Monday, June 28, 2021

साखियाँ एवं सबद कक्षा नौवीं

 

साखियाँ एवं सबद

-    कबीर

प्रश्न)1  मानसरोवर से कवि का  क्या आशय है?

उत्तर ) मानसरोवर से कवि का आशय है मन रूपी पवित्र सरोवर| इसमें मनुष्य के पवित्र विचार भरे होते है | और जीवात्मा रूपी हंस इसमें प्रभु-भक्ति में मग्न होकर मुक्ति रूपी मुक्ताफल चुगता है| वह इस सरोवर को छोडकर कहीं नहीं जाना चाहता है|

प्रश्न )2  कवि ने सच्चे  प्रेमी की क्या कसौटी बताई है?

उत्तर ) कवि ने सच्चे  प्रेमी की कसौटी बताते हुए बताया है सच्चा प्रेमी अपने प्रेम अर्थात ईश्वर की भक्ति करते हुए ईश्वर को पाने का प्रयास करता है| वह लोभ,मोह, माया से ऊपर उठ चुका होता है| उसे ईश्वर के अलावा किसी सांसारिक वस्तु को पाने की रुचि नहीं होती है|

प्रश्न)3  तीसरे दोहे में कवि ने किस प्रकार के ज्ञान को महत्व दिया है ?

उत्तर ) तीसरे दोहे में कवि ने  अनुभव से प्राप्त ज्ञान को महत्व दिया है जो सहज साधना से प्राप्त होता है| कबीर ने इस प्रकार के ज्ञान को हस्ती के समान बताया है| इसे पाने के बाद उसका साक्षात्कार ईश्वर से हो जाता है|

प्रश्न )4  इस संसार में सच्चा संत कौन है?

उत्तर) 1जो सांप्रदायिक भेदभाव, सांसरिक मोह-  माया  से दूर रहे |

    2 सुख-दुख लाभ-हानि को समान रूप से अपनाता हो|

    3 दिखावे की भक्ति न करता हो|

प्रश्न ) 5 अंतिम दो दोहो के माध्यम से कबीर ने किस तरह की संकीर्णताओं  की ओर संकेत किया है?

उत्तर ) 1 अपने धर्म को श्रेष्ठ सिद्ध करना और दूसरों के धर्म की निंदा करना |

       2 ऊंचे कुल में जन्म लेने से स्वयं को श्रेष्ठ समझना |लेकिन मनुष्य केवल ऊंचे कुल में जन्म लेने से बड़ा नहीं होता बल्कि कर्मों से होता है |

प्रश्न ) 6 किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कुल से होती है या कर्मों से? तर्क सहित उत्तर दीजिए |

उत्तर ) व्यक्ति को पहचान बनाने के लिए  अच्छे कर्म करना जरूरी हैं | क्योंकि व्यक्ति की पहचान उसके अच्छे कर्मों से होती है| ऊँचे कुल में जन्म लेकर भी व्यक्ति ने अच्छे कर्म नहीं किए तो वह  आदर पाने योग्य नहीं है| इसके विपरीत यदि व्यक्ति छोटे कुल में जन्म लेकर अच्छे कर्म करता है तो वह सम्माननीय बन जाता है|

प्रश्न ) 7 काव्य सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए-

 हस्ती चढ़िए ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारी |

स्वान रूप संसार है, भूंकन दे झक मारि |

उत्तर ) काव्य सौन्दर्य –

      भाव सौन्दर्य –ज्ञान का महत्व बताते हुए कबीर जी कहते है कि मनुष्य को ज्ञान रूपी हाथी की सवारी सह्जतारूपी गलीचा डालकर करना चाहिए | ऐसा करते हुए यदि कुत्ता रूपी संसार उसकी आलोचना करता है तो उसको उसकी परवाह नहीं करनी चाहिए| अर्थात मनुष्य को ज्ञान प्राप्त करना चाहिए |

शिल्प सौन्दर्य –

i)        साधुक्कडी भाषा का प्रयोग है | इसमें हस्ती, स्वान , ज्ञान आदि तत्सम शब्दों का प्रयोग है |

ii)       भक्ति रस की प्रधानता है|

iii)       तुकांत युक्त होने से स्वर मैत्री अलंकार है |

प्रश्न ) 8 मनुष्य ईश्वर को कहाँ – कहाँ ढूँढता है?

