Saturday, May 29, 2021

मुहावरे

 


परिभाषा –जिन वाक्यांशों का अर्थ सामान्य न होकर विशेष होता हैं ,उन्हें मुहावरे कहते हैं |

भाषा में मुहावरों के प्रयो से भाषा सुंदर ,आकर्षण एवं प्रभावशाली हो जाती है |


प्रमुख मुहावरे ,उनका अर्थ और वाक्य और वाक्य प्रयोग :


 अंधे की लकड़ी  -एकमात्र सहारा

 प्रयोग –नेहा अपने माँ –बाप के लिए अंधे की लकड़ी है |

 अंग –अंग ढीला होना – बहुत अधिक थक जाना |

 प्रयोग – आज मुझे दिन भर इतना अधिक काम करना पड़ा की अंग –अंग ढीला हो गया |

अपना उल्लू सीधा करना – अपना कम बनाना |

 प्रयोग – चुनाव मे नेता लोग झूठे वादे करके अपना उल्लू सीधा करते हैं |

अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनना –अपनी प्रशंसा स्वयं करना |

प्रयोग –मयंक हमेशा अपने मुंह मिया मिट्ठू बना करता है |

अंकुश रखना –दबाव में रखना

प्रयोग –माँ – बाप को अपने बच्चों पर अंकुश रखना चाहिए |

आंखे दिखना –क्रोधित होना

प्रयोग –अध्यापक के आँखें दिखने पर कक्षा के सभी बच्चे चुप हो गए |

आँखें  खुलना –होश मे आना |

प्रयोग –नौकर की सच्चाई जानकार सबकी आँखें खुल गई  |

आँख लगना – नींद आना |

प्रयोग –यदि चालक की आँख न लगती तो दुर्घटना न घटती |

आग उगलना –क्रोध मे कटु वचन कहना |

प्रयोग –क्रिकेट की गेंद से जब खिलाड़ी का शीशा टूटा गया तो मकान मालिक सभी पर आग उगलने लगा|

आग बबूला होना –क्रोधित होना |

प्रयोग –वैभव के परीक्षा मे फ़ेल हो जाने से उसके पिता आग बबूला हो उठे |

आसमान से बातें करना –बहुत ऊंचा होना |

प्रयोग –शहरों की  इमारतें आसमान से बातें करती है |

आसमान सिर पर उठाना – बहुत अधिक शोर करना

प्रयोग –अध्यापक के कक्षा से बाहर निकलते ही बच्चे आसमान सिर पर उठा लेते हैं |

ईद का चाँद होना – बहुत दिनों बाद दिखाई देना

प्रयोग –परीक्षा के बाद मोहन ईद का चाँद हो गया |

उल्लू बनाना – मूर्ख बनाना

प्रयोग –देश में कई फर्जी कंपनियाँ देश में लोगो का उल्लू बनाकर गायब हो जाती है |

उल्टी गंगा बहाना – नियम के विरुद्ध काम करना

प्रयोग –आजकल के कई नेता उलटी गंगा बहाते  रहते  है |

कमर कसना – तैयार होना |

प्रयोग –युद्ध से पहले सैनिक कमर कस लेते हैं |

कान  पर जूं न रेंगना – कोई ध्यान न देना |

प्रयोग –मैं बच्चों से पढ़ने के लिए कहता हूँ पर उनके कान पर जूं नहीं रेंगती है |

कानोंकान खबर न होना – किसी को पता न चलना |

प्रयोग –मैंने शहर जाकर फिल्म देखी  और घर मे किसी को कानों कान खबर नहीं हुई |

कलाई खुलना –भेद खुल जाना |

प्रयोग –कब अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े गए तो उनकी सारी कलई खुल गई |

