Tuesday, May 17, 2022

संस्कृति (भदंत आनंद कौसल्यायन ) कक्षा दसवीं

 

संस्कृति

(भदंत आनंद कौसल्यायन )

प्रश्न 1) लेखक की दृष्टि में सभ्यता और संस्कृति की सही समझ अब तक क्यों नहीं बन पाई है ?

उत्तर ) लेखक का मानना है कि हम अपनी रूढ़ियों से इस प्रकार बंधे होते है कि हर क्षण बदलते संसार के साथ चल नहीं पाते हैं | हम अपनी संकुचित सोच के कारण सभ्यता और संस्कृति के लोकल्याणकारी रूप को भुला देते हैं और अपने व्यक्तिगत, जातिगत हितों की रक्षा में लग जाते हैं | लेकिन सभ्यता व संस्कृति में तो मानवीय स्वर प्रमुख होता है |इसके अभाव में सभ्यता असभ्यता में व संस्कृति असंस्कृति में बदल जाती है |

प्रश्न 2) आग की खोज एक बहुत बड़ी खोज क्यों मानी जाती है ? इस खोज के पीछे रही प्रेरणा के मुख्य स्रोत क्या रहे होंगे ?

उत्तर ) आग की खोज एक बहुत बड़ी खोज इसलिए मानी जाती है क्योंकि आग से मनुष्य के अनेक कार्य सुगम हो जाते होंगे | आग से हम खाना बनाते हैं | आग से ऊर्जा पैदा करके अनेक मशीनों को चलाया जाता हैं | इसकी खोज के पीछे पेट भरने के लिए खाद्य सामग्री  पकाने की प्रेरणा ही मुख्य है | अंधेरे में प्रकाश करना, ठंड में गर्मी प्राप्त करना आदि आग की खोज के अन्य प्रेरणा स्रोत हैं |

प्रश्न 3) वास्तविक अर्थ में संस्कृत व्यक्ति किसे कहा जा सकता है ?

उत्तर ) जिसकी योग्यता बुद्धि विवेक प्रेरणा अथवा प्रवृति उसे किसी नए तथ्य का दर्शन कराती है और वह जनकल्याण के लिए नि: स्वार्थ भाव से कार्य करता है | संस्कृत व्यक्ति सदा अच्छा कार्य करता है | वह प्राणीमात्र के कल्याण की चिंता करता है | अपने कार्यों से किसी का अहित नहीं करता है | स्वयं कष्ट उठाकर दूसरों को सुख देता है |

प्रश्न 4) न्यूटन को संस्कृत मानव कहने के पीछे क्या तर्क दिए गए हैं ? न्यूटन द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों एवं ज्ञान की दूसरी बारीकियों को जानने वाले लोग भी न्यूटन की तरह संस्कृत नहीं कहला सकते, क्यों ?

उत्तर )  अपनी योग्यता स्वभाव एवं प्रेरणा से लोगों के कल्याण के लिए गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का    आविष्कार किया था | उसकी यह खोज मौलिक थी | इस खोज के पीछे उसका अपना कोई स्वार्थ नहीं था | उसने यह मानव कल्याण के लिए की थी | आज जो लोग न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत के अलावा भौतिक विज्ञान से जुड़ी उन अनेक बातों को जानते है जो न्यूटन को पता नहीं थी | फिर भी इन लोगों को न्यूटन के समान संस्कृत नहीं कहा जा सकता क्योंकि इन लोगों ने स्वयं कोई आविष्कार नहीं किया है | ये लोग अन्य व्यक्तियों द्वारा की गई खोजों से ज्ञान प्राप्त करते हैं | अत: ये  लोग न्यूटन की तरह संस्कृत व्यक्ति नहीं कहे जा सकते |   

प्रश्न 5) किन महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सुई-धागे  का आविष्कार हुआ होगा ?

उत्तर ) मानव ने सुई - धागे का आविष्कार कपड़े सीने, शीतोष्ण से बचने के लिए, वस्त्र बनाने आदि के लिए किया होगा | शरीर को सजाने के लिए बनाए जाने वाले वस्त्रों के लिए भी सुई –धागे का आविष्कार हुआ होगा | रज़ाई, गद्दे, टैंट, पर्दे आदि बनाने के लिए भी सुई-धागे का ही उपयोग होता है |

प्रश्न 6) “मानव संस्कृति एक अविभाज्य वस्तु है |” किन्हीं दो प्रसंगों का उललेख करें जब –

क)    मानव संस्कृति को विभाजित करने की चेष्टाएँ की गईं |

उत्तर ) मानव संस्कृति के नाम पर धर्म, मजहब के नाम पर एक-दूसरे से लड़ा दिया जाता है , जैसा कि ब्रिटिश सरकार ने हिन्दू – मुसलमानों को आपस में लड़ाकर हिंदुस्तान के दो टुकड़े हिंदुस्तान और पाकिस्तान कर दिए |

ख ) जब मानव संस्कृति ने अपने एक होने को प्रमाण दिया |

उत्तर )मानव संस्कृति में अपने एक होने का प्रमाण कोरोना काल में विभिन्न धर्मों के लोगों द्वारा आपसी मन-मुटाव भुलाकर एक- दूसरे की सहायता करके दिया  हैं | सिखों द्वारा बड़े लंगर का आयोजन करना, विभिन्न सुप्रसिद्ध अभिनेताओं द्वारा लोगों के बचाव के लिए बड़ी राशि का दान करना | उन्हें कोरोना से बचाव के लिए सुविधाएं प्रदान करवाना | परिजनों तक सुरूक्षित पहुँचाने का प्रबंध करना आदि हैं |

प्रश्न 7) आशय स्पष्ट कीजिए –

क ) मानव की जो योग्यता उससे आत्म- विनाश के साधनों का आविष्कार कराती है, हम उसे उसकी संस्कृति कहें या असंस्कृति ?

