Monday, April 18, 2022

राम लक्ष्मण परशुराम संवाद तुलसी दास कक्षा 10वीं क्षितिज भाग 2

 

राम लक्ष्मण परशुराम संवाद

तुलसी दास 

कक्षा 10वीं क्षितिज भाग 2

प्रश्न 1 )  परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए ?

उत्तर) लक्ष्मण ने तर्क देते हुए कहा कि हमने बचपन में ऐसे अनेक धनुष तोड़े हैं | इसी धनुष को तोड़ने पर आपको क्रोध क्यों आया | इस धनुष पर आपकी इतनी ममता क्यों है ? हमारी दृष्टि में तो सभी धनुष समान हैं फिर इस धनुष के टूटने पर आपने इतना क्रोध क्यों व्यक्त किया ? यह धनुष तो अत्यधिक पुराना था जोकि श्री राम के छू जाने पर ही टूट गया |  इसमें श्री राम का कोई  दोष नहीं है |

प्रश्न 2 ) परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए |

उत्तर ) श्री राम स्वभाव से अत्यंत शांत एवं गंभीर हैं | धनुष के टूट जाने पर उन्होंने कहा कि धनुष को तोड़ने वाले कोई आप का ही दास  होगा | इतना ही नहीं, श्री राम ने मधुर वाणी में लक्ष्मण को चुप रहने को भी कहा और परशुराम जी का क्रोध शांत किया | दूसरी ओर लक्ष्मण उग्र स्वभाव के थे | उन्होंने कटु वचनो के द्वारों परशुराम जी का क्रोध ओर बड़ा दिया |परशुराम जी की धमकियों और डींगे हाँकने पर करारा व्यंग्य किया | लक्ष्मण ने कटु वचन बोलकर अपने उग्र रूप का और श्री राम ने मधुर वाणी बोलकर उदार व शांत स्वभाव का परिचय दिया |

प्रश्न 3 ) लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको अच्छा लगे उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखो ?

उत्तर ) लक्ष्मण ने मुस्कराते हुए कहा, मुनियों में श्रेष्ठ परशुराम जी ! क्या आप अपने आपको बहुत बहादुर समझते हों ? आप बार- बार कुल्हाड़ा दिखाकर मुझे डरा देना चाहते हों | आप अपनी फूँक से पहाड़ को उड़ा देना चाहते हों | परशुराम गुस्से में भरकर कहते हैं , हे मूर्ख बालक, मैं तुम्हें बच्चा समझकर छोड़ रहा हूँ अन्यथा अब तक का .......|

प्रश्न 4 ) परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पदयांश के आधार पर लिखिए|

बाल ब्रह्मचारी अति कोही | बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही  ||

भुजबल भूमी भूप बिनु कीन्ही | बिपुल बार महीदेवन्ह दिन्ही ||

सहसबाहुभुज छेदनिहारा | परसु बिलोकु महीपकुमारा ||

मातु पितही जनि सोचबस करसि महिसकिसोर

गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर ||

उत्तर ) परशुराम ने अपने विषय में कहा, “ मैं बाल ब्रह्मचारी हूँ | स्वभाव से बहुर क्रोधी हूँ | सारा संसार जानता है कि मैं क्षत्रियों के कुल का शत्रु हूँ | अपनी भुजाओं के बल के द्वारा मैंने पृथ्वी को कई बार राजा विहीन कर दिया और उसे ब्राह्मणों को दान में दे दिया |मेरा यह फरसा बहुत भयानक है | इसने सहस्रभाहु जैसे राजाओं को भी नष्ट कर दिया | हे राजकुमार ! इस फरसे को देखकर गर्भवती स्त्रियों के गर्भ गिर जाते हैं |

प्रश्न 5 ) लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताई ?

उत्तर ) लक्ष्मण ने वीर योद्धा की विशेषताएँ बताते हुए कहा कि वीर योद्धा रणभूमि में  ही वीरता दिखाता है, अपना गुणगाण नहीं करता फिरता है | कायर ही अपनी शक्ति की डींगे हाँकते हैं |

प्रश्न 6 ) साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है |  इस कथन पर अपने विचार लिखिए |

उत्तर ) विनम्रता हमेशा वीर लोगों को ही शोभा देती हैं | कमजोर और कायर व्यक्ति का विनम्र होना उसका गुण नहीं हैं अपितु मजबूरी है | शक्ति को प्राप्त करके भी जो लोग अहंकारी न बनकर धैर्यवान बने रहते हैं और दूसरों को मार्ग से विचलित नहीं होने देते हैं संसार में ऐसे लोग ही आदर पाते है | विनम्र व्यक्ति दूसरों के दुख को अनुभव कर सकता है और उनकी सहायता के लिए आगे आता है | भगवान विष्णु को जब भृगुऋषि ने लात मारी थी तब शक्ति के बावजूद उदारता का परिचय देते हुए उन्हें क्षमा कर दिया था |