उत्तर ) मुसलमान अल्लाह को काबा और मस्जिद में ढूँढता है|  हिन्दू ईश्वर को मंदिर तथा पवित्र स्थानों पर ढूँढता है| तथा योग, वैराग्य तथा अनेक प्रकार की क्रियाएँ करता है |

 प्रश्न ) 9 कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए किन प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है?

उत्तर ) मनुष्य मंदिर, मस्जिद , में पूजा – अर्चना करके, नमाज़ पढ़कर ईश्वर को प्राप्त करना चाहता है,किन्तु इससे ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती है| वह दिखावटी या आडंबरपूर्ण भक्ति करता है,  विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा करता है तथा योग, वैराग्य आदि क्रियाएँ करता है,  पर यह सब व्यर्थ है|

प्रश्न) 10 कबीर ने ईश्वर को सब स्वांसों की स्वांस में क्यों कहा है ?

उत्तर ) सभी जीवों की रचना ईश्वर ने की है अत : ईश्वर का वास हर प्राणी की हर  सांस में है| ईश्वर संसार के कण –कण में समाया है  अर्थात ईश्वर हर प्राणी की सांस में समाया है | इसलिए कबीर ने ईश्वर को सब स्वांसों की स्वांस में  कहा है |

भाषा अध्ययन –

निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए |

पखापखी , अनत, जोग, जुगति, बैराग , निरपख |

तत्सम             तद्भव

पखापखी           पक्ष-विपक्ष

अनत              अनंत

जोग               योग

जुगति              युक्ति

निरपख            निरपेक्ष

 

 

    

Saturday, June 26, 2021

रचना के आधार पर वाक्य रूपान्तरण

 

रचना के आधार पर वाक्य रूपान्तरण

-    वाक्य से मिश्र एवं संयुक्त वाक्य

महिलाएँ कारखाने में काम करके घर चली गई |         (सरल)

महिलाओं ने कारखाने में काम किया तब घर चली गई |  (मिश्र )

महिलाओं ने कारखाने में काम किया और घर चली गई|   (संयुक्त)

 

मोहन हिन्दी पढ़ने के लिए शास्त्री जी के घर गया है |    (सरल)

मोहन को हिन्दी पढ़नी है इसलिए वह  शास्त्री जी के घर गया है | (मिश्र )

मोहन को हिन्दी पढ़नी है और इसलिए वह  शास्त्री जी के घर गया है | (संयुक्त)

 

मोहन के घर पहुँचने से पूर्व उसके पिता चल चुके थे|(सरल)

जब मोहन घर पहुंचा तो उसके पिता चल चुके थे| (मिश्र )

मोहन घर पहुंचा तो उसके पिता चल चुके थे|     (संयुक्त)

 

मैंने एक बीमार आदमी देखा |                  (सरल)

मैंने एक आदमी देखा जो  बहुत बीमार था|       (मिश्र )

मैंने एक आदमी  को देखा और वह बहुत बीमार था| (संयुक्त)

 

 

मिश्र वाक्य से सरल वाक्य एवं संयुक्त वाक्य

जैसे ही स्टेशन पहुंचा,गाड़ी चल दी |             (मिश्र )

मेरे स्टेशन पहुँचते ही गाड़ी चल दी |                  (सरल)

मैं स्टेशन पहुंचा और गाड़ी चल दी |             (संयुक्त)

-     

-    संयुक्त वाक्य से सरल एवं मिश्र वाक्य

खिलौना नीचे गिरा और टूट गया |              (संयुक्त)

नीचे गिरते ही खिलौना टूट गया |               (सरल)

जैसे ही खिलौना नीचे गिरा की टूट गया |        (मिश्र )

मिश्र वाक्यों से साधारण वाक्य:-  

1 वह मनुष्य पशु के समान है जिसके पास विद्या नहीं है |

अथवा

यदि मनुष्य के पास विद्या नहीं है तो वह पशु के समान है |

- विद्या के बिना मनुष्य पशु के समान है|

2 मैंने उसे समझाया तब घर भेजा|

 मैंने उसे समझाकर घर भेजा |

3 जो विद्यार्थी मेहनती होते है, वे सफल होते है|

  मेहनती विद्यार्थी सफल होते है|

4 सीता ने एक आदमी देखा जो बहुत मोटा था |

सीता ने एक मोटा आदमी देखा|

5 मेरी पत्नी को राशन खरीदना था, अत: बाज़ार गई |

  मेरी पत्नी राशन खरीदने बाज़ार गई |

6 जो व्यक्ति विद्वान होता है, उसकी सर्वत्र पूजा होती है |

विद्वान व्यक्ति की सर्वत्र पूजा होती है|

Friday, June 25, 2021

वाक्य कक्षा (नौवीं के लिए )

