Wednesday, July 14, 2021

पाठ6 रक्त और हमारा शरीर

 

पाठ6 रक्त और हमारा शरीर

पाठ का सार  

प्रस्तुत पाठ मे रक्त के घटक ,रक्त  की कमी से उत्पन्न होने वाली  बीमारियों और उनकी रोकथाम के

 के उपायों को रोचक ढंग से प्रस्त्तुत किया गया है |   

अनिल और दिव्या अस्पताल में –अनिल की बहन दिव्या कामजोरी और थकान से परेशान थी उसे भूख भी नहीं लगती थी |अनिल उसे लेकर डॉक्टर के पास गया ,जहाँ उन्होंने खून की जाँच करने के सलाह दी |अनिल खून की जाँच के लिए दूसरे कमरे मे गया ,जहाँ उसे एक जान -पहचान की डॉक्टर दीदी मिल गई उन्होने खून की कुछ बूँदे दिव्या के शरीर में से लेकर अगले दिन रिपोर्ट के लिया बुलाया |

खून की जाँच की रिपोर्ट –अगले दिन अनिल को डॉक्टर ने बताया कि दिव्या को एनीमिया है चिन्ता की कोई बात नहीं |कुछ दिन तक दवाएँ लेने पर वह ठीक हों सकती है |अनिल ने एनीमिया के  बारे में डॉक्टर से जानना चाहा ,तो डॉक्टर ने कहा की रक्त  भानुमती के पिटारे के समान है ,जो दिखने मे लाल द्रव सा दिखता है परंतु इसमें प्लाजमा ,लाल रक्त कणिकाएँ तथा प्लेटलैट भी पाया जता हैं |       

  रक्त एक आश्चर्यजनक द्रव –सूक्ष्मदर्शी दृवारा स्लाइड पर रखे गए एक बूँद  रक्त में इतने सारे अवयव देखकर अनिल आश्चर्यचकित रह गया |उसने लाल रक्त कणिकाएँ देखी ,जो बालूशाही जैसी थी |एक मिलीलीटर रक्त में इनकी संख्या 40 से 50 लाख कण तक हो सकती है |इनके कारण ही रक्त लाल होता है|

इनका जीवन काल चार माह का होता है | ये हर समय बनती और नष्ट होती रहती है| ये हड्डियों के बीच मज्जा रूपी कारखाने में बनती है | इनके लिए प्रोटीन ,लौह तत्व , विटामिन जैसे कच्चे पदार्थ की आवश्यकता है |ये पदार्थ हरी सब्जी, फल, अंडा, दूध और मांस में खूब मिलता है| इन लाल रक्त कणों की कमी को ही अनिमिया कहते है| इसका सबसे अच्छा तरीका  है -संतुलित आहार लेना |

 सफेद रक्त  कण ओर प्लेटलैट  – सफ़ेद रक्त  कण हमारे शरीर के वीर सिपाही होते है | जो अनेक रोगो से हमारी रक्षा करते है | ये रक्त कण शरीर पर हमला करने वाले रोगाणुओं से लड़कर उनको शरीर के अंदर प्रवेश  करने से रोकते है |प्लेट लैट कणों का काम चोट लगने पर रक्त को जमाव क्रिया में मदद करना होता है |

 

 

 

 

 रक्त के तरल भाग के प्लाज़्मा में एक प्रोटीन होती है |जो रक्त वाहिका की कटी - फटी दीवार में जाली सी बुन देते है ओर प्लेटलैट उनके चिपक जाते है |यह दरार भरने से रक्त का निकालना बंद हो जाता है | अधिक रक्त निकल जाने पर व्यक्ति को रक्त की भी जरूरत पड़ती है | यह रक्त उसी व्यक्ति के खून के समूह वाला होना चाहिए | घाव घेरा होने पर कसकर पट्टी बाँध देनी चाहिए जिससे शरीर से  रक्त  कम से कम निकले |

रक्तदान और हम –हर किसी व्यक्ति को नहीं चढ़ाया जा सकता है | अवश्यकतानुसार रक्त प्राप्त करने के लिए बडे अस्पतालों में ब्लड़ बैंक |इनमे बैंक चारों तरफ के रक्त सुरक्षित रखे जाते हैं |इन ब्लड –बैंक में रक्त की कमी न होने पाए इसके लिया अवश्यक है कि लोग रक्तदान करे |अठराह साल से अधिक उम्र स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है |एक बार मे एक व्यक्ति से 300मिलिलीटर रक्त लिया जाता है |रक्तदान करने से कमजोरी आएगी ,यह विचार बिल्कुल  ही गलत है क्योंकि इतना रक्त तो हमारा शरीर कुछ ही दिनों में बना लेता है । एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पाँच लीटर रक्त तो हमारे होता है | इसमें कुछ रक्त देकर किसी का जीवन बचाना अत्यंत सौभाग्य की बात होगी |