प्रश्न 7 ) भाव स्पष्ट कीजिए |

क)   बिहसि लखनु बोले मृदु बानी | अहो मुनिस महाभट मानी ||

पुनि –पुनि मोहि देखाव कुठारू| चहत उड़ावन फूँकि पहारू||

ख)   इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं | जे तरजनी देखि मरि जाहीं||

देखि कुठारू सरासन बाना | मैं कछु कहा सहित अभिमाना ||

   ग ) गाधिसुनू कह हृदय हसि मुनिही हरियरे सूझ |

   अयमय खांड न उखमय अजहूं न बुझ अबूझ ||

उत्तर  क) इस पद में लेखक ने बताया है कि लक्ष्मण परशुराम के  वचनों को सुनकर व्यंग्य कर रहा है जिससे परशुराम का क्रोध  बढ़ रहा है | लक्ष्मण ने परशुराम को बड़ा योद्धा कहकर और फूँक मारकर पहाड़ उड़ा देने की बात कहकर उन पर तीखा व्यंग्य किया है |लक्ष्मण जी का कहना है कि गरज गरजकर अपनी वीरता का बखान करना व्यर्थ है | इससे कोई व्यक्ति वीर नहीं बन जाता | वीरता का बखान न करने की बजाए उन्हें कुछ करके दिखाना चाहिए |

उत्तर ख ) इस पद में लक्ष्मण ने परशुराम की वेश –भूषा पर व्यंग्य किया है | वे ब्राह्मण होते हुए भी ब्राह्मण के वेश में नहीं थे | लक्ष्मण ने  ऐसा इसलिए कहा कि हे मुनि जी यदि आप योद्धा है तो हम भी कोई छुई- मुई नहीं है जो तर्जनी देखते ही मुरझा जाएँगे | कहने का भाव है कि लक्ष्मण भी योद्धा है | धनुष बान और कंधे पर कुल्हाड़ा देखकर ही आपको योद्धा समझकर मैंने अभिमान भरी बातें कह दीं | यदि मुझे पता होता कि आप मुनि – ज्ञानी हैं तो में ऐसा कदापि न करता |

उत्तर ग ) इन पंक्तियों में विश्वामित्र ने परशुराम की अभिमानपूर्वक प्रकट की जाने वाली बातों को सुनकर उन  पर व्यंग्य करते हुए ये शब्द कहे है कि मुनि जी को सब  जगह हरा ही हरा लग रहा है | वे सदा साधारण मनुष्यों से युद्ध करके विजय प्राप्त करते रहे है | इसलिए उन्हें लगता था कि वे श्री राम और लक्ष्मण को भी अन्य क्षत्रियों कि भांति आसानी से हरा देंगे किन्तु ये साधारण क्षत्रिय नहीं हैं | ये गन्ने की खांड के समान नहीं थे, अपितु लोहे की  बनी तलवार के समान थे | इस समय परशुराम की स्थिति सावन के अंधे की भांति हों गई है | मुनि बेसमझ बनकर इनके प्रभाव को नहीं  समझ पा रहे है |

प्रश्न 8 )पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौन्दर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए |

उत्तर ) तुलसीदास रस सिद्ध कवि है | तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस अवधि भाषा में है | यह काव्यांश रामचरितमानस के बालकांड से ली गई  है | इसमें दोहा, चौपाई व छंदों का सुंदर प्रयोग हुआ है | जिसके कारण काव्य के सौन्दर्य और आनंद में वृद्धि हुई है | भाषा में लयबद्धता बनी हुई है | भाषा को कोमल बनाने के लिए कठोर भाषा के स्थान पर कोमल ध्वनियों का प्रयोग हुआ है | इनकी भाषा में अनुप्रास अलंकार, रूपक अलंकार, उत्प्रेक्षा अलंकार व पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार का प्रयोग हुआ है | इस काव्यांश की भाषा व्यंग्यात्मक का सुंदर संयोजन हुआ है |

प्रश्न 9 ) इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा संयोजन हुआ है | उदारहण के साथ स्पष्ट कीजिए|

उत्तर ) तुलसीदास द्वारा रचित परशुराम-संवाद मूल रूप से व्यंग्य काव्य है | उदारहण के लिए –

1)  बहु धनुही तोरी लरिकाई |

कबहूँ न असि रिस किन्ही गोसाईं||

     लक्ष्मण जी परशुराम जी से धनुष के टूटने पर व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि हमने बालपन में ऐसे अनेक धनुष तोड़े हैं तब हम पर किसी ने क्रोध नहीं किया |

2 )मातु पितहि जनि सोचबस करसी महिसकिसोर |

    गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर ||

उत्तर ) लक्ष्मण से कहते है कि हे राजा के बालक ! तू अपने माता -पिता को सोचने  के लिए विवश मत कर | मेरा फरसा बड़ा भयानक है , यह गर्भ के बच्चों का भी नाश कर देता है |

