचक   संज्ञाएँ   बनाना

 भाववाचक   संज्ञाएँ चार प्रकार के शब्दों से बनती हैं-

जातिवाचक संज्ञा  से भाववाचक संज्ञा बनाना

जातिवाचक संज्ञा               भाववाचक संज्ञा

1.       मित्र                   मित्रता                                  

2.       पंडित                 पांडित्य                                    

3.       माता                  मातृत्व                                     

4.       शत्रु                    शत्रुत्व                                       

5.       हिन्दू                   हिन्दुत्व                                   

6.       लड़का                लड़कपन                                 

7.       शिशु                  शैशव                                     

    सर्वनाम से भाववाचक संज्ञा बनाना 

            सर्वनाम                          भाव वाचक संज्ञा 

1.       अपना                             अपनापन

2.        निज                               निजत्व

3.       मम                                ममता

4.        स्व                                स्वत्व

5.       अहं                                अहंकार

6.       पराया                             परायापन

  विशेषण से  भाववाचक संज्ञा बनाना |

            विशेषण        भाववाचक संज्ञा                                                                

1.       ढीठ                   ढिठाई                                   

2.       तेज                    तेजी                                     

3.       कट                    कटुता                                  

4.       चतुर                  चतुरता                                   

5.       वीर                    वीरता                                    

6.       खट्टा                   खटाई                                  

7.        सादा                 सादगी       

क्रिया से  भाववाचक संज्ञा बनाना

            क्रिया                भाव वाचक संज्ञा 

1.        पढ़ना             पढ़ाई

2.        जीतना           जीत

3.        गिरना             गिरावट

4.       उड़ना             उड़ान

5.       चढ़ना            चढ़ाई

6.       उठना              उठाव 

7.        हँसना             हँसी                                    

*भाववाचक  संज्ञाओं  का संबंध हमारे भावों से होता है |इनका कोई रूप या आकार नहीं होता | ये केवल महसूस किए जाते है |

      सफेद                  सफेदी

       गुणों के नाम-    ईमानदारी , सच्चाई  , होशियारी

      भावों के नाम – दया , करुणाक्रोध , प्रसन्नता

 


वाक्य

 

वाक्य

शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं | वाक्य भाषा की इकाई है ; जैसे – राम स्कूल जाता है | वाक्य में क्रिया का होना अति आवश्यक होता है | क्रिया के बिना वाक्य की रचना संभव नहीं होती है | यथा – मैं जाता हूँ | परंतु मैं एक मात्र शब्द है |

अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ प्रकार होते हैं –

1 विधानवाचक – जिन वाक्यों में किसी क्रिया के होने या करने की सामान्य सूचना हो, उन्हें विधानवाचक वाक्य कहते हैं ; जैसे – गंगा हिमालया से निकलती है | बच्चे मैदान में खेल रहे हैं |

2 निषेधवाचक वाक्य – जिन वाक्यों में न या नहीं होने का भाव व्यक्त होता है, उन्हें नकरात्मक वाक्य कहते है ; जैसे अवनी स्कूल नहीं जाती | रमेश पुस्तक नहीं पढ़ता |

3 प्रश्नवाचक वाक्य – जिन वाक्यों में प्रश्न का बोध होता है, उन्हें प्रश्नवाचक वाक्य कहते है ; जैसे हरियाणा में कितने जिले है ?आप क्या काम करते हो ?

4 संदेहवाचक वाक्य – जिन वाक्यों में कार्य के होने में संदेह होता है ,उन्हें संदेहवाचक वाक्य कहते हैं ; जैसे – शायद आज विद्यालय बंद हो | संभवत: गाड़ी नहीं गई होगी |

5 आज्ञावाचक वाक्य – जिस वाक्य में आज्ञा , प्रार्थना , उपदेश , अनुमति का बोध होता है, उसे आज्ञावाचक  वाक्य कहते हैं |

जैसे – तुम बाहर जाओ | (आज्ञा )

आप आ सकते हो | (अनुमति)

कृपया आप मेरा काम कर दीजिए | (प्रार्थना )

6 इच्छावाचक वाक्य जिस वाक्य में इच्छा ,आशीर्वाद ,या शुभ कामना का बोध होता है उसे इच्छावाचक या इच्छार्थक वाक्य कहते है |जैसे-

 i ) ईश्वर आपको दीर्घायु करे |

ii ) आज वर्षा होनी चाहिए |

7 संकेतवाचक वाक्य – जिस वाक्य में एक बात या काम  का होना दूसरी बात या काम के होने पर निर्भर करता है , उसे संकेतवाचक वाक्य कहते है ; जैसे – यदि कपिल पढ़ता तो अवश्य प्रथम आता | आप समय पर स्टेशन पहुँच जाते तो आपकी ट्रेन नहीं छूटती |

8 विस्मयादिबोधक वाक्य जिस वाक्य में हर्षशोकघृणा आश्चर्य भय आदि का बोध होता है , उसे विस्मयबोधक वाक्य कहते हैं | जैसे –

हर्ष – वाह ! क्या छक्का मारा है |

आश्चर्य – अरे ! तजेंदर गा भी सकता है |

 

 

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