Thursday, May 12, 2022

यह दंतुरित मुस्कान नागार्जुन (कक्षा दसवीं)

 

 यह दंतुरित मुस्कान

          नागार्जुन

प्रश्न 1) बच्चे की दंतुरित मुस्कान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

उत्तर ) कवि का मन खुशी से खिल उठता है | उसके निराश मन में नई आशा की किरण जाग जाती है | उसे ऐसा लगता है कि मानों उसकी झोंपड़ी में कमल के फूल खिल उठे हों | उसके मन में प्रेम की धारा बहने लगी हो | फिर से बबूल व बांस के वृक्ष से मानों शेफालिका के फूल झड़ने लगे हों | कहने का भाव है कि कवि का मन बच्चे कि दंतुरित मुस्कान से अत्यधिक प्रभावित हुआ है |

प्रश्न 2) बच्चे कि मुस्कान और एक दंतुरित व्यक्ति की मुस्कान में क्या अंतर है ?

उत्तर ) बच्चे की मुस्कान स्वाभाविक होती है | उसके मन में किसी प्रकार का छल-कपट नहीं होता, किन्तु बड़े व्यक्ति की मुस्कान में छल-कपट व दिखावा होता है | उसे कई बार लोक व्यवहार के लिए न चाहते हुए भी मुस्कराना पड़ता है | बड़ों की मुस्कान में स्वाभाविक गति नहीं होती है |

प्रश्न 3) कवि ने बच्चों की मुस्कान के लिए किन-किन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है ?

उत्तर ) कवि नागार्जुन ने बच्चों की मुस्कान के सौन्दर्य को  जिन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है, वे निम्नलिखित है :

1)  बच्चों की मुस्कान से मृतक में भी जान आ जाती है |

“मृतक में भी डाल देगी जान |”

2)  कवि ने बालक की मुस्कान की तुलना कमल के पुष्पों से की है | जो तालाब में न खिलकर कवि की झोंपड़ी में खिल गया है |

“छोडकर तालाब मेरी झोंपड़ी में खिल रहे जलजात|”

3)  बच्चे की मुस्कान से प्रभावित होकर पाषाण (पत्थर) भी पिघलकर जल बन गया है |

“ पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण |”

4)  कवि बच्चे की मुस्कान की तुलना शेफालिका के फूल से करता है |

“ झरने लग पड़े शेफालिका के फूल|”

5)  बच्चा जब तिरछी नज़रों से देख कर मुस्कराता है कवि को लगता है कि वह उनके प्रति स्नेह प्रकट कर रहा है |

“देखते तुम इधर कनखी मार

और होती जबकि आँखें चार

तब तुम्हारी दंतुरित मुस्कान|”

प्रश्न 4) भाव स्पष्ट कीजिए –

क)    छोड़कर तालाब मेरी झोंपड़ी में  खिल रहे जलजात |

उत्तर ) कवि को छोटे बच्चे की मुस्कान तो ईश्वर के वरदान के समान लग रही थी | वह धूल से सना हुआ बच्चा ऐसा लग रहा था मानो तालाब में कमल का फूल खिल गया हो | वह मोहक और मनोरम बच्चा उसकी झोंपड़ी में आकर बस गया हो |

ख ) छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल ?

उत्तर ) नन्हें बालक के मनोरम रूप को देखकर निर्दयी व्यक्ति का भी दिल खुशी से भर उठता है | चाहे कोई बाँस के समान हो या बबूल के समान हो उसकी सुंदरता को देखकर मुस्कराने के लिए विवश हो जाता है |

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 5)  मुस्कान और क्रोध दो भिन्न –भिन्न भाव हैं | इनकी उपस्थिति से बने वातावरण की भिन्नता का चित्रण कीजिए |

उत्तर ) मुस्कान और क्रोध  मानव मन में उत्पन्न होने वाले दो भाव हैं | मुस्कान एक सुखद भाव है,जबकि क्रोध एक मनोविकार है जिसका उत्पन्न होना अधिकतर हानिकारक होता है | मुस्कान सुखद भाव है इससे हँसी-खुशी का वातावरण बनता है | आपस में प्रेम भाव का संचार होता है | समाज में मेल - जोल बढ़ता है | इसके विपरीत क्रोध उन सबको कष्ट पहुंचता है जो क्रोध करने वाले के समीप होते है | क्रोध में लिए गए निर्णय का परिणाम  लाभदायक नहीं होता है |  मुस्कान से हर एक व्यक्ति के हृदय को जीता जा सकता है, किन्तु क्रोध से शत्रुता बढ़ती है |