3 )  एक स्थान पर लक्ष्मण जी परशुराम की वेषभूषा पर व्यंग्य करते हुए कहते है कि आपने तो धनुष-बाण व्यर्थ ही धारण कर रखे है क्योंकि आपका तो एक-एक शब्द करोड़ों वज्रों के समान है | लक्ष्मण  जी व्यंग्य करते हुए कहते है कि आपके यश का वर्णन आपके रहते कौन कर सकता है ?शूरवीर तो युद्ध क्षेत्र में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते है तथा  कायर ही  अपनी शक्ति का बखान  करते है |

प्रश्न 10 ) निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए |

क)   बालकु बोलि बधौं नहि तोहि |

उत्तर ) इस पंक्ति में ब वर्ण की आवर्ति के कारण अनुप्रास अलंकार है |

ख)   कोटी कुलिस सम बचनु तुम्हारा |

उत्तर ) इस पंक्ति में परशुराम के वचनों की तुलना कठोर वज्र से की गई है | अत: इसमें उपमा अलंकार है |

ग ) तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा |

    बार-बार मोहि लागि बोलावा ||

उत्तर ) इस पंक्ति में उत्प्रेक्षा एवं पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है |

  घ ) लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु |

      बढ़त देखि जल समवचन बोले रघुकुलभानु ||

  उत्तर ) “लखन उतर ...... कृसानु” में रूपक अलंकार है तथा बढ़त देखि ..... रघुकुलभानु में उपमा अलंकार है |

अन्य प्रश्न

प्रश्न ) इस कवितांश के आधार पर लक्ष्मण द्वारा परशुराम के प्रति किए गए व्यवहार पर प्रकाश डालिए |

उत्तर ) लक्ष्मण उग्र और तेज़ स्वभाव के व्यक्ति है | वे भरी सभा में परशुराम द्वारा की गई चुनौती व धमकी से दुखी हो जाते है इसी कारण परशुराम का उत्तर उसी लहजे में देते है | वे परशुराम के आत्मप्रशंसा पर करारा व्यंग्य करते है जिससे परशुराम का क्रोध बढ़ जाता है | लेकिन जब स्थिति अतिक्रमण कर जाती है तो सभा में उपस्थित लोग लक्ष्मण के व्यवहार को अनुचित ठहराते है | परशुराम उनके पिता के समान थे | इसलिए परशुराम के लिए नृपद्रोही जैसे  शब्दों का  प्रयोग करना उचित नहीं था |

प्रश्न ) परशुराम ने लक्ष्मण  को वध करने योग्य क्यों कहा था ?

उत्तर ) लक्ष्मण ने  परशुराम जी का मज़ाक उड़ाया था |  लक्ष्मण क्षत्रिय राजकुमार होने के कारण भी वध योग्य थे | क्योंकि परशुराम क्षत्रियों के द्रोही थे |  परशुराम अत्यंत क्रोधी स्वभाव के थे | लक्ष्मण को उन्होंने मंद बुद्धि बालक कहा जिसे अपने माता-पिता की चिंता का भी भय नहीं हैं |

प्रश्न) कहेऊ लखन मुनि सीलु तुम्हारा को नहीं जान विदित संसारा इस पंक्ति में  निहित व्यंग्य पर प्रकाश डालिए |

उत्तर ) इस पंक्ति में परशुराम के शील व स्वभाव पर व्यंग्य किया गया है | इसमें  व्यंग्य किया गया है कि परशुराम अपने क्रोधी स्वभाव के  लिए सारे संसार पर में  प्रसिद्ध हैं जिसे लक्ष्मण ने सहज और स्वाभाविक बताकर व्यंग्य किया है | इस पंक्ति का वास्तविक अर्थ है कि परशुराम महान क्रोधी स्वभाव वाले व्यक्ति है | इस बात को सारा संसार जानता है |

प्रश्न) श्री राम के द्वारा परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए क्या कार्य किया गया ?

उत्तर ) श्री राम अच्छी तरह जानते थे कि परशुराम क्रोधी होने के साथ अहंकारी भी थे | इसलिए क्रोधी परशुराम के सामने अत्यंत विनम्र स्वर में कहा कि शिव धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई दास ही होगा | यदि आप आज्ञा देना चाहते हो तो उन्हें आदेश करें | श्री राम जी ने अत्यंत मीठी वाणी का प्रयोग कर उनके क्रोध को  शांत करने का प्रयास किया |

Friday, April 15, 2022

पद (सूरदास) कक्षा क्षितिज भाग 2 (काव्य खंड )10वीं

                      पाठ 1 पद (सूरदास)
कक्षा 10वीं  

प्रश्न 1) गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है ?

उत्तर ) गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में वक्रोक्ति का प्रयोग हुआ है | ऐसा कहकर वास्तव में उसके दुर्भाग्य पर व्यंग्य  किया है | जो व्यक्ति प्रेम के सागर श्री कृष्ण के समीप रहकर भी उनके प्रेम से सर्वथा अनभिज्ञ रहे | वे यह सोच कर हैरान है  कि श्री कृष्ण के प्रति कैसे उनके हृदय में अनुराग उत्पन्न नहीं  हुआ ? वे प्रेम से सर्वथा अपरिचित रहे| ऐसा व्यक्ति भाग्यवान न होकर , भाग्यहीन ही है |

प्रश्न 2) उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?

