Monday, July 12, 2021

पाठ 12 लखनवी अंदाज़

 

पाठ 12 लखनवी अंदाज़

प्रश्न) लेखक ने नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं है?

उत्तर  लेखक ने जैसे ही रेल के डिब्बे में प्रवेश किया तो उन्हें लगा कि नवाब साहब के चिंतन में बाधा पड़ गई हो और लेखक का आना उन्हें वहाँ अच्छा नहीं लगा | वे कुछ परेशान से दिखाई दिए| अपने इस दशा  में वे कभी खिड़की के बाहर देख रहे थे तो कभी सामने रखे खीरों की ओर| उनकी असुविधा और असंतोष वाली स्थिति से ही लेखक ने अनुभव कर लिया था, कि वे उससे बातचीत करने को उत्सुक नहीं है|

प्रश्न) नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक –मिर्च बुरका ,अंतत: सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया |उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा? उनका ऐसा करना उनके किस स्वभाव को इंगित करता है?

उत्तर ) नवाबों की दूसरों पर प्रभाव डालने की प्रवृति होती है| उसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े करते है| लेखक को देखकर नवाब साहब के मन में नवाबी स्वभाव उभर आया| उन्होंने खीरे जैसी साधरण वस्तु को उनके सामने  नहीं खाया| बल्कि दुनिया के तौर-तरीकों से हटकर खीरे कटे,नमक-मिर्च लगाया,उन्हें सूँघा और खिड़की में से बाहर फेंक दिया| उन्होंने ऐसा सामने वालों पर रौब जमाने के लिए किया |

प्रश्न )  बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है| यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर ) यशपाल जी का यह विचार अपने आप में अधूरा प्रतीत होता है| इसलिए हम इससे से पूर्णत: सहमत नहीं है| कहानी में कोई न कोई विचार,घटना अथवा पात्र अवश्य ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विद्यमान रहता है| पठित कहानी लखनवी अंदाज़ को लिया जा सकता है| इसके पीछे लेखक का मुख्य उद्देश्य लखनऊ के पतनशील नवाबी वर्ग पर करारा व्यंग्य करना है| घटना के रूप में रेल यात्रा, यात्री के रूप में लखनवी नवाबों जैसा दिखने वाला सज्जन और उनके पतन को दिखाना है|

प्रश्न) आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहोगे ?

उत्तर ) प्रस्तुत पाठ में आदि से लेकर अंत तक नवाब की अकड़ का ही उल्लेख किया गया है| वह आपने सामने की सीट पर बैठे हुए सहयात्री से बोलना भी पसंद नहीं करता है | वह खीरे खाने की अपेक्षा उसकी

सुगंध से ही संतुष्ट होकर खिड़की से बाहर फेंक देता है| अत: इस पाठ का शीर्षक नवाबी तहजीब हो सकता है|

रचना और अभिव्यक्ति  

प्रश्न ) नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है| इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए|

उत्तर) नवाब साहब ने अचानक घूमकर लेखक को आदाब-अर्ज़ किया | फिर तौलिये पर रखे ताज़े खीरे उठाए | उनको धोया,पोंछा और खीरे को काटकर तौलिए पर रखने लगे| बड़े आराम से खीरे को काट चुकने के बाद उन पर नमक-मिर्च का पाउडर छिड़का | फिर एक फाँक को सूँघा एवं उसके स्वाद का आनंद अनुभव करते और खिड़की से बाहर फेंकते  जाते|

प्रश्न) क्या सनक का कोई सकरात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए|

उत्तर ) निश्चित रूप से सनक का सकरात्मक रूप हो सकता है| जीतने भी बड़े-बड़े अनुसंधान हुए है वे सनकी व्यक्तियों ने किए हैं| वे सनक के कारण ही रात-दिन अपने कार्य में डूबे रहते हैं कि उन्हें आस –पास कि गतिविधियों का भी ध्यान नहीं रहता है | विश्व की बड़ी-बड़ी खोजे सनकी वैज्ञानिकों की ही देन हैं| अत: स्पष्ट है कि सनक का सकरात्मक रूप भी हो सकता है|

भाषा अध्ययन
प्रश्न ) निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए|
क)    एक सफेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे|
उत्तर ) बैठे थे     - अकर्मक
ख)   नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया |
उत्तर) दिखाया     - सकर्मक
ग)     ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है|
उत्तर) बैठे        - अकर्मक
कल्पना करना - अकर्मक
है           - अकर्मक
घ)     अकेले सफर का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे|
उत्तर ) काटना    - सकर्मक

      खरीदे होंगे       - सकर्मक

    ड़) दोनों खीरों के सिरे  काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला|

उत्तर ) काटा      - सकर्मक
      गोदकर    - सकर्मक
      निकाला    - सकर्मक
च)    नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक-मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की ओर देखा|
उत्तर ) देखा      - अकर्मक
छ)    नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए|
उत्तर ) लेट गए   -  अकर्मक
      थककर    -  अकर्मक
ज)    जेब से चाकू निकाला |
उत्तर ) निकाला    - सकर्मक
प्रश्न) लखनवी अंदाज़ पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए |
उत्तर) नवाब साहब खीरा खाने की तैयारी एक विशेष ढंग से करते है| वह खाने की अपेक्षा सूँघकर खीरे को खड़की से बाहर फेंक देते है| तथा तृप्ति का अनुभव करते है| अत: नवाब के इस व्यवहार से पता चलता है कि लोग जिस कार्य को एकांत में छुपकर करते हैं, उसे दूसरों के सामने करने में अपनी शान के खिलाफ समझते हैं|
प्रश्न) लखनवी अंदाज़  पाठ में निहित व्यंग्य स्पष्ट कीजिए|

उत्तर ) जो जीवन की शान-बान का दिखावा करते हैं| वे जीवन की सहजता व स्वाभाविकता को स्वीकार करते है| लेखक ने दिखाया है कि खीरे जैसी साधारण चीज़ को खाने में लखनवी नवाब अपनी तौहीन समझता है| उसे सूँघकर चलती गाड़ी में से नीचे फेंक देता है| ऐसे लोग सेकंड क्लास में यात्रा करना भी अपना बढ़प्पन समझते है|

 

 

 

 

 

 

 

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