Tuesday, August 24, 2021

पाठ 6 प्रेमचंद के फटे जूते - हरिशंकर परसाई ( कक्षा नौवीं)

पाठ 6 प्रेमचंद के फटे जूते

-    हरिशंकर परसाई

प्र1. हरिशंकर परसाई ने प्रेमचंद का जो शब्दचित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे प्रेमचंद के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताएँ उभरकर आती है ?

उतर.लेखक ने प्रेमचंद का शब्द चित्र हमारे सामने प्रस्तुत किया है उससे उनके व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएँ सामने आती है –

1.  सादा जीवन – प्रेमचंद आडम्बर तथा दिखावेपूर्ण जीवन से दूर रहते थे | वे गाँधी जी की तरह सादा जीवन जीते थे |

  2. उच्च विचार – प्रेमचंद के विचार बहुत ही उच्च थे | वे सामाजिक बुराइयों से ढूर रहे | वे इन बुराइयों से समझौता न कर सके |

3. स्वाभिमानी – प्रेमचंद ने दूसरों से कुछ  माँगना उचित नहीं समझा | वे अपनी दीन – हीन दशा मे संतुष्ट थे |

4.   सामाजिक कुरीतियो के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने वाले – प्रेमचंद ने समाज मे व्याप्त कुरीतियों के प्रति सावधान किया | वे एक स्वस्थ समाज चाहते थे तथा स्वंय भी बुराइयों से कोसो दूर रहने वाले थे |

प्रश्न 3. नीचे दी गई पंक्तियो मे निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिये –

     क) जूता हमेशा टोपी से कीमती रहा है | अब तो जूते की कीमत और बढ़ गई है और एक  

         जूते पर पचीसों टोपियाँ न्योछावर होती हे |

  उत्तर. व्यंग्य  – जूते का स्थान पाँवों मे अर्थात नीचे है यह ताकत का प्रतीक माना जाता है | टोपी का स्थान सिर पर अर्थात सम्मान जनक है स्थिति इसके विपरीत है | आज लोग अपने शक्ति के बल पर अनेक टोपियों को अपने जूते पर झुकने को विवश कर देते है और लोग अपना स्वाभिमान भूलकर अपना सिर उनके सामने झुकाते है |

ख)     तुम परदे का महत्व ही नहीं जानते , हम परदे पर कुर्बान हो रहे है |

 उत्तर. व्यंग्य – लोगों का स्वभाव होता है बुराइयों को छिपाने की या उन पर पर्दा डालने की | लोग अपनी बुराइयों को दूसरे के सामने नहीं आने देना चाहता है, पर प्रेमचंद ने अपनी बुराइयों को कभी छिपाने का प्रयास नहीं किया | वे भीतर-बाहर एक समान थे | दूसरे लोग पर्दे की आड़ मे कुछ भी करते रहे है |

ग)    जिसे तुम घृणित समझते हो , उसकी तरफ हाथ की नहीं, पाँव की अँगुली से इशारा करते हो ?

उत्तर. व्यंग्य – प्रेमचंद ने सामाजिक बुराइयों को अपनाना तो दूर उनकी तरफ देखा भी नहीं | उन्होंने इनकी तरफ हाथ से भी इशारा नहीं किया | इन्हें इतना घृणित समझा कि पैर की उँगली से उसकी ओर इशारा करते हुए दूसरों को भी उससे सावधान किया |

प्र4. पाठ मे एक जगह पर लेखक सोचता है कि फोटो खीचाने की अगर यह पोशाक है तो पहनने की कैसी होगी?’ लेकिन अगले ही पल वह विचार बदलता है कि नहीं , इस आदमी कि अलग-अलग पोशाके नहीं होगी |’ आपके अनुसार इस संदर्भ मे प्रेमचंद के बारे मे लेखक के विचार बदलने कि क्या वजहें हो सकती है ?

उत्तर. प्रेमचंद के बारे मे लेखक के विचार बदलने के निम्नलिखित कारण है –

1.  लोग प्राय: ऐस सोचते और करते हैं की दैनिक जीवन मे साधारण कपड़ो का प्रयोग करते है और विशेष अवसरो के लिए वे अच्छे कपड़े रखते है | प्रेमचंद के पास शायद दूसरी पोशाक नहीं थी |

2.  लेखक सोचता है कि सादा जीवन  जीने वाला यह आदमी भीतर-बाहर सब एक-सा है| इसका दोहरा व्यक्तितव नहीं है , इन्होंने कभी दिखावटी जीवन नहीं जिया |

प्र5. अपने यह व्यंग्य पढ़ा | इसे पढ़कर आपको लेखक की कौन-सी बाते आकर्षित करती है ?

