Sunday, July 11, 2021

पाठ 4 दीवानों की हस्ती

 

पाठ 4 दीवानों की हस्ती

                    -भगवतीचरण वर्मा

प्रश्न) कवि अपने आने को उल्लास और जाने को आँसू बनकर बह जाना क्यों कहते है?

उत्तर ) कवि बेफिक्री भरा जीवन जीना वाला व्यक्ति है| वह जहां भी जाता है मस्ती का आलम साथ लेकर जाता है| उससे मिलकर लोगों के मन प्रसन्न हो जाते है|पर जब वह उस स्थान को छोड़कर जाता है तब उसे और वहाँ के लोगों को दुख होता है|

प्रश्न) भिखमंगों की दुनिया में बेरोक प्यार लुटनेवाला कवि ऐसा क्यों कहता है कि वह अपने हृदय पर असफलता का एक निशान भार कि तरह लेकर जा रहा है? क्या वह निराश है या प्रसन्न है?

उत्तर ) यह दुनिया केवल लेना जानती है,देना नहीं| कवि ने भी इस दुनिया को प्यार दिया पर इसके बदले में उसे वह प्यार नहीं मिला,जिसकी वह आशा करता था |कवि  निराश है , वह समझता है कि प्यार और खुशियाँ लोगों के जीवन में भरने में असफल रहा | यह दुनिया अभी सांसरिक विषयों में उलझी हुई है|इससे लगता है कि कवि निराश है|

प्रश्न ) कविता में ऐसी कौन सी बात है जो आपको अच्छी लगी?

उत्तर ) कविता में कवि का जीवन के प्रति दृष्टिकोण अच्छा लगा | कवि कहते है कि हम सबके सुख दुख एक है |

हमें इन सुखों-दुखों को एक साथ भोगना पड़ता है | हमें दोनों परिस्थितियों का सामना समान भाव से करना चाहिए|

ऐसा दृष्टिकोण रखने वाला व्यक्ति ही सुखी रह सकता है|

भाषा की बात

संतुष्टि के लिए कवि ने छककर जी भरकर और खुलकर जैसे शब्दों का प्रयोग किया है | इसी भाव को व्यक्त करने वाले कुछ और शब्द सोचकर लिखिए, जैसे –हँसकर , गाकर |

उत्तर ) 1खींचकर

     2 पीकर

     3 मुसकराकर

     4 देकर

     5 मस्त होकर    6 सराबोर होकर

Saturday, July 10, 2021

पाठ 10 वाख -ललद्यद

 

पाठ 10 वाख

                                               -ललद्यद

प्रश्न)1 रस्सी यहाँ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और वह कैसी है ?

उत्तर) यहाँ रस्सी शब्द का प्रयोग मनुष्य के साँस या प्राण के लिए हुआ है,जिसके सहारे वह शरीर –रूपी नाव को खींच रहा है |वह रस्सी बहुत ही नाज़ुक  है| वह कभी भी टूट सकती है इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता|

प्रश्न) 2कवयित्री द्वारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ क्यों हो रहे है ?

उत्तर) कवयित्री लोभ, मोह-माया आदि से मुक्त नहीं हो पाई है| वह कोरी प्रभु भक्ति के सहारे भवसागर पार करना चाहती हैं| उसकी साँसो की डोरी अत्यंत कमजोर है, इसलिए उसके द्वारा मुक्ति के लिए किए गए प्रयास विफल हो रहे हैं|

प्रश्न)3 कवयित्री का घर जाने की चाह से क्या तात्पर्य है?

उत्तर) घर जाने की चाह का तात्पर्य है-इस भवसागर से मुक्ति पाकर अपने प्रभु की शरण में जाने से है | वह परमात्मा की शरण को ही अपना वास्तविक घर मानती है|

प्रश्न)4 भाव सपष्ट कीजिये-

(क)  जेब टटोली कौड़ी न पाई|

(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं ,न खाकर बनेगा अहंकारी|

उत्तर) (क) भाव – कवयित्री ने अपना जीवन सांसरिक विषयों में फँसकर गँवा दिया| उसने जीवन के अंतिम समये में अपने जीवन का लेखा-जोखा देखा तो उस भक्ति के फलस्वरूप प्रभु को देने लायक उसके पास कुछ भी न था |

(ख)भाव – इन पंक्तियों में मनुष्य को सांसरिक भोग तथा त्याग के बीच का मध्यम मार्ग अपनाने की सलाह दी है की विषय- वासनाओ के अधिकाधिक भोग से कुछ मिलनेवाला नहीं है तथा भोगों से विमुखता एवं त्याग की भावना से मन में अहंकार पैदा होगा, इसलिए मध्यम मार्ग अपनाना चाहिए|  

प्रश्न) 5 बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए ललद्यद ने क्या उपाय सुझाया है?

