पाठ6 रक्त और हमारा शरीर
पाठ का सार
प्रस्तुत
पाठ मे रक्त के घटक ,रक्त की कमी से उत्पन्न होने वाली बीमारियों और उनकी रोकथाम के
के उपायों को रोचक ढंग से प्रस्त्तुत किया गया
है |
अनिल और दिव्या अस्पताल में –अनिल की बहन दिव्या कामजोरी और थकान से परेशान थी उसे भूख
भी नहीं लगती थी |अनिल उसे लेकर
डॉक्टर के पास गया ,जहाँ उन्होंने खून की जाँच करने के सलाह
दी |अनिल खून की जाँच के लिए दूसरे कमरे मे गया ,जहाँ उसे एक जान -पहचान की डॉक्टर दीदी मिल गई उन्होने खून की कुछ बूँदे
दिव्या के शरीर में से लेकर अगले दिन रिपोर्ट के लिया बुलाया |
खून की जाँच की रिपोर्ट –अगले दिन अनिल को डॉक्टर ने बताया कि दिव्या को एनीमिया है
चिन्ता की कोई बात नहीं |कुछ दिन तक
दवाएँ लेने पर वह ठीक हों सकती है |अनिल ने एनीमिया के बारे में डॉक्टर से जानना चाहा ,तो डॉक्टर ने कहा की रक्त भानुमती
के पिटारे के समान है ,जो दिखने मे लाल द्रव सा दिखता है
परंतु इसमें प्लाजमा ,लाल रक्त कणिकाएँ तथा प्लेटलैट भी पाया
जता हैं |
रक्त एक आश्चर्यजनक द्रव –सूक्ष्मदर्शी दृवारा स्लाइड पर रखे गए एक बूँद रक्त में इतने सारे अवयव देखकर अनिल
आश्चर्यचकित रह गया |उसने लाल रक्त
कणिकाएँ देखी ,जो बालूशाही जैसी थी |एक
मिलीलीटर रक्त में इनकी संख्या 40 से 50 लाख कण तक हो सकती है |इनके कारण ही रक्त लाल होता है|
इनका जीवन काल चार माह का
होता है | ये हर समय बनती और नष्ट होती रहती है| ये हड्डियों के बीच मज्जा रूपी कारखाने में बनती है | इनके लिए प्रोटीन ,लौह तत्व ,
विटामिन जैसे कच्चे पदार्थ की आवश्यकता है |ये पदार्थ हरी
सब्जी, फल, अंडा,
दूध और मांस में खूब मिलता है| इन लाल रक्त कणों की कमी को
ही अनिमिया कहते है| इसका सबसे अच्छा तरीका है -संतुलित आहार लेना |
सफेद रक्त
कण ओर प्लेटलैट – सफ़ेद रक्त कण हमारे शरीर के वीर सिपाही होते है | जो अनेक रोगो से हमारी रक्षा करते है | ये रक्त कण शरीर पर हमला करने वाले रोगाणुओं से लड़कर उनको शरीर के अंदर प्रवेश
करने से रोकते है |प्लेट
लैट कणों का काम चोट लगने पर रक्त को जमाव क्रिया में मदद करना होता है |
रक्त के तरल भाग के प्लाज़्मा में एक प्रोटीन
होती है |जो रक्त वाहिका की कटी - फटी दीवार में जाली
सी बुन देते है ओर प्लेटलैट उनके चिपक जाते है |यह दरार भरने
से रक्त का निकालना बंद हो जाता है | अधिक रक्त निकल जाने पर
व्यक्ति को रक्त की भी जरूरत पड़ती है | यह रक्त उसी व्यक्ति
के खून के समूह वाला होना चाहिए | घाव घेरा होने पर कसकर
पट्टी बाँध देनी चाहिए जिससे शरीर से
रक्त कम से कम निकले |
रक्तदान और हम –हर किसी व्यक्ति को नहीं चढ़ाया जा सकता है | अवश्यकतानुसार रक्त प्राप्त करने के लिए
बडे अस्पतालों में ब्लड़ बैंक |इनमे बैंक चारों तरफ के रक्त सुरक्षित
रखे जाते हैं |इन ब्लड –बैंक में रक्त की कमी न होने पाए
इसके लिया अवश्यक है कि लोग रक्तदान करे |अठराह साल से अधिक
उम्र स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है |एक बार मे एक