 

वाक्य

शब्दों के सार्थक समूह को वाक्य कहते हैं | वाक्य भाषा की इकाई है ; जैसे – राम स्कूल जाता है | वाक्य में क्रिया का होना अति आवश्यक होता है | क्रिया के बिना वाक्य की रचना संभव नहीं होती है | यथा – मैं जाता हूँ | परंतु मैं एक मात्र शब्द है |

अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ प्रकार होते हैं –

1 विधानवाचक – जिन वाक्यों में किसी क्रिया के होने या करने की सामान्य सूचना हो, उन्हें विधानवाचक वाक्य कहते हैं ; जैसे – गंगा हिमालया से निकलती है | बच्चे मैदान में खेल रहे हैं |

2 निषेधवाचक वाक्य – जिन वाक्यों में न या नहीं होने का भाव व्यक्त होता है, उन्हें नकरात्मक वाक्य कहते है ; जैसे अवनी स्कूल नहीं जाती | रमेश पुस्तक नहीं पढ़ता |

3 प्रश्नवाचक वाक्य – जिन वाक्यों में प्रश्न का बोध होता है, उन्हें प्रश्नवाचक वाक्य कहते है ; जैसे हरियाणा में कितने जिले है ?आप क्या काम करते हो ?

4 संदेहवाचक वाक्य – जिन वाक्यों में कार्य के होने में संदेह होता है ,उन्हें संदेहवाचक वाक्य कहते हैं ; जैसे – शायद आज विद्यालय बंद हो  संभवत: गाड़ी नहीं गई होगी |

5 आज्ञावाचक वाक्य – जिस वाक्य में आज्ञा , प्रार्थना , उपदेश , अनुमति का बोध होता है, उसे आज्ञावाचक  वाक्य कहते हैं |

जैसे – तुम बाहर जाओ | (आज्ञा )

आप आ सकते हो  (अनुमति)

कृपया आप मेरा काम कर दीजिए | (प्रार्थना )

6 इच्छावाचक वाक्य जिस वाक्य में इच्छा ,आशीर्वाद ,या शुभ कामना का बोध होता है उसे इच्छावाचक या इच्छार्थक वाक्य कहते है |

7 संकेतवाचक वाक्य – जिस वाक्य में एक बात या काम  का होना दूसरी बात या काम के होने पर निर्भर करता है , उसे संकेतवाचक वाक्य कहते है ; जैसे – यदि कपिल पढ़ता तो अवश्य प्रथम आता | आप समय पर स्टेशन पहुँच जाते तो आपकी ट्रेन नहीं छूटती |

8 विस्मयादिबोधक वाक्य जिस वाक्य में हर्ष, शोक, घृणा ,आश्चर्य, भय आदि का बोध होता है , उसे विस्मयादिबोधक वाक्य कहते हैं | जैसे –

हर्ष – वाह ! क्या छक्का मारा है |

आश्चर्य – अरे ! तजेंदर गा भी सकता है |

 

 

Thursday, June 24, 2021

अपठित पद्यान्श कक्षा 7 व 8 के लिए

 

निम्नलिखित पद्यान्श को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए|

नारद गए विष्णु लोक

 बोले भगवान से

“देखा किसान को

दिन में तीन बार

नाम उसने लिया है |

बोले विष्णु नारद जी , आवश्यक दूसरा

एक काम आया है,तुम्हें छोडकर कोई

और नहीं कर सकता |

साधारण विषय यह

बाद का विवाद होगा तब तक यह आवश्यक करी पूरा कीजिए

तेल पात्र यह लेकर प्रदक्षिणा कर आए भूमंडल की |

ध्यान रहे सविशेष एक बूंद भी तेल इससे गिरने न पाए|

प्रश्न) नारद ने भगवान विष्णु के पास जाकर उसे क्या सूचना दी ?

उत्तर ) नारद ने सूचना दी कि उस किसान ने आपका नाम तीन बार ही लिया है |

प्रश्न) भगवान विष्णु ने क्या कहते हुए नारद को दूसरा काम बताया ?