उत्तर ) बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए कवयित्री  ने निम्नलिखित उपाय अपनाने का सुझाव दिया है-

i)        मनुष्य को सांसरिक विषयों में अधिक लिप्त नहीं रहना चाहिए | उसे बीच का रास्ता अपनाकर सन्यमपूर्वक जीवन जीना चाहिए |

ii)       प्रभु की सच्ची भक्ति करनी चाहिए |

iii)       मनुष्य को सभी प्राणियों को समान दृष्टि से देखना चाहिए|

प्रश्न) 6 ज्ञानी से कवयित्री का क्या अभिप्राय है?

उत्तर ) ज्ञानी का अभिप्राय: है – हिन्दू-मुसलमान दोनों में कोई अंतर न समझनेवाला,क्योंकि दोनों ही उसी प्रभु की कृति  हैं तथा अपने –आप को पहचानने या आत्मज्ञान रखने वाले  व्यक्ति है| आत्मा तो उस परमात्मा का ही एक अंश है|

प्रश्न)7 कच्चे सकोरे का क्या अर्थ है? कवयित्री ने अपने प्रयासों के लिए इसका प्रयोग क्यों किया है?

उत्तर ) कच्चे सकोरे का अर्थ है –मिट्टी के बने छोटे-छोटे कच्चे पात्र | कवयित्री ने इसका प्रयोग इसलिए किया है, क्योंकि इन कच्चे बर्तनों में पानी टपक-टपकर बह जाता है और कुछ भी नहीं अंत में बचता है,उसी प्रकार कवयित्री प्रभु को पाने का जो प्रयास कर रही है, वह व्यर्थ जा रहा है |

Monday, July 5, 2021

पाठ 5 मिठाईवाला

 

पाठ 5    मिठाईवाला

इस कहानी में  उस व्यक्ति का मर्मस्पर्शी वर्णन है,जो  खिलौनेवाला मुरलीवाले और मिठाईवाले  के रूप मे  बच्चों  के  बीच

     जाता है ओर उन्हे खुशियां देकर अपने दुख  दूर करने की कोशिश  करता है |

खिलौनेवाला और बच्चे खिलौनेवाला अपने खिलौने बेचने के लिए मादक और मधुर,स्वर से गाता –बच्चों को बहलानेवाला ,खिलौनेवाला’| उसके मुँह से अधूरा –सा वाक्य सुनते ही बच्चों मे हलचल मच जाती थी| बच्चे अपना खेलना भूलकर उसके पास चले आते थे| युवतियाँ अपने दरवाजे पर पड़ी चिक उठाकर छज्जों से नीचे झाँकने लगती थी| बच्चों से घिरा खिलौनेवाला अपने खिलौनों की पेटी खोलकर बच्चों के पास बैठ जाता है| खिलौने देखकर पुलकित बच्चे आपनी तोतली आवाज में उनका मूल्य पूछते है| वह बच्चों की छोटी-छोटी ऊँगलियों में दबे पैसे लेकर खिलौने दे देता था| बच्चे अपने खेल में मग्न हो जाते है और वह आगे बढ़ जाता|
          राय विजय बहादुर के बच्चे चुन्नु-मुन्नू भी खिलौने लाए थे और खुशी से अपने माँ-बाप  को दिखा रहे थे
| उनकी माँ रोहणी ने पूछा की कितने में लिया है? मुन्नु बोला “दो पैछे मे” रोहणी सोचने  लगी कि इतने सस्ते खिलौने कैसे दे गया? इस विषय में उसने ज़्यादा सोचना ठीक न समझा |