उत्तर ) उद्धव के व्यवहार की तुलना कमल के पत्ते व तेल की मटकी  से की गई है | जिस प्रकार कमल का पत्ता पानी में रहते हुए  भी उस पर पानी के दाग नहीं पड़ते और तेल की मटकी भी चिकनी होती है | उस पर भी पानी की बूँदे नहीं ठहर सकती| ठीक इसी प्रकर उद्धव पर भी श्री कृष्ण के प्रेम का प्रभाव नहीं पड़ता| 

प्रश्न 3) गोपियों ने किन- किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए है ?

उत्तर ) गोपियों ने कमल के पत्ते और तेल की मटकी और प्रेम की नदी आदि उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए है| उन्होंने कहा कि आप ने तो प्रेम रूपी नदी में कभी पैर ही नहीं डुबोया | श्री कृष्ण के समीप रहकर भी उनके प्रेम से सर्वथा अनभिज्ञ रहे |

प्रश्न 4) उद्धव द्वारा दिये गए योग संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम किया कैसे है ?

उत्तर ) गोपियाँ श्री कृष्ण के आने की आने की आशा में दिन गिन रही थी | वे अपने तन-मन की व्यथा को चुपचाप सहते हुए कृष्ण के प्रेम रस में डूबी हुई थी| वे इसी इंतज़ार में बैठी हुई थी कि श्री कृष्ण उनके विरह को समझेंगे और उनके मन को अपने दर्शन से तृप्त करेंगे | लेकिन उनकी आशा के विपरीत श्री कृष्ण ने गोपियों को  प्रेम संदेश कि बजाए योग-संदेश दिया | जिसने उनके हृदय में जल रही विरहाग्नि में घी का काम किया |

प्रश्न 5) “मरजादा न लाही” के माध्यम से कौन –सी मर्यादा न रहने कि बात की जा रही है ?

उत्तर ) प्रेम की मर्यादा यहीं है कि प्रेमी व प्रेमिका दोनों प्रेम के नियमों का पालन करें | प्रेम के प्रतिदान में प्रेम देवें| किन्तु श्री कृष्ण ने प्रेम के बदले योग संदेश भेज दिया  जो कि एक प्रकार का छल था | श्री कृष्ण की इसी छलपूर्वक चाल को उन्होंने मर्यादा का उल्लंघन कहा है |

प्रश्न 6) कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है?

उत्तर ) कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम को गोपियों ने चींटियों और हारिल पक्षी की लकड़ी के माध्यम से अभिव्यक्त किया है उन्होंने स्वयं की तुलना चींटियों से और गुड की तुलना श्री कृष्ण से की है |जिस प्रकार गुड पर चींटियाँ चिपकी रहती है उसी प्रकार वे श्री कृष्ण के प्रेम में लिप्त रहती है | हारिल एक ऐसा पक्षी है जो सदैव अपने पंजे में लकड़ी पकड़े रहता है | वह उसे किसी भी दशा में नहीं छोड़ता है |उसी प्रकार गोपियाँ मन से, वचन से व कर्म से श्री कृष्ण के प्रेम में लिप्त रहती है |

प्रश्न 7) गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने के लिए कही है ?

उत्तर )  गोपियों के अनुसार उनका मन श्री कृष्ण के प्रेम में लगा हुआ है | वे एकनिष्ट भाव से श्री कृष्ण से प्रेम करती है| इसलिए उनके मन में किसी प्रकार की उलझन या दुविधा नहीं है |गोपियों ने योग की शिक्षा ऐसे लोगों को देने के लिए कहीं है जिनके मन स्थिर नहीं है अर्थात चंचल है|  उनका मन तो श्री कृष्ण के प्रेम में लगा हुआ है |

प्रश्न 8)प्रस्तुत पदों के आधार पर गोपियों का योग-साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें ?

उत्तर ) गोपियों के लिए योग-संदेश बिल्कुल निरर्थक है | उनके लिए तो यह कड़वी ककड़ी की भांति अरुचिकर है |यह उनके कानों के लिए भी कष्टप्रद है | इतना ही नहीं वे योग-साधना को अनीतिपूर्ण,शास्त्र-विरुद्ध बताकर इसका विरोध करती है | वह इस साधना की शिक्षा तो ऐसे लोगों को देने के लिए कहती है जिनके मन स्थिर नहीं है|

प्रश्न 11) गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए ?

उत्तर )प्रजा की रक्षा व कल्याण करना होना चाहिए| उसे अपनी प्रजा को किसी प्रकार से कष्ट नहीं देना चाहिए | उसे प्रजा के सुख चैन का ध्यान रखना चाहिए |

प्रश्न 10)  गोपियों को श्री कृष्ण में ऐसे कौन से परिवर्तन दिखे जिससे वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती है ?

