Sunday, July 18, 2021

पाठ -5 अट नहीं रही है सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

 

पाठ -5 अट नहीं रही है

                    सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

प्रश्न) कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नही हट रही है?

उत्तर) फागुन मास का प्राकृतिक सौंदर्य अत्यंत आकर्षक है | चारों ओर हरियाली छा गई है | वृक्ष हरे- भरे पत्तों और रंग-बिरंगे फूलो से लद गए है | पूरा वातावरण  मधुर एवं सुगंधित बन गया है | फागुन का यह सौन्दर्य प्रकृति में समा नहीं रहा है अथार्त पूरा वातावरण सौंदर्य से परिपूर्ण है |

प्रश्न) प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?

उत्तर ) प्रस्तुत कविता में अट नहीं रही है में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी ने फागुन के सौन्दर्य और मादक रूप के प्रभाव को दर्शाया है| फागुन का सौन्दर्य असीम है कवि ने उसे हर जगह छलकते हुए दिखाया है, जो घर-घर फैला हुआ है| यहाँ “घर-घर भर देते हो” में फूलों की शोभा की ओर संकेत है और मन की खुशी की ओर भी | उड़ने को पर- पर करना भी ऐसा ही सांकेतिक प्रयोग है,जो पक्षियों की उड़ान पर लागू होता है |

प्रश्न) फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?

उत्तर ) फागुन में सर्वत्र मादकता सुंदरता छाई रहती है| प्राकृतिक  शोभा अपने यौवन पर होती है| पेड़-पौधे नए पत्तों, फल-फूलों से लद जाते हैं, हवा सुगंधित हो उठती है| आकाश साफ-स्वच्छ होता है| पक्षियों के समूह आकाश में विहार करते दिखाई देते हैं| बाग-बगीचों और पक्षियों में उल्लास भर जाता है| इस तरह फागुन का सौन्दर्य बाकी ऋतुओं से भिन्न है|

प्रश्न) इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ बताएँ|

उत्तर ) महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी छायावाद के प्रमुख कवि माने जाते है| उत्साह और अट नहीं रही  है  दोनों ही कविताओं में प्राकृतिक उपदानों का चित्रण और मानवीकरण हुआ है|काव्य के दोनों पक्ष अनुभूति और अभिव्यक्ति पक्ष है| इस दृष्टि से दोनों कविताएं सराहनीय है| निराला जी की भाषा एक ओर जहां संस्कृतनिष्ठ, सामसिक और आलंकारिक है| ग्रामीण शब्दों का प्रयोग भी दर्शनीय है| भाषा सरल,सुबोध और प्रवाहमयी है|

प्रश्न) होली के आस-पास प्रकृति में जो परिवर्तन दिखाई देते है,उन्हें लिखिए|

उत्तर) होली का त्यौहर फाल्गुन मास में आता है| इस समय चारों ओर मादकता छा जाती है | चारों ओर रंग ही रंग बिखरे रहते है| प्रकृति के हरे –भरे वृक्ष  रंग -बिरंगे फूल होली के महत्व को ओर अधिक बढ़ा देते है| फूलों से युक्त वृक्ष चारों ओर मंद सुगंध बिखेर देते है| लोगों एक मन उमंग और आनंद से भर जाते है|

 

पाठ -5 उत्साह सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’

 

पाठ -5  उत्साह

   सूर्यकांत त्रिपाठी निराला

प्रश्न) कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर गरजने के लिए कहता है, क्यों?

उत्तर) बादल अपने जल से निश्चय ही पृथ्वी के प्राणो की प्यास बुझाता है और उन्हे प्रसन्न करता है|यही बादल विध्वंस भी मचा सकता है| कवि बादल को गरजने के लिए इसलिए कहता है ताकि सोई सोई आत्माएँ जाग जाएँ तथा उनके मन में क्रांति का संचार हो सके | क्रांति व परिवर्तन से ही युग का निर्माण हो सकता है | इसलिए कवि बादल को बरसने की अपेक्षा गरजने के लिए कहता है |

प्रश्न) कविता का शीर्षक उत्साह क्यों रखा गया है?

उत्तर) कवि बादल से गरजने के लिए कहता है| गर्जन बादल की शक्ति को व्यक्त करता है | इसलिए कवि बादल का गरज – गरजकर नई प्रेरणा देने की लिए आह्वान करता है | अत: कवि ने बादल के इस विशेष गुण के आधार पर इस कविता का शीर्षक उत्साह रखा है जो अत्यंत उचित एवं सार्थक है |

प्रश्न) कविता में बादल किन-किन अर्थो की और संकेत करता है ?