प्रश्न 6) बच्चे से कवि की मुलाकात का जो शब्दचित्र उपस्थित हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए |

उत्तर ) कवि महीनों बाद घर लौटने पर बच्चे से मिला | बच्चा उन्हें देखकर मुस्कराने लगता है | बच्चे के नए –नए  दांतों वाली मुसकान को देखकर कवि का मन खुशी से खिल उठता है | नन्हें बच्चे की मुस्कान देखकर उसके निराश जीवन में मानो प्राण आ गए हो | उसे लगा कमल का सुंदर फूल उसकी झोंपड़ी में आ गया हो | आरंभ में बालक कवि को अजनबी की भांति देखता रहा और तिरछी नज़रों से देखकर मुँह फेरने लगा |  किन्तु बच्चे की माँ ने दोनों का आपस में परिचय कराया | बच्चा मुस्करा पड़ा और उसके नए-नए उगे हुए दाँत दिखाई देने लगे |

अन्य प्रश्न

प्रश्न) यह दंतुरित मुस्कान कविता में  बाँस और बबूल किसे और क्यों कहा गया है ?

उत्तर ) नन्हें बालक की हंसी के प्रभाव का वर्णन करते हुए कहा है कि उसकी हंसी का प्रभाव ऐसा है कि जिसे देखकर बाँस और बबूल के वृक्षों से भी शेफालिका के फूल झड़ने लगते हैं | यहाँ बाँस और बबूल का प्रयोग बुरे व्यक्तियों के लिए किया गया है | कहने का तात्पर्य है समाज के बुरे से बुरे लोग भी नन्हें बच्चे की हँसी को देखकर हँसने लगते हैं | उनके मन में भी बच्चे के प्रति अच्छी भावना जाग जाती है |

प्रश्न ) यह दंतुरित मुस्कान क्या –क्या कर सकती है ?

उत्तर ) कवि के अनुसार दंतुरित मुस्कान में बहुत कुछ करने की क्षमता होती है | कठोर से कठोर व्यक्ति के मन में कोमलता का संचार कर सकती है | जो व्यक्ति इस संसार से विमुखा हो गया है वह भी नन्हें शिशु की हँसी को देखकर हँसे बिना नहीं रहेगा | इसका प्रभाव इतना मृतक व्यक्ति में  भी प्राण फूँक सकती है |

प्रश्न )  यह दंतुरित मुस्कान कविता का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए |

उत्तर ) प्रस्तुत पाठ में कवि का उद्देश्य बच्चे की मनोहारी मुस्कान के प्रभाव का चित्रण करना है | छोटे बच्चे के मुख में उगे हुए नन्हें- नन्हें दाँतों को देखकर कवि के मन में अनेक भाव उमड़ते है जिन्हें कवि ने विभिन्न बिंबों की योजना के द्वारा व्यक्त किया है | बच्चे की निश्चल हँसी में जीवन का संदेश छिपा हुआ है इसे देखकर कठोर से कठोर व्यक्ति का हृदय भी पिघल उठता है | बच्चे का तिरछी नज़रों से देखना तो ओर भी मनमोहक होता है | प्रस्तुत कविता का लक्ष्य  बच्चे की हँसी के प्रभाव का उल्लेख करना है |

 

Wednesday, May 11, 2022

नौबतखाने में इबादत (पाठ 16) कक्षा दसवीं

 

पाठ 16 नौबतखाने में इबादत

यतीन्द्र मिश्र

प्रश्न 1) शहनाई की दुनिया में डुमराँव गाँव को क्यों याद किया जाता है ?

उत्तर ) अमीरुद्दीन अर्थात उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्म डुमराँव गाँव में हुआ | यह शहनाई वादन में विश्वप्रसिद्ध हैं | इसके अतिरिक्त शहनाई वादन में जिस रीड का प्रयोग किया जाता है, वह नरकट (एक विशेष प्रकार की घास) से बनती है , जो डुमराँव गाँव के समीप सोन नदी के किनारे पाई जाती है | इन दोनों कारणों से शहनाई की दुनिया में डुमराँव गाँव को याद किया जाता है |

प्रश्न 2) बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक कहा गया है ?