मुरलीवाला और बच्चे –छह मास बाद नगर में एक मुरलीवाले के आने की  चर्चा जोरों पर थी | लोग मानते थे कि वह मुरली बजाने में निपुण है वह मुरली बजाकर,गाना सुनाकर दो पैसे में मुरली बेचता है | इससे पता नहीं उसे क्या मिलता होगा | मुरलीवाला तीस- बतीस साल का गोरा ,दुबला पतला नवयुवक था जो बीकानेरी साफा बाँधता था | लोगो ने सोचा था कि यह वही खिलौनेवाला तो नहीं है | उसकी चर्चा तो  रोज होती है | नगर की प्रत्येक गली में उसका मादक स्वर सुनाई देता | रोहणी ने भी याद किया कि वह इसी प्रकार  गाकर खिलौने बेचा करता था | उसने अपने पति से चुन्नु-मुन्नु के लिए मुरली लेने  की बात कही |उसके पति ने मुरली वाले को आवाज दी |मुरलीवाले के साथ बच्चों का झुंड भी आ गया | बच्चे एक साथ कह उठे अम बी लेंदे मुरली और अम बी लेंदे मुरली |’ मुरलीवाले ने कहा कि मै सबको देकर जाऊँगा | विजय बाबू के दम पूछने पर उसने बताया कि है तो तीन पैसे की ,पर दो पैसे मे लगा लूँगा | विजय बाबू बोले तुम लोगों को झूठ बोलने की आदत होती है सभी को दो पैसे मे देते होंगे ,पर मुझ पर एहसान लाद रहे हो | मुरलीवाले ने बताया की हजारों मुरलियाँ एक साथ बनवाने पर यह दो पैसे की पड़ी हैं |विजय बाबू ने उससे दो मुरलियाँ लीं और अन्य बच्चों को मुरलियाँ देकर वह चला गया |एक बच्चे के पास पैसे न थे उसने उस बच्चे को अपनी माँ से पैसे लेने का उपाय बताकार  एक मुरली दे दी और चला गया |

     मुरलीवाला काफी दिन तक वापस नहीं आया ,पर अपनी सहृदयता और सस्ती  मुरलियाँ बेचने की अमिट छाप सबके दिलों पर छोड़ गया | उसकी स्नेह आवाज़ को रोहणी अक्सर याद किया करती थी |

मिठाई वाला और बच्चे- सर्दियों के दिन थे | इस बार वह आठ महीने के बाद आया था,  पर अपने नए रूप में –मिठाईवाला बनकर| उसके मुंह से ‘बच्चों को बहलाने वाला ,मिठाईवाला’ | यह सुनकर रोहिणी छत से नीचे आ गई और बच्चों की दादी  से चुन्नु-मुन्नू के लिए मिठाइयाँ खरीदने के लिए मिठाई वाले को बुलाने के लिए कहा |दादी ने उससे से एक पैसे की पच्चीस न देने पर बीस देने की बात कह कर उससे से चार पैसे की मिठाइयाँ देने के लिए कहा | रोहिणी ने उसके बारे में पूछने पर उसे बताया कि पहले भी खिलौने व मुरली बेचने आ चुका है | दादी व रोहिणी के बल देने पर पूछने पर उसने बताया कि कभी व नगर का धनी व्यापारी था | उसके बच्चे और सुंदर सी पत्नी थी | पर समय का खेल, अब उसके पास कुछ भी नहीं है |  इन बच्चों को जब उछलते –कूदते देखता है तो इनमें अपने बच्चों कि झलक पा लेता है |

   इसी समय चुन्नु-मुन्नू  बाहर से आकर मिठाइयाँ लेने कि अपनी माँ से जिद करते हैं | मिठाईवाले ने मिठाईयों  की एक थैली निकालकर चुन्नु-मुन्नू को दे दी और बच्चों को बहलानेवाला मिठाईवाला गाता हुआ आगे चला गया |

कठिन शब्दार्थ

मधुर :मीठा ; उपयुक्त: सही ; उद्यानों : बगीचों; पुलकित होना : प्रसन्न होना: झुंड : समूह ; अप्रतिभ : उदास ; दस्तूर : रिवाज ; स्नेहसिक्त: प्रेमभरी ; विस्मय: हैरान ; क्षीण : झट;  आजुनूलम्बित : घुटनों तक ; हर्ष : खुशी ; संशय : संदेह ; विस्मय : हैरान ; व्यर्थ : बेकार ; उत्सुक : जिज्ञासु ; अतिशय : अत्यधिक ; वैभव : ऐश्वर्य ; अठखेलियाँ : बच्चों के क्रियाकलाप

मुहावरे – प्राण होना – अत्यधिक प्रिय होना; कोलाहल मचा रहना : शोर शराबा बना रहना ; घुल-घुलकर मरना – दुख सहते हुए मरना |

प्रश्न ) मिठाईवाला अलग – अलग चीजे क्यों बेचता था और वह महीनों के बाद क्यों आता था ?

उत्तर ) मिठाईवाला अलग – अलग चीजे इसलिए  बेचता था, जिससे बच्चों और लोगों को उसकी वस्तुओं में आकर्षण बना रहे | और वह महीनों के बाद इसलिए आता था क्योंकि उसका अपना दूसरा व्यापार भी था | वह हर बार नई चीज़ बेचने के लिए लाता था  जिसे बनवाने में उसे समय लगता था |

प्रश्न ) मिठाई वाले में वे कौन से गुण थे, जिनकी वजह से बच्चे तो बच्चे ,बड़े भी उसकी ओर खिंचे चले आते थे ?

