Monday, June 28, 2021

साखियाँ एवं सबद कक्षा नौवीं

 

साखियाँ एवं सबद

-    कबीर

प्रश्न)1  मानसरोवर से कवि का  क्या आशय है?

उत्तर ) मानसरोवर से कवि का आशय है मन रूपी पवित्र सरोवर| इसमें मनुष्य के पवित्र विचार भरे होते है | और जीवात्मा रूपी हंस इसमें प्रभु-भक्ति में मग्न होकर मुक्ति रूपी मुक्ताफल चुगता है| वह इस सरोवर को छोडकर कहीं नहीं जाना चाहता है|

प्रश्न )2  कवि ने सच्चे  प्रेमी की क्या कसौटी बताई है?

उत्तर ) कवि ने सच्चे  प्रेमी की कसौटी बताते हुए बताया है सच्चा प्रेमी अपने प्रेम अर्थात ईश्वर की भक्ति करते हुए ईश्वर को पाने का प्रयास करता है| वह लोभ,मोह, माया से ऊपर उठ चुका होता है| उसे ईश्वर के अलावा किसी सांसारिक वस्तु को पाने की रुचि नहीं होती है|

प्रश्न)3  तीसरे दोहे में कवि ने किस प्रकार के ज्ञान को महत्व दिया है ?

उत्तर ) तीसरे दोहे में कवि ने  अनुभव से प्राप्त ज्ञान को महत्व दिया है जो सहज साधना से प्राप्त होता है| कबीर ने इस प्रकार के ज्ञान को हस्ती के समान बताया है| इसे पाने के बाद उसका साक्षात्कार ईश्वर से हो जाता है|

प्रश्न )4  इस संसार में सच्चा संत कौन है?

उत्तर) 1जो सांप्रदायिक भेदभाव, सांसरिक मोह-  माया  से दूर रहे |

    2 सुख-दुख लाभ-हानि को समान रूप से अपनाता हो|

    3 दिखावे की भक्ति न करता हो|

प्रश्न ) 5 अंतिम दो दोहो के माध्यम से कबीर ने किस तरह की संकीर्णताओं  की ओर संकेत किया है?

उत्तर ) 1 अपने धर्म को श्रेष्ठ सिद्ध करना और दूसरों के धर्म की निंदा करना |

       2 ऊंचे कुल में जन्म लेने से स्वयं को श्रेष्ठ समझना |लेकिन मनुष्य केवल ऊंचे कुल में जन्म लेने से बड़ा नहीं होता बल्कि कर्मों से होता है |

प्रश्न ) 6 किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कुल से होती है या कर्मों से? तर्क सहित उत्तर दीजिए |

उत्तर ) व्यक्ति को पहचान बनाने के लिए  अच्छे कर्म करना जरूरी हैं | क्योंकि व्यक्ति की पहचान उसके अच्छे कर्मों से होती है| ऊँचे कुल में जन्म लेकर भी व्यक्ति ने अच्छे कर्म नहीं किए तो वह  आदर पाने योग्य नहीं है| इसके विपरीत यदि व्यक्ति छोटे कुल में जन्म लेकर अच्छे कर्म करता है तो वह सम्माननीय बन जाता है|

प्रश्न ) 7 काव्य सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए-

 हस्ती चढ़िए ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारी |

स्वान रूप संसार है, भूंकन दे झक मारि |

उत्तर ) काव्य सौन्दर्य –

      भाव सौन्दर्य –ज्ञान का महत्व बताते हुए कबीर जी कहते है कि मनुष्य को ज्ञान रूपी हाथी की सवारी सह्जतारूपी गलीचा डालकर करना चाहिए | ऐसा करते हुए यदि कुत्ता रूपी संसार उसकी आलोचना करता है तो उसको उसकी परवाह नहीं करनी चाहिए| अर्थात मनुष्य को ज्ञान प्राप्त करना चाहिए |

शिल्प सौन्दर्य –

i)        साधुक्कडी भाषा का प्रयोग है | इसमें हस्ती, स्वान , ज्ञान आदि तत्सम शब्दों का प्रयोग है |

ii)       भक्ति रस की प्रधानता है|

iii)       तुकांत युक्त होने से स्वर मैत्री अलंकार है |

प्रश्न ) 8 मनुष्य ईश्वर को कहाँ – कहाँ ढूँढता है?

उत्तर ) मुसलमान अल्लाह को काबा और मस्जिद में ढूँढता है|  हिन्दू ईश्वर को मंदिर तथा पवित्र स्थानों पर ढूँढता है| तथा योग, वैराग्य तथा अनेक प्रकार की क्रियाएँ करता है |

 प्रश्न ) 9 कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए किन प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है?

उत्तर ) मनुष्य मंदिर, मस्जिद , में पूजा – अर्चना करके, नमाज़ पढ़कर ईश्वर को प्राप्त करना चाहता है,किन्तु इससे ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती है| वह दिखावटी या आडंबरपूर्ण भक्ति करता है,  विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा करता है तथा योग, वैराग्य आदि क्रियाएँ करता है,  पर यह सब व्यर्थ है|

प्रश्न) 10 कबीर ने ईश्वर को सब स्वांसों की स्वांस में क्यों कहा है ?

उत्तर ) सभी जीवों की रचना ईश्वर ने की है अत : ईश्वर का वास हर प्राणी की हर  सांस में है| ईश्वर संसार के कण –कण में समाया है  अर्थात ईश्वर हर प्राणी की सांस में समाया है | इसलिए कबीर ने ईश्वर को सब स्वांसों की स्वांस में  कहा है |

भाषा अध्ययन –

निम्नलिखित शब्दों के तत्सम रूप लिखिए |

पखापखी , अनत, जोग, जुगति, बैराग , निरपख |

तत्सम             तद्भव

पखापखी           पक्ष-विपक्ष

अनत              अनंत

जोग               योग

जुगति              युक्ति

निरपख            निरपेक्ष

 

 

    

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