उत्तर ) उन्होने कहा कि इस काम को आप के अलावा कोई दूसरा नहीं कर सकता

प्रश्न ) भगवान विष्णु ने नारद को कौन सा आवश्यक कार्य सौपा ?

उत्तर ) विष्णु ने नारद को तेल से भरा पात्र लेकर पृथ्वी का चक्कर लगाने का कार्य सौंपा |

प्रश्न ) नारद को किस बात का विशेष ध्यान रखना था ?

उत्तर ) नारद को इस बात का ध्यान रखना था कि पृथ्वी का एक चक्कर लगते समय तेल कि एक बूंद भी बाहर न गिरने पाए |

प्रश्न ) पात्र शब्द के दो अर्थ लिखते हुए वाक्य प्रयोग कीजिए |

उत्तर ) पात्र – बर्तन , वाक्य – अब घरों में मिट्टी के पात्र कम दिखाई देते है |

       पात्र – रामायण में किस   पात्र ने तुम्हें अधिक प्रभावित किया ?

 

निम्नलिखित पद्यान्श को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए|

सच है विपत्ति जब आती कायर को ही दहलाती है,

सुरमा नहीं विचलित होते ,क्षण एक न ही धीरज खोते,

विघ्नों को गले लगाते है, काँटों मे राह बनाते है |

मुँह से कभी उफ कहते है, संकट का चरण न गहते है ,

जो आ पड़ता सब सह है, उद्योग निरत रत रहते हैं ,

शूलों का मूल नसाते है , बढ़ खुद विपत्ति पर छाते  है |                       

प्रश्न ) विपत्ति से कौन डरते है ?

उत्तर ) कायर |

प्रश्न ) काँटों में राह बिछाने का क्या अर्थ है ?

उत्तर ) मुसीबतों पर  विजय पाना |

प्रश्न ) काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक क्या है ?

उत्तर ) उद्योग निरत व्यक्ति

प्रश्न ) कायर का विलोम शब्द क्या है ?

उत्तर ) वीर

प्रश्न ) इस पदयांश से आपको क्या शिक्षा मिलती है ?

उत्तर ) हमें मुसीबत के समय धैर्य नहीं खोना चाहिए और मुसीबतों का डटकर सामना करना चाहिए |

 

अपठित गद्यान्शकक्षा 7 व 8 के लिए

 अपठित गद्यान्शकक्षा 7 व 8 के लिए

निम्नलिखित गद्यान्श को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए|

आज के करीब डेढ़ हज़ार साल से पहले चीन में बारूद का आविष्कार हुआ | फिर ईसा की ग्यारहवीं सदी में चीनियों ने रॉकेट भी बनाए | लगभग उसी समय भारत को भी बारूद की जानकारी मिली |भारत को यह जानकारी या तो चीनी मजदूरों से मिली या भारतीय बन्दरगाहों में पहुँचने वाले चीनी व्यापारियों के जरिये | आज भी आतिशबाज़ी के पटाखों का सबसे ज्यादा उत्पादन दक्षिण भारत में ही होता है |  रॉकेटों का भी ज्यादा इस्तेमाल दक्षिण भारत के युद्धों में ही हुआ है | रॉकेटों के लिए लोहे के खोलों का इस्तेमाल संभवत: भारत की ही खोज है |

प्रश्न) बारूद का आविष्कार किस देश की देन है ?

उत्तर ) चीन की |

प्रश्न ) भारत को बारूद की जानकारी कब मिली ?

उत्तर ) ईसा की ग्यारहवीं शताब्दी में |

प्रश्न ) भारत में आतिशबाजी के पटाखों का सर्वाधिक प्रयोग कहाँ होता है ?

उत्तर ) दक्षिण भारत में होता है

प्रश्न )रॉकेट के लिए लोहे के खोलों की खोज की संभावना किस देश के लिए प्रकट की जाती है ?