उत्तर) कविता में बादल कवि की कल्पना शक्ति और क्रांति की भावना की ओर संकेत करता है | बादल एक ओर तो पीड़ित लोगों की आशाओं और कामनाओं को पूरा करने वाला है तो दूसरी और जन- जन के मन में उत्साह और संघर्ष के भाव भरने वाला भी है |

प्रश्न) शब्दों का प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो,नाद-सौन्दर्य कहलाता है| उत्साह कविता में ऐसे कौन से शब्द है जिनमें नाद-सौन्दर्य मौजूद  है,छाँटकर लिखें|

 

उत्तर ) 1 “घेर घेर गगन, धराधार ओ !

      2 ललित ललित, काले घुँघराले,

        बाल कल्पना के-से पाले

      3 “विद्युत-छवि उर में”कविता की इन पंक्तियों में नाद-सौन्दर्य मौजूद है|

प्रश्न) उत्साह कविता का केन्द्रीय भाव का उल्लेख कीजिए|  अथवा

प्रश्न)  उत्साह कविता  के मूल उद्देश्य का वर्णन कीजिए|

उत्तर ) इस कविता में निराला ने बादल को उत्साह के प्रतीक के रूप में चित्रित किया है| कवि ने बादल से अनुरोध किया है कि वह सारे आकाश में छा जाए और खूब वर्षा करे ताकि तप्ति हुई धरती को शीतलता मिल सके | अपनी गर्जन से सोई हुई मानवता को जगा दे| वह संघर्षशील कवि के समान सबके जीवन में उत्साह भर दे|

 

 

 

Friday, July 16, 2021

पाठ 2 जॉर्ज पंचम की नाक कमलेश्वर

 

जॉर्ज पंचम की नाक

        कमलेश्वर

प्रश्न) सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है वह उनकी किस मानसिकता को दर्शाती है?

उत्तर) सरकारी तंत्र में जॉर्ज पंचम की नाक लगाने को लेकर जो चिंता या बदहवासी दिखाई देती है, वह उनकी गुलाम मानसिकता को दर्शाती है| उनकी इस मानसिकता से पता चलता है कि वे स्वतंत्र होकर भी अंग्रेज़ो के प्रभाव से प्रभावित है | उन्हें अपने उस मेहमान की नाक बहुमूल्य लगती है जिसने भारतवर्ष को गुलाम बनाया और अपमानित किया | उनके पास जॉर्ज पंचम जैसे लोगों के बुरे कार्यो को उजागर कर विरोध करने का साहस नहीं है| वे उन्हें सम्मान देकर अपनी दासता की भावना को प्रमाणित करना चाहते हैं|

प्रश्न) रानी एलिज़ाबेथ के दर्जी की परेशानी का क्या कारण था | उसकी परेशानी को आप किस तरह तर्कसंगत ठहराएँगे?

उत्तर) रानी एलिज़ाबेथ  के दर्जी की परेशानी का कारण रानी के द्वारा भारत, नेपाल और पाकिस्तान के दौरे के समह पहनी जाने वाली पोशाकों की विविधता सुंदरता और आकर्षण था इन पोशाकों में रानी कैसी लगेगी दर्ज़ी की परेशानी उसकी अपनी दृष्टि से तर्कसंगत थी|  हर व्यक्ति अपने द्वारा किए गए कार्य को सर्वश्रेष्ठ रूप में प्रस्तुत करना चाहता है ताकि वे दूसरे के द्वारा की गई प्रशंसा को सहज रूप में बटोर सके |

प्रश्न) ओर देखते ही देखते नयी दिल्ली का काया पलट होने लगा’- नयी दिल्ली के काया पलट के लिए क्या क्या प्रयत्न किए गए होंगे?

उत्तर) जब इंग्लैंड की रानी एलिज़ाबेथ ने भारत की यात्रा करने का निश्चय किया तो भारत सरकार की प्रसन्नता का कोई ठिकाना न रहा| नयी दिल्ली की सड़के टूटी- फूटी और धूल से भरी हुई थी| उन्हे साफ करके उनकी मुरम्मत की गई होगी |पुराने भवनों को भी  सजाया गया होगा| हर चौराहे को रानी के स्वागत हेतु बंधनवार और फूलों से सजाया गया होगा| रानी के स्वागत के लिए रंग बिरंगे बोर्ड तैयार किए गए होंगे |

प्रश्न) आज की पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान पान संबंधी आदतों आदि वर्णन का दौर चल पड़ा है

क)    इस तरह की पत्रकारिता के बारे में आपके क्या विचार है?

