पाठ 4 दीवानों की हस्ती
-भगवतीचरण वर्मा
प्रश्न) कवि
अपने आने को उल्लास और जाने को आँसू बनकर बह जाना क्यों कहते है?
उत्तर ) कवि बेफिक्री भरा
जीवन जीना वाला व्यक्ति है| वह जहां भी जाता है मस्ती का आलम साथ लेकर जाता है|
उससे मिलकर लोगों के मन प्रसन्न हो जाते है|पर जब वह उस स्थान को छोड़कर जाता है तब उसे और वहाँ
के लोगों को दुख होता है|
प्रश्न)
भिखमंगों की दुनिया में बेरोक प्यार लुटनेवाला कवि ऐसा क्यों कहता है कि वह अपने
हृदय पर असफलता का एक निशान भार कि तरह लेकर जा रहा है? क्या वह निराश है या प्रसन्न है?
उत्तर ) यह दुनिया केवल
लेना जानती है,देना नहीं| कवि ने भी इस दुनिया को प्यार दिया पर इसके बदले
में उसे वह प्यार नहीं मिला,जिसकी वह आशा करता था |कवि निराश है , वह समझता है कि प्यार और
खुशियाँ लोगों के जीवन में भरने में असफल रहा | यह दुनिया अभी सांसरिक
विषयों में उलझी हुई है|इससे लगता है कि कवि निराश है|
प्रश्न ) कविता
में ऐसी कौन सी बात है जो आपको अच्छी लगी?
उत्तर ) कविता में कवि का
जीवन के प्रति दृष्टिकोण अच्छा लगा | कवि कहते है कि हम सबके सुख दुख एक है |
हमें इन सुखों-दुखों को एक
साथ भोगना पड़ता है | हमें दोनों परिस्थितियों का सामना समान भाव से
करना चाहिए|
ऐसा दृष्टिकोण रखने वाला
व्यक्ति ही सुखी रह सकता है|
भाषा की बात
संतुष्टि के लिए
कवि ने छककर जी भरकर और खुलकर जैसे शब्दों का प्रयोग किया है | इसी भाव को व्यक्त करने वाले कुछ और शब्द सोचकर
लिखिए, जैसे –हँसकर , गाकर |
उत्तर ) 1खींचकर
2 पीकर
3 मुसकराकर
4 देकर
5 मस्त होकर 6 सराबोर होकर
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