Tuesday, August 24, 2021

अपूर्व अनुभव

 



पाठ 10 अपूर्व अनुभव


  -तेत्सुको कुरियानगी

पाठ का सार

इस संस्मरण में तोत्तो –चान और यासुकी-चान नामक दो हम उम्र बच्चों का वर्णन है जिनके कार्यों में संघर्ष कि झलक मिलती है|

यासुकी –चान को न्योता मिला : सभागार में दो दिन शिविर लगने के बाद  तोत्तो –चान के लिए एक बड़ा साहस करने का दिन आया |उसने पोलियोग्रस्त बालक यासूकी –चान को अपने पेड़ पर चढ़ने का न्योता दिया और इस बात का पाने –अपने माता – पिता को पता न लगाने दिया |

प्रत्येक बालक द्वारा पेड़ अपनाने की परंपरा : तोमोए मे प्रत्येक बच्चे बाग के एक –एक पेड़ को अपना मानता है|तोत्तो –चान पेड़ बड़ा –सा था ,जिसमें जमीन से छ: फुट की ऊँचाई पर मोटी शाखा निकली थी ,जिस पर बैठकर झूले लिए जा सकते  था |इसी पर बैठकर तोत्तो –चान आकाश को या सड़क पर चलते लोगों को देखा करती थी किसी बच्चे को जब किसी दूसरे पेड़ पर चढ़ना होता था तो वह अन्य बच्चो से शिष्टतापूर्वक पूछता था ,”क्या मै अंदर आ जाऊँ ? पोलियोग्रस्त यासुकी –चान किसी पेड़ पर न चढ़ पाने के कारण किसी पेड़ को अपना नहीं मानता था |

तोत्तो–चान का झूठ : घर से निकलते हुए तोत्तो –चान ने अपनी माँ से झूठ बोला कि वह यासुकी –चान के घर जा रही है|झूठ बोलने के कारण वह माँ से भी नजरे न मिला सकी |यासुकी –चान उससे केवल एक ही साल बड़ा था ,पर तोत्तो –चान को बहुत बड़ा लगता यहा |तोतों –चान के खुलकर हँसते ही वह भी हँस पड़ा |

तोत्तो-चान यासुकी –चान का जोखिमपूर्ण काम : तोत्तो- चान यासुकी –चान को अपने पेड़ की ओर ले गई और खुद चोकीदार के छप्पर की ओर सीढ़ी लेने भागी |ऐसा लगता यहा कि उसने रात में ऐसा करने की सोच रखा था |उसने सीढ़ी घसीटकर पेड़ से लगा दी ,जो पेड़ कि द्विशाखा तक पहुँच गई उसने सीढ़ी पकड़कर यासुकी चान दे उस पर चढ़ने के लिए कहा |कमजोर हाथ पैर वाला यासुकी चन बिना सहारे के पहली बार सीडी भी न चढ़ पाया |तोत्तो-चान नीचे उतरकर यासुकी –चान को पीछे से धकियाने लगी |कमजोर तोत्तो-चान इससे ज्यादा करती भी क्या ? हताश यासुकी-चान सीढ़ी से अलग खड़ा हो गया |

यासुकी-चान को पेड़ पर चढ़ना तोत्तो -चान कि हार्दिक इच्छा थी |वह भागकर चौकीदार के छप्पर की ओर गई ,जहाँ उसे एक तिपाई मिल गई |यह तिपाई भी द्विशाखा तक पहुँच गई |तोतों-चान ने बड़ी बहन के सामने कहा की यह डगमगाएगी भी नहीं |उसने तरबतर तोत्तो-चान को देखा और संकल्प के साथ पाँव उठकर पहली सीढ़ी पर रखा |इसके बाद दोनों पेड़ पर चढ़ने में इस प्रकार लीन हो गए कि उन्हें समय का ध्यान ही न रहा |आखिर पूरी शक्ति से जूझते हुए यासुकी-चान ऊपर पहुँच गया |

सीढ़ी से डाल पर जाना यासुकी –चान के लिए आसान न था |तोत्तो -चान डाल पर खड़ी होकर यासुकी –चान को खींचने लगी |कितना जोखिमपूर्ण काम था यह |कुछ देर बाद पेड़ की डाल पर दोनों आमने सामने थे पसीने से तर चेहरे से अपने बालों को हटते हुए तोतों-चान ने “सम्मानपूर्वक कहा “मेरे पेड़ पर तुम्हारा स्वागत है |”साल के सहारे खड़े यासुकी – चान ने मुस्कराकर झिझकते हुए पूछा ,”क्या मै अंदर आ सकता हूँ ?”