उत्तर ) भारत के लिए |

निम्नलिखित गद्यान्श को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए|

लोग चाहते है की सरकार उनकी भलाई के लिए कार्य करती रहे और वे स्वयं कुछ न करे | गांधी जी के सिद्धांतों पर चलने की अपेक्षा भी अधिकतर लोग दूसरों से ही कहते है जबकि स्वयं उस पर चलना नहीं चाहते | गांधी जी किसी गरीब को भोजन देने की बजाए  उसके लिए काम उपलब्ध करने की बार करते थे | वे खैरात बांटने का खुला विरोध करते थे | उनका कहना था भगवान हमारा नौकर नहीं है, जो हमारे काम कर जाए |काम तो हमें ही करना पड़ेगा |अपने अधिकार हमें याद है, परंतु समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों  को हम भूल गए है | हम अकर्मण्यता के दलदल में फसते जा रहे है |कर्म संस्कृति की सोच हमने क्षीण कर दी है |सड़क पर यातायात का पहले हम उल्लंगन करते है और पकड़े जाने पर जुर्माना देने की बजाय कम रकम में पुलिस से समझौता करने की फिराक में रहते है |

प्रश्न ) लोग सरकार से  क्या चाहती है ?

उत्तर ) लोग चाहते है की सरकार उनकी भलाई के लिए कार्य करती रहे और वे स्वयं कुछ न करे |

प्रश्न ) गांधी जी के सिद्धांतों की क्या स्थिति है ?

उत्तर ) लोग चाहते है की दूसरे गांधी के सिद्धांतों पर चले |

प्रश्न ) ........हम अपनी सुविधा देखते है |( सही कथन से वाक्य पूरा कीजिए |)

उत्तर ) भ्रष्टाचार का विरोध करने की बजाय

प्रश्न ) समाज और राष्ट्र के प्रति हम क्या भूल गए है ?

उत्तर ) हम अपने कर्तव्यों को भूल गए है |

वाक्य

 

                               वाक्य

शब्दों की रचना वर्णों  के सार्थक मेल से होती है | इन्हीं सार्थक शब्दों के सार्थक एवं व्यवस्थित मेल से वाक्य बनते हैं| वाक्य  भाषा की सबसे छोटी इकाई हैं,जिनके द्वारा लिखने व बोलने वाले के मन का आशय समझ में आ जाता है | इस तरह हम कह सकते हैं कि मनुष्य के विचारों को व्यक्त करने वाला शब्द समूह, जो व्यवस्थित हो तथा पूर्ण आशय प्रकट कर सके, वाक्य कहलाता है|”

वाक्य में निम्नलिखित बातों का होना जरूरी है-

1 सार्थकता – वाक्य रचना के लिए जरूरी है कि उसमें प्रयुक्त सभी पद सार्थक हों| कच-कच शब्द निरर्थक है,लेकिन क्या कच-कच लगा रखी है ? इस इस वाक्य में यह शब्द व्यर्थ की बकवास के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है| अत: सार्थक बन गया है |

2 आकांक्षा – वाक्य के एक पद को सुनकर दूसरे पद को सुनने व जानने कि जो स्वाभाविक उत्कंठा जागती है, उसे आकांक्षा कहते हैं| जैसे – दिन में काम करते हैं |

इस वाक्य को सुनकर हम प्रश्न करते है – कौन लोग काम काम करते है ? यदि हम कहें कि सभी लोग काम करते है तो सभी कह देने से प्रश्न का उत्तर मिल जाता है | और वाक्य ठीक हो जाता है|

3 योग्यता-   से तात्पर्य है कि अर्थबोधन की सामर्थ्य| जैसे किसान लाठी से खेत जोतता है| इस वाक्य में लाठी के स्थान पर हल का प्रयोग होना चाहिए| क्योंकि हल खेत जोतने के संबंध में अर्थबोधक की क्षमता रखता है |

4आसक्ति – आसक्ति का अर्थ है – निकटता या समीपता | बोलते व लिखते समय शब्दों में निकटता व समीपता का होना अति आवश्यक है | अगर शब्द थोड़ी-थोड़ी देर बाद या-या रुक-रुककर बोले जाएँ तो वे वाक्य नहीं कहलाते|