गाल बजाना –व्यर्थ की बातें करना |

प्रयोग –कुछ न कुछ करके दिखाओ ,गाल बजाने से क्या कोई लाभ नहीं होगा |

गुड गोबर होना  - बना कम बिगड़ जाना |

प्रयोग- तेज वर्षा और आँधी आ जाने से कार्यक्रम देखने का मजा गुड़ गोबर हो गया |

घी के दिए जलाना –खुशियाँ मनाना |

प्रयोग –जब देश स्वतंत्र हुआ तो देशवासियों ने घी के दिये जलाए थे |

घोड़े बेंचकर सोना –निश्चिंत हो जाना |

प्रयोग-परीक्षा के बाद ग्रीष्मवकाश मे बच्चे घोड़े बेंचकर सोते है |

चार चाँद लगना –शोभा बढ़ाना |

प्रयोग –कार्यक्रम मे अच्छे संगीत से चार चाँद लग गए |

चैन की बंशी बजाना बेफिक्र होना |

प्रयोग – नौकरी पाने के बाद लोग चैन की बंसी बजाने लगते है |

छक्के छुड़ाना –बुरी तरह हारना |

प्रयोग –विश्व कप के फ़ाइनल मे भारतीय टीम ने श्रीलंका की टीम के छक्के छुड़ा दिए|

जान पर खेलना – अपनी जान जोखिम मे डालना |

प्रयोग –हमारे सैनिक जान पर खेलकर देश की सुरक्षा करते है |

झक मारना –विवश हो जाना |

प्रयोग –झक मारकर मुझे मित्र के साथ बाजार जाना पड़ा |

टेढ़ी खीर होना –कठिन काम होना |

प्रयोग – आजकल पढ़ लिखकर नौकरी पाना टेड़ी खीर है |

टस से मस  न होना –अपनी बात  पर अड़े रहना |

प्रयोग – जो सच्चा और इमनदसर होता है वह अपनी जगह से कभी टस से मस नहीं होता

ठोकर खाना –कष्ट सहन करना

प्रयोग –आजकल बेरोजगार युवक नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खाते है |

थाली का बैंगन – सिद्धांतहीन व्यक्ति

प्रयोग –अवसरवादी नेता थाली के बैंगन की तरह दल बदलते रहते है |

दाल न गलना – वश न चलना

प्रयोग – आप यहाँ से चले जाइए यहाँ आपकी दाल नहीं गलेगी |

दिल दुखाना – कष्ट पहुंचाना

प्रयोग- हमें किसी कमजोर  का दिल नहीं दुखाना चाहिए |

धज्जियाँ उड़ाना – दुर्गति करना

प्रयोग- सदन में विधायकों ने प्रस्ताव की धज्जियाँ उड़ा दी |

नौ दो ग्यारह  होना  – भाग जाना

प्रयोग- बिल्ली को देखते ही चूहे नौ दो ग्यारह हो गए |

नाक कटना – बेइज्जत होना

प्रयोग - रमेश जब चोरी करते पकड़ा गया तो उसके पूरे परिवार की नाक कट गई |

पोल खुलना –भेद खुल जाना

प्रयोग – जब विकास की पोल खुल गई तो पार्टी को बीच में ही छोडकर वह भाग गया |

पेट में चूहे कूदना – भूख लग जाना

प्रयोग – आज मैंने सुबह से कुछ नहीं खाया ,अब मेरे पेट में चूहे कूद रहे है |

फूला  न समाना – बहुत खुश होना |

प्रयोग – स्कूल में प्रथम आने पर संतोष फूला न समाया |

बाएँ हाथ का खेल – बहुत आसान काम

प्रयोग - कवि को कविता सुनना उसके बाएँ हाथ का खेल है |

भीगी बिल्ली बनना – दर जाना  

प्रयोग –पुलिस ने जब चोर को पकड़ा तो वह भीगी बिल्ली बन गया |

मुँह में पानी आना – खाने को मन ललचाना

प्रयोग- मिठाई देखकर लोगो के मुंह में पानी आ जाता है |

रात दिन एक करना –कठिन  कठिन परिश्रम करना

प्रयोग – मेंने परीक्षा के समय अपना रात दिन एक कर दिया था

लोहा लेना –सामना  करना

प्रयोग - रानी लक्ष्मी बाई ने अंग्रेजों से लोहा लिया |

विष उगलना – कटु वचन कहना

प्रयोग- तुम कभी अपने मित्र के बारे में अच्छा नहीं बोलते ,हमेशा विष उगलते रहते हो |

हवा से बातें करना - बहुत तेज दौड़ना

प्रयोग - राणा प्रताप का घोड़ा चेतक हवा से बातें करता  था |

 हाथ बँटाना -काम में मदद करना

प्रयोग - बच्चो को अपने माता पिता के कामों में हाथ बाँटना चाहिए |

हिम्मत न हारना – साहस नहीं छोड़ना

 प्रयोग – संकट के समय हमें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए |

दुम दबाकर भगाना – डरकर भा  जाना 

प्रयोग - पुलिस को देखकर चोर  दुम दबाकर भाग गए

दो दिन का मेहमान – मुत्यु के निकट होना

प्रयोग - अपनी लंबी बीमारी से जूझते हुए लाला जी बस अब दो दिन के मेहमान रह गए |

 

 

  

प्रात:कालीन सैर

 

प्रात:कालीन सैर

भूमिका:विद्वानों ने कहा है –जल्दी सो जाना और जल्दी उठना मनुष्य को स्वस्थ्य ,संपन्न और बुद्धिमान बनाता है |’प्रात: काल शीघ्र उठने वाले व्यक्ति कभी आलसी नहीं हो सकते |भारतीय संस्कृति में प्रात: काल को ब्रह्ममुहूर्त कहा जाता हैं |यह बेला अत्यंत पवित्र मानी जाती है |

प्रात:काल का सुहावना मौसम : प्रात:काल का मौसम अत्यंत सुहावना होता है |चारों ओर शीतलमंद – सुगंधित पवन चलती हैं |प्रात:काल का समय सबसे शांत ,पवित्र तथा सौंदर्यमय होता है | घास पर पड़ी ओस की बूँदें मोतियों का-सा भ्रम उत्पन्न करती हैं | सूर्योदय से पूर्व आकाश का रंग लाल होता है ,पक्षियों की चहचहाहट बहुत अच्छी लगती है |खिली हुई कलियाँ सबको अपनी ओर आकर्षित करती हैं |ऐसा मौसम सैर  के लिए सर्वोत्तम होता है |

प्रात:कालीन सैर के लाभ : प्रात:काल का समय सैर के लिए सर्वश्रेष्ठ होता है | इस समय सैर करने वाला सदा निरोगी रहता है क्योंकि उस समय वायु मे ऑक्सीजन की मात्र सबसे अधिक होती है |शुद्ध वायु में श्वास लेने से अनेक प्रकार के रोग नष्ट हो जाते हैं |प्रात:काल की स्वच्थ वायु तथा स्वच्छ वातावरण ईश्वर द्वारा मनुष्य को दिया गया नि:शुल्क उपहार है | प्रात:कालीन की सैर से व्यक्ति दिन भर चुस्त और फुर्तीला रहता है | आलस उससे कोसो दूर भागता है |इससे सांस, मधुमेह, रक्तचाप, बदहज़मी, अनिद्रा,  मोटापा जैसे अनेक रोग बिना औषधि के दूर हो जाते हैं |इसलिए अनेक चिकित्सक स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रात:कालीन सैर की सलाह देते हैं | यह हर आयुवर्ग के व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयोगी है | आजकल जिस प्रकार प्रदूषण के कारण रोग बढ़ते जा रहे है, उनसे बचने के लिए प्रात : कालीन सैर एक रामबाण औषधि है | विद्यार्थियों के लिए तो प्रात:कालीन सैर ओर भी आवश्यक है | इससे से विद्यार्थियों का मस्तिषक ताज़ा हो जाता है , नेत्रों की ज्योति ठीक रहती है तथा स्मरण शक्ति बढ़ जाती है |

निष्कर्ष : गांधी जी ने कहा है –“ मैं प्रात:भ्रमण के कारण सदा स्वस्थ रहा और अपने दैनिक कार्यों को स्फूर्ति के साथ करता रहा |”अत: प्रत्येक विद्यार्थी को चाहिए कि नियमित रूप से प्रात:काल में सैर करे तथा खुली वायु में थोड़ा व्यायाम भी करे |

Friday, May 28, 2021

अपठित गद्यांश

 

गद्यांश -1

हम जिस देश में रहते हैं, उसका नाम भारतवर्ष है | इसे हिंदुस्तान,आर्यावर्त एवं इंडिया के नाम से भी जाना जाता है | हमारे देश का अपना संविधान एवं अपनी सरकार है |  हमारे देश की राजधानी नई दिल्ली है | हमारे देश में 29 राज्य और 7 केंद्रप्रशासित राज्य हैं | हिंदी हमारे देश की राष्ट्रभाषा है|  गंगा, यमुना , गोमती, सरयू, गोदावरी आदि हमारे देश की प्रमुख नदियां  हैं | दिल्ली, कोलकत्ता, चेन्नई और मुंबई हमारे देश के प्रमुख बड़े नगर हैं | हमारे देश के उत्तर में हिमालय पर्वत विद्यमान है | वह रडार की भाँति हमारे देश की रक्षा करता है |देश के दक्षिण  में हिन्द महासागर इसके चरणों को निरंतर धोता है |

प्रश्नोत्तर-

प्रश्न ) हमारे देश का क्या नाम है ?

