Monday, July 19, 2021

पाठ -10 पांडवों की रक्षा

 

पाठ -10

पांडवों की रक्षा

प्रश्न 1 विदुर ने वारणावत के लिए निकलने से पहले युधिष्ठिर को क्या समझाया ?

उत्तर – दुर्योधन के षड्यंत्र और उससे बचने का उपाय विदुर ने युधिष्ठिर को इस तरह गूढ भाषा में सीखा दिया कि कोई समझ न पाए |

प्रश्न 2 युधिष्ठिर ने ध्यान से देखने पर घर के बारे में क्या भेद समझा ?

उत्तर – उसे पता लगा कि यह घर जल्दी आग पकड़ने वाली चीजों से बना है पर साथ ही इस भेद को किसी को पत्ता न लगने के लिए कहा |ताकि मौका देखकर वह अपने भाइयों के साथ चुपचाप यहाँ से निकल सके |

प्रश्न 3 विदुर द्वारा भेजे गए दूत ने पांडवो से क्या कहा ?

उत्तर – उसने कहा की आप लोगों की भलाई के लिए हस्तिनापुर से रवाना होते समय विदुर ने युद्धिष्ठिर से सांकेतिक भाषा में जो कुछ कहा था , वह बात मै जनता हूँ |यही मेरे सच्चे मित्र होने की पहचान है |

प्रश्न 4 भीम पांडव लाख के घर से कैसे बचकर भाग निकले ?

उत्तर – माता  कुंती ने एक दिन बड़े भोज़न का प्रबध किया जिसमे नगर के सभी लोग भोजन करने आए |जब खूब खा –पीकर भवन के सभी कर्मचारी गहरी नींद में सो गए तब आधी रात के समय भीमसेन ने घर में आग लगा दी |पुरोचन भी उस आग में जलकर मर गया |भीम आदि पांडव बचकर भाग निकले |

प्रश्न 5 भीम ने घने जंगल में किस तरह अपनी माता व भाइयो को रास्ता पार कराया ?

उत्तर - उसने माता को अपने कंधे पर बैठा लिया | नकुल व सहदेव को अपनी कमर पर ले लिया| युधिष्ठिर व अर्जुन को दोनों हाथों से पकड़ लिया और घना जंगल का रास्ता पार किया |

प्रश्न 6 एकचक्रा नगरी में पांडव किस तरह अपने भोजन की व्यवस्था करते थे ?

उत्तर - वह वहाँ भिक्षा माँगकर लाते तथा एक हिस्सा भीम को देकर बाकी हिस्सा कुंती चारों भाइयो में व स्वयं खाकर गुजारा करती थी |

प्रश्न 7 एकचक्रा नगरी में ब्राह्मण के घर में क्या संकट आया ? 

उत्तर – एकचक्रा नगरी के पास रहने वाले राक्षस बकासुर के अनुसार आज ब्राह्मण के घर के किसी सदस्य को उसका भोजन बनने का नंबर था | इसलिए ब्राह्मण के घर यह विवाद हो रहा था कि कौन उसका भोजन बनने के लिय राक्षस के पास जाएगा |

प्रश्न 8 माता कुंती ने ब्राह्मण की किस प्रकार सहायता की |

 उत्तर – उसने भीमसेन को राक्षस का भोजन बनने के लिए तैयार किया | भीमसेन को जब बकासुर ने भोजन करते हुए देखा तो उसका चेहरा गुस्से से एकदम लाल हो गया |उसने भीमसेन पर बड़ा पेड़ उखाड़कर मारा जिसे भीमसेन ने बाएँ हाथ से रोक लिया |तब दोनों में भयानक मुठभेड़ हुई| आखिर में भीमसेन ने उसे मुंह के बल गिरा दिया और उसकी पीठ पर घुटनों की मार देकर उसकी रीढ़ तोड़ डाली |उसके प्राण पखेरू उड़ गए |     

 

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