बड़ा होने पर मैं भी रक्तदान किया करूंगा|” अनिल के मुँह से यह बात सुनकर डॉक्टर ने उसकी पीठ थपथपा दी |

कठिन शब्दार्थ

रक्त :खून ; स्लाइड:काँच की पतली छोटी-सी पट्टी ;एनीमिया: खून की कमी से होने वाली बीमारी ;जिज्ञासा:

जानने की इच्छा; बालूशाही :बीच मे गड़ढेदारगुलाबी रंग की मिठाई ;पलभर ; एक क्षण का लिए ;निराधार :गलत ; रक्तदान :रक्तकोश ;

प्रश्न ) रक्त के बहाव को रोकने के लिए क्या करना चाहिए ?

उत्तर ) रक्त के बहाव को रोकने के लिए घाव पर साफ कपड़े से कसकर पट्टी बाँधनी चाहिए ,क्योंकि दबाव पड़ने पर रक्त का बहाव कम हो जाता है | फिर भी रक्त का बहाव न रुके तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए |

 

 

 

 

 

प्रश्न ) खून को भानुमती का पिटारा क्यों कहा जाता हैं?

उत्तर ) रक्त दिखने में साधारण सा लाल रंग का द्रव होता है | सूक्षमदर्शी से देखने पर रक्त में लाल रक्त कणिकाएँ, श्वेत रक्त कणिकाएँ ,प्लेटलैट,प्लाज़्मा आदि पाए जाते है ,इसलिए रक्त को भानुमती का पिटारा कहा जाता है |

 

प्रश्न ) एनीमिया से बचने के लिए हमे क्या –क्या खाना चाहिए ?

उत्तर ) एनीमिया से बचने के लिए हमे ऐसा संतुलित और पौष्टिक भोजन खाना चाहिए ,जिसमे हरी सब्जियाँ ,दूध,फल,अंडा और मांस शामिल हो | हमे इन वस्तुओं को अपने खाने में अवश्य शामिल करना चाहिए |

प्रश्न ) पेट में कीड़े क्यों हो जाते है ? इनसे कैसे बचा जा सकता है ?

उत्तर ) दूषित भोजन और दूषित पानी से हमारे पेट में कीड़े हो जाते है |इसके अलावा कुछ विशेष किस्म के कीड़े होते है,जिनके अंडे जमीन कि ऊपरी सतह पर पाये जाते है | इनके लार्वा त्वचा से होकर हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते है |

बचाव के उपाय

1)      हाथ पैर व शरीर के अंग साफ करके ही भोजन करना चाहिए |

2)      शौच के लिए शौचाल्य का ही प्रयोग करना चाहिए |

प्रश्न ) रक्त के सफेद कणों को ही वीर सिपाही क्यों कहा गया है ?

उत्तर) रोग उत्पन्न करने वाले रोगाणुओं को सफेद रक्त कण शरीर में नहीं आने देते है | शरीर के अंदर आए रोगाणुओं से सफेद रक्त कण डटकर मुकाबला करते है |ये हमारी बहुरत से रोगों से रक्षा करते है |

प्रश्न ) ब्लड बैंक में रक्तदान से क्या लाभ है ?

उत्तर ) ब्लैड बैंक में रक्त को उचित उपकरणों द्वारा सुरक्षित रखा जाता है | किसी भी व्यक्ति को उसी के समूह का रक्त  प्रदान किया जाता है |आपातकाल में सुविधा से रक्त प्राप्त  किया जा सकता है | ऐसी स्थिति में हमे रक्तदान को खोजना नहीं पड़ता |किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है |

Monday, July 12, 2021

पाठ 12 लखनवी अंदाज़

 

पाठ 12 लखनवी अंदाज़

प्रश्न) लेखक ने नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं है?

उत्तर  लेखक ने जैसे ही रेल के डिब्बे में प्रवेश किया तो उन्हें लगा कि नवाब साहब के चिंतन में बाधा पड़ गई हो और लेखक का आना उन्हें वहाँ अच्छा नहीं लगा | वे कुछ परेशान से दिखाई दिए| अपने इस दशा  में वे कभी खिड़की के बाहर देख रहे थे तो कभी सामने रखे खीरों की ओर| उनकी असुविधा और असंतोष वाली स्थिति से ही लेखक ने अनुभव कर लिया था, कि वे उससे बातचीत करने को उत्सुक नहीं है|

प्रश्न) नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक –मिर्च बुरका ,अंतत: सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया |उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा? उनका ऐसा करना उनके किस स्वभाव को इंगित करता है?