उत्तर ) गोपियों को लगता है कि श्री कृष्ण मथुरा जाकर राजनीति के विद्वान हो गए है | उनके अनुसार श्री कृष्ण पहले से ही चतुर थे  और अब उन्होंने भारी-भरकम ग्रंथ पढ़ लिए है |जिससे वो ओर अधिक चतुर हो गए है | छल-कपट उनके स्वभाव अंग बन गए है |उन्होंने गोपियों से मिलने कि बजाए योग-संदेश देकर उद्धव को भेज दिया है |श्री कृष्ण के इस कदम से गोपियों को अत्यंत दुख हुआ| इन्हीं परिवर्तनों को देखकर गोपियाँ अपना मन वापस लेना चाहती है |

प्रश्न 11) गोपियों ने अपने वाक्चातुर्य के आधार पर ज्ञानी उद्धव को परास्त कर दिया, उनके वाक्चातुर्य की विशेषताएँ बताएं ?

उत्तर ) गोपियों ने उद्धव को अपने तानों के द्वारा परास्त कर दिया | उन्होंने सर्वप्रथम उद्धव को भाग्यशाली कहा जो श्री कृष्ण के समीप रहते हुए भी प्रेम उनके मन को छू न सका | जिस प्रकार कमल का पत्ता पानी में रहता है लेकिन पानी का उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता , उसी प्रकार तेल की मटकी पर भी पानी की बूंदे नहीं ठहरती है | गोपियों के अनुसार योग साधना ऐसे मनुष्यों के लिए है जिनके मन चंचल है| वह स्वयं को हारिल पक्षी व श्री कृष्ण को हारिल पक्षी द्वारा पकड़ी लकड़ी बताते है | इस प्रकार अपने वाक्चातुर्य से उद्धव को परास्त करने में सफल होती है |

प्रश्न 12 ) संकलित पदों को ध्यान में रखते हुए सुर के भ्रमरगीत की विशेषताएँ बताइए |

उत्तर ) सुर के भ्रमरगीत में व्यंग्य कटाक्ष, उलाहना, निराशा, विरह की पीड़ा, प्रार्थना, आस्था, विनती आदि अनेक भावों को एक साथ व्यक्त करने का सफल प्रयास किया है | ब्रजभाषा का सफल प्रयोग किया है |सम्पूर्ण भ्रमरगीत में अनेक अलंकारों का प्रयोग कर भाषा को अलंकृत किया है | गोपियाँ उद्धव को अपने वाक्चातुर्य द्वारा पराजित करती दिखाई देती है | कवि ने सगुण की निर्गुण पर विजय दिखाई है |

अन्य प्रश्न

प्रश्न 1) “ते क्यौं अनीति करै आपुन, जेई और अनीति छुड़ाए –काव्य पंक्ति का आश्य स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) इस पंक्ति के माध्यम से कवि ने गोपियों के प्रति श्री कृष्ण के द्वारा अपनाई गई अनीति की ओर संकेत किया है | गोपियों के लिए तो श्री कृष्ण की प्रेम-भक्ति ही श्रेष्ठ मार्ग है | फिर वे उनके लिए योग-संदेश भेजकर क्यों उनके मार्ग में बाधा बन रहे है | यह तो गोपियों के प्रति अन्याय है | यदि अन्याय से छुड़ाने वाला ही अन्याय करे तो भला इसमें कोई क्या कर सकता है ?

प्रश्न 2) हरि हैं राजनीति पढि आए“ में श्रीकृष्ण की किस प्रवृति पर व्यंग्य किया गया है ?

उत्तर ) हरि हैं राजनीति पढि  आए“ पंक्ति में गोपियों ने श्रीकृष्ण की उस प्रवृति पर व्यंग्य किया है जिसके कारण वे प्रेम की मर्यादा को ठीक तरह से नहीं निभाते | कहने का भाव यह है कि गोपियाँ श्रीकृष्ण से सच्चे मन से प्रेम करती हैं और उनके विरह की पीड़ा में व्याकुल हैं | ऐसे में श्रीकृष्ण को चाहिए था की वे स्वयं आकर गोपियों से मिलें और उनके विरह की व्याकुलता को शांत करें | किन्तु वे निर्गुण ईश्वर के उपासक उद्धव की परीक्षा लेने हेतु उसे योग का संदेश देकर गोपियों के पास भेज देते हैं | इसलिए गोपियाँ श्रीकृष्ण की इस नीति को देखते हुए उन्हें कहती हैं कि श्रीकृष्ण ने अब राजनीति भी पढ़ ली है | अब वे राजनीतिज्ञों की भाँति व्यवहार करते हैं |

प्रश्न 3) गोपियों ने उद्धव को बड़भागी क्यों कहा है ? सूरदास किसके माध्यम से किन लोगों पर व्यंग्य करना चाहते हैं ?

