Sunday, July 18, 2021

पाठ -13 मानवीय करुणा की दिव्य चमक सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

 

पाठ -13   मानवीय करुणा की दिव्य चमक

              सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

प्रश्न) फादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी?

उत्तर ) फादर परिमल गोष्ठियों में सबसे बड़े माने जाते थे|  वे सबके साथ पारिवारिक संबंध अथवा मेलजोल बनाकर रखते थे| इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात कि वे सबके घरों में होने वाले विभिन्न उत्सवों में जाया करते थे | हर व्यक्ति के हृदय में स्नेह था| इसलिए सबको अपनी उपस्थिति देवदार के वृक्ष के समान अनुभव होती थी|

प्रश्न) फादर बुल्के भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग हैं,किस आधार पर ऐसा कहा गया है?

उत्तर ) लेखक ने फादर बुल्के भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग स्वीकार किया है | वे बेल्जियम के रहने वाले थे| भारत आकर उन्होने भारतीय संस्कृति को गहराई से समझा व हिन्दी भाषा को पढ़ना व लिखना सीखा | रामायण विषय को लेकर शोध प्रबंध किया | इससे उनका भारतीय संस्कृति से अधिक लगाव का पता चलता है|

प्रश्न) पाठ में आए उन प्रसंगों  का  उल्लेख कीजिए जिनसे फादर बुल्के का हिन्दी प्रेम प्रकट होता है?

उत्तर) फादर ने मातरलिंक द्वारा रचित सुप्रसिद्ध नाटक ब्लू बर्ड का नीलपंछी के नाम से हिन्दी अनुवाद किया | उन्होंने अंग्रेजी हिन्दी कोश का निर्माण किया व धार्मिक ग्रंथ बाइबल का हिन्दी अनुवाद किया | वे सदा हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलवाने की चिंता में रहते थे| इसके लिए उन्होंने अनेक प्रयास किए व अकाट्य तर्क भी प्रस्तुत किए | उन्हें उन हिन्दी भाषी लोगों पर झुंझलाहट होती थी जो हिन्दी जानते हुए भी हिन्दी का प्रयोग नहीं करते थे|

प्रश्न) लेखक ने फादर को मानवीय करुणा की दिव्य चमक क्यों कहा?

उत्तर ) लेखक कामिल बुलके अपने हृदय में दीन-दुखियों के प्रति करुणा भाव रखते थे | वे एक बार जिससे रिश्ता बना लेते थे उसे जीवनभर निभाते थे | उनके संपर्क जो भी आता था उसे असीम शांति की अनुभूति होती थी| इसी कारण लेखक ने उन्हें मानवीय करुणा की दिव्य चमक कहा है जो उचित प्रतीत होती थी|

प्रश्न) फादर बुल्के ने सन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नई छवि प्रस्तुत की है,कैसे?

उत्तर ) परंपरागत सन्यासी समाज से अपना नाता तोड़ लेते थे | वे किसी के सुख-दु:ख में सम्मिलित नहीं होते है| वे  हमेशा अपनी भक्ति में लीन रहते है| किन्तु फादर बुल्के की छवि अलग थी वे समाज में रहते थे | उन्हें भारत में रहते  हुए भी अपने परिवार वालों की चिंता रहती थी| वे उन्हें हमेशा  पत्र लिखते थे | वे जब भी दिल्ली आते तो लेखक से जरूर मिलते थे |इस प्रकार  फादर बुल्के ने सन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नई छवि प्रस्तुत की है

प्रश्न) 7 आशय स्पष्ट कीजिए|

क)    नाम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है|

ख)   फादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा  है|

उत्तर) क) फादर कामिल बुल्के की मृत्यु पर उनके परिचित, मित्र  और साहित्यिक मित्र इतनी अधिक संख्या में थे कि उनको गिनना कठिन था अर्थात बहुत लोग थे| इसलिए रोने वालों के लिए लिखना स्याही खर्च  करने के समान है|

क)    उत्तर) ख) जिस प्रकार उदास शांत संगीत को सुनकर व्यक्ति तन्हाइयों में डूब जाता है,उसी प्रकार फादर को याद करके, उनके साथ बिताए गए सुखद क्षण और उनके वात्सल्य भाव को याद करके मन में एक शांति पैदा होती है कहना उचित है कि फादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा  है|

प्रश्न) आपके विचार से बुल्के ने भारत आने का मन क्यों बनाया होगा?

उत्तर) फादर कामिल बुल्के के मन में हिन्दी साहित्य, हिन्दी भाषा की जानकारी प्राप्त करने की इच्छा थी| फादर के मन में शायद भारत के संतों, ऋषियों तथा आध्यात्मिक पुरुषों  का आकर्षण भी रहा होगा साथ ही वे भारत तथा भारतीय संस्कृति के प्रति भी आकर्षित थे इसलिए वे भारत आना चाहते थे|

प्रश्न) बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि – रेम्सचैंपल| इस पंक्ति में फादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएं अभिव्यक्त होती है?आप अपनी जन्मभूमि के बारे में क्या सोचते हैं?

उत्तर) फादर कामिल बुल्के की जन्मभूमि रेम्सचैंपल थी| फादर बुल्के के इस कथन से यह स्पष्ट है कि उन्हें अपनी जन्मभूमि से बहुत प्रेम था, वहाँ उनकी माँ तथा परिवार के अन्य लोग रहते थे| मनुष्य कहीं भी रहे परंतु अपनी जन्मभूमि कि स्मृतियाँ हमेशा उसके साथ रहती है, हमारे लिए भी हमारी जन्मभूमि अनमोल है | हमें अपनी जन्मभूमि की  सभी वस्तुओं से प्रेम है| | यहीं हमारा पालन-पोषण हुआ | अत: हमें अपनी मातृभूमि पर गर्व है | हम चाहें जहां भी रहे परंतु ऐसा कोई भी कार्य नही करेंगे जिससे हमारी जन्मभूमि को अपमानित होना पड़े |

प्रश्न) निम्नलिखित वाक्यों में समुच्चयबोधक छांटकर अलग लिखिए |

क)    तब भी जब वह इलाहाबाद में थे और तब भी जब वह दिल्ली आते थे|

ख)   माँ ने बचपन में ही घोषित कर दिया था कि लड़का हाथ से गया |

ग)     वे रिश्ता बनाते थे तो तोड़ते नहीं थे|

घ)     उनके मुख से सांत्वना के जादू भरे शब्द सुनना एक ऐसी रोशनी से भर भर देता था कि लड़का हाथ से गया |

ङ)     पिता और भाइयों के लिए बहुत लगाव मन में नहीं था लेकिन वो स्मृति में अक्सर डूब जाते|

उत्तर) क) और ख) कि ग) तो घ) जो ड़) लेकिन

 

 

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