उत्तर ) जहाँ कहीं भी मांगलिक कार्य का आयोजन हो वहाँ उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई की ध्वनि सुनाई देगी | समारोह में शहनाई की गूँज का अभिप्राय: उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ से है | गंगा के किनारे स्थित बालाजी का मंदिर हो या विश्वनाथ का मंदिर अथवा संकटमोचन मंदिर सब जगह संगीत के समारोह में उनकी शहनाई की चर्चा रहती थी | मंदिरों में प्रभाती की मंगल ध्वनि उनकी शहनाई वादन के रूप में सुनाई पड़ती है | हर व्यक्ति उनकी शहनाई वादन कला का दीवाना था| इसलिए उन्हें शहनाई की मंगल ध्वनि का नायक कहा जाता हैं |

प्रश्न 3 ) सुषिर-वाद्यों से क्या तात्पर्य है ? शहनाई को सुषिर –वाद्यों में शाह की उपाधि क्यों दी गई होगी ?

उत्तर ) सुषिर बाँस अथवा मुँह से फूँककर बजाए जाने वाले वाद्यों से निकलने वाली ध्वनि को कहा जाता है | इसी कारण सुषिर-वाद्यों से अभिप्राय: उन वाद्ययंत्रों से है जो फूँककर बजाए जाने पर ध्वनि उत्पन्न करते हैं | इनमें  नाड़ी नरकट या रीड होती है, को नय कहा जाता है | इसी कारण शहनाई को सुषिर-वाद्यों में शाह की उपाधि दी गई होगी |

प्रश्न 4) आशय स्पष्ट कीजिए –

(क)फटा सुर न बख्शें | लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी |

(ख)उत्तर )  दिन-रात सुरों की इबादत में लगे रहने वाले बिस्मिल्ला खाँ

 से जब उनकी एक शिष्या ने कहा कि वे फटी लुंगी न पहना करें तो उन्होंने कहा कि लुंगी यदि आज फटी है तो कल सिल जाएगी, किन्तु यदि एक बार सुर बिगड़ गया तो सँवरना मुश्किल है | अत: अपने पहनावे से कहीं अधिक ध्यान उनका सुर पर होता था |

ख) मेरे मालिक सुर बख्श दे | सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती कि तरह अनगड़ ख आँसू निकाल आएँ |’

उत्तर ) इन पंक्तियों के माध्यम से बताया गया है कि बिस्मिल्ला खाँ शहनाईवादन वादन में बेजोड़ है | वह अस्सी वर्षों से शहनाई बजा रहे है | फिर भी नमाज़ पढ़ते समय वह परमात्मा से हर रोज प्रार्थना करते है कि हे ईश्वर ! मुझे मधुर स्वर प्रदान कर | मेरे सुरों में ऐसा प्रभाव उत्पन्न कर दे जिसे सुनकर लोग प्रभावित हो उठें | उनकी आँखों से भाववेश में सच्चे मोतियों के समान अनायास आँसुओं की झड़ी लग जाए |

प्रश्न 5) काशी में हो रहे कौन से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे ?

उत्तर) काशी की अनेक परम्पराएँ धीरे – धीरे लुप्त होती जा रही थीं, पहले काशी खान –पान की चीजों के लिए विख्यात हुआ करता था परंतु अब वह बात नहीं रह गई थी| काशी के पक्का महल से मलाई बर्फी वाले जा चुके थे | न अब वहाँ देसी घी की कचौड़ी जलेबी थी और न ही संगीत के लिए गायकों के मन में आदर का भाव था | जिनके कारण बिस्मिल्ला खाँ को बहुत दुख था | वे उनके विषय में सोचकर अत्यंत व्याकुल हो उठे थे |

प्रश्न 6) पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि-

क)   बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे |     अथवा

शहनाईवादक बिस्मिल्ला खाँ के धर्मनिरपेक्ष व्यक्तित्व का वर्णन कीजिए |

   उत्तर ) वह एक शिया मुसलमान का बेटा था जो सुबह उठकर बाबा विश्वनाथ के मंदिर में शहनाई बजाता | फिर गंगा स्नान करता था और बालाजी के सामने रियाज़ करता | फिर भी वह हिन्दू नहीं हो गया था जो मानता था कि उसे बालाजी ने शहनाई में सिद्धि दे दी है |वह मुहर्रम के महीने में आठवीं तारीख के दिन खाँ साहब खड़े होकर शहनाई बजाते थे व दलमंडी में फातमान के करीब आठ किलोमीटर कि दूरी तक पैदल रोते हुए, नौहा बजाते जाते थे |

ख ) वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इंसान थे |

उत्तर ) बिस्मिल्ला खाँ वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इंसान थे |वे शहनाई बजाने को ईश्वर की देन मानते थे |  व धर्मों से अधिक मानवता, आपसी प्रेम तथा भाईचारे को महत्व देते थे | वे हिन्दु तथा मुस्लिम धर्म दोनों का ही सम्मान करते थे | भारत रत्न से सम्मानित होने पर भी उनमें लेशमात्र भी घमंड नहीं था | वे भेदभाव और बनावटीपन से दूर रहते थे | दौलत से अधिक सुर उनके लिए प्रश्न जरूरी था |

प्रश्न 7) बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से जुड़ी उन घटनाओं और व्यक्तियों का उल्लेख करें जिन्होंने

उनकी संगीत साधना को समृद्ध किया ?