ख)     इस तरह की पत्रकारिता आम जनता विशेष कर युवा पीढ़ी पर क्या प्रभाव डालती है?

उत्तर) क) आज की पत्रकारी का चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान पान संबंधी आदतों के बारे  कुछ न कुछ लिखने में गर्व अनुभव करती है | एसी पत्रकारिता से सामान्य लोगों को निजी जीवन के संबंध में शाब्दिक जानकारी तो अवश्य मिलती है, जिनके बारे में वे न जाने क्या क्या सोचते रहते है | किन्तु ऐसी खबर को अखबार की प्रमुख खबर के रूप में नही छापना चाहिए | |

ग)     इस तरह की पत्रकारिता आम जनता के  रहन- सहन के तौर तरीके और फैशन के प्रति जागरूक करती है किन्तु इसका कभी- कभी इतना अधिक प्रभाव पड़ता है की युवक- युवतियाँ पढ़ाई लिखाई की अपेक्षा फैशन की और अधिक ध्यान देने लगते है|

प्रश्न) जॉर्ज पंचम की लाठ की नाक को पुन: लगाना  के लिए क्या क्या यत्न किए ?

उत्तर) उसने सबसे पहले वैसा ही पत्थर खोजने के लिए देश भर के पर्वत छान डाले जिसे उसकी मूर्ति बनी हुई थी| सरकारी फाइलें भी ढूँढी ताकि वहाँ से कोई अता पता चल सके| देश भर के महान पुरुषों की बनी प्रतिमाओं की नाकों का नाप भी लिया गया  पर वह उससे बड़ी थी पर अंत में किसी की जीवित नाक काटकर जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर लगा दी गई|

प्रश्न) प्रस्तुत कहानी में जगह-जगह कुछ ऐसे कथन आए है जो मौजूदा व्यवस्था पर करारी चोट करते हैं| उदाहरण के लिए फाइलें सब कुछ हज़म कर चुकी हैं| सब हुक्कामों ने एक-दूसरे की तरफ ताका|’पाठ में आए ऐसे अन्य कथन छाँटकर लिखिए |

उत्तर ) प्रस्तुत कहानी में मौजूदा व्यवस्थता पर चोट करने वाले निम्नलिखित कथन आए हैं-

क)    शंख इंग्लैंड में बज रहा था,गूँज हिंदुस्तान में आ रही थी|

ख)   गश्त लगती रही और लाट की नाक चली गई|

ग)     सभी सहमत थे कि यदि लाट की नाक नहीं तो हमारी भी नाक नहीं रह जाएगी|

घ)     हर हालत में इस नाक का होना जरूरी था|

ङ)     लेकिन बड़ी होशियारी से|

प्रश्न) नाक मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का द्योतक है| यह बात पूरी व्यंग्य रचना में किस तरह उभरकर आई है? लिखिए|

उत्तर ) लेखक का प्रमुख लक्ष्य ही नाक को मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का द्योतक सिद्ध करना रहा है| जॉर्ज पंचम भारत पर विदेशी शासन का प्रतीक है|उनकी लाट से नाक चली जाना उनका अपमान है| रानी एलीज़ाबेथ के आने पर सभी सरकारी अधिकारी अङ्ग्रेज़ी शासन के विरुद्ध अपनी नाराजगी जाहिर करने की अपेक्षा उसकी आराधना में जुट गए| यह कार्य भारत की नाक काटने के समान था जॉर्ज पंचम की नीतियाँ भारत विरोधी थीं| इसलिए उसकी नाक किसी भारतीय सेनानी से छोटी थी| उसकी नाक लगाने के लिए हजारों-लाखों रुपये खर्च कर दिए| अंत में कोई जीवित नाक उस पर लगा दी गई|   

प्रश्न)8  जॉर्ज पंचम की लाट  पर किसी भारतीय नेता, यहाँ तक कि भारतीय बच्चे की नाक फिट न होने की बात से लेखक किस ओर संकेत करना चाहता है?