उत्तर. सब से पहले लेखक ने व्यंग्यात्मक शैली मे महान साहित्यकार प्रेमचंद का चित्र प्रस्तुत किया है | उनकी विशेषताओं से हमे परिचित कराया है | दूसरे लेखक ने प्रेमचंद पर व्यंग्य तो किया है , पर उसने स्वयं को कभी भी व्यंग्य से अलग नहीं रखा | तीसरे लेखक को मानव जीवन की अत्यंत गहरी समझ है | उसने जीवन के दुख –सुख  को अत्यंत निकटता से देखा है | चौथे लेखक सामाजिक बुराइयों तथा कुरीतियो के प्रति भी सजग है | उसने व्यंग्य के माध्यम से इन पर भी प्रहार किया है |

प्र6. पाठ मे टीले शब्द का प्रयोग किन संदर्भों को इंगित करने के लिए किया गया होगा ?

उत्तर. यहाँ व्यंग्य मे टीला शब्द का प्रयोग प्रेमचंद के जीवन मे आने वाली सामाजिक कठिनाइयो के लिए किया गया है , जिसे पंडित , पुरोहित , मौलवी , जमींदार आदि समाज के कथित ठेकेदारों ने खड़ी की है | इनके कारण ही ऊँच-नीच की भावना , जाति-पाँति , छुआछूत , बाल – विवाह , शोषण , बेमेल विवाह , अमीर-गरीब की भावना आदि टीले के रूप मे खड़ी हो मार्ग को अवरुद्ध करती है |

प्र7. आपकी दृष्टि मे वेश-भूषा के प्रति लोगों की सोच में आज क्या परिवर्तन आया है ?

उत्तर. आज के समय मे लोगों की सोच और दृष्टिकोण मे काफी बदलाव आ गया है | लोग अपनी हैसियत जताने के लिए अच्छे कपड़े पहनते है | आज सादा-जीवन जीने वालो को पिछड़ा समझा जाने लगा है | अब तो ऐसे भी छात्र-छात्राएँ मिल जाएंगे जिन्हे पढ़ाई की चिंता कम अपने आधुनिक फैशन वाले कपड़ो की अधिक सोच  रहती है | संपन्न वर्ग को ऐसा करते देख मध्यम और निम्न वर्ग भी वैसा ही करने को लालायित हो उठा है |

प्र8. पाठ मे आए मुहावरे छाटिएँ और उनका वाक्य मे प्रयोग कीजिए |

उत्तर. मुहावरे                   अर्थ                      वाक्य मे प्रयोग

(1) अटक जाना             स्थिर हो जाना              इस सुंदर तस्वीर पर मेरी दृष्टि अटक गई है |

(2) कुएँ के तल मे होना      बहुत गहराई मे होना         तुम रुपये खोजने मे इतनी देर लगा रहे हो ,        

                                                मानो रुपये कुएं के तल मे है |

(3) न्योछावर होना            कुर्बान होना               चंद्रशेखर आजाद की जीवनी पढ़कर देश के लिए

                                                अपना सब कुछ अर्पण करने के साथ खुद भी

                                                न्योछावर होने का मन करता है |                                                                                      

(4) लहूलुहान होना           घायल होना                 कार दुर्घटना में आगे की सीट पर बैठा व्यक्ति

                                              लहूलुहान हो गया |

(5)हौसले पस्त करना         हतोत्साहित करना     सहवाग की बल्लेबाज़ी ने विपक्षी टीम के

                                                        हौसले पस्त कर दिए|

(6)बरकाकर निकलना         बचकर निकलना              आज तुम उस दुकांनदार से फिर बरकाकर    

                                                    निकल आए |

    (7) जूता आजमाना           अपमानित करना    इस व्यक्ति को बहुत समझा लिया, अब    

                                                          इस पर जूता आजमाना ही बाकी है|

 

 

अपूर्व अनुभव

 



पाठ 10 अपूर्व अनुभव


  -तेत्सुको कुरियानगी

पाठ का सार

इस संस्मरण में तोत्तो –चान और यासुकी-चान नामक दो हम उम्र बच्चों का वर्णन है जिनके कार्यों में संघर्ष कि झलक मिलती है|

यासुकी –चान को न्योता मिला : सभागार में दो दिन शिविर लगने के बाद  तोत्तो –चान के लिए एक बड़ा साहस करने का दिन आया |उसने पोलियोग्रस्त बालक यासूकी –चान को अपने पेड़ पर चढ़ने का न्योता दिया और इस बात का पाने –अपने माता – पिता को पता न लगाने दिया |

प्रत्येक बालक द्वारा पेड़ अपनाने की परंपरा : तोमोए मे प्रत्येक बच्चे बाग के एक –एक पेड़ को अपना मानता है|तोत्तो –चान पेड़ बड़ा –सा था ,जिसमें जमीन से छ: फुट की ऊँचाई पर मोटी शाखा निकली थी ,जिस पर बैठकर झूले लिए जा सकते  था |इसी पर बैठकर तोत्तो –चान आकाश को या सड़क पर चलते लोगों को देखा करती थी किसी बच्चे को जब किसी दूसरे पेड़ पर चढ़ना होता था तो वह अन्य बच्चो से शिष्टतापूर्वक पूछता था ,”क्या मै अंदर आ जाऊँ ? पोलियोग्रस्त यासुकी –चान किसी पेड़ पर न चढ़ पाने के कारण किसी पेड़ को अपना नहीं मानता था |

