Wednesday, May 11, 2022

नौबतखाने में इबादत (पाठ 16) कक्षा दसवीं

 

पाठ 16 नौबतखाने में इबादत

यतीन्द्र मिश्र

प्रश्न 1) शहनाई की दुनिया में डुमराँव गाँव को क्यों याद किया जाता है ?

उत्तर ) अमीरुद्दीन अर्थात उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ का जन्म डुमराँव गाँव में हुआ | यह शहनाई वादन में विश्वप्रसिद्ध हैं | इसके अतिरिक्त शहनाई वादन में जिस रीड का प्रयोग किया जाता है, वह नरकट (एक विशेष प्रकार की घास) से बनती है , जो डुमराँव गाँव के समीप सोन नदी के किनारे पाई जाती है | इन दोनों कारणों से शहनाई की दुनिया में डुमराँव गाँव को याद किया जाता है |

प्रश्न 2) बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक कहा गया है ?

उत्तर ) जहाँ कहीं भी मांगलिक कार्य का आयोजन हो वहाँ उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई की ध्वनि सुनाई देगी | समारोह में शहनाई की गूँज का अभिप्राय: उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ से है | गंगा के किनारे स्थित बालाजी का मंदिर हो या विश्वनाथ का मंदिर अथवा संकटमोचन मंदिर सब जगह संगीत के समारोह में उनकी शहनाई की चर्चा रहती थी | मंदिरों में प्रभाती की मंगल ध्वनि उनकी शहनाई वादन के रूप में सुनाई पड़ती है | हर व्यक्ति उनकी शहनाई वादन कला का दीवाना था| इसलिए उन्हें शहनाई की मंगल ध्वनि का नायक कहा जाता हैं |

प्रश्न 3 ) सुषिर-वाद्यों से क्या तात्पर्य है ? शहनाई को सुषिर –वाद्यों में शाह की उपाधि क्यों दी गई होगी ?

उत्तर ) सुषिर बाँस अथवा मुँह से फूँककर बजाए जाने वाले वाद्यों से निकलने वाली ध्वनि को कहा जाता है | इसी कारण सुषिर-वाद्यों से अभिप्राय: उन वाद्ययंत्रों से है जो फूँककर बजाए जाने पर ध्वनि उत्पन्न करते हैं | इनमें  नाड़ी नरकट या रीड होती है, को नय कहा जाता है | इसी कारण शहनाई को सुषिर-वाद्यों में शाह की उपाधि दी गई होगी |

प्रश्न 4) आशय स्पष्ट कीजिए –

(क)फटा सुर न बख्शें | लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी |

(ख)उत्तर )  दिन-रात सुरों की इबादत में लगे रहने वाले बिस्मिल्ला खाँ

 से जब उनकी एक शिष्या ने कहा कि वे फटी लुंगी न पहना करें तो उन्होंने कहा कि लुंगी यदि आज फटी है तो कल सिल जाएगी, किन्तु यदि एक बार सुर बिगड़ गया तो सँवरना मुश्किल है | अत: अपने पहनावे से कहीं अधिक ध्यान उनका सुर पर होता था |

ख) मेरे मालिक सुर बख्श दे | सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती कि तरह अनगड़ ख आँसू निकाल आएँ |’

उत्तर ) इन पंक्तियों के माध्यम से बताया गया है कि बिस्मिल्ला खाँ शहनाईवादन वादन में बेजोड़ है | वह अस्सी वर्षों से शहनाई बजा रहे है | फिर भी नमाज़ पढ़ते समय वह परमात्मा से हर रोज प्रार्थना करते है कि हे ईश्वर ! मुझे मधुर स्वर प्रदान कर | मेरे सुरों में ऐसा प्रभाव उत्पन्न कर दे जिसे सुनकर लोग प्रभावित हो उठें | उनकी आँखों से भाववेश में सच्चे मोतियों के समान अनायास आँसुओं की झड़ी लग जाए |

प्रश्न 5) काशी में हो रहे कौन से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे ?

उत्तर) काशी की अनेक परम्पराएँ धीरे – धीरे लुप्त होती जा रही थीं, पहले काशी खान –पान की चीजों के लिए विख्यात हुआ करता था परंतु अब वह बात नहीं रह गई थी| काशी के पक्का महल से मलाई बर्फी वाले जा चुके थे | न अब वहाँ देसी घी की कचौड़ी जलेबी थी और न ही संगीत के लिए गायकों के मन में आदर का भाव था | जिनके कारण बिस्मिल्ला खाँ को बहुत दुख था | वे उनके विषय में सोचकर अत्यंत व्याकुल हो उठे थे |

