Sunday, May 29, 2022

इस जल प्रलय में लेखक - फनीश्वरनाथ रेणु पुस्तक – कृतिका कक्षा -9वीं

 

                           इस जल प्रलय में

                                                लेखक - फनीश्वरनाथ रेणु

                                                पुस्तक – कृतिका

                                                कक्षा -9वीं

 

प्रश्न 1) बाढ़ की खबर सुनकर लोग किस तरह की तैयारी करने लगे ?

उत्तर ) बाढ़ की खबर सुनकर लोग परेशान हो गए | वे जल्दी-जल्दी अपने सामान को सुरक्षित अन्य स्थान पर पहुँचने की तैयारी में जुट गए | लोग ईंधन, आलू, मोमबत्ती, दियासलाई, सिगरेट, पीने का पानी तथा कांपोज की गोलियों के साथ सामान बाँधने लगे |

प्रश्न 2) बाढ़ की सही जानकारी लेने व बाढ़ का सही रूप देखने के लिए लेखक क्यों उत्सुक था ?

उत्तर ) लेखक ने दस वर्ष की आयु से बाढ़-पीड़ित क्षेत्रों में कार्य किया था, लेकिन बाढ़ को सहन करने का यह उसका पहला अनुभव था | तेज़ गति से निचले पड़े स्थानों पर पानी किस प्रकार आगे बढ़कर लोगों को हैरान और परेशान करता है | इस दृश्य को लेखक स्वयं देखना चाहता था | दूसरे को मुसीबत में देख अन्य लोगों का उनके प्रति क्या व्यवहार होता है वह यह भी देखना चाहता था |

प्रश्न 3) सबकी जबान पर एक ही जिज्ञासा कि पानी कहाँ तक आ गया है ?- इस कथन से जनसमूह की कौन सी भावनाएँ व्यक्त होती हैं ?

उत्तर ) पटना में लगातार बारिश से बाढ़ आ गई | इससे सभी लोग भयभीत थे और जानना चाहते थे कि पानी उनके इलाके में कहाँ तक आ गया ? जिन इलाकों को वे सुरक्षित समझ रहे थे वे सुरक्षित है भी या नहीं | सभी में असुरक्षा की भावना घर कर गई | उत्सुकता, हैरानी तथा नया अनुभव प्राप्त करने की इच्छा जागृत हो गई |

प्रश्न 4) मृत्य का तरल दूत किसे कहा गया है और क्यों ?

उतर ) मृत्य का तरल दूत बाढ़ के पानी को कहा गया है | क्योंकि इसका गंदा पानी जान माल का बड़ा नुकसान करता है | सब जगह अफरा - तफरी मच जाती है | लोगों को इस पानी से बचाव के लिए बहुत से प्रयास करने पड़ते है | कुछ प्रयास सफल हो जाते है तो कुछ असफल होते है |

प्रश्न 5) आपदाओं से बचने के लिए अपनी तरफ से कुछ सुझास दीजिए |

            अथवा

बाढ़ की खबर सुनकर हमें आपदा के समय क्या करना चाहिए ?

उत्तर ) इससे निबटने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए |

i)                    लोगों को ईंधन, सब्जियाँ, मोमबत्ती, दियासलाई, राशन,पीने का पानी तथा कुछ आवश्यक दवाईयाँ घर में लाकर रख लेना चाहिए |

ii)                  बाढ़ के गंदे पानी के साथ कीड़े मकौड़े व जहरीले जानवर भी घर में आ जाते है | इसके लिए कीटनाशक रसायन, कछुआ छाप व गुड नाइट का प्रयोग करना चाहिए |

iii)                लोगों को जागरूक करें कि प्लास्टिक की थैलियों का प्रयोग न करें |

iv)                वर्षा के जल का संचयन एवं उचित प्रबंधन किया जाना चाहिए |

v)                   बाँध बनाकर बाढ़ के पानी को आगे बढ़ने से रोकना चाहिए |

प्रश्न 6) ईह ! जब दानापुर डूब रहा था तो पटनियाँ बाबू लोग उलटकर देखने भी नहीं गए...अब बूझो ! इस कथन के द्वारा लोगों की किस मानसिकता पर चोट की गई है ?

