पाठ 9 चिड़िया की बच्ची
जैनेंद्र कुमार
प्रस्तुत पाठ में एक चिड़िया को अपनी माँ से दूर
सोने के महलों में अनेक सुविधाओं के बीच
रहने का प्रलोभन दिया जाता हैं,पर चिड़िया इसे स्वीकार नहीं
करती है| चिड़िया को आजादी और उसे भी ज़्यादा अपनी माँ प्रिय है |
प्रकृति प्रेमी माधवदास –माधवदास ने अपनी संगमरमर की कोठी ,के सामने सुंदर सा बगीचा लगवाया था उसमें फूल – पौधे और फुव्वारे थे | दिन ढलने पर कोठी के बाहर
गलीचे पर बैठ कर प्रकृति की सुंदरता
देखते रहते थे | वे हुक्का की सटक मुँह में दबाए शाम
बिता दिया करते थे |उनकी ज़िंदगी संपन्नता से भरपूर थी ,पर वे कुछ उदास से रहते थे |
बगीचे में एक सुंदर नई चिड़िया - एक दिन शाम
के समय गुलाब की डाल पर एक सुंदर सी चिड़िया आ बैठी ,जिसकी लाल गुलाबी होते – होते किनारों पर नीली थी |
उसका सिर छोटा सा तथा शरीर पर रंग –
बिरंगी चित्रकारी थी | वह खुशी से फुदकती हुई मीठी आवाज़
निकाल रही थी |
चिड़िया और माधव दास का वार्तालाप – माधव दास उस चिड़िया
की सुंदरता देखकर अपना सब कुछ भूल गए |उन्होने
चिड़िया से कहा “यह
बगीचा तुम्हारे बिना सुना है |इसे अपना ही समझकर निडर होकर आया करो |’’ इन
बातों से असावधान चिड़िया अचानक घबराई ओर
बोली ,’’यह बगीचा आपका ही है ,|’’यह
सुनकर माधव दास ने कहा ,”तुम मेरी इस संगरमर की कोठी को अपने
समझ सकती हो |तुम मत जाओ | तुमसे मेरा
मन खुश होता है|”भयभीत चिड़िया थिरकना भूल गई और बोली “मै यहाँ थककर रुक
गई थी |
अभी चली जाऊँगी | आप मुझे माफ करें | “ माधवदास ने कहाँ, तुमे देखकर मेरा मन
खुश हुआ है |मेरे सूने महल में कोई चहचहाता नहीं हैं |तुम कितनी सुंदर हो | तुम मेरे महल में रुक जाओ |”चिड़िया ने कहाँ “मैं सूरज की धूप खाने तथा फूलों से बात करने निकली थी |अब मैं अपनी माँ के पास जा रही हूँ |”
माधवदास द्वारा चिड़िया को प्रलोभन - माधवदास ने चिड़िया
को पागल न बनाने को कहा और उसे अपने बगीचे की बहार और हँसता गुलाब दिखाया |महल के भीतर जाने पर बहुत कुछ देने का प्रलोभन दिया |अपने पास ढ़ेर सारा सोना –चाँदी होने की बात कहते हुए चिड़िया से सोने का घर
बनाने का प्रलोभन दिया | उसने चिड़िया के लिए ऐसा समूचा
पिंजरे में पानी पीने की कटोरी भी सोने की ही होगी | उसने
अपने अनेक बाग –बगीचे ,कोठियों की बात कही और बताया कि यहाँ तो तुम्हारे पास केवल एक ही फूल है | ऐसे अनगिनत फूल उसके बगीचे में है |महल में दास
दासियों कि कमी नहीं हैं| उसने उसे सोने से मढ़ा देने की बात
भी कही |
चिड़िया को प्रिय आजादी और उसकी माँ –चिड़िया पर माधवदास के प्रलोभन का कुछ असर न हुआ |चिड़िया ने कहा की उसकी माँ के घोंसले के बाहर काफी धूप बिखरी
रहती है माँ के दाने ला देने वह इधर उधर घूमने चली जाती है |उसके
वापस न लौटने तक उसकी माँ राह देखती रहती है |वह माँ,भाई सूरज ,धूप घास पानी और फूलों को जानती है|उसकी माँ को जानती है |उसे सोने –चाँदी से मालमाल होकर
क्या करना है? वह अपनी माँ को जानती है |