उत्तर ) वह अत्यंत मधुर, मादक स्वर में गाकर अपना समान बेचा करता था |

         2) वह अत्यंत विनम्र तथा मृदु भाषी था

         3) बच्चों पर गुस्सा नहीं करता था और पैसे न होने पर उनकी पसंद की वस्तुएँ दे दिया करता था |

वह हर बार नई-नई वस्तुएँ लेकर बेचा करता था |

प्रश्न ) खिलौने वाले के आने पर बच्चों की क्या प्रतिक्रिया  होती थी ?

उत्तर ) बच्चों में हलचल मच जाती  थी | वे अपने अपने खेल छोडकर घरों,गलियों,उद्यानों से  बाहर आ जाते थे |

    उसके पास आने की जल्दी में उन्हें अपनी गिरती टोपी ,पार्क,में छूटे जूते या कपड़े का जरा भी ध्यान नही रह जाता था |

प्रश्न ) रोहिणी को मुरली वाले के स्वर से खिलौने वाले  का स्मरण क्यों हो आया ?

उत्तर ) मुरलीवाला “बच्चों को बहलानेवाला , खिलोनेवाला “की तरह ही गाकर सामान बेच रहा था |

       उसका स्वर मुरलीवाले की तरह ही मादक और मधुर्व था |उसे मुरलीवाले की आवाज़ जानी पहचानी सी  लगी |

प्रश्न ) किसकी बात सुनकर मिठाईवाला भावुक हो गया था? उसने इन व्यवसायों को अपनाने का क्या कारण बताया?

उत्तर )दादी की बात सुनकर मिठाई वाला भावुक हो गया , उसे अपना बिता समय याद आया जब  वह नगर का प्रतिष्ठित व्यक्ति होता था | उसकी सुंदर सी पत्नी और दो छोटे छोटे बच्चे थे |समय  की गति के साथ वे अब नहीं रहे  इसलिए भावुक हो गया था | उसने इन व्यवसायों को अपनाने का  कारण बताया कि उसे इन बच्चों में अपने बच्चों की झलक मिलती थी उसे लगता था की ये खिलौने, मिठाइयाँ, मुरलियाँ सब अपने बच्चों को ही दे रहा हूँ |

प्रश्न) अब इस बार ये पैसे न लूँगा ‘- कहानी के अंत में मिठाईवाले ने ऐसा क्यों कहा ?

उत्तर ) उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि दादी के पूछने पर मिठाईवाला बहुत भावुक हो गया था |उसे अपने च्चोते-छोटे दोनों बच्चों कि याद हो आई थी |उसने समझ लिया होगा कि ये मिठाइयाँ चुन्नु-मुन्नु को नहीं ,बल्कि अपने बच्चों को दे रहा है |

भाषा की बात

प्रश्न)  मिठाईवाला                                            बोलनेवाली गुड़िया

·         ऊपर   वाला का प्रयोग है |

  क ) वाला से पहले आने वाले शब्द संज्ञा , सर्वनाम, विशेषण आदि में से क्या है ?

क)   ऊपर लिखे वाक्यांशों में इनका प्रयोग करे |

उत्तर ) क) वाला से पहले आने वाले शब्द मिठाई संज्ञा तथा  बोलनेवाली विशेषण है |

  ख ) ऊपर लिखे वाक्यांशों में उनका प्रयोग संज्ञा सूचक शब्द (कर्ता) बनाने के लिए किया गया है |

प्रश्न )  हाट – मेले , आदि आयोजनों में कौन –कौन सी चीजें आपको सबसे ज्यादा आकर्षित करती है ?  अब बताइये कि-उनको सजाने –बनाने में किसका हाथ होगा ? उन चहेरो  के बारे में लिखिए |

उत्तर ) हाट – मेले , आदि आयोजनों में खिलौनों, मिठाइयों ,तथा कपड़ों की दुकान पर सजी चीजें  सबसे   अधिक  आकर्षित करती है |इनको  सजाने ,बनाने में अनेक कारीगरों तथा मजदूरों का हाथ होता है, जो अथक परिश्रम से इन्हें सजाते –सँवारते है | लगातार परिश्रम से श्रमिक का बाहरी चहेरा सुंदर नहीं रह जाता है परंतु इनकी बनाई वस्तुएँ हमें ललचाने पर विवश कर देती है |

पाठ 4 कठपुतली

 

पाठ 4

कठपुतली

            (भवानी प्रसाद मिश्र)

1)                          कठपुतली

             गुस्से से उबली बोली –ये धागे

            क्यों हैं मेरे पीछे-आगे?