उत्तर ) पटना में बाढ़ आने पर वहाँ के लोग बड़ी जिज्ञासा से पानी कहाँ तक पहुँच गया देखने के लिए आए थे | लेकिन उसी भीड़ में से एक व्यक्ति ने उन पर कटाक्ष किया कि जब दानापुर डूब रहा था वहाँ पर कोई भी सहानुभूति प्रकट करने, व मदद करने के लिए नहीं आया | इससे पता चलता है कि वहाँ के लोग संकीर्ण सोच वाले, आत्म-केन्द्रित, स्वार्थी व संवेदनहीन है |

प्रश्न 7) खरीद – बिक्री बंद हो चुकने पर भी पान की बिक्री क्यों बढ़ गई थी ?

उत्तर ) लोग बाढ़ का हाल- चाल जानने व बाढ़ के पानी से संबन्धित तर्क - वितर्क करने तथा अपनी अपनी राय देने के लिए पान की दुकान पर इकठ्ठा होने लगे | इसलिए खरीद - बिक्री बंद हो चुकने पर भी पान की बिक्री बढ़ गई थी |

प्रश्न 8) जब लेखक को यह अहसास हुआ कि उसके इलाके में भी पानी घुसने की संभावना है तो उसने क्या-क्या प्रबंध किए |

उत्तर ) जब लेखक को यह अहसास हुआ कि उसके इलाके में भी पानी घुसने की संभावना है तो उसने अपनी पत्नी से कोयला , स्टोव, और किरोसिन के साथ-साथ गैस सिलिंडर को तैयार रखने के लिए कहने लगे | वह अपने घर में ईंधन, सब्जियाँ, मोमबत्ती, दियासलाई, राशन का समान ले आया | उसे मैगजीन पढ़ने का शौक था इसलिए वह हिन्दी, बांग्ला व अंग्रेजी की कई पत्रिकाएँ खरीद लाया |

प्रश्न 9) बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में कौन - कौन सी बीमारियों के फैलने की आशंका रहती थी ?

उत्तर ) चारों तरफ बाढ़ का पानी होने से लोग अपनी जरूरत की चीजें लेने के लिए इधर –उधर आते-जाते रहते है | बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में हैजा, अतिसार, पेचिश व बार- बार पानी लगने के कारण पकाही घाव आदि बीमारियाँ फैलने की आशंका रहती थी |

प्रश्न 10) नौजवान के पानी में कूदने पर उसका कुत्ता भी पानी में  कूद गया | दोनों ने किन भावनाओं के वशीभूत होकर ऐसा किया ?

उत्तर ) जब एक बंगाली डॉक्टर ने नाव में इलाज़ करवाने के लिए आए युवक को अपने कुत्ते के साथ बैठा देखा तो उसने कुत्ते को भगाने के लिए कहा | गुस्से में युवक नाव से नीचे कूद गया | यह देखकर उसका वफादार व स्वामीभक्त कुत्ता भी नाव से नीचे कूद गया | मालिक का उसके कुत्ते के साथ घर के सदस्य की तरह एक अनोखा रिश्ता था | दोनों एक दूसरे से भावनात्मक व मानसिक रूप से जुड़े होने के कारण ही उन्होंने ऐसा किया था |

प्रश्न 11) अच्छा है, कुछ भी नहीं | वह भी चोरी चली गई | अच्छा है, कुछ भी नहीं – मेरे पास |’ – मूवी कैमरा टेप्रीकॉर्डर आदि की तीव्र उत्कंठा होते हुए भी लेखक ने उपर्युक्त कथन क्यों कहा है ?

