पाठ 15 चौसर का खेल व द्रौपदी की व्यथा
प्रश्न) “चौसर का खेल सारे
अनर्थ की जड़ होता है “यह जानकर भी युधिष्ठिर ने चौसर खेलने का निर्णय क्यों लिया ?
उत्तर ) अनर्थ हो जाने की जानकारी होते हुए भी युधिष्ठर ने
चौसर खेलने का निर्णय लिया क्योंकि –
i)
राजवंशों की रीति के
अनुसार बुलावा मिलने पर उसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है|
ii)
युधिष्ठिर को डर था कि खेल में शामिल न होने को ही
धृतराष्ट्र अपना अपमान न समझ बैठें और यहीं लड़ाई का कारण न बन जाए |
iii)
युधिष्ठिर चौसर के
खेल के शौकीन थे, भले ही उन्हें अच्छी तरह खेलना न आता था |
प्रश्न) प्रातिकामी कौन था ? वह द्रौपदी के पास रनवास में क्यों गया ?
उत्तर ) प्रातिकामी दुर्योधन का सारथी था | युधिष्ठिर
जुए में द्रौपदी को दुर्योधन के हाथों हार
चुका थे| प्रातिकामी दुर्योधन के आदेशानुसार द्रौपदी को सभा
मंडप में ले जाने के लिए आया |उसने द्रौपदी से कहा “आप
दुर्योधन के अधीन हो गई है| राजाज्ञा के अनुसार अब आपको
दृतराष्ट्र के महल में दासी का काम करना है| मैं आपको ले
जाने के लिए आया हूँ |”
प्रश्न) युधिष्ठिर
के पुनः चौपड़ खेलने का क्या परिणाम रहा ?
उत्तर ) युधिष्ठिर के द्वारा पुनः चौपड़ खेलने का परिणाम यह
रहा कि वह पुनः हार गए | इसके परिणामस्वरूप पांडवों को बारह वर्ष का
वनवास तथा एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना था | यदि इस अवधि में
उनका पता चल जाए तो यह अवधि उन्हें पुनः वनवास तथा अज्ञातवास के रूप में बितानी थी|
Hlo
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