उत्तर ) बालाजी के मंदिर के मार्ग में दो रसूलनबाई व बतूलनबाई दो बहनें थी जो ठुमरी,टप्पे आदि का गायन किया करती थीं | बिस्मिल्ला खाँ उनका संगीत सुनने के लिए उनके घर के सामने से गुजारा करते थे | उनके नाना भी शहनाईवादक थे | वह चोरी से नाना की शहनाई   उठाकर उसे बाजा-बजाकर देखा करता था|  यहीं से उन्हें शहनाई बजाने की प्रेरणा मिली थी | उनके मामा अलीबख्श खाँ एक अच्छे शहनाईवादक थे | वे बिस्मिल्ला खाँ के उस्ताद भी थे | उन्होंने उसे शहनाई बजाने की कला सिखाई थी | उनका सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा है |

रचना व अभिव्यक्ति

प्रश्न 8) बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया ?

उत्तर )  ईश्वर के प्रति आस्थवान बने रहना उनके व्यक्तित्व की अन्य विशेषता है जिसने मुझे प्रभावित किया | वे सदा प्रभु से यहीं प्रार्थना करते की ईश्वर उनके सुरों को नियामत प्रदान करें | उन्होंने जो कुछ जीवन में प्राप्त किया है, उसे वे प्रभु की कृपा समझते थे | धार्मिक उदारता उनके जीवन की अन्य विशेषता है | वे मुसलमान होते हुए भी दूसरे धर्मों का आदर करते थे |वे सादगीपूर्ण जीवन जीते थे | सच्ची लगन से शहनाई वादन का कार्य करते थे | उन्हें इसके लिए पदंमभूषण व भारतरत्न जैसे पुरुस्कार भी मिले | इतनी उपाधियाँ प्राप्त करने के बाद भी उनके मन में कहीं अहंकार की भावना नहीं आई | वे खाने-पीने व संगीत के भी शौकीन थे |

प्रश्न 9) मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखो |

उत्तर ) मुस्लिम धर्म में मनाए जाने वाले त्योहारों में अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लेते थे | मुहर्रम के दस दिनों में वे किसी प्रकार का मंगल वाद्य नहीं बजाते थे तथा न ही राग-रागिनी गाते थे | इन दिनों वे शहनाई भी नहीं बजाते थे | आठवें दिन दालमंडी से चलने वाले मुहर्रम के जुलूस में पूरे उत्साह के साथ आठ किलोमीटर रोते हुए नौहा बजाते हुए चलते थे |

प्रश्न ) बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे , तर्क सहित उत्तर दीजिए|

उत्तर )बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे | उन्होंने अस्सी वर्ष तक लगातार शहनाई बजाकर इस बात को सिद्ध किया | वे ईश्वर से अच्छे सुर की प्राप्ति हेतु प्रार्थना किया करते  थे | उन्हें सदा लगता था की खुदा उन्हें कोई ऐसा सुर देगा जिसे सुनकर लोग भाव विभोर हों जाएंगे  और उनके आँखों से आँसू बह निकलेंगे | वे कभी अपने आपको पूर्ण नहीं मानते थे | उन्हें कभी भी इतने उपाधियाँ मिलने के बावजूद शहनाई वादन की कला पर घमंड नहीं हुआ | वे उसमें सुधार लाने के लिए सदा प्रयास करते रहे | 

भाषा अध्ययन

प्रश्न 11) निम्नलिखित मिश्र वाक्यों के उपवाक्य छाँटकर भेद भी लिखिए |

क)   यह जरूर है कि शहनाई और डुमराँव एक- दूसरे के लिए उपयोगी हैं |

उत्तर )  1. यह जरूर है |                                      (प्रधान उपवाक्य)               2. शहनाई और डुमराँव एक- दूसरे के लिए उपयोगी हैं |       (संज्ञा  उपवाक्य)

ख)   रीड अंदर से पोली होती है, जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है |

उत्तर ) 1. रीड अंदर से पोली होती है |                        (प्रधान उपवाक्य)

      2. जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है |              (विशेषण  उपवाक्य)

ग ) रीड नरकट से बनाई जाती है, जो डुमरॉव में मुख्यत: सोन नदी के किनारे पर पाई जाती है |