उत्तर ) नवाबों की दूसरों पर प्रभाव डालने की प्रवृति होती है| उसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े करते है| लेखक को देखकर नवाब साहब के मन में नवाबी स्वभाव उभर आया| उन्होंने खीरे जैसी साधरण वस्तु को उनके सामने  नहीं खाया| बल्कि दुनिया के तौर-तरीकों से हटकर खीरे कटे,नमक-मिर्च लगाया,उन्हें सूँघा और खिड़की में से बाहर फेंक दिया| उन्होंने ऐसा सामने वालों पर रौब जमाने के लिए किया |

प्रश्न )  बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है| यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?

उत्तर ) यशपाल जी का यह विचार अपने आप में अधूरा प्रतीत होता है| इसलिए हम इससे से पूर्णत: सहमत नहीं है| कहानी में कोई न कोई विचार,घटना अथवा पात्र अवश्य ही प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विद्यमान रहता है| पठित कहानी लखनवी अंदाज़ को लिया जा सकता है| इसके पीछे लेखक का मुख्य उद्देश्य लखनऊ के पतनशील नवाबी वर्ग पर करारा व्यंग्य करना है| घटना के रूप में रेल यात्रा, यात्री के रूप में लखनवी नवाबों जैसा दिखने वाला सज्जन और उनके पतन को दिखाना है|

प्रश्न) आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहोगे ?

उत्तर ) प्रस्तुत पाठ में आदि से लेकर अंत तक नवाब की अकड़ का ही उल्लेख किया गया है| वह आपने सामने की सीट पर बैठे हुए सहयात्री से बोलना भी पसंद नहीं करता है | वह खीरे खाने की अपेक्षा उसकी

सुगंध से ही संतुष्ट होकर खिड़की से बाहर फेंक देता है| अत: इस पाठ का शीर्षक नवाबी तहजीब हो सकता है|

रचना और अभिव्यक्ति  

प्रश्न ) नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है| इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए|

उत्तर) नवाब साहब ने अचानक घूमकर लेखक को आदाब-अर्ज़ किया | फिर तौलिये पर रखे ताज़े खीरे उठाए | उनको धोया,पोंछा और खीरे को काटकर तौलिए पर रखने लगे| बड़े आराम से खीरे को काट चुकने के बाद उन पर नमक-मिर्च का पाउडर छिड़का | फिर एक फाँक को सूँघा एवं उसके स्वाद का आनंद अनुभव करते और खिड़की से बाहर फेंकते  जाते|

प्रश्न) क्या सनक का कोई सकरात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए|

उत्तर ) निश्चित रूप से सनक का सकरात्मक रूप हो सकता है| जीतने भी बड़े-बड़े अनुसंधान हुए है वे सनकी व्यक्तियों ने किए हैं| वे सनक के कारण ही रात-दिन अपने कार्य में डूबे रहते हैं कि उन्हें आस –पास कि गतिविधियों का भी ध्यान नहीं रहता है | विश्व की बड़ी-बड़ी खोजे सनकी वैज्ञानिकों की ही देन हैं| अत: स्पष्ट है कि सनक का सकरात्मक रूप भी हो सकता है|

भाषा अध्ययन
प्रश्न ) निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए|
क)    एक सफेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे|
उत्तर ) बैठे थे     - अकर्मक
ख)   नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया |
उत्तर) दिखाया     - सकर्मक
ग)     ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है|
उत्तर) बैठे        - अकर्मक
कल्पना करना - अकर्मक
है           - अकर्मक
घ)     अकेले सफर का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे|
उत्तर ) काटना    - सकर्मक

      खरीदे होंगे       - सकर्मक

    ड़) दोनों खीरों के सिरे  काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला|

उत्तर ) काटा      - सकर्मक
      गोदकर    - सकर्मक
      निकाला    - सकर्मक
च)    नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक-मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की ओर देखा|
उत्तर ) देखा      - अकर्मक
छ)    नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए|
उत्तर ) लेट गए   -  अकर्मक
      थककर    -  अकर्मक
ज)    जेब से चाकू निकाला |
उत्तर ) निकाला    - सकर्मक
प्रश्न) लखनवी अंदाज़ पाठ का मूल भाव स्पष्ट कीजिए |
उत्तर) नवाब साहब खीरा खाने की तैयारी एक विशेष ढंग से करते है| वह खाने की अपेक्षा सूँघकर खीरे को खड़की से बाहर फेंक देते है| तथा तृप्ति का अनुभव करते है| अत: नवाब के इस व्यवहार से पता चलता है कि लोग जिस कार्य को एकांत में छुपकर करते हैं, उसे दूसरों के सामने करने में अपनी शान के खिलाफ समझते हैं|
प्रश्न) लखनवी अंदाज़  पाठ में निहित व्यंग्य स्पष्ट कीजिए|

उत्तर ) जो जीवन की शान-बान का दिखावा करते हैं| वे जीवन की सहजता व स्वाभाविकता को स्वीकार करते है| लेखक ने दिखाया है कि खीरे जैसी साधारण चीज़ को खाने में लखनवी नवाब अपनी तौहीन समझता है| उसे सूँघकर चलती गाड़ी में से नीचे फेंक देता है| ऐसे लोग सेकंड क्लास में यात्रा करना भी अपना बढ़प्पन समझते है|

 

 

 

 

 

 

 

Sunday, July 11, 2021

पाठ-4 राम का वन-गमन

 

पाठ-4 राम का वन-गमन

 

प्रश्न) माता  कैकयी के दो वरदान के बारे में जानकर  राम ने दृढ़तापूर्वक क्या कहा ?