तोत्तो–चान का झूठ : घर से निकलते हुए तोत्तो –चान ने अपनी माँ से झूठ बोला कि वह यासुकी –चान के घर जा रही है|झूठ बोलने के कारण वह माँ से भी नजरे न मिला सकी |यासुकी –चान उससे केवल एक ही साल बड़ा था ,पर तोत्तो –चान को बहुत बड़ा लगता यहा |तोतों –चान के खुलकर हँसते ही वह भी हँस पड़ा |

तोत्तो-चान यासुकी –चान का जोखिमपूर्ण काम : तोत्तो- चान यासुकी –चान को अपने पेड़ की ओर ले गई और खुद चोकीदार के छप्पर की ओर सीढ़ी लेने भागी |ऐसा लगता यहा कि उसने रात में ऐसा करने की सोच रखा था |उसने सीढ़ी घसीटकर पेड़ से लगा दी ,जो पेड़ कि द्विशाखा तक पहुँच गई उसने सीढ़ी पकड़कर यासुकी चान दे उस पर चढ़ने के लिए कहा |कमजोर हाथ पैर वाला यासुकी चन बिना सहारे के पहली बार सीडी भी न चढ़ पाया |तोत्तो-चान नीचे उतरकर यासुकी –चान को पीछे से धकियाने लगी |कमजोर तोत्तो-चान इससे ज्यादा करती भी क्या ? हताश यासुकी-चान सीढ़ी से अलग खड़ा हो गया |

यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ना तोत्तो -चान कि हार्दिक इच्छा थी |वह भागकर चौकीदार के छप्पर की ओर गई ,जहाँ उसे एक तिपाई मिल गई |यह तिपाई भी द्विशाखा तक पहुँच गई |तोतों-चान ने बड़ी बहन के सामने कहा की यह डगमगाएगी भी नहीं |उसने तरबतर तोत्तो-चान को देखा और संकल्प के साथ पाँव उठकर पहली सीढ़ी पर रखा |इसके बाद दोनों पेड़ पर चढ़ने में इस प्रकार लीन हो गए कि उन्हें समय का ध्यान ही न रहा |आखिर पूरी शक्ति से जूझते हुए यासुकी-चान ऊपर पहुँच गया |

सीढ़ी से डाल पर जाना यासुकी –चान के लिए आसान न था |तोत्तो -चान डाल पर खड़ी होकर यासुकी –चान को खींचने लगी |कितना जोखिमपूर्ण काम था यह |कुछ देर बाद पेड़ की डाल पर दोनों आमने सामने थे पसीने से तर चेहरे से अपने बालों को हटते हुए तोतों-चान ने “सम्मानपूर्वक कहा “मेरे पेड़ पर तुम्हारा स्वागत है |”साल के सहारे खड़े यासुकी – चान ने मुस्कराकर झिझकते हुए पूछा ,”क्या मै अंदर आ सकता हूँ ?”

                        यासुकी-चान एक नई लुभावनी दुनिया मे : उस दिन यासुकी-चान ने एक नई दुनिया की झलक देखी |उसने खुश होकर कहा ,”तो ऐसा होता है  पेड़ पर चढ़ना |”दोनों बहुत देर तक गप्पें मारते रहे |यासुकी-चान ने उसे टेलीविज़न के बारे में  बताते हुए कहा की हम घर बैठकर सूमो- कुशती देख सकेंगे ,पर तोतों चान सोच रही थी की घर में रखें छोटे से बक्से में सूमो पहलवान केसे आ सकेगा | उसे यासुकी चान की बातें बड़ी लुभावनी लग रही थीं | तब टेलीविज़न के बारे में कोई न जानता था | वे दोनों बहुत खुश थे | यासुकी चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह पहला और अंतिम मौका का था |

                        अपूर्व :जैसे पहेले न हुआ हो ; सभागार: बैठक करने का बड़ा कक्ष ; शिविर : किसी निश्चित उद्देश्य के लिए एकत्र होना |

                       साहस करना : हिममर दिखाना ; शिष्टता: सभ्यता ; घसीटना : खींचना ; भेद :रहस्य ; ठिठियाकर :खिलखिलाकर; आँखों में झांकना : देखना ; नज़रे गड़ाए रखना : देर तक अत्यंत ध्यान से देखना ; सूझना : अचानक दिखना ; जूझना : संघर्ष करना ;  ताकना : देखना ; तरबतर : लथपथ ; उत्साह : उमंग ; थामना :पकड़ना |

                     प्रश्न)  यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ाने  के लिए तोत्तो चान ने अथक प्रयास क्यों किया ? लिखिए |

