पाठ 12 इंद्रप्रस्थ
प्रश्न) पांडवों के जीवित बचने तथा स्वयंवर में द्रौपदी को
जीतने पर दुर्योधन की क्या प्रतिक्रिया हुई ?
उत्तर ) उनकी पांडवों के प्रति ईर्ष्या की आग ओर बलवती
हो गई | उसके मन में दबा वैर फिर से जाग गया क्योंकि एक तो पांडव अभी पहले से
अधिक शक्तिशाली हो गए थे और दूसरे दृष्टधुम्न और शिखंडी भी अब उनके साथी बन चुके
थे |
प्रश्न) कर्ण ने दुर्योधन को स्वयंवर से आने के बाद क्या
सलाह दी?
उत्तर ) अब एक साल बाहर रहने व दुनिया देख लेने के बाद
उन्हें काफी अनुभव हो गया है| आपस फूट डालकर
भी उनको हराना संभव नहीं है| राजा द्रुपद धन के लोभ में आने
वाले नहीं है| हमारे पास एक ही रास्ता है की पांडवों की ताकत
बढने से पहले ही उन पर हमला कर दिया जाए|
प्रश्न) कर्ण की बात सुनकर द्रोणाचार्य क्रोधित क्यों हो गए
?
उत्तर ) आचार्य द्रोण द्वारा धृतराष्ट्र को कौरवों की भलाई
के लिए दी जाने वाली शिक्षा भी बुरी सलाह लग रही थी | कर्ण को द्रोणाचार्य की नियत पर संदेह हो रहा था | वह दृतराष्ट्र को उनकी सलाह न मानने के लिए प्रेरित कर रहा था |,इसलिए कर्ण की बातें सुनकर द्रोणाचार्य क्रोधित हो गए |
प्रश्न) पितामह भीष्म ने पांडवों के जीवित रहने की खबर
सुनकर दुर्योधन को क्या सलाह दी?
उत्तर ) उसने कहा पांडवों के साथ संधि करके उन्हें आधा
राज्य दे दो |
प्रश्न) खांडवप्रस्थ के विषय में तुम क्या समझते हो? उसका नाम इंद्रप्रस्थ कैसे पड़ गया ?
उत्तर ) उस नगरी का नाम है ,जहां से पांडवों के पूर्वज पुरू नहुष,ययाति जैसे
प्रतापी राजाओं ने अपने राज्य पर शासन किया था| बीतते समय के
साथ-साथ खांडवप्रस्थ के भग्नावशेष ही रह गए और वह निर्जन वन में बदल गया | दृतराष्ट्र की सलाह पर जब पांडवों ने खांडवप्रस्थ में पुनः सुंदर भवनों
तथा अभेध दुर्गों से नए नगर का निर्माण कराया तो उसका नाम इंद्रप्रस्थ रखा|
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