उत्तर ) 1. रीड नरकट से बनाई जाती है |                       (प्रधान उपवाक्य)

   2.जो डुमरॉव में मुख्यत: सोन नदी के किनारे पर पाई जाती है |   (विशेषण  उपवाक्य)

घ ) उनको यकीन है,  कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान  होगा |

उत्तर) 1. उनको यकीन है |                                     (प्रधान उपवाक्य)

     2.  कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान  होगा |              (संज्ञा  उपवाक्य)

ड़) हिरन  अपनी महक  से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है जिसकी गमक उसी में समाई है |

उत्तर)  1. हिरन अपनी महक  से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है |

                                                          (प्रधान उपवाक्य)

       2.  जिसकी गमक उसी में समाई है |                   (विशेषण  उपवाक्य)

च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा |

उत्तर ) 1. खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है                (प्रधान उपवाक्य)

   2. पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा  को अपने भीतर जिंदा रखा |                                    (संज्ञा  उपवाक्य)

 

 

प्रश्न 12 ) निम्नलिखित वाक्यों को मिश्रित वाक्य में बदलिए |

 क ) इसी बाल सुलभ हंसी में कई यादें बंद हैं |

उत्तर ) यह वहीं बाल सुलभ हंसी है जिसमें कई  यादें बंद हैं |

ख ) काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है |

उत्तर ) काशी की यह  प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है कि यहाँ संगीत आयोजन होते रहते है |

ग ) धत्! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं |

 उत्तर )   धत्! पगली ई भारतरत्न जो हमको मिला है, ऊ शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं |

घ ) काशी का नायाब हीरा  हमेशा से दो क़ौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की  प्रेरणा देता रहा |

उत्तर ) यह काशी का नायाब हीरा है जो हमेशा से दो क़ौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा |

प्रश्न) बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई एक-दूसरे की पूरक हैं’- इस कथन की पुष्टि करें |

उत्तर ) जब भी कोई मांगलिक कार्य होता है तो वहाँ सर्वप्रथम बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई के स्वर से वातावरण गूंज उठता है | संगीत आयोजन बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई के अभाव में अधूरा लगता है | बिस्मिल्ला खाँ का अर्थ उनकी शहनाई, शहनाई का मतलब उनका हाथ और हाथ का आशय उनकी शहनाई से सुरों का निकलना है | फिर देखते ही देखते सारा वातावरण सुरीला हो उठता है | अत: यह कहना उचित ही है कि  बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई एक-दूसरे की पूरक है |

प्रश्न ) बिस्मिल्ला खाँ को किन-किन उपाधियों से पुरस्कृत किया गया और उनकी सबसे बड़ी देन क्या है ?

उत्तर )उन्हें विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा अनेक मानद उपलब्धियों से अलंकृत किया गया | भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण व भारतरत्न जैसे महान पुरुस्कारों से सम्मानित किया | अस्सी वर्षों तक उन्होंने संगीत को अच्छी प्रकार से सीखने की इच्छा को अपने भीतर जीवित रखा |

प्रश्न ) नौबतखाने में इबादत पाठ का प्रमुख उद्देश्य क्या है ?

उत्तर ) प्रस्तुत पाठ में लेखक ने महान शहनाईवादक बिस्मिल्ला खाँ के जीवन पर प्रकाश डाला है | कला के प्रति प्रेम, सरल एवं सादगीयुक्त जीवन जीने तथा धार्मिक उदारता की प्रेरणा भी दी गई है | इस पाठ में बताया गया है कि कला कोई भी हो, जब तक उसमें तल्लीनता व सच्चे मन से कार्य नहीं करेंगे, तब तक हमें सफलता नहीं मिल सकती | इसी प्रकार हमें अपने धर्म के साथ-साथ दूसरे के धर्मों का आदर करना चाहिए | हमें सफलता प्राप्ति में  कभी घमंड नहीं करना चाहिए |

प्रश्न ) काशी का भारतीय संस्कृति में क्या महत्व है ?

उत्तर ) काशी भारतवर्ष का एक धार्मिक स्थल है | यह नगर साहित्य, संगीत आदि कलाओं का केंद्र है | यहाँ बड़े-बड़े साहित्यकार व संगीतकर हुए है जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति को न केवल जीवित रखा, अपितु उसे विकास की और अग्रसर भी किया | काशी शिक्षा का भी केंद्र रहा है | यहाँ देश –विदेश से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते है | वे यहाँ की संस्कृति से प्रभावित हुए बिना नहीं रहते है |

                                                                                                                                               

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Tuesday, May 10, 2022

एक कहानी यह भी है (पाठ - 14 कक्षा दसवीं)

 

पाठ - 14   एक कहानी यह भी है

                          (मन्नू भंडारी)

प्रश्न 1) लेखिका के व्यक्तित्व पर किन – किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा ?

