पाठ
8
द्रोणाचार्य
प्रश्न 1 द्रोणाचार्य कौन थे ?
उत्तर - ये ऋर्षि भरद्वाज के पुत्र थे| बचपन में राजा द्रुपद से एक ही आश्रम में पढ़ने के करण गहरी दोस्ती हो गई थी |ये कौरव –पांडवो के गुरु थे |इनके पुत्र का नाम अश्वत्थामा था |
प्रश्न 2 परशुराम जी से गुरु द्रोण ने क्या
प्रार्थना की ?
उत्तर - द्रोण ने उनसे सारे अस्त्रों के
प्रयोग तथा रहस्य सीखने की प्रार्थना की |
प्रश्न 3 पांचाल नरेश द्रुपद ने द्रोणाचार्य जी के
साथ कैसे व्यवहार किया ?
उत्तर- उन्होने राज्य के मद में द्रोण को बड़ा भला
बुरा कहा |उन्होने कहा कि दरिद्र की धनी के साथ ,मूर्ख की विद्वान के साथ और कायर की वीर के साथ मित्रता कैसे हो सकती है ?
प्रश्न 4 कुएँ में पड़ी गेंद को द्रोणाचार्य जी ने
कैसे निकाला ?
उत्तर – द्रोणाचार्य ने पास में पड़ी सींके उठाकर एक
दूसरे पर डालते रहें |सींके एक दूसरे के सिरे से चिपकती
गई |जब आखिरी सींके का सिरा कुएँ के बाहर तक पहुँच गया तो
द्रोणाचार्य ने उसे पकड़कर खींच लिया और गेंद निकाल गई |
प्रश्न 5 द्रोणाचार्य ने पांचाल नरेश द्रुपद से
अपने अपमान का बदला किस प्रकार लिया ?
उत्तर – जब कौरव और पांडवों की शिक्षा पूरी ही गई
तब गुरु द्रोण ने गुरु –दक्षिणा के रुप में अर्जुन ने पांचाल नरेश द्रुपद को हराकर उसे गुरु के सामने खड़ा किया| तब गुरु ने द्रुपद को उससे मित्रता रखने के लिए आधा राज्य लौटा दिया
क्योंकि कभी द्रुपद ने गुरु द्रोण को कहा था कि मित्रता बराबर वाला में ही होती है
|इस तरह अपने अपमान का बदला लिया |
प्रश्न 6 द्रुपद ने अपने अपमान का बदला लेने के लिए
क्या किया ?
उत्तर- उसने कई कठोर व्रत किए जिससे उसे एक ऐसा
पुत्र हो जो द्रोण को मार सके और साथ ही एक ऐसी कन्या हो ,जो अर्जुन को ब्याही जा सके |
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