उत्तर ) हमारे देश का नाम  भारतवर्ष है|

प्रश्न ) भारतवर्ष के अन्य नाम कौन-कौन से हैं ?

उत्तर ) हिंदुस्तान ,आर्यावर्त और इंडिया भारतवर्ष के अन्य नाम हैं |

प्रश्न ) हमारे देश की राजधानी कहाँ है ?

उत्तर ) नई दिल्ली में |

प्रश्न ) हमारे देश में कितने राज्य और केंद्रशासित राज्य हैं ?

उत्तर ) हमारे देश में 29 राज्य और 7 केंद्रशासित राज्य हैं |

प्रश्न ) हमारी राष्ट्रभाषा का क्या नाम है ?

उत्तर ) हमारी राष्ट्रभाषा का  नाम हिन्दी है ?

प्रश्न ) हमारे देश के दक्षिण में क्या है ?

उत्तर ) हमारे देश के दक्षिण में हिंदमहासागर है |

प्रश्न ) इस गद्यांश  का उचित शीर्षक लिखिए |

उत्तर ) हमारा देश भारत

गद्यांश 2

पं जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री थे | उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद नगर में हुआ था | उनके पिता का नाम पं मोतीलाल नेहरू तथा माता का नाम स्वरूप रानी था | वे बच्चों से बहुत प्यार करते थे | एक बार वे जापान गए थे | वहाँ के बच्चों ने पहले कभी हाथी नहीं देखा था |  जापान के बच्चों नें नेहरू जी से एक हाथी भेजने को कहा |   नेहरू जी ने भारतीय बच्चों की ओर से एक हाथी जापान देश भेजा | यह हाथी समुद्री मार्ग से जहाज़ के द्वारा जापान देश ले जाया गया था | नेहरू जी का जन्म दिन प्रतिवर्ष 14 नवम्बर को सम्पूर्ण भारत में बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है | सभी बच्चे प्यार से उन्हें चाचा नेहरू कहते थे |

प्रश्न ) पं जवाहरलाल नेहरू कौन थे ?

उत्तर ) हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री थे |

प्रश्न ) उनका जन्म कहाँ हुआ ?

उत्तर ) उनका जन्म इलाहाबाद नगर में हुआ था |

प्रश्न ) नेहरू जी के माता-पिता कौन थे ?

उत्तर ) उनके पिता का नाम पं मोतीलाल नेहरू तथा माता का नाम स्वरूप रानी था |

प्रश्न ) नेहरू जी ने जापान के बच्चों के लिए क्या भेजा ?

उत्तर ) एक हाथी भेजा |

प्रश्न ) सभी बच्चे प्यार से उन्हें प्यार से क्या  कहते थे ?

उत्तर ) सभी बच्चे प्यार से उन्हें चाचा नेहरू कहते थे |

प्रश्न ) नेहरू जी का जन्म दिन प्रतिवर्ष  किस रूप में मनाया जाता है ?

उत्तर ) नेहरू जी का जन्म दिन प्रतिवर्ष 14 नवम्बर को सम्पूर्ण भारत में बाल दिवस के रूप    में मनाया जाता है |

 

गद्यांश 3

कबीर को हिन्दु और मुसलमान बराबर प्रेम करते थे | उन्होंने हिंदू और मुसलमान दोनों को उनकी कुप्रथाओं के लिए फटकार लगाई थी |एक कथा उनके संबंध में प्रचलित है कि जब कबीर की मुत्यु हुई तो हिंदू और मुसलमान शिष्य उनके शव को लेकर झगड़ने लगे |उनके हिंदू शिष्य उनके शरीर का दाह संस्कार कर्ण चाहते थे |इसके विपरीत मुसलमान शिष्य उनके शव को दफनाना चाहते थे |तभी आकाशवाणी हुई जिसमें कहा गया कि फले शव के ऊपर से चादर हटाओ |चादर हटाने पर सभी आश्चर्यचकित हो गए |कबीर का शव अदृश्य हो गए |उसके स्थान पर केवल कुछ फूल ही रह गए थे | हिंदू और मुसलमानों ने उन फूलों को बराबर बराबर बाँट लिया |हिंदुओ ने फूलों का दाह संस्कार कर दिया जबकि मुसलमानो ने फूलों को जमीन में दफन कर दिया |

प्रश्न ) हिन्दु और मुसलमान किससे बराबर प्रेम करते थे ?