            इन्हें तोड़ दो;

           मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो|

शब्दार्थ -   कठपुतली : डोरे से बांधकर नचाई जाने वाली काठ की पुतली ;  गुस्से से उबलना : अत्यधिक क्रोध में होना ; पाँवों पर छोड़ना : मुक्त करना |

 प्रसंग -प्रस्तुत काव्य पंक्तियाँ बसंत भाग -2 में संकलित कठपुतली  कविता से ली गई है | इसके रचयिता श्री भवानी प्रसाद मिश्र है |

सरलार्थ – कवि कहता है कि कठपुतलियाँ लम्बे समय से पराधीन होकर जी रही है | उनके मन में स्वतन्त्रता की अभिलाषा जाग उठी है | अपनी पराधीनता को देखकर एक कठपुतली गुस्से से भर उठती है | गुस्से में ही बोल उठती है कि हमारे पीछे इतने धागे क्यों है ? उन्हें बंधन में क्यों रखा गया है ? वह बंधनमुक्त होना चाहती है  और स्वतंत्र होकर अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है |उनके स्वर में विद्रोह का भाव है |

विशेष-    कविता  प्रश्न शैली  में है|

             पुतलियों का मानवीकरण किया गया है |

            स्वतन्त्रता सबको प्रिय है , यह भाव व्यक्त हुआ है |

2 )  सुनकर बोलीं और –और

      कठपुतलियाँ

      कि हाँ

     बहुत दिन हुए

    हमें अपने मन के छंद छुए

   मगर.......

  पहली कठपुतली सोचने लगी –

ये कैसी इच्छा

मेरे मन में जगी?

शब्दार्थ – मन के छंद छुए –मन में खुशी  आना

प्रसंग – पूर्ववत

इन पंक्तियों में कवि ने कठपुतलियों के मन भावों को व्यक्त किया है |

सरलार्थ – एक कठपुतली को दुख से बाहर निकलने के लिए  विद्रोह करता देखकर अन्य कठपुतलियों ने भी उसकी हाँ में हाँ मिलाई | वे कहने लगीं कि हमें बंधन में रहते हुए बहुत दिन बीत गए, न हमारे मन का दुख दूर हुआ और न मन मे खुशी आई जिससे  हम खुश होकर रहे |

          स्वतन्त्रता सबको अच्छी लगती है | लेकिन जब पहली कठपुतली पर सबकी जिम्मेवारी आई तो वह स्वयम् से प्रश्न करने लगती है कि उसके मन में ये कैसी इच्छा जाग उठी ?  इस विषय में बिना सोचे-समझे कदम उठाना उचित नहीं है |

विशेष -  पराधीनता में खुश नहीं रहा जा सकता है , यह भाव प्रकट हो रहा है |

 

 

प्रश्न )  कठपुतली को क्यों गुस्सा आया ?

उत्तर ) कठपुतली के आगे पीछे धागे ही धागे थे ,अर्थात वह कुछ भी करने को स्वतंत्र नहीं थी | वह पराधीन रहकर जीवन बिता रही थी | ऐसा जीवन उसे लंबे समय तक जीना पड़ रहा था | अपनी स्वतन्त्रता की चेतना जागृत होने पर कठपुतली को गुस्सा आया |

 

प्रश्न ) कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है ,लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती ?

उत्तर ) कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है ,लेकिन वह नहीं खड़ी हो पाती है क्योंकि उस पर बाकी कठपुतलियों की भी जिम्मेदारी  आती है | अकेले उसी के स्वतंत्र होने से कोई बात नहीं बनने वाली है | जरूरत है सभी कठपुतलियों के स्वतंत्र होने की |

 

प्रश्न ) पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतली को क्यों अच्छी लगी ?

उत्तर ) पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतली को इसलिए अच्छी लगी क्योंकि वे भी इस बंधनयुक्त  जीवन से मुक्त होना चाहती थी | आखिर स्वतंत्रता सबको अच्छी लगती है |

 

प्रश्न ) बहुत दिन हुए / हमें  अपने मन के छंद छुए |’  इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है ?- 

उत्तर )  बहुत दिन हो गए मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई |

प्रश्न ) नीचे दो-दो स्वतन्त्रता आंदोलन के वर्ष दिये गए है | इन दोनों आंदोलनों के दो-दो स्वतन्त्रता सेनानियों के नाम लिखिए |

 क)  सन्  1857....

सन्  1942 ......