उत्तर) राम ने कहा, “पिता का वचन अवश्य पूरा होगा| भरत को राजगद्दी दी जाए| मैं आज ही वन को जाऊँगा|

प्रश्न) माता कौशल्या का दो वरदान के संबंध में क्या राय  थी?

उत्तर) माता कौशल्या चाहती थी कि चाहे भरत को राजगद्दी मिल जाए पर राम वन न जाए | वह यहाँ अयोध्या में ही रहे |

प्रश्न) लक्ष्मण ने बड़े भाई को वन-गमन के संबंध में क्या राय दी?

उत्तर ) लक्ष्मण ने कहा, “ आप बाहुबल से अयोध्या का राजसिंहासन छीन लें| देखता हूँ कौन विरोध करता है|”

प्रश्न) सीता  के वन में साथ चलने की जिद्द करने पर राम ने उन्हें क्या कहकार समझाया?

उत्तर ) उन्होंने कहा कि सीते वन का जीवन अत्यंत ही कठिन है| वहाँ न तो भोजन का ठिकाना होता है और न ही रहने का| वहाँ कठिनाइयाँ कदम-कदम पर होती है|

प्रश्न ) राम के वन जाने के निर्णय पर अयोध्यावासियों की क्या हालत थी?

उत्तर ) वहाँ उदासी ने घर कर लिया | सड़कें लोगों के आँसुओं से  गीली हो गई | सबकी यहीं इच्छा थी कि राम वन न जाएँ| वे सब उन्हें रोकना  चाहते थे पर बेबस थे|

प्रश्न) महर्षि वशिष्ठ के सीता के वन जाने के निर्णय पर उनकी क्या प्रतिक्रिया थी?

उत्तर ) उन्होंने कहा कि सीता अगर वन  जाएगी तो सब अयोध्यावासी उसके साथ जाएँगे| भरत सूनी अयोध्या पर राज करेंगे| यहाँ कोई नहीं होगा| यहाँ तक कि पशु-पक्षी भी नहीं|

प्रश्न)  राम का स्वागत गंगा के किनारे शृंगवेरपुर गाँव में किसने किया ?

उत्तर ) निषादराज गुह ने उनका स्वागत किया |

प्रश्न) दशरथ की मृत्यु किस प्रकार हुई?

उत्तर ) राम के वन में जाने के बाद से वे अत्यंत दुखी थे| सुमंत्र से बार-बार राम और सीता के बारे में प्रश्न किए जा रहे थे| सुमंत्र उनके उत्तर दे रहे थे| इन उत्तरों से उन्हें संतोष नहीं हो रहा था| महाराज दशरथ की बैचनी बढ़ती जा रही थी | राम के वन गमन के  छठे दिन उन्होंने  प्राण त्याग दिए|

 

 

दो वरदान

 

पाठ – 3 दो वरदान

प्रश्न) अपने चारों पुत्रों  के विवाह के पश्चात दशरथ  के मन में  क्या इच्छा बची थी?

उत्तर) राजा दशरथ के मन में केवल एक ही इच्छा बची थी | राम का राज्याभिषेक | उन्हें युवराज का पद देना |

प्रश्न) राम को सभी अयोध्यावासी राजा क्यों बनाना चाहते थे?

उत्तर ) क्योंकि राम बड़े ही विनम्र, विद्वान तथा प्रजा के हितों का ध्यान रखने वाले थे| उनके पराक्रम का लोहा सभी मानते थे| राम राज-काज की ज़िम्मेदारी अच्छी तरह से निभा रहे थे | उनका सम्मान दरबार में लगातार बढ़ता ही जा रहा था |

प्रश्न) राम के राज्याभिषेक की तैयारियों के समय भरत कहाँ थे?

उत्तर ) वह उस समय अयोध्या में नहीं थे |वे अपने नाना केकयराज के घर गए हुए थे|  

प्रश्न) मंथरा कौन थी ?

उत्तर ) वह कैकयी की दासी और उसकी मुँह लगी थी | उसी ने  राम का राज्याभिषेक भरत की अनुपस्थिति में एक षड्यंत्र बताया |उसने रानी को राजा दशरथ से दो वरदान मांगने को कहा |

प्रश्न) मंथरा को जब राम के राज्याभिषेक के बारे में पता चला तो उसकी क्या मनोदशा हुई ?