उत्तर) गोपियों ने उद्धव पर व्यंग्य करते हुए उसे बड़भागी कहा है | गोपियाँ श्रीकृष्ण से प्रेम करती हैं जब से श्रीकृष्ण मथुरा में गए हैं गोपियाँ उनके विरह में पीड़ित रहती हैं | जबकि उद्धव मथुरा में श्रीकृष्ण का मित्र बनकर उनके पास रहता है किन्तु प्रेम के सागर श्रीकृष्ण के प्रेम से वंचित रहता है | इसलिए गोपियों ने व्यंग्य में उद्धव को बड़भागी कहती है जिसका अर्थ दुर्भाग्यशाली है |

      गोपियों के द्वारा उद्धव को बड़भागी बताते हुए सूरदास जी ने उन लोगों पर व्यंग्य किया है जिन लोगों ने भगवान से कभी प्रेम नहीं किया | भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम से वंचित रहने वाले लोगों को बड़भागी कहते है और उनका जीवन व्यर्थ मानते हैं | भगवान के प्रेम में चाहे कितने ही कष्ट हो, लेकिन जीवन की सार्थकता उनके प्रेम से ही है |

 

नेताजी का चश्मा स्वयं प्रकाश क्षितिज भाग 2 कक्षा 10वीं हिन्दी

 

 नेताजी का चश्मा

स्वयं प्रकाश

क्षितिज भाग 2

प्रश्न 1 ) सेनानी न होते हुए भी चश्मेवाले को लोग कैप्टन क्यों कहते थे ?

उत्तर ) निश्चय ही चश्मे वाला कभी सेनानी नहीं रहा| वह गरीब एवं अपाहिज था, लेकिन उसके मन में देशभक्ति की असीम भावना थी| वह सुभाष की बिना चश्मे की मूर्ति देखकर दुखी हो गया| इसलिए उसने सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति पर अपने पास से चश्मा लगा दिया था| लोग उस पर व्यंग्य कसते हुए उसे सुभाषचंद्र बोस का साथी होने का तथा उनकी सेना का कैप्टन होने का सम्मान दिया करते थे | किन्तु वास्तविकता यह थी कि वह इस सम्मान के योग्य भी था|

प्रश्न 2 ) हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा-

क)   हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे?

ख)   मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?

ग)    हालदार  साहब इतनी सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?

उत्तर- क )क्योंकि वे चौराहे पर लगी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति बिना चश्मे के देख नहीं सकते थे | जब से कैप्टन की मृत्यु हुई थी, तब से किसी ने भी नेताजी की मूर्ति पर चश्मा नहीं लगाया था| इसीलिए जब हालदार साहब कस्बे से गुजरने लगे तो उन्होंने ड्राइवर से गाड़ी रोकने के लिए मना कर दिया था|

उत्तर- ख ) हालदार साहब जब चौराहे से गुज़रे तो नेताजी की मूर्ति देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ क्योंकि  मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा लगा हुआ था| सरकंडे का चश्मा देखकर हालदार साहब के मन में यह आशा जागृत हुई कि आज के बच्चे ही कल  देश के निर्माण में सहायक होंगे, वे देश का भविष्य बनेगे और अब उन्हें कभी भी चौराहे पर नेताजी की बिना चश्मे की मूर्ति नहीं देखनी पड़ेगी|

उत्तर- ग ) कैप्टन की मृत्यु के बाद उन्हें ऐसा लगा था कि अब नेताजी की आँखों पर चश्मा लगाने वाला कोई नहीं बचा | किन्तु जब उन्होंने नेताजी की मूर्ति की आँखों पर सरकंडे का बना हुआ चश्मा देखा तो भावुक हो उठे कि देश में अभी भी देशभक्ति जीवित है, मरी नहीं | सुभाषचंद्र बोस जैसे नेताओं का आदर करने वाले लोग देश में अभी भी है|

प्रश्न 3) आशय स्पष्ट कीजिए |

“ बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो देश की खातिर घर-गृहस्थी जवानी जिंदगी सब कुछ होम देनेवालों पर भी हँसती है और अपने लिए बिकने के मौके ढूँढती है |”

उत्तर ) उपर्युक्त पंक्तियों के माध्यम से लेखक ने देश के भविष्य के प्रति चिंता को व्यक्त किया है| लेखक ने स्पष्ट किया है कि जिस  देश के लोग अपने महान देशभक्तों के त्याग का आदर करने की अपेक्षा उसकी हंसी उड़ाते हों तथा अपना स्वार्थ पूरा करने के लिए अवसर की ताक में रहते हों, उस देश का क्या होगा| ऐसे देश की स्वतन्त्रता ही खतरे में पड़ जाएगी |

प्रश्न 4) पानवाले का रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए|

उत्तर ) पानवाला सदा पान चबाता रहता था | वह स्वयं भी चलती-फिरती दुकान सा प्रतीत होता था क्योंकि उसके मुँह में सदा ही पान ठूँसा रहता था| यदि कोई उससे बात करता तो बोलने से पहले उसे दो बार तो थूकना पड़ता था| उसकी बढ़ी हुई तोंद घड़े के समान लगती थी| जब वह हँसता तो उसकी तोंद बराबर हिलती रहती थी| वह रसिक स्वभाव वाला व्यक्ति था| वह दूसरों का अकसर मज़ाक उड़ाता था| वह सदा अपने स्वार्थ  पर निगाह रखता था|  वह बातों का धनी था|