उत्तर )  सन् 1857-  मंगल पांडे .रानी लक्ष्मीबाई

           सन् 1942 -   महात्मा गांधी ,सरदार वल्लभ भाई पटेल |

 

 

 

 

भाषा की बात

प्रश्न ) जब काठ और पुतली  दो शब्द  एक साथ हुए कठपुतली शब्द बन गया और बोलने में सरलता आ गई | इस प्रकार के कुछ और शब्द बनाइए |

उत्तर )  काठ (कठ)  से बना -  कठगुलाब ,  कठफोड़ा

            हाथ (हथ ) से बने शब्द -   हथकंडा ,  हथकड़ी, हथगोला,  हथकरघा ,

           सोना ( सोन) से बने शब्द -   सोन जुही , सोन हला , सोन केला |

         मिट्टी (मठ ) से बने शब्द   -  मठाधीश , मठधारी, मठपति |

 

Sunday, July 4, 2021

पाठ 11 बालगोबिन भक्त (रामवृक्ष बेनीपुरी)

 

पाठ 11 बालगोबिन भक्त

       (रामवृक्ष बेनीपुरी)

प्रश्न) खेतीबाड़ी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भक्त अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के कारण       साधु कहलाते है

उत्तर )वे कबीर के आदर्शों पर चलते थे, उन्हीं के गीत गाते थे| वे शरीर से नश्वर तथा आत्मा को परमात्मा का अंश मानते थे | किसी से सीधी बात करने में संकोच नहीं करते थे, न किसी से झगड़ा करते थे| किसी की चीज़ नहीं छूते थे न ही बिना पूछे व्यवहार करते थे | जो कुछ अनाज उनके खेत में पैदा होता वो कबीरपंथी मठ में ले जाते और उसमें से जो हिस्सा प्रसाद रूप में वापस मिलता उसी से गुजारा चला लेते थे|

प्रश्न) 2 भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेला क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी ?

उत्तर ) क्योंकि की पुत्र की मृत्यु के बाद भगत के बुढ़ापे का सहारा वहीं थी | पुत्रवधू को इस बात की चिंता थी कि यदि वह भी चली गई तो भगत के लिए भोजन कौन बनाएगा| यदि भगत बीमार हो गए ,तो उनकी सेवा कौन करेगा | उसके चले जाने के बाद भगत कि देखभाल करने वाला कोई नहीं था |

प्रश्न) 3 भगत ने अपने बेटे कि मृत्यु के बाद अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त  की ?

उत्तर ) वे कबीर के भक्ति गीत गाकर अपनी भावनाएँ व्यक्त करने लगे | उसके अनुसार उसकी आत्मा परमात्मा के पास ऐसे चली गई मानो कोई विरहिणी अपनी प्रेमी से जा मिली हो| उन दोनों के मिलन से बड़ा आनंद ओर कुछ नहीं हो सकता| इस प्रकार भगत ने शरीर की नश्वरता और आत्मा की अमरता संदेश दिया है|

प्रश्न ) 4 भगत के व्यक्तित्व और उनकी वेषभूषा का अपने शब्दों में चित्र प्रस्तुत करो |

उत्तर ) भगत के व्यक्तित्व:

भगत जी गृहस्थ होते हुए भी सीधे सादे सरल व्यक्ति थे| वास्तव में वे मन से सन्यासी थे | वे अपने किसी काम के लिए दूसरों को कष्ट नहीं देना चाहते थे| बिना अनुमति के किसी की वस्तु को हाथ नहीं लगाते थे |कबीर के आदर्शों का पालन करते थे | वे अलौकिक गायक थे, आत्मा परमात्मा पर उनका अटल विश्वास था|

वेषभूषा:

मँझोले कद के गोरे चिट्टे आदमी थे | उम्र साठ से ऊपर की होगी| लंबी दाड़ी रखते थे , किन्तु उनका चहेरा हमेशा सफेद बालों से ढका रहता था| कपड़े बिलकुल कम पहनते थे | कमर में एक लंगोटी मात्र और सिर पर कबीर पंथी की सी कनफटी टोपी, एक काली कमली उपर ओढ़े रहते थे | माथे पर चन्दन का तिलक व गले में तुलसी की माला पहने रखते थे |

प्रश्न ) बालगोबिन भक्त की दिनचर्या लोगो के अचरज का कारण क्यो थी ?

