पाठ 9
लाख का
घर
प्रश्न) युधिष्ठिर के राजा बनने के संबंध में
पुरवासियों की क्या राय थी ?
उत्तर ) वे कहते थे ,धृतराष्ट
तो जन्म से ही अंधे थे ,इस कारण उनके छोटे भाई पांडु ही सिंहासन पर बैठे थे | महाराज पांडु की अकाल मृत्यु हो जाने के कारण धृतराष्ट ने राज काज सँभाला
था |अब युधिष्ठिर के
बड़े हो जाने पर भीष्म का कर्तव्य है कि वह राज्य का भार
युधिष्ठिर को दिला दे |
प्रश्न 2 दुर्योधन ने पांडवो को वारणावत भेजने के
लिए क्या दलील दी ?
उत्तर – उसने कहा पिता जी जन्म से दिखाई न देने के कारण आप बड़े होते हुए भी
राज्य से वंचित ही रहे |राज सत्ता आपके छोटे भाई के हाथ में
चली गई | अंत:आप किसी तरह पांडवों को समझाकर वारणावत भेज
दीजिए| जब नगर और राज्य पर हमारा शासन पक्का हो जाएगा तब
पांडव बड़ी खुशी से लौट सकते है |
प्रश्न 3 दुर्योधन के पृष्ठ –पोषकों ने वारणावत के
संबंध में पांडवों से क्या कहा ?
उत्तर – उन्होंने कहा वहाँ एक भारी मेला होने वाला
है ,जिसकी शोभा देखते ही बनती है उनकी बाते सुन सुनकर पांडवों ने स्वयं
धृतराष्ट से वहाँ जाने कि अनुमति मांगी |
प्रश्न 4 मंत्री पुरोचन ने वारणावत जाकर क्या किया ?
उत्तर उसने पांडवों से पूर्व जाकर उनके ठहरने के
लिए सन ,घी ,मोम ,तेल ,लाख,चरबी आदि जल्दी आग पकड़ने वाली चीजों को मिट्टी
मिलकर एक सुन्दर भवन बनवाया |
प्रश्न 5 दुर्योधन की क्या योजना थी ?
उत्तर उसकी योजना थी की कुछ दिनों तक पांडवों को
लाख के भवन में आराम से रहने दिया जाए और पूर्ण रूप से नि:शंक हो जाए तब रात में
भवन में आग लगा दी जाएगी, जिसमें पांडवों तो जलकर भस्म हो
जाए और कौरव को कोई दोष भी न लगेगा |
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