पाठ 25 राजदूत संजय
प्रश्न ) ‘पांडव हमारी ग्यारह अक्षौहिणी सेना देखकर डर गए है’ – दुर्योधन के इस कथन से आप सहमत हैं या असहमत और क्यों ?
उत्तर
) दुर्योधन के इस कथन से मैं बिल्कुल असहमत
हूँ | दुर्योधन बड़बोला था | उसे अपनी शक्ति पर घमंड था | वह सोचता था कि पांडवों
को युद्ध में हराकर सारे राज्य का स्वामी बन जाएगा | वह तो हर
स्थिति मैं युद्ध चाहता था |
प्रश्न) वे कौन-से दो अवसर
थे जब भीष्म तथा अन्य कौरव अर्जुन का पराक्रम देख चुके थे ?
उत्तर
) पहला अवसर था जब दुर्योधन ने अर्जुन को बंदी बना लिया था, तब अर्जुन ने दुर्योधन को गन्धर्वों
से मुक्त कराया था |
दूसरी
बार तब जब विराट राज्य के उत्तरी छोर पर दुर्योधन ने सेना सहित आक्रमण कर दिया था| तब अर्जुन ने अकेले ही सारी सेना
को हराते हुए विजय प्राप्त की थी |
प्रश्न ) दुर्योधन का स्वभाव
जानते हुए भी श्री कृष्ण हस्तिनापुर क्यों जाना चाहते थे ?
उत्तर
) श्रीकृष्ण कौरवों और पांडवों दोनों के समान रूप से हितकारी थे | वे जानते थे कि युद्ध हुआ तो दोनों
ओर के अनेक वीर तथा बंधु- बांधव ही मारे जाएंगे | वे युद्ध की
संभावना टालकर सारे संसार का कल्याण चाहते थे, इसलिए श्रीकृष्ण
हस्तिनापुर जाना चाहते थे |
No comments:
Post a Comment