उत्तर) बालगोबिन भक्त प्रात: जल्दी उठकर गांव से लगभग दो मील दूर नदी पर जाकर स्नान करते थे| वापस आकर खंजड़ी बजाते हुए कबीर के पदों का गान करते थे| वे गर्मी-सर्दी की चिंता किए बिना प्रतिदिन ऐसा करते थे | वे बिना पूछे किसी की वस्तु को छूते भी नहीं थे| उनका इस उम्र में भी नियमों ऐसा पालन करना अचरज का कारण था|

प्रश्न) पाठ के आधार  पर बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ लिखिए |

उत्तर )  कबीर के प्रभु संबंधी पदों का गायन करते थे | उनके गीतों को सुनने वाला हर व्यक्ति मंत्र-मुग्ध हो जाता था| औरतें और बच्चे तो उनके गीतों को गुनगुनाने लग जाते थे |उनके संगीत का हर दिल पर एक विशेष प्रभाव पड़ता था | जब भजन गाते थे तो चारों और एक मधुर गायन छा जाता था|

प्रश्न ) कुछ मार्मिक प्रसंगों के आधार पर यह दिखाई देता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे | पाठ के आधार  पर उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए|

उत्तर ) इस बात को प्रमाणित करने के लिए पाठ के आधार पर कुछ मार्मिक प्रसंग इस प्रकार हैं- पुत्र की मृत्यु पर विलाप न करके उसके शव के सामने आसन जमाकर तल्लीनता से गीत गाना | पुत्र की चिता को अग्नि स्वयं न देकर पुत्रवधू से दिलवाना | इसके साथ पुत्रवधू को उसके भाई के साथ साथ वापस भेज देना ताकि वह पुन: विवाह करके सुखी जीवन व्यतीत कर सके |

प्रश्न ) धान की रोपाई के समय समूचे माहौल को भगत की स्वर लहरियाँ किस तरह चमत्कृत कर देती थीं? उस माहौल का एसएचबीडी चित्र प्रस्तुत करो?

उत्तर ) आषाढ़ की रिमझिम फुहारों के बीच खेतों में धन की रोपाई चल रही थी | ठंडी हवाओं के चलने के साथ-साथ बालगोबिन भगत के कंठ से निकला मधुर संगीत लोगों के मन में मधुर झंकार उत्पन्न कर देता था |लोग उनकी मधुर वाणी को सुनकर गुनगुनाने लगते थे, स्त्रियाँ स्वयं को रोक नहीं पाती थी तथा उनके होंठ गुनगुनाने लगते थे|

रचना और अभिव्यक्ति पर आधारित प्रश्न

प्रश्न ) 9 पाठ के आधार पर बालगोबिन भक्त की श्रद्धा कबीर पर किन-किन रूपों में प्रकट हुई है?

उत्तर ) कबीर की भांति उन्होने भी नर-नारी को समान माना और संसार व शरीर को नश्वर और आत्मा को अमर माना  | वे कबीर की भांति मन को ईश्वर में लगाने की प्रेरणा देते थे| कबीर की भांति जीवन में दिखावे से दूर रहे और सामाजिक परंपराओं का खंडन किया | पुत्रवधू के हाथ से पति की चिता को आग दिलवाकर और उसे स्वयं पुनर्विवाह के लिए प्रेरित किया|

v  प्रश्न ) आपकी दृष्टी  में भगत की  कबीर  पर अगाध श्रद्धा के क्या कारण रहे होंगे ?

v  उत्तर ) भगत की  कबीर  पर अगाध श्रद्धा के अनेक कारण थे- कबीर समाज में प्रचलित रूढिवादी  सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे | वे भगवान के निराकार रूप को मानते थे  जिसमें अंत में आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है | वे गृहस्थी होते हुए भी व्यवहार से साधु थे | बालगोबिन भक्त कबीर की इन विशेषताओं के कारण ही उनके प्रति अगाध श्रद्धा  थी |

प्रश्न) आपकी दृष्टि में भक्त की कबीर पर श्रद्धा के क्या कारण रहे होंगे ?

उत्तर ) कबीर जी समाज में प्रचलित सामाजिक रीति रिवाजों को नहीं मानते थे| वे भगवान के निराकार रूप को मानते थे जिससे मनुष्य के अंत समय में आत्मा का परमात्मा से मिलन होता है| वे गृहस्थ होते  हुए भी स्वभाव से साधु थे| बाल गोबिन भगत इन विशेषताओं के कारण ही उनके प्रति अपार श्रद्धा रखते थे |

प्रश्न) गाँव का सामाजिक – सांस्कृतिक परिवेश आषाढ़ चढ़ते ही उल्लास से क्यों भर जाता था?

