पाठ
5 मिठाईवाला
इस कहानी
में उस व्यक्ति का मर्मस्पर्शी वर्णन है,जो खिलौनेवाला मुरलीवाले और मिठाईवाले के रूप मे
बच्चों के बीच
जाता है ओर उन्हे खुशियां देकर अपने दुख
दूर करने की कोशिश करता है |
खिलौनेवाला और बच्चे
– खिलौनेवाला अपने खिलौने बेचने के लिए मादक और
मधुर,स्वर से गाता –‘बच्चों
को बहलानेवाला ,खिलौनेवाला’| उसके मुँह से अधूरा
–सा वाक्य सुनते ही बच्चों मे हलचल मच जाती थी| बच्चे अपना खेलना भूलकर उसके पास चले आते थे| युवतियाँ अपने दरवाजे पर
पड़ी चिक उठाकर छज्जों से नीचे झाँकने लगती थी| बच्चों से
घिरा खिलौनेवाला अपने खिलौनों की पेटी खोलकर बच्चों के पास बैठ जाता है| खिलौने देखकर पुलकित बच्चे आपनी तोतली आवाज में उनका मूल्य पूछते है| वह बच्चों की छोटी-छोटी ऊँगलियों में दबे पैसे लेकर खिलौने दे देता था|
बच्चे अपने खेल में मग्न हो जाते है और वह आगे बढ़ जाता|
राय विजय बहादुर के बच्चे
चुन्नु-मुन्नू भी खिलौने लाए थे और खुशी से अपने माँ-बाप को दिखा रहे थे | उनकी
माँ रोहणी ने पूछा की कितने में लिया है? मुन्नु बोला “दो
पैछे मे” रोहणी सोचने लगी कि इतने सस्ते
खिलौने कैसे दे गया? इस विषय में उसने ज़्यादा सोचना ठीक न
समझा |
मुरलीवाला
और बच्चे –छह मास बाद नगर में एक मुरलीवाले के आने की चर्चा जोरों पर थी | लोग मानते थे कि वह मुरली बजाने में निपुण है वह मुरली बजाकर,गाना सुनाकर दो पैसे में मुरली बेचता है | इससे पता
नहीं उसे क्या मिलता होगा | मुरलीवाला तीस- बतीस साल का गोरा
,दुबला पतला नवयुवक था जो बीकानेरी साफा बाँधता था | लोगो ने सोचा था कि यह वही खिलौनेवाला तो नहीं है |
उसकी चर्चा तो रोज होती है | नगर की प्रत्येक गली में उसका मादक स्वर सुनाई देता | रोहणी ने भी याद किया कि वह इसी प्रकार
गाकर खिलौने बेचा करता था | उसने अपने पति से
चुन्नु-मुन्नु के लिए मुरली लेने की बात
कही |उसके पति ने मुरली वाले को आवाज दी |मुरलीवाले के साथ बच्चों का झुंड भी आ गया | बच्चे
एक साथ कह उठे ‘अम बी लेंदे मुरली और अम बी लेंदे मुरली |’ मुरलीवाले ने कहा कि मै सबको देकर जाऊँगा | विजय
बाबू के दम पूछने पर उसने बताया कि है तो तीन पैसे की ,पर दो
पैसे मे लगा लूँगा | विजय बाबू बोले “तुम
लोगों को झूठ बोलने की आदत होती है सभी को दो पैसे मे देते होंगे ,पर मुझ पर एहसान लाद रहे हो | मुरलीवाले ने बताया की
हजारों मुरलियाँ एक साथ बनवाने पर यह दो पैसे की पड़ी हैं |विजय
बाबू ने उससे दो मुरलियाँ लीं और अन्य बच्चों को मुरलियाँ देकर वह चला गया |एक बच्चे के पास पैसे न थे उसने उस बच्चे को अपनी माँ से पैसे लेने का
उपाय बताकार एक मुरली दे दी और चला गया |
मुरलीवाला काफी दिन तक वापस नहीं आया ,पर अपनी सहृदयता और सस्ती