                     उत्तर )  यासुकी-चान एक पोलियो-ग्रस्त बालक था | उसके शहर तोमोए में हर एक बालक बालक के पेड़ को अपना मानता था | यासुकी-चान के लिए किसी पेड़ पर चढ़ना संभव न था | उसने एक वर्ष बड़ी तोत्तों- चान की हार्दिक इच्छा थी कि    यासुकि-चान उसके पेड़ पर चढ़े और इसके लिए अथक प्रयास किया |

                   प्रश्न ) दृढ़ निश्चय और अथक परिश्रम से सफलता पाने के बाद तोत्तों और यासुकि –चान को अपूर्व अनुभव मिला, इन दोनों के अपूर्व अनुभव कुछ अलग –अलग थे| दोनों में क्या अंतर रहे ? लिखिए |

                  प्रश्न ) पाठ में खोजकर देखिए- कब सूरज का ताप यासुकि-चान और तोत्तो चान पर पड़ रहा था , वे दोनों पसीने से तरबतर हो रहे थे और कब बादल का टुकड़ा उन्हें छाया देकर कड़कती धूप से बचाने लगा था | आपके अनुसार इस प्रकार परिस्थिति  के बदलने का कारण क्या हो सकता है ?

                  उत्तर ) यासुकी चान और तोत्तो चान अथक प्रयास करते हुए पेड़ पर सीढ़ी के सहारे चढ़ते-चढाते हुए इतने व्यस्त थे कि उन्हें समय या अपने सुख-दुख का जरा भी ध्यान नहीं था | यासुकी – चान के एक-एक कदम आगे बढ्ने पर उन्हें अद्भुत सुख प्राप्त होता था | सीढ़ी के ऊपरी हिस्से में पेड़ की  डाल पर पहुँच पाना उनके लिए अत्यंत कठिन था | किन्तु अपने असाधारण प्रयास से वे इसमें भी सफल हो गए | उनकी परिस्थितियाँ बदलने का यहीं कारण हो सकता है |

                 प्रश्न ) यासुकी चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह.........अंतिम मौका था |’ – इस अधूरे वाक्य को पूरा कीजिए और लिखकर बताइए कि लेखिका ने  ऐसा क्यों लिखा होगा ?

                उत्तर ) यासुकी –चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह  पहला और अंतिम मौका था |” लेखिका ने ऐसा इसलिए लिखा होगा क्योंकि पोलियो ग्रस्त यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ना संभव  न  रह जाएगा | उसका शरीर बड़ा होगा और वज़न भी बढ़ता जाएगा | यासुकी – चान के लिए जितना जोखिम लेकर तोत्तो-  चान ने उसे पेड़ पर चढाया था, अब वैसा जोखिम लेने को शायद कोई तैयार न हो |

Sunday, August 22, 2021

पाठ 9 चिड़िया की बच्ची कक्षा सातवीं

 

   पाठ 9          चिड़िया की बच्ची

                                                                         जैनेंद्र कुमार

 प्रस्तुत पाठ में एक चिड़िया को अपनी माँ से दूर सोने के महलों  में अनेक सुविधाओं के बीच रहने   का प्रलोभन दिया जाता हैं,पर चिड़िया इसे स्वीकार  नहीं  करती है| चिड़िया को आजादी और उसे भी  ज़्यादा अपनी माँ प्रिय है |

प्रकृति प्रेमी माधवदास –माधवदास ने अपनी संगमरमर की कोठी ,के सामने सुंदर सा बगीचा लगवाया था  उसमें फूल – पौधे और  फुव्वारे  थे | दिन ढलने पर कोठी के बाहर गलीचे पर बैठ कर प्रकृति  की  सुंदरता  देखते रहते थे | वे हुक्का की सटक मुँह में दबाए शाम बिता दिया करते थे |उनकी ज़िंदगी संपन्नता से भरपूर थी ,पर वे कुछ उदास से रहते थे |

बगीचे में एक सुंदर नई चिड़िया  - एक दिन शाम के समय गुलाब की डाल पर एक सुंदर सी चिड़िया आ बैठी ,जिसकी लाल गुलाबी होते – होते किनारों पर नीली थी | उसका सिर छोटा सा तथा  शरीर पर रंग – बिरंगी चित्रकारी थी | वह खुशी से फुदकती हुई मीठी आवाज़ निकाल रही थी |

चिड़िया और माधव दास का वार्तालाप –  माधव दास उस चिड़िया की सुंदरता देखकर अपना सब कुछ भूल गए |उन्होने चिड़िया  से कहा यह बगीचा तुम्हारे बिना सुना है |इसे अपना ही समझकर  निडर होकर आया करो |’’ इन बातों से असावधान चिड़िया अचानक घबराई  ओर बोली ,’’यह बगीचा आपका ही है ,|’’यह सुनकर माधव दास ने कहा ,”तुम मेरी इस संगरमर की कोठी को अपने समझ सकती हो |तुम मत जाओ | तुमसे मेरा मन खुश होता है|”भयभीत चिड़िया थिरकना भूल गई  और बोली मै यहाँ थककर रुक गई थी |

 