उत्तर) वह जल भुन गई| राम का राज्याभिषेक उसे कैकयी के विरुद्ध एक षड्यंत्र लगा | वह हाँफ कर कैकयी के    रनिवास की ओर भागी तथा सोती हुई कैकयी को उसने नींद से जगा  दिया |

प्रश्न) रानी कैकयी ने राजा दशरथ से अपने कौन से दो वरदान देने  को कहा  ?

उत्तर ) पहला वरदान राम के स्थान पर भरत का राज्याभिषेक| दूसरा राम को चौदह वर्ष का वनवास |

प्रश्न) रानी के दो वरदान मांगने पर राजा दशरथ की क्या दशा थी?

उत्तर ) दशरथ का चेहरा सफेद पड़ गया| वह अवाक रह गए| उसका  सिर चकराने लगा | वे मूर्छित होकर गिर पड़े|

 

पाठ 4 दीवानों की हस्ती

 

पाठ 4 दीवानों की हस्ती

                    -भगवतीचरण वर्मा

प्रश्न) कवि अपने आने को उल्लास और जाने को आँसू बनकर बह जाना क्यों कहते है?

उत्तर ) कवि बेफिक्री भरा जीवन जीना वाला व्यक्ति है| वह जहां भी जाता है मस्ती का आलम साथ लेकर जाता है| उससे मिलकर लोगों के मन प्रसन्न हो जाते है|पर जब वह उस स्थान को छोड़कर जाता है तब उसे और वहाँ के लोगों को दुख होता है|

प्रश्न) भिखमंगों की दुनिया में बेरोक प्यार लुटनेवाला कवि ऐसा क्यों कहता है कि वह अपने हृदय पर असफलता का एक निशान भार कि तरह लेकर जा रहा है? क्या वह निराश है या प्रसन्न है?

उत्तर ) यह दुनिया केवल लेना जानती है,देना नहीं| कवि ने भी इस दुनिया को प्यार दिया पर इसके बदले में उसे वह प्यार नहीं मिला,जिसकी वह आशा करता था |कवि  निराश है , वह समझता है कि प्यार और खुशियाँ लोगों के जीवन में भरने में असफल रहा | यह दुनिया अभी सांसरिक विषयों में उलझी हुई है|इससे लगता है कि कवि निराश है|

प्रश्न ) कविता में ऐसी कौन सी बात है जो आपको अच्छी लगी?

उत्तर ) कविता में कवि का जीवन के प्रति दृष्टिकोण अच्छा लगा | कवि कहते है कि हम सबके सुख दुख एक है |

हमें इन सुखों-दुखों को एक साथ भोगना पड़ता है | हमें दोनों परिस्थितियों का सामना समान भाव से करना चाहिए|

ऐसा दृष्टिकोण रखने वाला व्यक्ति ही सुखी रह सकता है|

भाषा की बात

संतुष्टि के लिए कवि ने छककर जी भरकर और खुलकर जैसे शब्दों का प्रयोग किया है | इसी भाव को व्यक्त करने वाले कुछ और शब्द सोचकर लिखिए, जैसे –हँसकर , गाकर |

उत्तर ) 1खींचकर

     2 पीकर

     3 मुसकराकर

     4 देकर

     5 मस्त होकर    6 सराबोर होकर

Saturday, July 10, 2021

पाठ 10 वाख -ललद्यद

 

पाठ 10 वाख

                                               -ललद्यद

प्रश्न)1 रस्सी यहाँ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है और वह कैसी है ?

उत्तर) यहाँ रस्सी शब्द का प्रयोग मनुष्य के साँस या प्राण के लिए हुआ है,जिसके सहारे वह शरीर –रूपी नाव को खींच रहा है |वह रस्सी बहुत ही नाज़ुक  है| वह कभी भी टूट सकती है इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता|

प्रश्न) 2कवयित्री द्वारा मुक्ति के लिए किए जाने वाले प्रयास व्यर्थ क्यों हो रहे है ?

उत्तर) कवयित्री लोभ, मोह-माया आदि से मुक्त नहीं हो पाई है| वह कोरी प्रभु भक्ति के सहारे भवसागर पार करना चाहती हैं| उसकी साँसो की डोरी अत्यंत कमजोर है, इसलिए उसके द्वारा मुक्ति के लिए किए गए प्रयास विफल हो रहे हैं|

प्रश्न)3 कवयित्री का घर जाने की चाह से क्या तात्पर्य है?