उत्तर ) जॉर्ज पंचम की नाक सभी भारतीय नेताओं और भारतीय बच्चों की नाक से छोटी थी| लेखक ने बताया है कि भारतीय नेताओं और बलिदान देने वाले बच्चों का मान-सम्मान जॉर्ज पंचम की नाक से अधिक था|गांधी ,लाला लाजपतराय,सुभाषचंद्र बोस,नेहरू आदि नेता तो जॉर्ज पंचम से कहीं अधिक सम्माननीय थे| यह संकेत करना ही  लेखक का लक्ष्य रहा है|

प्रश्न) अखबारों ने जिंदा नाक लगाने कि खबर को किस तरह प्रस्तुत किया ?

उत्तर ) अखबारों ने जिंदा नाक लगाने कि खबर को केवल इतना ही  प्रस्तुत किया कि नाक का मसला हल हो गया है| राजपथ पर इंडियागेट के पास वाली जॉर्ज पंचम की लाट के नाक लग गई है|

प्रश्न) नयी दिल्ली में सब था ...... सिर्फ नाक नहीं थी|” इस कथन के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

उत्तर ) इस कथन के माध्यम से लेखक ने बताया  है कि देश में स्वतन्त्रता के बाद दिल्ली में हर प्रकार की सुख-सुविधा थी| केवल जॉर्ज पंचम का अभिमान और मान-सम्मान वाली ऊंची नाक नहीं थी | अङ्ग्रेज़ी राज्य में उनकी यहाँ तूती बोलती थी | उन्हीं का आदेश चलता था,किन्तु अब इंडिया गेट के पास वाली उनकी नाक भी शेष नहीं बची थी |

प्रश्न) जॉर्ज पंचम की नाक लगने वाली खबर के दिन अखबार चुप क्यों थे?

उत्तर )मूर्तिकार ने  जॉर्ज पंचम की मूर्ति पर जिंदा नाक लगा दी गई |अखबारों में खबर छप गई कि नाक लगा दी गई है| उस दिन भारतियों को लगा कि उन सबकी नाक कट गई है| सारी भारतीय जनता का बहुत बड़ा अपमान हुआ | आज देश में उस व्यक्ति कि मूर्ति पर जिंदा नाक लगा दी है ,जिसने सारे भारत को गुलामी की जंजीरों में बाँधे रखा था | अपमान की पीड़ा से व्याकुल होने कारण उनके पास कहने के लिए कुछ न था | इसलिए अखबार  उस दिन चुप थे|

 

 

Wednesday, July 14, 2021

पाठ6 रक्त और हमारा शरीर

 

पाठ6 रक्त और हमारा शरीर

पाठ का सार  

प्रस्तुत पाठ मे रक्त के घटक ,रक्त  की कमी से उत्पन्न होने वाली  बीमारियों और उनकी रोकथाम के

 के उपायों को रोचक ढंग से प्रस्त्तुत किया गया है |   

अनिल और दिव्या अस्पताल में –अनिल की बहन दिव्या कामजोरी और थकान से परेशान थी उसे भूख भी नहीं लगती थी |अनिल उसे लेकर डॉक्टर के पास गया ,जहाँ उन्होंने खून की जाँच करने के सलाह दी |अनिल खून की जाँच के लिए दूसरे कमरे मे गया ,जहाँ उसे एक जान -पहचान की डॉक्टर दीदी मिल गई उन्होने खून की कुछ बूँदे दिव्या के शरीर में से लेकर अगले दिन रिपोर्ट के लिया बुलाया |

खून की जाँच की रिपोर्ट –अगले दिन अनिल को डॉक्टर ने बताया कि दिव्या को एनीमिया है चिन्ता की कोई बात नहीं |कुछ दिन तक दवाएँ लेने पर वह ठीक हों सकती है |अनिल ने एनीमिया के  बारे में डॉक्टर से जानना चाहा ,तो डॉक्टर ने कहा की रक्त  भानुमती के पिटारे के समान है ,जो दिखने मे लाल द्रव सा दिखता है परंतु इसमें प्लाजमा ,लाल रक्त कणिकाएँ तथा प्लेटलैट भी पाया जता हैं |       

  रक्त एक आश्चर्यजनक द्रव –सूक्ष्मदर्शी दृवारा स्लाइड पर रखे गए एक बूँद  रक्त में इतने सारे अवयव देखकर अनिल आश्चर्यचकित रह गया |उसने लाल रक्त कणिकाएँ देखी ,जो बालूशाही जैसी थी |एक मिलीलीटर रक्त में इनकी संख्या 40 से 50 लाख कण तक हो सकती है |इनके कारण ही रक्त लाल होता है|