 

 

 

 अभी चली जाऊँगी | आप मुझे माफ करें | “ माधवदास ने  कहाँ, तुमे देखकर मेरा मन खुश हुआ है |मेरे सूने महल में कोई चहचहाता नहीं हैं |तुम कितनी सुंदर हो | तुम मेरे महल में रुक जाओ |”चिड़िया ने कहाँ “मैं सूरज की धूप खाने तथा फूलों से बात करने निकली थी |अब मैं अपनी माँ के पास जा रही हूँ |”

माधवदास द्वारा चिड़िया को प्रलोभन -  माधवदास ने चिड़िया को पागल न बनाने को कहा और उसे अपने बगीचे की  बहार और हँसता गुलाब दिखाया |महल के भीतर जाने पर बहुत कुछ देने का प्रलोभन दिया |अपने पास ढ़ेर सारा सोना –चाँदी होने की बात कहते हुए चिड़िया से सोने का घर बनाने का प्रलोभन दिया | उसने चिड़िया के लिए ऐसा समूचा पिंजरे में पानी पीने की कटोरी भी सोने की ही होगी | उसने अपने  अनेक बाग –बगीचे ,कोठियों की बात कही और बताया कि यहाँ तो तुम्हारे पास केवल एक ही फूल है | ऐसे अनगिनत फूल उसके बगीचे में है |महल में दास दासियों कि कमी नहीं हैं| उसने उसे सोने से मढ़ा देने की बात भी कही |

चिड़िया को प्रिय आजादी और उसकी माँ –चिड़िया पर माधवदास  के प्रलोभन का कुछ असर न हुआ |चिड़िया ने कहा की उसकी माँ के घोंसले के बाहर काफी धूप बिखरी रहती है माँ के दाने ला देने वह इधर उधर घूमने चली जाती है |उसके वापस न लौटने तक उसकी माँ राह देखती रहती है |वह माँ,भाई सूरज ,धूप घास पानी और फूलों को जानती है|उसकी माँ को जानती है |उसे सोने –चाँदी से मालमाल होकर क्या करना है? वह अपनी माँ को जानती है |

माधवदास का कपट-चिड़िया  पर प्रलोभन का असर न होता देख माधवदास ने उसे बातों में उलझाए रखा और एक बटन दबा दिया | एक आवाज़ हुई , जिसे सुनकर माधवदास का नौकर बाहर आ गया|  सेठ का इशारा पाकर वह चिड़िया को पकड़ने चल पड़ा | सेठ उसे अपनी बातों में नाना प्रकार के प्रलोभन देकर रोकने की कोशिश कर रहा था | उसका नौकर चिड़िया के पास पहुँच चुका था और उसके हाथ चिड़िया तक पहुँच चुके थे |

चिड़ियाँ माँ की गोद में – नौकर के हाथ का कठोर स्पर्श पाते ही चिड़ियाँ चीख पड़ी और तेज़ी से उड़ गई |वह नौकर के पंजे से बच गई थी | वह एक साँस में माँ की गोद में गिरकर सुबकने लगी |वह काँप –काँप कर माँ की छाती से चिपक गई|

कठिन शब्दार्थ

सुहावना : सुंदर लगने वाला ; व्यसन :बुरी  आदतें ; अभिरुचि : पसंद ; रकाबी : कम गहरी प्लेटें ;मसनद : एक बड़ा तकिया; तृप्ति: संतुष्टि ; घटा : आसमान में छाए बादल; आन : आकर ; स्याह : काला ; पर : पंख ; स्वच्छंदता : आज़ादी ;सूना: एकांत ;बेखटके :निडर्रतापूर्वक ;संकोच : असमंजस ; बोध हुआ :ज्ञात हुआ ;तृष्णा : चाह ; समूचा : सारा

वरदान: मुँह मांगी मुराद; नादान :अज्ञान ;जतन: उपाय ; छन भर में : जल्दी ही ; उजाला : प्रकाश ;चैन : आराम

मींचना : बंद करना ; ढाढस  बंधा : सांत्वना मिली |  

प्रश्न) किन बातों से ज्ञात होता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था और किन बातों से ज्ञात होता है कि वह सुखी नहीं था ?

उत्तर ) माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था क्योंकि –

i)                     माधवदास के पास खूब सारा सोना –चाँदी था |

ii)                    उसका संगमरमर का बना बड़ा-सा महल था, जिसके सामने सुंदर सा बगीचा था |

 

 

 

 

iii)                   महल में अनेक दास –दासियाँ थी |

iv)                 वह चिड़ियाँ के लिए सोने कि कटोरी व सोने का पिंजरा बनवा सकता था |

माधवदास सुखी नहीं था ,क्योंकि –

i)                     वह ख्याल ही ख्याल में संध्या को स्वप्न कि भांति गुजर देता था |

ii)                   चिड़िया के आने से उसका मन बहुत खुश हो गया था |

iii)                  उसका महल सूना था | वहाँ कोई चहचहाता नहीं था |

प्रश्न) माधवदास क्यों बार – बार चिड़ियाँ से कहता है कि यह बगीचा तुम्हारा ही है? क्या माधवदास नि:स्वार्थ मन से ऐसा कह रहा था? स्पष्ट कीजिए|

