Saturday, September 11, 2021

चौसर का खेल व द्रौपदी की व्यथा

 

पाठ 15 चौसर का खेल व द्रौपदी की व्यथा

प्रश्न) चौसर का खेल सारे अनर्थ की जड़ होता है “यह जानकर भी युधिष्ठिर ने चौसर खेलने का निर्णय क्यों लिया ?

उत्तर ) अनर्थ हो जाने की जानकारी होते हुए भी युधिष्ठर ने चौसर खेलने का निर्णय लिया क्योंकि –

i)                     राजवंशों की रीति के अनुसार बुलावा मिलने पर उसे अस्वीकार नहीं किया जा सकता है|

ii)                   युधिष्ठिर  को डर था कि खेल में शामिल न होने को ही धृतराष्ट्र अपना अपमान न समझ बैठें और यहीं लड़ाई का कारण न बन जाए |

iii)                  युधिष्ठिर  चौसर  के खेल के शौकीन थे, भले ही उन्हें अच्छी तरह खेलना न आता था |

प्रश्न) प्रातिकामी कौन था ? वह द्रौपदी के पास रनवास में क्यों गया ?

उत्तर ) प्रातिकामी दुर्योधन का  सारथी था | युधिष्ठिर  जुए में द्रौपदी को दुर्योधन के हाथों हार चुका थे| प्रातिकामी दुर्योधन के आदेशानुसार द्रौपदी को सभा मंडप में ले जाने के लिए आया |उसने द्रौपदी से कहा “आप दुर्योधन के अधीन हो गई है| राजाज्ञा के अनुसार अब आपको दृतराष्ट्र के महल में दासी का काम करना है| मैं आपको ले जाने के लिए आया हूँ |”

प्रश्न) युधिष्ठिर  के पुनः चौपड़ खेलने का क्या परिणाम रहा ?

उत्तर ) युधिष्ठिर के द्वारा पुनः चौपड़ खेलने का परिणाम यह रहा कि वह पुनः हार गए | इसके परिणामस्वरूप पांडवों को बारह वर्ष का वनवास तथा एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना था | यदि इस अवधि में उनका पता चल जाए तो यह अवधि उन्हें पुनः वनवास तथा अज्ञातवास के रूप में बितानी थी|

1 comment:

समास

  समास विनय अपने माता और पिता के साथ देव के मंदिर गया | चार राहों के समूह से गुजरते   हुए   उसने घोड़े पर सवारी करते हुए छ्त्रपति शि...