उत्तर ) हिन्दु और मुसलमान कबीर से बराबर प्रेम करते थे|

प्रश्न ) हिंदू शिष्य कबीर के शव का क्या करन चाहते थे?

उत्तर ) हिंदू शिष्य कबीर के शव को आग में जलाना चाहते थे |

प्रश्न ) मुसलमान शिष्य कबीर के शव का क्या करन चाहते थे?

उत्तर ) हिंदू शिष्य कबीर के शव जमीन में दफनाना  चाहते थे |

प्रश्न ) कबीर के शव के स्थान पर क्या बच गया था ?

उत्तर ) कबीर स्थान पर केवल कुछ फूल ही रह गए थे |

प्रश्न ) फूलों का बँटवारा किस प्रकार हुआ ?

उत्तर हिंदू और मुसलमानों ने उन फूलों को बराबर बराबर बाँट लिया |

प्रश्न हिंदू और मुसलमानों ने उन फूलों को क्या किया ?

उत्तर हिंदुओ ने फूलों का दाह संस्कार कर दिया जबकि मुसलमानो ने फूलों को जमीन में दफन कर दिया |

                             गद्यान्श 4                                                  स्वास्थ्य ,सुखी परिवार की सबसे बड़ी पूजी है | जिस परिवार में स्वास्थ्य का सर्वथा अभाव रहता है ,उसे नरक के समान समझना चाहिए |स्वास्थ्यहिन और स्वास्थ्य –परिपूर्ण घर ही वास्तविक में नरक और स्वर्ग कहे जा सकते है | स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए जितना भी पर प्रयास लिया जाए वह कम है |स्वास्थ्य के अभाव में लोक और परलोक कहीं भी सुख नहीं मिलता है जिन परिवारों के लोग जीते –जागते चिकित्सालय बने हों | उनमें सुख वास स्थान उदासीनता ,आलस्य ,प्रमाद ,दुख कलह और अनेक प्रकार की बीमारियाँ डेरा डाले रहती हैं |

प्रश्न सुखी परिवार की सबसे बड़ी पूंजी क्या है ?

उत्तर सुखी परिवार की सबसे बड़ी पूंजी स्वास्थ्य हैं |

प्रश्न इस संसार के नरक और स्वर्ग किसे कहा जा सकता है ?

उत्तर स्वास्थ्यहीन और स्वास्थ्य परिपूर्ण घर को इस संसार के स्वर्ग और नरक कहा जा सकता है |

प्रश्न स्वास्थ्य के अभाव मे क्या होता है ?

उत्तर स्वास्थ्य के अभाव मे लोक और परलोक कही भी सुख नहीं मिलता |

प्रश्न स्वास्थ्यहीन घर में किसका वास होता हैं ?

उत्तर स्वास्थ्यहीन घर में उदासीनता ,कहल ,दुख ,आलस्य और बिमोरियों का वास होता है |

प्रश्न इस गदयांश का उचित शीर्षक लिखिए –

उत्तर इस गदयांश का उचित शीर्षक स्वास्थ्य हैं |

गद्यांश-5

संसार मे दो प्रकार के मनुष्य निवास करते हैं | कुछ मनुष्य केवल अपने स्वार्थ के लिए ही सब कुछ करते है |इसके विपरीत संसार के कुछ लोग अपने हित की चिंता न करके दूसरों के लिए जीते हैं | ऐसे पुरुष परोपकारी कहलाते  हैं |जो कार्य अपने स्वार्थ  की भावना से रहित होकर किया जाता है ,उसे परोपकार कहते हैं | परोपकार मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है |इसके अभाव मे मनुष्य पशु के समान होता है | परोपकार से समाज में सभी का लाभ होता है |सभी सुख का अनुभव करते है | परोपकारी व्यक्ति का जीवन दूसरों के लिए आदर्श बन जाता है | इसके समान व्यक्ति का कोई दूसरा धर्म नहीं है |

प्रश्न ) संसार मे कितने  प्रकार के मनुष्य निवास करते हैं ?

