वाक्य
शब्दों की रचना वर्णों के सार्थक मेल से होती है | इन्हीं सार्थक शब्दों के सार्थक एवं व्यवस्थित मेल से वाक्य बनते हैं| वाक्य भाषा की सबसे छोटी इकाई
हैं,जिनके द्वारा लिखने व बोलने वाले के मन का आशय समझ में आ
जाता है | इस तरह हम कह सकते हैं कि “
मनुष्य के विचारों को व्यक्त करने वाला शब्द समूह, जो
व्यवस्थित हो तथा पूर्ण आशय प्रकट कर सके, वाक्य कहलाता है|”
वाक्य में निम्नलिखित बातों का होना जरूरी है-
1 सार्थकता – वाक्य रचना के लिए जरूरी है कि उसमें
प्रयुक्त सभी पद सार्थक हों| कच-कच शब्द निरर्थक है,लेकिन क्या कच-कच लगा रखी है ? इस इस वाक्य में यह शब्द
व्यर्थ की बकवास के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है| अत: सार्थक बन
गया है |
2 आकांक्षा – वाक्य के एक पद को सुनकर दूसरे पद को
सुनने व जानने कि जो स्वाभाविक उत्कंठा जागती है, उसे
आकांक्षा कहते हैं| जैसे – दिन में काम करते हैं |
इस वाक्य को सुनकर हम प्रश्न करते है – कौन लोग काम
काम करते है ? यदि हम कहें कि सभी लोग काम करते है तो सभी कह
देने से प्रश्न का उत्तर मिल जाता है | और वाक्य ठीक हो जाता
है|
3 योग्यता-
से तात्पर्य है कि अर्थबोधन की सामर्थ्य| जैसे
किसान लाठी से खेत जोतता है| इस वाक्य में लाठी के स्थान पर
हल का प्रयोग होना चाहिए| क्योंकि हल खेत जोतने के संबंध में
अर्थबोधक की क्षमता रखता है |
4आसक्ति – आसक्ति का अर्थ है – निकटता या समीपता | बोलते व लिखते समय शब्दों में निकटता व समीपता का होना अति आवश्यक है | अगर शब्द थोड़ी-थोड़ी देर बाद या-या रुक-रुककर बोले जाएँ तो वे वाक्य नहीं कहलाते|
5 पदक्रम –
वाक्य के सही अर्थ को जानने के लिए शब्दों का सही पदक्रम का होना जरूरी है| पदक्रम के अभाव में वाक्य का सही अर्थ नहीं निकलता |उदाहरण के रुप में हिन्दी में प्राय: कर्ता के बाद कर्म और उसके बाद क्रिया
का प्रयोग किया जाता है | जैसे – “ मोहन
पत्र लिखता है|” किन्तु पत्र मोहन लिखता है या “लिखता है मोहन
पत्र” ऐसा शब्द समूह वाक्य नहीं कहलाते क्योंकि इनमें पदक्रम नहीं हैं|
i)
सारे देश के नागरिक कर्तव्यनिष्ठ
हैं |
देश
के सारे नागरिक कर्तव्यनिष्ठ हैं |
Ii) गाय का ताकतवर दूध होता है |
गाय
का दूध ताकतवर होता है |
6 अन्वय – इसका अर्थ है – मेल | वाक्य में कर्ता, लिंग, कारक
आदि में होना जरूरी है| इसके बिना वाक्य का पूर्ण अर्थ नहीं निकलता
|
उदाहरण –i) मेरा देश में अनेक नदियां बहता हैं |
मेरा
देश में अनेक नदियां बहती हैं |
Ii) चूहें किताबें
कुतर गई |
चूहे
किताबें कुतर गए |
वाक्य की संरचना के आधार पर उसको दो भागों में विभाजित
किया जाता है|
1 उद्येश्य 2 विधेय
1 उद्येश्य – वाक्य का वह अंग, जिसके विषय में कुछ कहा जाए, उसे उद्येश्य कहते हैं|
उदाहरण-
1 राम सो रहा है |
2 राजू खाना खा रहा है|
3 किसान फलों के पेड़ भी लगाता है |