प्रश्न 5) “ वो लँगड़ा क्या जाएगा फौज़ में| पागल है पागल ! कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए|

उत्तर )  कैप्टन के प्रति पानवाले की यह टिप्पणी उसकी संकीर्ण मानसिकता को व्यक्त करती है| इससे पता चलता है कि उसके मन में देशभक्तों व उनका आदर करने वालों के प्रति जरा भी सम्मान की भावना नहीं है | उसे कैप्टन पर व्यंग्य करने की अपेक्षा उसके प्रति आदर भाव व्यक्त करना चाहिए था| जो व्यक्ति नेता जी जैसे देशभक्तों की  प्रतिमा में कमी नहीं देख सकता ऐसे व्यक्ति की शारीरिक कमियों की तरफ ध्यान न देकर उसकी भावनाओं की कद्र करनी चाहिए |

प्रश्न 6 )  निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन –सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं-

क)   हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते |

ख)   पानवाला उदास हो गया| उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखों को पोंछता हुआ बोला- साहब ! कैप्टन मर गया |

ग)    कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था|

उत्तर- क) यह वाक्य देशभक्ति की भावना को व्यक्त करता है| हालदार साहब जब चौराहे से गुजरते है तो वहाँ कुछ क्षणों के लिए रुककर सुभाषचंद्र बोस की मूर्ति की ओर आदर भाव से देखते थे | उनके मन में नेताजी के प्रति आदर भाव था | वे बार-बार मूर्ति को  चश्मा पहनाने के बारे में पूछते थे | इस बात से पता चलता है कि हालदार साहब एक देशभक्त थे |

ख) इस वाक्य से पता चलता है कि पान वाला एक संवेदनशील व्यक्ति था | कभी- कभार जरूर कैप्टन पर व्यंग्य भरी टिप्पणी करता हो किन्तु उसकी मृत्यु का उसे बेहद दुख था | उसे कप्तान की मृत्यु के बाद ही उसके जीवन के महत्व का पता चला था | उसे ऐसा अनुभव हुआ कि वह महान देश-प्रेमी था | इसलिए अब उसके जीवन पर कोई व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी नहीं करता था |

ग) कैप्टन को नेताजी की बिना चश्मे वाली प्रतिमा बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगती थी| इसलिए वह उसे बार-बार चश्मा पहनाता था| इससे उसकी देशभक्ति की भावना उजागर होती है |

प्रश्न 7) जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए |

उत्तर ) उनके मन में सी कैप्टन की छवि एक प्रभावशाली व्यक्तित्व वाले इंसान की है | उनके मन में गठीले बदन के पुरुष की छवि अंकित थी, जिसकी बड़ी-बड़ी मुंछें थीं | उसकी चाल में फौजियों जैसी मजबूती और ठहराव था| चेहरा पर एक तेज़ और पूरा व्यक्तित्व ऐसा था जिसे देखकर दूसरा व्यक्ति प्रभावित हुए बिना नहीं रहता था| इस तरह हालदार साहब के दिल और दिमाग पर एक फौजी की तस्वीर अंकित थी|

प्रश्न 8)   कस्बों शहरों और महानगरों के चौरहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन- सा हो गया है-

क)   इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं ?

ख)   आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों ?

ग)    उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिएँ?

उत्तर ) क) इस  तरह की मूर्ति लगाने से लोगों के मन में देशभक्ति की भावना पैदा होती है| उनके त्याग व समर्पण को लोग याद रखते है उनके जीवन से देश- भक्ति की प्रेरणा मिलती है तथा साथ ही आने वाली पीढ़ियों को भी महान देशभक्तों का परिचय मिलता है |

      ख) हम इलाके के चौराहे पर उस देशभक्त की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे जिन्होंने अपना जीवन देश के प्रति अर्पित कर दिया है|

      ग ) देशभक्तों की मूर्ति के प्रति हमारा पावन कर्तव्य है कि हम उसके रख-रखाव का पूरा ध्यान रखें | उसके आस-पास सफाई रखें | उसकी सुरक्षा करें तथा उसके प्रति सम्मान का भाव भी रखें |

अन्य प्रश्न

प्रश्न 1 ) नेताजी का चश्मा नामक पाठ में लेखक ने क्या संदेश दिया है ?