उत्तर ) लेखिका के व्यक्तित्व पर उनके पिता जी और प्राध्यापिका शीला अग्रवाल का प्रभाव पड़ा था | लेखिका को देश प्रेमी और समाज के प्रति जागरूक बनाने में भी उनके पिता का सहयोग रहा है | उन्होंने उसे रसोईघर से दूर रखकर एक निडर महिला बनाया| लेकिन लेखिका की तुलना उनकी बड़ी बहन से करके उसमें हीन भावना पैदा की | लेखिका को सदा अध्ययनशील, क्रांतिकारी व आंदोलनकारी बनाने में शीला अग्रवाल का भी योगदान रहा | उसे महान साहित्यकारों की किताबें उपलब्ध कराई, जिससे उनके मन में साहित्य के प्रति आकर्षण पैदा हुआ | आगे चलकर वे स्वयं महान लेखिका बनीं |

प्रश्न 2 ) इस आत्मकथ्य में लेखिका के पिता ने रसोई को भटियारखाना कहकर क्यों संबोधित किया ?

उत्तर ) भटियारखाना का शाब्दिक अर्थ है- वह स्थान जहाँ सदा भट्टी जलती रहती है अथवा चूल्हा जलता रहता है | यहाँ लोग भट्टी पर आकर जमा हो जाते हैं और खूब शोर मचाते हैं | लेखिका के पिता एक महान लेखक, विद्वान व समाज-सुधारक और देशभक्त थे|  वे अपने बच्चों को घर-गृहस्थी तक सीमित नहीं रखना चाहते थे, विशेषकर लड़कियों को | वे उन्हें उदार, विचारवान जागरूक नागरिक बनाना चाहते थे | वे रसोईघर के कामों को हीन समझते थे | इसलिए उन्होंने रसोईघर को भटियारखाने की संज्ञा दी |

प्रश्न 3) वह कौन सी घटना थी जिसके बारे में  सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर ?

उत्तर ) लेखिका के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की लिए कॉलेज के प्राचार्य का पत्र आया | इस संबंध में उनके पिताजी को कॉलेज बुलाया | पिता जी पत्र देखकर आग-बबूला हो उठे |वह इसलिए  कॉलेज गए | पिताजी के कॉलेज जाने पर  लेखिका  पड़ोस में बैठ गई ताकि पिता के क्रोध से बचा जा सके | किन्तु लेखिका के कारण उनका सिर  गर्व से ऊंचा था | उन्होंने बताया कि लेखिका का कॉलेज की लड़कियों पर पूरा रौब है तथा पूरा कॉलेज उसके इशारों पर चलता है | यह सुनकर लेखिका को अपने कानों पर विश्वास नहीं  हुआ लेकिन यह सच्चाई थी |

प्रश्न 4) लेखिका की अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने  शब्दों में लिखिए |

उत्तर ) लेखिका के पिता के अनुसार औरतों को रसोई की चारदीवारी तक ही सीमित ही नहीं रहना चाहिए बल्कि अपनी प्रतिभा व क्षमता का प्रयोग घर के बाहर भी करना चाहिए| इससे उन्हें यश व सम्मान मिलेगा | वे आधुनिकता के समर्थक थे | किन्तु वे यह भी नहीं देख सकते थे कि लड़कियां लड़कों के साथ मिलकर स्वतन्त्रता आंदोलन में भाग लें | लेकिन लेखिका के लिए पिता जी की सीमाओं में बंधना बहुत कठिन था | इसलिए लेखिका की अपने पिता जी से वैचारिक टकराहट रहती थी |

प्रश्न 5 ) इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मन्नू जी की भूमिका कों रेखांकित कीजिए|

उत्तर ) लेखिका के विद्यार्थी जीवन का समय देश की स्वतन्त्रता प्राप्ति के लिए आंदोलनों की प्रगति का समय था| चारों और प्रभात फेरियाँ, हड़तालें, जुलूस ,भाषणबाजी हो रही थी | लेखिका देश की राजनीति के प्रति जागरूक थी | उसने राष्ट्र स्तर पर होने वाले आंदोलनों में बढ़ – चढ़कर भाग लिया | प्रभात फेरियाँ निकाली, कॉलेज में हड़तालें करवाईं अपने भाषणों से भीड़ में जोश भर देना आदि कार्य किए| हिन्दी अध्यापिका ने जोश के साथ कार्य करने में लेखिका को प्रेरित किया |