4 जवान देश की रक्षा करते है |
इन वाक्यों में ‘राम’, ‘राजू’, ‘किसान’ और ‘जवान’ के के विषय में बताया जा रहा है | इसलिए ‘राम’, ‘राजू’, ‘किसान’ और ‘जवान’ उद्येश्य हैं |
विधेय- वाक्य में उद्येश्य के बारे में जो कुछ कहा
जाए, उसे विधेय कहते हैं |
उदारहण –
1 कर्ण खेल रहा है |
2 चित्रकार चित्र बनाता है |
3 चित्रा गीत गा रही है |
4 मंजरी बस से शहर गई |
इन वाक्यों
में ‘खेल रहा है’, ‘चित्र बनाता है’, ‘गीत गा रही है’ और ‘बस से शहर गई’ वाक्यों के विधेय हैं |
रचना के आधार पर वाक्य के भेद तीन होते हैं –
क ) सरल वाक्य
ख ) संयुक्त वाक्य ग) मिश्र वाक्य
क ) सरल या साधारण वाक्य – इसमें एक या एक से अधिक उद्येश्य
और एक विधेय होते है अथवा जिस वाक्य में एक ही मुख्य क्रिया हो, उसे सरल वाक्य कहते हैं| जैसे-
वह ज़ोर ज़ोर से हँसा |
मैं और मेरा भाई शादी में जाएंगे |
मोहन पार्क
जा रहा होगा |
वह अत्याचार किए जा रहा था |
पाकिस्तान वर्षों से आतंकवाद फैलाए जा रहा
था|
इन वाक्यों में रेखांकित क्रियाएँ मुख्य क्रियाएँ
हैं |
संयुक्त वाक्य – जिन वाक्यों में दो या दो से अधिक
स्वतंत्र उपवाक्य किसी समुच्चयबोधक अव्यय से जुड़े होते हैं, उन्हें संयुक्त वाक्य कहते हैं|
उदाहरण :- माँ बाज़ार गई और सब्जियाँ लेकर आई
|
आप खाना खाए और आराम करें |
राम बीमार है, इसलिए
स्कूल नहीं आया |
विद्यार्थी परिश्रमी होता है तो अवश्य
सफल होता हैं |
आप चाय लेंगे या कॉफी ?
संयुक्त वाक्य की पहचान
दो उपवाक्यों के बीच समानाधिकरण संबंध होता है |
दो या अधिक मुख्य या स्वतंत्र उपवाक्य होते है |
उपवाक्य होते हुए भी उनमें पूर्ण अर्थ का बोध होता
है |
मुख्य वाक्य अपने पूर्ण अर्थ की अभिव्यक्ति के लिए
दूसरे उपवाक्य पर आश्रित नहीं रहता हैं |मोहन दिल्ली जाएगा
और शीला यहीं रहेगी |
क) माता
जी बाज़ार गई और बच्चों के लिए खिलौने लेकर आई |
ख) यहाँ आप रह सकते है या आपका भाई रह सकता है |
कभी-कभी संयुक्त वाक्यों में
समुच्चयबोधक अवयव चिह्नों का लोप होता है |
क) रहने
वाले रहेंगे, जाने वाले चले जाएंगे |
ख) क्या सोचा था, क्या हो
गया |
ग) काम
किया है, पैसा तो मागूँगा ही |
संयुक्त
वाक्यों के भेद
1 संयोजक संयुक्त वाक्य- जिन संयुक्त वाक्यों में
उपवाक्य दो कार्य- व्यापारों या स्थितियों को जोड़ने का कार्य करते हैं: जैसे –
क) मैं
दिल्ली गया था और मेरी पत्नी आगरा |
ख) यहाँ
मैं बैठूँगा तथा उधर दूसरे लोग बैठेंगे |
ग) आपके
लिए खिचड़ी बनी है एवं मेरे लिए चावल |
2 विभाजक
संयुक्त वाक्य – जिन संयुक्त वाक्यों से आए उपवाक्यों से दो
स्थितियों या कार्य-व्यापार के बीच विकल्प दिखाया जाए या एक को स्वीकार किया जाए
तथा दूसरे को त्यागा जाए, वे विभाजक संयुक्त वाक्य कहे जाते
है | इनमें या, अथवा, या-या, न-न, कि आदि
समुच्चयबोधक अव्ययों का प्रयोग किया जाता है; जैसे –
क) आप
पहुँच जाएँगे या मैं फोन करूँ ?