उत्तर ) “नेताजी का चश्मा” श्री स्वयं प्रकाश जी कि प्रमुख कहानी है |इसमें उन्होंने देश-भक्ति कि भावना पर प्रकाश डाला है | उनका मानना है कि देश-भक्ति व्यक्त करने के लिए फौजी होना अनिवार्य नहीं है | इसी प्रकार यह भी जरूरी नहीं है कि देश-भक्त शारीरिक व आर्थिक दृष्टि से मजबूत हो | कैप्टन विकलांग व गरीब व्यक्ति है वह नेता जी की अधूरी मूर्ति देखकर बेचैन हो जाता है और गरीब होते हुए भी उसका चश्मा लगा देता है | इस प्रकार प्रस्तुत कहानी हमें यहीं संदेश देती है कि हमें  अपने देशभक्तों के प्रति सम्मान की भावना रखनी चाहिए |

प्रश्न 2) नेता जी के मूर्ति के चश्मे बदलने का क्या कारण था ?

उत्तर ) वास्तव में नेता जी कि मूर्ति पर चश्मा नहीं बनाया गया था |  वह नेता जी की अधूरी मूर्ति देखकर बेचैन हो जाता है और गरीब होते हुए भी उसको चश्मा लगा देता है |किन्तु यदि किसी ग्राहक को यदि वह चश्मा पसंद आ जाता तो चश्मा लगाने वाला कैप्टन उस चश्मे को ग्राहक को दे देता था और मूर्ति पर दूसरा चश्मा लगा देता था | इस प्रकार नेता जी की मूर्ति पर चश्मे बदले जाते थे |

 

 

 

 

Wednesday, January 5, 2022

भीष्म शर-शैय्या पर

 पाठ 31 भीष्म शर-शैय्या पर

प्रश्न ) भीष्म शिखंडी के बाणों का प्रत्युत्तर  क्यों नहीं दे रहे थे ?

उत्तर ) शिखंडी वास्तव में पूर्ण पुरुष नहीं था | वह अंबा नाम की  स्त्री ही थी,जिसे स्वयंवर से विचित्रवीर्य के लिए जबरदस्ती उठाकर लाया था | पर वह शाल्व नरेश से विवाह करना चाहती थी | उसने ये बात भीष्म को बताई | तब भीष्म ने उसे शाल्व नरेश के पास जाने की आज्ञा दे दी | शाल्व नरेश ने  विवाह करने से इंकार कर दिया | इस प्रकार दोनों तरफ से निराश हुई अंबा ने स्त्री रूप छोड़कर अपना नाम शिखंडी रख लिया | शिखंडी के स्त्री होने की बात भीष्म जानते थे| अतः वह उसके बाणों का प्रत्युत्तर नहीं दे रहे थे |

प्रश्न) भीष्म ने ऐसा क्यों कहा कि अभी उनके मरने का समय नहीं हुआ है ?

उत्तर ) भीष्म ने अपने पिता के आजीवन ब्रह्मचारी रहकर विवाह न करने का संकल्प लिया और आजीवन ब्रह्मचारी बने रहे | उनके इस त्याग पर उनके पिता ने उनको इच्छित मृत्यु का वरदान दिया था | इस कारण भीष्म की मृत्यु तभी होती जब वे चाहते |

प्रश्न ) युधिष्ठिर को जीवित पकड़ने की बात सुनकर द्रोण ने संतोष क्यों मान लिया ?

उत्तर ) द्रोण ने जब युधिष्ठिर को जीवित पकड़ने के लिए दुर्योधन का उद्देश्य सुना तो उनका मन घृणा से भर गया , पर उनके मन संतोष इसलिए हुआ कि अब मौका मिलने पर युधिष्ठिर को जान से नहीं मारना है |

सातवाँ ,आठवाँ और नवाँ दिन

 

पाठ 30 सातवाँ ,आठवाँ और नवाँ दिन

प्रश्न ) सातवें दिन का युद्ध अन्य दिनों से किस तरह भिन्न था ?

उत्तर ) सातवें दिन का युद्ध किसी एक स्थान पर केन्द्रित नहीं था | युद्ध-क्षेत्र में अनेक वीरों के साथ विपक्षी सेना के वीर युद्ध कर रहे थे | अर्जुन के विरुद्ध भीष्म, द्रोणाचार्य से विराटराज, शिखंडी से अश्वत्थामा आदि वीर इसी प्रकार युद्ध कर रहे थे |

प्रश्न ) इरावान के मारे जाने का घटोत्कच पर क्या असर हुआ ?

उत्तर ) अर्जुन पुत्र इरावन के युद्ध में मारे जाने पर भीम-घटोत्कच ने तेज़ गर्जना की और कौरव सेना पर टूट पड़ा | उसकी गर्जना सुनकर युधिष्ठिर ने उसकी मदद के लिए भीमसेन को भेज दिया | इस प्रकार दोनों ने भीषण युद्ध कर कौरव सेना को क्षति पहुंचाई |

प्रश्न ) नवें दिन अभिमन्यु किसके साथ युद्ध कर रहा था ? उसका क्या परिणाम हुआ ?

उत्तर ) नवें दिन अर्जुन पुत्र अभिमन्यु और अलम्वुश में घोर संग्राम छिदा हुआ था | दोनों ही वीर युद्धकला में पारंगत थे | अभिमन्यु ने अपने पिता की भाँति अत्यंत कुशलता से युद्ध करते हुए विपक्षी को परेशान कर दिया |

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...