मुरलियाँ बेचने की अमिट छाप सबके दिलों पर छोड़ गया |
उसकी स्नेह आवाज़ को रोहणी अक्सर याद किया करती थी |
मिठाई
वाला और बच्चे- सर्दियों के दिन थे | इस बार वह आठ महीने के
बाद आया था, पर अपने नए रूप में
–मिठाईवाला बनकर| उसके मुंह से ‘बच्चों को बहलाने वाला ,मिठाईवाला’ | यह सुनकर
रोहिणी छत से नीचे आ गई और बच्चों की दादी
से चुन्नु-मुन्नू के लिए मिठाइयाँ खरीदने के लिए मिठाई वाले को बुलाने के
लिए कहा |दादी ने उससे से एक पैसे की पच्चीस न देने पर बीस देने की बात कह कर उससे
से चार पैसे की मिठाइयाँ देने के लिए कहा | रोहिणी ने उसके बारे में पूछने पर उसे
बताया कि पहले भी खिलौने व मुरली बेचने आ चुका है | दादी व
रोहिणी के बल देने पर पूछने पर उसने बताया कि कभी व नगर का धनी व्यापारी था | उसके बच्चे और सुंदर सी पत्नी थी | पर समय का खेल, अब उसके पास कुछ भी नहीं है | इन बच्चों को जब उछलते –कूदते देखता है तो
इनमें अपने बच्चों कि झलक पा लेता है |
इसी समय चुन्नु-मुन्नू बाहर से आकर मिठाइयाँ लेने कि अपनी माँ से जिद
करते हैं | मिठाईवाले ने मिठाईयों की एक थैली निकालकर चुन्नु-मुन्नू को दे दी और
बच्चों को बहलानेवाला मिठाईवाला गाता हुआ आगे चला गया |
कठिन
शब्दार्थ
मधुर :मीठा ; उपयुक्त: सही ; उद्यानों : बगीचों; पुलकित होना : प्रसन्न होना: झुंड :
समूह ; अप्रतिभ : उदास ; दस्तूर : रिवाज ; स्नेहसिक्त:
प्रेमभरी ; विस्मय: हैरान ; क्षीण : झट; आजुनूलम्बित : घुटनों तक ; हर्ष : खुशी ; संशय : संदेह ; विस्मय : हैरान ; व्यर्थ : बेकार ; उत्सुक : जिज्ञासु ; अतिशय : अत्यधिक ; वैभव
: ऐश्वर्य ; अठखेलियाँ : बच्चों के क्रियाकलाप
मुहावरे – प्राण होना – अत्यधिक
प्रिय होना; कोलाहल मचा रहना : शोर शराबा बना रहना ; घुल-घुलकर मरना – दुख सहते हुए मरना |
प्रश्न ) मिठाईवाला अलग – अलग चीजे क्यों
बेचता था और वह महीनों के बाद क्यों आता था ?
उत्तर ) मिठाईवाला अलग – अलग चीजे
इसलिए बेचता था,
जिससे बच्चों और लोगों को उसकी वस्तुओं में आकर्षण बना रहे |
और वह महीनों के बाद इसलिए आता था क्योंकि उसका अपना दूसरा व्यापार भी था | वह हर बार नई चीज़ बेचने के लिए लाता था
जिसे बनवाने में उसे समय लगता था |
प्रश्न ) मिठाई वाले में वे कौन से गुण थे,
जिनकी वजह से बच्चे तो बच्चे ,बड़े भी उसकी ओर खिंचे चले आते
थे ?
उत्तर ) वह अत्यंत मधुर,
मादक स्वर में गाकर अपना समान बेचा करता था |
2) वह अत्यंत विनम्र तथा मृदु भाषी
था
3) बच्चों पर गुस्सा नहीं करता था और पैसे न होने पर उनकी पसंद की वस्तुएँ
दे दिया करता था |
वह हर बार नई-नई वस्तुएँ लेकर बेचा करता
था |
प्रश्न ) खिलौने वाले के आने पर बच्चों की
क्या प्रतिक्रिया होती थी ?