5  पदक्रम – वाक्य के सही अर्थ को जानने के लिए शब्दों का सही पदक्रम का होना जरूरी है| पदक्रम के अभाव में वाक्य का सही अर्थ नहीं निकलता |उदाहरण के रुप में हिन्दी में प्राय: कर्ता के बाद कर्म और उसके बाद क्रिया का प्रयोग किया जाता है | जैसे – मोहन पत्र लिखता है|” किन्तु पत्र मोहन लिखता है या “लिखता है मोहन पत्र” ऐसा शब्द समूह वाक्य नहीं कहलाते क्योंकि इनमें पदक्रम नहीं हैं|

i)        सारे देश के नागरिक कर्तव्यनिष्ठ हैं |

देश के सारे नागरिक कर्तव्यनिष्ठ हैं |

   Ii)    गाय का ताकतवर दूध होता है |

        गाय का दूध ताकतवर होता है |

6 अन्वय – इसका अर्थ है – मेल | वाक्य में कर्ता, लिंग, कारक आदि में होना जरूरी है| इसके बिना वाक्य का पूर्ण अर्थ नहीं निकलता |

उदाहरण –i)  मेरा देश में अनेक नदियां बहता हैं |

            मेरा देश में अनेक नदियां बहती हैं |

        Ii) चूहें किताबें कुतर गई |

            चूहे किताबें कुतर गए |

वाक्य की संरचना के आधार पर उसको दो भागों में विभाजित किया जाता है|

1  उद्येश्य               2 विधेय

1 उद्येश्य – वाक्य का वह अंग, जिसके विषय में कुछ कहा जाए, उसे उद्येश्य कहते हैं|

उदाहरण-

1 राम सो रहा है |

2 राजू खाना खा रहा है|

3 किसान फलों के पेड़ भी लगाता है |

4 जवान देश की रक्षा करते है |

इन वाक्यों में राम’, राजू’, किसान और जवान के के विषय में बताया जा रहा है | इसलिए राम’, राजू’, किसान और जवान उद्येश्य हैं |

विधेय- वाक्य में उद्येश्य के बारे में जो कुछ कहा जाए, उसे विधेय कहते हैं |

उदारहण –

1 कर्ण खेल रहा है |

2 चित्रकार चित्र बनाता है |

3 चित्रा गीत गा रही है |

4 मंजरी बस से शहर गई |

 इन वाक्यों में खेल रहा है’, चित्र बनाता है’, गीत गा रही है और  बस से शहर गई वाक्यों के विधेय हैं |

रचना के आधार पर वाक्य के भेद तीन होते हैं

क ) सरल वाक्य   ख ) संयुक्त वाक्य  ग) मिश्र वाक्य

क ) सरल या साधारण  वाक्य – इसमें एक या एक से अधिक उद्येश्य और एक विधेय होते है अथवा जिस वाक्य में एक ही मुख्य क्रिया हो, उसे सरल वाक्य कहते हैं| जैसे-

वह ज़ोर ज़ोर से हँसा |

मैं और मेरा भाई शादी में  जाएंगे |

मोहन पार्क  जा रहा होगा |

वह अत्याचार किए जा रहा था |

पाकिस्तान वर्षों से आतंकवाद फैलाए जा रहा था|

इन वाक्यों में रेखांकित क्रियाएँ मुख्य क्रियाएँ हैं |

संयुक्त वाक्य – जिन वाक्यों में दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य किसी समुच्चयबोधक अव्यय से जुड़े होते हैं, उन्हें संयुक्त वाक्य कहते हैं|

उदाहरण :- माँ बाज़ार गई और सब्जियाँ लेकर आई |

          आप खाना खाए और आराम करें |

          राम बीमार है, इसलिए स्कूल नहीं आया |

          विद्यार्थी परिश्रमी होता है तो अवश्य सफल होता हैं |

           आप चाय लेंगे या कॉफी ?

 

संयुक्त वाक्य की पहचान

दो उपवाक्यों के बीच समानाधिकरण संबंध होता है |

दो या अधिक मुख्य या स्वतंत्र उपवाक्य होते है |

उपवाक्य होते हुए भी उनमें पूर्ण अर्थ का बोध होता है |

मुख्य वाक्य अपने पूर्ण अर्थ की अभिव्यक्ति के लिए दूसरे उपवाक्य पर आश्रित नहीं रहता हैं |मोहन दिल्ली जाएगा और शीला यहीं रहेगी |

क)   माता जी बाज़ार गई और बच्चों के लिए खिलौने लेकर आई |

ख)    यहाँ आप रह सकते है या आपका भाई रह सकता है |

कभी-कभी संयुक्त वाक्यों में समुच्चयबोधक अवयव चिह्नों का लोप होता है |

क)   रहने वाले रहेंगे, जाने वाले चले जाएंगे |

ख)    क्या सोचा था, क्या हो गया |

ग)    काम किया है, पैसा तो मागूँगा ही |

संयुक्त वाक्यों के भेद

1 संयोजक संयुक्त वाक्य- जिन संयुक्त वाक्यों में उपवाक्य दो कार्य- व्यापारों या स्थितियों को जोड़ने का कार्य करते हैं: जैसे –