व्यक्ति से 300मिलिलीटर रक्त लिया जाता है |रक्तदान करने से
कमजोरी आएगी ,यह विचार बिल्कुल ही गलत है क्योंकि इतना रक्त तो हमारा शरीर कुछ
ही दिनों में बना लेता है । एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पाँच लीटर रक्त तो
हमारे होता है | इसमें कुछ रक्त देकर किसी का जीवन बचाना
अत्यंत सौभाग्य की बात होगी |
“बड़ा होने पर मैं भी
रक्तदान किया करूंगा|” अनिल के मुँह से यह बात सुनकर डॉक्टर
ने उसकी पीठ थपथपा दी |
कठिन शब्दार्थ
रक्त :खून ; स्लाइड:काँच की पतली छोटी-सी पट्टी ;एनीमिया: खून की कमी से होने वाली बीमारी ;जिज्ञासा:
जानने की इच्छा; बालूशाही :बीच मे गड़ढेदारगुलाबी रंग की मिठाई ;पलभर ; एक क्षण का लिए ;निराधार :गलत ; रक्तदान :रक्तकोश ;
प्रश्न ) रक्त के
बहाव को रोकने के लिए क्या करना चाहिए ?
उत्तर ) रक्त के बहाव को रोकने के लिए घाव पर साफ कपड़े से
कसकर पट्टी बाँधनी चाहिए ,क्योंकि दबाव पड़ने पर रक्त का बहाव कम हो
जाता है | फिर भी रक्त का बहाव न रुके तो डॉक्टर से संपर्क
करना चाहिए |
प्रश्न ) खून को भानुमती का पिटारा क्यों कहा जाता हैं?
उत्तर ) रक्त दिखने में साधारण सा लाल रंग का द्रव होता है | सूक्षमदर्शी से देखने पर रक्त में लाल रक्त कणिकाएँ, श्वेत रक्त कणिकाएँ ,प्लेटलैट,प्लाज़्मा आदि पाए जाते है ,इसलिए रक्त को भानुमती का
पिटारा कहा जाता है |
प्रश्न ) एनीमिया से बचने के लिए हमे क्या –क्या खाना चाहिए
?
उत्तर ) एनीमिया से बचने के लिए हमे ऐसा संतुलित और पौष्टिक
भोजन खाना चाहिए ,जिसमे हरी सब्जियाँ ,दूध,फल,अंडा और मांस शामिल हो |
हमे इन वस्तुओं को अपने खाने में अवश्य शामिल करना चाहिए |
प्रश्न ) पेट में कीड़े क्यों हो जाते है ? इनसे कैसे बचा जा सकता है ?
उत्तर ) दूषित भोजन और दूषित पानी से हमारे पेट में कीड़े हो
जाते है |इसके अलावा कुछ विशेष किस्म के कीड़े होते है,जिनके अंडे जमीन कि ऊपरी सतह पर पाये जाते है | इनके
लार्वा त्वचा से होकर हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते है |
बचाव के उपाय –
1)
हाथ पैर व शरीर के
अंग साफ करके ही भोजन करना चाहिए |
2)
शौच के लिए शौचाल्य
का ही प्रयोग करना चाहिए |
प्रश्न ) रक्त के सफेद कणों को ही वीर सिपाही क्यों कहा गया है ?
उत्तर) रोग उत्पन्न करने वाले रोगाणुओं को सफेद रक्त कण
शरीर में नहीं आने देते है | शरीर के अंदर आए
रोगाणुओं से सफेद रक्त कण डटकर मुकाबला करते है |ये हमारी
बहुरत से रोगों से रक्षा करते है |
प्रश्न ) ब्लड बैंक में रक्तदान से क्या लाभ है ?
उत्तर ) ब्लैड बैंक में रक्त को उचित उपकरणों द्वारा
सुरक्षित रखा जाता है | किसी भी व्यक्ति को उसी के समूह का रक्त प्रदान किया जाता है |आपातकाल
में सुविधा से रक्त प्राप्त किया जा सकता
है | ऐसी स्थिति में हमे रक्तदान को खोजना नहीं पड़ता |किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है |
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