इनका जीवन काल चार माह का होता है | ये हर समय बनती और नष्ट होती रहती है| ये हड्डियों के बीच मज्जा रूपी कारखाने में बनती है | इनके लिए प्रोटीन ,लौह तत्व , विटामिन जैसे कच्चे पदार्थ की आवश्यकता है |ये पदार्थ हरी सब्जी, फल, अंडा, दूध और मांस में खूब मिलता है| इन लाल रक्त कणों की कमी को ही अनिमिया कहते है| इसका सबसे अच्छा तरीका  है -संतुलित आहार लेना |

 सफेद रक्त  कण ओर प्लेटलैट  – सफ़ेद रक्त  कण हमारे शरीर के वीर सिपाही होते है | जो अनेक रोगो से हमारी रक्षा करते है | ये रक्त कण शरीर पर हमला करने वाले रोगाणुओं से लड़कर उनको शरीर के अंदर प्रवेश  करने से रोकते है |प्लेट लैट कणों का काम चोट लगने पर रक्त को जमाव क्रिया में मदद करना होता है |

 

 

 

 

 रक्त के तरल भाग के प्लाज़्मा में एक प्रोटीन होती है |जो रक्त वाहिका की कटी - फटी दीवार में जाली सी बुन देते है ओर प्लेटलैट उनके चिपक जाते है |यह दरार भरने से रक्त का निकालना बंद हो जाता है | अधिक रक्त निकल जाने पर व्यक्ति को रक्त की भी जरूरत पड़ती है | यह रक्त उसी व्यक्ति के खून के समूह वाला होना चाहिए | घाव घेरा होने पर कसकर पट्टी बाँध देनी चाहिए जिससे शरीर से  रक्त  कम से कम निकले |

रक्तदान और हम –हर किसी व्यक्ति को नहीं चढ़ाया जा सकता है | अवश्यकतानुसार रक्त प्राप्त करने के लिए बडे अस्पतालों में ब्लड़ बैंक |इनमे बैंक चारों तरफ के रक्त सुरक्षित रखे जाते हैं |इन ब्लड –बैंक में रक्त की कमी न होने पाए इसके लिया अवश्यक है कि लोग रक्तदान करे |अठराह साल से अधिक उम्र स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है |एक बार मे एक व्यक्ति से 300मिलिलीटर रक्त लिया जाता है |रक्तदान करने से कमजोरी आएगी ,यह विचार बिल्कुल  ही गलत है क्योंकि इतना रक्त तो हमारा शरीर कुछ ही दिनों में बना लेता है । एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पाँच लीटर रक्त तो हमारे होता है | इसमें कुछ रक्त देकर किसी का जीवन बचाना अत्यंत सौभाग्य की बात होगी |

बड़ा होने पर मैं भी रक्तदान किया करूंगा|” अनिल के मुँह से यह बात सुनकर डॉक्टर ने उसकी पीठ थपथपा दी |

कठिन शब्दार्थ

रक्त :खून ; स्लाइड:काँच की पतली छोटी-सी पट्टी ;एनीमिया: खून की कमी से होने वाली बीमारी ;जिज्ञासा:

जानने की इच्छा; बालूशाही :बीच मे गड़ढेदारगुलाबी रंग की मिठाई ;पलभर ; एक क्षण का लिए ;निराधार :गलत ; रक्तदान :रक्तकोश ;

प्रश्न ) रक्त के बहाव को रोकने के लिए क्या करना चाहिए ?

उत्तर ) रक्त के बहाव को रोकने के लिए घाव पर साफ कपड़े से कसकर पट्टी बाँधनी चाहिए ,क्योंकि दबाव पड़ने पर रक्त का बहाव कम हो जाता है | फिर भी रक्त का बहाव न रुके तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए |

 

 

 

 

 

प्रश्न ) खून को भानुमती का पिटारा क्यों कहा जाता हैं?

उत्तर ) रक्त दिखने में साधारण सा लाल रंग का द्रव होता है | सूक्षमदर्शी से देखने पर रक्त में लाल रक्त कणिकाएँ, श्वेत रक्त कणिकाएँ ,प्लेटलैट,प्लाज़्मा आदि पाए जाते है ,इसलिए रक्त को भानुमती का पिटारा कहा जाता है |

 

प्रश्न ) एनीमिया से बचने के लिए हमे क्या –क्या खाना चाहिए ?