उत्तर ) क्योंकि बाढ़ का दृश्य अत्यंत भयानक और दुखद था । कॉलोनी के आस-पास का सारा भाग ही पानी में डूब गया था | लोग मदद के लिए चीख रहे थे | अगर लेखक के पास कैमरा होता  तो वह भले इस दृश्य को कैद कर लेता, कलम से उसे लिखने के लिए अच्छा विषय मिल जाता | लेकिन इससे लोगों का भला नहीं  होता | लेखक तो हमेशा की तरह बाढ़-पीड़ितों की मदद करना चाहता था | इसलिए उसने ऐसा कहा है अच्छा है, कुछ भी नहीं | वह भी चोरी चली गई | अच्छा है, कुछ भी नहीं –मेरे पास |

प्रश्न 12) आपने भी देखा होगा कि मीडिया द्वारा प्रस्तुत कि गई घटनाएँ कई समस्याएँ बन जाती हैं, ऐसी किसी घटना का उल्लेख कीजिए |

उत्तर ) कई बार मीडिया के द्वारा बिना पूरी तरह से जाँचे – परखे घटनाएँ प्रस्तुत कर दी जाती है | जो बड़ी समस्याएँ पैदा कर देती है | कुछ दिनों पहले अधिकतर समाचार चैनलों तथा समाचार पत्रों के द्वारा दिल्ली में किसी धार्मिक समुदाय पर दंगों के भड़काने का आरोप लगाया गया | जिससे वहाँ के निवासियों में धार्मिक आधार पर सांप्रदायिक दंगे भडकनें का डर बना रहा | इतना ही नहीं देश के विभिन्न हिस्सों मे भी आपसी भाई चारे को ठेस पहुँचने लगी | जो देश और समाज के लिए एक समस्या बन गयी | जबकि असलियत यह थी कि कुछ उपद्रवियों ने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए दंगे भढ़काने की कोशिश की थी जिसे पुलिस तथा प्रशासन के द्वारा समय रहते नियंत्रित कर लिया गया था | अत: इस प्रकार मीडिया द्वारा प्रस्तुत घटनाएँ एक समस्या बन जाती है |

प्रश्न 13) अपनी देखी – सुनी किसी आपदा का वर्णन कीजिए |

उत्तर ) 16 जून 2013  का दिन पूरे देश के लिए एक आपदा बन कर आया था | जिसे सोचकर आज भी मन सिहर उठता है | 15 जून 2013 को उतराखंड की केदारनाथ घाटी  में भारी बारिश हुई जो 16 जून को भी जारी रही जिससे के आस-पास के पहाड़ों पर बनी जिलों में भारी मात्रा में पानी भर गया और ग्लेशियर भी पिघलने लगे थे | केदारनाथ हिंदुओं का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है 16 जून को भी वहाँ तीर्थयात्रियों पुजारियों तथा श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी | मंदिर के आस पास होटलों धर्मशालाओं में लोग इस आपदा से अंजान होकर सो  रहे थे | अचानक केदारनाथ के आस-पास बादल फटने से पानी का सैलाब आया और सो रहे लोगों को को अपने साथ बहाकर ले गया | बड़े-बड़े भवन पानी के सैलाब के साथ बह गए | हर तरफ लोगों कि चीख पुकार सुनाई दे रही थी | हजारों लोग पानी के साथ बहकर चले गए | लोग अपने परिजनों और साथियों को खो चुके थे | सरकारी आकड़ों के अनुसार 4000 लोगों के मौत हुई लेकिन लगभग 12000 से अधिक लोग इस आपदा में मरने की संभावना जताई जाती है | आपदा के बाद स्थानीय लोगों तथा प्रशासन के द्वारा और अन्य सामाजिक संस्थाओं के द्वारा बचाव कार्य किए गए | यह आपदा इतनी भयानक थी कि जिसने इसे देखा या सुना वो केदारनाथ की इस घटना का नाम लेते ही एक बार डरने लगता हैं |

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