उत्तर) घर जाने की चाह का तात्पर्य है-इस भवसागर से मुक्ति पाकर अपने प्रभु की शरण में जाने से है | वह परमात्मा की शरण को ही अपना वास्तविक घर मानती है|

प्रश्न)4 भाव सपष्ट कीजिये-

(क)  जेब टटोली कौड़ी न पाई|

(ख) खा-खाकर कुछ पाएगा नहीं ,न खाकर बनेगा अहंकारी|

उत्तर) (क) भाव – कवयित्री ने अपना जीवन सांसरिक विषयों में फँसकर गँवा दिया| उसने जीवन के अंतिम समये में अपने जीवन का लेखा-जोखा देखा तो उस भक्ति के फलस्वरूप प्रभु को देने लायक उसके पास कुछ भी न था |

(ख)भाव – इन पंक्तियों में मनुष्य को सांसरिक भोग तथा त्याग के बीच का मध्यम मार्ग अपनाने की सलाह दी है की विषय- वासनाओ के अधिकाधिक भोग से कुछ मिलनेवाला नहीं है तथा भोगों से विमुखता एवं त्याग की भावना से मन में अहंकार पैदा होगा, इसलिए मध्यम मार्ग अपनाना चाहिए|  

प्रश्न) 5 बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए ललद्यद ने क्या उपाय सुझाया है?

उत्तर ) बंद द्वार की साँकल खोलने के लिए कवयित्री  ने निम्नलिखित उपाय अपनाने का सुझाव दिया है-

i)        मनुष्य को सांसरिक विषयों में अधिक लिप्त नहीं रहना चाहिए | उसे बीच का रास्ता अपनाकर सन्यमपूर्वक जीवन जीना चाहिए |

ii)       प्रभु की सच्ची भक्ति करनी चाहिए |

iii)       मनुष्य को सभी प्राणियों को समान दृष्टि से देखना चाहिए|

प्रश्न) 6 ज्ञानी से कवयित्री का क्या अभिप्राय है?

उत्तर ) ज्ञानी का अभिप्राय: है – हिन्दू-मुसलमान दोनों में कोई अंतर न समझनेवाला,क्योंकि दोनों ही उसी प्रभु की कृति  हैं तथा अपने –आप को पहचानने या आत्मज्ञान रखने वाले  व्यक्ति है| आत्मा तो उस परमात्मा का ही एक अंश है|

प्रश्न)7 कच्चे सकोरे का क्या अर्थ है? कवयित्री ने अपने प्रयासों के लिए इसका प्रयोग क्यों किया है?

उत्तर ) कच्चे सकोरे का अर्थ है –मिट्टी के बने छोटे-छोटे कच्चे पात्र | कवयित्री ने इसका प्रयोग इसलिए किया है, क्योंकि इन कच्चे बर्तनों में पानी टपक-टपकर बह जाता है और कुछ भी नहीं अंत में बचता है,उसी प्रकार कवयित्री प्रभु को पाने का जो प्रयास कर रही है, वह व्यर्थ जा रहा है |

Monday, July 5, 2021

पाठ 5 मिठाईवाला

 

पाठ 5    मिठाईवाला

इस कहानी में  उस व्यक्ति का मर्मस्पर्शी वर्णन है,जो  खिलौनेवाला मुरलीवाले और मिठाईवाले  के रूप मे  बच्चों  के  बीच

     जाता है ओर उन्हे खुशियां देकर अपने दुख  दूर करने की कोशिश  करता है |

खिलौनेवाला और बच्चे खिलौनेवाला अपने खिलौने बेचने के लिए मादक और मधुर,स्वर से गाता –बच्चों को बहलानेवाला ,खिलौनेवाला’| उसके मुँह से अधूरा –सा वाक्य सुनते ही बच्चों मे हलचल मच जाती थी| बच्चे अपना खेलना भूलकर उसके पास चले आते थे| युवतियाँ अपने दरवाजे पर पड़ी चिक उठाकर छज्जों से नीचे झाँकने लगती थी| बच्चों से घिरा खिलौनेवाला अपने खिलौनों की पेटी खोलकर बच्चों के पास बैठ जाता है| खिलौने देखकर पुलकित बच्चे आपनी तोतली आवाज में उनका मूल्य पूछते है| वह बच्चों की छोटी-छोटी ऊँगलियों में दबे पैसे लेकर खिलौने दे देता था| बच्चे अपने खेल में मग्न हो जाते है और वह आगे बढ़ जाता|
          राय विजय बहादुर के बच्चे चुन्नु-मुन्नू भी खिलौने लाए थे और खुशी से अपने माँ-बाप  को दिखा रहे थे
| उनकी माँ रोहणी ने पूछा की कितने में लिया है? मुन्नु बोला “दो पैछे मे” रोहणी सोचने  लगी कि इतने सस्ते खिलौने कैसे दे गया? इस विषय में उसने ज़्यादा सोचना ठीक न समझा |