उत्तर ) संसार मे दो प्रकार के मनुष्य निवास करते हैं |

प्रश्न ) परोपकारी व्यक्ति कौन होता है ?

उत्तर ) कुछ लोग अपने हित की चिंता न करके दूसरों के लिए जीते है ऐसे मनुष्य परोपकारी कहलाते है |

प्रश्न ) परोपकार से क्या आशय है ?

उत्तर ) जो कार्य अपने स्वार्थ की भावना से रहित होकर किया जाए , उसे परोपकार कहते है |

प्रश्न ) किसके अभाव मे मनुष्य पशु के समान होता है?

उत्तर ) परोपकार के  अभाव मे मनुष्य पशु के समान होता है |

प्रश्न ) किसका जीवन दूसरों के लिए आदर्श है ?

उत्तर ) परोपकारी व्यक्ति का जीवन दूसरों के लिए आदर्श बन जाता है |

प्रश्न ) इस गद्यांश का उचित शीर्षक क्या है ?

उत्तर ) परोपकार |

 

अशुद्धि शोधन

 

अशुद्धि शोधन

भाषा में शब्दों एवं वाक्यों को शुद्ध रूप से लिखना एवं बोलना आवश्यक है | व्याकरण के अभाव में प्राय: इन्हें लिखने और बोलने में कुछ अशुद्धियाँ हो जाती है |

ये अशुद्धियाँ दो प्रकार की होती हैं –

शब्दों के शुद्ध रूप का ज्ञान न होने से उन्हें बोलने एवं लिखने में कुछ अशुद्धियाँ हो जाती हैं |  ऐसी अशुद्धियों को वर्तनी संबंधी अशुद्धि कहते हैं –

क )  मात्रा संबंधी अशुद्धियाँ –

अशुद्ध शब्द                                          शुद्ध शब्द

छवी                                                   छवि

कवी                                                   कवि

हानी                                                   हानि

रिषि                                                   ऋषि

एसा                                                   ऐसा

अगनी                                                 अग्नि

प्रथक                                                  पृथक

पत्नि                                                  पत्नी

अकाश                                                 आकाश

एनक                                                  ऐनक

ओजार                                                 औज़ार

आयू                                                   आयु

दयालू                                                  दयालु

ओरत                                                  औरत

किर्ती                                                  कीर्ति

अतिथी                                                 अतिथि

तिथी                                                  तिथि

इतिहासिक                                              ऐतिहासिक

पती                                                   पति

क्योंकी                                                  क्योंकि

समाजिक                                                सामाजिक

बीमारि                                                  बीमारी

ख) अनुस्वार संबंधी अशुद्धियाँ –

घन्टा                                                    घंटा

सुन्दर                                                  सुंदर

फन्दा                                                   फंदा

ऊंट                                                     ऊँट

शन्ख                                                   शंख

संभु                                                    शंभु

,,श संबंधी अशुद्धियाँ -

विषेश                                                  विशेष

प्रशाद                                                  प्रसाद

धनुस                                                  धनुष

दृष्य                                                   दृश्य

सक्ति                                                  शक्ति

सीतल                                                  शीतल

श्वाद                                                   स्वाद

क्ष, त्र, ज्ञ संबंधी अशुद्धियाँ -

पुतर                                                   पुत्र

शस्तर                                                   शस्त्र

प्रगया                                                  प्रज्ञा

ग्यात                                                  ज्ञात

छत्र                                                    क्षत्रिय

विगयान                                                विज्ञान

,, व संबंधी अशुद्धियाँ –

गुन                                                      गुण

कारन                                                  कारण

प्रनाम                                                    प्रणाम

प्रान                                                      प्राण

विबाद                                                    विवाद

बाणी                                                      वाणी

र संबंधी अशुद्धियाँ -

करम                                                      कर्म

आशिरवाद                                                  आशीर्वाद

धरम                                                      धर्म

शरम                                                      शर्म

झूत                                                       झूठ

पूज्यनीय                                                   पूजनीय

सनेह                                                      स्नेह

उज्वल                                                     उज्ज्वल

 

 

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...