उत्तर ) बच्चों में हलचल मच जाती थी | वे अपने अपने खेल छोडकर
घरों,गलियों,उद्यानों से बाहर आ जाते थे |
उसके पास आने की जल्दी में उन्हें अपनी गिरती टोपी ,पार्क,में छूटे जूते या कपड़े का जरा भी ध्यान नही रह जाता था |
प्रश्न ) रोहिणी को मुरली वाले के स्वर से
खिलौने वाले का स्मरण क्यों हो आया ?
उत्तर ) मुरलीवाला “बच्चों को बहलानेवाला ,
खिलोनेवाला “की तरह ही गाकर सामान बेच रहा था |
उसका स्वर मुरलीवाले की तरह ही मादक और मधुर्व था |उसे
मुरलीवाले की आवाज़ जानी पहचानी सी लगी |
प्रश्न ) किसकी बात सुनकर मिठाईवाला भावुक
हो गया था? उसने इन व्यवसायों को अपनाने का क्या कारण बताया?
उत्तर )दादी की बात सुनकर मिठाई वाला
भावुक हो गया , उसे अपना बिता समय याद आया जब वह
नगर का प्रतिष्ठित व्यक्ति होता था | उसकी सुंदर सी पत्नी और
दो छोटे छोटे बच्चे थे |समय
की गति के साथ वे अब नहीं रहे
इसलिए भावुक हो गया था | उसने इन व्यवसायों को अपनाने
का कारण बताया कि उसे इन बच्चों में अपने
बच्चों की झलक मिलती थी उसे लगता था की ये खिलौने, मिठाइयाँ, मुरलियाँ सब अपने बच्चों को ही दे रहा हूँ |
प्रश्न)’ अब इस बार ये पैसे
न लूँगा ‘- कहानी के अंत में मिठाईवाले ने ऐसा क्यों कहा ?
उत्तर ) उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि दादी
के पूछने पर मिठाईवाला बहुत भावुक हो गया था |उसे अपने च्चोते-छोटे
दोनों बच्चों कि याद हो आई थी |उसने समझ लिया होगा कि ये
मिठाइयाँ चुन्नु-मुन्नु को नहीं ,बल्कि अपने बच्चों को दे
रहा है |
भाषा की बात
प्रश्न)
मिठाईवाला
बोलनेवाली गुड़िया
·
ऊपर ‘वाला
‘ का प्रयोग है |
क ) वाला से पहले आने वाले शब्द संज्ञा ,
सर्वनाम, विशेषण आदि में से क्या है ?
क)
ऊपर लिखे वाक्यांशों
में इनका प्रयोग करे |
उत्तर ) क) ‘
वाला ‘ से पहले आने वाले शब्द मिठाई संज्ञा तथा ‘बोलनेवाली ‘ विशेषण है |
ख ) ऊपर लिखे वाक्यांशों में उनका प्रयोग
संज्ञा सूचक शब्द (कर्ता) बनाने के लिए किया गया है |
प्रश्न )
हाट – मेले , आदि आयोजनों में कौन –कौन सी चीजें आपको सबसे ज्यादा आकर्षित करती है ? अब बताइये
कि-उनको सजाने –बनाने में किसका हाथ होगा ? उन चहेरो के बारे में लिखिए |
उत्तर ) हाट – मेले , आदि आयोजनों में खिलौनों, मिठाइयों ,तथा कपड़ों की दुकान पर सजी चीजें सबसे
अधिक आकर्षित करती है |इनको सजाने ,बनाने में अनेक कारीगरों तथा मजदूरों का हाथ होता है, जो अथक परिश्रम से इन्हें सजाते –सँवारते है |
लगातार परिश्रम से श्रमिक का बाहरी चहेरा सुंदर नहीं रह जाता है परंतु इनकी बनाई
वस्तुएँ हमें ललचाने पर विवश कर देती है |