मुरलीवाला और बच्चे –छह मास बाद नगर में एक मुरलीवाले के आने की  चर्चा जोरों पर थी | लोग मानते थे कि वह मुरली बजाने में निपुण है वह मुरली बजाकर,गाना सुनाकर दो पैसे में मुरली बेचता है | इससे पता नहीं उसे क्या मिलता होगा | मुरलीवाला तीस- बतीस साल का गोरा ,दुबला पतला नवयुवक था जो बीकानेरी साफा बाँधता था | लोगो ने सोचा था कि यह वही खिलौनेवाला तो नहीं है | उसकी चर्चा तो  रोज होती है | नगर की प्रत्येक गली में उसका मादक स्वर सुनाई देता | रोहणी ने भी याद किया कि वह इसी प्रकार  गाकर खिलौने बेचा करता था | उसने अपने पति से चुन्नु-मुन्नु के लिए मुरली लेने  की बात कही |उसके पति ने मुरली वाले को आवाज दी |मुरलीवाले के साथ बच्चों का झुंड भी आ गया | बच्चे एक साथ कह उठे अम बी लेंदे मुरली और अम बी लेंदे मुरली |’ मुरलीवाले ने कहा कि मै सबको देकर जाऊँगा | विजय बाबू के दम पूछने पर उसने बताया कि है तो तीन पैसे की ,पर दो पैसे मे लगा लूँगा | विजय बाबू बोले तुम लोगों को झूठ बोलने की आदत होती है सभी को दो पैसे मे देते होंगे ,पर मुझ पर एहसान लाद रहे हो | मुरलीवाले ने बताया की हजारों मुरलियाँ एक साथ बनवाने पर यह दो पैसे की पड़ी हैं |विजय बाबू ने उससे दो मुरलियाँ लीं और अन्य बच्चों को मुरलियाँ देकर वह चला गया |एक बच्चे के पास पैसे न थे उसने उस बच्चे को अपनी माँ से पैसे लेने का उपाय बताकार  एक मुरली दे दी और चला गया |

     मुरलीवाला काफी दिन तक वापस नहीं आया ,पर अपनी सहृदयता और सस्ती  मुरलियाँ बेचने की अमिट छाप सबके दिलों पर छोड़ गया | उसकी स्नेह आवाज़ को रोहणी अक्सर याद किया करती थी |

मिठाई वाला और बच्चे- सर्दियों के दिन थे | इस बार वह आठ महीने के बाद आया था,  पर अपने नए रूप में –मिठाईवाला बनकर| उसके मुंह से ‘बच्चों को बहलाने वाला ,मिठाईवाला’ | यह सुनकर रोहिणी छत से नीचे आ गई और बच्चों की दादी  से चुन्नु-मुन्नू के लिए मिठाइयाँ खरीदने के लिए मिठाई वाले को बुलाने के लिए कहा |दादी ने उससे से एक पैसे की पच्चीस न देने पर बीस देने की बात कह कर उससे से चार पैसे की मिठाइयाँ देने के लिए कहा | रोहिणी ने उसके बारे में पूछने पर उसे बताया कि पहले भी खिलौने व मुरली बेचने आ चुका है | दादी व रोहिणी के बल देने पर पूछने पर उसने बताया कि कभी व नगर का धनी व्यापारी था | उसके बच्चे और सुंदर सी पत्नी थी | पर समय का खेल, अब उसके पास कुछ भी नहीं है |  इन बच्चों को जब उछलते –कूदते देखता है तो इनमें अपने बच्चों कि झलक पा लेता है |

   इसी समय चुन्नु-मुन्नू  बाहर से आकर मिठाइयाँ लेने कि अपनी माँ से जिद करते हैं | मिठाईवाले ने मिठाईयों  की एक थैली निकालकर चुन्नु-मुन्नू को दे दी और बच्चों को बहलानेवाला मिठाईवाला गाता हुआ आगे चला गया |

कठिन शब्दार्थ

मधुर :मीठा ; उपयुक्त: सही ; उद्यानों : बगीचों; पुलकित होना : प्रसन्न होना: झुंड : समूह ; अप्रतिभ : उदास ; दस्तूर : रिवाज ; स्नेहसिक्त: प्रेमभरी ; विस्मय: हैरान ; क्षीण : झट;  आजुनूलम्बित : घुटनों तक ; हर्ष : खुशी ; संशय : संदेह ; विस्मय : हैरान ; व्यर्थ : बेकार ; उत्सुक : जिज्ञासु ; अतिशय : अत्यधिक ; वैभव : ऐश्वर्य ; अठखेलियाँ : बच्चों के क्रियाकलाप

मुहावरे – प्राण होना – अत्यधिक प्रिय होना; कोलाहल मचा रहना : शोर शराबा बना रहना ; घुल-घुलकर मरना – दुख सहते हुए मरना |

प्रश्न ) मिठाईवाला अलग – अलग चीजे क्यों बेचता था और वह महीनों के बाद क्यों आता था ?