उत्तर ) एनीमिया से बचने के लिए हमे ऐसा संतुलित और पौष्टिक भोजन खाना चाहिए ,जिसमे हरी सब्जियाँ ,दूध,फल,अंडा और मांस शामिल हो | हमे इन वस्तुओं को अपने खाने में अवश्य शामिल करना चाहिए |

प्रश्न ) पेट में कीड़े क्यों हो जाते है ? इनसे कैसे बचा जा सकता है ?

उत्तर ) दूषित भोजन और दूषित पानी से हमारे पेट में कीड़े हो जाते है |इसके अलावा कुछ विशेष किस्म के कीड़े होते है,जिनके अंडे जमीन कि ऊपरी सतह पर पाये जाते है | इनके लार्वा त्वचा से होकर हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते है |

बचाव के उपाय

1)      हाथ पैर व शरीर के अंग साफ करके ही भोजन करना चाहिए |

2)      शौच के लिए शौचाल्य का ही प्रयोग करना चाहिए |

प्रश्न ) रक्त के सफेद कणों को ही वीर सिपाही क्यों कहा गया है ?

उत्तर) रोग उत्पन्न करने वाले रोगाणुओं को सफेद रक्त कण शरीर में नहीं आने देते है | शरीर के अंदर आए रोगाणुओं से सफेद रक्त कण डटकर मुकाबला करते है |ये हमारी बहुरत से रोगों से रक्षा करते है |

प्रश्न ) ब्लड बैंक में रक्तदान से क्या लाभ है ?

उत्तर ) ब्लैड बैंक में रक्त को उचित उपकरणों द्वारा सुरक्षित रखा जाता है | किसी भी व्यक्ति को उसी के समूह का रक्त  प्रदान किया जाता है |आपातकाल में सुविधा से रक्त प्राप्त  किया जा सकता है | ऐसी स्थिति में हमे रक्तदान को खोजना नहीं पड़ता |किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है |

Monday, July 12, 2021

पाठ 12 लखनवी अंदाज़

 

पाठ 12 लखनवी अंदाज़

प्रश्न) लेखक ने नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं है?

उत्तर  लेखक ने जैसे ही रेल के डिब्बे में प्रवेश किया तो उन्हें लगा कि नवाब साहब के चिंतन में बाधा पड़ गई हो और लेखक का आना उन्हें वहाँ अच्छा नहीं लगा | वे कुछ परेशान से दिखाई दिए| अपने इस दशा  में वे कभी खिड़की के बाहर देख रहे थे तो कभी सामने रखे खीरों की ओर| उनकी असुविधा और असंतोष वाली स्थिति से ही लेखक ने अनुभव कर लिया था, कि वे उससे बातचीत करने को उत्सुक नहीं है|

प्रश्न) नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक –मिर्च बुरका ,अंतत: सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया |उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा? उनका ऐसा करना उनके किस स्वभाव को इंगित करता है?

उत्तर ) नवाबों की दूसरों पर प्रभाव डालने की प्रवृति होती है| उसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े करते है| लेखक को देखकर नवाब साहब के मन में नवाबी स्वभाव उभर आया| उन्होंने खीरे जैसी साधरण वस्तु को उनके सामने  नहीं खाया| बल्कि दुनिया के तौर-तरीकों से हटकर खीरे कटे,नमक-मिर्च लगाया,उन्हें सूँघा और खिड़की में से बाहर फेंक दिया| उन्होंने ऐसा सामने वालों पर रौब जमाने के लिए किया |

प्रश्न )  बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है| यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर ) यशपाल जी का यह विचार अपने आप में अधूरा प्रतीत होता है| इसलिए हम इससे से पूर्णत: सहमत नहीं है| कहानी में कोई न कोई विचार,घटना अथवा पात्र अवश्य ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विद्यमान रहता है| पठित कहानी लखनवी अंदाज़ को लिया जा सकता है| इसके पीछे लेखक का मुख्य उद्देश्य लखनऊ के पतनशील नवाबी वर्ग पर करारा व्यंग्य करना है| घटना के रूप में रेल यात्रा, यात्री के रूप में लखनवी नवाबों जैसा दिखने वाला सज्जन और उनके पतन को दिखाना है|

प्रश्न) आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहोगे ?