माधवदास का कपट-चिड़िया पर प्रलोभन का असर न होता देख माधवदास ने उसे
बातों में उलझाए रखा और एक बटन दबा दिया | एक
आवाज़ हुई , जिसे सुनकर माधवदास का नौकर बाहर आ गया| सेठ का इशारा पाकर वह चिड़िया को
पकड़ने चल पड़ा | सेठ उसे अपनी बातों में नाना प्रकार के
प्रलोभन देकर रोकने की कोशिश कर रहा था | उसका नौकर चिड़िया
के पास पहुँच चुका था और उसके हाथ चिड़िया तक पहुँच चुके थे |
चिड़ियाँ माँ की गोद में – नौकर के हाथ का कठोर स्पर्श पाते ही चिड़ियाँ चीख पड़ी और तेज़ी से उड़ गई |वह नौकर के पंजे से बच गई थी | वह एक
साँस में माँ की गोद में गिरकर सुबकने लगी |वह काँप –काँप कर
माँ की छाती से चिपक गई|
कठिन शब्दार्थ
सुहावना : सुंदर लगने वाला ; व्यसन
:बुरी
आदतें ; अभिरुचि : पसंद ; रकाबी : कम गहरी प्लेटें ;मसनद :
एक बड़ा तकिया; तृप्ति: संतुष्टि ; घटा : आसमान में छाए बादल; आन : आकर ; स्याह : काला ; पर
: पंख ; स्वच्छंदता : आज़ादी ;सूना: एकांत ;बेखटके :निडर्रतापूर्वक ;संकोच : असमंजस ; बोध
हुआ :ज्ञात हुआ ;तृष्णा
: चाह ; समूचा : सारा
वरदान: मुँह मांगी मुराद; नादान :अज्ञान ;जतन: उपाय ; छन भर में : जल्दी ही ; उजाला : प्रकाश ;चैन : आराम
मींचना : बंद करना ; ढाढस बंधा :
सांत्वना मिली |
प्रश्न) किन बातों से ज्ञात होता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था और
किन बातों से ज्ञात होता है कि वह सुखी नहीं था ?
उत्तर ) माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था क्योंकि –
i)
माधवदास के पास खूब
सारा सोना –चाँदी था |
ii)
उसका संगमरमर का बना बड़ा-सा महल था, जिसके सामने सुंदर सा बगीचा था |
iii)
महल में अनेक दास –दासियाँ थी |
iv)
वह चिड़ियाँ के लिए
सोने कि कटोरी व सोने का पिंजरा बनवा सकता था |
माधवदास सुखी नहीं
था ,क्योंकि –
i)
वह ख्याल ही ख्याल
में संध्या को स्वप्न कि भांति गुजर देता था |
ii)
चिड़िया के आने से
उसका मन बहुत खुश हो गया था |
iii)
उसका महल सूना था | वहाँ कोई चहचहाता नहीं था |
प्रश्न) माधवदास क्यों बार – बार चिड़ियाँ से कहता है कि यह बगीचा तुम्हारा ही
है? क्या माधवदास नि:स्वार्थ मन से ऐसा कह रहा
था? स्पष्ट कीजिए|
उत्तर ) चिड़ियाँ को प्रलोभन देकर वह रोकना चाहता था, इसलिए वह बार-बार यह कह रहा था कि यह बगीचा तुम्हारा ही है| नहीं, माधवदास नि:स्वार्थ भाव से ऐसा नहीं कह रहा था| वह तो चिड़ियाँ को अपनी खुशी के लिए कैद करना चाहता था | चिड़ियाँ जब उसके प्रलोभन में नहीं आई तो उसने चिड़ियाँ को बातों में उलझाकर नौकर द्वारा पकड़वाना चाहा था|
प्रश्न) माधवदास के बार- बार समझाने पर भी चिड़िया सोने के पिंजरे और सुख –सुविधाओं
को कोई महत्त्व नहीं दे रही थी | दूसरी तरफ माधवदास
की नज़र में चिड़िया की जिद का कोई तुक न था| माधवदास और
चिड़िया के मनोभावों के अंतर क्या-क्या थे? अपने शब्दों में
लिखिए |
उत्तर ) माधवदास को अपने संगमरमर के महल,
बाग-बगीचों ,दास-दासियों तथा अपने ढेर –सारे सोने-चाँदी पर