क)   मैं दिल्ली गया था और मेरी पत्नी आगरा |

ख)   यहाँ मैं बैठूँगा तथा उधर दूसरे लोग बैठेंगे |

ग)    आपके लिए खिचड़ी बनी है एवं मेरे लिए चावल |

2 विभाजक संयुक्त वाक्य – जिन संयुक्त वाक्यों से आए उपवाक्यों से दो स्थितियों या कार्य-व्यापार के बीच विकल्प दिखाया जाए या एक को स्वीकार किया जाए तथा दूसरे को त्यागा जाए, वे विभाजक संयुक्त वाक्य कहे जाते है | इनमें या, अथवा, या-या, न-न, कि आदि समुच्चयबोधक अव्ययों का प्रयोग किया जाता है; जैसे –

क)   आप पहुँच जाएँगे या मैं फोन करूँ ?

ख)   थी से काम करो अथवा नौकरी छोड़ दो |

ग)    मैं न आपको पहचानता हूँ न आपके पिता जी को |

घ)    न तो शीला ही आई, न अपने बेटे को भेजा |

ङ)     आप मेरे साथ रहेंगे कि  मोहन के साथ |

3 विरोधसूचक संयुक्त वाक्य – जब उपवाक्य के बीच विरोध का बोध हो तो ऐसे संयुक्त वाक्य विरोधवाची संयुक्त वाक्य कहलाते हैं | ये प्राय: मगर, पर,लेकिन, बल्कि आदि अव्ययों से जुड़े रहते हैं ; जैसे-

क)   वह खेलने में तो अच्छा है मगर पढ़ाई-लिखाई नहीं करता|

ख)   मैंने उसे बहुत समझाया पर वह नहीं मानी|

ग)    हम जाना नहीं चाहते थे पर आपके पिताजी नहीं माने|

4 परिणामवाची संयुक्त वाक्य –जब एक उपवाक्य से कार्य का तथा दूसरे से उसके परिणाम का बोध होता है तो वे परिणामवाची संयुक्त वाक्य कहलाते हैं|

इनके उपवाक्य प्राय: इसलिए, अतः, सो आदि अव्ययों से जुड़े होते हैं; जैसे-

क ) आज बाज़ार बंद है इसलिए कुछ नहीं मिलेगा|

ख ) वह बहुत बीमार था अतः चुप ही बैठा रहा |

ग ) वह आना नहीं चाहता था सो झूठ बोलकर चला गया |

मिश्र वाक्य

संयुक्त वाक्यों में जहाँ प्रत्येक उपवाक्य स्वतंत्र उपवाक्य होता है,वहाँ मिश्र वाक्यों में एक उपवाक्य  तो स्वतंत्र उपवाक्य  होता है तथा शेष स्वतंत्र उपवाक्य पर आश्रित रहने के कारण आश्रित उपवाक्य कहलाता  है| स्वतंत्र उपवाक्य को प्रधान उपवाक्य भी कहा जाता है|

प्रधान उपवाक्य                           आश्रित उपवाक्य

क ) मैं उस लड़की से मिला था                      जिसकी किताब खो गई है|

ख ) मैंने वहीं मकान खरीदा है                       जहाँ  आप रहते हो |

ग ) पिताजी ने मुझसे कहा                          कि वे बीमार है |

मिश्र वाक्य के उपवाक्य प्राय: कि, जो, जब,तब,तो, अगर,जिसने, ज्योंही, जितना-उतना,जिधर-उधर,क्योंकि, यदि तो, ताकि यद्यपि-तथापि  आदि समुच्चयबोधक अवयव से जुड़े होते हैं | मिश्र वाक्यों के आश्रित उपवाक्य, वाक्य के आरंभ, मध्य तथा अंत में तीनों ही स्थानों पर आ सकते हैं ; जैसे-

क)   जो लड़का यहाँ आया था, वह बहुत बीमार है |

ख)   वह लड़का, जो कल यहाँ आया था, बहुत बीमार है |

ग)    वह लड़का बहुत बीमार है जो कल यहाँ आया था |

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...