Sunday, January 2, 2022

पहला,दूसरा और तीसरा दिन

 

पाठ 28 पहला,दूसरा और तीसरा दिन

प्रश्न ) कौरवों –पांडवों के बीच हुए इस युद्ध में रिश्तों का कोई महत्व नहीं रह गया था |तर्क सहित उत्तर दीजिए|

उत्तर ) यह सच है कि इस युद्ध में रिश्तों का कोई महत्व नहीं रह गया था | उसका कारण यह था कि भाई-भाई, पिता-पुत्र, मामा-भांजा, चाचा-भतीजे, गुरु-शिष्य तथा सगे-संबंधी अपनों की जान लेने को उतारू थे | इस युद्ध में  कोई किसी की परवाह किए बिना एक दूसरे के प्राणों के प्यासे बने बैठे थे |

प्रश्न ) दूसरे दिन की समाप्ति से पहले कौरव सेना के सेनानी पश्चिम की ओर क्यों देखे जा रहे थे ?

उत्तर ) दूसरे दिन की समाप्ति से पहले कौरव-सेना के सेनानी आसमान की ओर इसलिए देखे जा रहे थे कि कब सूर्यास्त हो और उन्हें युद्ध से छुटकारा मिले | उस समय धर्मयुद्ध का यह नियम था कि सूर्यास्त होते ही दोनों पक्षों के युद्ध बंद कर देंगे |

प्रश्न ) दुर्योधन के सारथी ने जो सोचा था, हुआ उससे उल्टा कैसे ?

दुर्योधन जब भीमसेन के बाण से चोट खाकर रथ पर गिरकर मूर्छित हो गया तो उसके सारथी ने सोचा कि दुर्योधन को रण-क्षेत्र से बाहर ले जाए जिससे उसके मूर्छित होने का किसी को पता न चले | जैसे ही वह रथ बाहर की ओर ले चला था कि सेना का अनुशासन टूट गया और सैनिक में  भगदड़ मच गई |

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