पाठ 28 पहला,दूसरा और तीसरा
दिन
प्रश्न ) ‘कौरवों –पांडवों के बीच हुए इस युद्ध में रिश्तों का कोई
महत्व नहीं रह गया था’ |तर्क सहित उत्तर
दीजिए|
उत्तर ) यह सच है कि इस युद्ध में रिश्तों का कोई महत्व नहीं
रह गया था | उसका कारण यह था कि भाई-भाई, पिता-पुत्र, मामा-भांजा, चाचा-भतीजे, गुरु-शिष्य
तथा सगे-संबंधी अपनों की जान लेने को उतारू थे | इस युद्ध में
कोई किसी की परवाह किए बिना एक दूसरे के प्राणों
के प्यासे बने बैठे थे |
प्रश्न ) दूसरे दिन की समाप्ति से पहले कौरव सेना के सेनानी पश्चिम
की ओर क्यों देखे जा रहे थे ?
उत्तर ) दूसरे दिन की समाप्ति से पहले कौरव-सेना के सेनानी
आसमान की ओर इसलिए देखे जा रहे थे कि कब सूर्यास्त हो और उन्हें युद्ध से छुटकारा मिले
| उस समय धर्मयुद्ध
का यह नियम था कि सूर्यास्त होते ही दोनों पक्षों के युद्ध बंद कर देंगे |
प्रश्न ) ‘दुर्योधन के सारथी ने जो सोचा था,
हुआ उससे उल्टा’ कैसे ?
दुर्योधन जब भीमसेन के बाण से चोट खाकर रथ पर गिरकर मूर्छित
हो गया तो उसके सारथी ने सोचा कि दुर्योधन को रण-क्षेत्र से बाहर ले जाए जिससे उसके
मूर्छित होने का किसी को पता न चले | जैसे ही वह रथ बाहर की ओर ले चला था कि सेना
का अनुशासन टूट गया और सैनिक में भगदड़ मच गई
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