उत्तर ) चिड़ियाँ को प्रलोभन देकर वह रोकना चाहता था, इसलिए वह बार-बार यह कह रहा था कि यह बगीचा तुम्हारा ही है| नहीं,   माधवदास  नि:स्वार्थ भाव से ऐसा नहीं कह रहा था|  वह तो चिड़ियाँ को अपनी खुशी के लिए कैद करना चाहता था | चिड़ियाँ जब उसके प्रलोभन में नहीं आई तो उसने चिड़ियाँ को बातों में उलझाकर नौकर द्वारा पकड़वाना चाहा था|

प्रश्न) माधवदास के बार- बार समझाने पर भी चिड़िया सोने के पिंजरे और सुख –सुविधाओं को कोई महत्त्व नहीं दे रही थी | दूसरी तरफ माधवदास की नज़र में चिड़िया की जिद का कोई तुक न था| माधवदास और चिड़िया के मनोभावों के अंतर क्या-क्या थे? अपने शब्दों में लिखिए |

उत्तर ) माधवदास को अपने संगमरमर के महल, बाग-बगीचों ,दास-दासियों तथा अपने ढेर –सारे सोने-चाँदी पर घमंड था| उसकी दृष्टि में उसका महल, बाग-बगीचा ही सब कुछ है| वह अपने सोने –चाँदी के बल पर किसी को भी आकर्षित कर सकता है| वह सोचता है कि कोई भी उसके सोने के लालच में उसका गुलाम बन सकता है|

चिड़िया के मन में सोने-चाँदी ,महल एवं बाग के लिए कोई लोभ न था| वह तो अपनी माँ ,भाई,सूरज,धूप,घास,पानी और फूलों से प्यार करती है| माँ कि गोद में ही उसका सबसे बड़ा सुख है| उसे अपनी स्वतन्त्रता तथा अपनी माँ प्रिय है|

प्रश्न) कहानी के अंत में नन्ही चिड़िया का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पढ़कर तुम्हें कैसा लगा? चालीस-पचास या इससे कुछ अधिक शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया लिखिए |

उत्तर ) नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पढ़कर माधवदास के कपटी स्वभाव के बारे में पता चलता है| एक ओर तो चिड़िया को प्यारी-प्यारी बातों में उलझाए रखता है,पर मन में चिड़िया को पकड़ने की ललक रहती है| वह छल से चिड़िया द्वारा नौकर को पकड़वाना चाहता है| इससे से भी ओर अधिक बुरा तब लगता है कि मनुष्य स्वयं तो स्वतंत्र रहना चाहता है और अपनी खुशी के लिए वह पशु-पक्षियों को कैद करने से भी नहीं चूकता है| इसके लिए वह छल-बल, कपट हर प्रकार के साधन अपनाने को तैयार है|

प्रश्न) माँ मेरी बाट देखती होगी – नन्ही चिड़िया बार-बार इसी बात को कहती है| आप अपने अनुभव के आधार पर बताइए कि हमारी जिंदगी में माँ का क्या महत्व है?

उत्तर ) हमारी जिंदगी में माँ का अत्यंत महत्व है| माँ ही है जो अपनी जान से भी ज्यादा अपनी संतान को प्यार करती है | वह हर तरह के कष्ट सहकर भी अपनी संतान को हर तरह से सुखी रखने का प्रयास करती है| अपनी संतान की रक्षा के लिए अपनी जान की भी परवाह नहीं करती है| माँ ही सर्दी,गर्मी बरसात जैसे हर मौसम में हमसे  पहले जागकर उसके लिए भोजन बनाती है| हमें जरा सी चोट लगने  की बात सुनकर माँ की जान निकल जाती है| माँ ही बच्चे को मनुष्य बनने का पहला पाठ सिखाती है|

 

 

प्रश्न) इस कहानी का और कोई शीर्षक देना हो तो आप क्या देना चाहेंगे और क्यों?

उत्तर ) इस कहानी का अन्य शीर्षक - सबको प्यारी माँ क्योंकि दुनिया में माँ के जैसा नि:स्वार्थ प्यार किसी का नहीं होता है| इसके अलावा जो सुख माँ की गोद में मिल जाता है वह अन्यत्र मिलना मुश्किल है |

भाषा की बात

पाठ में पर शब्द के तीन प्रकार के प्रयोग हुए हैं-

क)    गुलाब की डाली पर एक चिड़िया आन बैठी |

ख)    कभी पर हिलाती थी|

ग)      पर बच्ची काँप-काँपकर माँ की छाती से और चिपक गई |

तीनों  पर के प्रयोग उद्देश्यों के लिए पर के प्रयोग हुए हों|

  उत्तर ) विभिन्न उद्देश्यों  में पर के प्रयोग –

          पर- मेज पर पुस्तक राखी है|

         पर- उसने बहुत कोशिश की पर अपने उद्येश्यों में सफल न हो सका|

         पर-सर्दी से बचने पर पक्षी ने अपने पर फुला लिए |

         पर- पर हित की बात किए बिना मानव सुखी नहीं हो सकता है |

पाठ 8 शाम एक किसान - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

पाठ 8      शाम एक किसान

                            - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

 