प्रश्न 6) पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि-

क)   बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे |     अथवा

शहनाईवादक बिस्मिल्ला खाँ के धर्मनिरपेक्ष व्यक्तित्व का वर्णन कीजिए |

   उत्तर ) वह एक शिया मुसलमान का बेटा था जो सुबह उठकर बाबा विश्वनाथ के मंदिर में शहनाई बजाता | फिर गंगा स्नान करता था और बालाजी के सामने रियाज़ करता | फिर भी वह हिन्दू नहीं हो गया था जो मानता था कि उसे बालाजी ने शहनाई में सिद्धि दे दी है |वह मुहर्रम के महीने में आठवीं तारीख के दिन खाँ साहब खड़े होकर शहनाई बजाते थे व दलमंडी में फातमान के करीब आठ किलोमीटर कि दूरी तक पैदल रोते हुए, नौहा बजाते जाते थे |

ख ) वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इंसान थे |

उत्तर ) बिस्मिल्ला खाँ वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इंसान थे |वे शहनाई बजाने को ईश्वर की देन मानते थे |  व धर्मों से अधिक मानवता, आपसी प्रेम तथा भाईचारे को महत्व देते थे | वे हिन्दु तथा मुस्लिम धर्म दोनों का ही सम्मान करते थे | भारत रत्न से सम्मानित होने पर भी उनमें लेशमात्र भी घमंड नहीं था | वे भेदभाव और बनावटीपन से दूर रहते थे | दौलत से अधिक सुर उनके लिए प्रश्न जरूरी था |

प्रश्न 7) बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से जुड़ी उन घटनाओं और व्यक्तियों का उल्लेख करें जिन्होंने

उनकी संगीत साधना को समृद्ध किया ?

उत्तर ) बालाजी के मंदिर के मार्ग में दो रसूलनबाई व बतूलनबाई दो बहनें थी जो ठुमरी,टप्पे आदि का गायन किया करती थीं | बिस्मिल्ला खाँ उनका संगीत सुनने के लिए उनके घर के सामने से गुजारा करते थे | उनके नाना भी शहनाईवादक थे | वह चोरी से नाना की शहनाई   उठाकर उसे बाजा-बजाकर देखा करता था|  यहीं से उन्हें शहनाई बजाने की प्रेरणा मिली थी | उनके मामा अलीबख्श खाँ एक अच्छे शहनाईवादक थे | वे बिस्मिल्ला खाँ के उस्ताद भी थे | उन्होंने उसे शहनाई बजाने की कला सिखाई थी | उनका सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा है |

रचना व अभिव्यक्ति

प्रश्न 8) बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया ?

उत्तर )  ईश्वर के प्रति आस्थवान बने रहना उनके व्यक्तित्व की अन्य विशेषता है जिसने मुझे प्रभावित किया | वे सदा प्रभु से यहीं प्रार्थना करते की ईश्वर उनके सुरों को नियामत प्रदान करें | उन्होंने जो कुछ जीवन में प्राप्त किया है, उसे वे प्रभु की कृपा समझते थे | धार्मिक उदारता उनके जीवन की अन्य विशेषता है | वे मुसलमान होते हुए भी दूसरे धर्मों का आदर करते थे |वे सादगीपूर्ण जीवन जीते थे | सच्ची लगन से शहनाई वादन का कार्य करते थे | उन्हें इसके लिए पदंमभूषण व भारतरत्न जैसे पुरुस्कार भी मिले | इतनी उपाधियाँ प्राप्त करने के बाद भी उनके मन में कहीं अहंकार की भावना नहीं आई | वे खाने-पीने व संगीत के भी शौकीन थे |

प्रश्न 9) मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखो |

उत्तर ) मुस्लिम धर्म में मनाए जाने वाले त्योहारों में अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लेते थे | मुहर्रम के दस दिनों में वे किसी प्रकार का मंगल वाद्य नहीं बजाते थे तथा न ही राग-रागिनी गाते थे | इन दिनों वे शहनाई भी नहीं बजाते थे | आठवें दिन दालमंडी से चलने वाले मुहर्रम के जुलूस में पूरे उत्साह के साथ आठ किलोमीटर रोते हुए नौहा बजाते हुए चलते थे |

प्रश्न ) बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे , तर्क सहित उत्तर दीजिए|

उत्तर )बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे | उन्होंने अस्सी वर्ष तक लगातार शहनाई बजाकर इस बात को सिद्ध किया | वे ईश्वर से अच्छे सुर की प्राप्ति हेतु प्रार्थना किया करते  थे | उन्हें सदा लगता था की खुदा उन्हें कोई ऐसा सुर देगा जिसे सुनकर लोग भाव विभोर हों जाएंगे  और उनके आँखों से आँसू बह निकलेंगे | वे कभी अपने आपको पूर्ण नहीं मानते थे | उन्हें कभी भी इतने उपाधियाँ मिलने के बावजूद शहनाई वादन की कला पर घमंड नहीं हुआ | वे उसमें सुधार लाने के लिए सदा प्रयास करते रहे | 

भाषा अध्ययन

प्रश्न 11) निम्नलिखित मिश्र वाक्यों के उपवाक्य छाँटकर भेद भी लिखिए |

क)   यह जरूर है कि शहनाई और डुमराँव एक- दूसरे के लिए उपयोगी हैं |

उत्तर )  1. यह जरूर है |                                      (प्रधान उपवाक्य)               2. शहनाई और डुमराँव एक- दूसरे के लिए उपयोगी हैं |       (संज्ञा  उपवाक्य)

