पाठ-4 राम
का वन-गमन
प्रश्न) माता कैकयी के दो वरदान के बारे में जानकर राम ने दृढ़तापूर्वक क्या कहा ?
उत्तर) राम ने कहा, “पिता का वचन अवश्य पूरा होगा| भरत को राजगद्दी दी जाए| मैं आज ही वन को जाऊँगा|
प्रश्न) माता कौशल्या का दो वरदान के संबंध में
क्या राय थी?
उत्तर) माता कौशल्या चाहती थी कि चाहे भरत को राजगद्दी
मिल जाए पर राम वन न जाए | वह यहाँ अयोध्या में ही रहे |
प्रश्न) लक्ष्मण ने बड़े भाई को वन-गमन के संबंध
में क्या राय दी?
उत्तर ) लक्ष्मण ने कहा, “ आप बाहुबल से अयोध्या का राजसिंहासन छीन लें| देखता
हूँ कौन विरोध करता है|”
प्रश्न) सीता के वन में साथ चलने की जिद्द करने पर राम ने उन्हें
क्या कहकार समझाया?
उत्तर ) उन्होंने कहा कि सीते वन का जीवन अत्यंत
ही कठिन है| वहाँ न तो भोजन का ठिकाना होता है और
न ही रहने का| वहाँ कठिनाइयाँ कदम-कदम पर होती है|
प्रश्न ) राम के वन जाने के निर्णय पर अयोध्यावासियों
की क्या हालत थी?
उत्तर ) वहाँ उदासी ने घर कर लिया | सड़कें लोगों के आँसुओं से गीली हो
गई | सबकी यहीं इच्छा थी कि राम वन न जाएँ| वे सब उन्हें रोकना चाहते थे पर बेबस
थे|
प्रश्न) महर्षि वशिष्ठ के सीता के वन जाने के निर्णय
पर उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?
उत्तर ) उन्होंने कहा कि सीता अगर वन जाएगी तो सब अयोध्यावासी उसके साथ जाएँगे| भरत सूनी अयोध्या पर राज करेंगे| यहाँ कोई नहीं होगा| यहाँ तक कि पशु-पक्षी भी नहीं|
प्रश्न) राम का स्वागत गंगा के किनारे शृंगवेरपुर गाँव में
किसने किया ?
उत्तर ) निषादराज गुह ने उनका स्वागत किया |
प्रश्न) दशरथ की मृत्यु किस प्रकार हुई?
उत्तर ) राम के वन में जाने के बाद से वे अत्यंत
दुखी थे| सुमंत्र से बार-बार राम और सीता के
बारे में प्रश्न किए जा रहे थे| सुमंत्र उनके उत्तर दे रहे थे| इन उत्तरों से उन्हें संतोष नहीं हो रहा था| महाराज
दशरथ की बैचनी बढ़ती जा रही थी | राम के वन गमन के छठे दिन उन्होंने प्राण त्याग दिए|
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