उत्तर ) ज्येष्ठ की तपती गर्मी के बाद आषाढ़ मास में बादल उमड़कर वर्षा करने के लिए आ जाते हैं| इससे किसानों के हृदय में खुशी के भाव भर जाते हैं | गाँव के लोग खेतों में काम करने लग जाते हैं| वर्षा की रिमझिम आरंभ हो जाती हैं|

प्रश्न ) “ऊपर की तस्वीर से यह नहीं माना जाए कि बाल गोबिन भक्त साधु थे|” क्या  साधु की पहचान पहनावे के आधार पर होनी चाहिए ? आप किन अधरों पर सुनिश्चित करेंगे की अमुक व्यक्ति साधु है?

उत्तर ) साधु व्यक्ति की पहचान निम्नलिखित  आधार पर होनी चाहिए|

क ) ईश्वर में आस्था होनी चाहिए और जीवन के प्रति समर्पित होना चाहिए |

ख) सच्चे साधु का सरल स्वभाव होना नितांत आवश्यक है | मधुर वाणी सच्चे साधु की अन्य  पहचान है | जो व्यक्ति की सामाजिक बुराइयों का खंडन करता है और उनसे बचकर रहता है वहीं सच्चा साधु है |

प्रश्न ) मोह और  प्रेम में क्या अंतर है?

उत्तर)मोह और प्रेम दो भिन्न भाव हैं | बाल गोबिन भक्त का एक ही बेटा था जो दिमाग से सुस्त था| भगत ने उसका विवाह बड़े ही चाव से किया | जब उसके बेटे की मृत्यु हो गई तब भगत ने बेटे के मोह में पड़कर उसकी मृत्यु को शोक नहीं किया | यहाँ तक की उसकी पत्नी को भी शोक नहीं मनाने दिया | उसने जान लिया कि शरीर नश्वर है और आत्मा अमर है जो शरीर के नष्ट हो जाने पर परमात्मा में विलीन हो जाती है | इस प्रकार उसे अपने बेटे से प्रेम तो था पर मोह नहीं |


Friday, July 2, 2021

पाठ -7 कर्ण

 पाठ -7  कर्ण

प्रश्न 1 पांडवो ने अपनी शिक्षा कहाँ से प्रारम्भ की ?

उत्तर – पांडवो ने पहले कृपाचार्य से और बाद में द्रोणाचार्य से अस्त्र -शस्त्र की शिक्षा पाई |

प्रश्न 2 कर्ण कौन था ?

उत्तर कर्ण कुंती का ज्येष्ठ पुत्र था | जिसका लालन –पालन अधिरथ ने किया था |वह धनुष चलाने में निपुण था और रंगभूमि में आते ही उसने अर्जुन को ललकारा था |

प्रश्न 3 दुर्योधन ने कर्ण को किस देश का राजा बनाया ?

उत्तर- अंगदेश का राजा बनाया |

प्रश्न 4  इन्द्र ने कर्ण से उसके जन्मजात  कवच और  कुंडल की भिक्षा क्यों माँगी ?

उत्तर- इन्द्र को डर था कि भावी युद्ध में कर्ण कि शक्ति से अर्जुन पर विपत्ति आ सकती है इस कारण कर्ण कि ताकत कम करने कि इच्छा से उन्होने उससे यह भिक्षा माँगी थी |

प्रश्न 5 कर्ण को देवराज इन्द्र से क्या वरदान माँगा |

उत्तर कर्ण ने शत्रुओ का संहार करने वाला उनका शक्ति नामक शस्त्र         मांगा|                                                                   

प्रश्न 6 कर्ण ने किससे ब्रह्मास्त्र चलाना सीखा ?

उत्तर परशुराम जी से |

प्रश्न 7 परशुराम जी ने छल से विद्या सीखने पर कर्ण को क्या श्राप दिया ?

उत्तर उन्होंने कहाँ कि जब इस विद्या की जरूरत होगी तो ऐन वक्त पर तुम उसे भूल जाओगे और रणक्षेत्र में तुम्हारे रथ  का पहिया  पृथ्वी में धँस जाएगा | और तुम्हारी सीखी हुई विद्या तुम्हारे कुछ काम नहीं आएगी|  

प्रश्न 8) परशुराम के श्राप का कर्ण पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर ) परशुराम के साथ छल करके कर्ण ने ब्राह्मण वेष में उनसे ब्रह्मास्त्र चलना सीखा | जब परशुराम को यह बात पता चली तो उन्होंने कर्ण को शाप दे दिया, जिसके प्रभाव वश आजीवन इस विद्या को याद रखने वाला कर्ण कुरुक्षेत्र में इसे भूल गया| उसके रथ का पहिया जमीन में धँस गया और वह कृष्ण के संकेत पर अर्जुन के हाथों मारा गया |

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...