उत्तर ) प्रस्तुत पाठ में आदि से लेकर अंत तक नवाब की अकड़ का ही उल्लेख किया गया है| वह आपने सामने की सीट पर बैठे हुए सहयात्री से बोलना भी पसंद नहीं करता है | वह खीरे खाने की अपेक्षा उसकी

सुगंध से ही संतुष्ट होकर खिड़की से बाहर फेंक देता है| अत: इस पाठ का शीर्षक नवाबी तहजीब हो सकता है|

रचना और अभिव्यक्ति  

प्रश्न ) नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है| इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए|

उत्तर) नवाब साहब ने अचानक घूमकर लेखक को आदाब-अर्ज़ किया | फिर तौलिये पर रखे ताज़े खीरे उठाए | उनको धोया,पोंछा और खीरे को काटकर तौलिए पर रखने लगे| बड़े आराम से खीरे को काट चुकने के बाद उन पर नमक-मिर्च का पाउडर छिड़का | फिर एक फाँक को सूँघा एवं उसके स्वाद का आनंद अनुभव करते और खिड़की से बाहर फेंकते  जाते|

प्रश्न) क्या सनक का कोई सकरात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए|

उत्तर ) निश्चित रूप से सनक का सकरात्मक रूप हो सकता है| जीतने भी बड़े-बड़े अनुसंधान हुए है वे सनकी व्यक्तियों ने किए हैं| वे सनक के कारण ही रात-दिन अपने कार्य में डूबे रहते हैं कि उन्हें आस –पास कि गतिविधियों का भी ध्यान नहीं रहता है | विश्व की बड़ी-बड़ी खोजे सनकी वैज्ञानिकों की ही देन हैं| अत: स्पष्ट है कि सनक का सकरात्मक रूप भी हो सकता है|

भाषा अध्ययन
प्रश्न ) निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए|
क)    एक सफेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे|
उत्तर ) बैठे थे     - अकर्मक
ख)   नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया |
उत्तर) दिखाया     - सकर्मक
ग)     ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है|
उत्तर) बैठे        - अकर्मक
कल्पना करना - अकर्मक
है           - अकर्मक
घ)     अकेले सफर का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे|
उत्तर ) काटना    - सकर्मक

      खरीदे होंगे       - सकर्मक

    ड़) दोनों खीरों के सिरे  काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला|

उत्तर ) काटा      - सकर्मक
      गोदकर    - सकर्मक
      निकाला    - सकर्मक
च)    नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक-मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की ओर देखा|
उत्तर ) देखा      - अकर्मक
छ)    नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए|
उत्तर ) लेट गए   -  अकर्मक
      थककर    -  अकर्मक
ज)    जेब से चाकू निकाला |
उत्तर ) निकाला    - सकर्मक
प्रश्न) लखनवी अंदाज़ पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए |
उत्तर) नवाब साहब खीरा खाने की तैयारी एक विशेष ढंग से करते है| वह खाने की अपेक्षा सूँघकर खीरे को खड़की से बाहर फेंक देते है| तथा तृप्ति का अनुभव करते है| अत: नवाब के इस व्यवहार से पता चलता है कि लोग जिस कार्य को एकांत में छुपकर करते हैं, उसे दूसरों के सामने करने में अपनी शान के खिलाफ समझते हैं|
प्रश्न) लखनवी अंदाज़  पाठ में निहित व्यंग्य स्पष्ट कीजिए|

उत्तर ) जो जीवन की शान-बान का दिखावा करते हैं| वे जीवन की सहजता व स्वाभाविकता को स्वीकार करते है| लेखक ने दिखाया है कि खीरे जैसी साधारण चीज़ को खाने में लखनवी नवाब अपनी तौहीन समझता है| उसे सूँघकर चलती गाड़ी में से नीचे फेंक देता है| ऐसे लोग सेकंड क्लास में यात्रा करना भी अपना बढ़प्पन समझते है|

 

 

 

 

 

 

 

Sunday, July 11, 2021

पाठ-4 राम का वन-गमन

 

पाठ-4 राम का वन-गमन

 

प्रश्न) माता  कैकयी के दो वरदान के बारे में जानकर  राम ने दृढ़तापूर्वक क्या कहा ?

उत्तर) राम ने कहा, “पिता का वचन अवश्य पूरा होगा| भरत को राजगद्दी दी जाए| मैं आज ही वन को जाऊँगा|

प्रश्न) माता कौशल्या का दो वरदान के संबंध में क्या राय  थी?

उत्तर) माता कौशल्या चाहती थी कि चाहे भरत को राजगद्दी मिल जाए पर राम वन न जाए | वह यहाँ अयोध्या में ही रहे |

प्रश्न) लक्ष्मण ने बड़े भाई को वन-गमन के संबंध में क्या राय दी?