उत्तर ) लेखक का मानना है कि मनुष्य अपनी योग्यता और कुशलता के बल पर जिन विनाशकारी साधनों का आविष्कार करता है वह हमारी संस्कृति के अनुरूप नहीं है | विनाश करने वाले साधनों का आविष्कार करना तो असंस्कृति का प्रतीक है |

रचना और अभिव्यक्ति

प्रश्न 8) लेखक ने अपने दृष्टिकोण जे सभ्यता और संस्कृति की एक परिभाषा दी है | आप सभ्यता और संस्कृति के बारे में क्या सोचते हैं ? लिखिए |

उत्तर ) मेरे विचार में संस्कृति वह है जो श्रेष्ठ कर्म के रूप में व्यक्त होती है | यह मानवता के हित  के लिए किया गया कार्य होता है | ज्ञान व भाव हमारे कर्मों को श्रेष्ठ बनाते है, वहीं संस्कृति है | संस्कृति का कार्य ही हमें अच्छे कार्यों की तरफ ले जाता है | यह हमारे भौतिक जीवन को सुधारती है | और हमारी सभ्यता को विकसित करती करती है जो समाज जितना अधिक सुसंस्कृत होगा उसकी सभयता उतनी ही अधिक विकसित होगी |

अन्य प्रश्न

प्रश्न )  संस्कृत व्यक्ति की संतान (वंशज) के संबंध में लेखक का क्या  विचार है ?

उत्तर ) लेखक के अनुसार संस्कृत व्यक्ति किसी नई चीज़ की खोज करता है | यह वस्तु जब उसकी संतान को अनायास ही प्राप्त हो जाती है तो वह संस्कृत व्यक्ति नहीं बल्कि सभ्य व्यक्ति कहलाएंगा क्योंकि उस वस्तु की खोज उसने नहीं की है | खोज करने वाला व्यक्ति ही संस्कृत व्यक्ति है |

प्रश्न ) मनीषियों से मिलने वाला ज्ञान किसका परिचायक  है ?

उत्तर ) मनीषियों से मिलने वाला ज्ञान उनकी सहज संस्कृति की प्रवृति के कारण मिलता है | वे कभी भी निष्क्रिय नहीं बैठते है | नई से नई खोज में उनका मस्तिष्क सक्रिय रहता है | वे कभी संतुष्ट होकर नहीं बैठते हैं |

प्रश्न ) संस्कृति अविभाज्य कैसे है ? सिद्ध कीजिए |

उत्तर ) संस्कृति एक विचार है इसे जातिगत व धर्मगत आधारों पर नहीं बाँटा जा सकता | जिस व्यक्ति ने आग या सुई-धागे का आविष्कार किया, वह किसी एक जाति या धर्म का न होकर मानव मात्र के लिए है | इसलिए संस्कृति को नहीं बाँटा जा सकता |

प्रश्न ) सभ्यता या संस्कृति के विनाश का खतरा कब और कैसे होता है ?

उत्तर ) सभ्यता या संस्कृति के विनाश का खतरा तब  होता है जब किसी जाति अथवा देश पर अन्य लोगों की ओर से विनाशकारी आक्रमण होता है | हिटलर के आक्रमण करने के कारण मानव संस्कृति खतरे में पड़ी कही जाती थी | धर्म, संप्रदाय, वर्ण-व्यवस्था आदि के नाम पर होने वाले दंगों से भी सभ्यता और संस्कृति खतरें पद जाती है |

प्रश्न ) सभ्यता के अंतर्गत हम किस-किस को समाहित कर सकते है |

उत्तर ) हमारा खान–पान, पहनावा, यातायात के साधन, भौतिक सुख देने वाली सभी वस्तुएँ समाहित है  जिनका हम प्रयोग करते हैं |

प्रश्न ) संस्कृति पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?

उत्तर ) हमें बौद्धिक क्षमता व ज्ञान का प्रयोग मानव मात्र के लिए व उसकी भलाई के लिए करना चाहिए | विश्व में हम कर्मशील बने रहे | सभ्यता व संस्कृति के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें | ऐसा कोई काम न करें जिससे असंस्कृति तथा असभ्यता का प्रसार हो |

प्रश्न ) संस्कृति पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए  कि सिद्धार्थ ने गृह –त्याग किस ध्येय को ध्यान में रखकर किया ?

उत्तर ) संस्कृति हमेशा मानव के लिए हितकर व कल्याणकारी होती है | वह सदा सारे कल्याण की भावना को अपने भीतर समेट कर सभी को एक साथ जोड़ने की कोशिश करती है | सिद्धार्थ ने अपनी मुक्ति के लिए गृह-त्याग नहीं किया था बल्कि विश्व भर को मानवता का पाठ पढ़ाने के लिए किया था | उसने सभी को परस्पर जोड़ने का पाठ पढ़ाया था |

प्रश्न) कैसा व्यक्ति संस्कृत नहीं कहला सकता ?

उत्तर ) ऐसा व्यक्ति जो अपने पूर्वजों से प्राप्त हर आविष्कार का उपभोग कर अपना जीवन सुखी बनाए वह सभ्य तो है, लेकिन उसे संस्कृत नहीं कहा जा सकता | क्योंकि उसने अपने बल पर मानवता के लिए कुछ भी नया कार्य नहीं किया, नई खोज व नए तथ्य नहीं ढूँढे |

 

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