Sunday, July 11, 2021

पाठ-4 राम का वन-गमन

 

पाठ-4 राम का वन-गमन

 

प्रश्न) माता  कैकयी के दो वरदान के बारे में जानकर  राम ने दृढ़तापूर्वक क्या कहा ?

उत्तर) राम ने कहा, “पिता का वचन अवश्य पूरा होगा| भरत को राजगद्दी दी जाए| मैं आज ही वन को जाऊँगा|

प्रश्न) माता कौशल्या का दो वरदान के संबंध में क्या राय  थी?

उत्तर) माता कौशल्या चाहती थी कि चाहे भरत को राजगद्दी मिल जाए पर राम वन न जाए | वह यहाँ अयोध्या में ही रहे |

प्रश्न) लक्ष्मण ने बड़े भाई को वन-गमन के संबंध में क्या राय दी?

उत्तर ) लक्ष्मण ने कहा, “ आप बाहुबल से अयोध्या का राजसिंहासन छीन लें| देखता हूँ कौन विरोध करता है|”

प्रश्न) सीता  के वन में साथ चलने की जिद्द करने पर राम ने उन्हें क्या कहकार समझाया?

उत्तर ) उन्होंने कहा कि सीते वन का जीवन अत्यंत ही कठिन है| वहाँ न तो भोजन का ठिकाना होता है और न ही रहने का| वहाँ कठिनाइयाँ कदम-कदम पर होती है|

प्रश्न ) राम के वन जाने के निर्णय पर अयोध्यावासियों की क्या हालत थी?

उत्तर ) वहाँ उदासी ने घर कर लिया | सड़कें लोगों के आँसुओं से  गीली हो गई | सबकी यहीं इच्छा थी कि राम वन न जाएँ| वे सब उन्हें रोकना  चाहते थे पर बेबस थे|

प्रश्न) महर्षि वशिष्ठ के सीता के वन जाने के निर्णय पर उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?

उत्तर ) उन्होंने कहा कि सीता अगर वन  जाएगी तो सब अयोध्यावासी उसके साथ जाएँगे| भरत सूनी अयोध्या पर राज करेंगे| यहाँ कोई नहीं होगा| यहाँ तक कि पशु-पक्षी भी नहीं|

प्रश्न)  राम का स्वागत गंगा के किनारे शृंगवेरपुर गाँव में किसने किया ?

उत्तर ) निषादराज गुह ने उनका स्वागत किया |

प्रश्न) दशरथ की मृत्यु किस प्रकार हुई?

उत्तर ) राम के वन में जाने के बाद से वे अत्यंत दुखी थे| सुमंत्र से बार-बार राम और सीता के बारे में प्रश्न किए जा रहे थे| सुमंत्र उनके उत्तर दे रहे थे| इन उत्तरों से उन्हें संतोष नहीं हो रहा था| महाराज दशरथ की बैचनी बढ़ती जा रही थी | राम के वन गमन के  छठे दिन उन्होंने  प्राण त्याग दिए|

 

 

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