ख)   रीड अंदर से पोली होती है, जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है |

उत्तर ) 1. रीड अंदर से पोली होती है |                        (प्रधान उपवाक्य)

      2. जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है |              (विशेषण  उपवाक्य)

ग ) रीड नरकट से बनाई जाती है, जो डुमरॉव में मुख्यत: सोन नदी के किनारे पर पाई जाती है |

उत्तर ) 1. रीड नरकट से बनाई जाती है |                       (प्रधान उपवाक्य)

   2.जो डुमरॉव में मुख्यत: सोन नदी के किनारे पर पाई जाती है |   (विशेषण  उपवाक्य)

घ ) उनको यकीन है,  कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान  होगा |

उत्तर) 1. उनको यकीन है |                                     (प्रधान उपवाक्य)

     2.  कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान  होगा |              (संज्ञा  उपवाक्य)

ड़) हिरन  अपनी महक  से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है जिसकी गमक उसी में समाई है |

उत्तर)  1. हिरन अपनी महक  से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है |

                                                          (प्रधान उपवाक्य)

       2.  जिसकी गमक उसी में समाई है |                   (विशेषण  उपवाक्य)

च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा |

उत्तर ) 1. खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है                (प्रधान उपवाक्य)

   2. पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा  को अपने भीतर जिंदा रखा |                                    (संज्ञा  उपवाक्य)

 

 

प्रश्न 12 ) निम्नलिखित वाक्यों को मिश्रित वाक्य में बदलिए |

 क ) इसी बाल सुलभ हंसी में कई यादें बंद हैं |

उत्तर ) यह वहीं बाल सुलभ हंसी है जिसमें कई  यादें बंद हैं |

ख ) काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है |

उत्तर ) काशी की यह  प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है कि यहाँ संगीत आयोजन होते रहते है |

ग ) धत्! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं |

 उत्तर )   धत्! पगली ई भारतरत्न जो हमको मिला है, ऊ शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं |

घ ) काशी का नायाब हीरा  हमेशा से दो क़ौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की  प्रेरणा देता रहा |

उत्तर ) यह काशी का नायाब हीरा है जो हमेशा से दो क़ौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा |

प्रश्न) बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई एक-दूसरे की पूरक हैं’- इस कथन की पुष्टि करें |

उत्तर ) जब भी कोई मांगलिक कार्य होता है तो वहाँ सर्वप्रथम बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई के स्वर से वातावरण गूंज उठता है | संगीत आयोजन बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई के अभाव में अधूरा लगता है | बिस्मिल्ला खाँ का अर्थ उनकी शहनाई, शहनाई का मतलब उनका हाथ और हाथ का आशय उनकी शहनाई से सुरों का निकलना है | फिर देखते ही देखते सारा वातावरण सुरीला हो उठता है | अत: यह कहना उचित ही है कि  बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई एक-दूसरे की पूरक है |

प्रश्न ) बिस्मिल्ला खाँ को किन-किन उपाधियों से पुरस्कृत किया गया और उनकी सबसे बड़ी देन क्या है ?

उत्तर )उन्हें विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा अनेक मानद उपलब्धियों से अलंकृत किया गया | भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण व भारतरत्न जैसे महान पुरुस्कारों से सम्मानित किया | अस्सी वर्षों तक उन्होंने संगीत को अच्छी प्रकार से सीखने की इच्छा को अपने भीतर जीवित रखा |

प्रश्न ) नौबतखाने में इबादत पाठ का प्रमुख उद्देश्य क्या है ?

उत्तर ) प्रस्तुत पाठ में लेखक ने महान शहनाईवादक बिस्मिल्ला खाँ के जीवन पर प्रकाश डाला है | कला के प्रति प्रेम, सरल एवं सादगीयुक्त जीवन जीने तथा धार्मिक उदारता की प्रेरणा भी दी गई है | इस पाठ में बताया गया है कि कला कोई भी हो, जब तक उसमें तल्लीनता व सच्चे मन से कार्य नहीं करेंगे, तब तक हमें सफलता नहीं मिल सकती | इसी प्रकार हमें अपने धर्म के साथ-साथ दूसरे के धर्मों का आदर करना चाहिए | हमें सफलता प्राप्ति में  कभी घमंड नहीं करना चाहिए |

प्रश्न ) काशी का भारतीय संस्कृति में क्या महत्व है ?

उत्तर ) काशी भारतवर्ष का एक धार्मिक स्थल है | यह नगर साहित्य, संगीत आदि कलाओं का केंद्र है | यहाँ बड़े-बड़े साहित्यकार व संगीतकर हुए है जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति को न केवल जीवित रखा, अपितु उसे विकास की और अग्रसर भी किया | काशी शिक्षा का भी केंद्र रहा है | यहाँ देश –विदेश से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते है | वे यहाँ की संस्कृति से प्रभावित हुए बिना नहीं रहते है |

                                                                                                                                               

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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