उत्तर ) लक्ष्मण ने कहा, “ आप बाहुबल से अयोध्या का राजसिंहासन छीन लें| देखता हूँ कौन विरोध करता है|”

प्रश्न) सीता  के वन में साथ चलने की जिद्द करने पर राम ने उन्हें क्या कहकार समझाया?

उत्तर ) उन्होंने कहा कि सीते वन का जीवन अत्यंत ही कठिन है| वहाँ न तो भोजन का ठिकाना होता है और न ही रहने का| वहाँ कठिनाइयाँ कदम-कदम पर होती है|

प्रश्न ) राम के वन जाने के निर्णय पर अयोध्यावासियों की क्या हालत थी?

उत्तर ) वहाँ उदासी ने घर कर लिया | सड़कें लोगों के आँसुओं से  गीली हो गई | सबकी यहीं इच्छा थी कि राम वन न जाएँ| वे सब उन्हें रोकना  चाहते थे पर बेबस थे|

प्रश्न) महर्षि वशिष्ठ के सीता के वन जाने के निर्णय पर उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?

उत्तर ) उन्होंने कहा कि सीता अगर वन  जाएगी तो सब अयोध्यावासी उसके साथ जाएँगे| भरत सूनी अयोध्या पर राज करेंगे| यहाँ कोई नहीं होगा| यहाँ तक कि पशु-पक्षी भी नहीं|

प्रश्न)  राम का स्वागत गंगा के किनारे शृंगवेरपुर गाँव में किसने किया ?

उत्तर ) निषादराज गुह ने उनका स्वागत किया |

प्रश्न) दशरथ की मृत्यु किस प्रकार हुई?

उत्तर ) राम के वन में जाने के बाद से वे अत्यंत दुखी थे| सुमंत्र से बार-बार राम और सीता के बारे में प्रश्न किए जा रहे थे| सुमंत्र उनके उत्तर दे रहे थे| इन उत्तरों से उन्हें संतोष नहीं हो रहा था| महाराज दशरथ की बैचनी बढ़ती जा रही थी | राम के वन गमन के  छठे दिन उन्होंने  प्राण त्याग दिए|

 

 

दो वरदान

 

पाठ – 3 दो वरदान

प्रश्न) अपने चारों पुत्रों  के विवाह के पश्चात दशरथ  के मन में  क्या इच्छा बची थी?

उत्तर) राजा दशरथ के मन में केवल एक ही इच्छा बची थी | राम का राज्याभिषेक | उन्हें युवराज का पद देना |

प्रश्न) राम को सभी अयोध्यावासी राजा क्यों बनाना चाहते थे?

उत्तर ) क्योंकि राम बड़े ही विनम्र, विद्वान तथा प्रजा के हितों का ध्यान रखने वाले थे| उनके पराक्रम का लोहा सभी मानते थे| राम राज-काज की ज़िम्मेदारी अच्छी तरह से निभा रहे थे | उनका सम्मान दरबार में लगातार बढ़ता ही जा रहा था |

प्रश्न) राम के राज्याभिषेक की तैयारियों के समय भरत कहाँ थे?

उत्तर ) वह उस समय अयोध्या में नहीं थे |वे अपने नाना केकयराज के घर गए हुए थे|  

प्रश्न) मंथरा कौन थी ?

उत्तर ) वह कैकयी की दासी और उसकी मुँह लगी थी | उसी ने  राम का राज्याभिषेक भरत की अनुपस्थिति में एक षड्यंत्र बताया |उसने रानी को राजा दशरथ से दो वरदान मांगने को कहा |

प्रश्न) मंथरा को जब राम के राज्याभिषेक के बारे में पता चला तो उसकी क्या मनोदशा हुई ?

उत्तर) वह जल भुन गई| राम का राज्याभिषेक उसे कैकयी के विरुद्ध एक षड्यंत्र लगा | वह हाँफ कर कैकयी के    रनिवास की ओर भागी तथा सोती हुई कैकयी को उसने नींद से जगा  दिया |

प्रश्न) रानी कैकयी ने राजा दशरथ से अपने कौन से दो वरदान देने  को कहा  ?

उत्तर ) पहला वरदान राम के स्थान पर भरत का राज्याभिषेक| दूसरा राम को चौदह वर्ष का वनवास |

प्रश्न) रानी के दो वरदान मांगने पर राजा दशरथ की क्या दशा थी?

उत्तर ) दशरथ का चेहरा सफेद पड़ गया| वह अवाक रह गए| उसका  सिर चकराने लगा | वे मूर्छित होकर गिर पड़े|

 

समास

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