रचना व अभिव्यक्ति पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 6) लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों  के साथ गिल्ली डांडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले, किन्तु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था | क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए|

उत्तर ) वह लड़कों की भांति बाहर खेलने नहीं जा सकती थी | लड़की होने के कारण उसकी सीमाएँ घर की चार दीवारी तक ही सीमित थी | लड़कियां हर क्षेत्र में लड़कों के समान ही आगे बढ़ रही हैं | अब उनके कार्य की सीमा घर की चार दीवारी से बाहर की दुनिया भी हैं | अब आत्मनिर्भर  बन चुकी है | लड़कियों के विकास करने हेतु माता - पिता भी सहयोग कर रहे हैं | आज के युग में लड़कियाँ आगे भी बढ़ रही हैं | वे समाज व राष्ट्र के प्रति जागरूक हैं |

प्रश्न 7) मनुष्य के जीवन में आस-पड़ोस का बहुत महत्व होता है | परंतु महानगरों में रहने वाले लोग प्राय: पड़ोस –कल्चर  से वंचित रह जाते हैं| इस बारे में अपने विचार लिखिए |

उत्तर ) निश्चय ही मनुष्य के जीवन में  आस-पड़ोस का अत्यधिक महत्व होता है| बच्चों में निर्भयता, आत्मीयता और अपनेपन के भाव का विकास होता है | बड़े शहरों में  रहने वाले लोग प्राय: पड़ोस कल्चर के सुख से प्राय: वंचित रहते है | वहाँ सब लोग अपने तक सीमित रहते है | बच्चे का समाज से परिचय आस-पड़ोस के माध्यम से ही होता है | आस-पड़ोस के लोगों से मिलजुल रहने की भावना का विकास होता है | अच्छे-बुरे की पहचान भी आस-पड़ोस के माध्यम से ही होती है | बड़े शहरों  में लोग एकाकीपन में रहने के कारण असुरक्षा, असहाय और मानसिक तनाव के शिकार हो जाते है | इसलिए मानवीय जीवन में आस-पड़ोस का होना बहुत आवश्यक हैं |

प्रश्न 8) लेखिका द्वारा पढे गए उपन्यासों की सूची बनाइए और उन उपन्यासों को अपने पुस्तकालय में खोजिए |

उत्तर ) लेखिका ने सुनीता’, शेखर एक जीवनी’, नदी के द्वीप’, त्यागपत्र’, चित्रलेखा’, उपन्यासों के अतिरिक्त शरत, प्रेमचंद्र, जैनेन्द्र, अज्ञेय, यशपाल भगवतीचरण वर्मा के अनेक उपन्यास पढे थे |

अन्य प्रश्न

प्रश्न ) लेखिका के कुंठित होने तथा हीन भावना से ग्रसित होने के क्या कारण थे ?

उत्तर ) लेखिका बचपन से काले रंग व शारीरिक दृष्टि से कमजोर थी | जबकि लेखिका की बड़ी बहिन,  जो उससे दो वर्ष बड़ी थी, स्वस्थ व गोरे रंग की थी | लेखिका के पिता दोनों बहिनों की तुलना करते और उनकी बड़ी बहन की तारीफ करते | इसका लेखिका के व्यक्तित्व पर बुरा प्रभाव पड़ा | इसी कारण उसके जीवन में हीन भावना की ग्रंथि अथवा कुंठा का समावेश हो गया था जिससे लेखिका आजीवन उभर नहीं सकी थी |

प्रश्न ) लेखिका की साहित्यकारों के साहित्य को पढ़कर उनसे प्रभावित हुई ?

उत्तर ) लेखिका को कॉलेज की प्राध्यापिका शीला अग्रवाल ने  प्रेमचन्द्र, जैनेन्द्र, अज्ञेय, भगवतीचरण वर्मा, यशपाल आदि साहित्यकारों की प्रमुख रचनाएँ पढ़ने को दी | लेखिका इन सब का साहित्य पढ़कर इनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी | किन्तु लेखिका जैनेन्द्र की लेखन शैली से विशेष रूप से प्रभावित हुई | उनका सुनीता  उपन्यास ने भी उन्हें बहुत प्रभावित किया | अज्ञेय जी का शेखर: एक जीवनी और नदी के द्वीप उपन्यास को पढ़कर लेखिका उनकी मनोवैज्ञानिक शैली पर मुग्ध हो गई  थी |

जब लेखिका स्वयं साहित्यकार बनी तो इन सब की शैलियों का प्रभाव उनकी कथात्मक रचनाओं में किसी न किसी रूप में देखा जा सकता है |

प्रश्न) लेखिका के पिता जी की सबसे बड़ी कमजोरी क्या थी ?