                        यासुकी-चान एक नई लुभावनी दुनिया मे : उस दिन यासुकी-चान ने एक नई दुनिया की झलक देखी |उसने खुश होकर कहा ,”तो ऐसा होता है  पेड़ पर चढ़ना |”दोनों बहुत देर तक गप्पें मारते रहे |यासुकी-चान ने उसे टेलीविज़न के बारे में  बताते हुए कहा की हम घर बैठकर सूमो- कुशती देख सकेंगे ,पर तोतों चान सोच रही थी की घर में रखें छोटे से बक्से में सूमो पहलवान केसे आ सकेगा | उसे यासुकी चान की बातें बड़ी लुभावनी लग रही थीं | तब टेलीविज़न के बारे में कोई न जानता था | वे दोनों बहुत खुश थे | यासुकी चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह पहला और अंतिम मौका का था |

                        अपूर्व :जैसे पहेले न हुआ हो ; सभागार: बैठक करने का बड़ा कक्ष ; शिविर : किसी निश्चित उद्देश्य के लिए एकत्र होना |

                       साहस करना : हिममर दिखाना ; शिष्टता: सभ्यता ; घसीटना : खींचना ; भेद :रहस्य ; ठिठियाकर :खिलखिलाकर; आँखों में झांकना : देखना ; नज़रे गड़ाए रखना : देर तक अत्यंत ध्यान से देखना ; सूझना : अचानक दिखना ; जूझना : संघर्ष करना ;  ताकना : देखना ; तरबतर : लथपथ ; उत्साह : उमंग ; थामना :पकड़ना |

                     प्रश्न)  यासुकी-चान को अपने पेड़ पर चढ़ाने  के लिए तोत्तो चान ने अथक प्रयास क्यों किया ? लिखिए |

                     उत्तर )  यासुकी-चान एक पोलियो-ग्रस्त बालक था | उसके शहर तोमोए में हर एक बालक बालक के पेड़ को अपना मानता था | यासुकी-चान के लिए किसी पेड़ पर चढ़ना संभव न था | उसने एक वर्ष बड़ी तोत्तों- चान की हार्दिक इच्छा थी कि    यासुकि-चान उसके पेड़ पर चढ़े और इसके लिए अथक प्रयास किया |

                   प्रश्न ) दृढ़ निश्चय और अथक परिश्रम से सफलता पाने के बाद तोत्तों और यासुकि –चान को अपूर्व अनुभव मिला, इन दोनों के अपूर्व अनुभव कुछ अलग –अलग थे| दोनों में क्या अंतर रहे ? लिखिए |

                  प्रश्न ) पाठ में खोजकर देखिए- कब सूरज का ताप यासुकि-चान और तोत्तो चान पर पड़ रहा था , वे दोनों पसीने से तरबतर हो रहे थे और कब बादल का टुकड़ा उन्हें छाया देकर कड़कती धूप से बचाने लगा था | आपके अनुसार इस प्रकार परिस्थिति  के बदलने का कारण क्या हो सकता है ?

                  उत्तर ) यासुकी चान और तोत्तो चान अथक प्रयास करते हुए पेड़ पर सीढ़ी के सहारे चढ़ते-चढाते हुए इतने व्यस्त थे कि उन्हें समय या अपने सुख-दुख का जरा भी ध्यान नहीं था | यासुकी – चान के एक-एक कदम आगे बढ्ने पर उन्हें अद्भुत सुख प्राप्त होता था | सीढ़ी के ऊपरी हिस्से में पेड़ की  डाल पर पहुँच पाना उनके लिए अत्यंत कठिन था | किन्तु अपने असाधारण प्रयास से वे इसमें भी सफल हो गए | उनकी परिस्थितियाँ बदलने का यहीं कारण हो सकता है |

                 प्रश्न ) यासुकी चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह.........अंतिम मौका था |’ – इस अधूरे वाक्य को पूरा कीजिए और लिखकर बताइए कि लेखिका ने  ऐसा क्यों लिखा होगा ?

                उत्तर ) यासुकी –चान के लिए पेड़ पर चढ़ने का यह  पहला और अंतिम मौका था |” लेखिका ने ऐसा इसलिए लिखा होगा क्योंकि पोलियो ग्रस्त यासुकी-चान के लिए पेड़ पर चढ़ना संभव  न  रह जाएगा | उसका शरीर बड़ा होगा और वज़न भी बढ़ता जाएगा | यासुकी – चान के लिए जितना जोखिम लेकर तोत्तो-  चान ने उसे पेड़ पर चढाया था, अब वैसा जोखिम लेने को शायद कोई तैयार न हो |

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