उत्तर ) मिठाईवाला अलग – अलग चीजे इसलिए  बेचता था, जिससे बच्चों और लोगों को उसकी वस्तुओं में आकर्षण बना रहे | और वह महीनों के बाद इसलिए आता था क्योंकि उसका अपना दूसरा व्यापार भी था | वह हर बार नई चीज़ बेचने के लिए लाता था  जिसे बनवाने में उसे समय लगता था |

प्रश्न ) मिठाई वाले में वे कौन से गुण थे, जिनकी वजह से बच्चे तो बच्चे ,बड़े भी उसकी ओर खिंचे चले आते थे ?

उत्तर ) वह अत्यंत मधुर, मादक स्वर में गाकर अपना समान बेचा करता था |

         2) वह अत्यंत विनम्र तथा मृदु भाषी था

         3) बच्चों पर गुस्सा नहीं करता था और पैसे न होने पर उनकी पसंद की वस्तुएँ दे दिया करता था |

वह हर बार नई-नई वस्तुएँ लेकर बेचा करता था |

प्रश्न ) खिलौने वाले के आने पर बच्चों की क्या प्रतिक्रिया  होती थी ?

उत्तर ) बच्चों में हलचल मच जाती  थी | वे अपने अपने खेल छोडकर घरों,गलियों,उद्यानों से  बाहर आ जाते थे |

    उसके पास आने की जल्दी में उन्हें अपनी गिरती टोपी ,पार्क,में छूटे जूते या कपड़े का जरा भी ध्यान नही रह जाता था |

प्रश्न ) रोहिणी को मुरली वाले के स्वर से खिलौने वाले  का स्मरण क्यों हो आया ?

उत्तर ) मुरलीवाला “बच्चों को बहलानेवाला , खिलोनेवाला “की तरह ही गाकर सामान बेच रहा था |

       उसका स्वर मुरलीवाले की तरह ही मादक और मधुर्व था |उसे मुरलीवाले की आवाज़ जानी पहचानी सी  लगी |

प्रश्न ) किसकी बात सुनकर मिठाईवाला भावुक हो गया था? उसने इन व्यवसायों को अपनाने का क्या कारण बताया?

उत्तर )दादी की बात सुनकर मिठाई वाला भावुक हो गया , उसे अपना बिता समय याद आया जब  वह नगर का प्रतिष्ठित व्यक्ति होता था | उसकी सुंदर सी पत्नी और दो छोटे छोटे बच्चे थे |समय  की गति के साथ वे अब नहीं रहे  इसलिए भावुक हो गया था | उसने इन व्यवसायों को अपनाने का  कारण बताया कि उसे इन बच्चों में अपने बच्चों की झलक मिलती थी उसे लगता था की ये खिलौने, मिठाइयाँ, मुरलियाँ सब अपने बच्चों को ही दे रहा हूँ |

प्रश्न) अब इस बार ये पैसे न लूँगा ‘- कहानी के अंत में मिठाईवाले ने ऐसा क्यों कहा ?

उत्तर ) उसने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि दादी के पूछने पर मिठाईवाला बहुत भावुक हो गया था |उसे अपने च्चोते-छोटे दोनों बच्चों कि याद हो आई थी |उसने समझ लिया होगा कि ये मिठाइयाँ चुन्नु-मुन्नु को नहीं ,बल्कि अपने बच्चों को दे रहा है |

भाषा की बात

प्रश्न)  मिठाईवाला                                            बोलनेवाली गुड़िया

·         ऊपर   वाला का प्रयोग है |

  क ) वाला से पहले आने वाले शब्द संज्ञा , सर्वनाम, विशेषण आदि में से क्या है ?

क)   ऊपर लिखे वाक्यांशों में इनका प्रयोग करे |

उत्तर ) क) वाला से पहले आने वाले शब्द मिठाई संज्ञा तथा  बोलनेवाली विशेषण है |

  ख ) ऊपर लिखे वाक्यांशों में उनका प्रयोग संज्ञा सूचक शब्द (कर्ता) बनाने के लिए किया गया है |

प्रश्न )  हाट – मेले , आदि आयोजनों में कौन –कौन सी चीजें आपको सबसे ज्यादा आकर्षित करती है ?  अब बताइये कि-उनको सजाने –बनाने में किसका हाथ होगा ? उन चहेरो  के बारे में लिखिए |

उत्तर ) हाट – मेले , आदि आयोजनों में खिलौनों, मिठाइयों ,तथा कपड़ों की दुकान पर सजी चीजें  सबसे   अधिक  आकर्षित करती है |इनको  सजाने ,बनाने में अनेक कारीगरों तथा मजदूरों का हाथ होता है, जो अथक परिश्रम से इन्हें सजाते –सँवारते है | लगातार परिश्रम से श्रमिक का बाहरी चहेरा सुंदर नहीं रह जाता है परंतु इनकी बनाई वस्तुएँ हमें ललचाने पर विवश कर देती है |

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