उत्तर ) वह चाहते थे कि सब लोग उसकी प्रशंसा करें | यश-लिप्सा लेखिका के पिताजी की सबसे बडी कमजोरी थी | वे  विशिष्ट बनकर रहना चाहते थे | उनका मत था कि समाज में मनुष्य को ऐसे काम करने चाहिए जिससे उसका नाम हो | उसकी प्रतिष्ठा बढ़े | उसकी अपनी एक पहचान थी |

प्रश्न ) पड़ोस-कल्चर समाप्त होने के कारण मनुष्य को क्या-क्या हानियाँ उठानी पड़ रही है ?

उत्तर ) पड़ोस कल्चर से हम अधिक सुरक्षा, अपनेपन का भाव अथवा आत्मीयता का भाव मिलता है | हम पूरे पड़ोस व मोहल्ले को अपना घर मानते हैं | बिना हिचक के एक-दूसरे के घर जाते है | किन्तु आज फ्लैट- कल्चर के विकास के कारण पड़ोस-कल्चर समाप्त हो गया | इससे हम अकेलेपन, असुरक्षा, असहायता की भावना से ग्रस्त हो गए हैं | पड़ोस –कल्चर के अभाव का बच्चे के मन पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता हैं |

प्रश्न ) परम्पराओं को  लेकर लेखिका के क्या विचार थे ?

उत्तर ) परम्पराओं के विषय में लेखिका ने कहा कि हमारी परम्पराएँ हमारा भूतकाल बनकर हमारा पीछा कभी नहीं छोड़ती | वे हमारे जीवन में साथ-साथ चलती रहती है | समय के बदलने पर परंपरा के प्रति विद्रोह की भावना भी व्यक्त होती है | लेखिका अच्छी परंपरा को निभाने के पक्ष में और जीवन के विकास में बाधा बनने वाली परंपरा को छोड़ने में ही लाभ देखती हैं |

प्रश्न ) डॉक्टर अम्बा लाल ने लेखिका की किस रूप में सहायता की ?

उत्तर ) डॉक्टर अम्बा लाल  लेखिका के पिता के गहरे मित्र थे | उन्होंने नगर के चौराहे पर लेखिका का भाषण सुना | उससे वे अत्यधिक प्रभावित हुए | ऐसे भाषण के लिए लेखिका को न केवल शाबाशी दी परंतु उनके पिता के सामने उनकी खूब तारीफ भी की | इससे पिता का हृदय गर्व से फूल गया | इससे पिता की डॉट खाने से भी बची और पिता ने कभी उन्हें ऐसे कार्यों में कभी भाग लेने से भी मना नहीं किया |

प्रश्न ) कॉलेज की प्रिन्सिपल मन्नू से क्यों दुखी थी ?

उस समय स्वाधीनता आंदोलन चालू होने के कारण मन्नू प्रभात – फेरियाँ निकालती| जुलूसों व हड़तालों में भी भाग लेती | उसके भाषण बड़े ही जोशीले होते थे | उसकी एक आवाज़ पर कॉलेज की छात्राएँ बाहर आ जाती थी | वह स्वाधीनता के प्रश्न को लेकर कई बार कॉलेज में हड़तालें भी कर चुकी थी | कॉलेज की प्रिन्सिपल के लिए कॉलेज चलाना कठिन हो गया था |  लेखिका के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के  लिए कॉलेज के प्राचार्य का पत्र आया | इस संबंध में उनके पिताजी को कॉलेज बुलाया गया |

प्रश्न ) एक कहानी यह भी  नामक पाठ का मुख्य संदेश  क्या है ?

उत्तर )   इस कहानी को पढ़कर लड़कियों का देश के विकास के कार्य में योगदान देने की प्रेरणा मिलती है | स्वतन्त्रता प्राप्त करने का अधिकार केवल पुरुषों को ही नहीं हैं, बल्कि महिलाओं को भी हैं | हमें  अपनी सामर्थ्य के अनुसार देश के विकास में बढ़-चढ़कर भाग लेना चाहिए | अगर हमारे बड़े इस कार्य में किसी प्रकार की बाधा बनते है तो हमें सीधी टकराहट की बजाए समझा – बुझाकर अपना काम करते रहना चाहिए | हमें अच्छी परम्पराओं का पालन करना चाहिए | अतीत की भूलों को ध्यान में रखकर वर्तमान व भविष्य को उज्ज्वल बनाना चाहिए |

 

 

 

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...