ख) थी
से काम करो अथवा नौकरी छोड़ दो |
ग) मैं
न आपको पहचानता हूँ न आपके पिता जी को |
घ) न
तो शीला ही आई, न अपने बेटे को भेजा |
ङ) आप
मेरे साथ रहेंगे कि मोहन के साथ |
3 विरोधसूचक
संयुक्त वाक्य – जब उपवाक्य के बीच विरोध का बोध हो तो ऐसे संयुक्त
वाक्य विरोधवाची संयुक्त वाक्य कहलाते हैं | ये प्राय: मगर, पर,लेकिन, बल्कि आदि अव्ययों
से जुड़े रहते हैं ; जैसे-
क) वह
खेलने में तो अच्छा है मगर पढ़ाई-लिखाई नहीं करता|
ख) मैंने
उसे बहुत समझाया पर वह नहीं मानी|
ग) हम
जाना नहीं चाहते थे पर आपके पिताजी नहीं माने|
4 परिणामवाची
संयुक्त वाक्य –जब एक उपवाक्य से कार्य का तथा दूसरे से उसके
परिणाम का बोध होता है तो वे परिणामवाची संयुक्त वाक्य कहलाते हैं|
इनके उपवाक्य प्राय: इसलिए, अतः, सो आदि अव्ययों से जुड़े होते हैं; जैसे-
क ) आज बाज़ार बंद है इसलिए
कुछ नहीं मिलेगा|
ख ) वह बहुत बीमार था अतः
चुप ही बैठा रहा |
ग ) वह आना नहीं चाहता था
सो झूठ बोलकर चला गया |
मिश्र वाक्य
संयुक्त वाक्यों में जहाँ
प्रत्येक उपवाक्य स्वतंत्र उपवाक्य होता है,वहाँ मिश्र
वाक्यों में एक उपवाक्य तो स्वतंत्र
उपवाक्य होता है तथा शेष स्वतंत्र उपवाक्य
पर आश्रित रहने के कारण आश्रित उपवाक्य कहलाता
है| स्वतंत्र उपवाक्य को प्रधान उपवाक्य भी कहा जाता
है|
प्रधान उपवाक्य आश्रित उपवाक्य
क ) मैं उस लड़की से मिला था जिसकी किताब खो गई है|
ख ) मैंने वहीं मकान खरीदा है जहाँ आप रहते हो |
ग ) पिताजी ने मुझसे कहा कि वे बीमार है |
मिश्र वाक्य के उपवाक्य प्राय: कि, जो, जब,तब,तो, अगर,जिसने, ज्योंही, जितना-उतना,जिधर-उधर,क्योंकि, यदि तो, ताकि यद्यपि-तथापि
आदि समुच्चयबोधक अवयव से जुड़े होते हैं | मिश्र वाक्यों के आश्रित उपवाक्य, वाक्य के आरंभ, मध्य तथा अंत में तीनों ही स्थानों पर आ सकते हैं ;
जैसे-
क) जो लड़का यहाँ आया था, वह बहुत
बीमार है |
ख) वह
लड़का, जो
कल यहाँ आया था, बहुत बीमार है |
ग) वह
लड़का बहुत बीमार है जो कल यहाँ आया था |
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