Saturday, July 10, 2021

पाठ 10 वाख -ललद्यद

 

पाठ 10 वाख

                                               -ललद्यद

प्रश्न)1 रस्सी यहाँ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और वह कैसी है ?

उत्तर) यहाँ रस्सी शब्द का प्रयोग मनुष्य के साँस या प्राण के लिए हुआ है,जिसके सहारे वह शरीर –रूपी नाव को खींच रहा है |वह रस्सी बहुत ही नाज़ुक  है| वह कभी भी टूट सकती है इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता|

प्रश्न) 2कवयित्री द्वारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ क्यों हो रहे है ?

उत्तर) कवयित्री लोभ, मोह-माया आदि से मुक्त नहीं हो पाई है| वह कोरी प्रभु भक्ति के सहारे भवसागर पार करना चाहती हैं| उसकी साँसो की डोरी अत्यंत कमजोर है, इसलिए उसके द्वारा मुक्ति के लिए किए गए प्रयास विफल हो रहे हैं|

प्रश्न)3 कवयित्री का घर जाने की चाह से क्या तात्पर्य है?

उत्तर) घर जाने की चाह का तात्पर्य है-इस भवसागर से मुक्ति पाकर अपने प्रभु की शरण में जाने से है | वह परमात्मा की शरण को ही अपना वास्तविक घर मानती है|

प्रश्न)4 भाव सपष्ट कीजिये-

(क)  जेब टटोली कौड़ी न पाई|

(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं ,न खाकर बनेगा अहंकारी|

उत्तर) (क) भाव – कवयित्री ने अपना जीवन सांसरिक विषयों में फँसकर गँवा दिया| उसने जीवन के अंतिम समये में अपने जीवन का लेखा-जोखा देखा तो उस भक्ति के फलस्वरूप प्रभु को देने लायक उसके पास कुछ भी न था |

(ख)भाव – इन पंक्तियों में मनुष्य को सांसरिक भोग तथा त्याग के बीच का मध्यम मार्ग अपनाने की सलाह दी है की विषय- वासनाओ के अधिकाधिक भोग से कुछ मिलनेवाला नहीं है तथा भोगों से विमुखता एवं त्याग की भावना से मन में अहंकार पैदा होगा, इसलिए मध्यम मार्ग अपनाना चाहिए|  

प्रश्न) 5 बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए ललद्यद ने क्या उपाय सुझाया है?

उत्तर ) बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए कवयित्री  ने निम्नलिखित उपाय अपनाने का सुझाव दिया है-

i)        मनुष्य को सांसरिक विषयों में अधिक लिप्त नहीं रहना चाहिए | उसे बीच का रास्ता अपनाकर सन्यमपूर्वक जीवन जीना चाहिए |

ii)       प्रभु की सच्ची भक्ति करनी चाहिए |

iii)       मनुष्य को सभी प्राणियों को समान दृष्टि से देखना चाहिए|

प्रश्न) 6 ज्ञानी से कवयित्री का क्या अभिप्राय है?

उत्तर ) ज्ञानी का अभिप्राय: है – हिन्दू-मुसलमान दोनों में कोई अंतर न समझनेवाला,क्योंकि दोनों ही उसी प्रभु की कृति  हैं तथा अपने –आप को पहचानने या आत्मज्ञान रखने वाले  व्यक्ति है| आत्मा तो उस परमात्मा का ही एक अंश है|

प्रश्न)7 कच्चे सकोरे का क्या अर्थ है? कवयित्री ने अपने प्रयासों के लिए इसका प्रयोग क्यों किया है?

उत्तर ) कच्चे सकोरे का अर्थ है –मिट्टी के बने छोटे-छोटे कच्चे पात्र | कवयित्री ने इसका प्रयोग इसलिए किया है, क्योंकि इन कच्चे बर्तनों में पानी टपक-टपकर बह जाता है और कुछ भी नहीं अंत में बचता है,उसी प्रकार कवयित्री प्रभु को पाने का जो प्रयास कर रही है, वह व्यर्थ जा रहा है |

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