घमंड था| उसकी दृष्टि में उसका महल, बाग-बगीचा
ही सब कुछ है| वह अपने सोने –चाँदी के बल पर किसी को भी
आकर्षित कर सकता है| वह सोचता है कि कोई भी उसके सोने के
लालच में उसका गुलाम बन सकता है|
चिड़िया के मन में सोने-चाँदी ,महल
एवं बाग के लिए कोई लोभ न था| वह तो अपनी माँ ,भाई,सूरज,धूप,घास,पानी और फूलों से प्यार करती है| माँ कि गोद में ही उसका सबसे बड़ा सुख है| उसे अपनी
स्वतन्त्रता तथा अपनी माँ प्रिय है|
प्रश्न) कहानी के अंत में नन्ही चिड़िया का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलने
की बात पढ़कर तुम्हें कैसा लगा? चालीस-पचास या
इससे कुछ अधिक शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया लिखिए |
उत्तर ) नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पढ़कर माधवदास के कपटी स्वभाव के
बारे में पता चलता है| एक ओर तो चिड़िया को प्यारी-प्यारी बातों में उलझाए रखता है,पर मन में चिड़िया को
पकड़ने की ललक रहती है| वह छल से चिड़िया द्वारा नौकर को
पकड़वाना चाहता है| इससे से भी ओर अधिक बुरा तब लगता है कि
मनुष्य स्वयं तो स्वतंत्र रहना चाहता है और अपनी खुशी के लिए वह पशु-पक्षियों को
कैद करने से भी नहीं चूकता है| इसके लिए वह छल-बल, कपट हर प्रकार के साधन अपनाने को तैयार है|
प्रश्न) ‘माँ मेरी बाट देखती होगी’ – नन्ही चिड़िया बार-बार इसी बात को कहती है| आप
अपने अनुभव के आधार पर बताइए कि हमारी जिंदगी में माँ का क्या महत्व है?
उत्तर ) हमारी जिंदगी में माँ का अत्यंत महत्व है| माँ ही है जो अपनी जान से भी ज्यादा अपनी संतान को प्यार करती
है | वह हर तरह के कष्ट सहकर भी अपनी संतान को हर तरह से
सुखी रखने का प्रयास करती है| अपनी संतान की रक्षा के लिए
अपनी जान की भी परवाह नहीं करती है| माँ ही सर्दी,गर्मी बरसात जैसे हर मौसम में हमसे
पहले जागकर उसके लिए भोजन बनाती है| हमें जरा सी चोट
लगने की बात सुनकर माँ की जान निकल जाती
है| माँ ही बच्चे को मनुष्य बनने का पहला पाठ सिखाती है|
प्रश्न) इस कहानी का और कोई शीर्षक देना हो तो आप क्या देना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर ) इस कहानी का अन्य शीर्षक - ‘सबको
प्यारी माँ ‘ क्योंकि दुनिया में माँ के जैसा नि:स्वार्थ प्यार
किसी का नहीं होता है| इसके अलावा जो सुख माँ की गोद में मिल
जाता है वह अन्यत्र मिलना मुश्किल है |
भाषा की बात
पाठ में पर शब्द के तीन प्रकार के प्रयोग हुए हैं-
क) गुलाब की डाली पर एक चिड़िया आन बैठी |
ख) कभी पर हिलाती थी|
ग) पर बच्ची काँप-काँपकर माँ की छाती से और चिपक गई |
तीनों ‘पर’ के प्रयोग उद्देश्यों के लिए पर के
प्रयोग हुए हों|
उत्तर ) विभिन्न उद्देश्यों में पर के प्रयोग –
पर- मेज पर पुस्तक राखी है|
पर- उसने बहुत कोशिश की पर अपने
उद्येश्यों में सफल न हो सका|
पर-सर्दी से बचने पर पक्षी ने
अपने पर फुला लिए |
पर- पर हित की बात किए बिना मानव
सुखी नहीं हो सकता है |
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