आकाश  का साफा बाँधकर

सूरज की चिलम खींचता

बैठा है पहाड़ ,

घुटनों पर पड़ी है नदी चादर –सी,

पास ही दहक रही है

पलाश के जंगल की अँगीठी

अँधकार  दूर पूर्व में

सिमटा बैठा है भेड़ों के गल्ले –सा|

शब्दार्थ आकाश : आसमान ; साफा: पगड़ी ; चिलम : मिट्टी की एक छोटी सुराखयुक्त रचना जिसकी मदद से ग्रामीण लोग धूम्रपान करते  हैं; दहकना : गरम लाल लपटों के साथ जलना ; पलाश : टेसू ; पूर्व : पूरब ; सिमटना : इकट्ठा होना |

प्रसंग- बसंत भाग-2 पाठ्यपुस्तक में संकलित शाम एक किसान नामक इस कविता के रचयिता श्री सर्वेश्वरदयाल सक्सेना हैं| इन काव्य पंक्तियों में जाड़े की शाम का बड़ा ही अद्भुत वर्णन किया गया है|

सरलार्थ : कवि जाड़े की शाम के प्राकृतिक दृश्य का बड़ा ही सुंदर चित्रण करते हुए कहता है कि शाम के इस दृश्य में पहाड़ ऐसा दिख रहा है जैसे बैठा हुआ कोई किसान हो और उसके सिर पर साफा बाँधा हुआ हो| अर्थात पहाड़ के सिर आकाश साफे के समान बंधा दिखाई दे रहा है| पहाड़ के नीचे बहती नदी उस पहाड़ के घुटनों पर रखी चादर  के समान लग रही है| पलाश के पेड़ों पर खिले लाल-लाल फूल जलती हुई अँगीठी जैसे लग रहे है| पूरब दिशा में क्षितिज पर अँधकार बढ़ता जा रहा है| वह इस प्रकार लग रहा है जैसे भेड़ों का झुंड हो| पश्चिम दिशा में अस्त होता सूरज ,चिलम पर रखी आग जैसा लग रहा है| चारों ओर वातवरण में शांति छाई हुई है|

विशेष – शाम के प्राकृतिक दृश्य का बड़ा ही सुंदर वर्णन किया है|

       पहाड़ का मानवीकरण किया  गया है |

अचानक –बोला मोर |

जैसे किसी ने आवाज़ दी-

सुनते हो’|

चिलम औंधी

धुआँ उठा-

सूरज डूबा

अँधेरा छा गया|

शब्दार्थ –अचानक : एकाएक ; आवाज़ देना: बुलाना ; औंधी : उलट गई

प्रसंग – पूर्ववत्

कवि कहता है कि झाडे कि शाम में प्रकृति में चारों ओर शांति व्याप्त है | तभी मोर बोल उठता है,मानो किसी ने आवाज़ लगाई हो – सुन रहे हो | इसके बाद प्राकृतिक दृश्य में तेज़ी से बदलाव आता है| यह दृश्य घटना में बदलने लगता है|- चिलम एक ओर उल्टी हो जाती है| चिलम उलटते ही जलती आग बुझने  लगती है , धुआँ भी उठने लगता है| अब डूबने को तैयार सूरज डूब चुका है| शाम ढाल गई है और रात का अँधेरा गहराता जा रहा है|

विशेष – प्राकृतिक दृश्यों का घटनाओं में बदलने का स्वाभाविक वर्णन है|

 

प्रश्न अभ्यास

प्रश्न) इस कविता में शाम के दृश्य को किसान के रूप में दिखाया गया है- यह एक रूपक है| इसे बनाने के लिए पाँच एकरूपताओं की जोड़ी बनाई गई है| उन्हें उपमा कहते हैं| पहली एकरूपता आकाश और साफे में दिखाते हुए कविता में आकाश का साफा वाक्यांश आया है| इसी तरह तीसरी एकरूपता नदी और चादर में दिखाई गई है, मानो नदी चादर-सी हो | अब आप दूसरी, चौथी और पाँचवीं एकरूपताओं को खोजकर लिखिए |

उत्तर ) i) आकाश का साफा ii) पलाश के जंगल की अंगीठी iii) नदी चादर सी iv) सूरज की चिलम v) भेड़ों के गल्ले सा अंधकार

प्रश्न) शाम का दृश्य अपने घर की छत या खिड़की से देखकर बताइए –

क)   शाम कब से शुरू हुई?

ख)   तब से लेकर सूरज डूबने में कितना समय लगा ?

ग)    इस बीच आसमान में क्या- क्या परिवर्तन हुए?

उत्तर ) अपने घर की छत या खिड़की से शाम का दृश्य देखने पर पता चलता है कि-

क)   जाड़े में दिन छोटे वायुमंडल में कोहरा तथा सूर्य का प्रकाश ऊष्माहीन होने के कारण शाम जल्दी अर्थात चार, सवा चार बजे हो गई |

ख)   तब से लेकर सूरज डूबने में एक या सवा घंटा समय लगा|

ग)    इस आसमान में निम्नलिखित परिवर्तन हुए-

i)        आसमान में सूर्य का प्रकाश कमजोर पड़ता गया अर्थात धुंधलापन बढ़ता गया|

ii)       आसमान में उड़ते पक्षी अपने घोंसलों कि ओर लौटने लगे |

iii)      पूरब की दिशा में प्रकाश समाप्त हो गया और क्षितिज से अंधेरे का आगमन होने लगा |

 

प्रश्न)  इस कविता को चित्रित करने के लिए किन-किन रंगों का प्रयोग किया है?

उत्तर ) इस कविता को चित्रित करने के लिए नीला, पीला, लाल, भूरा, काला, हरा,कत्थई रंगों का प्रयोग करना होगा|

प्रश्न)   शाम के समय ये क्या करते हैं।पता लगाइए और लिखिए –

उत्तर ) पक्षी पक्षी कलरव करते हुए उड़कर अपने-अपने घोंसलें या कोटर की ओर जाते है|

      पेड़-पौधे- उन पर खिले फूल मुरझा जाते हैं| उन पर पड़ी ओस के कारण ऐसा लगता है कि वे दिन भर कि थकान उतारने के लिए अभी-अभी नहाए हैं|

    खिलाड़ी- खिलाड़ी अपने खेल का अभ्यास करते हैं|

    फल वाले- फलवाले ऊँची आवाज़ में बोलकर फल बेचने की कोशिश करते है|

    माँ – किसान अपने बैलों के साथ वापस आते हैं, और बैलों और गायों को चारा-पानी देते हैं|

    बच्चे-  खेलते – कूदते हैं| शोर करते हैं| टेलीविज़न देखते हैं|

भाषा की बात

   प्रश्न) नीचे लिखी पंक्तियों में रेखांकित शब्दों को ध्यान से देखिए|

क)   घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी

ख)   सिमट बैठा है भेड़ों के गल्ले-सा

ग)    पानी का परदा –सा मेरे आसपास हिल रहा

घ)    मँडराता रहता था एक मरियल-सा कुत्ता आसपास

ङ)     दिल है छोटा- सा छोटी - सी आशा

च)    घास पर फुदकती नन्ही सी चिड़िया

इन पंक्तियों में सा/सी का प्रयोग व्याकरण की दृष्टि से कैसे शब्दों के साथ हो रहा है ?

उत्तर ) सा / सी का प्रयोग व्याकरण की दृष्टि से दो प्रकार के शब्दों के साथ हो रहा है –

i)        संज्ञा शब्दों के साथ जैसे – चादर-सी ,गल्ले-सा तथा पर्दा सा |

ii)       विशेषण शब्दों के साथ –मरियल –सा , छोटा-सा तथा नन्ही सी |

 

iii)      हाँ ,सा/सी का प्रयोग तुलना करने या समानता बताने के लिए किया जा रहा है| जैसे – चादर-सी, गल्ले-सा, पर्दा-सा, मरियल-सा|

अलग अर्थ में सा/सी का प्रयोग मात्रा या आकार बताने के लिए किया जा रहा है| जैसे –छोटा सा ,नन्हीं –सी|

प्रश्न) निम्नलिखित शब्दों का प्रयोग आप किन संदर्भों में करेंगे?

प्रत्येक शब्द के लिए दो-दो संदर्भ (वाक्य) रचिए |

आँधी          दहक                 सिमटा

उत्तर ) आँधी- i) धूल भरी तेज़ गति से चलने वाली हवा के संदर्भ में |

      वाक्य – आँधी से बचने के लिए किसान हवा की ओट में छिप गया |

            Ii) हलचल मचाने के संदर्भ में|

      वाक्य- ज्वार-भाटा आने से पहले समुद्र में तेज़ गति से आँधी उठने लगी|

    दहक -  i) अग्नि,लपट,ज्वाला के संदर्भ में|

    वाक्य- हवा का झोंका पाते ही आग दाहक उठी |

         Ii) जलन,दाह के संदर्भ में|

     वाक्य- अपने माँ की मौत का बदला पाने के लिए उसका मन अभी भी दहक रहा है|

  सिमटा -   i) संकुचित होने के संदर्भ में|

   वाक्य – सर्दी के कारण गरीब सड़क पर सिमर कर बैठा है|

 Ii) समाप्त होने के संदर्भ में |

  वाक्य- राधा के घर विवाह का सारा कार्य सिमट गया |

 


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